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विश्व बंधुत्व दिवस पर भावभीनी श्रद्धांजलि: दादी प्रकाशमणि जी की 19वीं पुण्यतिथि पर उपकार भवन में गूंजा परमात्मा का संदेश

विश्व बंधुत्व दिवस पर भावभीनी श्रद्धांजलि: दादी प्रकाशमणि जी की 19वीं पुण्यतिथि पर उपकार भवन में गूंजा परमात्मा का संदेश,

रक्तदान शिविर में 50 से अधिक लोगों ने किया महादान

महासमुंद ​/ शहर के तुमगांव रोड स्थित उपकार भवन सेवाकेंद्र ​प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय द्वारा संस्थान की पूर्व मुख्य प्रशासिका, राजयोगिनी दादी प्रकाशमणि जी की 19वीं पुण्य स्मृति दिवस को अत्यंत श्रद्धा और गरिमा के साथ ‘विश्व बंधुत्व दिवस’ के रूप में मनाया गया। इस अवसर पर ब्रह्माकुमारी बहनों सहित समस्त ईश्वरीय परिवार के सदस्यों ने एकत्रित होकर दादी जी के दिव्य जीवन को याद किया और उन्हें अपने श्रद्धा-सुमन अर्पित किए।
​स्मृति दिवस के पावन अवसर पर उपकार भवन सेवाकेंद्र में एक विशेष ‘स्वैच्छिक रक्तदान शिविर’ का आयोजन किया गया। इस मानवीय पहल में समाज के विभिन्न वर्गों से आए 50 से अधिक युवाओं और श्रद्धालुओं ने निस्वार्थ भाव से रक्तदान कर दुआओं की झोली भरी।

​प्रेम, एकता और आत्म-जागरूकता का दिया संदेश

​सेवाकेंद्र संचालिका ब्रह्माकुमारी प्रीति दीदी ने दादी जी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि दादी प्रकाशमणि जी प्रेम, नम्रता और करुणा की साक्षात मूरत थीं। उनका स्पष्ट मानना था कि संपूर्ण विश्व की सभी आत्माएं एक ही परमपिता परमात्मा की संतान हैं, इसलिए हम सब आपस में भाई-भाई हैं।

​प्रीति दीदी ने दादी जी की मुख्य शिक्षाओं को याद करते हुए बताया कि:

​सद्गुणों का समावेश: मानव जीवन को सार्थक बनाने के लिए जीवन में प्रेम, एकता, नम्रता, सहनशीलता और हर्षितमुखता का होना अनिवार्य है।

​निष्काम सेवा: बिना किसी स्वार्थ और अपेक्षा के समाज व मानवता की सेवा करना ही सबसे बड़ा धर्म है।

​आत्म-जागरूकता: स्वयं को आत्मा समझकर परमात्मा की याद में रहना ही सभी दुखों से मुक्ति का मार्ग है।

​वैश्विक स्तर पर ईश्वरीय संदेश का प्रसार

​उल्लेखनीय है कि वर्ष 1969 में संस्थान के संस्थापक प्रजापिता ब्रह्मा बाबा के अव्यक्त होने के पश्चात दादी प्रकाशमणि जी ने विश्वविद्यालय का कुशल नेतृत्व संभाला था। उन्होंने न केवल भारत, बल्कि देश-विदेश के कोने-कोने में भ्रमण कर मानवता को जागृत किया। उन्होंने कलयुग के अंतिम चरण में निराकार ज्योति स्वरूप परमपिता परमात्मा शिव के दिव्य अवतरण और शीघ्र आने वाले स्वर्णिम युग (सत्ययुग) का पावन संदेश जन-जन तक पहुंचाया।
​कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित श्रद्धालुओं ने शांति और एकाग्रता के साथ राजयोग का अभ्यास कर दादी जी के दिखाए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।

योगाचार्य लेखराम (लेखू बाबा) बने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार फाउंडेशन योग प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष: छत्तीसगढ़ में खुशी की लहर

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योगाचार्य लेखराम (लेखू बाबा) बने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार फाउंडेशन योग प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष: छत्तीसगढ़ में खुशी की लहर

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
​कवर्धा/रायपुर। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष जय सिंह यादव के निर्देशों पर संगठन का विस्तार करते हुए छत्तीसगढ़ में एक महत्वपूर्ण नियुक्ति की गई है। युवाओं और समाज सेवा के क्षेत्र में सक्रिय योगाचार्य लेखराम (लेखू बाबा) को अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार फाउंडेशन के योग प्रकोष्ठ का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।

​निःशुल्क योग सेवा और समाज कल्याण का मिला फल

लेखू बाबा लंबे समय से क्षेत्र में निःशुल्क नियमित योग शिविरों का संचालन कर रहे हैं। उनके कुशल नेतृत्व, समाज के प्रति निस्वार्थ सेवा भाव और स्वास्थ्य जागरूकता अभियानों को देखते हुए संगठन ने उन्हें यह बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। फाउंडेशन का मुख्य उद्देश्य लोगों को उनके संवैधानिक अधिकारों, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और कानूनी जानकारियों के प्रति जागरूक करना है, ताकि समाज का हर वर्ग अपने हक के लिए सक्षम बन सके।

​”24 घंटे मानव सेवा के लिए रहूंगा तत्पर”

अपनी नियुक्ति पर आभार व्यक्त करते हुए योगाचार्य लेखराम (लेखू बाबा) ने कहा:
​”मैं अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष जय सिंह यादव और राष्ट्रीय सचिव व छत्तीसगढ़ प्रभारी अजीत यादव सहित सभी केंद्रीय पदाधिकारियों का हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ, जिन्होंने मुझ जैसे छोटे से कार्यकर्ता पर यह विश्वास जताया है। मैं 24 घंटे मानव सेवा में समर्पित रहूँगा। हमारा मुख्य लक्ष्य प्रदेश में योग, शिक्षा और नशामुक्त समाज का निर्माण करना है। साथ ही, केंद्र व राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक पहुँचाने का निरंतर प्रयास किया जाएगा।”

​जल्द होगा प्रदेश स्तरीय टीम का गठन

नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि वे जल्द ही पूरे छत्तीसगढ़ में योग और मानवाधिकार जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए कार्यकारिणी का विस्तार करेंगे और एक मजबूत प्रांतीय टीम तैयार करेंगे।

​प्रदेशभर से बधाइयों का तांता

लेखू बाबा के प्रदेश अध्यक्ष बनने की खबर मिलते ही कवर्धा समेत पूरे छत्तीसगढ़ के समर्थकों और समाजसेवियों में खुशी का माहौल है। उन्हें उज्ज्वल भविष्य और सफल कार्यकाल के लिए शुभकामनाएं देने वालों में प्रमुख रूप से:

​प्रदेश पदाधिकारी: मुक्ता सिंह यादव (प्रदेश उपाध्यक्ष), जाहर सिंह तोमर, कैलाश यादव, धन्नू यादव, राजेंद्र सिंह क्षत्री, गजेंद्र सिंह यादव।

​विशिष्ट व वरिष्ठजन: कपूर यादव, नील सिंह तोमर, मयंक गुप्ता, श्याम लाल पैंकरा, कृष्णा चंद्रवंशी, अजय चंद्रवंशी, अभय चंद्राकर, संजय सिंह, भूपेंद्र साहू, सुनील साय, महेश राम, राहुल कुमार, माधव यादव, जलेश यादव, सूर्या ठाकुर, अजय जायसवाल, सरिता राजपूत, कविता साहू, डॉ. सविता, डॉ. कमला देवी, अनिल कुमार, महेश कुमार, दिनेश कुमार, अंकित सिंह, मिलेश, संजय कुमार, कुंदन सिंह एवं अधिवक्ता संघ के सदस्यों ने शुभकामनाएं प्रेषित की हैं।

महासमुंद के विकास का रोडमैप तैयार: उप मुख्यमंत्री अरुण साव की कड़ी चेतावनी, निर्माण कार्यों में गुणवत्ता और समय-सीमा से नहीं होगा कोई समझौता

महासमुंद के विकास का रोडमैप तैयार: उप मुख्यमंत्री अरुण साव की कड़ी चेतावनी, निर्माण कार्यों में गुणवत्ता और समय-सीमा से नहीं होगा कोई समझौता
​महासमुंद। छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने महासमुंद कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में जिले के विकास कार्यों और विभागीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए कड़ा रुख अपनाया है। लोक निर्माण, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE), नगरीय प्रशासन और खेलकूद विभाग के कामकाज का जायजा लेते हुए उन्होंने अधिकारियों को दो टूक निर्देश दिया कि स्वीकृत योजनाओं में गुणवत्ता और पारदर्शिता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
​जून 2027 तक हर घर में पहुंचेगा नल का जल
समीक्षा बैठक के दौरान उप मुख्यमंत्री साव ने ‘हर घर जल’ योजना की समीक्षा करते हुए स्पष्ट किया कि जून 2027 तक जिले की प्रत्येक ग्राम पंचायत के हर घर तक पीने का शुद्ध पानी पहुंचाना अनिवार्य है। उन्होंने निर्देश दिया कि जल जीवन मिशन के तहत योजनाएं पूरा होने के बाद ग्राम पंचायतों को हैंडओवर करते समय सरपंचों और सचिवों को तकनीकी रूप से सक्षम बनाया जाए। बंद पड़े ट्यूबवेल को तत्काल चालू करने और पेयजल से जुड़ी शिकायतों का त्वरित समाधान करने के निर्देश दिए गए।

महासमुंद के विकास का रोडमैप तैयार


​खराब सड़कों के लिए अनुविभागीय अधिकारी (SDO) सीधे जिम्मेदार
सड़क और पुल-पुलिया निर्माण की समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि सड़कों की मरम्मत और रखरखाव में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सड़कों की खराब स्थिति के लिए संबंधित अनुविभागीय अधिकारी (SDO) सीधे जवाबदेह होंगे। उन्होंने लोक निर्माण विभाग को आधुनिक तकनीक और उपकरणों का उपयोग कर कार्य समय-सीमा में पूर्ण करने को कहा।


​नगरीय निकायों का 5 साल का मास्टर प्लान और खेलों को बढ़ावा
नगरीय प्रशासन विभाग की समीक्षा करते हुए उप मुख्यमंत्री ने आने वाले 5 वर्षों की दूरगामी कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना को सर्वोच्च प्राथमिकता देने, 15वें वित्त आयोग के बजट और नालंदा परिसर जैसे प्रोजेक्ट्स को जल्द पूरा करने के साथ-साथ राजस्व वसूली बढ़ाने पर जोर दिया।
​खेल सुविधाओं पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि जिले की प्रतिभाओं को निखारने के लिए प्राथमिक शाला स्तर से ही खिलाड़ियों को तैयार किया जाएगा। ‘हर गांव में मैदान हो और हर स्कूल से खिलाड़ी निकलें’ के विजन के साथ ग्रामीण इलाकों में खेल अधोसंरचना मजबूत करने के निर्देश दिए।
​बैठक में कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने जिले की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की, जबकि विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी और प्रशासनिक अमला मौजूद रहा।

कक्षा में बच्चे पढ़ते रहे, स्कूल में नशे की हालत में सोते मिले प्रधान पाठक..!

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कक्षा में बच्चे पढ़ते रहे, स्कूल में नशे की हालत में सोते मिले प्रधान पाठक..!

भुरका प्राथमिक शाला का मामला: मीडिया के पहुंचते ही मचा हड़कंप, लंबे समय से अनुपस्थिति के भी लगाए गए आरोप

महासमुंद। सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था और शिक्षकों की जवाबदेही को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं, लेकिन महासमुंद विकासखंड के ग्राम भुरका स्थित प्राथमिक शाला से सामने आया मामला व्यवस्था की गंभीर तस्वीर पेश करता है। यहां पदस्थ प्रधान पाठक धनुर्जय पटेल के स्कूल परिसर में कथित रूप से नशे की हालत में सोते हुए पाए जाने का मामला सामने आया है। जिस समय यह स्थिति सामने आई, उस दौरान स्कूल में कक्षाएं संचालित हो रही थीं और छोटे बच्चे पढ़ाई कर रहे थे।

बच्चे कक्षा में, प्रधान पाठक आराम की मुद्रा में

जानकारी के अनुसार 13 अगस्त को मीडिया टीम द्वारा स्कूल का औचक निरीक्षण किया गया। स्कूल में पहली और दूसरी कक्षा के बच्चे अध्ययन करते मिले, जबकि प्रधान पाठक धनुर्जय पटेल स्कूल परिसर में सोते हुए पाए गए। उनकी स्थिति को देखकर उनके नशे में होने की बात सामने आई।
मीडिया द्वारा जब उनसे इस संबंध में सवाल किया गया तो उन्होंने कथित तौर पर सोने की बात से इनकार करते हुए कहा कि वे बच्चों को पढ़ा रहे थे। वहीं, मौजूद विद्यार्थियों ने बताया कि प्रधान पाठक कुछ समय पहले ही स्कूल पहुंचे थे और इसके बाद सो गए थे।

सहायक शिक्षक ने भी उठाए उपस्थिति पर सवाल

मामले को और गंभीर बनाने वाली बात यह है कि स्कूल में पदस्थ सहायक शिक्षक उत्तम कुमार यादव ने प्रधान पाठक की उपस्थिति को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए। उनके अनुसार प्रधान पाठक पिछले कुछ दिनों से ही स्कूल में दिखाई दे रहे हैं तथा लंबे समय से नियमित रूप से स्कूल नहीं आने की स्थिति बनी हुई है।
सहायक शिक्षक ने यहां तक दावा किया कि प्रधान पाठक के लगभग एक वर्ष से स्कूल से अनुपस्थित रहने की शिकायतें सामने आती रही हैं। हालांकि इन आरोपों की विभागीय स्तर पर आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।

2008 से इसी स्कूल में पदस्थ होने की जानकारी

बताया जा रहा है कि धनुर्जय पटेल वर्ष 2008 से इसी प्राथमिक शाला में प्रधान पाठक के पद पर पदस्थ हैं। लंबे समय से एक ही विद्यालय में पदस्थ रहने के बावजूद यदि नियमित उपस्थिति और विद्यालयीन अनुशासन को लेकर शिकायतें सामने आ रही हैं, तो यह शिक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है।
भुरका प्राथमिक शाला में वर्तमान में लगभग 17 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत बताए जा रहे हैं। ऐसे में प्रधान पाठक की नियमित उपस्थिति और बच्चों की पढ़ाई पर उनकी जिम्मेदारी महत्वपूर्ण हो जाती है।

डीईओ ने कहा—मामले की कराई जाएगी जांच

मामले की जानकारी जब जिला शिक्षा अधिकारी बीएल देवांगन को दी गई तो उन्होंने मीडिया के स्कूल पहुंचने को लेकर सवाल उठाया और पूछा कि मीडिया को विद्यालय में प्रवेश की अनुमति किस स्तर से मिली। इसके बाद उन्होंने पूरे मामले की जांच कराने का आश्वासन दिया।
अब देखने वाली बात यह होगी कि शिक्षा विभाग इस मामले में केवल जांच तक सीमित रहता है या प्रधान पाठक की उपस्थिति, कथित नशे की स्थिति और लंबे समय से अनुपस्थित रहने के आरोपों की अलग-अलग स्तर पर जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाता है।

सवालों के घेरे में विभागीय निगरानी

भुरका प्राथमिक शाला की घटना ने सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति और विभागीय मॉनिटरिंग की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि प्रधान पाठक के लंबे समय से अनुपस्थित रहने की शिकायत सही है तो आखिर उनकी नियमित उपस्थिति की निगरानी किस स्तर पर की जा रही थी? वहीं यदि स्कूल परिसर में नशे की हालत में पाए जाने की बात जांच में सही साबित होती है तो यह विद्यालयी अनुशासन और बच्चों के शैक्षणिक वातावरण से जुड़ा बेहद गंभीर विषय होगा।

फिलहाल मामले की वास्तविकता विभागीय जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। ग्रामीणों और अभिभावकों ने शिक्षा विभाग से निष्पक्ष जांच कर दोष सिद्ध होने पर नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

महासमुंद पुलिस की बड़ी कार्रवाई: उड़ीसा से छत्तीसगढ़ गांजा खपाने वाला मुख्य तस्कर गिरफ्तार, ‘एंड टू एंड’ जांच में हुआ बड़ा खुलासा

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महासमुंद पुलिस की बड़ी कार्रवाई: उड़ीसा से छत्तीसगढ़ गांजा खपाने वाला मुख्य तस्कर गिरफ्तार, ‘एंड टू एंड’ जांच में हुआ बड़ा खुलासा


​मुख्य बिंदु
​कार्रवाई का स्थान: पण्डामुण्डा, थाना पाटनगढ़, जिला बलांगीर (उड़ीसा)


​मुख्य आरोपी गिरफ्तार: दीनबंधु कुम्हार (उड़ीसा से गांजा उपलब्ध कराने वाला मुख्य स्रोत)


​जब्ती का कुल विवरण: 10.190 किलोग्राम अवैध गांजा (कीमत ₹5,09,500), एक मोटरसाइकिल और एक मोबाइल (कुल संपत्ति मूल्य: ₹5,44,500)


​संबद्ध मामला: थाना कोमाखान, अपराध क्रमांक 75/26, धारा 20(B)(II)(B) एनडीपीएस एक्ट



​महासमुंद:
जिले में अवैध मादक पदार्थ गांजा की तस्करी, परिवहन और बिक्री पर लगाम कसने के लिए महासमुंद पुलिस द्वारा चलाई जा रही विशेष मुहिम के तहत एक और बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस ने ‘एंड टू एंड इन्वेस्टिगेशन’ (End-to-End Investigation) की रणनीति अपनाते हुए छत्तीसगढ़ में गांजा सप्लाई करने वाले मुख्य उड़ीसा तस्कर को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया है।
​क्या था पूरा मामला?
​दिनांक 19 मई 2026 को थाना कोमाखान पुलिस क्षेत्र में वाहनों की सघन चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान उड़ीसा की ओर से आ रही एक लाल-काले रंग की मोटरसाइकिल पर सवार एक संदिग्ध व्यक्ति को रोका गया। पूछताछ और तलाशी के दौरान उसके पास रखे कपड़े के बैग से 10.190 किलोग्राम अवैध मादक पदार्थ गांजा बरामद किया गया।
​पकड़े गए परिवहनकर्ता की पहचान राजकुमार उर्फ राजू देवांगन (निवासी साल्हेभाठा) के रूप में हुई थी। आरोपी ने पूछताछ में खुलासा किया था कि वह यह अवैध गांजा उड़ीसा के पाटनगढ़ (जिला बलांगीर) स्थित दीनबंधु नामक शख्स से खरीदकर महासमुंद जिले के बागबाहरा क्षेत्र में चिल्हर बिक्री के लिए ला रहा था। इस खुलासे के आधार पर पुलिस ने तुरंत एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार किया था और गांजा समेत परिवहन में प्रयुक्त वाहन व मोबाइल जब्त कर लिए थे।
​सायबर टीम की तकनीकी जांच और मुख्य सप्लायर की गिरफ्तारी
​मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक महासमुंद के निर्देशानुसार थाना कोमाखान और सायबर सेल की संयुक्त टीम ने तकनीकी विश्लेषण (Technical Analysis) का सहारा लिया। ‘एंड टू एंड’ जांच के दौरान पुलिस कड़ियों को जोड़ते हुए सीधे गांजा के मुख्य स्रोत तक जा पहुँची।
​तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिर की सूचना के आधार पर महासमुंद पुलिस ने उड़ीसा के जिला बलांगीर अंतर्गत थाना पाटनगढ़ क्षेत्र के पण्डामुण्डा गांव में दबिश दी। पुलिस टीम ने घेराबंदी कर गांजा उपलब्ध कराने वाले मुख्य सप्लायर दीनबंधु कुम्हार (पिता कुमार कुम्हार, उम्र 37 वर्ष) को उसके गृहग्राम से धर दबोचा। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया है।
​अब तक की कुल जप्त सामग्री एवं गिरफ्तार आरोपी
​1. गिरफ्तार आरोपी:
​मुख्य सप्लायर: दीनबंधु कुम्हार (37 वर्ष), निवासी पण्डामुण्डा, थाना पाटनगढ़, जिला बलांगीर (उड़ीसा)।
​परिवहनकर्ता (पूर्व गिरफ्तार): राजकुमार उर्फ राजू देवांगन (40 वर्ष), निवासी साल्हेभाठा, थाना कोमाखान (गिरफ्तारी दिनांक: 19.05.2026)।
​2. जप्त की गई कुल संपत्ति:
​अवैध गांजा: 10.190 किलोग्राम (कीमत: ₹5,09,500)
​मोटरसाइकिल: 1 नग (कीमत: ₹25,000)
​मोबाइल फोन: 1 नग (कीमत: ₹10,000)
​कुल जुमला जप्त संपत्ति: ₹5,44,500 (पाँच लाख चवालीस हजार पाँच सौ रुपये)

महासमुंद में धान घोटाले का पर्दाफाश: 41 लाख का गबन करने वाला समिति प्रभारी गिरफ्तार, पुलिस ने मोखा गांव में दबोचा

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महासमुंद में धान घोटाले का पर्दाफाश: 41 लाख का गबन करने वाला समिति प्रभारी गिरफ्तार, पुलिस ने मोखा गांव में दबोचा

​महासमुंद: छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में धान खरीदी में हुए एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। उपार्जन केंद्र बाघामुड़ा में 40.96 लाख रुपये के धान की हेराफेरी के मामले में फरार चल रहे समिति प्रभारी प्रेमसिंह ध्रुव को पुलिस ने लंबी मशक्कत के बाद गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी पर रिकॉर्ड में हेरफेर कर हजारों कट्टा धान गायब करने का आरोप है।

क्या है पूरा मामला..?

​मामले की शुरुआत इस साल 24 जनवरी को हुई, जब मुनगासेर ब्रांच के मैनेजर सेवकराम चंद्राकर ने थाना बागबाहरा में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के अनुसार, उपार्जन केंद्र बाघामुड़ा के ऑनलाइन रिकॉर्ड में 1,25,878 कट्टा धान दर्ज था। हालांकि, जब मौके पर भौतिक सत्यापन किया गया, तो वहां धान के केवल 1,22,574 कट्टे ही मिले।
​जांच में सामने आया कि केंद्र से कुल 3,304 कट्टा धान (लगभग 1321.6 क्विंटल) गायब था। सरकारी समर्थन मूल्य 3,100 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से इस गायब धान की कुल कीमत 40,96,960 रुपये आंकी गई है। इस गंभीर अनियमितता के सामने आने के बाद समिति प्रभारी प्रेमसिंह ध्रुव के खिलाफ बीएनएस (BNS) की धारा 316(5) के तहत मामला दर्ज किया गया था।

तकनीकी ट्रैकिंग से मिली सफलता

​मामला दर्ज होने के बाद से ही समिति प्रभारी प्रेमसिंह ध्रुव फरार चल रहा था और पुलिस लगातार उसकी धरपकड़ में जुटी थी। आरोपी काफी समय से अपनी लोकेशन बदल रहा था, जिससे उसे पकड़ना चुनौती बन गया था।
​पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तकनीकी विश्लेषण का सहारा लिया। आरोपी के मोबाइल का सीडीआर (CDR) खंगाला गया और लोकेशन की सटीक जानकारी मिलते ही पुलिस ने घेराबंदी शुरू कर दी। अंततः आरोपी को ग्राम मोखा से दबोच लिया गया।

​न्यायिक हिरासत में भेजा गया आरोपी

​गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आरोपी प्रेमसिंह ध्रुव (42 वर्ष) को हिरासत में लेकर पूछताछ की। आज, 17 जुलाई 2026 को आवश्यक कानूनी कार्रवाई पूरी करने के बाद उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया है।

​इस कार्रवाई ने उन सभी लोगों के लिए एक कड़ा संदेश दिया है जो सरकारी अनाज मंडियों और उपार्जन केंद्रों में भ्रष्टाचार को अंजाम देने का प्रयास कर रहे हैं। पुलिस की इस तत्परता ने लाखों रुपये के सरकारी गबन को उजागर करने में बड़ी भूमिका निभाई है।

महासमुंद की तर्ज पर पूरे प्रदेश में शिक्षा विभाग का कड़ा रुख: अटैच शिक्षकों को 7 दिन में मूल स्कूल में देना होगा योगदान, वरना होगी सख्त कार्रवाई

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महासमुंद की तर्ज पर पूरे प्रदेश में शिक्षा विभाग का कड़ा रुख: अटैच शिक्षकों को 7 दिन में मूल स्कूल में देना होगा योगदान, वरना होगी सख्त कार्रवाई

49 शिक्षकों की वापसी के बाद पूरे प्रदेश में बड़ा एक्शन, शिक्षा विभाग ने जारी किया नया आदेश

रिपोर्टर मयंक गुप्ता / 17 जुलाई 2026
​महासमुंद/नवा रायपुर छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए शिक्षा विभाग ने अब प्रदेशव्यापी सख्त कदम उठाए हैं। महासमुंद जिले में 49 शिक्षकों की संलग्नक (Attachment) समाप्त कर उन्हें मूल स्कूलों में भेजने की पहल के बाद, अब लोक शिक्षण संचालनालय ने पूरे प्रदेश के लिए कड़े निर्देश जारी कर दिए हैं।

​महासमुंद के संलग्न कर्मचारी जिन्हें वापस लौटना होगा

​शिक्षा विभाग द्वारा जारी सूची के अनुसार, महासमुंद जिले के विभिन्न कार्यालयों में संलग्न जिन 49 शिक्षकों और कर्मचारियों को अपने मूल विद्यालय में कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं, उनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
​सुबोध कुमार तिवारी, प्रमोद कन्नौजे, हर्षिता चन्द्राकर, रामता मन्नाड़े, पूर्णानंद मिश्रा, जागेश्वर सिन्हा, भुवनेश्वरी साहू, नरेश पटेल, अनिल साव, देवानंद, डी. बसंत कुमार साव, यश कुमार चक्रधारी, विवेक कुमार चन्द्राकर, परस कुमार, भागवत प्रसाद पटेल, और रितेश नायक सहित अन्य कर्मचारी। ये सभी अब तक समग्र शिक्षा अभियान, बीआरसी कार्यालय, नवकिरण अकादमी और आदिवासी विकास विभाग जैसे कार्यालयों में सेवाएं दे रहे थे।

पूरे छत्तीसगढ़ के लिए नया आदेश: ‘एक सप्ताह में ज्वाइनिंग अनिवार्य’

​महासमुंद की इस पहल के बाद, लोक शिक्षण संचालनालय, छत्तीसगढ़ ने 15 जुलाई 2026 को एक आधिकारिक आदेश जारी किया है। इस आदेश के तहत

​प्रदेश के समस्त जिलों के कार्यालयों और विभागों में कार्यरत सभी गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों का संलग्नक तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया गया है।

​सभी संलग्न कर्मचारियों को एक सप्ताह के भीतर अपने मूल पदस्थापना वाले स्कूलों में कार्यभार ग्रहण करना अनिवार्य है।

​शिक्षकों को अपनी उपस्थिति ऑनलाइन ऐप के माध्यम से सुनिश्चित करनी होगी।

पालन न करने पर होगी सख्त कार्रवाई

​संचालनालय ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई कर्मचारी निर्धारित समय-सीमा के भीतर कार्यभार ग्रहण नहीं करता है, तो उसके विरुद्ध कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। ऐसे कर्मचारियों की निर्धारित समय के बाद की अनुपस्थिति अवधि को ‘सेवा हरण’ (Break in service) मानते हुए संचालनालय को प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए गए हैं।

शैक्षणिक गुणवत्ता सुधारने की प्राथमिकता

​विभाग का मानना है कि शिक्षकों की मूल विद्यालयों में वापसी से विद्यार्थियों को सीधा लाभ मिलेगा और लंबे समय से बनी शिक्षकों की कमी की समस्या काफी हद तक दूर हो सकेगी। यह निर्णय सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

महासमुंद पुलिस की ताबड़तोड़ कार्यवाहियां: जुआ-सट्टा और अंतर्राज्यीय चोर गिरोहों पर बड़ा प्रहार

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महासमुंद पुलिस की ताबड़तोड़ कार्यवाहियां: जुआ-सट्टा और अंतर्राज्यीय चोर गिरोहों पर बड़ा प्रहार

​महासमुंद, 14 जुलाई 2026: महासमुंद पुलिस ने अपराधों पर अंकुश लगाने के अपने अभियान के तहत हाल ही में चार बड़ी कार्यवाहियां करते हुए जुआरियों और अंतर्राज्यीय चोर गिरोहों को गिरफ्तार किया है। पुलिस अधीक्षक कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में इन मामलों का विस्तृत खुलासा किया गया।

​1. चंडी मंदिर के पास जुए का अड्डा ध्वस्त

​बागबाहरा पुलिस ने ग्राम घुचापाली में चंडी मंदिर के पीछे चल रहे जुए के अड्डे पर छापा मारकर 12 जुआरियों को गिरफ्तार किया है।

​जब्ती: 3,60,100 रुपये नकद, 14 मोबाइल, 6 वाहन (4 मोटरसाइकिल और 2 कार), ताश की गड्डियां।
​कुल बरामदगी: 20,35,100 रुपये का मशरूका।

​कार्रवाई: छत्तीसगढ़ जुआ (प्रतिषेध) अधिनियम 2022 के तहत मामला दर्ज (अपराध क्रमांक 124/26)।

​2. हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी चोरी: अंतर्राज्यीय गिरोह के 4 सदस्य गिरफ्तार

​18 मई 2026 को हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में हुई चोरी की घटना को सुलझाते हुए पुलिस ने मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले से गिरोह को पकड़ा।

​आरोपी: मिथलेश उर्फ फक्के, रोशन मरावी, पंकज सिंह मरावी और राजा सिंह धुर्वे।

​बरामदगी: 1,66,700 रुपये मूल्य के गहने, मोबाइल और वाहन।

​विशेष: आरोपियों ने महासमुंद सहित बालोद और कोरबा जिलों में भी चोरी करना स्वीकार किया है।

​3. अंतर्राज्यीय ‘पारधी गिरोह’ का पर्दाफाश: 7 शातिर चोर गिरफ्तार

​ग्राम रूढ़ा में 22-23 जून 2026 की रात हुई चोरी का खुलासा करते हुए पुलिस ने पारधी गिरोह के 7 सदस्यों और चोरी का माल खरीदने वाले एक आरोपी को गिरफ्तार किया है।

​आरोपी: आनंद, संजय, मन्नू, सूरजभान, हेमलाल, सुरेंद्र, घनश्याम और अतुल पाटिल (खरीदार)।

​बरामदगी: 12,46,000 रुपये का सोना-चांदी, नकद और मोटरसाइकिलें।

​विशेष: तकनीकी विश्लेषण और सीसीटीवी फुटेज की मदद से आरोपियों की पहचान की गई।

​4. ग्राम अछोली में सूने मकान में हुई चोरी का आरोपी गिरफ्तार

​तुमगांव पुलिस ने 8 मार्च 2026 को हुई चोरी की वारदात सुलझाते हुए राहुल उर्फ भोजदास साहू को पकड़ा है।

​विशेष: आरोपी ने ताला काटने के लिए ग्राइंडर मशीन खरीदी थी। पुलिस ने आरोपी के बदले रहन-सहन और फिजूलखर्ची के आधार पर उसे पकड़ा। ​बरामदगी: 7,26,940 रुपये मूल्य के सोने-चांदी के जेवरात और वारदात में प्रयुक्त ग्राइंडर व मोटरसाइकिल।

​पुलिस का संदेश: महासमुंद पुलिस लगातार अपराधों की रोकथाम के लिए सक्रिय है और अपराधियों पर कड़ी कानूनी कार्यवाही की जा रही है। फरार आरोपियों की तलाश हेतु टीमें लगातार दबिश दे रही हैं।

महाघोटाले की ‘खट्टी’ पंचायत: सफाई के नाम पर 25 लाख का बंदरबांट, सरपंच पति का ‘अवैध कब्जा’, प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल!

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महाघोटाले की ‘खट्टी’ पंचायत: सफाई के नाम पर 25 लाख का बंदरबांट, सरपंच पति का ‘अवैध कब्जा’, प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल!

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
​महासमुंद। 25 जून 2026 जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत खट्टी इन दिनों भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के घेरे में है। 24 जून को आयोजित ग्राम सभा उस समय अखाड़े में तब्दील हो गई, जब ग्रामीणों और पंचों ने सरपंच श्रीमती अनिता मोती मेहर के कार्यकाल में हुई कथित अनियमितताओं की पोल खोलते हुए तीखे सवाल खड़े किए। यह ग्राम सभा विकास कार्यों की समीक्षा के बजाय सरपंच के पति के हस्तक्षेप और लाखों रुपये के गबन के आरोपों पर केंद्रित रही।

​सफाई के नाम पर 25 लाख का गबन, धरातल पर केवल गंदगी का साम्राज्य

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​ग्राम सभा में सबसे बड़ा हंगामा ‘सफाई मद’ में खर्च की गई राशि को लेकर हुआ। ग्रामीणों के तीखे तेवरों ने प्रशासन को भी हैरत में डाल दिया। पंचों का आरोप है कि बीते समय में सफाई के नाम पर सरकारी खजाने से 25 लाख रुपये से अधिक की राशि निकाली जा चुकी है, लेकिन गांव की गलियां और नालियां आज भी गंदगी से पटी पड़ी हैं। ग्रामीणों ने इसे सीधे तौर पर सरकारी धन का दुरुपयोग और बड़ा घोटाला करार दिया है।

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​सरपंच पति का ‘पंचायत दरबार’, नियमों की उड़ाई जा रही धज्जियां

​विवाद का एक मुख्य केंद्र सरपंच के पति हैं, जो स्वयं खैरा पंचायत में सचिव के पद पर तैनात हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि वे अपनी ड्यूटी छोड़कर खट्टी पंचायत के हर प्रशासनिक निर्णय, बैठक और वित्तीय कामकाज में अवैध रूप से हस्तक्षेप कर रहे हैं। पंचायती राज अधिनियम के तहत निर्वाचित प्रतिनिधि के कार्य में बाहरी व्यक्ति का यह हस्तक्षेप न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था पर भी बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है।

​व्यावसायिक परिसर में ‘चखना सेंटर’, सरकारी स्कूल-अस्पताल के पास खिलवाड़

​पंचायत द्वारा बनाए गए व्यावसायिक परिसर को लेकर भी गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। बिना किसी आधिकारिक प्रस्ताव या नीलामी प्रक्रिया के, एक व्यक्ति को दुकान आवंटित कर वहां ‘चखना सेंटर’ संचालित करवाया जा रहा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह परिसर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और सरकारी स्कूल के अत्यंत निकट है। यहाँ फैली गंदगी, शराब की बोतलों और डिस्पोजल के कचरे से विद्यार्थियों और मरीजों का स्वास्थ्य खतरे में है।

​आंगनबाड़ी तक पहुंचना हुआ दूभर, बदबू और गंदगी के बीच मासूम

​पूर्व सरपंच की गली में स्थित आंगनबाड़ी केंद्र के बाहर का नजारा बेहद भयावह है। नाली निकासी बंद होने के कारण गंदा पानी जमा रहता है और चारों ओर सड़ांध फैली हुई है। नन्हे-मुन्ने बच्चे इसी दूषित माहौल से गुजरकर शिक्षा लेने को मजबूर हैं। साथ ही, क्षेत्र में महीनों से बंद पड़ा बोर खनन का अधूरा काम पंचायत की सुस्त कार्यप्रणाली और लापरवाही की कहानी खुद बयां कर रहा है।

​ग्रामीणों की चेतावनी “कार्रवाई नहीं तो होगा बड़ा आंदोलन”

​ग्राम सभा में आक्रोशित ग्रामीणों और पंचों ने एक सुर में उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच की मांग की है। ग्रामीणों ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि जिला प्रशासन ने इन अनियमितताओं की गहन जांच कर दोषी सरपंच, उनके पति और मिलीभगत करने वाले अधिकारियों पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई नहीं की, तो वे इसे लेकर प्रदेश स्तर पर उग्र आंदोलन करने को बाध्य होंगे।

​प्रशासन के लिए बड़ा सवाल

आखिर 25 लाख रुपये की सफाई राशि कहां गई? और एक सरकारी कर्मचारी (सचिव) को सरपंच के कार्यों में हस्तक्षेप करने की अनुमति किसने दी? खट्टी पंचायत के लोग अब सिर्फ जांच का आश्वासन नहीं, बल्कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई देखना चाहते हैं।

ग्राम पंचायत खट्टी का मामला संज्ञान में आया है जिसकी शिकायत को लेकर मै जिला सी ई ओ को कार्यवाही पंचायत अधिनियम की बिंदुवार जांच कर कार्यवाही करे।

विनय कुमार लंगेह
​कलेक्टर जिला महासमुंद छत्तीसगढ़

महाघोटाले की ‘खट्टी’ पंचायत: सफाई के नाम पर 25 लाख का बंदरबांट, सरपंच पति का ‘अवैध कब्जा’, प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल!

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महाघोटाले की ‘खट्टी’ पंचायत: सफाई के नाम पर 25 लाख का बंदरबांट, सरपंच पति का ‘अवैध कब्जा’, प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल!रिपोर्टर मयंक गुप्ता महासमुंद। 25 जून 2026 जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत खट्टी इन दिनों भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के घेरे में है। 24 जून को आयोजित ग्राम सभा उस समय अखाड़े में तब्दील हो गई, जब ग्रामीणों और पंचों ने सरपंच श्रीमती अनिता मोती मेहर के कार्यकाल में हुई कथित अनियमितताओं की पोल खोलते हुए तीखे सवाल खड़े किए। यह ग्राम सभा विकास कार्यों की समीक्षा के बजाय सरपंच के पति के हस्तक्षेप और लाखों रुपये के गबन के आरोपों पर केंद्रित रही।सफाई के नाम पर 25 लाख का गबन, धरातल पर केवल गंदगी का साम्राज्यग्राम सभा में सबसे बड़ा हंगामा ‘सफाई मद’ में खर्च की गई राशि को लेकर हुआ। ग्रामीणों के तीखे तेवरों ने प्रशासन को भी हैरत में डाल दिया। पंचों का आरोप है कि बीते समय में सफाई के नाम पर सरकारी खजाने से 25 लाख रुपये से अधिक की राशि निकाली जा चुकी है, लेकिन गांव की गलियां और नालियां आज भी गंदगी से पटी पड़ी हैं। ग्रामीणों ने इसे सीधे तौर पर सरकारी धन का दुरुपयोग और बड़ा घोटाला करार दिया है।सरपंच पति का ‘पंचायत दरबार’, नियमों की उड़ाई जा रही धज्जियांविवाद का एक मुख्य केंद्र सरपंच के पति हैं, जो स्वयं खैरा पंचायत में सचिव के पद पर तैनात हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि वे अपनी ड्यूटी छोड़कर खट्टी पंचायत के हर प्रशासनिक निर्णय, बैठक और वित्तीय कामकाज में अवैध रूप से हस्तक्षेप कर रहे हैं। पंचायती राज अधिनियम के तहत निर्वाचित प्रतिनिधि के कार्य में बाहरी व्यक्ति का यह हस्तक्षेप न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था पर भी बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है।व्यावसायिक परिसर में ‘चखना सेंटर’, सरकारी स्कूल-अस्पताल के पास खिलवाड़पंचायत द्वारा बनाए गए व्यावसायिक परिसर को लेकर भी गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। बिना किसी आधिकारिक प्रस्ताव या नीलामी प्रक्रिया के, एक व्यक्ति को दुकान आवंटित कर वहां ‘चखना सेंटर’ संचालित करवाया जा रहा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह परिसर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और सरकारी स्कूल के अत्यंत निकट है। यहाँ फैली गंदगी, शराब की बोतलों और डिस्पोजल के कचरे से विद्यार्थियों और मरीजों का स्वास्थ्य खतरे में है।आंगनबाड़ी तक पहुंचना हुआ दूभर, बदबू और गंदगी के बीच मासूमपूर्व सरपंच की गली में स्थित आंगनबाड़ी केंद्र के बाहर का नजारा बेहद भयावह है। नाली निकासी बंद होने के कारण गंदा पानी जमा रहता है और चारों ओर सड़ांध फैली हुई है। नन्हे-मुन्ने बच्चे इसी दूषित माहौल से गुजरकर शिक्षा लेने को मजबूर हैं। साथ ही, क्षेत्र में महीनों से बंद पड़ा बोर खनन का अधूरा काम पंचायत की सुस्त कार्यप्रणाली और लापरवाही की कहानी खुद बयां कर रहा है।ग्रामीणों की चेतावनी “कार्रवाई नहीं तो होगा बड़ा आंदोलन”ग्राम सभा में आक्रोशित ग्रामीणों और पंचों ने एक सुर में उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच की मांग की है। ग्रामीणों ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि जिला प्रशासन ने इन अनियमितताओं की गहन जांच कर दोषी सरपंच, उनके पति और मिलीभगत करने वाले अधिकारियों पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई नहीं की, तो वे इसे लेकर प्रदेश स्तर पर उग्र आंदोलन करने को बाध्य होंगे।प्रशासन के लिए बड़ा सवाल आखिर 25 लाख रुपये की सफाई राशि कहां गई? और एक सरकारी कर्मचारी (सचिव) को सरपंच के कार्यों में हस्तक्षेप करने की अनुमति किसने दी? खट्टी पंचायत के लोग अब सिर्फ जांच का आश्वासन नहीं, बल्कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई देखना चाहते हैं।ग्राम पंचायत खट्टी का मामला संज्ञान में आया है जिसकी शिकायत को लेकर मै जिला सी ई ओ को कार्यवाही पंचायत अधिनियम की बिंदुवार जांच कर कार्यवाही करे।विनय कुमार लंगेह कलेक्टर जिला महासमुंद छत्तीसगढ़महाघोटाले की ‘खट्टी’ पंचायत: सफाई के नाम पर 25 लाख का बंदरबांट, सरपंच पति का ‘अवैध कब्जा’, प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल!रिपोर्टर मयंक गुप्ता महासमुंद। 25 जून 2026 जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत खट्टी इन दिनों भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के घेरे में है। 24 जून को आयोजित ग्राम सभा उस समय अखाड़े में तब्दील हो गई, जब ग्रामीणों और पंचों ने सरपंच श्रीमती अनिता मोती मेहर के कार्यकाल में हुई कथित अनियमितताओं की पोल खोलते हुए तीखे सवाल खड़े किए। यह ग्राम सभा विकास कार्यों की समीक्षा के बजाय सरपंच के पति के हस्तक्षेप और लाखों रुपये के गबन के आरोपों पर केंद्रित रही।सफाई के नाम पर 25 लाख का गबन, धरातल पर केवल गंदगी का साम्राज्यग्राम सभा में सबसे बड़ा हंगामा ‘सफाई मद’ में खर्च की गई राशि को लेकर हुआ। ग्रामीणों के तीखे तेवरों ने प्रशासन को भी हैरत में डाल दिया। पंचों का आरोप है कि बीते समय में सफाई के नाम पर सरकारी खजाने से 25 लाख रुपये से अधिक की राशि निकाली जा चुकी है, लेकिन गांव की गलियां और नालियां आज भी गंदगी से पटी पड़ी हैं। ग्रामीणों ने इसे सीधे तौर पर सरकारी धन का दुरुपयोग और बड़ा घोटाला करार दिया है।सरपंच पति का ‘पंचायत दरबार’, नियमों की उड़ाई जा रही धज्जियांविवाद का एक मुख्य केंद्र सरपंच के पति हैं, जो स्वयं खैरा पंचायत में सचिव के पद पर तैनात हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि वे अपनी ड्यूटी छोड़कर खट्टी पंचायत के हर प्रशासनिक निर्णय, बैठक और वित्तीय कामकाज में अवैध रूप से हस्तक्षेप कर रहे हैं। पंचायती राज अधिनियम के तहत निर्वाचित प्रतिनिधि के कार्य में बाहरी व्यक्ति का यह हस्तक्षेप न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था पर भी बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है।व्यावसायिक परिसर में ‘चखना सेंटर’, सरकारी स्कूल-अस्पताल के पास खिलवाड़पंचायत द्वारा बनाए गए व्यावसायिक परिसर को लेकर भी गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। बिना किसी आधिकारिक प्रस्ताव या नीलामी प्रक्रिया के, एक व्यक्ति को दुकान आवंटित कर वहां ‘चखना सेंटर’ संचालित करवाया जा रहा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह परिसर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और सरकारी स्कूल के अत्यंत निकट है। यहाँ फैली गंदगी, शराब की बोतलों और डिस्पोजल के कचरे से विद्यार्थियों और मरीजों का स्वास्थ्य खतरे में है।आंगनबाड़ी तक पहुंचना हुआ दूभर, बदबू और गंदगी के बीच मासूमपूर्व सरपंच की गली में स्थित आंगनबाड़ी केंद्र के बाहर का नजारा बेहद भयावह है। नाली निकासी बंद होने के कारण गंदा पानी जमा रहता है और चारों ओर सड़ांध फैली हुई है। नन्हे-मुन्ने बच्चे इसी दूषित माहौल से गुजरकर शिक्षा लेने को मजबूर हैं। साथ ही, क्षेत्र में महीनों से बंद पड़ा बोर खनन का अधूरा काम पंचायत की सुस्त कार्यप्रणाली और लापरवाही की कहानी खुद बयां कर रहा है।ग्रामीणों की चेतावनी “कार्रवाई नहीं तो होगा बड़ा आंदोलन”ग्राम सभा में आक्रोशित ग्रामीणों और पंचों ने एक सुर में उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच की मांग की है। ग्रामीणों ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि जिला प्रशासन ने इन अनियमितताओं की गहन जांच कर दोषी सरपंच, उनके पति और मिलीभगत करने वाले अधिकारियों पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई नहीं की, तो वे इसे लेकर प्रदेश स्तर पर उग्र आंदोलन करने को बाध्य होंगे।प्रशासन के लिए बड़ा सवाल आखिर 25 लाख रुपये की सफाई राशि कहां गई? और एक सरकारी कर्मचारी (सचिव) को सरपंच के कार्यों में हस्तक्षेप करने की अनुमति किसने दी? खट्टी पंचायत के लोग अब सिर्फ जांच का आश्वासन नहीं, बल्कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई देखना चाहते हैं।ग्राम पंचायत खट्टी का मामला संज्ञान में आया है जिसकी शिकायत को लेकर मै जिला सी ई ओ को कार्यवाही पंचायत अधिनियम की बिंदुवार जांच कर कार्यवाही करे।विनय कुमार लंगेह कलेक्टर जिला महासमुंद छत्तीसगढ़