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बेलटुकरी में ‘कलेक्टर का आदेश’ भी धूल में दफन! खदानों के ‘कातिल पहिए’ दौड़े तो सड़क बनी मौत का ट्रैक

बेलटुकरी में ‘कलेक्टर का आदेश’ भी धूल में दफन! खदानों के ‘कातिल पहिए’ दौड़े तो सड़क बनी मौत का ट्रैक

तीन महीने पहले फरमान, आज भी गड्ढे और धूल का साम्राज्य..! बारिश ने गड्ढों को पानी में छिपाया, ग्रामीण बोले—अब हादसा हुआ तो जिम्मेदार कौन..?

रिपोर्टर मयंक गुप्ता |
महासमुंद।नेशनल हाईवे से सटे ग्राम पंचायत बेलटुकरी में विकास की तस्वीर इन दिनों गड्ढों, धूल और बदहाल सड़क के रूप में नजर आ रही है। बेलटुकरी से आगे ग्राम पंचायत अछोली और अच्छोला को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मार्ग लंबे समय से खराब हालत में है। सड़क पर जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे बन चुके हैं और इसी रास्ते से प्रतिदिन स्कूली बच्चे, महिलाएं, बुजुर्ग, किसान और आम ग्रामीण आवाजाही करने को मजबूर हैं।
स्थिति तब और गंभीर हो जाती है, जब इसी मार्ग से पत्थर खदानों से निकलने वाले भारी वाहन लगातार गुजरते हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि गिट्टी और पत्थरों से लदे ट्रक-टिपरों की लगातार आवाजाही तथा ओवरलोडिंग के कारण सड़क की हालत लगातार बिगड़ती जा रही है।
अब सड़क सिर्फ जर्जर नहीं है, बल्कि ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बनती जा रही है।

खदानों के ‘भारी पहिए’ और सड़क की हालत बेहाल

बेलटुकरी और आसपास के क्षेत्र में पत्थर खदानें संचालित होने के कारण भारी वाहनों की आवाजाही लगातार बनी रहती है। ग्रामीणों का कहना है कि दिन-रात दौड़ने वाले ट्रक और टिपर सड़क पर लगातार दबाव डाल रहे हैं।
भारी वाहनों के गुजरने के दौरान सड़क से धूल का गुबार उठता है। राहगीरों को सामने का रास्ता तक साफ दिखाई नहीं देता। वहीं सड़क पर बने गहरे गड्ढे दोपहिया वाहन चालकों के लिए दुर्घटना का कारण बन सकते हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि खदानों से मुनाफे का पहिया तो लगातार घूम रहा है, लेकिन सड़क की बदहाली का खामियाजा आम जनता भुगत रही है।

बारिश ने छिपा दिए सड़क के ‘मौत वाले गड्ढे’!

सड़क की बदहाली के बीच अब बारिश ने ग्रामीणों की परेशानी को और बढ़ा दिया है। लगातार बारिश के कारण सड़क पर बने बड़े-बड़े गड्ढों में पानी भर गया है।
सबसे बड़ी समस्या यह है कि पानी भरने के बाद गड्ढों की गहराई का पता ही नहीं चलता।
ऊपर से सड़क सामान्य दिखाई देती है, लेकिन पानी के नीचे गड्ढा कितना गहरा है, इसका अंदाजा वाहन चालक को नहीं हो पाता। अचानक वाहन गड्ढे में उतरने से दोपहिया वाहन चालक असंतुलित हो सकते हैं और गंभीर दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।
खासकर स्कूली बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक है। भारी वाहन सामने से गुजरते हैं तो पानी और कीचड़ राहगीरों पर उछलता है, जबकि गड्ढों से बचने के लिए वाहन चालक सड़क के दूसरे हिस्से में जाने को मजबूर होते हैं।
गड्ढे पहले दिखाई दे रहे थे, बारिश के बाद पानी में छिप गए—अब खतरा दिखता नहीं, सिर्फ महसूस होता है।

तीन महीने पहले कलेक्टर ने दिए थे निर्देश, फिर सड़क क्यों नहीं सुधरी..?

मामला इसलिए और गंभीर हो जाता है क्योंकि ग्रामीणों के अनुसार करीब तीन महीने पहले जिला कलेक्टर विनय कुमार लंगेह स्वयं इस मार्ग से होकर बेलटुकरी पहुंचे थे।
इस दौरान ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों ने सड़क की बदहाली, भारी वाहनों की आवाजाही और खदानों से जुड़ी समस्याओं को लेकर अपनी शिकायत प्रशासन के सामने रखी थी।
ग्रामीणों के अनुसार इसके बाद माइनिंग विभाग के अधिकारियों, खदान संचालकों और स्थानीय प्रतिनिधियों की बैठक बुलाई गई थी। बैठक में सड़क की मरम्मत एवं आवश्यक निर्माण कार्य कराने के निर्देश दिए गए थे।
उस समय ग्रामीणों को उम्मीद थी कि अब सड़क की तस्वीर बदलेगी।
लेकिन ग्रामीणों का दावा है कि तीन महीने गुजर जाने के बाद भी सड़क की हालत में कोई बड़ा बदलाव दिखाई नहीं दे रहा है।
न सड़क का स्थायी समाधान हुआ और न ही ऐसी प्रभावी कार्रवाई नजर आई, जिससे ग्रामीणों को राहत मिल सके।
फरमान हुआ था… लेकिन काम जमीन पर क्यों नहीं उतरा?
अब ग्रामीणों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि कलेक्टर ने सड़क की समस्या को लेकर निर्देश दिए थे तो उन निर्देशों के पालन की निगरानी आखिर किस अधिकारी की जिम्मेदारी थी?
ग्रामीण पूछ रहे हैं—
क्या प्रशासनिक आदेशों का पालन नहीं होने पर जिम्मेदारी तय होगी?

क्या भारी वाहनों और ओवरलोडिंग की जांच की गई?

क्या खदान संचालकों को सड़क के रखरखाव की जिम्मेदारी दी गई..?

यदि निर्देश के बावजूद काम नहीं हुआ तो संबंधित जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब होगी..?

और सबसे बड़ा सवाल—
क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे के बाद ही इस सड़क की सुध लेगा?
‘सड़क है या गड्ढों के बीच बचा रास्ता?’
बेलटुकरी की सड़क की हालत देखकर ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। जगह-जगह उखड़ी सड़क, गहरे गड्ढे, बारिश का पानी और भारी वाहनों की आवाजाही ने इस रास्ते को बेहद जोखिमपूर्ण बना दिया है।
बारिश के दिनों में स्थिति और खतरनाक हो जाती है। पानी से भरे गड्ढों में वाहन का पहिया उतरते ही चालक का संतुलन बिगड़ सकता है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते सड़क की मरम्मत नहीं कराई गई तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।

स्कूल जाने वाले बच्चों पर मंडरा रहा खतरा

इस मार्ग से प्रतिदिन स्कूली बच्चे भी गुजरते हैं। भारी वाहनों की लगातार आवाजाही और सड़क की खराब हालत के बीच बच्चों का सुरक्षित आवागमन अभिभावकों के लिए चिंता का विषय बन गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों को स्कूल जाने के लिए इसी रास्ते का इस्तेमाल करना पड़ता है। ऐसे में प्रशासन को सड़क की मरम्मत के साथ-साथ भारी वाहनों की गति और ओवरलोडिंग पर भी प्रभावी नियंत्रण करना चाहिए।

ग्रामीणों का सवाल साफ है—बच्चों की सुरक्षा पहले या खदानों का कारोबार..?

ग्रामीणों का सब्र टूटा, आंदोलन की चेतावनी
लगातार समस्या बने रहने और अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने से ग्रामीणों का आक्रोश बढ़ रहा है।
स्थानीय लोगों और पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि उन्होंने पहले शांतिपूर्ण तरीके से प्रशासन के सामने अपनी समस्या रखी। उन्हें उम्मीद थी कि कलेक्टर के निर्देश के बाद सड़क की स्थिति सुधरेगी।
लेकिन यदि जल्द ही सड़क की मरम्मत और स्थायी निर्माण की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाया गया तो ग्रामीण चक्काजाम और आंदोलन करने को मजबूर हो सकते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि आंदोलन की स्थिति पैदा होती है तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित विभाग और प्रशासन की होगी।

ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि—

सड़क की तत्काल मरम्मत कराई जाए।

बारिश के कारण पानी से भरे गड्ढों को तत्काल भरा जाए।

भारी और ओवरलोड वाहनों की जांच कर कार्रवाई की जाए।

खदान संचालकों की जिम्मेदारी तय की जाए।

सड़क के नियमित रखरखाव की व्यवस्था की जाए।

स्कूली बच्चों और आम राहगीरों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

तीन महीने पहले दिए गए प्रशासनिक निर्देशों के पालन की समीक्षा की जाए।

अब सवाल सीधा है—‘कलेक्टर का आदेश भारी या खदानों के पहिए..?’

बेलटुकरी की बदहाल सड़क अब केवल ग्रामीणों की परेशानी नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही का सवाल बन चुकी है।
एक तरफ कलेक्टर के निर्देशों की बात सामने आती है, दूसरी तरफ तीन महीने बाद भी ग्रामीण उसी धूल, गड्ढों और भारी वाहनों के बीच सफर करने को मजबूर होने का दावा कर रहे हैं।

बारिश ने हालात और बिगाड़ दिए हैं। गड्ढों में पानी भर गया है, उनकी गहराई दिखाई नहीं देती और हर गुजरता वाहन संभावित खतरे का संकेत दे रहा है।

अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस सड़क को लेकर कब ठोस कदम उठाता है।
क्योंकि बेलटुकरी के ग्रामीण अब सिर्फ आश्वासन नहीं, सड़क पर काम चाहते हैं—वह भी किसी बड़े हादसे से पहले।

सोहम सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल की प्रेरणादायी मुहिम: लभरा खुर्द के बच्चों को मिला शिक्षा का सहारा, साथ में स्वास्थ्य-पर्यावरण के अनमोल टिप्स

सोहम सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल की प्रेरणादायी मुहिम: लभरा खुर्द के बच्चों को मिला शिक्षा का सहारा, साथ में स्वास्थ्य-पर्यावरण के अनमोल टिप्स

रिपोर्टर मयंक गुप्ता/दिन सोमवार / 31 अगस्त 2026
महासमुंद (छत्तीसगढ़)। शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ जोड़ते हुए सोहम सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल ने आस्था वेलफेयर एंड एजुकेशन सोसाइटी तथा सोहम जन सेवा समिति के सहयोग से ग्राम लभरा खुर्द के प्राथमिक एवं मिडिल स्कूल में एक सराहनीय कार्यक्रम आयोजित किया।

आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के 15 विद्यार्थियों को निःशुल्क स्कूल बैग, कॉपी और पेन बांटे गए। उद्देश्य साफ था—संसाधनों की कमी के कारण किसी भी बच्चे की पढ़ाई न रुके और हर बच्चा आगे बढ़ सके।

सोहम सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल के प्रतिनिधि डॉ. युगल चंद्राकर और आस्था वेलफेयर की संस्था प्रमुख श्रीमती मधु तिवारी ने बच्चों को सामग्री सौंपी। डॉ. चंद्राकर ने कहा, “शिक्षा हर बच्चे का अधिकार है। संसाधनों के अभाव में कोई भी बच्चा पीछे न छूटे, इसी सोच से हम यह अभियान चला रहे हैं।”

कार्यक्रम में सिर्फ सामग्री वितरण नहीं हुआ, बल्कि बच्चों को जीवनोपयोगी टिप्स भी दिए गए। ये टिप्स अलग-अलग विषयों पर इस प्रकार हैं:

1 स्वच्छता का टिप (हाथ धोने की सही विधि)

डॉ. युगल चंद्राकर ने बच्चों को बताया कि बीमारियों से बचने के लिए नियमित और सही तरीके से हाथ धोना जरूरी है। साबुन से कम से कम 20 सेकंड तक हाथ रगड़ें, उंगलियों के बीच, नाखूनों के नीचे और कलाई तक अच्छी तरह धोएं। खाने से पहले, शौचालय के बाद और बाहर से आने पर जरूर हाथ धोएं।

2 जल संरक्षण का टिप (“जल है तो कल है”)

पानी की एक-एक बूंद बचाने की आदत डालें। नल खुला न छोड़ें, ब्रश करते समय पानी बंद रखें, और जरूरत से ज्यादा पानी न बहाएं। छोटी-छोटी बचत से ही भविष्य सुरक्षित रहता है।

3 कबाड़ से जुगाड़ का टिप

श्रीमती मधु तिवारी ने समझाया कि घर की बेकार पड़ी वस्तुएं फेंकने के बजाय उनसे नई उपयोगी चीजें बनाई जा सकती हैं। जैसे पुरानी बोतलों से पेन स्टैंड, अखबार से पेपर बैग या सजावटी सामान। इससे कचरा कम होता है और पर्यावरण बचता है।

पौधारोपण और किचन गार्डन का टिप

श्रीमती शोभा शर्मा ने बच्चों से अपील की कि घर के आसपास या स्कूल में छोटे पौधे लगाएं। किचन गार्डन में धनिया, पुदीना जैसी सब्जियां उगाएं। पेड़ लगाने से हवा शुद्ध होती है और तापमान भी नियंत्रित रहता है।

पॉलीथिन से बचाव का टिप

पॉलीथिन का इस्तेमाल पूरी तरह बंद करें। कपड़े या कागज के थैले अपनाएं। पॉलीथिन मिट्टी और पानी दोनों को नुकसान पहुंचाता है, इसलिए पर्यावरण बचाने के लिए प्लास्टिक से दूरी बनाए रखें।
कार्यक्रम का संचालन श्रीमती निरंजना चंद्राकर ने किया, जबकि आभार ज्ञापन श्रीमती तबस्सुम खान ने किया। विद्यालय के प्राचार्य, शिक्षक, छात्र-छात्राएं और संस्थाओं के सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
यह पहल सोहम सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल की उस प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जिसमें स्वास्थ्य सेवा के साथ-साथ समाज के बच्चों को शिक्षा, स्वच्छता और पर्यावरण के प्रति जागरूक बनाया जा रहा है।

महाअभियान: महासमुंद में 200 से अधिक स्ट्रीट फूड वेंडर्स ने ली शपथ, अब ठेले और गुमटियों पर मिलेगा ‘हाइजीन-फर्स्ट’ स्वाद

महाअभियान: महासमुंद में 200 से अधिक स्ट्रीट फूड वेंडर्स ने ली शपथ, अब ठेले और गुमटियों पर मिलेगा ‘हाइजीन-फर्स्ट’ स्वाद

रिपोर्टर मयंक गुप्ता/दिन सोमवार/31 अगस्त 2026
​महासमुंद। शहर में अब आपके पसंदीदा स्ट्रीट फूड का स्वाद न सिर्फ बेहतरीन होगा, बल्कि सेहत के लिहाज से भी पूरी तरह सुरक्षित रहेगा। खाद्य एवं औषधि प्रशासन महासमुंद ने स्ट्रीट फूड वेंडर्स एसोसिएशन (NASVI) और नेस्ले के सहयोग से एक बड़े निःशुल्क खाद्य सुरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया। “सर्व सेफ फूड: सुरक्षित भोजन परोसना एवं बेचना” थीम पर आयोजित इस कार्यशाला में 200 से अधिक महिला और पुरुष फुटपाथ खाद्य विक्रेताओं ने भाग लिया।

​सड़कों पर बिकने वाला खाना भी होगा अब मानक स्तर का

​कार्यक्रम का मुख्य मकसद रेहड़ी और ठेले लगाने वाले छोटे विक्रेताओं को हाइजीन और फूड सेफ्टी के अंतरराष्ट्रीय मानकों की व्यावहारिक जानकारी देना था। आयोजन में खाद्य सुरक्षा अधिकारी शंखनाद भोई ने जोर देकर कहा कि इस प्रशिक्षण का लक्ष्य केवल नियम सिखाना नहीं, बल्कि विक्रेताओं की रोजमर्रा की आदतों में स्वच्छता को शामिल करना है। उन्होंने बताया कि शहर की बड़ी आबादी रोज इन दुकानों पर निर्भर होती है, इसलिए पानी की शुद्धता, व्यक्तिगत सफाई और बर्तनों के रख-रखाव पर ध्यान देना अनिवार्य है।

​FoSTaC ट्रेनर ने दिए सुरक्षा के ‘गोल्डन रूल्स’

​प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञ ट्रेनर विशाल आनंद ने बेहद आसान भाषा और प्रैक्टिकल डेमो के जरिए विक्रेताओं को जरूरी टिप्स दिए:

​क्रॉस-कंटामिनेशन से बचाव: कच्चे और पके हुए खाद्य पदार्थों को हमेशा अलग-अलग रखना।

​तापमान और भंडारण प्रबंधन: भोजन को खराब होने से बचाने के लिए सही तापमान पर स्टोर करना।

​पेयजल और कीट नियंत्रण: खाना पकाने और धोने के लिए केवल सुरक्षित पानी का इस्तेमाल करना और मक्खी-धूल से बचाव के उपाय अपनाना।

​कानूनी मानक: एफएसएसएआई (FSSAI) और खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2006 के तहत तय किए गए स्वच्छता नियमों की पूरी जानकारी दी गई।

​मुफ्त हाइजीन किट और सर्टिफिकेट का वितरण

​कार्यशाला में शामिल सभी 200 से ज्यादा स्ट्रीट वेंडर्स को काम के दौरान इस्तेमाल के लिए एक विशेष ‘हाइजीन किट’ दी गई। इस किट में एप्रन, हेड कैप, ग्लव्स, साबुन, तौलिया और डस्टर शामिल थे। इसके साथ ही विक्रेताओं को FoSTaC प्रशिक्षण प्रमाण-पत्र, NASVI-नेस्ले का संयुक्त सर्टिफिकेट और ‘गोल्डन रूल्स’ बुकलेट भी सौंपी गई।

​आजीविका को मिलेगी मजबूती

​कार्यक्रम में मौजूद NASVI प्रतिनिधि पंकज साहू ने कहा कि स्ट्रीट वेंडर्स शहर की अर्थव्यवस्था और खाद्य संस्कृति का मजबूत हिस्सा हैं। जब वे स्वच्छता का ध्यान रखेंगे, तो ग्राहकों का भरोसा बढ़ेगा और उनकी कमाई में भी इजाफा होगा।
​कार्यक्रम के समापन पर सभी विक्रेताओं ने ग्लव्स, एप्रन और कैप पहनकर ही खाना बनाने, किसी भी हानिकारक रसायन का प्रयोग न करने और ग्राहकों को शुद्ध-सुरक्षित भोजन परोसने की सामूहिक शपथ ली।

आध्यात्मिक चेतना का महापर्व: ब्रह्माकुमारीज़ उपकार भवन में दिव्य अनुभूतियों के साथ संपन्न हुआ रक्षाबंधन महोत्सव

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आध्यात्मिक चेतना का महापर्व: ब्रह्माकुमारीज़ उपकार भवन में दिव्य अनुभूतियों के साथ संपन्न हुआ रक्षाबंधन महोत्सव

रिपोर्टर मयंक गुप्ता/28 अगस्त / दिन शुक्रवार
महासमुंद / तुमगांव रोड स्थित उपकार भवन में आज रक्षा बन्धन के पावन पर्व पर
​प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के स्थानीय सेवाकेंद्र ‘उपकार भवन’ में पवित्रता, स्नेह, शांति और निस्वार्थ प्रेम का पावन पर्व रक्षाबंधन अपार श्रद्धा, उत्साह और धूमधाम के साथ मनाया गया। इस अवसर पर समस्त ईश्वरीय परिवार के सदस्यों ने एकसाथ एकत्रित होकर इस पर्व के गूढ़ आध्यात्मिक रहस्यों को समझा और आत्मसात किया।
​कार्यक्रम का शुभारंभ आत्म-स्मृति के दिव्य वातावरण में हुआ। सेवाकेंद्र संचालिका ब्रह्माकुमारी प्रीति दीदी जी ने उपस्थित सभी श्रद्धालुओं और भाई-बहनों को मस्तक पर आत्म-स्मृति का तिलक लगाया, कलाई पर पवित्रता का रक्षासूत्र (राखी) बांधा और मुख मीठा कराकर परमात्म स्नेह की अनुभूति कराई। इस दौरान सभी साधकों से जीवन में कम से कम एक बुराई या नकारात्मक संस्कार को सदैव के लिए त्यागने का दृढ़ ‘संकल्प पत्र’ भी भरवाया गया।

​राखी केवल शारीरिक रिश्ता नहीं, परमात्मा से पवित्रता का वायदा: बीके प्रीति दीदी

​समारोह को संबोधित करते हुए बीके प्रीति दीदी ने रक्षाबंधन के वास्तविक आध्यात्मिक अर्थ पर प्रकाश डाला:

​आत्मा का परमात्मा से मिलन: रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के शारीरिक या लौकिक संबंधों का त्योहार नहीं है, बल्कि यह सर्वशक्तिमान परमपिता परमात्मा और आत्मा के पवित्र मिलन तथा संपूर्ण पवित्रता की प्रतिज्ञा का अलौकिक पर्व है।

​मस्तक पर तिलक का महत्व: मस्तक के मध्य लगाया जाने वाला तिलक हमें याद दिलाता है कि हम यह नश्वर भौतिक शरीर नहीं हैं, बल्कि भृकुटी के बीच चमकती हुई एक अजर-अमर ‘ज्योति बिंदु आत्मा’ हैं।

​रक्षासूत्र का संदेश: कलाई पर बांधी जाने वाली राखी काम, क्रोध, मोह, लोभ जैसे विकारों और नकारात्मक विचारों से स्वयं को सुरक्षित रखने की आध्यात्मिक ढाल है।

​विश्व बंधुत्व की भावना: हम सभी आत्माएं एक ही परमपिता की संतान हैं, इस नाते हम आपस में भाई-बहन हैं। जब हम परमात्मा से जुड़ते हैं, तो उनकी शक्तियां हमारी हर नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा करती हैं।

​दीदी ने आगे कहा कि जब हम वर्तमान समय में ईश्वर द्वारा दिए जा रहे इस अलौकिक ज्ञान को अपने व्यावहारिक जीवन में धारण करते हैं, तभी सही अर्थों में रक्षाबंधन मनाना सार्थक होता है।

​कार्यक्रम के समापन पर बीके प्रीति दीदी ने सभी उपस्थित भाई-बहनों को परमात्म ब्लेसिंग कार्ड (ईश्वरीय वरदान) प्रदान किए, जिससे सभी का आत्मबल और मनोबल दोगुना हो गया। संपूर्ण प्रांगण ईश्वरीय स्मृतियों और शांति के स्पंदनों से सराबोर रहा।

महासमुंद के लाडलों का फार ईस्ट ज़ोन क्रिकेट प्रतियोगिता में जलवा

महासमुंद के लाडलों का फार ईस्ट ज़ोन क्रिकेट प्रतियोगिता में जलवा

लक्ष्य और अनुराग का ज़ोनल टीम में चयन, नेशनल टीम में जगह बनाने का सुनहरा मौका

रिपोर्टर मयंक गुप्ता /दिन गुरुवार/ 27 अगस्त 2026
​महासमुंद (छत्तीसगढ़)
खेल के मैदान से महासमुंद जिले के लिए एक बड़ी और गर्व करने वाली खबर सामने आई है। सेन्ट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) द्वारा भुवनेश्वर (ओडिशा) में आयोजित प्रतिष्ठित ‘फार ईस्ट ज़ोन अंडर-14 क्रिकेट प्रतियोगिता-2026’ में महासमुंद के दो उभरते हुए युवा क्रिकेटरों—लक्ष्य चंद्राकर और अनुराग वर्मा—ने अपने शानदार प्रदर्शन के दम पर चयनकर्ताओं का ध्यान खींचते हुए ज़ोनल टीम में अपनी जगह पक्की कर ली है।

​चार राज्यों के 1,000 खिलाड़ियों के बीच दिखाई अपनी प्रतिभा

भुवनेश्वर में आयोजित इस रीजनल टूर्नामेंट में ओडिशा, पश्चिम बंगाल, असम और छत्तीसगढ़ के लगभग एक हज़ार होनहार खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था। इतने बड़े पैमाने पर आयोजित प्रतिस्पर्धा में महासमुंद के इन दोनों युवाओं ने अपनी असाधारण प्रतिभा और खेल कौशल का लोहा मनवाया।
​चयन प्रक्रिया को दो कड़े चरणों में पूरा किया गया, जिसके बाद देश के इस ईस्टर्न ज़ोन से सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों को छांटकर कुल चार टीमें गठित की गईं। अब इन चारों टीमों के बीच कल से रोमांचक मुकाबले खेले जाएंगे। इन मैचों में खिलाड़ियों के प्रदर्शन के आधार पर ही आगामी ‘नेशनल सीबीएसई टीम’ का चयन किया जाएगा।

​लक्ष्य ने विकेटकीपिंग तो अनुराग ने स्पिन से बिखेरा जादू

स्थानीय ‘टर्मिनेटर इंटरनेशनल क्रिकेट एकेडमी’ के लिए यह बेहद खास उपलब्धि है:

​लक्ष्य चंद्राकर: चार राज्यों से आए ढेरों प्रतिभाशाली विकेटकीपरों को पीछे छोड़ते हुए लक्ष्य ने अंतिम चार उत्कृष्ट विकेटकीपरों में अपनी जगह बनाई।

​अनुराग वर्मा: अनुराग का चयन एक मारक ऑफ-स्पिनर के रूप में हुआ है, जिनकी फिरकी के आगे विरोधी बल्लेबाज पस्त नजर आए।

​कोचों ने दी बधाई, कहा- युवाओं के लिए प्रेरणादायक

दोनों खिलाड़ियों की इस बड़ी कामयाबी पर टर्मिनेटर क्रिकेट एकेडमी के हेड कोच व डायरेक्टर (NIS कोच) डॉ. शबाब कुरैशी और NIS सर्टिफाइड कोच जमशेद अख्तर ने खुशी जाहिर करते हुए दोनों को बधाई व भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।
​कोचों का कहना है कि इतने बड़े मंच पर चयन होना महासमुंद के क्रिकेट इतिहास के लिए एक बड़ा मील का पत्थर है। लक्ष्य और अनुराग की यह सफलता क्षेत्र के अन्य छोटे बच्चों और युवा खिलाड़ियों को भी खेल के क्षेत्र में कड़ी मेहनत करने और राष्ट्रीय स्तर पर जिले का नाम रोशन करने के लिए प्रेरित करेगी।

‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान: बागबाहरा वन विभाग ने रचा नया कीर्तिमान, घुंचापाली स्कूल में 70 पौधों का रोपण; अब तक 40 हजार से अधिक पौधे वितरित

‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान: बागबाहरा वन विभाग ने रचा नया कीर्तिमान, घुंचापाली स्कूल में 70 पौधों का रोपण; अब तक 40 हजार से अधिक पौधे वितरित

SDM शुभम देव और RFO नवीन वर्मा की मौजूदगी में स्कूली बच्चों संग हुई पौधरोपण, 20-25 ग्राम पंचायतों की मांग पर हरियाली की लहर

रिपोर्टर मयंक गुप्ता/ दिन गुरुवार/27 अगस्त 2026
महासमुंद/बागबाहरा (छत्तीसगढ़)
महासमुंद। पर्यावरण संरक्षण और हरियाली बढ़ाने के राष्ट्रीय अभियान ‘एक पेड़ माँ के नाम’ को गति देते हुए महासमुंद जिले के बागबाहरा वन परिक्षेत्र अंतर्गत ग्राम घुंचापाली स्थित चंडी मंदिर परिसर के शासकीय स्कूल में एक महत्वपूर्ण पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम बागबाहरा वन परिक्षेत्र अधिकारी (RFO) नवीन वर्मा के नेतृत्व में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। मुख्य अतिथि के रूप में बागबाहरा के अनुविभागीय अधिकारी (SDM) शुभम देव तथा ग्राम घुंचापाली की सरपंच देव बरिहा विशेष रूप से उपस्थित रहे।
स्कूली बच्चों, वन विभाग की टीम, SDM कार्यालय के कर्मचारियों और स्थानीय ग्रामीणों ने मिलकर उत्साहपूर्वक भाग लिया। सभी ने चंडी मंदिर परिसर व विद्यालय प्रांगण में 70 फलदार एवं छायादार पौधों का रोपण किया। छात्र-छात्राओं ने अधिकारियों के साथ कुदाल संभालते हुए पर्यावरण संरक्षण का जीवंत संदेश दिया।

RFO नवीन वर्मा ने दिए महत्वपूर्ण तथ्य

पौधरोपण के बाद मीडिया से बातचीत में वन परिक्षेत्र अधिकारी नवीन वर्मा ने बताया कि बागबाहरा वन परिक्षेत्र पर्यावरण संरक्षण के लिए निरंतर सक्रिय है। उन्होंने प्रमुख बिंदु बताए:
अब तक बागबाहरा वन परिक्षेत्र के अंतर्गत लगभग 40 हजार से अधिक पौधे आमजन, संस्थाओं और पंचायतों को वितरित किए जा चुके हैं।
वितरण और रोपण में नीम, पीपल, करांज, आम, बहेड़ा, आंवला, महुआ, कोसम, बेल और शीशम जैसी औषधीय, फलदार तथा छायादार प्रजातियां प्रमुख रूप से शामिल हैं।
क्षेत्र की लगभग 20 से 25 ग्राम पंचायतों ने अपने आधिकारिक लेटर पैड पर आवेदन देकर पौधों की मांग की थी। वन विभाग इन मांगों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा कर रहा है।

अधिकारियों का संदेश

SDM शुभम देव और सरपंच देव बरिहा ने वन विभाग के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान सिर्फ पौधरोपण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए शुद्ध हवा, हरियाली और स्वस्थ पर्यावरण सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण कदम है। दोनों ने स्कूली बच्चों और ग्रामीणों से पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भागीदारी बनाए रखने की अपील की।
इस अवसर पर वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, SDM कार्यालय के कर्मचारी, स्कूल के शिक्षक और बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम ने ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान को स्थानीय स्तर पर मजबूती प्रदान की और बागबाहरा क्षेत्र में हरियाली बढ़ाने की दिशा में एक सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत किया।
बागबाहरा वन विभाग का यह प्रयास न केवल पौधों के वितरण और रोपण तक सीमित है, बल्कि जन-जागरूकता और सामूहिक भागीदारी का भी प्रतीक बन गया है।

महासमुंद में प्रशासनिक लाचारी..! जांच रिपोर्ट और दर्जनों ग्रामीणों की गवाही के बाद भी जिला CEO की ‘रहस्यमयी चुप्पी’ — क्या भ्रष्टाचारियों को मिल रहा है संरक्षण..?

महासमुंद में प्रशासनिक लाचारी..! जांच रिपोर्ट और दर्जनों ग्रामीणों की गवाही के बाद भी जिला CEO की ‘रहस्यमयी चुप्पी’ — क्या भ्रष्टाचारियों को मिल रहा है संरक्षण..?

रिपोर्टर मयंक गुप्ता/दिन गुरुवार/27 अगस्त 2026
​महासमुंद। छत्तीसगढ़ की पंचायती राज व्यवस्था में अनुशासन और पारदर्शिता बनाए रखने के दावे कागजों तक ही सीमित नजर आ रहे हैं। महासमुंद जिले के ग्राम पंचायत खैरा में पदस्थ पंचायत सचिव श्री मोती मेहरा (मोतीलाल मेहरा) पर शासकीय कर्तव्यों की घोर उपेक्षा, पद के दुरुपयोग, अधिकारों के अतिक्रमण और शासन के स्पष्ट निर्देशों की धज्जियां उड़ाने के गंभीर आरोप लगे हैं। मामले में जांच टीम गठित हुई, दर्जनों ग्रामीणों ने गवाही दी और साक्ष्य भी प्रस्तुत किए गए, लेकिन आज पर्यन्त जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) द्वारा कार्रवाई के नाम पर केवल ‘शून्य’ हासिल हुआ है। प्रशासन की इस रहस्यमयी चुप्पी ने पूरी व्यवस्था पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।

क्या है पूरा मामला..?
(24 जून 2026 की घटना)

​दस्तावेजों और शिकायत के अनुसार, 24 जून 2026 को महासमुंद जिले की सभी पंचायतों में ‘प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण विकास भवन’ (संचालक के पत्र क्रमांक GENCOR/13259/2026-SECTION/(PMAY-G)) के तहत अति-महत्वपूर्ण ग्राम सभा की बैठकें आहूत की गई थीं। नियमतः सचिव मोती मेहरा को अपनी मूल पदस्थापना ग्राम पंचायत खैरा में उपस्थित रहकर ग्राम सभा संपन्न करानी थी।
​किंतु आरोप है कि सचिव मोती मेहरा ने शासन के आदेशों को ठेंगा दिखाते हुए अपनी मूल पंचायत खैरा की बैठक का बहिष्कार किया और अपने कार्यक्षेत्र से बाहर ग्राम पंचायत खट्टी पहुंच गए।

पति-पत्नी के पद का ‘गलत फायदा’ और नियमों का खुला उल्लंघन

​ग्राम पंचायत खट्टी में मोती मेहरा की धर्मपत्नी श्रीमती अनिता मेहरा सरपंच पद पर पदस्थ हैं। आरोप है कि सचिव मोती मेहरा ने वहां अपनी पत्नी के साथ मिलकर पंचायत की आधिकारिक कार्यवाही में सीधा हस्तक्षेप किया, ग्रामीणों से विवाद किया और अभद्र व्यवहार तक किया।
​यह कृत्य छत्तीसगढ़ शासन, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के स्पष्ट आदेश (पत्र क्रमांक पंचा./विविध/2010/1009 दिनांक 26.05.2010) का सीधा और प्रत्यक्ष उल्लंघन है। इस आदेश के तहत महिला जनप्रतिनिधियों (सरपंच/पंच) के शासकीय कार्यों में उनके पति या रिश्तेदारों के किसी भी प्रकार के हस्तक्षेप पर पूर्णतः प्रतिबंध लगाया गया है। इसके बावजूद एक जिम्मेदार लोक सेवक द्वारा दूसरी पंचायत में जाकर मनमानी करना अनुशासनहीनता की पराकाष्ठा को दर्शाता है।

6 अगस्त को हुई जांच, दर्जनों ग्रामीणों ने दी गवाही

​मामले की गंभीरता को देखते हुए पत्रकार एवं शिकायतकर्ता मयंक गुप्ता (प्रधान संपादक, बेबाक बयान) ने 15 जुलाई 2026 को जिला पंचायत CEO के समक्ष विस्तृत शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद जनपद पंचायत महासमुंद द्वारा जांच टीम गठित की गई (आदेश क्रमांक पंचा./शिक्षा/2026/1594)।

​06 अगस्त 2026 को ग्राम पंचायत खट्टी के पंचायत भवन में जांच प्रक्रिया संपन्न हुई। जांच अधिकारी (सहायक आंतरिक लेखा परीक्षण एवं कराधान अधिकारी) के समक्ष:

​शिकायतकर्ता ने अपने बयान और तथ्य पेश किए।

​दर्जनों ग्रामीणों ने मौके पर उपस्थित होकर सचिव के अनुचित हस्तक्षेप, अभद्र व्यवहार और कार्यस्थल से गायब रहने की पुष्टि की।

​बैठक संबंधी फोटोग्राफ, उपस्थिति रजिस्टर की प्रविष्टियां और शासकीय आदेशों की प्रतियां साक्ष्य के रूप में सौंपी गईं।

​जांच पूरी… साक्ष्य मजबूत… फिर भी CEO की कार्रवाई ‘शून्य’!

​जांच प्रक्रिया पूर्ण होने और शिकायत सही पाए जाने के पर्याप्त साक्ष्य मौजूद होने के बावजूद, हफ्तों बीत जाने के बाद भी महासमुंद जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) के स्तर से कोई

दंडात्मक या निलंबन की कार्रवाई नहीं की गई है।

​स्थानीय निवासियों और जागरूक नागरिकों का कहना है कि:
​”आवेदक के बयान और दर्जनों ग्रामीणों के साक्ष्य के बाद भी यदि जिला पंचायत CEO खामोश बैठे हैं, तो यह प्रशासन की लाचार व्यवस्था को दर्शाता है। ऐसी ढिलाई से भ्रष्ट और स्वेच्छाचारी कर्मचारियों का मनोबल बढ़ता है और वे बेखौफ होकर घूमते हैं।”

​शासन-प्रशासन से तीखे सवाल:

1 ​क्या नियम केवल आम जनता के लिए हैं..?

जब शासन का स्पष्ट आदेश है कि सरपंच पति पंचायत में हस्तक्षेप नहीं करेंगे, तो सचिव पर तत्काल कार्रवाई क्यों नहीं हुई..?

2 ​जांच रिपोर्ट पर धूल क्यों जम रही है..?

क्या जिला पंचायत कार्यालय में बैठे जिम्मेदार अधिकारी किसी दबाव में काम कर रहे हैं या दोषी सचिव को बचाने की कोशिश हो रही है..?

3 ​ग्राम सभा जैसी संवैधानिक संस्था का अपमान कब तक बर्दाश्त होगा..?

अपनी पदस्थापना छोड़कर दूसरी पंचायत में उपद्रव करने वाले सचिव पर निलंबन की गाज कब गिरेगी..?

​मांग:

​शिकायतकर्ता एवं क्षेत्रवासियों ने मांग की है कि छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम एवं लोक सेवक आचरण नियमों के तहत आरोपी सचिव मोती मेहरा को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाए और मामले की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच कराकर वैधानिक दंडात्मक कार्रवाई की जाए, ताकि पंचायती राज व्यवस्था की गरिमा बहाल हो सके।

महासमुंद में ₹200 का डिजिटल ट्रांसफर बना ‘खूनी विवाद’: गुलाब स्टोर्स के संचालक पर ग्राहक को पीटने और जान से मारने की धमकी का आरोप

महासमुंद में ₹200 का डिजिटल ट्रांसफर बना ‘खूनी विवाद’: गुलाब स्टोर्स के संचालक पर ग्राहक को पीटने और जान से मारने की धमकी का आरोप

रिपोर्टर मयंक गुप्ता/दिन बुधवार/26 अगस्त 2026
महासमुंद/ जिले के कोतवाली थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले पीटीयाझर (लाल दाढ़ी पारा) में एक हैरान कर देने वाली हिंसक घटना सामने आई है। महज ₹200 के ऑनलाइन ट्रांसफर को लेकर हुए विवाद में ‘गुलाब स्टोर्स’ के संचालक पर एक ग्राहक के साथ खुलेआम बदसलूकी, मारपीट और जान से मारने की धमकी देने के संगीन आरोप लगे हैं। घटना के बाद से पीड़ित परिवार खौफ के साये में जीने को मजबूर है।

कैश की जरूरत में पहुंचे थे दुकान, फिर शुरू हुआ ‘तांडव’

प्राप्त जानकारी के अनुसार, सुभाष नगर (वार्ड क्रमांक 22) के निवासी 40 वर्षीय बसंत निर्मलकर उर्फ बासु को आपातकालीन स्थिति में ₹200 नगद की सख्त आवश्यकता थी। वे तत्काल नगदी प्राप्त करने के लिए लाल दाढ़ी पारा स्थित ‘गुलाब स्टोर्स’ पहुंचे। बासु ने अपने मोबाइल फोन से ‘GULAB KIRANA STORE’ के आधिकारिक खाते में UPI के जरिए ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर कर दिए।
​डिजिटल ट्रांजैक्शन (ID: T2608260758538647213625, UTR: 214630611390) सफलतापूर्वक पूरा होने की पुष्टि होते ही पीड़ित ने जब नगद राशि मांगी, तो आरोप है कि दुकान संचालक गुलाब साहू अचानक आपा खो बैठा।

गंभीर आरोप: अकारण गाली-गलौज और जानलेवा धमकी

पीड़ित बसंत निर्मलकर ने आपबीती सुनाते हुए बताया कि पैसे ट्रांसफर होते ही दुकान संचालक का व्यवहार पूरी तरह बदल गया। बिना किसी बहस या उकसावे के आरोपी गुलाब साहू ने सरेआम भद्दी-भद्दी गालियां देनी शुरू कर दीं। जब ग्राहक ने इस दुर्व्यवहार का विरोध किया, तो आरोपी और उग्र हो गया तथा पीड़ित पर शारीरिक हमला कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आरोपी ने जान से मारने की खुली धमकी देते हुए कहा, “यहाँ से तुरंत भाग जा, नहीं तो जान से खत्म कर दूंगा!”
​माहौल अत्यधिक तनावपूर्ण और डरावना होने के कारण पीड़ित अपनी जान बचाकर किसी तरह वहां से भाग निकला।

एसपी से न्याय की गुहार, FIR दर्ज करने की मांग

घटना से भयभीत पीड़ित basant बासु निर्मलकर ने न्याय की उम्मीद में जिला पुलिस अधीक्षक (SP) महासमुंद को लिखित शिकायत सौंपी है। आवेदन पत्र के साथ निम्नलिखित प्रमाण संलग्न किए गए हैं:

​डिजिटल साक्ष्य: PhonePe की सफल ट्रांजैक्शन रसीद।
​व्हाट्सएप स्क्रीनशॉट: घटना के बाद मोबाइल पर आए कथित धमकी भरे मैसेज।

प्रत्यक्षदर्शी: मौके पर मौजूद स्थानीय नागरिकों को गवाह बनाया गया है।

​पीड़ित ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सुसंगत धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज करने, आरोपी दुकानदार को गिरफ्तार करने और अपने परिवार को तुरंत सुरक्षा प्रदान करने की मांग की है।

शहर में आक्रोश, पुलिस की चुप्पी पर सवाल

शहर के व्यस्त इलाके में ₹200 जैसी मामूली बात पर दुकानदार के इस आक्रामक और हिंसक रवैये से स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या अब दुकानों पर डिजिटल पेमेंट करना या मदद मांगना भी जान का जोखिम बन चुका है? फिलहाल पुलिस प्रशासन की ओर से इस मामले में आधिकारिक बयान आना बाकी है, जबकि पीड़ित परिवार न्याय के इंतजार में पुलिस की त्वरित कार्रवाई की राह देख रहा है।

महासमुंद में फूटा शिक्षकों का गुस्सा: 30 साल के अनुभव के बाद TET की शर्त पर भड़के, कलेक्ट्रेट का घेराव कर दी आर-पार की चेतावनी!

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महासमुंद में फूटा शिक्षकों का गुस्सा: 30 साल के अनुभव के बाद TET की शर्त पर भड़के, कलेक्ट्रेट का घेराव कर दी आर-पार की चेतावनी!

रिपोर्टर मयंक गुप्ता/26 अगस्त 2026/दिन बुधवार
​महासमुंद। पुरानी नीतियों को दरकिनार कर शिक्षकों पर जबरन नए नियम थोपने के विरोध में छत्तीसगढ़ शिक्षक संघर्ष मोर्चा (जिला इकाई महासमुंद) ने आर-पार की लड़ाई का बिगुल फूंक दिया है। जिला संयोजक नारायण चौधरी एवं विजय कुमार धृतलहरे की संयुक्त अगुवाई में जिलेभर के हजारों शिक्षकों ने सड़कों पर उतरकर शासन की नीतियों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया।
​माँ भवानी दुर्गा मंदिर बरौंडा चौक से शुरू हुई यह विशाल रैली कलेक्ट्रेट पहुंची। इस दौरान शिक्षकों ने ‘शिक्षक एकता जिंदाबाद’ और प्रशासनिक हठधर्मिता के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। रैली के अंत में मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री, मुख्य सचिव, शिक्षा सचिव और संचालक डीपीआई के नाम जिला कलेक्टर महासमुंद को 5 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा गया।

​अनुभव पर अन्याय क्यों..? 30 साल बाद TET थोपना बर्दाश्त नहीं

रैली को संबोधित करते हुए प्रांतीय व जिला स्तरीय प्रमुख नेताओं—नारायण चौधरी, विजय कुमार धृतलहरे, सुधीर प्रधान, पूर्णानंद मिश्रा और केशवराम साहू ने सरकार की मंशा पर सीधे सवाल खड़े किए। नेताओं ने कहा:
​”जब शिक्षकों की नियुक्ति तात्कालिक सेवा शर्तों और मान्य अर्हताओं के आधार पर की गई थी, तो आज दशकों बाद नई शर्तें क्यों थोपी जा रही हैं? 30 वर्षों का अध्यापन अनुभव रखने वाले शिक्षकों पर अचानक TET (शिक्षक पात्रता परीक्षा) अनिवार्य करना समझ से परे है। सरकार चाहे तो TET की बाध्यता को शिथिल कर सकती है, लेकिन ऐसा न करके लाखों शिक्षकों को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है।”

​पुरानी पेंशन, वेतन विसंगति और राजपत्र 2026 पर मुख्य मांगें:

शिक्षकों ने कलेक्ट्रेट के सामने अपनी 5 प्रमुख मांगों को प्रमुखता से रखा:

​TET की अनिवार्यता समाप्त हो:

सेवा सुरक्षा के डर में जी रहे लाखों शिक्षकों को राहत देने के लिए TET की बाध्यता तुरंत खत्म की जाए।

​प्रथम नियुक्ति तिथि से पेंशन की गणना:

संविलयन जब प्रथम नियुक्ति तिथि से माना गया है, तो पुरानी पेंशन (OPS) का लाभ भी उसी आधार पर मिले।

​वेतन विसंगति का समाधान:

केंद्रीय वेतनमान संरचना के आधार पर वेतन की कमियों को दूर किया जाए और बी.एड. धारियों के लिए ब्रिज कोर्स लागू हो।

​राजपत्र 2026 में सुधार:

भर्ती एवं पदोन्नति नियम 2026 की विसंगतियों को दूर कर पिछले 2 दशकों से कार्यरत LB संवर्ग के व्याख्याताओं को नियमित व्याख्याताओं के समकक्ष या नियमानुसार न्यायपूर्ण वरिष्ठता दी जाए।

​पदोन्नति कोटा में वृद्धि:

एलबी (LB) संवर्ग के लिए पूर्व में जारी पदोन्नति कोटे को शिक्षकों की कुल संख्या के अनुपात में बढ़ाया जाए।

​मांगें पूरी न होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी

विकासखंड संयोजकों (राजेश साहू, विनोद यादव, महेंद्र चौधरी, गजेंद्र नायक, ललित साहू, नीलाम्बर नायक, लवकुमार पटेल) और सह-संयोजकों ने स्पष्ट कर दिया कि यह तो सिर्फ चेतावनी थी। यदि शासन-प्रशासन ने ज्ञापन पर जल्द ठोस और सकारात्मक कदम नहीं उठाए, तो आने वाले समय में महासमुंद जिले का पूरा शिक्षक संवर्ग राज्य स्तर पर एक बड़े और उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगा, जिसकी पूरी जवाबदेही शासन की होगी।

​हजारों शिक्षकों की उपस्थिति ने दिखाई एकजुटता

इस प्रदर्शन में जिले के कौना-कौना से आए हजारों शिक्षक-शिक्षिकाओं की उपस्थिति ने संगठन की ताकत दिखाई। कार्यक्रम की पूरी जानकारी जिला सचिव नंदकुमार साहू एवं जिला मीडिया प्रभारी प्रदीप वर्मा ने दी।

​”काम हम करें, सजा हमें मिले… यह कैसा न्याय?” 150 मकान का टारगेट पूरा, फिर भी जेब खाली; कोरबा के आवास मित्रों का हल्लाबोल

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रिपोर्टर मयंक गुप्ता/ 26 अगस्त 2026/ दिन बुधवार
​पॉड़ी उपरोड़ा (कोरबा):
प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण (PMAY-G) को धरातल पर उतारने वाले ‘आवास मित्र’ खुद गंभीर आर्थिक तंगी और मानसिक तनाव के दौर से गुजर रहे हैं। हितग्राहियों की उदासीनता और शासन की नीतियों से परेशान आवास मित्र संघ

पॉड़ी उपरोड़ा (जिला कोरबा) ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए अपनी प्रमुख मांगों को लेकर ध्यान आकर्षित किया है।
​आवास संघ के प्रतिनिधियों का कहना है कि वे दिन-रात दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों में घूमकर हितग्राहियों को तकनीकी मार्गदर्शन देने, निर्माण सामग्री उपलब्ध कराने से लेकर जियो-टैगिंग (Geotagging) और मॉनिटरिंग का काम पूरी जिम्मेदारी से करते हैं।

​”काम हम करें, सजा हमें मिले”

​संघ का आरोप है कि शासन के नियमानुसार यदि 6 महीने के भीतर आवास पूर्ण होता है, तभी आवास मित्र को प्रति आवास 1000 रुपये की प्रोत्साहन राशि मिलती है। यदि हितग्राही या ठेकेदार की लापरवाही से समय पर काम पूरा नहीं हो पाता, तो उल्टे आवास मित्र के मानदेय से 100 रुपये प्रतिमाह की दर से कटौती कर ली जाती है।
​संघ ने कहा कि “आवास निर्माण की तीनों किस्तें और मनरेगा मजदूरी का पैसा सीधे हितग्राही के खाते में जाता है, जिस पर हमारा कोई नियंत्रण नहीं होता। हितग्राही के पारिवारिक कारणों या उदासीनता से काम रुकने का खामियाजा हमें भुगतना पड़ रहा है।”

​150 आवास का लक्ष्य, फिर भी खाली हाथ

​वर्ष 2024-25 में प्रत्येक आवास मित्र को 150 आवास निर्माण कराने का बड़ा लक्ष्य दिया गया था। इसके बावजूद शासन की नीतियों और जमीनी अड़चनों के चलते अधिकांश आवास मित्र अपना पेट्रोल खर्च तक नहीं निकाल पाए।

​आवास मित्र संघ की प्रमुख मांगें:

1 ​शेष राशि का तुरंत भुगतान: वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 में जियो-टैग के आधार पर बाकी प्रोत्साहन राशि का तत्काल भुगतान किया जाए।

2 ​समय सीमा बढ़े: आवास निर्माण की समय सीमा 6 माह से बढ़ाकर पुनः 1 वर्ष की जाए ताकि हितग्राहियों को पर्याप्त समय मिल सके।

3 ​कटौती पर रोक: प्रोत्साहन राशि में की जा रही मानदेय कटौती की व्यवस्था तुरंत समाप्त हो।

4 ​भत्ते अलग से मिले: काम के दौरान होने वाले पेट्रोल खर्च, मोबाइल खर्च और स्टेशनरी खर्च का अलग से भुगतान किया जाए।

5 ​नियमितीकरण और 15 हजार मानदेय: आगामी PMAY-2.0 योजना में पूर्णकालिक पद (आवास सहायक/पंचायत सहायक/डेटा एंट्री ऑपरेटर) सृजित कर 15,000/- रुपये प्रतिमाह निश्चित मानदेय पर नियुक्ति दी जाए।

​आवास मित्र संघ, पॉड़ी उपरोड़ा (जिला-कोरबा)

ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया, तो वे अपने अधिकारों के लिए आगे कदम उठाने को मजबूर होंगे।