बेलसोंडा पंचायत में बिलों का ‘खेल’! खाली और अधूरे बिलों से लाखों के आहरण का आरोप, 313 पन्नों की शिकायत पर कार्रवाई का इंतजार; SDM कार्यालय घेराव की चेतावनी
पूर्व सरपंच भामिनी पोखन चंद्राकर ने पंचायत के वित्तीय लेन-देन पर उठाए गंभीर सवाल; RTI से मिले दस्तावेजों के आधार पर जांच की मांग, जनदर्शन में प्रशासन को कार्रवाई के लिए अल्टीमेटम
प्रधान संपादक मयंक गुप्ता/21 अक्टूबर 2026 / दिन बुधवार
महासमुंद/बेलसोंडा। महासमुंद जिले की ग्राम पंचायत बेलसोंडा में कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। पंचायत के सरकारी धन के उपयोग, बिलों की वैधता और भुगतान संबंधी अभिलेखों को लेकर उठे सवालों ने स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक जवाबदेही को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। पूर्व सरपंच श्रीमती भामिनी पोखन चंद्राकर ने वर्तमान सरपंच एवं सचिव पर कथित तौर पर संदिग्ध बिलों के माध्यम से पंचायत की राशि निकालने के गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने इन आरोपों के समर्थन में सूचना के अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त दस्तावेजों का हवाला देते हुए विस्तृत जांच और जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।
पूर्व सरपंच का कहना है कि 5 अक्टूबर 2026 को 313 पन्नों के दस्तावेजी साक्ष्यों के साथ संबंधित अधिकारियों के समक्ष लिखित शिकायत प्रस्तुत की गई थी। इसके बावजूद अब तक अपेक्षित कार्रवाई सामने नहीं आने से शिकायतकर्ताओं में नाराजगी बढ़ रही है। उनका आरोप है कि जब बड़ी संख्या में दस्तावेज उपलब्ध कराए गए हैं, तो मामले की प्राथमिक जांच कर अभिलेखों की सत्यता और भुगतान की वैधता स्पष्ट की जानी चाहिए।
हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र जांच और प्रशासनिक स्तर पर उनका सत्यापन होना अभी आवश्यक है। वर्तमान सरपंच, सचिव तथा संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आने के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
313 पन्नों की शिकायत के बाद भी जांच की स्थिति पर सवाल
पूर्व सरपंच भामिनी पोखन चंद्राकर के अनुसार, उन्होंने पंचायत में कथित वित्तीय गड़बड़ियों से जुड़े दस्तावेजों को एकत्रित कर 5 अक्टूबर को अधिकारियों को शिकायत सौंपी थी। शिकायत में पंचायत के भुगतान अभिलेखों, बिलों और राशि निकासी की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं।
शिकायतकर्ता का कहना है कि दस्तावेजों की संख्या और आरोपों की गंभीरता को देखते हुए मामले में समयबद्ध जांच होनी चाहिए थी। उनके मुताबिक, शिकायत के बाद भी कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट नहीं होने से ग्रामीणों के बीच असंतोष बढ़ रहा है।
इस पूरे प्रकरण में अब सबसे अहम सवाल यह है कि शिकायत मिलने के बाद संबंधित विभाग ने कौन-से कदम उठाए? क्या दस्तावेजों का प्रारंभिक परीक्षण किया गया है? क्या पंचायत के मूल अभिलेख सुरक्षित रखे गए हैं? और क्या भुगतान से संबंधित प्रविष्टियों का बैंक रिकॉर्ड तथा स्वीकृत कार्यों से मिलान कराया गया है?
इन सवालों का जवाब जांच और आधिकारिक जानकारी से ही सामने आ सकेगा।
खाली बिल पर हस्ताक्षर का दावा, भुगतान प्रक्रिया पर उठे सवाल
पूर्व सरपंच ने RTI से प्राप्त प्रमाणित जानकारी का हवाला देते हुए दावा किया है कि पंचायत के रिकॉर्ड में एक ऐसा बिल मिला है, जिसमें विवरण दर्ज नहीं होने के बावजूद सरपंच और सचिव के हस्ताक्षर मौजूद हैं। यदि दस्तावेजों की जांच में यह बात प्रमाणित होती है, तो यह भुगतान प्रक्रिया और अभिलेखों के रखरखाव से जुड़ा गंभीर विषय हो सकता है।
शिकायतकर्ता के अनुसार, कुछ अन्य बिलों में भी भुगतान के उद्देश्य, संबंधित व्यक्ति अथवा कार्य का पूरा विवरण स्पष्ट नहीं है। ऐसे दस्तावेजों के आधार पर राशि का आहरण हुआ है या नहीं, भुगतान किस मद से किया गया और उसके पीछे सक्षम स्वीकृति थी या नहीं—इन सभी बिंदुओं की जांच आवश्यक है।
पंचायत के वित्तीय लेन-देन में बिल, भुगतान स्वीकृति, कार्य का विवरण, माप या प्राप्ति संबंधी रिकॉर्ड और बैंक प्रविष्टियां महत्वपूर्ण साक्ष्य होते हैं। इसलिए केवल बिल की प्रति देखकर अंतिम निष्कर्ष निकालने के बजाय मूल दस्तावेजों और वास्तविक भुगतान का मिलान कराना जरूरी है।
₹29 हजार से ₹57,500 तक की रकम का उल्लेख
शिकायत में अलग-अलग राशियों के बिलों का उल्लेख किए जाने की बात सामने आई है। पूर्व सरपंच के अनुसार, इनमें ₹29,000, ₹20,880, ₹16,800, ₹29,800 और ₹57,500 जैसी रकम शामिल हैं।
शिकायतकर्ता ने इन भुगतानों की वैधता पर सवाल उठाते हुए मांग की है कि प्रत्येक बिल के आधार पर संबंधित कार्य, सामग्री की खरीद, भुगतान प्राप्त करने वाले व्यक्ति तथा राशि निकासी की तारीख का सत्यापन किया जाए।
जांच के दौरान यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि संबंधित खर्च पंचायत की स्वीकृत योजना और निर्धारित वित्तीय नियमों के अनुरूप थे या नहीं। यदि किसी बिल में आवश्यक विवरण नहीं हैं, तो यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि भुगतान किस आधार पर स्वीकृत किया गया और संबंधित अधिकारियों ने अभिलेखों की जांच किस प्रकार की।
फिलहाल इन राशियों को लेकर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। इसलिए जांच रिपोर्ट और आधिकारिक अभिलेख सामने आने के बाद ही किसी वित्तीय अनियमितता की वास्तविक प्रकृति तथा जिम्मेदारी निर्धारित की जा सकेगी।
पंचों को बाहर ले जाने की चर्चा, रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग
पूर्व सरपंच की ओर से यह आशंका भी व्यक्त की गई है कि सोमवार को वर्तमान सरपंच और सचिव द्वारा सभी पंचों को अचानक बाहर ले जाया गया। शिकायतकर्ता ने इस घटनाक्रम के संदर्भ में पंचायत के दस्तावेजों में संभावित बदलाव अथवा अभिलेखों से छेड़छाड़ की आशंका जताई है।
हालांकि, पंचों को बाहर ले जाने की घटना और अभिलेखों से किसी तरह की छेड़छाड़ के बीच संबंध होने की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। ऐसे में इस आशंका को तथ्य मानने के बजाय प्रशासन द्वारा रिकॉर्ड की स्थिति की जांच करना जरूरी है।
ग्रामीणों की मांग है कि पंचायत के मूल बिल, कैशबुक, बैंक स्टेटमेंट, भुगतान वाउचर, प्रस्ताव रजिस्टर, कार्यों से संबंधित अभिलेख तथा अन्य वित्तीय दस्तावेज सुरक्षित रखे जाएं। जरूरत पड़ने पर इनकी प्रमाणित प्रतियां लेकर मूल रिकॉर्ड से मिलान कराया जाए, ताकि जांच के दौरान किसी महत्वपूर्ण साक्ष्य के नष्ट होने या उसमें बदलाव की आशंका न रहे।
₹11 लाख की कथित रिकवरी का पुराना मामला भी चर्चा में
इस विवाद के बीच पूर्व सरपंच ने जनपद पंचायत की पूर्व उपाध्यक्ष हुल्दी चंद्राकर से संबंधित कथित ₹11 लाख की रिकवरी का मुद्दा भी उठाया है। उनके अनुसार, तत्कालीन SDM द्वारा वसूली के संबंध में आदेश जारी किया गया था, लेकिन उस पर अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
शिकायतकर्ता ने इस मामले की वर्तमान स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। यदि वसूली का आदेश जारी हुआ था, तो प्रशासन को यह बताना चाहिए कि आदेश के अनुपालन में अब तक क्या कार्रवाई की गई, वसूली की कितनी राशि जमा हुई और शेष राशि के संबंध में क्या प्रक्रिया अपनाई जा रही है।
इस पुराने प्रकरण के आदेश, उसकी वर्तमान वैधानिक स्थिति और अनुपालन संबंधी अभिलेखों की जांच भी आवश्यक है। केवल आरोप या पूर्व आदेश का उल्लेख अपने आप में वर्तमान स्थिति का प्रमाण नहीं है; वास्तविक स्थिति संबंधित दस्तावेजों से ही स्पष्ट होगी।
जनदर्शन में शिकायत, शाम तक कार्रवाई की मांग
मामले को लेकर पूर्व सरपंच और ग्रामीणों की ओर से कलेक्टर के जनदर्शन में आवेदन प्रस्तुत कर तत्काल जांच की मांग किए जाने की बात कही गई है। शिकायतकर्ताओं ने प्रशासन से मांग की है कि आरोपों की गंभीरता को देखते हुए संबंधित अभिलेखों की जांच कराई जाए और जिम्मेदारी तय करने के लिए निष्पक्ष प्रक्रिया अपनाई जाए।
पूर्व सरपंच एवं ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे और SDM कार्यालय के घेराव की तैयारी करेंगे। इस चेतावनी के बाद पंचायत से जुड़े मामले में प्रशासन की अगली कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं।
अब प्रशासन के सामने ये प्रमुख सवाल
बेलसोंडा पंचायत के इस प्रकरण में प्रशासन से निम्न बिंदुओं पर स्पष्टता अपेक्षित है—
5 अक्टूबर 2026 को प्रस्तुत 313 पन्नों की शिकायत पर अब तक क्या कार्रवाई हुई?
कथित खाली और अधूरे बिलों के आधार पर भुगतान हुआ है या नहीं?
उल्लेखित राशियों का भुगतान किस कार्य, सामग्री अथवा वित्तीय मद के अंतर्गत किया गया?
पंचायत के मूल अभिलेख सुरक्षित हैं या नहीं, और क्या उनका स्वतंत्र सत्यापन कराया जाएगा?
कथित ₹11 लाख की रिकवरी के आदेश की वर्तमान स्थिति क्या है?
जांच में अनियमितता प्रमाणित होने पर संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध क्या नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी?
निष्पक्ष जांच से ही सामने आएगी सच्चाई
ग्राम पंचायत बेलसोंडा का यह मामला केवल कुछ बिलों की वैधता तक सीमित नहीं है। यह पंचायत स्तर पर सार्वजनिक धन के उपयोग, दस्तावेजों की पारदर्शिता और शिकायतों पर प्रशासनिक कार्रवाई की जवाबदेही से भी जुड़ा है।
यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो नियमानुसार जिम्मेदारी तय कर आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं, यदि दस्तावेजों के परीक्षण में आरोप प्रमाणित नहीं होते, तो वास्तविक स्थिति भी सार्वजनिक की जानी चाहिए, ताकि किसी व्यक्ति के विरुद्ध बिना प्रमाण निष्कर्ष न निकाला जाए।
अब निगाहें जिला प्रशासन और SDM कार्यालय पर हैं। क्या 313 पन्नों में प्रस्तुत दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच शुरू होगी? क्या कथित अनियमितताओं से जुड़े रिकॉर्ड का सत्यापन कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाएगी? या फिर शिकायतकर्ता आंदोलन के लिए मजबूर होंगे?
इन सवालों का जवाब प्रशासनिक कार्रवाई और जांच के निष्कर्षों से ही मिलेगा। फिलहाल बेलसोंडा पंचायत में उठे सवालों के बीच ग्रामीणों को पारदर्शी जांच और जवाबदेही का इंतजार है।