महासमुंद में पंचायत कार्यों पर सवाल..! ‘पलक बारदाना’ के संचालक अतुल अग्रवाल से जुड़े करीब आधा करोड़ के कार्य जांच के घेरे में
खट्टा के कथित ₹2 लाख ‘कट’ से लेकर ₹50 हजार के पोल बिल तक उठे सवाल; सीसी रोड, हाईमास्ट लाइट और पानी टैंकर के कार्यों की सूक्ष्म जांच की मांग
विशेष रिपोर्ट | प्रधान संपादक मयंक गुप्ता / 05 अक्टूबर 2026/ दिन सोमवार
महासमुंद। महासमुंद जनपद पंचायत क्षेत्र में विकास कार्यों के नाम पर हुए भुगतान और बिल-वाउचर को लेकर सवाल लगातार गहराते जा रहे हैं। अब पलक बारदाना फर्म के संचालक अतुल अग्रवाल से जुड़े विभिन्न पंचायतों के कार्यों की सूक्ष्मता से जांच कराने की मांग उठने लगी है। उपलब्ध शिकायतों और सामने आए दस्तावेजों के आधार पर करीब आधा करोड़ रुपये के कार्यों को जांच के दायरे में लाने की मांग की जा रही है।
इन कार्यों में सीसी रोड निर्माण, हाईमास्ट लाइट, पानी टैंकर सहित अन्य पंचायत स्तरीय कार्य शामिल बताए जा रहे हैं। सवाल यह है कि संबंधित कार्य वास्तव में निर्धारित मापदंडों के अनुरूप हुए या नहीं, सामग्री की वास्तविक आपूर्ति हुई या नहीं और भुगतान से जुड़े बिल-वाउचर तथा फर्म के दस्तावेजों में सब कुछ नियमानुसार है या नहीं।
₹50 हजार के एक पोल बिल ने बढ़ाए सवाल
मामले में सामने आए एक टैक्स इनवॉइस में पलक बारदाना, डुमरतराई रायपुर के नाम से बिल जारी होना बताया गया है। बिल में ग्राम पंचायत मरौद, जिला महासमुंद को खरीदार दर्शाया गया है।
इनवॉइस नंबर 27, दिनांक 06 जून 2026 में 9 मीटर के एक पोल की मूल कीमत ₹42,373 दर्शाई गई है। 9 प्रतिशत CGST और 9 प्रतिशत SGST के बाद कुल राशि ₹50,000 बताई गई है।
अब जांच का विषय यह है कि—
क्या पोल वास्तव में पंचायत को सप्लाई हुआ..?
क्या स्टॉक रजिस्टर में इसकी एंट्री है..?
क्या पोल मौके पर स्थापित है..?
खरीद दर बाजार मूल्य के अनुरूप थी या नहीं..?
संबंधित पंचायत में तकनीकी स्वीकृति और माप पुस्तिका उपलब्ध है या नहीं..?
भुगतान किस खाते में और किस प्रक्रिया से किया गया..?
बिल पर अतुल अग्रवाल के हस्ताक्षर से भी उठे सवाल
सामने आए दस्तावेज में “For Palak Bardana” के स्थान पर अतुल अग्रवाल के हस्ताक्षर दिखाई देने की बात सामने आई है। ऐसे में यह जांच जरूरी हो जाती है कि संबंधित फर्म में उनकी आधिकारिक भूमिका क्या है और पंचायतों से होने वाले लेन-देन में उनकी भूमिका किस स्तर तक रही है।
हालांकि, केवल किसी बिल पर हस्ताक्षर होना अपने आप में वित्तीय अनियमितता सिद्ध नहीं करता। इसकी पुष्टि के लिए फर्म के GST रिकॉर्ड, बैंक लेन-देन, खरीद-बिक्री दस्तावेज, पंचायत भुगतान रिकॉर्ड और अधिकृत हस्ताक्षर संबंधी दस्तावेजों की जांच आवश्यक होगी।
खट्टा पंचायत के कथित ₹2 लाख ‘कट’ ने बढ़ाई हलचल
ग्राम पंचायत खट्टा के सचिव द्वारिका निषाद की शिकायत में निर्माण कार्य के भुगतान को लेकर दबाव बनाए जाने और कथित रूप से ₹2 लाख के लेन-देन की बातचीत का दावा किया गया है।
शिकायत में रामस्वरूप दीवान और ठेकेदार अतुल अग्रवाल का नाम सामने आने की बात कही गई है। सचिव पक्ष का आरोप है कि अधूरे कार्य के बावजूद भुगतान के लिए दबाव बनाया गया।
इन आरोपों की वास्तविकता का निर्धारण केवल शिकायत के आधार पर नहीं किया जा सकता। यदि कथित बातचीत का मूल ऑडियो उपलब्ध है तो उसकी फॉरेंसिक जांच, कॉल डिटेल और संबंधित वित्तीय लेन-देन की जांच से ही आरोपों की पुष्टि या खंडन संभव होगा।
सचिव संघ ने भी खोला मोर्चा
मामले को लेकर सचिव संघ महासमुंद की ब्लॉक इकाई ने 27 सितंबर 2026 को कोडार बांध गार्डन में बैठक आयोजित की। संघ ने पंचायत सचिव द्वारिका निषाद के विरुद्ध की गई शिकायत और कथित राजनीतिक दबाव को लेकर आपत्ति दर्ज कराते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।
संघ का कहना है कि यदि किसी सचिव पर नियम विरुद्ध तरीके से दबाव बनाया गया है अथवा धमकी या गलत शिकायत के माध्यम से दबाव बनाने का प्रयास हुआ है, तो इसकी भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
अब सवाल सिर्फ खट्टा का नहीं
सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या मामला केवल खट्टा पंचायत तक सीमित है या महासमुंद जनपद पंचायत क्षेत्र की अन्य पंचायतों में भी अतुल अग्रवाल से जुड़े कार्यों और भुगतान की जांच की आवश्यकता है?
बताया जा रहा है कि करीब आधा करोड़ रुपये के विभिन्न कार्यों में सीसी रोड निर्माण, हाईमास्ट लाइट, पानी टैंकर तथा अन्य विकास कार्य शामिल हैं। इन सभी कार्यों का पंचायतवार रिकॉर्ड निकालकर भौतिक सत्यापन किए जाने की मांग उठ रही है।
जांच में इन दस्तावेजों का मिलान जरूरी
वर्क ऑर्डर | तकनीकी स्वीकृति | प्रशासकीय स्वीकृति | माप पुस्तिका | बिल-वाउचर | GST इनवॉइस | स्टॉक रजिस्टर | कार्य पूर्णता प्रमाण-पत्र | भुगतान आदेश | बैंक रिकॉर्ड | फर्म के GST दस्तावेज
इन दस्तावेजों का आपस में मिलान और मौके पर हुए कार्य का भौतिक सत्यापन ही यह स्पष्ट कर सकता है कि भुगतान के बदले वास्तव में कितना काम हुआ और सामग्री की आपूर्ति किस स्तर पर हुई।
प्रशासन के सामने सबसे बड़ा सवाल
अब जिला प्रशासन और जिला पंचायत के सामने सवाल यह है कि अतुल अग्रवाल की फर्म से जुड़े महासमुंद जनपद पंचायत क्षेत्र के विभिन्न पंचायतों के कार्यों की पंचायतवार स्वतंत्र जांच और वित्तीय ऑडिट कब होगी..?
यदि जांच में किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता, फर्जी बिलिंग, सामग्री की कमी, नियम विरुद्ध भुगतान या सरकारी राशि के दुरुपयोग की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार लोगों पर नियमानुसार कार्रवाई का रास्ता साफ होगा।
वहीं, यदि आरोप जांच में निराधार पाए जाते हैं तो संबंधित फर्म और व्यक्तियों को भी अपनी स्थिति स्पष्ट करने का पूरा अधिकार है।
फिलहाल खट्टा पंचायत की शिकायत और ₹50 हजार के पोल बिल से उठे सवालों का दायरा अब महासमुंद जनपद पंचायत क्षेत्र में अतुल अग्रवाल से जुड़े अन्य कार्यों तक पहुंचता दिखाई दे रहा है। ऐसे में करीब आधा करोड़ रुपये के बताए जा रहे कार्यों की निष्पक्ष, दस्तावेजी और भौतिक जांच से ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकेगी।
