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खल्लारी मंदिर पर मौत का साया! जर्जर रोपवे टूटा, श्रद्धा की राह में मौत का झूला… एक जान गई, पाँच जिंदगियाँ मौत से लड़ रही हैं! प्रशासन-ट्रस्टी की लापरवाही ने ली मासूम की जान

महासमुंद (रिपोर्टर मयंक गुप्ता): चैत्र नवरात्र के पावन पर्व पर माता खल्लारी के दरबार में श्रद्धालुओं का ताँता लगा हुआ था। पहाड़ की चोटी पर स्थित मंदिर तक पहुँचने का एकमात्र सहारा—वो पुराना रोपवे—आज मौत का झूला बन गया। अचानक तार टूटा, केबिन नीचे गिरा… और एक पल में छह परिवारों की दुनिया उजड़ गई। एक महिला की जान चली गई, पाँच अन्य गंभीर रूप से घायल हैं। पूरा इलाका गुस्से और दर्द से भरा हुआ है।

क्या हुआ था हादसा?

जिले से करीब 30 किलोमीटर दूर ग्राम खल्लारी में माता के दर्शन के लिए उमड़ रहे हजारों श्रद्धालुओं में से छह लोग रोपवे में सवार हुए। केबिन ऊपर चढ़ ही रहा था कि अचानक स्टील का मेन तार चटख गया। बिना किसी चेतावनी के केबिन अनियंत्रित होकर तेजी से नीचे गिर पड़ा। हादसा इतना भयानक था कि केबिन के अंदर मौजूद सभी श्रद्धालु बुरी तरह घायल हो गए।

घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय लोग दौड़ पड़े। घायलों को तुरंत बागबाहरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुँचाया गया। वहाँ डॉक्टरों की तत्काल कोशिशों के बावजूद एक महिला की मौत हो गई। बाकी पाँच घायलों की हालत अभी भी नाजुक बनी हुई है—कई की हड्डियाँ टूटी हैं, खून बह रहा है और आशंका है कि कुछ की हालत और बिगड़ सकती है।

बड़ा सवाल—आखिर जिम्मेदार कौन?

स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि खल्लारी मंदिर का यह रोपवे सालों पुराना और पूरी तरह जर्जर हो चुका था। बार-बार मरम्मत, नियमित तकनीकी जांच और सुरक्षा प्रमाण-पत्र की माँग की गई, लेकिन मंदिर ट्रस्टी और प्रशासन ने इसे लगातार नजरअंदाज किया। कोई फिटनेस सर्टिफिकेट, कोई वार्षिक ऑडिट, कोई इमरजेंसी प्रोटोकॉल… कुछ भी नहीं था।

लोग पूछ रहे हैं—

चैत्र नवरात्र जैसे बड़े पर्व पर हजारों श्रद्धालु रोजाना आते हैं, फिर भी रोपवे को बिना चेक किए चालू रखने की इजाजत किसने दी?

मंदिर ट्रस्टी ने पिछले कई सालों से मिले फंड का इस्तेमाल रोपवे की मरम्मत पर क्यों नहीं किया?

जिला प्रशासन और पर्यटन विभाग ने इतने खतरनाक रोपवे को बंद करने का आदेश क्यों नहीं दिया?

यह हादसा कोई अचानक दुर्घटना नहीं, बल्कि लंबे समय से चली आ रही लापरवाही का नतीजा है। आस्था के नाम पर लोगों की जान से खेला गया।

आक्रोश और माँगें

हादसे के बाद खल्लारी और आसपास के गाँवों में भारी गुस्सा फूट पड़ा है। सैकड़ों लोग सड़क पर उतर आए। उन्होंने मंदिर ट्रस्टी, जिला कलेक्टर और पुलिस पर सख्त कार्रवाई की माँग की है।

मुख्य माँगें:

दोषी अधिकारियों और ट्रस्टी पर तत्काल मुकदमा दर्ज हो

रोपवे की पूरी जांच हो और दोषियों को जेल भेजा जाए

मृतक परिवार को 20 लाख रुपये का मुआवजा और घायलों को उचित इलाज व मुआवजा

तुरंत नए और सुरक्षित रोपवे का निर्माण शुरू किया जाए

निष्कर्ष—सिस्टम की नाकामी का सबक

यह सिर्फ एक रोपवे का हादसा नहीं है। यह उस सिस्टम की नाकामी है जो आस्था को कमाई का जरिया समझती है, लेकिन सुरक्षा को तुच्छ मानती है। हर साल नवरात्र में लाखों श्रद्धालु पहाड़ चढ़ते हैं। क्या हर बार मौत का इंतजार करना पड़ेगा? क्या अब भी जिम्मेदार लोग सिर्फ बयान देंगे और मामला ठंडे बस्ते में चला जाएगा?

अब समय है सख्ती का।

अगर आज कार्रवाई नहीं हुई तो कल कोई और माँ-बहन, कोई और बेटा इसी मौत के झूले पर सवार हो सकता है।

माता खल्लारी की जय… लेकिन अब सुरक्षा भी चाहिए!

खल्लारी मंदिर पर मौत का साया! जर्जर रोपवे टूटा, श्रद्धा की राह में मौत का झूला… एक जान गई, पाँच जिंदगियाँ मौत से लड़ रही हैं! प्रशासन-ट्रस्टी की लापरवाही ने ली मासूम की जान

 महासमुंद (रिपोर्टर मयंक गुप्ता): चैत्र नवरात्र के पावन पर्व पर माता खल्लारी के दरबार में श्रद्धालुओं का ताँता लगा हुआ था। पहाड़ की चोटी पर स्थित मंदिर तक पहुँचने का एकमात्र सहारा—वो पुराना रोपवे—आज मौत का झूला बन गया। अचानक तार टूटा, केबिन नीचे गिरा… और एक पल में छह परिवारों की दुनिया उजड़ गई। एक महिला की जान चली गई, पाँच अन्य गंभीर रूप से घायल हैं। पूरा इलाका गुस्से और दर्द से भरा हुआ है।

क्या हुआ था हादसा?

जिले से करीब 30 किलोमीटर दूर ग्राम खल्लारी में माता के दर्शन के लिए उमड़ रहे हजारों श्रद्धालुओं में से छह लोग रोपवे में सवार हुए। केबिन ऊपर चढ़ ही रहा था कि अचानक स्टील का मेन तार चटख गया। बिना किसी चेतावनी के केबिन अनियंत्रित होकर तेजी से नीचे गिर पड़ा। हादसा इतना भयानक था कि केबिन के अंदर मौजूद सभी श्रद्धालु बुरी तरह घायल हो गए।

घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय लोग दौड़ पड़े। घायलों को तुरंत बागबाहरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुँचाया गया। वहाँ डॉक्टरों की तत्काल कोशिशों के बावजूद एक महिला की मौत हो गई। बाकी पाँच घायलों की हालत अभी भी नाजुक बनी हुई है—कई की हड्डियाँ टूटी हैं, खून बह रहा है और आशंका है कि कुछ की हालत और बिगड़ सकती है।

बड़ा सवाल—आखिर जिम्मेदार कौन?

स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि खल्लारी मंदिर का यह रोपवे सालों पुराना और पूरी तरह जर्जर हो चुका था। बार-बार मरम्मत, नियमित तकनीकी जांच और सुरक्षा प्रमाण-पत्र की माँग की गई, लेकिन मंदिर ट्रस्टी और प्रशासन ने इसे लगातार नजरअंदाज किया। कोई फिटनेस सर्टिफिकेट, कोई वार्षिक ऑडिट, कोई इमरजेंसी प्रोटोकॉल… कुछ भी नहीं था।

लोग पूछ रहे हैं—

चैत्र नवरात्र जैसे बड़े पर्व पर हजारों श्रद्धालु रोजाना आते हैं, फिर भी रोपवे को बिना चेक किए चालू रखने की इजाजत किसने दी?

मंदिर ट्रस्टी ने पिछले कई सालों से मिले फंड का इस्तेमाल रोपवे की मरम्मत पर क्यों नहीं किया?

जिला प्रशासन और पर्यटन विभाग ने इतने खतरनाक रोपवे को बंद करने का आदेश क्यों नहीं दिया?

यह हादसा कोई अचानक दुर्घटना नहीं, बल्कि लंबे समय से चली आ रही लापरवाही का नतीजा है। आस्था के नाम पर लोगों की जान से खेला गया।

आक्रोश और माँगें

हादसे के बाद खल्लारी और आसपास के गाँवों में भारी गुस्सा फूट पड़ा है। सैकड़ों लोग सड़क पर उतर आए। उन्होंने मंदिर ट्रस्टी, जिला कलेक्टर और पुलिस पर सख्त कार्रवाई की माँग की है।

मुख्य माँगें:

दोषी अधिकारियों और ट्रस्टी पर तत्काल मुकदमा दर्ज हो

रोपवे की पूरी जांच हो और दोषियों को जेल भेजा जाए

मृतक परिवार को 20 लाख रुपये का मुआवजा और घायलों को उचित इलाज व मुआवजा

तुरंत नए और सुरक्षित रोपवे का निर्माण शुरू किया जाए

निष्कर्ष—सिस्टम की नाकामी का सबक

यह सिर्फ एक रोपवे का हादसा नहीं है। यह उस सिस्टम की नाकामी है जो आस्था को कमाई का जरिया समझती है, लेकिन सुरक्षा को तुच्छ मानती है। हर साल नवरात्र में लाखों श्रद्धालु पहाड़ चढ़ते हैं। क्या हर बार मौत का इंतजार करना पड़ेगा? क्या अब भी जिम्मेदार लोग सिर्फ बयान देंगे और मामला ठंडे बस्ते में चला जाएगा?


अब समय है सख्ती का।

अगर आज कार्रवाई नहीं हुई तो कल कोई और माँ-बहन, कोई और बेटा इसी मौत के झूले पर सवार हो सकता है।

माता खल्लारी की जय… लेकिन अब सुरक्षा भी चाहिए!

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 खल्लारी पहाड़ पर मौत का झूला! जर्जर रोपवे टूटा, महिला की मौत – प्रशासन की लापरवाही ने ली जान..?

रिपोर्टर मयंक गुप्ता 

महासमुंद। जिले से लगभग 30 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम खल्लारी में चैत्र नवरात्र के पावन अवसर पर उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब माता खल्लारी पहाड़ पर श्रद्धालुओं को ले जा रहा रोपवे अचानक हादसे का शिकार हो गया। श्रद्धा और आस्था के इस सफर ने कुछ ही पलों में भयावह रूप ले लिया।

बताया जा रहा है कि माता दर्शन के लिए 6 श्रद्धालु रोपवे में सवार होकर पहाड़ की ओर जा रहे थे। इसी दौरान अचानक रोपवे का तार टूट गया, जिससे केबिन अनियंत्रित होकर नीचे गिर पड़ा। हादसा इतना भीषण था कि उसमें सवार सभी लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।

घटना के बाद तत्काल घायलों को बागबाहरा स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान एक महिला की मौत हो गई। अन्य घायलों की हालत अब भी नाजुक बताई जा रही है, जिससे पूरे क्षेत्र में दहशत और आक्रोश का माहौल है।

 बड़ा सवाल – आखिर जिम्मेदार कौन..?

स्थानीय सूत्रों और ग्रामीणों का कहना है कि खल्लारी मंदिर में लगा रोपवे काफी पुराना और जर्जर स्थिति में था। कई बार इसकी मरम्मत और जांच की मांग उठी, लेकिन जिम्मेदार विभाग ने इसे नजरअंदाज किया। नतीजा आज सबके सामने है—एक श्रद्धालु की जान चली गई और कई जिंदगी मौत से जूझ रही हैं।

आस्था के नाम पर लापरवाही का खेल!

चैत्र नवरात्र जैसे बड़े पर्व में जहां हजारों श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं, वहां इस तरह की लापरवाही सीधे-सीधे प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े करती है। क्या बिना फिटनेस और सुरक्षा जांच के रोपवे का संचालन किया जा रहा था? अगर हां, तो यह किसी आपराधिक लापरवाही से कम नहीं।

मांग उठी – हो सख्त कार्रवाई

घटना के बाद ग्रामीणों और श्रद्धालुओं में भारी आक्रोश है। दोषियों पर कड़ी कार्रवाई, रोपवे की जांच और मृतक के परिजनों को उचित मुआवजा देने की मांग जोर पकड़ रही है।

 निष्कर्ष

यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सिस्टम की नाकामी का जीता-जागता उदाहरण है। सवाल यही है—क्या अब भी जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी या फिर हर बार की तरह मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?

“नकल का नेक्सस” उजागर..! मोंगरापाली ओपन परीक्षा केन्द्र पर व्हाइट बोर्ड से ‘पास कराने’ का खेल, लाखों की उगाही के आरोप से मचा हड़कंप

रिपोर्टर मयंक गुप्ता 

महासमुंद (छत्तीसगढ़)।

जिले के बागबाहरा क्षेत्र के छोटे से गांव मोंगरापाली में स्थित एक शासकीय स्कूल इन दिनों गंभीर आरोपों के चलते सुर्खियों में है। यहां संचालित छत्तीसगढ़ राज्य ओपन स्कूल का परीक्षा केन्द्र क्रमांक 0614 कथित रूप से नकल और अवैध वसूली के बड़े नेटवर्क का केंद्र बन गया है। आरोप केवल नकल तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पैसे लेकर परीक्षार्थियों को पास कराने के संगठित खेल की ओर इशारा करते हैं।

परीक्षा केन्द्र या ‘पास कराने की फैक्ट्री’..?

मोंगरापाली के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में संचालित इस केन्द्र को लेकर स्थानीय स्तर पर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। आरोप है कि यहां परीक्षा के दौरान खुलेआम नकल करवाई जाती थी।

बताया जा रहा है कि परीक्षार्थियों को पहले से सेटिंग के तहत बुलाया जाता था और परीक्षा के समय व्हाइट बोर्ड पर उत्तर लिखकर उन्हें कॉपी कराया जाता था।

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, यह पूरा सिस्टम सुनियोजित तरीके से चलता था, जहां पढ़ाई या योग्यता से ज्यादा महत्व पैसे को दिया जाता था।

 ‘पास कराने’ के नाम पर लाखों की वसूली..!

मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू आर्थिक लेन-देन से जुड़ा है। आरोप हैं कि केन्द्र से जुड़े कुछ जिम्मेदार लोग परीक्षार्थियों से मोटी रकम लेकर उन्हें पास कराने का भरोसा देते थे।

अनुमान लगाया जा रहा है कि इस कथित खेल के जरिए हर साल 20 से 25 लाख रुपये तक की वसूली की जाती थी।

दूर-दराज के जिलों से भी छात्रों को यहां परीक्षा दिलाने के लिए लाया जाता था, जिससे यह मामला और भी गंभीर बन जाता है।

 शिकायत के बाद पलटी कहानी

इस पूरे प्रकरण ने तब तूल पकड़ा जब स्कूल के कुछ शिक्षकों द्वारा उच्च स्तर पर शिकायत की गई। मामला लोक शिक्षण संचालनालय, रायपुर तक पहुंचा, जिसके बाद विभाग में हलचल मच गई।

लेकिन जांच की प्रक्रिया शुरू होते ही घटनाक्रम ने अचानक मोड़ ले लिया। शिकायत करने वाले ही अपने बयान से पीछे हट गए और लिखित में शिकायत से इनकार कर दिया।

इस यू-टर्न ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं—

क्या शिकायतकर्ताओं पर दबाव डाला गया?

या फिर मामला किसी प्रभावशाली नेटवर्क से जुड़ा हुआ है..?

 जांच में जुटा शिक्षा विभाग

मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला शिक्षा अधिकारी विजय लहरे ने टीम के साथ परीक्षा केन्द्र का निरीक्षण किया।

करीब दो घंटे तक चली जांच के दौरान उत्तर पुस्तिकाओं को सील कर सुरक्षित रूप से थाना में जमा कराया गया।

अधिकारियों के मुताबिक, जिले के अन्य ओपन परीक्षा केन्द्रों की भी जांच की जा रही है और इस मामले में उच्च स्तर से निर्देश मिलने की बात कही गई है।

उठते सवाल, जवाब का इंतजार

इस पूरे घटनाक्रम ने कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं—

यदि यह गड़बड़ी लंबे समय से चल रही थी, तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

क्या इसमें बड़े स्तर पर मिलीभगत शामिल है?

शिकायतकर्ताओं के पीछे हटने के पीछे असली वजह क्या है..?

 शिक्षा व्यवस्था पर गहरा असर

ओपन स्कूल प्रणाली उन विद्यार्थियों के लिए उम्मीद का जरिया होती है, जो किसी कारणवश नियमित पढ़ाई नहीं कर पाते।

लेकिन यदि इसी व्यवस्था में पैसे के दम पर परिणाम तय होने लगें, तो यह न केवल शिक्षा की विश्वसनीयता को कमजोर करता है, बल्कि समाज के भविष्य को भी प्रभावित करता है।

आगे क्या..?

फिलहाल प्रशासनिक जांच जारी है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या इस मामले में ठोस कार्रवाई होती है या यह मामला भी कागजों में सिमट कर रह जाएगा।

यह भी जांच का विषय है कि मामला केवल एक केन्द्र तक सीमित है या फिर किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा—जिसका खुलासा आने वाले दिनों में हो सकता है।

रोजगार से जुड़कर महिलाएं बदल रहीं अपनी पहचान – डॉ. एकता लंगेह

महासमुंद / ग्राम बावनकेरा में महिला सशक्तिकरण कार्यक्रम का सफल आयोजन ग्राम पंचायत के माध्यम से किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता के छायाचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. एकता लंगेह उपस्थित रहीं। कार्यक्रम में जनपद अध्यक्ष महासमुन्द दिशा रामस्वरूप दीवान, सभापति जनपद पंचायत महासमुन्द  धनेश गायकवाड, सरपंच गोपाल सिंह ध्रुव, उपसरपंच द्रोण चंद्राकर, पूर्व सरपंच नीलिमा चंद्राकर सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं ग्रामीण उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के दौरान महिलाओं ने अपने रोजगार एवं स्वरोजगार से जुड़े अनुभव मंच पर साझा किए। महिलाओं को शासन की विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत कम ब्याज दर पर ऋण लेकर आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया गया। ग्राम संगठन “दिव्या महिला समूह” की महिलाओं को उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया गया।

इसके साथ ही, शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को भी सम्मानित किया गया। मुख्य अतिथि डॉ. एकता लंगेह ने महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि महिलाएं स्वयं को कमजोर न समझें, बल्कि सशक्त बनकर परिवार एवं समाज को मजबूत करें।

कार्यक्रम में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। तुलसी यादव, हिना सिन्हा, लता ध्रुव, राधिका, उर्मिला, सरस्वती, खुशबू एवं हेमवती यादव के द्वारा सहित अन्य महिलाओं ने शासकीय योजनाओं पर खुलकर चर्चा की।

अंत में, छिंदोली की बालिकाओं द्वारा छत्तीसगढ़ी लोक नृत्य की आकर्षक प्रस्तुति दी गई, जिसने कार्यक्रम में सांस्कृतिक रंग भर दिया।

ईरान-इजरायल तनाव की आंच महासमुंद तक गैस की किल्लत में फुटपाथ दुकानदारों पर खाद्य विभाग का छापा

कमर्शियल गैस गायब, घरेलू सिलेंडर जब्त महासमुंद में कार्रवाई से छोटे व्यापारी नाराज़
रिपोर्टर मयंक गुप्ता 
महासमुंद। मध्य-पूर्व में चल रहे युद्ध का असर अब धीरे-धीरे भारत के स्थानीय बाजारों तक भी पहुंचने लगा है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार व्यवस्था प्रभावित हो रही है। विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाली कच्चे तेल, एलएनजी और उर्वरकों की सप्लाई बाधित होने से कई देशों की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा है। भारत भी इससे अछूता नहीं है और इसका असर आम लोगों की जेब पर साफ दिखाई देने लगा है।
ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने से घरेलू और व्यावसायिक गैस सिलेंडरों की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जानकारी के अनुसार घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में लगभग ₹60 और कमर्शियल सिलेंडर में करीब ₹115 तक की वृद्धि देखी गई है। इसके साथ ही समुद्री परिवहन महंगा होने के कारण अंतरराष्ट्रीय व्यापार की लागत भी बढ़ गई है, जिससे कई वस्तुओं के दाम बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

ईंधन और उर्वरक आपूर्ति पर असर
मध्य-पूर्व क्षेत्र वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का प्रमुख केंद्र माना जाता है। वहां तनाव बढ़ने से कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की सप्लाई पर असर पड़ रहा है। भारत अपनी उर्वरक जरूरतों के लिए भी खाड़ी देशों पर काफी हद तक निर्भर है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि यह स्थिति लंबी चली तो पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी, एलपीजी की उपलब्धता में कमी और कृषि क्षेत्र में उर्वरकों की किल्लत जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।
होटल-रेस्टोरेंट और छोटे कारोबारियों पर दबाव
कमर्शियल गैस सिलेंडरों की कमी का असर होटल, रेस्टोरेंट, मैस और छोटे खाद्य व्यवसायों पर भी पड़ रहा है। कई जगहों पर सिलेंडर की आपूर्ति बाधित होने से संचालकों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। राजस्थान के कोटा सहित कई शहरों में ऐसी स्थिति सामने आ चुकी है।
महासमुंद में भी दिखने लगा असर
वैश्विक परिस्थितियों के बीच महासमुंद जिले में भी गैस की कमी का असर देखने को मिल रहा है। बताया जा रहा है कि 5 मार्च के बाद से कई स्थानों पर कमर्शियल गैस सिलेंडर गोदामों में उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। ऐसे में फुटपाथ पर भोजन और नाश्ता बेचकर जीवनयापन करने वाले छोटे व्यवसायियों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
सिलेंडर की कमी के कारण कई फुटपाथ व्यवसायियों ने मजबूरी में घरेलू गैस सिलेंडर का उपयोग कर अपना काम चलाने की कोशिश की। इसी बीच बुधवार को खाद्य विभाग की टीम ने शहर के विभिन्न स्थानों पर अचानक दबिश देकर कई दुकानों से घरेलू गैस सिलेंडर जब्त करने की कार्रवाई की।
व्यापारियों में नाराजगी
कार्रवाई के बाद छोटे व्यापारियों में नाराजगी देखने को मिली। उनका कहना है कि जब कमर्शियल गैस सिलेंडर बाजार में उपलब्ध ही नहीं हैं, तो मजबूरी में घरेलू सिलेंडर का उपयोग करना पड़ रहा है। ऐसे समय में विभागीय कार्रवाई उनके रोज़गार पर सीधा असर डाल रही है।
खाद्य अधिकारी ने कहा – ऊपर से आया आदेश
इस संबंध में जब जिला खाद्य अधिकारी अजय कुमार यादव से संपर्क किया गया तो उन्होंने बताया कि कार्रवाई उच्च अधिकारियों के निर्देश पर की गई है। उन्होंने आदेश की प्रति उपलब्ध कराने की बात कही, हालांकि समाचार लिखे जाने तक संबंधित आदेश की कॉपी उपलब्ध नहीं हो सकी थी।
स्थानीय व्यापारियों का आरोप है कि विभाग द्वारा बिना पूर्व सूचना कार्रवाई करना उचित नहीं है, खासकर उस समय जब गैस की उपलब्धता पहले से ही प्रभावित है। ऐसे में प्रशासन से छोटे कारोबारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए संतुलित निर्णय लेने की मांग की जा रही है।
बढ़ती महंगाई से आम जनता भी परेशान
वैश्विक स्तर पर तेल-गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर सीधे तौर पर आम नागरिकों की जिंदगी पर पड़ता है। परिवहन लागत बढ़ने से खाद्य पदार्थों और दैनिक उपयोग की वस्तुओं के दाम भी बढ़ने लगते हैं। ऐसे में यदि ऊर्जा आपूर्ति की स्थिति जल्द सामान्य नहीं हुई, तो महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है।

महासमुंद में ‘पुनर्वास से पुनर्जीवन’ की मिसाल: 15 सशस्त्र माओवादियों ने छोड़ी हिंसा की राह, तिरंगे और संविधान के सामने किया आत्मसमर्पण

 

महासमुंद। छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती महासमुंद जिले से एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक खबर सामने आई है। प्रतिबंधित संगठन भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) से जुड़े 15 सशस्त्र माओवादियों ने आज महासमुंद पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया। यह आत्मसमर्पण केवल संख्या का मामला नहीं, बल्कि हिंसा से शांति की ओर बढ़ते कदम का प्रतीक माना जा रहा है।

9 महिलाएं और 6 पुरुष शामिल

आत्मसमर्पण करने वालों में 9 महिलाएं और 6 पुरुष शामिल हैं। सुरक्षा अधिकारियों का मानना है कि यह घटनाक्रम इस बात का संकेत है कि संगठन के भीतर भी अब बदलाव की सोच पनप रही है, विशेषकर महिला सदस्यों के बीच, जो हिंसात्मक गतिविधियों से अलग होकर सामान्य जीवन की ओर लौटना चाहती हैं।

“पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” अभियान का असर

इस पूरे प्रयास को “पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” नाम दिया गया है। यह अभियान संवाद, विश्वास और पुनर्वास की नीति पर आधारित है। पुलिस द्वारा लगातार चलाए गए जनजागरूकता कार्यक्रम, आकाशवाणी के माध्यम से संदेश, बैनर-पोस्टर और पाम्पलेट वितरण ने माओवादी सदस्यों तक शासन की पुनर्वास नीति की जानकारी पहुंचाई।
सूत्रों के अनुसार, ये सभी सदस्य ओडिशा राज्य कमेटी के पश्चिमी सब-जोन के अंतर्गत बरगढ़-बलांगीर-महासमुंद डिवीजन में सक्रिय थे। वर्ष 2010 के बाद गठित इस संरचना ने सीमावर्ती क्षेत्रों में कई घटनाओं को अंजाम दिया था। हालांकि, बीते कुछ समय से संगठन के भीतर असंतोष और कठिन परिस्थितियों के कारण सदस्य मुख्यधारा में लौटने को इच्छुक थे।

तिरंगा, संविधान और गुलाब से स्वागत

आत्मसमर्पण कार्यक्रम रक्षित केंद्र परसदा परिसर में आयोजित किया गया। इस दौरान समर्पण करने वाले सदस्यों को तिरंगा झंडा, संविधान की प्रति और लाल गुलाब भेंट कर सम्मानित किया गया। यह प्रतीकात्मक पहल शांति, विश्वास और नए जीवन की शुरुआत का संदेश देती है।

कठिन जंगल जीवन बना कारण

जानकारी के मुताबिक, जंगलों में लगातार दबाव, परिवार से दूरी, बीमारियों की समस्या और भविष्य की अनिश्चितता ने इन सदस्यों को आत्मचिंतन के लिए प्रेरित किया। शासन की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति ने उन्हें सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन की राह दिखाई।

पश्चिमी सब-जोन का खात्मा

पुलिस अधिकारियों का दावा है कि इस आत्मसमर्पण के बाद ओडिशा स्टेट कमेटी का पश्चिमी सब-जोन पूरी तरह निष्क्रिय हो चुका है। साथ ही छत्तीसगढ़ के रायपुर पुलिस रेंज और ओडिशा के संबलपुर रेंज को भी नक्सल प्रभाव से मुक्त घोषित किए जाने की जानकारी दी गई है। इसे मार्च 2026 तक नक्सलवाद के समूल उन्मूलन के लक्ष्य की दिशा में एक अहम उपलब्धि माना जा रहा है।

पुनर्वास नीति के तहत मिलेगी सुविधाएं

शासन की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के अंतर्गत समर्पण करने वाले सदस्यों को पदानुसार प्रोत्साहन राशि, स्वास्थ्य सुविधा, आवास सहायता और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। अधिकारियों का कहना है कि पूर्व में आत्मसमर्पण कर चुके कई सदस्य आज अपने परिवार के साथ सामान्य और सम्मानजनक जीवन व्यतीत कर रहे हैं, जो अन्य सक्रिय सदस्यों के लिए प्रेरणा बन रहे हैं।

बदलाव की नई दस्तक

महासमुंद से सामने आई यह घटना केवल 15 लोगों के आत्मसमर्पण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस व्यापक परिवर्तन की ओर संकेत करती है जहां बंदूक की जगह संविधान को स्वीकार किया जा रहा है। सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और विकास की संभावनाएं अब और मजबूत होती दिखाई दे रही हैं।
अब निगाहें बस्तर और ओडिशा के अन्य संवेदनशील इलाकों पर हैं — क्या वहां सक्रिय बचे हुए सदस्य भी इसी राह को चुनेंगे? फिलहाल महासमुंद में आज का दिन शांति और पुनर्वास की दिशा में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में दर्ज हो गया है।

माँ मातंगी दिव्य धाम में उमड़ा जनसैलाब: राष्ट्रीय गौरव रथ के स्वागत में गूंजा शिवगौरव और राष्ट्रभक्ति का जयघोष

 

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
धमतरी। जिले के कुरूद विकासखंड अंतर्गत ग्राम जी-जमगांव स्थित माँ मातंगी दिव्य धाम उस समय आस्था, आध्यात्म और राष्ट्रभक्ति के विराट संगम का साक्षी बना, जब राष्ट्रीय गौरव रथ का भव्य और ऐतिहासिक स्वागत किया गया। हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय ऊर्जा से भर दिया। अनुमानतः 20 से 25 हजार लोगों ने इस आयोजन में सहभागिता कर इसे जनआंदोलन का स्वरूप दे दिया।
धाम के पीठाधीश्वर डॉ. प्रेमा साई जी महाराज के सानिध्य में आयोजित इस समारोह ने केवल धार्मिक आयोजन का ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक जागरण और राष्ट्रीय चेतना के संदेश का भी प्रभावी मंच प्रदान किया। माँ मातंगी दिव्य धाम, जिसे त्रिकाल दर्शी धाम के रूप में भी पहचान मिली है, वर्षों से आध्यात्मिक साधना के साथ-साथ सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र रहा है।

राष्ट्र जागरण और सांस्कृतिक चेतना का संदेश

मीडिया से बातचीत के दौरान डॉ. प्रेमा साई जी महाराज ने कहा कि देश की नई पीढ़ी को अपने गौरवशाली इतिहास और महापुरुषों के जीवन मूल्यों से जोड़ना समय की आवश्यकता है। उन्होंने राज्य सरकार से आग्रह किया कि महान विभूतियों के जीवन, त्याग और योगदान को शैक्षणिक पाठ्यक्रम में उचित स्थान दिया जाए, ताकि युवाओं में राष्ट्रप्रेम और सांस्कृतिक आत्मगौरव की भावना सशक्त हो सके।
कार्यक्रम के अंतर्गत सायं 5 बजे राष्ट्रीय गौरव रथ का विधिवत पूजन-अर्चन किया गया। इसके पश्चात भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। भजन-कीर्तन, जयघोष और ढोल-नगाड़ों की गूंज से पूरा परिसर देर रात तक जीवंत बना रहा। रात्रि 11 बजे तक कार्यक्रम निरंतर चलता रहा और श्रद्धालुओं की आस्था का उत्साह देखते ही बनता था।

नासिक से जगन्नाथ पुरी तक राष्ट्रीय गौरव रथयात्रा

उल्लेखनीय है कि ‘राष्ट्रीय शिव जन्मोत्सव सोहळा 2026’ के अंतर्गत छावा भारत क्रांति मिशन द्वारा यह राष्ट्रीय गौरव रथयात्रा निकाली गई। यात्रा की शुरुआत कालिका माता मंदिर से 14 फरवरी को हुई। रथयात्रा सिन्नर, शिरडी, छत्रपति संभाजीनगर, नागपुर और रायपुर सहित विभिन्न नगरों से गुजरते हुए अंततः पुरी पहुँची, जहां 19 फरवरी को अंतरराष्ट्रीय शिव जन्मोत्सव समारोह संपन्न हुआ।
इस रथयात्रा में छत्रपति शिवाजी महाराज की अक्षत प्रतिमा को साथ लेकर देशभर में राष्ट्रभक्ति और सांस्कृतिक एकता का संदेश प्रसारित किया गया। विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं ने यात्रा का स्वागत कर शिवाजी महाराज के आदर्शों को स्मरण किया और उनके शौर्य, पराक्रम तथा राष्ट्रनिष्ठा से प्रेरणा लेने का संकल्प दोहराया।

छत्तीसगढ़ की धरती पर ऐतिहासिक क्षण

माँ मातंगी दिव्य धाम में आयोजित स्वागत समारोह को आयोजकों ने छत्तीसगढ़ की धरती के लिए गौरवपूर्ण और ऐतिहासिक क्षण बताया। कार्यक्रम ने यह सिद्ध किया कि जब आस्था और राष्ट्रभाव एक साथ प्रवाहित होते हैं, तो समाज में सकारात्मक ऊर्जा और एकता का संचार होता है।
राष्ट्रीय गौरव रथ का यह पड़ाव न केवल धार्मिक श्रद्धा का प्रतीक बना, बल्कि सांस्कृतिक स्वाभिमान और राष्ट्रीय एकात्मता का भी सशक्त संदेश देकर आगे बढ़ा।

महासमुंद में शिक्षा की नई उड़ान: AD Education Uplifters का धमाकेदार 3-इन-1 समर फाउंडेशन प्रोग्राम, फ्री रीजनिंग बूस्टर और ट्रायल क्लासेस के साथ..!

 

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुंद, 19 फरवरी 2026: छत्तीसगढ़ के महासमुंद शहर में शिक्षा के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी कदम उठाया गया है। AD Education Uplifters नामक संस्थान ने गर्मियों की छुट्टियों को विद्यार्थियों के लिए सुनहरा अवसर बनाने के उद्देश्य से “समर वेकेशन फाउंडेशन कॉम्बो” प्रोग्राम लॉन्च किया है। इस पहल का मुख्य लक्ष्य न सिर्फ छात्रों को बुनियादी ज्ञान प्रदान करना है, बल्कि उन्हें प्रतिस्पर्धी दुनिया में आगे बढ़ने के लिए सशक्त बनाना है, जहां वे न केवल पढ़ाई में पारंगत हों, बल्कि जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार भी हों।


संस्थान के निदेशक ने बताया कि यह अनोखा 3-इन-1 फाउंडेशन प्रोग्राम विशेष रूप से डिजाइन किया गया है, जिसमें इंग्लिश व्याकरण एवं लेखन कौशल, हिंदी व्याकरण एवं लेखन कौशल, साथ ही गणित की मजबूत बुनियाद शामिल है। इन तीनों विषयों को एक साथ जोड़कर छात्रों को संतुलित विकास का मौका मिलेगा, जो उनकी स्कूली शिक्षा को मजबूती प्रदान करेगा। इसके अतिरिक्त, एक विशेष आकर्षण के रूप में रीजनिंग और मेंटल एबिलिटी का कोर्स पूरी तरह मुफ्त जोड़ा गया है, जो छात्रों की तार्किक क्षमता को निखारेगा और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए उन्हें तैयार करेगा।
यह प्रोग्राम कक्षा 5 से 12 तक के सभी छात्रों के लिए उपलब्ध है और कुल 90 दिनों का गहन समर सेशन होगा। क्लासेस को दो स्तरों – बेसिक और एडवांस्ड – में विभाजित किया गया है, ताकि हर छात्र अपनी क्षमता के अनुसार लाभ उठा सके। इससे छात्रों को गर्मियों में बिना बोर हुए, खेल-खेल में सीखने का अवसर मिलेगा, जो उनकी एकाग्रता और रुचि को बढ़ाएगा।

फीस संरचना को भी किफायती रखा गया है, ताकि हर वर्ग के परिवार इसे आसानी से वहन कर सकें।

कक्षा 5 से 8 तक: मात्र ₹3000/- (90 दिनों के लिए)
कक्षा 9 से 12 तक: ₹4500/- (90 दिनों के लिए)
इसके अलावा, संस्थान छात्रों को 3 दिनों का मुफ्त डेमो क्लास और करियर गाइडेंस सेशन प्रदान कर रहा है। यह सुविधा छात्रों को प्रोग्राम की गुणवत्ता का प्रत्यक्ष अनुभव करने का मौका देगी, साथ ही उनके भविष्य की दिशा तय करने में मदद करेगी। डेमो क्लासेस में छात्र प्रैक्टिकल तरीके से विषयों को समझ सकेंगे, जो उनकी जिज्ञासा को और बढ़ाएगा।
AD Education Uplifters का दायरा सिर्फ समर प्रोग्राम तक सीमित नहीं है। संस्थान कक्षा 8 से 10 तक के सभी विषयों की कोचिंग, कक्षा 11-12 के कॉमर्स और आर्ट्स स्ट्रीम, साथ ही बीए और बीकॉम स्तर की कक्षाएं भी संचालित करेगा। इसके अलावा, जवाहर नवोदय विद्यालय प्रवेश परीक्षा की तैयारी और विभिन्न सरकारी प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे छत्तीसगढ़ व्यापम, एसएससी, रेलवे, पीएससी आदि) के लिए बुनियादी प्रशिक्षण भी उपलब्ध होगा। संस्थान का फोकस शुरुआती स्तर से ही छात्रों को सरकारी नौकरियों और अन्य प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करना है, ताकि वे भविष्य में आत्मनिर्भर और सफल बन सकें।
यह प्रोग्राम छात्रों के समग्र विकास पर जोर देता है, जहां शिक्षा सिर्फ किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि व्यावहारिक कौशल और मानसिक मजबूती का माध्यम बनेगी। विशेषज्ञ शिक्षकों की टीम द्वारा संचालित ये क्लासेस आधुनिक शिक्षण विधियों पर आधारित होंगी, जिसमें इंटरएक्टिव सेशंस, ग्रुप डिस्कशन और प्रैक्टिकल एक्सरसाइज शामिल होंगे। इससे छात्रों का आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे स्कूल के अलावा बाहर की दुनिया के लिए भी तैयार होंगे।

समर सेशन में प्रवेश 10 मार्च 2026 से शुरू होगा। इच्छुक छात्र और अभिभावक निम्न पते पर संपर्क कर सकते हैं।

पता: केंद्रीय विद्यालय के पास, महासमुंद (छत्तीसगढ़)
संपर्क नंबर: 7898112119

यह पहल महासमुंद जैसे छोटे शहरों में शिक्षा की गुणवत्ता को ऊंचा उठाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो स्थानीय छात्रों को बड़े शहरों की सुविधाओं के बराबर अवसर प्रदान करेगी। AD Education Uplifters की यह मुहिम न केवल छात्रों के भविष्य को संवारेगी, बल्कि पूरे समुदाय को प्रेरित करेगी।

बिरकोनी समिति में 35 लाख+ का घोटाला, आरोपी पुराने अपराधी अब ये करोड़ों के घोटाले करने की तैयारी में जुटे — प्रशासन की चुप्पी क्यों..?

 

समिति प्रभारी मोहन जांगड़े और लेखापाल श्रीमती कुसुमलता निषाद को नोटिसों से कोई फर्क नहीं पड़ता है ।

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुंद, 15 फरवरी 2026 छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में धान खरीदी की आड़ में करोड़ों रुपये का कथित घोटाला सामने आया है, जो राज्य की सहकारी व्यवस्था की जड़ों को खोखला करने वाली साजिश का नंगा चेहरा पेश कर रहा है। ग्रामीण सेवा सहकारी समिति, बिरकोनी के प्रभारी मोहन सिंह जांगड़े और लेखापाल कुसुमलता निषाद पर लगे आरोपों ने न केवल स्थानीय किसानों का भरोसा तोड़ा है, बल्कि पूरे प्रणाली पर भ्रष्टाचार का दाग लगा दिया है। फर्जी दस्तावेजों से की गई खरीदी, स्टॉक में जानबूझकर की गई हेराफेरी और सरकारी फंड का बेशर्म दुरुपयोग—ये आरोप अब जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की जांच रिपोर्ट में साकार हो चुके हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह मामला भी प्रशासनिक फाइलों की भूलभुलैया में दफन हो जाएगा, या आखिरकार कोई सख्त कदम उठेगा..?

जांच की शुरुआत शिकायतों ने खोली आंखें

यह कांड तब उजागर हुआ जब तुमगांव शाखा के प्रबंधक ने औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। प्राधिकृत अधिकारी के पत्र के आधार पर रायपुर स्थित जिला सहकारी केंद्रीय बैंक ने तुरंत प्रारंभिक जांच शुरू की, जिसमें वित्तीय अनियमितताओं के स्पष्ट संकेत मिले। सूत्रों के मुताबिक, बिरकोनी समिति में धान खरीदी के नाम पर बिना किसी किसान की मौजूदगी के टोकन और आवक पर्ची के बिना ही ऑनलाइन रिकॉर्ड में हेराफेरी की गई। उधारी के बहाने फर्जी लेन-देन दर्ज किए गए, जिससे स्टॉक का मिलान करते समय भारी अंतर सामने आया।
संयुक्त लेखा परीक्षण में जो आंकड़े निकले, वे चौंकाने वाले हैं। बिरकोनी केंद्र में कुल 75,303.20 क्विंटल धान की खरीदी के दावे के मुकाबले महज 930.73 क्विंटल की कमी पाई गई, जिसकी कीमत करीब 21 लाख 40 हजार 679 रुपये आंकी गई। इसी तरह, कांपा केंद्र में 605.59 क्विंटल धान गायब होने की पुष्टि हुई, जिसका मूल्य 13 लाख 92 हजार 857 रुपये है। कुल मिलाकर, यह घोटाला 35 लाख रुपये से अधिक का है, जो सीधे सरकारी खजाने पर बोझ डाल रहा है। दोनों केंद्रों के जिम्मेदार अधिकारियों को रिकवरी का आदेश जारी कर सात दिनों के अंदर राशि जमा करने का फरमान सुनाया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस प्रगति नहीं हुई।

नोटिसों की बौछार, कार्रवाई का सन्नाटा

बैंक प्रबंधन ने इस मामले को हल्के में नहीं लिया। 16 जनवरी 2026 को पत्र संख्या 3066 के जरिए आरोपी अधिकारियों को तीन दिनों के अंदर स्पष्टीकरण मांगा गया। इससे पहले अक्टूबर 2025 में नोटिस क्रमांक 2249 जारी कर सात दिनों में पूरी राशि जमा करने का अल्टीमेटम दिया गया था। लेकिन समय सीमा लांघ जाने के बावजूद न तो रिकवरी की कोई पुष्टि हुई और न ही निलंबन या विभागीय जांच जैसी कोई कड़ी कार्रवाई का ऐलान। स्थानीय किसान संगठनों का आरोप है कि यह ‘नोटिस का ढोंग’ मात्र है, जिसका मकसद मामले को लटकाना है। क्या उच्च अधिकारियों पर दबाव है, या भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी गहरी हैं कि कार्रवाई नामुमकिन हो गई..?

दोहराए जा रहे पुराने घाव आरोपी अधिकारियों का काला इतिहास

यह पहली बार नहीं है जब ये नाम सुर्खियों में आए हों। मोहन सिंह जांगड़े पर पहले बावनकेरा समिति में वित्तीय गड़बड़ियों के गंभीर आरोप लग चुके हैं, जहां लाखों रुपये की अनियमितताएं सामने आई थीं। कांपा केंद्र में भी उनके कार्यकाल के दौरान स्टॉक में भारी कमी का मामला दर्ज है। वहीं, कुसुमलता निषाद का रिकॉर्ड भी दागदार है—बिरकोनी में ही 21 लाख से ज्यादा की कमी की जिम्मेदारी उन पर तय हुई है। इससे पहले परिवहन से जुड़े एक मामले में डीओ एडजस्टमेंट में हेराफेरी के चलते उन्हें निलंबित भी किया गया था। फिर भी, इन्हें दोबारा वित्तीय जिम्मेदारियां सौंपी जाना प्रशासन की लापरवाही को उजागर करता है। सवाल उठता है: क्या भ्रष्टाचारियों को बार-बार संरक्षण देने का सिलसिला कब रुकेगा..?

किसानों का खून-पसीना घोटाले का सबसे बड़ा शिकार

इस घोटाले का सबसे ज्यादा नुकसान उन साधारण किसानों को हो रहा है, जो समर्थन मूल्य पर अपनी फसल बेचने के भरोसे जीते हैं। फर्जी एंट्रीज के कारण असली किसानों का भुगतान अटक गया है, जबकि बोगस दावों से सरकारी सब्सिडी का दुरुपयोग हो रहा है। इससे न केवल धान खरीदी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए हैं, बल्कि सहकारी बैंकिंग सिस्टम की साख भी धूल चाट रही है। महासमुंद जैसे ग्रामीण इलाकों में जहां किसान पहले ही सूखा, बाढ़ और कर्ज के जाल में फंसे हैं, यह घोटाला उनकी कमर तोड़ने वाला है। राज्य के अन्य जिलों—जैसे बिलासपुर और रायपुर—में ऐसे मामलों पर तुरंत निलंबन और एफआईआर दर्ज की गई हैं। तो बिरकोनी में यह देरी क्यों? क्या राजनीतिक दबाव काम कर रहा है..?

जनाक्रोश सड़कों पर उतर आए किसान, मांगें तेज

स्थानीय किसान संगठनों और ग्रामीणों ने अब चुप्पी तोड़ दी है। वे तत्काल आरोपी अधिकारियों का निलंबन, स्वतंत्र और विस्तृत जांच, पूरी रिकवरी के साथ कड़ी सजा, तथा भविष्य में पारदर्शी निगरानी तंत्र की स्थापना की मांग कर रहे हैं। बिरकोनी और आसपास के गांवों में धरना-प्रदर्शन शुरू हो चुके हैं, जहां नारों से गूंज रहा है: “भ्रष्टाचारियों को कुर्सी पर बिठाओ मत, किसानों का खून बहाओ मत!” यदि जल्द कार्रवाई न हुई, तो आंदोलन और तेज होने की चेतावनी दी गई है।

अंतिम सवाल उदाहरण बनेगा या फाइलों का कचरा..?

बावनकेरा से कांपा और अब बिरकोनी—यह सिलसिला कब थमेगा? क्या हर बार घोटाले के बाद वही चेहरे साफ बच निकलेंगे और नई जिम्मेदारियां थाम लेंगे? प्रशासन अब सोचने को मजबूर है: क्या यह अवसर देता रहेगा कि समितियां किसानों को ‘चूना’ लगाती रहें, या सख्ती से उदाहरण कायम करेगा? यदि समय रहते कठोर कदम न उठे, तो सहकारी व्यवस्था में जनता का विश्वास हमेशा के लिए डगमगा सकता है। सभी की नजरें अब जिला प्रशासन और उच्च अधिकारियों पर टिकी हैं—क्या यह प्रकरण ‘टाय-टाय फीस’ साबित होगा, या न्याय की नई मिसाल? विकास की इस दौड़ में भ्रष्टाचार को जड़ से उखाड़ना ही एकमात्र रास्ता है।