महासमुंद में धान घोटाले का पर्दाफाश: 41 लाख का गबन करने वाला समिति प्रभारी गिरफ्तार, पुलिस ने मोखा गांव में दबोचा
महासमुंद: छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में धान खरीदी में हुए एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। उपार्जन केंद्र बाघामुड़ा में 40.96 लाख रुपये के धान की हेराफेरी के मामले में फरार चल रहे समिति प्रभारी प्रेमसिंह ध्रुव को पुलिस ने लंबी मशक्कत के बाद गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी पर रिकॉर्ड में हेरफेर कर हजारों कट्टा धान गायब करने का आरोप है।
क्या है पूरा मामला..?
मामले की शुरुआत इस साल 24 जनवरी को हुई, जब मुनगासेर ब्रांच के मैनेजर सेवकराम चंद्राकर ने थाना बागबाहरा में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के अनुसार, उपार्जन केंद्र बाघामुड़ा के ऑनलाइन रिकॉर्ड में 1,25,878 कट्टा धान दर्ज था। हालांकि, जब मौके पर भौतिक सत्यापन किया गया, तो वहां धान के केवल 1,22,574 कट्टे ही मिले।
जांच में सामने आया कि केंद्र से कुल 3,304 कट्टा धान (लगभग 1321.6 क्विंटल) गायब था। सरकारी समर्थन मूल्य 3,100 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से इस गायब धान की कुल कीमत 40,96,960 रुपये आंकी गई है। इस गंभीर अनियमितता के सामने आने के बाद समिति प्रभारी प्रेमसिंह ध्रुव के खिलाफ बीएनएस (BNS) की धारा 316(5) के तहत मामला दर्ज किया गया था।
तकनीकी ट्रैकिंग से मिली सफलता
मामला दर्ज होने के बाद से ही समिति प्रभारी प्रेमसिंह ध्रुव फरार चल रहा था और पुलिस लगातार उसकी धरपकड़ में जुटी थी। आरोपी काफी समय से अपनी लोकेशन बदल रहा था, जिससे उसे पकड़ना चुनौती बन गया था।
पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तकनीकी विश्लेषण का सहारा लिया। आरोपी के मोबाइल का सीडीआर (CDR) खंगाला गया और लोकेशन की सटीक जानकारी मिलते ही पुलिस ने घेराबंदी शुरू कर दी। अंततः आरोपी को ग्राम मोखा से दबोच लिया गया।
न्यायिक हिरासत में भेजा गया आरोपी
गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आरोपी प्रेमसिंह ध्रुव (42 वर्ष) को हिरासत में लेकर पूछताछ की। आज, 17 जुलाई 2026 को आवश्यक कानूनी कार्रवाई पूरी करने के बाद उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया है।
इस कार्रवाई ने उन सभी लोगों के लिए एक कड़ा संदेश दिया है जो सरकारी अनाज मंडियों और उपार्जन केंद्रों में भ्रष्टाचार को अंजाम देने का प्रयास कर रहे हैं। पुलिस की इस तत्परता ने लाखों रुपये के सरकारी गबन को उजागर करने में बड़ी भूमिका निभाई है।




