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समृद्धि का रहस्यमयी जाल: डिजिटल हस्ताक्षरों पर कब्ज़ा, फर्जी बिलों की बारिश और 39 लाख के पुराने घोटाले का नया अध्याय

समृद्धि का रहस्यमयी जाल: डिजिटल हस्ताक्षरों पर कब्ज़ा, फर्जी बिलों की बारिश और 39 लाख के पुराने घोटाले का नया अध्याय

प्रधान संपादक मयंक गुप्ता
महासमुंद (छत्तीसगढ़) | 09 सितंबर 2026/बुधवार
जनपद पंचायत महासमुंद में शासकीय खजाने की रखवाली करने वाले तंत्र में एक ऐसा रहस्यमयी खेल चल रहा है, जिसमें डिजिटल हस्ताक्षर (DSC) को हथियार बनाकर फर्जी भुगतानों का साम्राज्य खड़ा कर लिया गया है। सरपंचों और सचिवों के डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट अवैध रूप से अपने कब्जे में रखकर भुगतान की पूरी प्रक्रिया को नियंत्रित करने का आरोप एक महिला कर्मचारी पर लगा है। यह ताजा मामला सिर्फ मौजूदा अनियमितताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि कोरोना काल के 39 लाख रुपये के बहुचर्चित घोटाले से भी सीधे जुड़ता नजर आ रहा है।

DSC पर अवैध कब्ज़ा और ब्लैकमेलिंग का खुला खेल

आधिकारिक शिकायत पत्र (क्रमांक 01, दिनांक 04 अगस्त 2026) के अनुसार, जनपद पंचायत महासमुंद की संकाय शाखा में पदस्थ श्रीमती समृद्धि शर्मा के खिलाफ विभिन्न ग्राम पंचायतों के सरपंचों और सचिवों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि उनके डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट अवैध रूप से अपने पास जमा रख लिए गए हैं। इन DSC के जरिए भुगतान की पूरी प्रक्रिया खुद संचालित की जा रही है।
कार्य से जुड़े वैध दस्तावेजों के बजाय अपूर्ण और कोरे बिल-वाउचर अपलोड करके शासकीय धनराशि निकाल ली जा रही है। जब सरपंच या सचिव अपनी DSC वापस मांगते हैं, तो उन्हें टरकाया जाता है। शिकायतों में यह भी उल्लेख है कि खुलेआम धमकी दी जाती है—“यदि भुगतान हमारे माध्यम से नहीं हुआ तो DSC निरस्त कर दी जाएगी या पंचायत का भुगतान रोक दिया जाएगा।” यह स्थिति न केवल वित्तीय नियमों का उल्लंघन है, बल्कि पंचायती राज व्यवस्था की स्वायत्तता पर भी सीधा प्रहार है।

39 लाख के पुराने घोटाले से जुड़ते तार

ताजा DSC कांड ने वर्ष 2019-20 के कोरोना काल के 15वें वित्त आयोग की 39 लाख रुपये की राशि के गबन को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। महामारी के दौरान जब लॉकडाउन और धारा 144 लागू थी, तब सैनिटाइजर, मास्क और सुरक्षा सामग्री खरीदने के नाम पर फर्जी बिल-वाउचर लगाकर केंद्रीय राशि का बंदरबांट किया गया था।
वर्तमान में DSC दबाकर फर्जी भुगतान का जो तरीका अपनाया जा रहा है, उससे यही संकेत मिलता है कि उस पुराने घोटाले में भी संकाय शाखा और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका रही होगी। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि इसी सिंडिकेट को बचाने के लिए उच्च स्तर पर फाइलों को दबाने की कोशिशें जारी हैं।

जांच रिपोर्ट जमा, फिर भी कार्यवाही शून्य

39 लाख रुपये के घोटाले की जांच पिछले दो वर्षों से लगभग ठप पड़ी हुई है। कभी जांच अधिकारी का तबादला हो जाता है, कभी वे सेवानिवृत्त हो जाते हैं। हाल ही में शिकायतकर्ताओं ने वर्तमान जनपद पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) मिषा कोसले से मुलाकात की। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपने स्तर पर निष्पक्ष जांच पूरी करके रिपोर्ट जिला पंचायत कार्यालय में जमा कर दी है।
अब सवाल यह उठता है कि जब जनपद CEO की जांच रिपोर्ट जमा हो चुकी है, तो जिला पंचायत के वर्तमान मुख्य कार्यपालन अधिकारी एस.आलोक और उनका अमला कार्यवाही करने से क्यों बच रहा है..? शिकायतकर्ताओं के अनुसार, जब इस विषय पर जानकारी मांगी जाती है, तो गैर-जिम्मेदाराना जवाब दिया जाता है—“इसमें और क्या कार्यवाही करेंगे?” क्या जिला पंचायत कार्यालय के किसी कर्मचारी की संलिप्तता के कारण कार्रवाई रोकी जा रही है? यह सवाल अभी भी अनुत्तरित है।

शासन-प्रशासन को चेतावनी

जनता के हक का पैसा
डकारना और फर्जी दस्तावेजों के सहारे शासकीय खजाने को चूना लगाना गंभीर अपराध है। केंद्र सरकार की योजनाओं के पैसे का इस तरह गबन प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा है।

यदि शासन-प्रशासन द्वारा इस पूरे प्रकरण में संलिप्त अधिकारियों और कर्मचारियों पर त्वरित, निष्पक्ष जांच कर कड़ी दंडात्मक और विधिक कार्रवाई (FIR सहित) नहीं की गई, तो आने वाले दिनों में नए-नए मामलों और काली करतूतों का सिलसिलेवार खुलासा किया जाता रहेगा। पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग अब सिर्फ शिकायतकर्ताओं की नहीं, बल्कि पूरे जनपद की आम जनता की भी बन गई है।

महासमुंद जिला पंचायत में फैला ‘सन्नाटा’ या साठगांठ का ‘साया’..? जांच में दोषी सिद्ध, ग्रामीणों की गवाही पक्की… फिर भी जिला CEO की ‘रहस्यमयी चुप्पी’ पर उठे तीखे सवाल..!

महासमुंद जिला पंचायत में फैला ‘सन्नाटा’ या साठगांठ का ‘साया’..? जांच में दोषी सिद्ध, ग्रामीणों की गवाही पक्की… फिर भी जिला CEO की ‘रहस्यमयी चुप्पी’ पर उठे तीखे सवाल..!

​खास रिपोर्ट: मयंक गुप्ता (प्रधान संपादक, बेबाक बयान)
दिनांक: 08 सितंबर 2026
स्थान: महासमुंद (छत्तीसगढ़)

​महासमुंद। क्या महासमुंद जिला पंचायत में नियम-कानून ताक पर रख दिए गए हैं..? क्या छत्तीसगढ़ की पंचायती राज व्यवस्था में पारदर्शिता का ढिंढोरा पीटने वाले आला अधिकारी खुद भ्रष्टाचारियों और मनचले कर्मचारियों की ढाल बन चुके हैं..? ग्राम पंचायत खैरा और खट्टी के चर्चित ‘सचिव कांड’ में अब तक की प्रशासनिक निष्क्रियता तो यही इशारा कर रही है।

​घटना के पूरे ढाई महीने बीत चुके हैं, जांच टीम ने 6 अगस्त को ही अपनी रिपोर्ट में दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया, दर्जनों ग्रामीणों ने कड़े शब्दों में गवाही दर्ज कराई, लेकिन इसके बावजूद महासमुंद जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) और उप संचालक (पंचायत) का ‘कार्रवाई मीटर’ शून्य पर अटका हुआ है।
​आखिर किस दबाव या ‘खास नजर-ए-करम’ के तहत दोषी सचिव को खुलेआम अभयदान दिया जा रहा है..?

​कांड का पूरा लेखा-जोखा: जब अपनी पंचायत छोड़ पत्नी के ‘शक्ति केंद्र’ पहुंचे सचिव साहब

​24 जून 2026 की मनमानी: शासन के स्पष्ट आदेश थे कि ‘प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण’ के तहत अति-महत्वपूर्ण ग्राम सभा में अपनी मूल पदस्थापना ग्राम पंचायत खैरा में सचिव मोतीलाल मेहरा मौजूद रहें। लेकिन साहब ने शासकीय आदेशों की धज्जियां उड़ाते हुए खैरा का बहिष्कार किया और पहुंच गए अपनी धर्मपत्नी (सरपंच श्रीमती अनिता मेहरा) की पंचायत खट्टी।

​शासकीय नियमों को ठेंगा: ग्राम पंचायत खट्टी में अपनी पत्नी के पद का धौंस जमाते हुए सचिव मोती मेहरा ने न सिर्फ पंचायत की आधिकारिक कार्यवाही में अवैध हस्तक्षेप किया, बल्कि ग्रामीणों से सीधे भिड़ गए।

​26.05.2010 के आदेश का खुला उल्लंघन: शासन का नियम साफ कहता है कि महिला प्रतिनिधियों के कार्यों में पति या रिश्तेदार का हस्तक्षेप पूरी तरह प्रतिबंधित है। एक सरकारी लोक सेवक द्वारा दूसरी पंचायत में जाकर गुंडागर्दी और मनमानी करना अनुशासनहीनता का सबसे घिनौना उदाहरण है।

​6 अगस्त की जांच: सबूत पक्के, गवाही ठोस… फिर फाइलों पर धूल क्यों..?

​शिकायतकर्ता मयंक गुप्ता की शिकायत पर जनपद पंचायत द्वारा गठित जांच टीम ने 06 अगस्त 2026 को खट्टी के पंचायत भवन में जांच पूरी की थी।

​दर्जनों ग्रामीणों ने खोला मोर्चा: ग्रामीणों ने मौके पर उपस्थित होकर सचिव के अनुचित दबाव, अभद्र व्यवहार और मूल पदस्थापना से नदारद रहने की पुष्टि की।

​पुख्ता साक्ष्य समर्पित: बैठक के फोटोग्राफ, रजिस्टर की प्रविष्टियां और सरकारी आदेशों की धज्जियां उड़ाने के सबूत जांच अधिकारी को सौंप दिए गए।

​सबूत हाथ में हैं, बयान दर्ज हैं… फिर भी जिला पंचायत CEO और उप संचालक की कलम क्यों ठिठक रही है..?

​जनता के चुभते सवाल: दोषी कौन—जिला CEO या उप संचालक..?

1 ​कागजी नियम या असली शह? जब महिला सरपंच के शासकीय कार्यों में पति के हस्तक्षेप पर पूर्ण पाबंदी है, तो वर्दीधारी लोक सेवक (सचिव) पर अब तक FIR या निलंबन की गाज क्यों नहीं गिरी..?

2 ​कुर्सी का दबाव या पर्दे के पीछे का खेल? जांच रिपोर्ट ठंडे बस्ते में डालना इस बात का साफ संकेत है कि या तो जिला पंचायत के जिम्मेदार अधिकारी किसी राजनीतिक/वित्तीय दबाव में हैं, या फिर दोषी सचिव को बचाने की सुनियोजित साठगांठ जारी है।

3 ​संवैधानिक संस्था का अपमान कब तक? ग्राम सभा जैसी पवित्र संस्था का अपमान करके दूसरी पंचायत में उपद्रव मचाने वाले सचिव के हौसले इतने बुलंद क्यों हैं..?

​आक्रोशित ग्रामीणों और जागरूक जनता की सीधी चेतावनी

​क्षेत्र के ग्रामीणों और शिकायतकर्ता का साफ कहना है कि छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम और लोक सेवक आचरण नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाने वाले सचिव मोती मेहरा को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाए।

​यदि जिला प्रशासन और जिला पंचायत CEO अब भी अपनी ‘रहस्यमयी चुप्पी’ नहीं तोड़ते हैं, तो यह मान लिया जाएगा कि महासमुंद में भ्रष्टाचार और स्वेच्छाचारिता को सीधे जिला पंचायत कार्यालय से ही संरक्षण मिल रहा है!

महासमुंद – रिटायरमेंट के 180 दिन बाकी, फिर भी DEO बीएल देवांगन का ‘संरक्षण’ — भुरका के प्रधान पाठक धनुर्जय पटेल पर गंभीर आरोपों के बावजूद क्यों नहीं गिर रही कार्रवाई की गाज..?

महासमुंद – रिटायरमेंट के 180 दिन बाकी, फिर भी DEO बीएल देवांगन का ‘संरक्षण’ — भुरका के प्रधान पाठक धनुर्जय पटेल पर गंभीर आरोपों के बावजूद क्यों नहीं गिर रही कार्रवाई की गाज..?

जांच में 264 में से सिर्फ 91 दिन आए हेडमास्टर, फिर भी मेहरबान बने DEO; क्या रिटायरमेंट का मिल रहा ‘सुरक्षा कवच’..?

रिपोर्टर मयंक गुप्ता/ मंगलवार / 08 सितम्बर 2026
​महासमुंद (छत्तीसगढ़)। शासकीय प्राथमिक शाला भुरका में पदस्थ प्रधान पाठक धनुर्जय पटेल का मामला इन दिनों जिला शिक्षा महकमे में चर्चा और जन-आक्रोश का केंद्र बना हुआ है। गंभीर विभागीय गड़बड़ियों, लंबे समय से गैर-हाजिरी और अनुशासनहीनता के पुख्ता सबूत मिलने के बाद भी जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) बी.एल. देवांगन की चुप्पी पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। मामले में सबसे बड़ा पेंच यह है कि आरोपी प्रधान पाठक की सेवानिवृत्ति में अब सिर्फ 180 दिन (छह महीने) का समय बचा है, जिसे लेकर कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या विभाग कार्रवाई टालकर उन्हें सुरक्षित सम्मानजनक विदाई देने की फिराक में है..?

​क्लासरूम में सोए मिले प्रधान पाठक, बच्चों का भविष्य दांव पर

​पूरा मामला 13 अगस्त 2026 को सामने आया, जब निरीक्षण और मीडिया कवरेज के दौरान प्राथमिक शाला भुरका में अजीबो-गरीब स्थिति देखने को मिली। पहली और दूसरी कक्षा के छोटे बच्चे जहां जमीन पर बिलखते-खेलते नजर आए, वहीं प्रधान पाठक धनुर्जय पटेल स्कूल परिसर में कथित तौर पर बेखबर सोए हुए पाए गए। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि शिक्षक का अक्सर शराब के नशे में आना, लेट पहुंचना और कक्षा में सो जाना रोज की बात बन चुकी थी।
​मामला बिगड़ने पर उसी दिन शाम 6 बजे के बाद प्रधान पाठक ने आनन-फानन में ऑनलाइन छुट्टी का आवेदन ठोका और एक निजी क्लीनिक से मेडिकल सर्टिफिकेट बनवाकर पेश कर दिया। जबकि नियमतः शासकीय कर्मचारियों के स्वास्थ्य अवकाश के लिए सरकारी अस्पताल के विशेषज्ञ (MBBS) डॉक्टर की रिपोर्ट अनिवार्य होती है।

​जांच रिपोर्ट में खुली पोल:
सालभर में 173 दिन गायब!

​विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) द्वारा गठित जांच टीम (प्राचार्य भरत सिंह साहू एवं संकुल समन्वयक लक्ष्मीनाथ सहसरिया) की पड़ताल में जो आंकड़े सामने आए, वे हैरान करने वाले हैं:

​उपस्थिति का रिकॉर्ड: जुलाई 2025 से जुलाई 2026 के बीच कुल 264 कार्य दिवसों में से प्रधान पाठक महज 91 दिन ही स्कूल पहुंचे। यानी साल के ज्यादातर हिस्से में वे स्वेच्छा से अनुपस्थित रहे।

​जांच के दिन भी फरार: 13 अगस्त के हंगामे के ठीक अगले दिन 14 अगस्त को जब जांच टीम स्कूल पहुंची, तो प्रधान पाठक फिर से गायब मिले। फोन करने पर उन्होंने अधिकारियों का कॉल तक उठाना मुनासिब नहीं समझा।

​अचानक गायब होने की आदत: जांच में पुष्टि हुई कि घटना के दिन वे सुबह 10:15 बजे आए, हाजिरी रजिस्टर में दस्तखत किए और दोपहर 12:30 बजे बिना बताए रफूचक्कर हो गए।
​इसके बावजूद, रिपोर्ट के अंतिम निष्कर्ष में ‘शराब के नशे का प्रत्यक्ष मेडिकल साक्ष्य न मिलने’ की बात कहकर ढील देने की कोशिश की गई, जिसे स्थानीय लोग और अभिभावक मामले को ठंडे बस्ते में डालने का प्रयास बता रहे हैं।

​नियम-कानून ताक पर: आखिर क्यों नहीं हो रहा निलंबन?

​जांच अधिकारियों और संकुल समन्वयक ने स्पष्ट लिखा है कि स्कूल के अनुशासन और बच्चों की पढ़ाई के हित में शिक्षक पर immediate disciplinary action (तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई) बेहद जरूरी है। इसके बावजूद 18 साल से एक ही स्कूल में डटे शिक्षक पर डीईओ स्तर से अब तक कोई एक्शन नहीं लिया गया है।

​कानूनी प्रावधानों के तहत आरोपी शिक्षक पर ये नियम सीधे तौर पर लागू होते हैं:

​छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 (नियम 3): शासकीय सेवक के लिए कर्तव्यपरायणता और गरिमामय आचरण अनिवार्य है। बिना सूचना गायब रहना और बच्चों की पढ़ाई से खिलवाड़ ‘कदाचरण’ (Misconduct) की श्रेणी में आता है।

​छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 (नियम 9 एवं 10/11): गंभीर चूक और गैर-जिम्मेदाराना रवैये पर नियम 9 के तहत तत्काल निलंबन (Suspension) और नियम 10/11 के तहत वेतन वृद्धि रोकने या बर्खास्तगी जैसी सख्त शास्तियां लगाने का स्पष्ट अधिकार सक्षम प्राधिकारी के पास है।

​कलेक्टर से हस्तक्षेप की मांग

​बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ और विभागीय उदासीनता को देखते हुए स्थानीय अभिभावकों और सजग नागरिकों ने कलेक्टर महासमुंद से गुहार लगाई है। मांग की जा रही है कि घोर लापरवाही के आरोपी धनुर्जय पटेल को अविलंब निलंबित किया जाए और मामले को दबाने में शामिल जिम्मेदार अफसरों की भूमिका की भी जांच हो। अब देखना यह होगा कि प्रशासन कड़ा रुख अपनाता है या रिटायरमेंट की आड़ में मामला यूं ही फाइलों में दबा रह जाएगा।

शिक्षा में आध्यात्मिकता का समावेश ही करेगा विश्व नवनिर्माण: ब्रह्माकुमारीज़ द्वारा भव्य शिक्षक सम्मान समारोह आयोजित

शिक्षा में आध्यात्मिकता का समावेश ही करेगा विश्व नवनिर्माण: ब्रह्माकुमारीज़ द्वारा भव्य शिक्षक सम्मान समारोह आयोजित

रिपोर्टर मयंक गुप्ता/ दिन सोमवार/ 07 सितंबर 2026
​महासमुंद / प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के शिक्षाविद प्रभाग द्वारा शिक्षक दिवस के उपलक्ष्य में एक भव्य ‘शिक्षक सम्मान कार्यक्रम’ का आयोजन बड़े ही हर्षोल्लास के साथ किया गया। इस विशेष समारोह में महासमुंद जिले के विभिन्न स्कूल एवं कॉलेजों से आए उत्कृष्ट शिक्षकों को उनकी अतुलनीय सेवाओं के लिए सम्मानित किया गया।
​कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन एवं प्रभु स्मृति के साथ भक्तिमय माहौल में हुई। इसके पश्चात सभी नवागत अतिथियों का पुष्पगुच्छ देकर भावभिना स्वागत किया गया। मंच का कुशल एवं प्रभावपूर्ण संचालन बीके दोमेश्वरी दीदी द्वारा किया गया।

​मूल्य आधारित शिक्षा से ही होगा स्वर्णिम समाज का निर्माण

​रायपुर से पधारीं मुख्य वक्ता बीके चंद्रकला दीदी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि विश्व नवनिर्माण की नींव मूल्य आधारित शिक्षा पर टिकी है। जब तक शिक्षा के साथ आध्यात्मिकता का समावेश नहीं होगा, तब तक नई पीढ़ी में उच्च नैतिक संस्कारों का बीजारोपण संभव नहीं है।

​उन्होंने ‘शिक्षक’ शब्द की अनूठी व्याख्या करते हुए कहा:

​शि (शिखर): जो विद्यार्थियों को सफलता के शिखर तक पहुँचाए।

​क्ष (क्षमा): जो क्षमाशीलता का गुण सिखाए।

​क (कमजोरी मिटाने वाला): जो बच्चों की आंतरिक कमजोरियों को दूर करे।

​उन्होंने शिक्षकों को ‘लव एंड लॉ’ (प्रेम और अनुशासन) का संतुलन बनाए रखने की सलाह दी। उन्होंने जोर देकर कहा कि विद्यार्थियों में मूल्यों का विकास करने से पहले शिक्षकों को स्वयं उन आदर्शों, मूल्यों और शांति (साइलेंस) को अपने जीवन में धारण करना होगा।

​किताबी ज्ञान से आगे बढ़कर बच्चों का मार्गदर्शन करें:
सुजाता विश्वनाथन

​समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद वृंदावन स्कूल की डायरेक्टर सुजाता विश्वनाथन ने कहा कि एक सच्चे शिक्षक को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रहना चाहिए। जब शिक्षक व्यावहारिक और नैतिक शिक्षा देंगे, तभी शिक्षक दिवस मनाने की सार्थकता सिद्ध होगी।
​कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में क्षेत्रीय विधायक माननीय योगेश्वर राजू सिंहा की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिन्होंने शिक्षकों के राष्ट्र निर्माण में योगदान की मुक्तकंठ से सराहना की।

​परमपिता परमात्मा ही सर्वश्रेष्ठ शिक्षक: बीके प्रीति दीदी

​सेवाकेंद्र संचालिका ब्रह्माकुमारी प्रीति दीदी ने अपने आशीर्वचन में कहा कि इस सृष्टि का सबसे महान और सच्चा शिक्षक वह परमपिता परमात्मा ही है। राजयोग मेडिटेशन के नियमित अभ्यास से हम ईश्वर से जुड़कर अपने भीतर दिव्य संस्कारों का समावेश कर सकते हैं। इससे समाज में एक श्रेष्ठ शिक्षक और अनुशासित विद्यार्थी का सुंदर उदाहरण प्रस्तुत किया जा सकता है।
​कार्यक्रम के समापन अवसर पर उपस्थित सभी सम्मानित शिक्षकों एवं अतिथियों को ईश्वरीय सौगात और प्रसाद भेंट कर उनका आभार व्यक्त किया गया।

बेलटुकरी में ‘कलेक्टर का आदेश’ भी धूल में दफन! खदानों के ‘कातिल पहिए’ दौड़े तो सड़क बनी मौत का ट्रैक

बेलटुकरी में ‘कलेक्टर का आदेश’ भी धूल में दफन! खदानों के ‘कातिल पहिए’ दौड़े तो सड़क बनी मौत का ट्रैक

तीन महीने पहले फरमान, आज भी गड्ढे और धूल का साम्राज्य..! बारिश ने गड्ढों को पानी में छिपाया, ग्रामीण बोले—अब हादसा हुआ तो जिम्मेदार कौन..?

रिपोर्टर मयंक गुप्ता |
महासमुंद।नेशनल हाईवे से सटे ग्राम पंचायत बेलटुकरी में विकास की तस्वीर इन दिनों गड्ढों, धूल और बदहाल सड़क के रूप में नजर आ रही है। बेलटुकरी से आगे ग्राम पंचायत अछोली और अच्छोला को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मार्ग लंबे समय से खराब हालत में है। सड़क पर जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे बन चुके हैं और इसी रास्ते से प्रतिदिन स्कूली बच्चे, महिलाएं, बुजुर्ग, किसान और आम ग्रामीण आवाजाही करने को मजबूर हैं।
स्थिति तब और गंभीर हो जाती है, जब इसी मार्ग से पत्थर खदानों से निकलने वाले भारी वाहन लगातार गुजरते हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि गिट्टी और पत्थरों से लदे ट्रक-टिपरों की लगातार आवाजाही तथा ओवरलोडिंग के कारण सड़क की हालत लगातार बिगड़ती जा रही है।
अब सड़क सिर्फ जर्जर नहीं है, बल्कि ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बनती जा रही है।

खदानों के ‘भारी पहिए’ और सड़क की हालत बेहाल

बेलटुकरी और आसपास के क्षेत्र में पत्थर खदानें संचालित होने के कारण भारी वाहनों की आवाजाही लगातार बनी रहती है। ग्रामीणों का कहना है कि दिन-रात दौड़ने वाले ट्रक और टिपर सड़क पर लगातार दबाव डाल रहे हैं।
भारी वाहनों के गुजरने के दौरान सड़क से धूल का गुबार उठता है। राहगीरों को सामने का रास्ता तक साफ दिखाई नहीं देता। वहीं सड़क पर बने गहरे गड्ढे दोपहिया वाहन चालकों के लिए दुर्घटना का कारण बन सकते हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि खदानों से मुनाफे का पहिया तो लगातार घूम रहा है, लेकिन सड़क की बदहाली का खामियाजा आम जनता भुगत रही है।

बारिश ने छिपा दिए सड़क के ‘मौत वाले गड्ढे’!

सड़क की बदहाली के बीच अब बारिश ने ग्रामीणों की परेशानी को और बढ़ा दिया है। लगातार बारिश के कारण सड़क पर बने बड़े-बड़े गड्ढों में पानी भर गया है।
सबसे बड़ी समस्या यह है कि पानी भरने के बाद गड्ढों की गहराई का पता ही नहीं चलता।
ऊपर से सड़क सामान्य दिखाई देती है, लेकिन पानी के नीचे गड्ढा कितना गहरा है, इसका अंदाजा वाहन चालक को नहीं हो पाता। अचानक वाहन गड्ढे में उतरने से दोपहिया वाहन चालक असंतुलित हो सकते हैं और गंभीर दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।
खासकर स्कूली बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक है। भारी वाहन सामने से गुजरते हैं तो पानी और कीचड़ राहगीरों पर उछलता है, जबकि गड्ढों से बचने के लिए वाहन चालक सड़क के दूसरे हिस्से में जाने को मजबूर होते हैं।
गड्ढे पहले दिखाई दे रहे थे, बारिश के बाद पानी में छिप गए—अब खतरा दिखता नहीं, सिर्फ महसूस होता है।

तीन महीने पहले कलेक्टर ने दिए थे निर्देश, फिर सड़क क्यों नहीं सुधरी..?

मामला इसलिए और गंभीर हो जाता है क्योंकि ग्रामीणों के अनुसार करीब तीन महीने पहले जिला कलेक्टर विनय कुमार लंगेह स्वयं इस मार्ग से होकर बेलटुकरी पहुंचे थे।
इस दौरान ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों ने सड़क की बदहाली, भारी वाहनों की आवाजाही और खदानों से जुड़ी समस्याओं को लेकर अपनी शिकायत प्रशासन के सामने रखी थी।
ग्रामीणों के अनुसार इसके बाद माइनिंग विभाग के अधिकारियों, खदान संचालकों और स्थानीय प्रतिनिधियों की बैठक बुलाई गई थी। बैठक में सड़क की मरम्मत एवं आवश्यक निर्माण कार्य कराने के निर्देश दिए गए थे।
उस समय ग्रामीणों को उम्मीद थी कि अब सड़क की तस्वीर बदलेगी।
लेकिन ग्रामीणों का दावा है कि तीन महीने गुजर जाने के बाद भी सड़क की हालत में कोई बड़ा बदलाव दिखाई नहीं दे रहा है।
न सड़क का स्थायी समाधान हुआ और न ही ऐसी प्रभावी कार्रवाई नजर आई, जिससे ग्रामीणों को राहत मिल सके।
फरमान हुआ था… लेकिन काम जमीन पर क्यों नहीं उतरा?
अब ग्रामीणों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि कलेक्टर ने सड़क की समस्या को लेकर निर्देश दिए थे तो उन निर्देशों के पालन की निगरानी आखिर किस अधिकारी की जिम्मेदारी थी?
ग्रामीण पूछ रहे हैं—
क्या प्रशासनिक आदेशों का पालन नहीं होने पर जिम्मेदारी तय होगी?

क्या भारी वाहनों और ओवरलोडिंग की जांच की गई?

क्या खदान संचालकों को सड़क के रखरखाव की जिम्मेदारी दी गई..?

यदि निर्देश के बावजूद काम नहीं हुआ तो संबंधित जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब होगी..?

और सबसे बड़ा सवाल—
क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे के बाद ही इस सड़क की सुध लेगा?
‘सड़क है या गड्ढों के बीच बचा रास्ता?’
बेलटुकरी की सड़क की हालत देखकर ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। जगह-जगह उखड़ी सड़क, गहरे गड्ढे, बारिश का पानी और भारी वाहनों की आवाजाही ने इस रास्ते को बेहद जोखिमपूर्ण बना दिया है।
बारिश के दिनों में स्थिति और खतरनाक हो जाती है। पानी से भरे गड्ढों में वाहन का पहिया उतरते ही चालक का संतुलन बिगड़ सकता है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते सड़क की मरम्मत नहीं कराई गई तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।

स्कूल जाने वाले बच्चों पर मंडरा रहा खतरा

इस मार्ग से प्रतिदिन स्कूली बच्चे भी गुजरते हैं। भारी वाहनों की लगातार आवाजाही और सड़क की खराब हालत के बीच बच्चों का सुरक्षित आवागमन अभिभावकों के लिए चिंता का विषय बन गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों को स्कूल जाने के लिए इसी रास्ते का इस्तेमाल करना पड़ता है। ऐसे में प्रशासन को सड़क की मरम्मत के साथ-साथ भारी वाहनों की गति और ओवरलोडिंग पर भी प्रभावी नियंत्रण करना चाहिए।

ग्रामीणों का सवाल साफ है—बच्चों की सुरक्षा पहले या खदानों का कारोबार..?

ग्रामीणों का सब्र टूटा, आंदोलन की चेतावनी
लगातार समस्या बने रहने और अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने से ग्रामीणों का आक्रोश बढ़ रहा है।
स्थानीय लोगों और पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि उन्होंने पहले शांतिपूर्ण तरीके से प्रशासन के सामने अपनी समस्या रखी। उन्हें उम्मीद थी कि कलेक्टर के निर्देश के बाद सड़क की स्थिति सुधरेगी।
लेकिन यदि जल्द ही सड़क की मरम्मत और स्थायी निर्माण की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाया गया तो ग्रामीण चक्काजाम और आंदोलन करने को मजबूर हो सकते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि आंदोलन की स्थिति पैदा होती है तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित विभाग और प्रशासन की होगी।

ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि—

सड़क की तत्काल मरम्मत कराई जाए।

बारिश के कारण पानी से भरे गड्ढों को तत्काल भरा जाए।

भारी और ओवरलोड वाहनों की जांच कर कार्रवाई की जाए।

खदान संचालकों की जिम्मेदारी तय की जाए।

सड़क के नियमित रखरखाव की व्यवस्था की जाए।

स्कूली बच्चों और आम राहगीरों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

तीन महीने पहले दिए गए प्रशासनिक निर्देशों के पालन की समीक्षा की जाए।

अब सवाल सीधा है—‘कलेक्टर का आदेश भारी या खदानों के पहिए..?’

बेलटुकरी की बदहाल सड़क अब केवल ग्रामीणों की परेशानी नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही का सवाल बन चुकी है।
एक तरफ कलेक्टर के निर्देशों की बात सामने आती है, दूसरी तरफ तीन महीने बाद भी ग्रामीण उसी धूल, गड्ढों और भारी वाहनों के बीच सफर करने को मजबूर होने का दावा कर रहे हैं।

बारिश ने हालात और बिगाड़ दिए हैं। गड्ढों में पानी भर गया है, उनकी गहराई दिखाई नहीं देती और हर गुजरता वाहन संभावित खतरे का संकेत दे रहा है।

अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस सड़क को लेकर कब ठोस कदम उठाता है।
क्योंकि बेलटुकरी के ग्रामीण अब सिर्फ आश्वासन नहीं, सड़क पर काम चाहते हैं—वह भी किसी बड़े हादसे से पहले।

सोहम सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल की प्रेरणादायी मुहिम: लभरा खुर्द के बच्चों को मिला शिक्षा का सहारा, साथ में स्वास्थ्य-पर्यावरण के अनमोल टिप्स

सोहम सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल की प्रेरणादायी मुहिम: लभरा खुर्द के बच्चों को मिला शिक्षा का सहारा, साथ में स्वास्थ्य-पर्यावरण के अनमोल टिप्स

रिपोर्टर मयंक गुप्ता/दिन सोमवार / 31 अगस्त 2026
महासमुंद (छत्तीसगढ़)। शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ जोड़ते हुए सोहम सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल ने आस्था वेलफेयर एंड एजुकेशन सोसाइटी तथा सोहम जन सेवा समिति के सहयोग से ग्राम लभरा खुर्द के प्राथमिक एवं मिडिल स्कूल में एक सराहनीय कार्यक्रम आयोजित किया।

आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के 15 विद्यार्थियों को निःशुल्क स्कूल बैग, कॉपी और पेन बांटे गए। उद्देश्य साफ था—संसाधनों की कमी के कारण किसी भी बच्चे की पढ़ाई न रुके और हर बच्चा आगे बढ़ सके।

सोहम सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल के प्रतिनिधि डॉ. युगल चंद्राकर और आस्था वेलफेयर की संस्था प्रमुख श्रीमती मधु तिवारी ने बच्चों को सामग्री सौंपी। डॉ. चंद्राकर ने कहा, “शिक्षा हर बच्चे का अधिकार है। संसाधनों के अभाव में कोई भी बच्चा पीछे न छूटे, इसी सोच से हम यह अभियान चला रहे हैं।”

कार्यक्रम में सिर्फ सामग्री वितरण नहीं हुआ, बल्कि बच्चों को जीवनोपयोगी टिप्स भी दिए गए। ये टिप्स अलग-अलग विषयों पर इस प्रकार हैं:

1 स्वच्छता का टिप (हाथ धोने की सही विधि)

डॉ. युगल चंद्राकर ने बच्चों को बताया कि बीमारियों से बचने के लिए नियमित और सही तरीके से हाथ धोना जरूरी है। साबुन से कम से कम 20 सेकंड तक हाथ रगड़ें, उंगलियों के बीच, नाखूनों के नीचे और कलाई तक अच्छी तरह धोएं। खाने से पहले, शौचालय के बाद और बाहर से आने पर जरूर हाथ धोएं।

2 जल संरक्षण का टिप (“जल है तो कल है”)

पानी की एक-एक बूंद बचाने की आदत डालें। नल खुला न छोड़ें, ब्रश करते समय पानी बंद रखें, और जरूरत से ज्यादा पानी न बहाएं। छोटी-छोटी बचत से ही भविष्य सुरक्षित रहता है।

3 कबाड़ से जुगाड़ का टिप

श्रीमती मधु तिवारी ने समझाया कि घर की बेकार पड़ी वस्तुएं फेंकने के बजाय उनसे नई उपयोगी चीजें बनाई जा सकती हैं। जैसे पुरानी बोतलों से पेन स्टैंड, अखबार से पेपर बैग या सजावटी सामान। इससे कचरा कम होता है और पर्यावरण बचता है।

पौधारोपण और किचन गार्डन का टिप

श्रीमती शोभा शर्मा ने बच्चों से अपील की कि घर के आसपास या स्कूल में छोटे पौधे लगाएं। किचन गार्डन में धनिया, पुदीना जैसी सब्जियां उगाएं। पेड़ लगाने से हवा शुद्ध होती है और तापमान भी नियंत्रित रहता है।

पॉलीथिन से बचाव का टिप

पॉलीथिन का इस्तेमाल पूरी तरह बंद करें। कपड़े या कागज के थैले अपनाएं। पॉलीथिन मिट्टी और पानी दोनों को नुकसान पहुंचाता है, इसलिए पर्यावरण बचाने के लिए प्लास्टिक से दूरी बनाए रखें।
कार्यक्रम का संचालन श्रीमती निरंजना चंद्राकर ने किया, जबकि आभार ज्ञापन श्रीमती तबस्सुम खान ने किया। विद्यालय के प्राचार्य, शिक्षक, छात्र-छात्राएं और संस्थाओं के सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
यह पहल सोहम सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल की उस प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जिसमें स्वास्थ्य सेवा के साथ-साथ समाज के बच्चों को शिक्षा, स्वच्छता और पर्यावरण के प्रति जागरूक बनाया जा रहा है।

महाअभियान: महासमुंद में 200 से अधिक स्ट्रीट फूड वेंडर्स ने ली शपथ, अब ठेले और गुमटियों पर मिलेगा ‘हाइजीन-फर्स्ट’ स्वाद

महाअभियान: महासमुंद में 200 से अधिक स्ट्रीट फूड वेंडर्स ने ली शपथ, अब ठेले और गुमटियों पर मिलेगा ‘हाइजीन-फर्स्ट’ स्वाद

रिपोर्टर मयंक गुप्ता/दिन सोमवार/31 अगस्त 2026
​महासमुंद। शहर में अब आपके पसंदीदा स्ट्रीट फूड का स्वाद न सिर्फ बेहतरीन होगा, बल्कि सेहत के लिहाज से भी पूरी तरह सुरक्षित रहेगा। खाद्य एवं औषधि प्रशासन महासमुंद ने स्ट्रीट फूड वेंडर्स एसोसिएशन (NASVI) और नेस्ले के सहयोग से एक बड़े निःशुल्क खाद्य सुरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया। “सर्व सेफ फूड: सुरक्षित भोजन परोसना एवं बेचना” थीम पर आयोजित इस कार्यशाला में 200 से अधिक महिला और पुरुष फुटपाथ खाद्य विक्रेताओं ने भाग लिया।

​सड़कों पर बिकने वाला खाना भी होगा अब मानक स्तर का

​कार्यक्रम का मुख्य मकसद रेहड़ी और ठेले लगाने वाले छोटे विक्रेताओं को हाइजीन और फूड सेफ्टी के अंतरराष्ट्रीय मानकों की व्यावहारिक जानकारी देना था। आयोजन में खाद्य सुरक्षा अधिकारी शंखनाद भोई ने जोर देकर कहा कि इस प्रशिक्षण का लक्ष्य केवल नियम सिखाना नहीं, बल्कि विक्रेताओं की रोजमर्रा की आदतों में स्वच्छता को शामिल करना है। उन्होंने बताया कि शहर की बड़ी आबादी रोज इन दुकानों पर निर्भर होती है, इसलिए पानी की शुद्धता, व्यक्तिगत सफाई और बर्तनों के रख-रखाव पर ध्यान देना अनिवार्य है।

​FoSTaC ट्रेनर ने दिए सुरक्षा के ‘गोल्डन रूल्स’

​प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञ ट्रेनर विशाल आनंद ने बेहद आसान भाषा और प्रैक्टिकल डेमो के जरिए विक्रेताओं को जरूरी टिप्स दिए:

​क्रॉस-कंटामिनेशन से बचाव: कच्चे और पके हुए खाद्य पदार्थों को हमेशा अलग-अलग रखना।

​तापमान और भंडारण प्रबंधन: भोजन को खराब होने से बचाने के लिए सही तापमान पर स्टोर करना।

​पेयजल और कीट नियंत्रण: खाना पकाने और धोने के लिए केवल सुरक्षित पानी का इस्तेमाल करना और मक्खी-धूल से बचाव के उपाय अपनाना।

​कानूनी मानक: एफएसएसएआई (FSSAI) और खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2006 के तहत तय किए गए स्वच्छता नियमों की पूरी जानकारी दी गई।

​मुफ्त हाइजीन किट और सर्टिफिकेट का वितरण

​कार्यशाला में शामिल सभी 200 से ज्यादा स्ट्रीट वेंडर्स को काम के दौरान इस्तेमाल के लिए एक विशेष ‘हाइजीन किट’ दी गई। इस किट में एप्रन, हेड कैप, ग्लव्स, साबुन, तौलिया और डस्टर शामिल थे। इसके साथ ही विक्रेताओं को FoSTaC प्रशिक्षण प्रमाण-पत्र, NASVI-नेस्ले का संयुक्त सर्टिफिकेट और ‘गोल्डन रूल्स’ बुकलेट भी सौंपी गई।

​आजीविका को मिलेगी मजबूती

​कार्यक्रम में मौजूद NASVI प्रतिनिधि पंकज साहू ने कहा कि स्ट्रीट वेंडर्स शहर की अर्थव्यवस्था और खाद्य संस्कृति का मजबूत हिस्सा हैं। जब वे स्वच्छता का ध्यान रखेंगे, तो ग्राहकों का भरोसा बढ़ेगा और उनकी कमाई में भी इजाफा होगा।
​कार्यक्रम के समापन पर सभी विक्रेताओं ने ग्लव्स, एप्रन और कैप पहनकर ही खाना बनाने, किसी भी हानिकारक रसायन का प्रयोग न करने और ग्राहकों को शुद्ध-सुरक्षित भोजन परोसने की सामूहिक शपथ ली।

आध्यात्मिक चेतना का महापर्व: ब्रह्माकुमारीज़ उपकार भवन में दिव्य अनुभूतियों के साथ संपन्न हुआ रक्षाबंधन महोत्सव

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आध्यात्मिक चेतना का महापर्व: ब्रह्माकुमारीज़ उपकार भवन में दिव्य अनुभूतियों के साथ संपन्न हुआ रक्षाबंधन महोत्सव

रिपोर्टर मयंक गुप्ता/28 अगस्त / दिन शुक्रवार
महासमुंद / तुमगांव रोड स्थित उपकार भवन में आज रक्षा बन्धन के पावन पर्व पर
​प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के स्थानीय सेवाकेंद्र ‘उपकार भवन’ में पवित्रता, स्नेह, शांति और निस्वार्थ प्रेम का पावन पर्व रक्षाबंधन अपार श्रद्धा, उत्साह और धूमधाम के साथ मनाया गया। इस अवसर पर समस्त ईश्वरीय परिवार के सदस्यों ने एकसाथ एकत्रित होकर इस पर्व के गूढ़ आध्यात्मिक रहस्यों को समझा और आत्मसात किया।
​कार्यक्रम का शुभारंभ आत्म-स्मृति के दिव्य वातावरण में हुआ। सेवाकेंद्र संचालिका ब्रह्माकुमारी प्रीति दीदी जी ने उपस्थित सभी श्रद्धालुओं और भाई-बहनों को मस्तक पर आत्म-स्मृति का तिलक लगाया, कलाई पर पवित्रता का रक्षासूत्र (राखी) बांधा और मुख मीठा कराकर परमात्म स्नेह की अनुभूति कराई। इस दौरान सभी साधकों से जीवन में कम से कम एक बुराई या नकारात्मक संस्कार को सदैव के लिए त्यागने का दृढ़ ‘संकल्प पत्र’ भी भरवाया गया।

​राखी केवल शारीरिक रिश्ता नहीं, परमात्मा से पवित्रता का वायदा: बीके प्रीति दीदी

​समारोह को संबोधित करते हुए बीके प्रीति दीदी ने रक्षाबंधन के वास्तविक आध्यात्मिक अर्थ पर प्रकाश डाला:

​आत्मा का परमात्मा से मिलन: रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के शारीरिक या लौकिक संबंधों का त्योहार नहीं है, बल्कि यह सर्वशक्तिमान परमपिता परमात्मा और आत्मा के पवित्र मिलन तथा संपूर्ण पवित्रता की प्रतिज्ञा का अलौकिक पर्व है।

​मस्तक पर तिलक का महत्व: मस्तक के मध्य लगाया जाने वाला तिलक हमें याद दिलाता है कि हम यह नश्वर भौतिक शरीर नहीं हैं, बल्कि भृकुटी के बीच चमकती हुई एक अजर-अमर ‘ज्योति बिंदु आत्मा’ हैं।

​रक्षासूत्र का संदेश: कलाई पर बांधी जाने वाली राखी काम, क्रोध, मोह, लोभ जैसे विकारों और नकारात्मक विचारों से स्वयं को सुरक्षित रखने की आध्यात्मिक ढाल है।

​विश्व बंधुत्व की भावना: हम सभी आत्माएं एक ही परमपिता की संतान हैं, इस नाते हम आपस में भाई-बहन हैं। जब हम परमात्मा से जुड़ते हैं, तो उनकी शक्तियां हमारी हर नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा करती हैं।

​दीदी ने आगे कहा कि जब हम वर्तमान समय में ईश्वर द्वारा दिए जा रहे इस अलौकिक ज्ञान को अपने व्यावहारिक जीवन में धारण करते हैं, तभी सही अर्थों में रक्षाबंधन मनाना सार्थक होता है।

​कार्यक्रम के समापन पर बीके प्रीति दीदी ने सभी उपस्थित भाई-बहनों को परमात्म ब्लेसिंग कार्ड (ईश्वरीय वरदान) प्रदान किए, जिससे सभी का आत्मबल और मनोबल दोगुना हो गया। संपूर्ण प्रांगण ईश्वरीय स्मृतियों और शांति के स्पंदनों से सराबोर रहा।

महासमुंद के लाडलों का फार ईस्ट ज़ोन क्रिकेट प्रतियोगिता में जलवा

महासमुंद के लाडलों का फार ईस्ट ज़ोन क्रिकेट प्रतियोगिता में जलवा

लक्ष्य और अनुराग का ज़ोनल टीम में चयन, नेशनल टीम में जगह बनाने का सुनहरा मौका

रिपोर्टर मयंक गुप्ता /दिन गुरुवार/ 27 अगस्त 2026
​महासमुंद (छत्तीसगढ़)
खेल के मैदान से महासमुंद जिले के लिए एक बड़ी और गर्व करने वाली खबर सामने आई है। सेन्ट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) द्वारा भुवनेश्वर (ओडिशा) में आयोजित प्रतिष्ठित ‘फार ईस्ट ज़ोन अंडर-14 क्रिकेट प्रतियोगिता-2026’ में महासमुंद के दो उभरते हुए युवा क्रिकेटरों—लक्ष्य चंद्राकर और अनुराग वर्मा—ने अपने शानदार प्रदर्शन के दम पर चयनकर्ताओं का ध्यान खींचते हुए ज़ोनल टीम में अपनी जगह पक्की कर ली है।

​चार राज्यों के 1,000 खिलाड़ियों के बीच दिखाई अपनी प्रतिभा

भुवनेश्वर में आयोजित इस रीजनल टूर्नामेंट में ओडिशा, पश्चिम बंगाल, असम और छत्तीसगढ़ के लगभग एक हज़ार होनहार खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था। इतने बड़े पैमाने पर आयोजित प्रतिस्पर्धा में महासमुंद के इन दोनों युवाओं ने अपनी असाधारण प्रतिभा और खेल कौशल का लोहा मनवाया।
​चयन प्रक्रिया को दो कड़े चरणों में पूरा किया गया, जिसके बाद देश के इस ईस्टर्न ज़ोन से सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों को छांटकर कुल चार टीमें गठित की गईं। अब इन चारों टीमों के बीच कल से रोमांचक मुकाबले खेले जाएंगे। इन मैचों में खिलाड़ियों के प्रदर्शन के आधार पर ही आगामी ‘नेशनल सीबीएसई टीम’ का चयन किया जाएगा।

​लक्ष्य ने विकेटकीपिंग तो अनुराग ने स्पिन से बिखेरा जादू

स्थानीय ‘टर्मिनेटर इंटरनेशनल क्रिकेट एकेडमी’ के लिए यह बेहद खास उपलब्धि है:

​लक्ष्य चंद्राकर: चार राज्यों से आए ढेरों प्रतिभाशाली विकेटकीपरों को पीछे छोड़ते हुए लक्ष्य ने अंतिम चार उत्कृष्ट विकेटकीपरों में अपनी जगह बनाई।

​अनुराग वर्मा: अनुराग का चयन एक मारक ऑफ-स्पिनर के रूप में हुआ है, जिनकी फिरकी के आगे विरोधी बल्लेबाज पस्त नजर आए।

​कोचों ने दी बधाई, कहा- युवाओं के लिए प्रेरणादायक

दोनों खिलाड़ियों की इस बड़ी कामयाबी पर टर्मिनेटर क्रिकेट एकेडमी के हेड कोच व डायरेक्टर (NIS कोच) डॉ. शबाब कुरैशी और NIS सर्टिफाइड कोच जमशेद अख्तर ने खुशी जाहिर करते हुए दोनों को बधाई व भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।
​कोचों का कहना है कि इतने बड़े मंच पर चयन होना महासमुंद के क्रिकेट इतिहास के लिए एक बड़ा मील का पत्थर है। लक्ष्य और अनुराग की यह सफलता क्षेत्र के अन्य छोटे बच्चों और युवा खिलाड़ियों को भी खेल के क्षेत्र में कड़ी मेहनत करने और राष्ट्रीय स्तर पर जिले का नाम रोशन करने के लिए प्रेरित करेगी।

‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान: बागबाहरा वन विभाग ने रचा नया कीर्तिमान, घुंचापाली स्कूल में 70 पौधों का रोपण; अब तक 40 हजार से अधिक पौधे वितरित

‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान: बागबाहरा वन विभाग ने रचा नया कीर्तिमान, घुंचापाली स्कूल में 70 पौधों का रोपण; अब तक 40 हजार से अधिक पौधे वितरित

SDM शुभम देव और RFO नवीन वर्मा की मौजूदगी में स्कूली बच्चों संग हुई पौधरोपण, 20-25 ग्राम पंचायतों की मांग पर हरियाली की लहर

रिपोर्टर मयंक गुप्ता/ दिन गुरुवार/27 अगस्त 2026
महासमुंद/बागबाहरा (छत्तीसगढ़)
महासमुंद। पर्यावरण संरक्षण और हरियाली बढ़ाने के राष्ट्रीय अभियान ‘एक पेड़ माँ के नाम’ को गति देते हुए महासमुंद जिले के बागबाहरा वन परिक्षेत्र अंतर्गत ग्राम घुंचापाली स्थित चंडी मंदिर परिसर के शासकीय स्कूल में एक महत्वपूर्ण पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम बागबाहरा वन परिक्षेत्र अधिकारी (RFO) नवीन वर्मा के नेतृत्व में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। मुख्य अतिथि के रूप में बागबाहरा के अनुविभागीय अधिकारी (SDM) शुभम देव तथा ग्राम घुंचापाली की सरपंच देव बरिहा विशेष रूप से उपस्थित रहे।
स्कूली बच्चों, वन विभाग की टीम, SDM कार्यालय के कर्मचारियों और स्थानीय ग्रामीणों ने मिलकर उत्साहपूर्वक भाग लिया। सभी ने चंडी मंदिर परिसर व विद्यालय प्रांगण में 70 फलदार एवं छायादार पौधों का रोपण किया। छात्र-छात्राओं ने अधिकारियों के साथ कुदाल संभालते हुए पर्यावरण संरक्षण का जीवंत संदेश दिया।

RFO नवीन वर्मा ने दिए महत्वपूर्ण तथ्य

पौधरोपण के बाद मीडिया से बातचीत में वन परिक्षेत्र अधिकारी नवीन वर्मा ने बताया कि बागबाहरा वन परिक्षेत्र पर्यावरण संरक्षण के लिए निरंतर सक्रिय है। उन्होंने प्रमुख बिंदु बताए:
अब तक बागबाहरा वन परिक्षेत्र के अंतर्गत लगभग 40 हजार से अधिक पौधे आमजन, संस्थाओं और पंचायतों को वितरित किए जा चुके हैं।
वितरण और रोपण में नीम, पीपल, करांज, आम, बहेड़ा, आंवला, महुआ, कोसम, बेल और शीशम जैसी औषधीय, फलदार तथा छायादार प्रजातियां प्रमुख रूप से शामिल हैं।
क्षेत्र की लगभग 20 से 25 ग्राम पंचायतों ने अपने आधिकारिक लेटर पैड पर आवेदन देकर पौधों की मांग की थी। वन विभाग इन मांगों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा कर रहा है।

अधिकारियों का संदेश

SDM शुभम देव और सरपंच देव बरिहा ने वन विभाग के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान सिर्फ पौधरोपण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए शुद्ध हवा, हरियाली और स्वस्थ पर्यावरण सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण कदम है। दोनों ने स्कूली बच्चों और ग्रामीणों से पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भागीदारी बनाए रखने की अपील की।
इस अवसर पर वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, SDM कार्यालय के कर्मचारी, स्कूल के शिक्षक और बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम ने ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान को स्थानीय स्तर पर मजबूती प्रदान की और बागबाहरा क्षेत्र में हरियाली बढ़ाने की दिशा में एक सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत किया।
बागबाहरा वन विभाग का यह प्रयास न केवल पौधों के वितरण और रोपण तक सीमित है, बल्कि जन-जागरूकता और सामूहिक भागीदारी का भी प्रतीक बन गया है।