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महासमुंद में प्रशासनिक लाचारी..! जांच रिपोर्ट और दर्जनों ग्रामीणों की गवाही के बाद भी जिला CEO की ‘रहस्यमयी चुप्पी’ — क्या भ्रष्टाचारियों को मिल रहा है संरक्षण..?

महासमुंद में प्रशासनिक लाचारी..! जांच रिपोर्ट और दर्जनों ग्रामीणों की गवाही के बाद भी जिला CEO की ‘रहस्यमयी चुप्पी’ — क्या भ्रष्टाचारियों को मिल रहा है संरक्षण..?

रिपोर्टर मयंक गुप्ता/दिन गुरुवार/27 अगस्त 2026
​महासमुंद। छत्तीसगढ़ की पंचायती राज व्यवस्था में अनुशासन और पारदर्शिता बनाए रखने के दावे कागजों तक ही सीमित नजर आ रहे हैं। महासमुंद जिले के ग्राम पंचायत खैरा में पदस्थ पंचायत सचिव श्री मोती मेहरा (मोतीलाल मेहरा) पर शासकीय कर्तव्यों की घोर उपेक्षा, पद के दुरुपयोग, अधिकारों के अतिक्रमण और शासन के स्पष्ट निर्देशों की धज्जियां उड़ाने के गंभीर आरोप लगे हैं। मामले में जांच टीम गठित हुई, दर्जनों ग्रामीणों ने गवाही दी और साक्ष्य भी प्रस्तुत किए गए, लेकिन आज पर्यन्त जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) द्वारा कार्रवाई के नाम पर केवल ‘शून्य’ हासिल हुआ है। प्रशासन की इस रहस्यमयी चुप्पी ने पूरी व्यवस्था पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।

क्या है पूरा मामला..?
(24 जून 2026 की घटना)

​दस्तावेजों और शिकायत के अनुसार, 24 जून 2026 को महासमुंद जिले की सभी पंचायतों में ‘प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण विकास भवन’ (संचालक के पत्र क्रमांक GENCOR/13259/2026-SECTION/(PMAY-G)) के तहत अति-महत्वपूर्ण ग्राम सभा की बैठकें आहूत की गई थीं। नियमतः सचिव मोती मेहरा को अपनी मूल पदस्थापना ग्राम पंचायत खैरा में उपस्थित रहकर ग्राम सभा संपन्न करानी थी।
​किंतु आरोप है कि सचिव मोती मेहरा ने शासन के आदेशों को ठेंगा दिखाते हुए अपनी मूल पंचायत खैरा की बैठक का बहिष्कार किया और अपने कार्यक्षेत्र से बाहर ग्राम पंचायत खट्टी पहुंच गए।

पति-पत्नी के पद का ‘गलत फायदा’ और नियमों का खुला उल्लंघन

​ग्राम पंचायत खट्टी में मोती मेहरा की धर्मपत्नी श्रीमती अनिता मेहरा सरपंच पद पर पदस्थ हैं। आरोप है कि सचिव मोती मेहरा ने वहां अपनी पत्नी के साथ मिलकर पंचायत की आधिकारिक कार्यवाही में सीधा हस्तक्षेप किया, ग्रामीणों से विवाद किया और अभद्र व्यवहार तक किया।
​यह कृत्य छत्तीसगढ़ शासन, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के स्पष्ट आदेश (पत्र क्रमांक पंचा./विविध/2010/1009 दिनांक 26.05.2010) का सीधा और प्रत्यक्ष उल्लंघन है। इस आदेश के तहत महिला जनप्रतिनिधियों (सरपंच/पंच) के शासकीय कार्यों में उनके पति या रिश्तेदारों के किसी भी प्रकार के हस्तक्षेप पर पूर्णतः प्रतिबंध लगाया गया है। इसके बावजूद एक जिम्मेदार लोक सेवक द्वारा दूसरी पंचायत में जाकर मनमानी करना अनुशासनहीनता की पराकाष्ठा को दर्शाता है।

6 अगस्त को हुई जांच, दर्जनों ग्रामीणों ने दी गवाही

​मामले की गंभीरता को देखते हुए पत्रकार एवं शिकायतकर्ता मयंक गुप्ता (प्रधान संपादक, बेबाक बयान) ने 15 जुलाई 2026 को जिला पंचायत CEO के समक्ष विस्तृत शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद जनपद पंचायत महासमुंद द्वारा जांच टीम गठित की गई (आदेश क्रमांक पंचा./शिक्षा/2026/1594)।

​06 अगस्त 2026 को ग्राम पंचायत खट्टी के पंचायत भवन में जांच प्रक्रिया संपन्न हुई। जांच अधिकारी (सहायक आंतरिक लेखा परीक्षण एवं कराधान अधिकारी) के समक्ष:

​शिकायतकर्ता ने अपने बयान और तथ्य पेश किए।

​दर्जनों ग्रामीणों ने मौके पर उपस्थित होकर सचिव के अनुचित हस्तक्षेप, अभद्र व्यवहार और कार्यस्थल से गायब रहने की पुष्टि की।

​बैठक संबंधी फोटोग्राफ, उपस्थिति रजिस्टर की प्रविष्टियां और शासकीय आदेशों की प्रतियां साक्ष्य के रूप में सौंपी गईं।

​जांच पूरी… साक्ष्य मजबूत… फिर भी CEO की कार्रवाई ‘शून्य’!

​जांच प्रक्रिया पूर्ण होने और शिकायत सही पाए जाने के पर्याप्त साक्ष्य मौजूद होने के बावजूद, हफ्तों बीत जाने के बाद भी महासमुंद जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) के स्तर से कोई

दंडात्मक या निलंबन की कार्रवाई नहीं की गई है।

​स्थानीय निवासियों और जागरूक नागरिकों का कहना है कि:
​”आवेदक के बयान और दर्जनों ग्रामीणों के साक्ष्य के बाद भी यदि जिला पंचायत CEO खामोश बैठे हैं, तो यह प्रशासन की लाचार व्यवस्था को दर्शाता है। ऐसी ढिलाई से भ्रष्ट और स्वेच्छाचारी कर्मचारियों का मनोबल बढ़ता है और वे बेखौफ होकर घूमते हैं।”

​शासन-प्रशासन से तीखे सवाल:

1 ​क्या नियम केवल आम जनता के लिए हैं..?

जब शासन का स्पष्ट आदेश है कि सरपंच पति पंचायत में हस्तक्षेप नहीं करेंगे, तो सचिव पर तत्काल कार्रवाई क्यों नहीं हुई..?

2 ​जांच रिपोर्ट पर धूल क्यों जम रही है..?

क्या जिला पंचायत कार्यालय में बैठे जिम्मेदार अधिकारी किसी दबाव में काम कर रहे हैं या दोषी सचिव को बचाने की कोशिश हो रही है..?

3 ​ग्राम सभा जैसी संवैधानिक संस्था का अपमान कब तक बर्दाश्त होगा..?

अपनी पदस्थापना छोड़कर दूसरी पंचायत में उपद्रव करने वाले सचिव पर निलंबन की गाज कब गिरेगी..?

​मांग:

​शिकायतकर्ता एवं क्षेत्रवासियों ने मांग की है कि छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम एवं लोक सेवक आचरण नियमों के तहत आरोपी सचिव मोती मेहरा को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाए और मामले की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच कराकर वैधानिक दंडात्मक कार्रवाई की जाए, ताकि पंचायती राज व्यवस्था की गरिमा बहाल हो सके।

महासमुंद में ₹200 का डिजिटल ट्रांसफर बना ‘खूनी विवाद’: गुलाब स्टोर्स के संचालक पर ग्राहक को पीटने और जान से मारने की धमकी का आरोप

महासमुंद में ₹200 का डिजिटल ट्रांसफर बना ‘खूनी विवाद’: गुलाब स्टोर्स के संचालक पर ग्राहक को पीटने और जान से मारने की धमकी का आरोप

रिपोर्टर मयंक गुप्ता/दिन बुधवार/26 अगस्त 2026
महासमुंद/ जिले के कोतवाली थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले पीटीयाझर (लाल दाढ़ी पारा) में एक हैरान कर देने वाली हिंसक घटना सामने आई है। महज ₹200 के ऑनलाइन ट्रांसफर को लेकर हुए विवाद में ‘गुलाब स्टोर्स’ के संचालक पर एक ग्राहक के साथ खुलेआम बदसलूकी, मारपीट और जान से मारने की धमकी देने के संगीन आरोप लगे हैं। घटना के बाद से पीड़ित परिवार खौफ के साये में जीने को मजबूर है।

कैश की जरूरत में पहुंचे थे दुकान, फिर शुरू हुआ ‘तांडव’

प्राप्त जानकारी के अनुसार, सुभाष नगर (वार्ड क्रमांक 22) के निवासी 40 वर्षीय बसंत निर्मलकर उर्फ बासु को आपातकालीन स्थिति में ₹200 नगद की सख्त आवश्यकता थी। वे तत्काल नगदी प्राप्त करने के लिए लाल दाढ़ी पारा स्थित ‘गुलाब स्टोर्स’ पहुंचे। बासु ने अपने मोबाइल फोन से ‘GULAB KIRANA STORE’ के आधिकारिक खाते में UPI के जरिए ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर कर दिए।
​डिजिटल ट्रांजैक्शन (ID: T2608260758538647213625, UTR: 214630611390) सफलतापूर्वक पूरा होने की पुष्टि होते ही पीड़ित ने जब नगद राशि मांगी, तो आरोप है कि दुकान संचालक गुलाब साहू अचानक आपा खो बैठा।

गंभीर आरोप: अकारण गाली-गलौज और जानलेवा धमकी

पीड़ित बसंत निर्मलकर ने आपबीती सुनाते हुए बताया कि पैसे ट्रांसफर होते ही दुकान संचालक का व्यवहार पूरी तरह बदल गया। बिना किसी बहस या उकसावे के आरोपी गुलाब साहू ने सरेआम भद्दी-भद्दी गालियां देनी शुरू कर दीं। जब ग्राहक ने इस दुर्व्यवहार का विरोध किया, तो आरोपी और उग्र हो गया तथा पीड़ित पर शारीरिक हमला कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आरोपी ने जान से मारने की खुली धमकी देते हुए कहा, “यहाँ से तुरंत भाग जा, नहीं तो जान से खत्म कर दूंगा!”
​माहौल अत्यधिक तनावपूर्ण और डरावना होने के कारण पीड़ित अपनी जान बचाकर किसी तरह वहां से भाग निकला।

एसपी से न्याय की गुहार, FIR दर्ज करने की मांग

घटना से भयभीत पीड़ित basant बासु निर्मलकर ने न्याय की उम्मीद में जिला पुलिस अधीक्षक (SP) महासमुंद को लिखित शिकायत सौंपी है। आवेदन पत्र के साथ निम्नलिखित प्रमाण संलग्न किए गए हैं:

​डिजिटल साक्ष्य: PhonePe की सफल ट्रांजैक्शन रसीद।
​व्हाट्सएप स्क्रीनशॉट: घटना के बाद मोबाइल पर आए कथित धमकी भरे मैसेज।

प्रत्यक्षदर्शी: मौके पर मौजूद स्थानीय नागरिकों को गवाह बनाया गया है।

​पीड़ित ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सुसंगत धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज करने, आरोपी दुकानदार को गिरफ्तार करने और अपने परिवार को तुरंत सुरक्षा प्रदान करने की मांग की है।

शहर में आक्रोश, पुलिस की चुप्पी पर सवाल

शहर के व्यस्त इलाके में ₹200 जैसी मामूली बात पर दुकानदार के इस आक्रामक और हिंसक रवैये से स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या अब दुकानों पर डिजिटल पेमेंट करना या मदद मांगना भी जान का जोखिम बन चुका है? फिलहाल पुलिस प्रशासन की ओर से इस मामले में आधिकारिक बयान आना बाकी है, जबकि पीड़ित परिवार न्याय के इंतजार में पुलिस की त्वरित कार्रवाई की राह देख रहा है।

महासमुंद में फूटा शिक्षकों का गुस्सा: 30 साल के अनुभव के बाद TET की शर्त पर भड़के, कलेक्ट्रेट का घेराव कर दी आर-पार की चेतावनी!

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महासमुंद में फूटा शिक्षकों का गुस्सा: 30 साल के अनुभव के बाद TET की शर्त पर भड़के, कलेक्ट्रेट का घेराव कर दी आर-पार की चेतावनी!

रिपोर्टर मयंक गुप्ता/26 अगस्त 2026/दिन बुधवार
​महासमुंद। पुरानी नीतियों को दरकिनार कर शिक्षकों पर जबरन नए नियम थोपने के विरोध में छत्तीसगढ़ शिक्षक संघर्ष मोर्चा (जिला इकाई महासमुंद) ने आर-पार की लड़ाई का बिगुल फूंक दिया है। जिला संयोजक नारायण चौधरी एवं विजय कुमार धृतलहरे की संयुक्त अगुवाई में जिलेभर के हजारों शिक्षकों ने सड़कों पर उतरकर शासन की नीतियों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया।
​माँ भवानी दुर्गा मंदिर बरौंडा चौक से शुरू हुई यह विशाल रैली कलेक्ट्रेट पहुंची। इस दौरान शिक्षकों ने ‘शिक्षक एकता जिंदाबाद’ और प्रशासनिक हठधर्मिता के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। रैली के अंत में मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री, मुख्य सचिव, शिक्षा सचिव और संचालक डीपीआई के नाम जिला कलेक्टर महासमुंद को 5 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा गया।

​अनुभव पर अन्याय क्यों..? 30 साल बाद TET थोपना बर्दाश्त नहीं

रैली को संबोधित करते हुए प्रांतीय व जिला स्तरीय प्रमुख नेताओं—नारायण चौधरी, विजय कुमार धृतलहरे, सुधीर प्रधान, पूर्णानंद मिश्रा और केशवराम साहू ने सरकार की मंशा पर सीधे सवाल खड़े किए। नेताओं ने कहा:
​”जब शिक्षकों की नियुक्ति तात्कालिक सेवा शर्तों और मान्य अर्हताओं के आधार पर की गई थी, तो आज दशकों बाद नई शर्तें क्यों थोपी जा रही हैं? 30 वर्षों का अध्यापन अनुभव रखने वाले शिक्षकों पर अचानक TET (शिक्षक पात्रता परीक्षा) अनिवार्य करना समझ से परे है। सरकार चाहे तो TET की बाध्यता को शिथिल कर सकती है, लेकिन ऐसा न करके लाखों शिक्षकों को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है।”

​पुरानी पेंशन, वेतन विसंगति और राजपत्र 2026 पर मुख्य मांगें:

शिक्षकों ने कलेक्ट्रेट के सामने अपनी 5 प्रमुख मांगों को प्रमुखता से रखा:

​TET की अनिवार्यता समाप्त हो:

सेवा सुरक्षा के डर में जी रहे लाखों शिक्षकों को राहत देने के लिए TET की बाध्यता तुरंत खत्म की जाए।

​प्रथम नियुक्ति तिथि से पेंशन की गणना:

संविलयन जब प्रथम नियुक्ति तिथि से माना गया है, तो पुरानी पेंशन (OPS) का लाभ भी उसी आधार पर मिले।

​वेतन विसंगति का समाधान:

केंद्रीय वेतनमान संरचना के आधार पर वेतन की कमियों को दूर किया जाए और बी.एड. धारियों के लिए ब्रिज कोर्स लागू हो।

​राजपत्र 2026 में सुधार:

भर्ती एवं पदोन्नति नियम 2026 की विसंगतियों को दूर कर पिछले 2 दशकों से कार्यरत LB संवर्ग के व्याख्याताओं को नियमित व्याख्याताओं के समकक्ष या नियमानुसार न्यायपूर्ण वरिष्ठता दी जाए।

​पदोन्नति कोटा में वृद्धि:

एलबी (LB) संवर्ग के लिए पूर्व में जारी पदोन्नति कोटे को शिक्षकों की कुल संख्या के अनुपात में बढ़ाया जाए।

​मांगें पूरी न होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी

विकासखंड संयोजकों (राजेश साहू, विनोद यादव, महेंद्र चौधरी, गजेंद्र नायक, ललित साहू, नीलाम्बर नायक, लवकुमार पटेल) और सह-संयोजकों ने स्पष्ट कर दिया कि यह तो सिर्फ चेतावनी थी। यदि शासन-प्रशासन ने ज्ञापन पर जल्द ठोस और सकारात्मक कदम नहीं उठाए, तो आने वाले समय में महासमुंद जिले का पूरा शिक्षक संवर्ग राज्य स्तर पर एक बड़े और उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगा, जिसकी पूरी जवाबदेही शासन की होगी।

​हजारों शिक्षकों की उपस्थिति ने दिखाई एकजुटता

इस प्रदर्शन में जिले के कौना-कौना से आए हजारों शिक्षक-शिक्षिकाओं की उपस्थिति ने संगठन की ताकत दिखाई। कार्यक्रम की पूरी जानकारी जिला सचिव नंदकुमार साहू एवं जिला मीडिया प्रभारी प्रदीप वर्मा ने दी।

​”काम हम करें, सजा हमें मिले… यह कैसा न्याय?” 150 मकान का टारगेट पूरा, फिर भी जेब खाली; कोरबा के आवास मित्रों का हल्लाबोल

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​”काम हम करें, सजा हमें मिले… यह कैसा न्याय?” 150 मकान का टारगेट पूरा, फिर भी जेब खाली; कोरबा के आवास मित्रों का हल्लाबोल

रिपोर्टर मयंक गुप्ता/ 26 अगस्त 2026/ दिन बुधवार
​पॉड़ी उपरोड़ा (कोरबा):
प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण (PMAY-G) को धरातल पर उतारने वाले ‘आवास मित्र’ खुद गंभीर आर्थिक तंगी और मानसिक तनाव के दौर से गुजर रहे हैं। हितग्राहियों की उदासीनता और शासन की नीतियों से परेशान आवास मित्र संघ

पॉड़ी उपरोड़ा (जिला कोरबा) ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए अपनी प्रमुख मांगों को लेकर ध्यान आकर्षित किया है।
​आवास संघ के प्रतिनिधियों का कहना है कि वे दिन-रात दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों में घूमकर हितग्राहियों को तकनीकी मार्गदर्शन देने, निर्माण सामग्री उपलब्ध कराने से लेकर जियो-टैगिंग (Geotagging) और मॉनिटरिंग का काम पूरी जिम्मेदारी से करते हैं।

​”काम हम करें, सजा हमें मिले”

​संघ का आरोप है कि शासन के नियमानुसार यदि 6 महीने के भीतर आवास पूर्ण होता है, तभी आवास मित्र को प्रति आवास 1000 रुपये की प्रोत्साहन राशि मिलती है। यदि हितग्राही या ठेकेदार की लापरवाही से समय पर काम पूरा नहीं हो पाता, तो उल्टे आवास मित्र के मानदेय से 100 रुपये प्रतिमाह की दर से कटौती कर ली जाती है।
​संघ ने कहा कि “आवास निर्माण की तीनों किस्तें और मनरेगा मजदूरी का पैसा सीधे हितग्राही के खाते में जाता है, जिस पर हमारा कोई नियंत्रण नहीं होता। हितग्राही के पारिवारिक कारणों या उदासीनता से काम रुकने का खामियाजा हमें भुगतना पड़ रहा है।”

​150 आवास का लक्ष्य, फिर भी खाली हाथ

​वर्ष 2024-25 में प्रत्येक आवास मित्र को 150 आवास निर्माण कराने का बड़ा लक्ष्य दिया गया था। इसके बावजूद शासन की नीतियों और जमीनी अड़चनों के चलते अधिकांश आवास मित्र अपना पेट्रोल खर्च तक नहीं निकाल पाए।

​आवास मित्र संघ की प्रमुख मांगें:

1 ​शेष राशि का तुरंत भुगतान: वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 में जियो-टैग के आधार पर बाकी प्रोत्साहन राशि का तत्काल भुगतान किया जाए।

2 ​समय सीमा बढ़े: आवास निर्माण की समय सीमा 6 माह से बढ़ाकर पुनः 1 वर्ष की जाए ताकि हितग्राहियों को पर्याप्त समय मिल सके।

3 ​कटौती पर रोक: प्रोत्साहन राशि में की जा रही मानदेय कटौती की व्यवस्था तुरंत समाप्त हो।

4 ​भत्ते अलग से मिले: काम के दौरान होने वाले पेट्रोल खर्च, मोबाइल खर्च और स्टेशनरी खर्च का अलग से भुगतान किया जाए।

5 ​नियमितीकरण और 15 हजार मानदेय: आगामी PMAY-2.0 योजना में पूर्णकालिक पद (आवास सहायक/पंचायत सहायक/डेटा एंट्री ऑपरेटर) सृजित कर 15,000/- रुपये प्रतिमाह निश्चित मानदेय पर नियुक्ति दी जाए।

​आवास मित्र संघ, पॉड़ी उपरोड़ा (जिला-कोरबा)

ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया, तो वे अपने अधिकारों के लिए आगे कदम उठाने को मजबूर होंगे।

महासमुंद में पंचायती राज का ‘मज़ाक’: 6 बिंदुओं पर वित्तीय हेराफेरी के बड़े आरोप, 2 बार बनी टीम, पर ‘बिदाई’ का बहाना बनाकर खट्टी पहुंचे ही नहीं जांच अफसर..!

महासमुंद में पंचायती राज का ‘मज़ाक’: 6 बिंदुओं पर वित्तीय हेराफेरी के बड़े आरोप, 2 बार बनी टीम, पर ‘बिदाई’ का बहाना बनाकर खट्टी पहुंचे ही नहीं जांच अफसर..!

​विशेष समाचार रिपोर्ट (महासमुंद/छत्तीसगढ़)
रिपोर्टर: मयंक गुप्ता / 25 अगस्त 2026 / मंगलवार
​महासमुंद। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले की ग्राम पंचायत खट्टी में भ्रष्टाचार का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने जिला प्रशासन की कार्यशैली और पंचायती राज व्यवस्था की पारदर्शिता पर गहरा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। ग्राम पंचायत में कथित तौर पर हुए व्यापक भ्रष्टाचार, अवैध वसूली, वित्तीय अनियमितताओं और सरपंच पति के खुलेआम प्रशासनिक हस्तक्षेप की गंभीर शिकायतों के बाद दो-दो बार जांच टीमें गठित की गईं। हालांकि, जांच अधिकारी अशोक चन्द्राकर (प्रभारी जिला अंकेक्षक, जिला पंचायत महासमुंद) की लगातार टालमटोल की वजह से पूरी प्रक्रिया अधर में लटकी हुई है।

​क्या है पूरा विवाद और कैसे शुरू हुई कार्रवाई..?

मामला ग्राम पंचायत खट्टी में हुए 06 प्रमुख बिंदुओं पर आधारित वित्तीय घोटालों और गैर-कानूनी गतिविधियों से जुड़ा हुआ है। ग्रामीणों की लगातार शिकायतों के बाद जिला पंचायत महासमुंद ने कड़ा रुख अपनाते हुए आदेश क्रमांक/पंचा/शिका./2026/1598/महासमंद (दिनांक 03.08.2026) जारी कर जांच के स्पष्ट निर्देश दिए थे।
​इसके बाद औपचारिक “जांच हेतु सूचना पत्र” जारी कर संबंधित पक्षों को तलब किया गया, जिनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:

​श्रीमती अनिता मोती मेहरा (सरपंच, ग्राम पंचायत खट्टी)

​श्री लेखराम चन्द्राकर (तत्कालीन पंचायत सचिव)

​श्री जीवनराखन बंजारे (वर्तमान पंचायत सचिव)

​दो बार तय हुई तिथि, दोनों बार अधिकारी का ‘वॉकओवर’

प्रशासनिक आदेश के मुताबिक, जांच की पहली तारीख 18 अगस्त 2026 को प्रातः 11:30 बजे कार्यालय ग्राम पंचायत भवन खट्टी में तय की गई थी। लेकिन अज्ञात कारणों से उस दिन जांच अधिकारी पहुंचे ही नहीं।
​इसके बाद दूसरा सूचना पत्र 18 अगस्त को ही जारी कर नई तारीख 25 अगस्त 2026 को प्रातः 11:30 बजे नियत की गई। नियमानुसार शिकायतकर्ता ग्रामीणों और पंचों—जिनमें मन्नूराम, शीतल, नोहर साहू, मनहरण साहू, दुजराम पटेल समेत कुल 41 से अधिक ग्रामीण शामिल थे—को सभी आवश्यक साक्ष्यों और दस्तावेजों के साथ उपस्थित रहने को कहा गया।

​ग्रामीण काम-धंधा छोड़कर करते रहे इंतजार, अफसर मनाते रहे ‘बिदाई’

हद तो तब हो गई जब निर्धारित तिथि पर दर्जनों ग्रामीण और पंच अपना रोज़मर्रा का कामकाज छोड़कर पंचायत भवन में घंटों अधिकारी का इंतजार करते रहे। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि जांच अधिकारी अशोक चन्द्राकर ने पहुंचने के बजाय बहानेबाजी शुरू कर दी।
​ग्रामीणों के अनुसार, एक टेलीफोनिक बातचीत में जांच अधिकारी ने यह कहकर आने से साफ इनकार कर दिया कि वे किसी “बिदाई कार्यक्रम” में व्यस्त हैं। इस रवैये से आक्रोशित ग्रामीणों का कहना है कि क्या प्रशासनिक जांच से ज्यादा जरूरी किसी का विदाई समारोह है..?

​उच्च अधिकारियों तक पहुंची गूंज, बड़े आंदोलन की चेतावनी

इस पूरे प्रकरण की लिखित सूचना और शिकायत की प्रतियां उच्च स्तर पर भी भेजी जा चुकी हैं, जिनमें शामिल हैं:

1 ​जिला कलेक्टर, महासमुंद

2 ​मुख्य कार्यपालन अधिकारी
(CEO), जिला पंचायत महासमुंद

3 उपसंचालक, पंचायत विभाग

4 ​जनपद पंचायत महासमुंद

​ग्रामीणों का कहना है कि जब उच्च अधिकारियों के आदेश के बाद भी निचले स्तर के जांच अधिकारी इस तरह लापरवाही दिखाएंगे, तो आम जनता का न्याय और प्रशासन से भरोसा उठना तय है। जांच में देरी से यह संदेह भी गहरा रहा है कि कहीं भ्रष्टाचारियों को बचाने या साक्ष्यों को छिपाने का मौका तो नहीं दिया जा रहा..?

​प्रशासन के लिए कड़ा संदेश

जिला प्रशासन को इस मामले का तत्काल संज्ञान लेते हुए जांच अधिकारी अशोक चन्द्राकर से लिखित जवाब तलब करना चाहिए। साथ ही, किसी अन्य निष्पक्ष अधिकारी को जिम्मेदारी सौंपकर एक निश्चित समय-सीमा के भीतर पारदर्शी जांच पूरी कराई जानी चाहिए। यदि प्रशासन ने जल्द कड़े कदम नहीं उठाए, तो खट्टी ग्राम पंचायत के आक्रोशित नागरिक एक बड़े जन-आंदोलन की राह पकड़ने को मजबूर होंगे।

प्रतिभाओं का सम्मान और खेल अधोसंरचना को मजबूती: महासमुंद में उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने तीरंदाजों को बांटी किट, पैरा-एथलीट लक्की यादव का किया नागरिक अभिनंदन

प्रतिभाओं का सम्मान और खेल अधोसंरचना को मजबूती: महासमुंद में उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने तीरंदाजों को बांटी किट, पैरा-एथलीट लक्की यादव का किया नागरिक अभिनंदन

रिपोर्टर मयंक गुप्ता/ दिन सोमवार/24 अगस्त 2026/
​महासमुंद। छत्तीसगढ़ में ग्रामीण एवं वनांचल क्षेत्रों की खेल प्रतिभाओं को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने और राज्य में समावेशी खेल संस्कृति को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य के उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री अरुण साव के महासमुंद प्रवास के दौरान जिला कलेक्टर कार्यालय परिसर में एक भव्य एवं गरिमामय खेल प्रोत्साहन कार्यक्रम का आयोजन संपन्न हुआ।

​राजीव पांडे अवॉर्ड हेतु चयनित लक्की यादव का विशेष सम्मान

​कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण राज्य खेल अलंकरण वर्ष 2025-26 के अंतर्गत प्रतिष्ठित ‘शहीद राजीव पांडे अवॉर्ड’ के लिए चुने गए महासमुंद के पैरा-एथलीट लक्की यादव का सम्मान रहा। उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने लक्की यादव की इस उपलब्धि को पूरे जिले और प्रदेश के लिए गौरव का क्षण बताते हुए उन्हें पुष्पगुच्छ, स्मृति चिन्ह एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान कर बधाई दी।
​इस दौरान जिला पैरा स्पोर्ट्स संघ महासमुंद के अध्यक्ष निरंजन साहू ने दिव्यांग खिलाड़ियों के सर्वांगीण विकास के लिए एक विस्तृत मांग पत्र मंत्री जी को सौंपा।

​मांग पत्र के मुख्य बिंदु:

​समावेशी खेल एकेडमी (Inclusive Sports Academy): दिव्यांग एवं सामान्य खिलाड़ियों को एक साथ प्रशिक्षण देने हेतु आवासीय एवं गैर-आवासीय एकेडमी का संचालन।

​वैज्ञानिक प्रशिक्षण व पोषण: खिलाड़ियों के लिए

उच्चस्तरीय एनआईएस (NIS) कोचों द्वारा तकनीकी प्रशिक्षण, नियमित अभ्यास सारणी और खेल-विशिष्ट पोषण/आहार व्यवस्था।
​अत्याधुनिक खेल उपकरण: अंतरराष्ट्रीय मानकों के पैरा-स्पोर्ट्स उपकरण उपलब्ध कराना।
​उप मुख्यमंत्री श्री साव ने मांग पत्र पर संवेदनशीलता व्यक्त करते हुए विभाग को आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दिए और मांग पूरी करने का प्रत्यक्ष आश्वासन दिया।

​खेलों इंडिया तीरंदाजी सेंटर भोरिंग के खिलाड़ियों को मिला किट

​महासमुंद जिले के एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय भोरिंग में संचालित खेलों इंडिया तीरंदाजी सेंटर के खिलाड़ियों से उप मुख्यमंत्री ने व्यक्तिगत रूप से मुलाकात कर उनका परिचय लिया। खेल विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने खिलाड़ियों को आधुनिक तीरंदाजी किट और खेल सामग्री का वितरण किया।
​वर्तमान में इस सेंटर में 60 से अधिक बालक-बालिका खिलाड़ी तीरंदाजी का कड़ा अभ्यास कर रहे हैं। मंत्री जी ने खिलाड़ियों को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य सरकार खेलों इंडिया योजनाओं के माध्यम से अंतिम छोर के प्रतिभावान खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर का मंच प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।

​कार्यक्रम में प्रशासनिक एवं विभागीय अधिकारियों की उपस्थिति
​कार्यक्रम में शासन-प्रशासन और खेल जगत के प्रमुख प्रतिनिधि उपस्थित रहे:

​प्रशासनिक अधिकारी: कलेक्टर विनय कुमार लंगेह, अपर कलेक्टर रवि साहू।
​खेल विभाग एवं संस्थान: जिला खेल अधिकारी मनोज धृतलहरे, एकलव्य विद्यालय भोरिंग के प्राचार्य महेंद्र टंडन।

​प्रशिक्षक टीम: एनआईएस (NIS) तीरंदाजी कोच एवन कुमार साहू, पीटीआई नीलम साहू एवं जिला पैरा स्पोर्ट्स संघ के पदाधिकारी।

विश्व बंधुत्व दिवस पर भावभीनी श्रद्धांजलि: दादी प्रकाशमणि जी की 19वीं पुण्यतिथि पर उपकार भवन में गूंजा परमात्मा का संदेश

विश्व बंधुत्व दिवस पर भावभीनी श्रद्धांजलि: दादी प्रकाशमणि जी की 19वीं पुण्यतिथि पर उपकार भवन में गूंजा परमात्मा का संदेश,

रक्तदान शिविर में 50 से अधिक लोगों ने किया महादान

महासमुंद ​/ शहर के तुमगांव रोड स्थित उपकार भवन सेवाकेंद्र ​प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय द्वारा संस्थान की पूर्व मुख्य प्रशासिका, राजयोगिनी दादी प्रकाशमणि जी की 19वीं पुण्य स्मृति दिवस को अत्यंत श्रद्धा और गरिमा के साथ ‘विश्व बंधुत्व दिवस’ के रूप में मनाया गया। इस अवसर पर ब्रह्माकुमारी बहनों सहित समस्त ईश्वरीय परिवार के सदस्यों ने एकत्रित होकर दादी जी के दिव्य जीवन को याद किया और उन्हें अपने श्रद्धा-सुमन अर्पित किए।
​स्मृति दिवस के पावन अवसर पर उपकार भवन सेवाकेंद्र में एक विशेष ‘स्वैच्छिक रक्तदान शिविर’ का आयोजन किया गया। इस मानवीय पहल में समाज के विभिन्न वर्गों से आए 50 से अधिक युवाओं और श्रद्धालुओं ने निस्वार्थ भाव से रक्तदान कर दुआओं की झोली भरी।

​प्रेम, एकता और आत्म-जागरूकता का दिया संदेश

​सेवाकेंद्र संचालिका ब्रह्माकुमारी प्रीति दीदी ने दादी जी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि दादी प्रकाशमणि जी प्रेम, नम्रता और करुणा की साक्षात मूरत थीं। उनका स्पष्ट मानना था कि संपूर्ण विश्व की सभी आत्माएं एक ही परमपिता परमात्मा की संतान हैं, इसलिए हम सब आपस में भाई-भाई हैं।

​प्रीति दीदी ने दादी जी की मुख्य शिक्षाओं को याद करते हुए बताया कि:

​सद्गुणों का समावेश: मानव जीवन को सार्थक बनाने के लिए जीवन में प्रेम, एकता, नम्रता, सहनशीलता और हर्षितमुखता का होना अनिवार्य है।

​निष्काम सेवा: बिना किसी स्वार्थ और अपेक्षा के समाज व मानवता की सेवा करना ही सबसे बड़ा धर्म है।

​आत्म-जागरूकता: स्वयं को आत्मा समझकर परमात्मा की याद में रहना ही सभी दुखों से मुक्ति का मार्ग है।

​वैश्विक स्तर पर ईश्वरीय संदेश का प्रसार

​उल्लेखनीय है कि वर्ष 1969 में संस्थान के संस्थापक प्रजापिता ब्रह्मा बाबा के अव्यक्त होने के पश्चात दादी प्रकाशमणि जी ने विश्वविद्यालय का कुशल नेतृत्व संभाला था। उन्होंने न केवल भारत, बल्कि देश-विदेश के कोने-कोने में भ्रमण कर मानवता को जागृत किया। उन्होंने कलयुग के अंतिम चरण में निराकार ज्योति स्वरूप परमपिता परमात्मा शिव के दिव्य अवतरण और शीघ्र आने वाले स्वर्णिम युग (सत्ययुग) का पावन संदेश जन-जन तक पहुंचाया।
​कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित श्रद्धालुओं ने शांति और एकाग्रता के साथ राजयोग का अभ्यास कर दादी जी के दिखाए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।

योगाचार्य लेखराम (लेखू बाबा) बने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार फाउंडेशन योग प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष: छत्तीसगढ़ में खुशी की लहर

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योगाचार्य लेखराम (लेखू बाबा) बने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार फाउंडेशन योग प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष: छत्तीसगढ़ में खुशी की लहर

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
​कवर्धा/रायपुर। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष जय सिंह यादव के निर्देशों पर संगठन का विस्तार करते हुए छत्तीसगढ़ में एक महत्वपूर्ण नियुक्ति की गई है। युवाओं और समाज सेवा के क्षेत्र में सक्रिय योगाचार्य लेखराम (लेखू बाबा) को अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार फाउंडेशन के योग प्रकोष्ठ का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।

​निःशुल्क योग सेवा और समाज कल्याण का मिला फल

लेखू बाबा लंबे समय से क्षेत्र में निःशुल्क नियमित योग शिविरों का संचालन कर रहे हैं। उनके कुशल नेतृत्व, समाज के प्रति निस्वार्थ सेवा भाव और स्वास्थ्य जागरूकता अभियानों को देखते हुए संगठन ने उन्हें यह बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। फाउंडेशन का मुख्य उद्देश्य लोगों को उनके संवैधानिक अधिकारों, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और कानूनी जानकारियों के प्रति जागरूक करना है, ताकि समाज का हर वर्ग अपने हक के लिए सक्षम बन सके।

​”24 घंटे मानव सेवा के लिए रहूंगा तत्पर”

अपनी नियुक्ति पर आभार व्यक्त करते हुए योगाचार्य लेखराम (लेखू बाबा) ने कहा:
​”मैं अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष जय सिंह यादव और राष्ट्रीय सचिव व छत्तीसगढ़ प्रभारी अजीत यादव सहित सभी केंद्रीय पदाधिकारियों का हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ, जिन्होंने मुझ जैसे छोटे से कार्यकर्ता पर यह विश्वास जताया है। मैं 24 घंटे मानव सेवा में समर्पित रहूँगा। हमारा मुख्य लक्ष्य प्रदेश में योग, शिक्षा और नशामुक्त समाज का निर्माण करना है। साथ ही, केंद्र व राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक पहुँचाने का निरंतर प्रयास किया जाएगा।”

​जल्द होगा प्रदेश स्तरीय टीम का गठन

नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि वे जल्द ही पूरे छत्तीसगढ़ में योग और मानवाधिकार जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए कार्यकारिणी का विस्तार करेंगे और एक मजबूत प्रांतीय टीम तैयार करेंगे।

​प्रदेशभर से बधाइयों का तांता

लेखू बाबा के प्रदेश अध्यक्ष बनने की खबर मिलते ही कवर्धा समेत पूरे छत्तीसगढ़ के समर्थकों और समाजसेवियों में खुशी का माहौल है। उन्हें उज्ज्वल भविष्य और सफल कार्यकाल के लिए शुभकामनाएं देने वालों में प्रमुख रूप से:

​प्रदेश पदाधिकारी: मुक्ता सिंह यादव (प्रदेश उपाध्यक्ष), जाहर सिंह तोमर, कैलाश यादव, धन्नू यादव, राजेंद्र सिंह क्षत्री, गजेंद्र सिंह यादव।

​विशिष्ट व वरिष्ठजन: कपूर यादव, नील सिंह तोमर, मयंक गुप्ता, श्याम लाल पैंकरा, कृष्णा चंद्रवंशी, अजय चंद्रवंशी, अभय चंद्राकर, संजय सिंह, भूपेंद्र साहू, सुनील साय, महेश राम, राहुल कुमार, माधव यादव, जलेश यादव, सूर्या ठाकुर, अजय जायसवाल, सरिता राजपूत, कविता साहू, डॉ. सविता, डॉ. कमला देवी, अनिल कुमार, महेश कुमार, दिनेश कुमार, अंकित सिंह, मिलेश, संजय कुमार, कुंदन सिंह एवं अधिवक्ता संघ के सदस्यों ने शुभकामनाएं प्रेषित की हैं।

महासमुंद के विकास का रोडमैप तैयार: उप मुख्यमंत्री अरुण साव की कड़ी चेतावनी, निर्माण कार्यों में गुणवत्ता और समय-सीमा से नहीं होगा कोई समझौता

महासमुंद के विकास का रोडमैप तैयार: उप मुख्यमंत्री अरुण साव की कड़ी चेतावनी, निर्माण कार्यों में गुणवत्ता और समय-सीमा से नहीं होगा कोई समझौता
​महासमुंद। छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने महासमुंद कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में जिले के विकास कार्यों और विभागीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए कड़ा रुख अपनाया है। लोक निर्माण, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE), नगरीय प्रशासन और खेलकूद विभाग के कामकाज का जायजा लेते हुए उन्होंने अधिकारियों को दो टूक निर्देश दिया कि स्वीकृत योजनाओं में गुणवत्ता और पारदर्शिता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
​जून 2027 तक हर घर में पहुंचेगा नल का जल
समीक्षा बैठक के दौरान उप मुख्यमंत्री साव ने ‘हर घर जल’ योजना की समीक्षा करते हुए स्पष्ट किया कि जून 2027 तक जिले की प्रत्येक ग्राम पंचायत के हर घर तक पीने का शुद्ध पानी पहुंचाना अनिवार्य है। उन्होंने निर्देश दिया कि जल जीवन मिशन के तहत योजनाएं पूरा होने के बाद ग्राम पंचायतों को हैंडओवर करते समय सरपंचों और सचिवों को तकनीकी रूप से सक्षम बनाया जाए। बंद पड़े ट्यूबवेल को तत्काल चालू करने और पेयजल से जुड़ी शिकायतों का त्वरित समाधान करने के निर्देश दिए गए।

महासमुंद के विकास का रोडमैप तैयार


​खराब सड़कों के लिए अनुविभागीय अधिकारी (SDO) सीधे जिम्मेदार
सड़क और पुल-पुलिया निर्माण की समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि सड़कों की मरम्मत और रखरखाव में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सड़कों की खराब स्थिति के लिए संबंधित अनुविभागीय अधिकारी (SDO) सीधे जवाबदेह होंगे। उन्होंने लोक निर्माण विभाग को आधुनिक तकनीक और उपकरणों का उपयोग कर कार्य समय-सीमा में पूर्ण करने को कहा।


​नगरीय निकायों का 5 साल का मास्टर प्लान और खेलों को बढ़ावा
नगरीय प्रशासन विभाग की समीक्षा करते हुए उप मुख्यमंत्री ने आने वाले 5 वर्षों की दूरगामी कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना को सर्वोच्च प्राथमिकता देने, 15वें वित्त आयोग के बजट और नालंदा परिसर जैसे प्रोजेक्ट्स को जल्द पूरा करने के साथ-साथ राजस्व वसूली बढ़ाने पर जोर दिया।
​खेल सुविधाओं पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि जिले की प्रतिभाओं को निखारने के लिए प्राथमिक शाला स्तर से ही खिलाड़ियों को तैयार किया जाएगा। ‘हर गांव में मैदान हो और हर स्कूल से खिलाड़ी निकलें’ के विजन के साथ ग्रामीण इलाकों में खेल अधोसंरचना मजबूत करने के निर्देश दिए।
​बैठक में कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने जिले की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की, जबकि विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी और प्रशासनिक अमला मौजूद रहा।

कक्षा में बच्चे पढ़ते रहे, स्कूल में नशे की हालत में सोते मिले प्रधान पाठक..!

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कक्षा में बच्चे पढ़ते रहे, स्कूल में नशे की हालत में सोते मिले प्रधान पाठक..!

भुरका प्राथमिक शाला का मामला: मीडिया के पहुंचते ही मचा हड़कंप, लंबे समय से अनुपस्थिति के भी लगाए गए आरोप

महासमुंद। सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था और शिक्षकों की जवाबदेही को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं, लेकिन महासमुंद विकासखंड के ग्राम भुरका स्थित प्राथमिक शाला से सामने आया मामला व्यवस्था की गंभीर तस्वीर पेश करता है। यहां पदस्थ प्रधान पाठक धनुर्जय पटेल के स्कूल परिसर में कथित रूप से नशे की हालत में सोते हुए पाए जाने का मामला सामने आया है। जिस समय यह स्थिति सामने आई, उस दौरान स्कूल में कक्षाएं संचालित हो रही थीं और छोटे बच्चे पढ़ाई कर रहे थे।

बच्चे कक्षा में, प्रधान पाठक आराम की मुद्रा में

जानकारी के अनुसार 13 अगस्त को मीडिया टीम द्वारा स्कूल का औचक निरीक्षण किया गया। स्कूल में पहली और दूसरी कक्षा के बच्चे अध्ययन करते मिले, जबकि प्रधान पाठक धनुर्जय पटेल स्कूल परिसर में सोते हुए पाए गए। उनकी स्थिति को देखकर उनके नशे में होने की बात सामने आई।
मीडिया द्वारा जब उनसे इस संबंध में सवाल किया गया तो उन्होंने कथित तौर पर सोने की बात से इनकार करते हुए कहा कि वे बच्चों को पढ़ा रहे थे। वहीं, मौजूद विद्यार्थियों ने बताया कि प्रधान पाठक कुछ समय पहले ही स्कूल पहुंचे थे और इसके बाद सो गए थे।

सहायक शिक्षक ने भी उठाए उपस्थिति पर सवाल

मामले को और गंभीर बनाने वाली बात यह है कि स्कूल में पदस्थ सहायक शिक्षक उत्तम कुमार यादव ने प्रधान पाठक की उपस्थिति को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए। उनके अनुसार प्रधान पाठक पिछले कुछ दिनों से ही स्कूल में दिखाई दे रहे हैं तथा लंबे समय से नियमित रूप से स्कूल नहीं आने की स्थिति बनी हुई है।
सहायक शिक्षक ने यहां तक दावा किया कि प्रधान पाठक के लगभग एक वर्ष से स्कूल से अनुपस्थित रहने की शिकायतें सामने आती रही हैं। हालांकि इन आरोपों की विभागीय स्तर पर आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।

2008 से इसी स्कूल में पदस्थ होने की जानकारी

बताया जा रहा है कि धनुर्जय पटेल वर्ष 2008 से इसी प्राथमिक शाला में प्रधान पाठक के पद पर पदस्थ हैं। लंबे समय से एक ही विद्यालय में पदस्थ रहने के बावजूद यदि नियमित उपस्थिति और विद्यालयीन अनुशासन को लेकर शिकायतें सामने आ रही हैं, तो यह शिक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है।
भुरका प्राथमिक शाला में वर्तमान में लगभग 17 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत बताए जा रहे हैं। ऐसे में प्रधान पाठक की नियमित उपस्थिति और बच्चों की पढ़ाई पर उनकी जिम्मेदारी महत्वपूर्ण हो जाती है।

डीईओ ने कहा—मामले की कराई जाएगी जांच

मामले की जानकारी जब जिला शिक्षा अधिकारी बीएल देवांगन को दी गई तो उन्होंने मीडिया के स्कूल पहुंचने को लेकर सवाल उठाया और पूछा कि मीडिया को विद्यालय में प्रवेश की अनुमति किस स्तर से मिली। इसके बाद उन्होंने पूरे मामले की जांच कराने का आश्वासन दिया।
अब देखने वाली बात यह होगी कि शिक्षा विभाग इस मामले में केवल जांच तक सीमित रहता है या प्रधान पाठक की उपस्थिति, कथित नशे की स्थिति और लंबे समय से अनुपस्थित रहने के आरोपों की अलग-अलग स्तर पर जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाता है।

सवालों के घेरे में विभागीय निगरानी

भुरका प्राथमिक शाला की घटना ने सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति और विभागीय मॉनिटरिंग की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि प्रधान पाठक के लंबे समय से अनुपस्थित रहने की शिकायत सही है तो आखिर उनकी नियमित उपस्थिति की निगरानी किस स्तर पर की जा रही थी? वहीं यदि स्कूल परिसर में नशे की हालत में पाए जाने की बात जांच में सही साबित होती है तो यह विद्यालयी अनुशासन और बच्चों के शैक्षणिक वातावरण से जुड़ा बेहद गंभीर विषय होगा।

फिलहाल मामले की वास्तविकता विभागीय जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। ग्रामीणों और अभिभावकों ने शिक्षा विभाग से निष्पक्ष जांच कर दोष सिद्ध होने पर नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की मांग की है।