“खाप पंचायत का खौफ या गांव में अपनी ही सरकार?” 6 महीने से हुक्का-पानी बंद, घर पर हमला और बाउंड्रीवॉल तोड़ने का आरोप; एक साल पुराने जनदर्शन पर भी कार्रवाई नहीं! अब परिवार ने दी सामूहिक आत्मदाह की चेतावनी
सिंधौरी पंचायत के आश्रित ग्राम नवापारा में धोबी परिवार का आरोप—न अपनी जमीन पर निर्माण की आजादी, न गांव में सम्मान से जीने का अधिकार! कलेक्टर-एसपी तक पहुंची फरियाद, आखिर किसके दबाव में खामोश है प्रशासन?
प्रधान संपादक मयंक गुप्ता/ 04 नवम्बर 2026/ दिन बुधवार
महासमुंद / पटेवा, छत्तीसगढ़
महासमुंद जिले के पटेवा थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत सिंधौरी के आश्रित ग्राम नवापारा से सामने आया मामला ग्रामीण सामाजिक व्यवस्था, कानून के राज और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। यहां एक धोबी परिवार ने पिछले पांच से छह महीनों से कथित सामाजिक बहिष्कार, हुक्का-पानी बंद करने, गांव की सामान्य सुविधाओं से वंचित रखने, अपनी ही जमीन पर निर्माण कार्य रोकने, घर पर हमला करने और जान से मारने की धमकी देने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।
मामले की गंभीरता इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि पीड़ित परिवार का दावा है कि उसने करीब एक वर्ष पहले भी अपनी जमीन पर बाउंड्रीवॉल निर्माण में बाधा और कथित दबंगई के संबंध में जिला प्रशासन के जनदर्शन में लिखित शिकायत की थी। उस शिकायत का जनदर्शन पंजीयन क्रमांक सुरक्षा नं. 848, दिनांक 02 दिसंबर 2025 बताया गया है। लेकिन परिवार का आरोप है कि आज तक उसे कोई ठोस न्याय नहीं मिला।
अब 25 अक्टूबर 2026 को घर पर कथित हमला, बाउंड्रीवॉल तोड़ने, ईंट-पत्थर फेंकने और जान से मारने की धमकी की शिकायत ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है।
लगातार कथित प्रताड़ना और असुरक्षा से परेशान परिवार ने अब परिवार सहित आत्मदाह करने जैसी बेहद गंभीर चेतावनी दी है। यह स्थिति प्रशासन के लिए महज एक शिकायत नहीं, बल्कि तत्काल हस्तक्षेप की मांग करने वाली चेतावनी है।
छह महीने से सामाजिक बहिष्कार! आखिर इस परिवार का कसूर क्या है..?
पीड़ित भुवनेश्वर निर्मलकर पिता स्वर्गीय बुधुराम निर्मलकर का आरोप है कि पिछले पांच से छह महीनों से उनके परिवार को गांव में सामाजिक रूप से अलग-थलग किया जा रहा है। परिवार के अनुसार उनका हुक्का-पानी बंद कर दिया गया है और गांव में आम लोगों को मिलने वाली सामान्य सुविधाओं से भी उन्हें कथित रूप से वंचित किया जा रहा है।
परिवार का सवाल है कि आखिर उन्हें किस अपराध की सजा दी जा रही है? क्या किसी ग्रामीण परिवार को इस तरह सामाजिक दबाव में रखकर जीने के लिए मजबूर किया जा सकता है?
यदि किसी परिवार का सामाजिक बहिष्कार किया जा रहा है और उसे सामान्य सामुदायिक जीवन से अलग रखने का प्रयास हो रहा है, तो यह केवल दो पक्षों के बीच का विवाद नहीं रह जाता। यह मानवीय गरिमा, सामाजिक समानता और कानून के शासन से जुड़ा गंभीर विषय बन जाता है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि गांव में ऐसी कथित व्यवस्था चलाने का अधिकार आखिर किसे है? क्या किसी व्यक्ति या समूह को यह तय करने का अधिकार मिल गया है कि कौन परिवार गांव में सम्मान से रहेगा और कौन नहीं?
एक साल पहले जनदर्शन में लगाई थी गुहार, फिर भी नहीं मिला न्याय?
इस पूरे मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू करीब एक वर्ष पुरानी शिकायत है।
पीड़ित द्वारा पूर्व में जिला कलेक्टर के जनदर्शन में प्रस्तुत आवेदन के अनुसार, ग्राम नवापारा, राजस्व निरीक्षक मंडल झलप, पटवारी हल्का नंबर 21 में उनके नाम पर भूमि स्वामी हक की कुल आठ खसरा नंबरों की जमीन दर्ज है। इसका कुल रकबा 1.3900 हेक्टेयर बताया गया है।
आवेदन में खसरा नंबर 433, रकबा 0.0200 हेक्टेयर पर पहले से मकान निर्मित होने का उल्लेख किया गया है। पीड़ित का कहना था कि वह अपने मकान की सुरक्षा के लिए अपनी ही स्वामित्व वाली जमीन पर बाउंड्रीवॉल का निर्माण करा रहा था।
आवेदक ने दावा किया था कि निर्माण से किसी अन्य व्यक्ति का रास्ता या सुखाचार प्रभावित नहीं हो रहा था। इसके बावजूद सुमेरसिंह महिलांग, साखाराम यादव, कार्तिक ध्रुव, ललित ध्रुव, विश्राम चौहान, लिलेश चौहान, घना निषाद सहित अन्य लोगों द्वारा कथित रूप से निर्माण कार्य बलपूर्वक रुकवाया गया।
आवेदन में गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी देने के आरोप भी लगाए गए थे।
इस शिकायत का जनदर्शन पंजीयन क्रमांक सुरक्षा नं. 848, दिनांक 02 दिसंबर 2025 बताया गया है।
अब सवाल यह है कि जब पीड़ित परिवार करीब एक वर्ष पहले ही जिला प्रशासन के सामने अपनी समस्या रख चुका था, तो उस शिकायत पर क्या जांच हुई? संबंधित अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया था या नहीं? यदि जांच हुई तो उसका निष्कर्ष क्या निकला? और यदि कार्रवाई नहीं हुई तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है?
जनदर्शन में शिकायत दर्ज होना ही क्या प्रशासनिक जिम्मेदारी की इतिश्री है?
25 अक्टूबर को घर पर हमला और बाउंड्रीवॉल तोड़ने का आरोप
पुराने विवाद के बीच पीड़ित परिवार ने 25 अक्टूबर 2026 की घटना को लेकर एक और लिखित शिकायत की है।
भुवनेश्वर निर्मलकर के अनुसार, ग्राम नवापारा के विश्राम चौहान, हरियर चौहान, सुभाष चौहान और लिलेश चौहान, सभी पिता मानिकराम चौहान सहित अन्य लोग उनके घर पहुंचे और विवाद करने लगे।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इस दौरान घर की बाउंड्रीवॉल तोड़ी गई, ईंट-पत्थर फेंके गए, मारपीट और अश्लील गाली-गलौज की गई तथा जान से मारने की धमकी दी गई।
परिवार का कहना है कि घटनाक्रम इतना भयावह था कि घर के सदस्यों को अपनी जान बचाने के लिए घर के भीतर छिपना पड़ा।
इसी दौरान रायपुर निवासी मो. हामिद खान, जिनकी ग्राम नवापारा में पैतृक कृषि भूमि बताई गई है, मौके पर पहुंचे और बीच-बचाव किया। शिकायतकर्ता के अनुसार उनके हस्तक्षेप से स्थिति संभली।
हालांकि, इन आरोपों की वास्तविकता पुलिस जांच और संबंधित पक्षों के बयान के बाद ही स्पष्ट होगी।
डायल 112 को सूचना, फिर खेत में मवेशी छोड़कर फसल चराने का आरोप
पीड़ित के मुताबिक, घटना के दौरान डायल 112 को सूचना दी गई। इसके बाद उन्होंने थाना पटेवा में भी शिकायत की।
परिवार का आरोप है कि इसी बीच उनकी सड़क किनारे स्थित कृषि भूमि में मवेशी छोड़कर फसल को नुकसान पहुंचाया गया।
शिकायत में खसरा नंबर 913, 914, 915 और 947 का उल्लेख करते हुए बताया गया है कि 26 अक्टूबर की सुबह खेत पहुंचकर क्षतिग्रस्त फसल की तस्वीरें ली गईं, ताकि नुकसान के साक्ष्य प्रस्तुत किए जा सकें।
पीड़ित का यह भी कहना है कि थाना प्रभारी द्वारा नायब तहसीलदार झलप के साथ मौके का निरीक्षण कराने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन उनके अनुसार निर्धारित समय पर निरीक्षण नहीं हुआ।
अब सवाल है कि क्या पुलिस और राजस्व विभाग ने इस शिकायत पर संयुक्त रूप से कोई जांच की? फसल नुकसान का आकलन हुआ या नहीं? और यदि नहीं हुआ तो आखिर क्यों..?
शासकीय भूमि के कथित फर्जी पट्टे का मामला भी प्रशासन के सामने
नवापारा विवाद का एक अन्य पहलू शासकीय भूमि के कथित फर्जी पट्टे और राजस्व रिकॉर्ड में अनियमितताओं से जुड़ा हुआ है।
इस संबंध में कलेक्टर न्यायालय में दिए गए एक अलग आवेदन में खसरा नंबर 429/2, 236/2 तथा वर्ष 1983-84 के पुराने राजस्व अभिलेखों में दर्ज खसरा नंबर 120/1 (घास एवं चरागाह मद) और 132/2 का उल्लेख किया गया है।
आवेदन में पुराने राजस्व रिकॉर्ड में ग्राम कोटवार मानिकराम के नाम से संबंधित प्रविष्टि होने तथा वर्तमान रिकॉर्ड में रुक्मणी बाई का नाम दर्ज होने की बात कही गई है।
आवेदक का आरोप है कि ग्राम कोटवार द्वारा अपने पद का कथित दुरुपयोग कर शासकीय भूमि का पट्टा अपने और अपने वारिसों के नाम पर बनवाया गया तथा भूमि का अवैध बंटवारा किया गया।
यह आरोप भी जांच का विषय है। पुराने अभिलेखों, पट्टा जारी करने की प्रक्रिया, नामांतरण आदेश और वर्तमान राजस्व रिकॉर्ड का मिलान किए बिना किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
लेकिन सवाल यह है कि क्या प्रशासन इस मामले की निष्पक्ष राजस्व जांच कराएगा..?
आत्मदाह की चेतावनी: प्रशासन के लिए इससे बड़ी चेतावनी क्या होगी..?
लगातार विवाद, कथित सामाजिक बहिष्कार, अपनी जमीन पर निर्माण को लेकर विवाद और घर पर हमले की शिकायतों के बीच पीड़ित परिवार अब बेहद निराश और भयभीत होने की बात कह रहा है।
परिवार की ओर से परिवार सहित आत्मदाह करने जैसी गंभीर चेतावनी दिए जाने की जानकारी सामने आई है।
यह स्थिति किसी भी संवेदनशील प्रशासन के लिए अत्यंत चिंताजनक होनी चाहिए। किसी भी परिवार को न्याय की आस में इस हद तक मानसिक दबाव और निराशा में नहीं पहुंचना चाहिए।
यहां सवाल केवल शिकायतों पर कार्रवाई का नहीं, बल्कि एक परिवार की सुरक्षा और जीवन का भी है। प्रशासन को किसी अप्रिय घटना की प्रतीक्षा किए बिना तत्काल पीड़ित परिवार से संपर्क कर उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।
कलेक्टर और एसपी के सामने अब सीधे पांच सवाल
1 दिसंबर 2025 में जनदर्शन में दर्ज सुरक्षा क्रमांक 848 की शिकायत पर अब तक क्या कार्रवाई हुई..? यदि जांच हुई तो उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की गई..?
2 पांच से छह महीने से कथित सामाजिक बहिष्कार और हुक्का-पानी बंद करने के आरोपों की जांच किस अधिकारी ने की..?
3 25 अक्टूबर 2026 को घर पर हमला, बाउंड्रीवॉल तोड़ने और जान से मारने की धमकी की शिकायत पर पुलिस ने क्या कार्रवाई की?
4 कृषि भूमि में मवेशी छोड़कर फसल नुकसान पहुंचाने के आरोपों की जांच और क्षतिपूर्ति के लिए क्या कदम उठाए गए..?
5 शासकीय भूमि के कथित फर्जी पट्टे और राजस्व रिकॉर्ड में अनियमितताओं की जांच कब तक पूरी होगी..?
अब देखना है प्रशासन जागता है या किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार करेगा!
ग्राम पंचायत सिंधौरी के आश्रित ग्राम नवापारा का यह मामला अब कई स्तरों पर प्रशासनिक हस्तक्षेप की मांग कर रहा है। एक तरफ सामाजिक बहिष्कार के गंभीर आरोप हैं, दूसरी तरफ भूमि विवाद, निर्माण कार्य में बाधा, घर पर हमले और फसल नुकसान की शिकायतें हैं। वहीं करीब एक वर्ष पुराने जनदर्शन आवेदन पर कार्रवाई नहीं होने का आरोप भी प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल खड़े कर रहा है।
पीड़ित भुवनेश्वर निर्मलकर ने कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक से निष्पक्ष जांच, परिवार की सुरक्षा, दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई तथा राजस्व रिकॉर्ड की जांच की मांग की है।
अब जिला प्रशासन को स्पष्ट करना होगा कि जनदर्शन में दर्ज शिकायत पर क्या कार्रवाई हुई और वर्तमान शिकायतों पर आगे क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
आखिर नवापारा में कानून का राज चलेगा या कथित सामाजिक दबाव और दबंगई का?
क्या एक आम ग्रामीण परिवार को अपनी ही जमीन पर बाउंड्रीवॉल बनाने, गांव में सम्मान से रहने और सुरक्षा के साथ जीवन जीने के लिए भी प्रशासन के दरवाजे पर बार-बार दस्तक देनी पड़ेगी..?
पीड़ित परिवार को न्याय मिलना चाहिए जो हुआ गलत हुआ है।
रामप्रकाश बंजारे
सरपंच ग्राम पंचायत सिंधौरी
अब पूरे जिले की नजर कलेक्टर और एसपी की कार्रवाई पर टिकी है।
प्रधान संपादक | मयंक गुप्ता
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