Home Blog

महासमुंद में धान घोटाले का पर्दाफाश: 41 लाख का गबन करने वाला समिति प्रभारी गिरफ्तार, पुलिस ने मोखा गांव में दबोचा

0

महासमुंद में धान घोटाले का पर्दाफाश: 41 लाख का गबन करने वाला समिति प्रभारी गिरफ्तार, पुलिस ने मोखा गांव में दबोचा

​महासमुंद: छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में धान खरीदी में हुए एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। उपार्जन केंद्र बाघामुड़ा में 40.96 लाख रुपये के धान की हेराफेरी के मामले में फरार चल रहे समिति प्रभारी प्रेमसिंह ध्रुव को पुलिस ने लंबी मशक्कत के बाद गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी पर रिकॉर्ड में हेरफेर कर हजारों कट्टा धान गायब करने का आरोप है।

क्या है पूरा मामला..?

​मामले की शुरुआत इस साल 24 जनवरी को हुई, जब मुनगासेर ब्रांच के मैनेजर सेवकराम चंद्राकर ने थाना बागबाहरा में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के अनुसार, उपार्जन केंद्र बाघामुड़ा के ऑनलाइन रिकॉर्ड में 1,25,878 कट्टा धान दर्ज था। हालांकि, जब मौके पर भौतिक सत्यापन किया गया, तो वहां धान के केवल 1,22,574 कट्टे ही मिले।
​जांच में सामने आया कि केंद्र से कुल 3,304 कट्टा धान (लगभग 1321.6 क्विंटल) गायब था। सरकारी समर्थन मूल्य 3,100 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से इस गायब धान की कुल कीमत 40,96,960 रुपये आंकी गई है। इस गंभीर अनियमितता के सामने आने के बाद समिति प्रभारी प्रेमसिंह ध्रुव के खिलाफ बीएनएस (BNS) की धारा 316(5) के तहत मामला दर्ज किया गया था।

तकनीकी ट्रैकिंग से मिली सफलता

​मामला दर्ज होने के बाद से ही समिति प्रभारी प्रेमसिंह ध्रुव फरार चल रहा था और पुलिस लगातार उसकी धरपकड़ में जुटी थी। आरोपी काफी समय से अपनी लोकेशन बदल रहा था, जिससे उसे पकड़ना चुनौती बन गया था।
​पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तकनीकी विश्लेषण का सहारा लिया। आरोपी के मोबाइल का सीडीआर (CDR) खंगाला गया और लोकेशन की सटीक जानकारी मिलते ही पुलिस ने घेराबंदी शुरू कर दी। अंततः आरोपी को ग्राम मोखा से दबोच लिया गया।

​न्यायिक हिरासत में भेजा गया आरोपी

​गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आरोपी प्रेमसिंह ध्रुव (42 वर्ष) को हिरासत में लेकर पूछताछ की। आज, 17 जुलाई 2026 को आवश्यक कानूनी कार्रवाई पूरी करने के बाद उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया है।

​इस कार्रवाई ने उन सभी लोगों के लिए एक कड़ा संदेश दिया है जो सरकारी अनाज मंडियों और उपार्जन केंद्रों में भ्रष्टाचार को अंजाम देने का प्रयास कर रहे हैं। पुलिस की इस तत्परता ने लाखों रुपये के सरकारी गबन को उजागर करने में बड़ी भूमिका निभाई है।

महासमुंद की तर्ज पर पूरे प्रदेश में शिक्षा विभाग का कड़ा रुख: अटैच शिक्षकों को 7 दिन में मूल स्कूल में देना होगा योगदान, वरना होगी सख्त कार्रवाई

0

महासमुंद की तर्ज पर पूरे प्रदेश में शिक्षा विभाग का कड़ा रुख: अटैच शिक्षकों को 7 दिन में मूल स्कूल में देना होगा योगदान, वरना होगी सख्त कार्रवाई

49 शिक्षकों की वापसी के बाद पूरे प्रदेश में बड़ा एक्शन, शिक्षा विभाग ने जारी किया नया आदेश

रिपोर्टर मयंक गुप्ता / 17 जुलाई 2026
​महासमुंद/नवा रायपुर छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए शिक्षा विभाग ने अब प्रदेशव्यापी सख्त कदम उठाए हैं। महासमुंद जिले में 49 शिक्षकों की संलग्नक (Attachment) समाप्त कर उन्हें मूल स्कूलों में भेजने की पहल के बाद, अब लोक शिक्षण संचालनालय ने पूरे प्रदेश के लिए कड़े निर्देश जारी कर दिए हैं।

​महासमुंद के संलग्न कर्मचारी जिन्हें वापस लौटना होगा

​शिक्षा विभाग द्वारा जारी सूची के अनुसार, महासमुंद जिले के विभिन्न कार्यालयों में संलग्न जिन 49 शिक्षकों और कर्मचारियों को अपने मूल विद्यालय में कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं, उनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
​सुबोध कुमार तिवारी, प्रमोद कन्नौजे, हर्षिता चन्द्राकर, रामता मन्नाड़े, पूर्णानंद मिश्रा, जागेश्वर सिन्हा, भुवनेश्वरी साहू, नरेश पटेल, अनिल साव, देवानंद, डी. बसंत कुमार साव, यश कुमार चक्रधारी, विवेक कुमार चन्द्राकर, परस कुमार, भागवत प्रसाद पटेल, और रितेश नायक सहित अन्य कर्मचारी। ये सभी अब तक समग्र शिक्षा अभियान, बीआरसी कार्यालय, नवकिरण अकादमी और आदिवासी विकास विभाग जैसे कार्यालयों में सेवाएं दे रहे थे।

पूरे छत्तीसगढ़ के लिए नया आदेश: ‘एक सप्ताह में ज्वाइनिंग अनिवार्य’

​महासमुंद की इस पहल के बाद, लोक शिक्षण संचालनालय, छत्तीसगढ़ ने 15 जुलाई 2026 को एक आधिकारिक आदेश जारी किया है। इस आदेश के तहत

​प्रदेश के समस्त जिलों के कार्यालयों और विभागों में कार्यरत सभी गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों का संलग्नक तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया गया है।

​सभी संलग्न कर्मचारियों को एक सप्ताह के भीतर अपने मूल पदस्थापना वाले स्कूलों में कार्यभार ग्रहण करना अनिवार्य है।

​शिक्षकों को अपनी उपस्थिति ऑनलाइन ऐप के माध्यम से सुनिश्चित करनी होगी।

पालन न करने पर होगी सख्त कार्रवाई

​संचालनालय ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई कर्मचारी निर्धारित समय-सीमा के भीतर कार्यभार ग्रहण नहीं करता है, तो उसके विरुद्ध कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। ऐसे कर्मचारियों की निर्धारित समय के बाद की अनुपस्थिति अवधि को ‘सेवा हरण’ (Break in service) मानते हुए संचालनालय को प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए गए हैं।

शैक्षणिक गुणवत्ता सुधारने की प्राथमिकता

​विभाग का मानना है कि शिक्षकों की मूल विद्यालयों में वापसी से विद्यार्थियों को सीधा लाभ मिलेगा और लंबे समय से बनी शिक्षकों की कमी की समस्या काफी हद तक दूर हो सकेगी। यह निर्णय सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

महासमुंद पुलिस की ताबड़तोड़ कार्यवाहियां: जुआ-सट्टा और अंतर्राज्यीय चोर गिरोहों पर बड़ा प्रहार

0

महासमुंद पुलिस की ताबड़तोड़ कार्यवाहियां: जुआ-सट्टा और अंतर्राज्यीय चोर गिरोहों पर बड़ा प्रहार

​महासमुंद, 14 जुलाई 2026: महासमुंद पुलिस ने अपराधों पर अंकुश लगाने के अपने अभियान के तहत हाल ही में चार बड़ी कार्यवाहियां करते हुए जुआरियों और अंतर्राज्यीय चोर गिरोहों को गिरफ्तार किया है। पुलिस अधीक्षक कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में इन मामलों का विस्तृत खुलासा किया गया।

​1. चंडी मंदिर के पास जुए का अड्डा ध्वस्त

​बागबाहरा पुलिस ने ग्राम घुचापाली में चंडी मंदिर के पीछे चल रहे जुए के अड्डे पर छापा मारकर 12 जुआरियों को गिरफ्तार किया है।

​जब्ती: 3,60,100 रुपये नकद, 14 मोबाइल, 6 वाहन (4 मोटरसाइकिल और 2 कार), ताश की गड्डियां।
​कुल बरामदगी: 20,35,100 रुपये का मशरूका।

​कार्रवाई: छत्तीसगढ़ जुआ (प्रतिषेध) अधिनियम 2022 के तहत मामला दर्ज (अपराध क्रमांक 124/26)।

​2. हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी चोरी: अंतर्राज्यीय गिरोह के 4 सदस्य गिरफ्तार

​18 मई 2026 को हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में हुई चोरी की घटना को सुलझाते हुए पुलिस ने मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले से गिरोह को पकड़ा।

​आरोपी: मिथलेश उर्फ फक्के, रोशन मरावी, पंकज सिंह मरावी और राजा सिंह धुर्वे।

​बरामदगी: 1,66,700 रुपये मूल्य के गहने, मोबाइल और वाहन।

​विशेष: आरोपियों ने महासमुंद सहित बालोद और कोरबा जिलों में भी चोरी करना स्वीकार किया है।

​3. अंतर्राज्यीय ‘पारधी गिरोह’ का पर्दाफाश: 7 शातिर चोर गिरफ्तार

​ग्राम रूढ़ा में 22-23 जून 2026 की रात हुई चोरी का खुलासा करते हुए पुलिस ने पारधी गिरोह के 7 सदस्यों और चोरी का माल खरीदने वाले एक आरोपी को गिरफ्तार किया है।

​आरोपी: आनंद, संजय, मन्नू, सूरजभान, हेमलाल, सुरेंद्र, घनश्याम और अतुल पाटिल (खरीदार)।

​बरामदगी: 12,46,000 रुपये का सोना-चांदी, नकद और मोटरसाइकिलें।

​विशेष: तकनीकी विश्लेषण और सीसीटीवी फुटेज की मदद से आरोपियों की पहचान की गई।

​4. ग्राम अछोली में सूने मकान में हुई चोरी का आरोपी गिरफ्तार

​तुमगांव पुलिस ने 8 मार्च 2026 को हुई चोरी की वारदात सुलझाते हुए राहुल उर्फ भोजदास साहू को पकड़ा है।

​विशेष: आरोपी ने ताला काटने के लिए ग्राइंडर मशीन खरीदी थी। पुलिस ने आरोपी के बदले रहन-सहन और फिजूलखर्ची के आधार पर उसे पकड़ा। ​बरामदगी: 7,26,940 रुपये मूल्य के सोने-चांदी के जेवरात और वारदात में प्रयुक्त ग्राइंडर व मोटरसाइकिल।

​पुलिस का संदेश: महासमुंद पुलिस लगातार अपराधों की रोकथाम के लिए सक्रिय है और अपराधियों पर कड़ी कानूनी कार्यवाही की जा रही है। फरार आरोपियों की तलाश हेतु टीमें लगातार दबिश दे रही हैं।

महाघोटाले की ‘खट्टी’ पंचायत: सफाई के नाम पर 25 लाख का बंदरबांट, सरपंच पति का ‘अवैध कब्जा’, प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल!

0

महाघोटाले की ‘खट्टी’ पंचायत: सफाई के नाम पर 25 लाख का बंदरबांट, सरपंच पति का ‘अवैध कब्जा’, प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल!

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
​महासमुंद। 25 जून 2026 जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत खट्टी इन दिनों भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के घेरे में है। 24 जून को आयोजित ग्राम सभा उस समय अखाड़े में तब्दील हो गई, जब ग्रामीणों और पंचों ने सरपंच श्रीमती अनिता मोती मेहर के कार्यकाल में हुई कथित अनियमितताओं की पोल खोलते हुए तीखे सवाल खड़े किए। यह ग्राम सभा विकास कार्यों की समीक्षा के बजाय सरपंच के पति के हस्तक्षेप और लाखों रुपये के गबन के आरोपों पर केंद्रित रही।

​सफाई के नाम पर 25 लाख का गबन, धरातल पर केवल गंदगी का साम्राज्य

Oplus_16908288

​ग्राम सभा में सबसे बड़ा हंगामा ‘सफाई मद’ में खर्च की गई राशि को लेकर हुआ। ग्रामीणों के तीखे तेवरों ने प्रशासन को भी हैरत में डाल दिया। पंचों का आरोप है कि बीते समय में सफाई के नाम पर सरकारी खजाने से 25 लाख रुपये से अधिक की राशि निकाली जा चुकी है, लेकिन गांव की गलियां और नालियां आज भी गंदगी से पटी पड़ी हैं। ग्रामीणों ने इसे सीधे तौर पर सरकारी धन का दुरुपयोग और बड़ा घोटाला करार दिया है।

इसे भी पढ़े

​सरपंच पति का ‘पंचायत दरबार’, नियमों की उड़ाई जा रही धज्जियां

​विवाद का एक मुख्य केंद्र सरपंच के पति हैं, जो स्वयं खैरा पंचायत में सचिव के पद पर तैनात हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि वे अपनी ड्यूटी छोड़कर खट्टी पंचायत के हर प्रशासनिक निर्णय, बैठक और वित्तीय कामकाज में अवैध रूप से हस्तक्षेप कर रहे हैं। पंचायती राज अधिनियम के तहत निर्वाचित प्रतिनिधि के कार्य में बाहरी व्यक्ति का यह हस्तक्षेप न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था पर भी बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है।

​व्यावसायिक परिसर में ‘चखना सेंटर’, सरकारी स्कूल-अस्पताल के पास खिलवाड़

​पंचायत द्वारा बनाए गए व्यावसायिक परिसर को लेकर भी गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। बिना किसी आधिकारिक प्रस्ताव या नीलामी प्रक्रिया के, एक व्यक्ति को दुकान आवंटित कर वहां ‘चखना सेंटर’ संचालित करवाया जा रहा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह परिसर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और सरकारी स्कूल के अत्यंत निकट है। यहाँ फैली गंदगी, शराब की बोतलों और डिस्पोजल के कचरे से विद्यार्थियों और मरीजों का स्वास्थ्य खतरे में है।

​आंगनबाड़ी तक पहुंचना हुआ दूभर, बदबू और गंदगी के बीच मासूम

​पूर्व सरपंच की गली में स्थित आंगनबाड़ी केंद्र के बाहर का नजारा बेहद भयावह है। नाली निकासी बंद होने के कारण गंदा पानी जमा रहता है और चारों ओर सड़ांध फैली हुई है। नन्हे-मुन्ने बच्चे इसी दूषित माहौल से गुजरकर शिक्षा लेने को मजबूर हैं। साथ ही, क्षेत्र में महीनों से बंद पड़ा बोर खनन का अधूरा काम पंचायत की सुस्त कार्यप्रणाली और लापरवाही की कहानी खुद बयां कर रहा है।

​ग्रामीणों की चेतावनी “कार्रवाई नहीं तो होगा बड़ा आंदोलन”

​ग्राम सभा में आक्रोशित ग्रामीणों और पंचों ने एक सुर में उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच की मांग की है। ग्रामीणों ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि जिला प्रशासन ने इन अनियमितताओं की गहन जांच कर दोषी सरपंच, उनके पति और मिलीभगत करने वाले अधिकारियों पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई नहीं की, तो वे इसे लेकर प्रदेश स्तर पर उग्र आंदोलन करने को बाध्य होंगे।

​प्रशासन के लिए बड़ा सवाल

आखिर 25 लाख रुपये की सफाई राशि कहां गई? और एक सरकारी कर्मचारी (सचिव) को सरपंच के कार्यों में हस्तक्षेप करने की अनुमति किसने दी? खट्टी पंचायत के लोग अब सिर्फ जांच का आश्वासन नहीं, बल्कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई देखना चाहते हैं।

ग्राम पंचायत खट्टी का मामला संज्ञान में आया है जिसकी शिकायत को लेकर मै जिला सी ई ओ को कार्यवाही पंचायत अधिनियम की बिंदुवार जांच कर कार्यवाही करे।

विनय कुमार लंगेह
​कलेक्टर जिला महासमुंद छत्तीसगढ़

महाघोटाले की ‘खट्टी’ पंचायत: सफाई के नाम पर 25 लाख का बंदरबांट, सरपंच पति का ‘अवैध कब्जा’, प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल!

0

महाघोटाले की ‘खट्टी’ पंचायत: सफाई के नाम पर 25 लाख का बंदरबांट, सरपंच पति का ‘अवैध कब्जा’, प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल!रिपोर्टर मयंक गुप्ता महासमुंद। 25 जून 2026 जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत खट्टी इन दिनों भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के घेरे में है। 24 जून को आयोजित ग्राम सभा उस समय अखाड़े में तब्दील हो गई, जब ग्रामीणों और पंचों ने सरपंच श्रीमती अनिता मोती मेहर के कार्यकाल में हुई कथित अनियमितताओं की पोल खोलते हुए तीखे सवाल खड़े किए। यह ग्राम सभा विकास कार्यों की समीक्षा के बजाय सरपंच के पति के हस्तक्षेप और लाखों रुपये के गबन के आरोपों पर केंद्रित रही।सफाई के नाम पर 25 लाख का गबन, धरातल पर केवल गंदगी का साम्राज्यग्राम सभा में सबसे बड़ा हंगामा ‘सफाई मद’ में खर्च की गई राशि को लेकर हुआ। ग्रामीणों के तीखे तेवरों ने प्रशासन को भी हैरत में डाल दिया। पंचों का आरोप है कि बीते समय में सफाई के नाम पर सरकारी खजाने से 25 लाख रुपये से अधिक की राशि निकाली जा चुकी है, लेकिन गांव की गलियां और नालियां आज भी गंदगी से पटी पड़ी हैं। ग्रामीणों ने इसे सीधे तौर पर सरकारी धन का दुरुपयोग और बड़ा घोटाला करार दिया है।सरपंच पति का ‘पंचायत दरबार’, नियमों की उड़ाई जा रही धज्जियांविवाद का एक मुख्य केंद्र सरपंच के पति हैं, जो स्वयं खैरा पंचायत में सचिव के पद पर तैनात हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि वे अपनी ड्यूटी छोड़कर खट्टी पंचायत के हर प्रशासनिक निर्णय, बैठक और वित्तीय कामकाज में अवैध रूप से हस्तक्षेप कर रहे हैं। पंचायती राज अधिनियम के तहत निर्वाचित प्रतिनिधि के कार्य में बाहरी व्यक्ति का यह हस्तक्षेप न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था पर भी बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है।व्यावसायिक परिसर में ‘चखना सेंटर’, सरकारी स्कूल-अस्पताल के पास खिलवाड़पंचायत द्वारा बनाए गए व्यावसायिक परिसर को लेकर भी गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। बिना किसी आधिकारिक प्रस्ताव या नीलामी प्रक्रिया के, एक व्यक्ति को दुकान आवंटित कर वहां ‘चखना सेंटर’ संचालित करवाया जा रहा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह परिसर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और सरकारी स्कूल के अत्यंत निकट है। यहाँ फैली गंदगी, शराब की बोतलों और डिस्पोजल के कचरे से विद्यार्थियों और मरीजों का स्वास्थ्य खतरे में है।आंगनबाड़ी तक पहुंचना हुआ दूभर, बदबू और गंदगी के बीच मासूमपूर्व सरपंच की गली में स्थित आंगनबाड़ी केंद्र के बाहर का नजारा बेहद भयावह है। नाली निकासी बंद होने के कारण गंदा पानी जमा रहता है और चारों ओर सड़ांध फैली हुई है। नन्हे-मुन्ने बच्चे इसी दूषित माहौल से गुजरकर शिक्षा लेने को मजबूर हैं। साथ ही, क्षेत्र में महीनों से बंद पड़ा बोर खनन का अधूरा काम पंचायत की सुस्त कार्यप्रणाली और लापरवाही की कहानी खुद बयां कर रहा है।ग्रामीणों की चेतावनी “कार्रवाई नहीं तो होगा बड़ा आंदोलन”ग्राम सभा में आक्रोशित ग्रामीणों और पंचों ने एक सुर में उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच की मांग की है। ग्रामीणों ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि जिला प्रशासन ने इन अनियमितताओं की गहन जांच कर दोषी सरपंच, उनके पति और मिलीभगत करने वाले अधिकारियों पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई नहीं की, तो वे इसे लेकर प्रदेश स्तर पर उग्र आंदोलन करने को बाध्य होंगे।प्रशासन के लिए बड़ा सवाल आखिर 25 लाख रुपये की सफाई राशि कहां गई? और एक सरकारी कर्मचारी (सचिव) को सरपंच के कार्यों में हस्तक्षेप करने की अनुमति किसने दी? खट्टी पंचायत के लोग अब सिर्फ जांच का आश्वासन नहीं, बल्कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई देखना चाहते हैं।ग्राम पंचायत खट्टी का मामला संज्ञान में आया है जिसकी शिकायत को लेकर मै जिला सी ई ओ को कार्यवाही पंचायत अधिनियम की बिंदुवार जांच कर कार्यवाही करे।विनय कुमार लंगेह कलेक्टर जिला महासमुंद छत्तीसगढ़महाघोटाले की ‘खट्टी’ पंचायत: सफाई के नाम पर 25 लाख का बंदरबांट, सरपंच पति का ‘अवैध कब्जा’, प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल!रिपोर्टर मयंक गुप्ता महासमुंद। 25 जून 2026 जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत खट्टी इन दिनों भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के घेरे में है। 24 जून को आयोजित ग्राम सभा उस समय अखाड़े में तब्दील हो गई, जब ग्रामीणों और पंचों ने सरपंच श्रीमती अनिता मोती मेहर के कार्यकाल में हुई कथित अनियमितताओं की पोल खोलते हुए तीखे सवाल खड़े किए। यह ग्राम सभा विकास कार्यों की समीक्षा के बजाय सरपंच के पति के हस्तक्षेप और लाखों रुपये के गबन के आरोपों पर केंद्रित रही।सफाई के नाम पर 25 लाख का गबन, धरातल पर केवल गंदगी का साम्राज्यग्राम सभा में सबसे बड़ा हंगामा ‘सफाई मद’ में खर्च की गई राशि को लेकर हुआ। ग्रामीणों के तीखे तेवरों ने प्रशासन को भी हैरत में डाल दिया। पंचों का आरोप है कि बीते समय में सफाई के नाम पर सरकारी खजाने से 25 लाख रुपये से अधिक की राशि निकाली जा चुकी है, लेकिन गांव की गलियां और नालियां आज भी गंदगी से पटी पड़ी हैं। ग्रामीणों ने इसे सीधे तौर पर सरकारी धन का दुरुपयोग और बड़ा घोटाला करार दिया है।सरपंच पति का ‘पंचायत दरबार’, नियमों की उड़ाई जा रही धज्जियांविवाद का एक मुख्य केंद्र सरपंच के पति हैं, जो स्वयं खैरा पंचायत में सचिव के पद पर तैनात हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि वे अपनी ड्यूटी छोड़कर खट्टी पंचायत के हर प्रशासनिक निर्णय, बैठक और वित्तीय कामकाज में अवैध रूप से हस्तक्षेप कर रहे हैं। पंचायती राज अधिनियम के तहत निर्वाचित प्रतिनिधि के कार्य में बाहरी व्यक्ति का यह हस्तक्षेप न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था पर भी बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है।व्यावसायिक परिसर में ‘चखना सेंटर’, सरकारी स्कूल-अस्पताल के पास खिलवाड़पंचायत द्वारा बनाए गए व्यावसायिक परिसर को लेकर भी गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। बिना किसी आधिकारिक प्रस्ताव या नीलामी प्रक्रिया के, एक व्यक्ति को दुकान आवंटित कर वहां ‘चखना सेंटर’ संचालित करवाया जा रहा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह परिसर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और सरकारी स्कूल के अत्यंत निकट है। यहाँ फैली गंदगी, शराब की बोतलों और डिस्पोजल के कचरे से विद्यार्थियों और मरीजों का स्वास्थ्य खतरे में है।आंगनबाड़ी तक पहुंचना हुआ दूभर, बदबू और गंदगी के बीच मासूमपूर्व सरपंच की गली में स्थित आंगनबाड़ी केंद्र के बाहर का नजारा बेहद भयावह है। नाली निकासी बंद होने के कारण गंदा पानी जमा रहता है और चारों ओर सड़ांध फैली हुई है। नन्हे-मुन्ने बच्चे इसी दूषित माहौल से गुजरकर शिक्षा लेने को मजबूर हैं। साथ ही, क्षेत्र में महीनों से बंद पड़ा बोर खनन का अधूरा काम पंचायत की सुस्त कार्यप्रणाली और लापरवाही की कहानी खुद बयां कर रहा है।ग्रामीणों की चेतावनी “कार्रवाई नहीं तो होगा बड़ा आंदोलन”ग्राम सभा में आक्रोशित ग्रामीणों और पंचों ने एक सुर में उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच की मांग की है। ग्रामीणों ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि जिला प्रशासन ने इन अनियमितताओं की गहन जांच कर दोषी सरपंच, उनके पति और मिलीभगत करने वाले अधिकारियों पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई नहीं की, तो वे इसे लेकर प्रदेश स्तर पर उग्र आंदोलन करने को बाध्य होंगे।प्रशासन के लिए बड़ा सवाल आखिर 25 लाख रुपये की सफाई राशि कहां गई? और एक सरकारी कर्मचारी (सचिव) को सरपंच के कार्यों में हस्तक्षेप करने की अनुमति किसने दी? खट्टी पंचायत के लोग अब सिर्फ जांच का आश्वासन नहीं, बल्कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई देखना चाहते हैं।ग्राम पंचायत खट्टी का मामला संज्ञान में आया है जिसकी शिकायत को लेकर मै जिला सी ई ओ को कार्यवाही पंचायत अधिनियम की बिंदुवार जांच कर कार्यवाही करे।विनय कुमार लंगेह कलेक्टर जिला महासमुंद छत्तीसगढ़

मौत के ‘स्कूल’ में कैद मासूम..! महासमुंद के श्रद्धा पब्लिक स्कूल में बरती जा रही जानलेवा लापरवाही, प्रशासन मौन…!

0

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
​महासमुंद / 22 जून 2026 दिन रविवार (छत्तीसगढ़) क्या महासमुंद जिला प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतज़ार कर रहा है? पटेवा और पिथौरा में संचालित ‘श्रद्धा पब्लिक स्कूल’ शिक्षा का मंदिर नहीं, बल्कि एक ‘डेथ ट्रैप’ (मौत का जाल) बन चुका है। जहाँ एक ओर देश अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मना रहा है, वहीं इस स्कूल में मासूमों की सुरक्षा को ताक पर रखकर बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।

​जर्जर भवन और बुनियादी सुविधाओं का अकाल

​स्कूल के नाम पर केवल कमाई का धंधा चल रहा है। पटेवा की शाखा एक व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स के अंदर संचालित है, जहाँ न तो बच्चों के लिए सुरक्षित प्रवेश द्वार है और न ही स्वच्छ शौचालय। वहीं पिथौरा (रावण भाटा वार्ड) के मुख्य ब्रांच की हालत और भी भयानक है। यहाँ की जर्जर छतें किसी भी वक्त काल बनकर मासूमों पर गिर सकती हैं। न खेलने के लिए मैदान है और न ही पीने के लिए शुद्ध पानी। आखिर प्रशासन ने ऐसे भवन को स्कूल चलाने की अनुमति कैसे दी..?

​सड़कों पर दौड़ रही ‘मौत की सवारियां’

​सबसे चौंकाने वाली बात है स्कूल की बसों की स्थिति। अभिभावकों के जीवन भर की कमाई से फीस लेने वाला प्रबंधन बच्चों की जान बचाने के लिए बीमा (Insurance) तक कराने को तैयार नहीं है।

​वाहन CG04HS6939: इसका बीमा जून 2023 में ही समाप्त हो चुका है। पेट्रोल गाड़ी में अवैध रूप से गैस किट लगाकर परिवहन विभाग की आंखों में धूल झोंकी जा रही है।

​वाहन CG06GB5823: यह गाड़ी फरवरी 2023 से बिना बीमा के पिथौरा की सड़कों पर दौड़ रही है।

​यह सीधे तौर पर मोटर वाहन अधिनियम और शिक्षा विभाग के नियमों का उल्लंघन है। क्या प्रशासन को इन गाड़ियों पर पुलिसिया कार्रवाई करने के लिए किसी बड़ी दुर्घटना का इंतज़ार है..?

​अभिभावकों की मजबूरी और प्रबंधन की दादागिरी

​अभिभावकों ने आरोप लगाया है कि स्कूल संचालक फीस के नाम पर वसूली कर रहे हैं। विरोध करने पर बच्चों की टीसी (TC) और मार्कशीट रोकने की धमकी दी जाती है। स्कूल प्रशासन का खुला कहना है कि “मेरी पहुंच ऊपर तक है, जो उखाड़ना है उखाड़ लो।” क्या स्कूल संचालक कानून से ऊपर हैं..?

​प्रशासन को सीधे चेतावनी अब नहीं जागे तो जनता जागेगी

​यह मामला केवल कुछ सुविधाओं का नहीं, बल्कि सैकड़ों बच्चों के जीवन का है। जनता और अभिभावकों की ओर से जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) महासमुंद से सख्त मांग है।

1 ​तत्काल प्रभाव से स्कूल की दोनों शाखाओं की मान्यता रद्द की जाए।

2 ​बिना बीमा और दस्तावेजों वाली बसों को तत्काल जब्त कर स्कूल प्रबंधन पर FIR दर्ज हो।

3 ​स्कूल भवन की सुरक्षा ऑडिट कराई जाए और नियमों के उल्लंघन पर सील करने की कार्रवाई हो।

4 ​अभिभावकों से जबरन वसूली गई अतिरिक्त फीस वापस करवाई जाए।

​अभिभावकों के लिए संदेश

अपने बच्चों की सुरक्षा के प्रति सजग रहें। यदि प्रशासन इस लापरवाही पर तुरंत संज्ञान नहीं लेता है, तो अभिभावकों को सड़कों पर उतरकर अपने बच्चों के हक और सुरक्षा के लिए आंदोलन करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा।

​क्या जिला प्रशासन की नींद टूटेगी, या किसी हादसे के बाद फाइलें खुलेंगी..?

खल्लारी मंदिर पर मौत का साया! जर्जर रोपवे टूटा, श्रद्धा की राह में मौत का झूला… एक जान गई, पाँच जिंदगियाँ मौत से लड़ रही हैं! प्रशासन-ट्रस्टी की लापरवाही ने ली मासूम की जान

0

महासमुंद (रिपोर्टर मयंक गुप्ता): चैत्र नवरात्र के पावन पर्व पर माता खल्लारी के दरबार में श्रद्धालुओं का ताँता लगा हुआ था। पहाड़ की चोटी पर स्थित मंदिर तक पहुँचने का एकमात्र सहारा—वो पुराना रोपवे—आज मौत का झूला बन गया। अचानक तार टूटा, केबिन नीचे गिरा… और एक पल में छह परिवारों की दुनिया उजड़ गई। एक महिला की जान चली गई, पाँच अन्य गंभीर रूप से घायल हैं। पूरा इलाका गुस्से और दर्द से भरा हुआ है।

क्या हुआ था हादसा?

जिले से करीब 30 किलोमीटर दूर ग्राम खल्लारी में माता के दर्शन के लिए उमड़ रहे हजारों श्रद्धालुओं में से छह लोग रोपवे में सवार हुए। केबिन ऊपर चढ़ ही रहा था कि अचानक स्टील का मेन तार चटख गया। बिना किसी चेतावनी के केबिन अनियंत्रित होकर तेजी से नीचे गिर पड़ा। हादसा इतना भयानक था कि केबिन के अंदर मौजूद सभी श्रद्धालु बुरी तरह घायल हो गए।

घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय लोग दौड़ पड़े। घायलों को तुरंत बागबाहरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुँचाया गया। वहाँ डॉक्टरों की तत्काल कोशिशों के बावजूद एक महिला की मौत हो गई। बाकी पाँच घायलों की हालत अभी भी नाजुक बनी हुई है—कई की हड्डियाँ टूटी हैं, खून बह रहा है और आशंका है कि कुछ की हालत और बिगड़ सकती है।

बड़ा सवाल—आखिर जिम्मेदार कौन?

स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि खल्लारी मंदिर का यह रोपवे सालों पुराना और पूरी तरह जर्जर हो चुका था। बार-बार मरम्मत, नियमित तकनीकी जांच और सुरक्षा प्रमाण-पत्र की माँग की गई, लेकिन मंदिर ट्रस्टी और प्रशासन ने इसे लगातार नजरअंदाज किया। कोई फिटनेस सर्टिफिकेट, कोई वार्षिक ऑडिट, कोई इमरजेंसी प्रोटोकॉल… कुछ भी नहीं था।

लोग पूछ रहे हैं—

चैत्र नवरात्र जैसे बड़े पर्व पर हजारों श्रद्धालु रोजाना आते हैं, फिर भी रोपवे को बिना चेक किए चालू रखने की इजाजत किसने दी?

मंदिर ट्रस्टी ने पिछले कई सालों से मिले फंड का इस्तेमाल रोपवे की मरम्मत पर क्यों नहीं किया?

जिला प्रशासन और पर्यटन विभाग ने इतने खतरनाक रोपवे को बंद करने का आदेश क्यों नहीं दिया?

यह हादसा कोई अचानक दुर्घटना नहीं, बल्कि लंबे समय से चली आ रही लापरवाही का नतीजा है। आस्था के नाम पर लोगों की जान से खेला गया।

आक्रोश और माँगें

हादसे के बाद खल्लारी और आसपास के गाँवों में भारी गुस्सा फूट पड़ा है। सैकड़ों लोग सड़क पर उतर आए। उन्होंने मंदिर ट्रस्टी, जिला कलेक्टर और पुलिस पर सख्त कार्रवाई की माँग की है।

मुख्य माँगें:

दोषी अधिकारियों और ट्रस्टी पर तत्काल मुकदमा दर्ज हो

रोपवे की पूरी जांच हो और दोषियों को जेल भेजा जाए

मृतक परिवार को 20 लाख रुपये का मुआवजा और घायलों को उचित इलाज व मुआवजा

तुरंत नए और सुरक्षित रोपवे का निर्माण शुरू किया जाए

निष्कर्ष—सिस्टम की नाकामी का सबक

यह सिर्फ एक रोपवे का हादसा नहीं है। यह उस सिस्टम की नाकामी है जो आस्था को कमाई का जरिया समझती है, लेकिन सुरक्षा को तुच्छ मानती है। हर साल नवरात्र में लाखों श्रद्धालु पहाड़ चढ़ते हैं। क्या हर बार मौत का इंतजार करना पड़ेगा? क्या अब भी जिम्मेदार लोग सिर्फ बयान देंगे और मामला ठंडे बस्ते में चला जाएगा?

अब समय है सख्ती का।

अगर आज कार्रवाई नहीं हुई तो कल कोई और माँ-बहन, कोई और बेटा इसी मौत के झूले पर सवार हो सकता है।

माता खल्लारी की जय… लेकिन अब सुरक्षा भी चाहिए!

खल्लारी मंदिर पर मौत का साया! जर्जर रोपवे टूटा, श्रद्धा की राह में मौत का झूला… एक जान गई, पाँच जिंदगियाँ मौत से लड़ रही हैं! प्रशासन-ट्रस्टी की लापरवाही ने ली मासूम की जान

0

 महासमुंद (रिपोर्टर मयंक गुप्ता): चैत्र नवरात्र के पावन पर्व पर माता खल्लारी के दरबार में श्रद्धालुओं का ताँता लगा हुआ था। पहाड़ की चोटी पर स्थित मंदिर तक पहुँचने का एकमात्र सहारा—वो पुराना रोपवे—आज मौत का झूला बन गया। अचानक तार टूटा, केबिन नीचे गिरा… और एक पल में छह परिवारों की दुनिया उजड़ गई। एक महिला की जान चली गई, पाँच अन्य गंभीर रूप से घायल हैं। पूरा इलाका गुस्से और दर्द से भरा हुआ है।

क्या हुआ था हादसा?

जिले से करीब 30 किलोमीटर दूर ग्राम खल्लारी में माता के दर्शन के लिए उमड़ रहे हजारों श्रद्धालुओं में से छह लोग रोपवे में सवार हुए। केबिन ऊपर चढ़ ही रहा था कि अचानक स्टील का मेन तार चटख गया। बिना किसी चेतावनी के केबिन अनियंत्रित होकर तेजी से नीचे गिर पड़ा। हादसा इतना भयानक था कि केबिन के अंदर मौजूद सभी श्रद्धालु बुरी तरह घायल हो गए।

घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय लोग दौड़ पड़े। घायलों को तुरंत बागबाहरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुँचाया गया। वहाँ डॉक्टरों की तत्काल कोशिशों के बावजूद एक महिला की मौत हो गई। बाकी पाँच घायलों की हालत अभी भी नाजुक बनी हुई है—कई की हड्डियाँ टूटी हैं, खून बह रहा है और आशंका है कि कुछ की हालत और बिगड़ सकती है।

बड़ा सवाल—आखिर जिम्मेदार कौन?

स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि खल्लारी मंदिर का यह रोपवे सालों पुराना और पूरी तरह जर्जर हो चुका था। बार-बार मरम्मत, नियमित तकनीकी जांच और सुरक्षा प्रमाण-पत्र की माँग की गई, लेकिन मंदिर ट्रस्टी और प्रशासन ने इसे लगातार नजरअंदाज किया। कोई फिटनेस सर्टिफिकेट, कोई वार्षिक ऑडिट, कोई इमरजेंसी प्रोटोकॉल… कुछ भी नहीं था।

लोग पूछ रहे हैं—

चैत्र नवरात्र जैसे बड़े पर्व पर हजारों श्रद्धालु रोजाना आते हैं, फिर भी रोपवे को बिना चेक किए चालू रखने की इजाजत किसने दी?

मंदिर ट्रस्टी ने पिछले कई सालों से मिले फंड का इस्तेमाल रोपवे की मरम्मत पर क्यों नहीं किया?

जिला प्रशासन और पर्यटन विभाग ने इतने खतरनाक रोपवे को बंद करने का आदेश क्यों नहीं दिया?

यह हादसा कोई अचानक दुर्घटना नहीं, बल्कि लंबे समय से चली आ रही लापरवाही का नतीजा है। आस्था के नाम पर लोगों की जान से खेला गया।

आक्रोश और माँगें

हादसे के बाद खल्लारी और आसपास के गाँवों में भारी गुस्सा फूट पड़ा है। सैकड़ों लोग सड़क पर उतर आए। उन्होंने मंदिर ट्रस्टी, जिला कलेक्टर और पुलिस पर सख्त कार्रवाई की माँग की है।

मुख्य माँगें:

दोषी अधिकारियों और ट्रस्टी पर तत्काल मुकदमा दर्ज हो

रोपवे की पूरी जांच हो और दोषियों को जेल भेजा जाए

मृतक परिवार को 20 लाख रुपये का मुआवजा और घायलों को उचित इलाज व मुआवजा

तुरंत नए और सुरक्षित रोपवे का निर्माण शुरू किया जाए

निष्कर्ष—सिस्टम की नाकामी का सबक

यह सिर्फ एक रोपवे का हादसा नहीं है। यह उस सिस्टम की नाकामी है जो आस्था को कमाई का जरिया समझती है, लेकिन सुरक्षा को तुच्छ मानती है। हर साल नवरात्र में लाखों श्रद्धालु पहाड़ चढ़ते हैं। क्या हर बार मौत का इंतजार करना पड़ेगा? क्या अब भी जिम्मेदार लोग सिर्फ बयान देंगे और मामला ठंडे बस्ते में चला जाएगा?


अब समय है सख्ती का।

अगर आज कार्रवाई नहीं हुई तो कल कोई और माँ-बहन, कोई और बेटा इसी मौत के झूले पर सवार हो सकता है।

माता खल्लारी की जय… लेकिन अब सुरक्षा भी चाहिए!

(No Title)

0

 खल्लारी पहाड़ पर मौत का झूला! जर्जर रोपवे टूटा, महिला की मौत – प्रशासन की लापरवाही ने ली जान..?

रिपोर्टर मयंक गुप्ता 

महासमुंद। जिले से लगभग 30 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम खल्लारी में चैत्र नवरात्र के पावन अवसर पर उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब माता खल्लारी पहाड़ पर श्रद्धालुओं को ले जा रहा रोपवे अचानक हादसे का शिकार हो गया। श्रद्धा और आस्था के इस सफर ने कुछ ही पलों में भयावह रूप ले लिया।

बताया जा रहा है कि माता दर्शन के लिए 6 श्रद्धालु रोपवे में सवार होकर पहाड़ की ओर जा रहे थे। इसी दौरान अचानक रोपवे का तार टूट गया, जिससे केबिन अनियंत्रित होकर नीचे गिर पड़ा। हादसा इतना भीषण था कि उसमें सवार सभी लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।

घटना के बाद तत्काल घायलों को बागबाहरा स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान एक महिला की मौत हो गई। अन्य घायलों की हालत अब भी नाजुक बताई जा रही है, जिससे पूरे क्षेत्र में दहशत और आक्रोश का माहौल है।

 बड़ा सवाल – आखिर जिम्मेदार कौन..?

स्थानीय सूत्रों और ग्रामीणों का कहना है कि खल्लारी मंदिर में लगा रोपवे काफी पुराना और जर्जर स्थिति में था। कई बार इसकी मरम्मत और जांच की मांग उठी, लेकिन जिम्मेदार विभाग ने इसे नजरअंदाज किया। नतीजा आज सबके सामने है—एक श्रद्धालु की जान चली गई और कई जिंदगी मौत से जूझ रही हैं।

आस्था के नाम पर लापरवाही का खेल!

चैत्र नवरात्र जैसे बड़े पर्व में जहां हजारों श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं, वहां इस तरह की लापरवाही सीधे-सीधे प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े करती है। क्या बिना फिटनेस और सुरक्षा जांच के रोपवे का संचालन किया जा रहा था? अगर हां, तो यह किसी आपराधिक लापरवाही से कम नहीं।

मांग उठी – हो सख्त कार्रवाई

घटना के बाद ग्रामीणों और श्रद्धालुओं में भारी आक्रोश है। दोषियों पर कड़ी कार्रवाई, रोपवे की जांच और मृतक के परिजनों को उचित मुआवजा देने की मांग जोर पकड़ रही है।

 निष्कर्ष

यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सिस्टम की नाकामी का जीता-जागता उदाहरण है। सवाल यही है—क्या अब भी जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी या फिर हर बार की तरह मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?

“नकल का नेक्सस” उजागर..! मोंगरापाली ओपन परीक्षा केन्द्र पर व्हाइट बोर्ड से ‘पास कराने’ का खेल, लाखों की उगाही के आरोप से मचा हड़कंप

0

रिपोर्टर मयंक गुप्ता 

महासमुंद (छत्तीसगढ़)।

जिले के बागबाहरा क्षेत्र के छोटे से गांव मोंगरापाली में स्थित एक शासकीय स्कूल इन दिनों गंभीर आरोपों के चलते सुर्खियों में है। यहां संचालित छत्तीसगढ़ राज्य ओपन स्कूल का परीक्षा केन्द्र क्रमांक 0614 कथित रूप से नकल और अवैध वसूली के बड़े नेटवर्क का केंद्र बन गया है। आरोप केवल नकल तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पैसे लेकर परीक्षार्थियों को पास कराने के संगठित खेल की ओर इशारा करते हैं।

परीक्षा केन्द्र या ‘पास कराने की फैक्ट्री’..?

मोंगरापाली के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में संचालित इस केन्द्र को लेकर स्थानीय स्तर पर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। आरोप है कि यहां परीक्षा के दौरान खुलेआम नकल करवाई जाती थी।

बताया जा रहा है कि परीक्षार्थियों को पहले से सेटिंग के तहत बुलाया जाता था और परीक्षा के समय व्हाइट बोर्ड पर उत्तर लिखकर उन्हें कॉपी कराया जाता था।

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, यह पूरा सिस्टम सुनियोजित तरीके से चलता था, जहां पढ़ाई या योग्यता से ज्यादा महत्व पैसे को दिया जाता था।

 ‘पास कराने’ के नाम पर लाखों की वसूली..!

मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू आर्थिक लेन-देन से जुड़ा है। आरोप हैं कि केन्द्र से जुड़े कुछ जिम्मेदार लोग परीक्षार्थियों से मोटी रकम लेकर उन्हें पास कराने का भरोसा देते थे।

अनुमान लगाया जा रहा है कि इस कथित खेल के जरिए हर साल 20 से 25 लाख रुपये तक की वसूली की जाती थी।

दूर-दराज के जिलों से भी छात्रों को यहां परीक्षा दिलाने के लिए लाया जाता था, जिससे यह मामला और भी गंभीर बन जाता है।

 शिकायत के बाद पलटी कहानी

इस पूरे प्रकरण ने तब तूल पकड़ा जब स्कूल के कुछ शिक्षकों द्वारा उच्च स्तर पर शिकायत की गई। मामला लोक शिक्षण संचालनालय, रायपुर तक पहुंचा, जिसके बाद विभाग में हलचल मच गई।

लेकिन जांच की प्रक्रिया शुरू होते ही घटनाक्रम ने अचानक मोड़ ले लिया। शिकायत करने वाले ही अपने बयान से पीछे हट गए और लिखित में शिकायत से इनकार कर दिया।

इस यू-टर्न ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं—

क्या शिकायतकर्ताओं पर दबाव डाला गया?

या फिर मामला किसी प्रभावशाली नेटवर्क से जुड़ा हुआ है..?

 जांच में जुटा शिक्षा विभाग

मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला शिक्षा अधिकारी विजय लहरे ने टीम के साथ परीक्षा केन्द्र का निरीक्षण किया।

करीब दो घंटे तक चली जांच के दौरान उत्तर पुस्तिकाओं को सील कर सुरक्षित रूप से थाना में जमा कराया गया।

अधिकारियों के मुताबिक, जिले के अन्य ओपन परीक्षा केन्द्रों की भी जांच की जा रही है और इस मामले में उच्च स्तर से निर्देश मिलने की बात कही गई है।

उठते सवाल, जवाब का इंतजार

इस पूरे घटनाक्रम ने कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं—

यदि यह गड़बड़ी लंबे समय से चल रही थी, तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

क्या इसमें बड़े स्तर पर मिलीभगत शामिल है?

शिकायतकर्ताओं के पीछे हटने के पीछे असली वजह क्या है..?

 शिक्षा व्यवस्था पर गहरा असर

ओपन स्कूल प्रणाली उन विद्यार्थियों के लिए उम्मीद का जरिया होती है, जो किसी कारणवश नियमित पढ़ाई नहीं कर पाते।

लेकिन यदि इसी व्यवस्था में पैसे के दम पर परिणाम तय होने लगें, तो यह न केवल शिक्षा की विश्वसनीयता को कमजोर करता है, बल्कि समाज के भविष्य को भी प्रभावित करता है।

आगे क्या..?

फिलहाल प्रशासनिक जांच जारी है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या इस मामले में ठोस कार्रवाई होती है या यह मामला भी कागजों में सिमट कर रह जाएगा।

यह भी जांच का विषय है कि मामला केवल एक केन्द्र तक सीमित है या फिर किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा—जिसका खुलासा आने वाले दिनों में हो सकता है।