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39 लाख से DSC तक: महासमुंद की पंचायतों में फाइलों का सफर, भुगतान का खेल और कार्रवाई का इंतजार

39 लाख से DSC तक: महासमुंद की पंचायतों में फाइलों का सफर, भुगतान का खेल और कार्रवाई का इंतजार

विशेष रिपोर्ट: मयंक गुप्ता, प्रधान संपादक / 21 सितम्बर 2026 / दिन सोमवार
महासमुंद (छत्तीसगढ़)।
महासमुंद में पंचायत व्यवस्था से जुड़े वित्तीय मामलों को लेकर उठ रहे सवाल अब सिर्फ किसी एक पंचायत या किसी एक कर्मचारी तक सीमित नहीं दिखाई देते। एक तरफ पुराने वित्तीय अनियमितता के आरोपों से जुड़ी जांच और कार्रवाई का सवाल है, तो दूसरी तरफ डिजिटल सिग्नेचर (DSC), बिल-वाउचर और पंचायत भुगतान प्रक्रिया को लेकर नई शिकायतों ने व्यवस्था की निगरानी पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।

सार्वजनिक रूप से सामने आई एक रिपोर्ट में महासमुंद जिले की एक पंचायत में 15वें वित्त आयोग की राशि को कथित तौर पर अपूर्ण दस्तावेजों और कोरे बिल-वाउचर के आधार पर निकालने के आरोपों का उल्लेख किया गया था। ऐसे में महासमुंद की पंचायतों में वित्तीय प्रक्रिया की पारदर्शिता और डिजिटल भुगतान व्यवस्था की निगरानी पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

सवाल नंबर-1: पंचायत की DSC किसके पास और क्यों?

04 अगस्त 2026 की शिकायत के अनुसार, जनपद पंचायत महासमुंद की संकाय शाखा में पदस्थ कर्मचारी श्रीमती समृद्धि शर्मा पर कुछ पंचायत प्रतिनिधियों के डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट (DSC) अपने पास रखने का आरोप लगाया गया है।

शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि DSC पंचायत प्रतिनिधियों के पास रहने के बजाय दूसरे स्तर पर रखे जाने से भुगतान प्रक्रिया पर वास्तविक नियंत्रण को लेकर सवाल पैदा हो रहे हैं।

इसी शिकायत में कोरे अथवा अपूर्ण बिल-वाउचर के माध्यम से भुगतान किए जाने और DSC वापस मांगने पर भुगतान प्रभावित होने की कथित धमकियों का भी उल्लेख है।

अब असली सवाल यह है—यदि आरोप गलत हैं तो रिकॉर्ड सार्वजनिक करके स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं की जाती? और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदारी तय करने में देरी क्यों?

सवाल नंबर-2: 39 लाख की पुरानी फाइल अभी तक बंद क्यों नहीं?

वर्ष 2019-20 से जुड़ी 15वें वित्त आयोग की राशि में लगभग 39 लाख रुपये की कथित वित्तीय अनियमितता का मामला भी इस पूरे प्रकरण को और गंभीर बनाता है।

शिकायतकर्ताओं का दावा है कि कोरोना काल में सैनिटाइजर, मास्क और अन्य सामग्री की खरीदी के नाम पर भुगतान में गड़बड़ी की गई।

लेकिन यहां सबसे महत्वपूर्ण बात आरोप नहीं, बल्कि जांच और उसके बाद की कार्रवाई है।

यदि जांच पूरी हो चुकी है, तो जनता जानना चाहती है—

कितनी राशि का वास्तविक भुगतान हुआ?
किस मद में हुआ?
किन दस्तावेजों के आधार पर हुआ?
किस अधिकारी ने भुगतान स्वीकृत किया?
जांच में क्या निष्कर्ष निकला?
और जिम्मेदारी किसकी तय हुई?

इन सवालों का जवाब दस्तावेजों के साथ सामने आना चाहिए।

जांच रिपोर्ट जमा होने के बाद अगला कदम क्या?

मामले से संबंधित पक्षों के अनुसार जनपद पंचायत की CEO मिषा कोसले द्वारा जांच पूरी कर रिपोर्ट जिला पंचायत कार्यालय में जमा कराई गई है।

अब निगाह जिला पंचायत CEO एस. आलोक और संबंधित प्रशासनिक स्तर पर होने वाली कार्रवाई पर है।

यहां सवाल किसी अधिकारी को दोषी ठहराने का नहीं, बल्कि जांच रिपोर्ट की प्रशासनिक स्थिति स्पष्ट करने का है।

यदि रिपोर्ट में अनियमितता पाई गई है तो आगे की वैधानिक कार्रवाई क्या हुई?

यदि आरोप प्रमाणित नहीं हुए तो क्या प्रशासन ने शिकायतकर्ताओं को लिखित रूप से इसकी जानकारी दी.
?

फाइल की वास्तविक स्थिति ही इस पूरे मामले का सबसे बड़ा जवाब हो सकती है।

खैरा-खट्टी प्रकरण ने बढ़ाए दूसरे सवाल

24 जून 2026 को जिले की ग्राम पंचायतों में ग्राम सभाओं के आयोजन के निर्देश जारी किए गए थे। सार्वजनिक रिपोर्टिंग के अनुसार उस दिन महासमुंद जिले की सभी ग्राम पंचायतों में ग्राम सभा आयोजित की जानी थी।

इसी अवधि से जुड़े खैरा और खट्टी पंचायत प्रकरण में शिकायतकर्ताओं ने सचिव मोती मेहरा पर अपनी मूल पंचायत की बैठक से अनुपस्थित रहने और ग्राम पंचायत खट्टी में पहुंचकर कार्यवाही में हस्तक्षेप करने के आरोप लगाए हैं।

शिकायत में यह भी कहा गया है कि खट्टी पंचायत की सरपंच उनकी पत्नी श्रीमती अनिता मेहरा हैं।

इन आरोपों की पुष्टि या खंडन संबंधित जांच अभिलेखों से होना चाहिए। यदि जांच में ग्रामीणों के बयान, उपस्थिति रजिस्टर, फोटो अथवा अन्य दस्तावेज लिए गए हैं, तो प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि जांच का निष्कर्ष क्या रहा।

06 अगस्त की जांच के बाद क्या हुआ..?

शिकायत के अनुसार, 06 अगस्त 2026 को ग्राम पंचायत खट्टी में जांच टीम पहुंची और ग्रामीणों के बयान दर्ज किए गए।

यदि जांच वास्तव में पूरी हो चुकी है, तो अब जनता का सवाल सीधा है—

जांच रिपोर्ट में क्या लिखा है?
किसकी जिम्मेदारी तय हुई?
क्या विभागीय कार्रवाई प्रस्तावित की गई?
और यदि कार्रवाई नहीं हुई तो उसका कारण क्या है?

किसी भी शिकायत में आरोप लग जाना अपने आप में दोष सिद्ध होना नहीं है। लेकिन जांच पूरी होने के बाद उसका निष्कर्ष सामने न आना भी पारदर्शिता के सवाल पैदा करता है।

असली मुद्दा: पंचायत में पैसा और डिजिटल अधिकार किसके नियंत्रण में..?

पूरे मामले को एक साथ देखने पर चार बिंदु सबसे महत्वपूर्ण बनते हैं—

पहला— पंचायत की DSC की सुरक्षा और उसके उपयोग की जवाबदेही।

दूसरा— बिल-वाउचर और भुगतान प्रक्रिया की पारदर्शिता।

तीसरा— पुराने वित्तीय अनियमितता के मामलों में जांच के बाद कार्रवाई की स्थिति।

चौथा— पंचायत प्रतिनिधियों और सचिवों के बीच अधिकारों तथा शासकीय कार्यप्रणाली से जुड़े विवादों का निष्पक्ष निपटारा।
इन चारों सवालों का जवाब यदि दस्तावेजों के साथ सामने आता है तो विवाद की वास्तविक तस्वीर स्वतः स्पष्ट हो सकती है।

प्रशासन से 7 सीधे सवाल

  1. 39 लाख रुपये से जुड़ी जांच रिपोर्ट में अंतिम निष्कर्ष क्या है?
  2. जांच रिपोर्ट जिला पंचायत कार्यालय में कब प्राप्त हुई?
  3. रिपोर्ट के आधार पर अब तक कौन-सी कार्रवाई की गई?
  4. पंचायतों की DSC किसके पास रखने की अनुमति है और उसकी जवाबदेही किस अधिकारी की है?
  5. कोरे या अपूर्ण बिल-वाउचर से भुगतान के आरोपों की जांच हुई या नहीं?
  6. खैरा-खट्टी प्रकरण की जांच रिपोर्ट में क्या निष्कर्ष निकला?
  7. यदि आरोप प्रमाणित नहीं हुए हैं, तो संबंधित शिकायतकर्ताओं को इसकी लिखित जानकारी कब दी गई?

जनता को चाहिए आरोप नहीं, दस्तावेजों वाला जवाब

पंचायतों में विकास के लिए आने वाला प्रत्येक रुपया सार्वजनिक धन है। इसलिए उसका भुगतान, स्वीकृति, बिल, वाउचर और डिजिटल प्रक्रिया रिकॉर्ड में स्पष्ट होना चाहिए।

महासमुंद में उठे इन सवालों का समाधान किसी बयान, आश्वासन या मौखिक जवाब से नहीं, बल्कि जांच रिपोर्ट, भुगतान अभिलेख और कार्रवाई की आधिकारिक स्थिति सामने आने से होगा।

अब देखना यह है कि संबंधित प्रशासन इन सवालों का जवाब कितनी जल्दी और कितनी पारदर्शिता से सामने रखता है।

क्योंकि सवाल सिर्फ 39 लाख रुपये का नहीं है—सवाल यह है कि पंचायत के पैसे पर अंतिम नियंत्रण किसका है और उसकी जवाबदेही किसकी है..?
यह संस्करण आरोपों को तथ्य की तरह पेश करने के बजाय दस्तावेज और जवाबदेही केंद्रित खोजी रिपोर्ट बनाता है, जिससे खबर का असर भी बना रहता है और कानूनी जोखिम अपेक्षाकृत कम होता है।

मानवाधिकार और समाज सेवा को मिलेगी नई दिशा: श्रीमती शशिकांता पैंकरा बनीं अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार फाउंडेशन की जशपुर जिलाध्यक्ष

मानवाधिकार और समाज सेवा को मिलेगी नई दिशा: श्रीमती शशिकांता पैंकरा बनीं अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार फाउंडेशन की जशपुर जिलाध्यक्ष

प्रधान संपादक मयंक गुप्ता /20 सितम्बर 2026/ दिन रविवार
​जशपुर / रायपुर अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार फाउंडेशन के राष्ट्रीय नेतृत्व द्वारा छत्तीसगढ़ में संगठन का विस्तार करते हुए जशपुर जिले की कमान श्रीमती शशिकांता पैंकरा को सौंपी गई है। संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष जय सिंह यादव के निर्देशानुसार शशिकांता पैंकरा को ‘महिला प्रकोष्ठ जशपुर जिलाध्यक्ष’ के महत्वपूर्ण दायित्व से नवाजा गया है।

​संगठन का मुख्य उद्देश्य आम नागरिकों को उनके कानूनी अधिकारों, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूक करना है, ताकि समाज के हर वर्ग को शोषण से बचाया जा सके और वे अपने अधिकारों की लड़ाई मजबूती से लड़ सकें।

​कुशल नेतृत्व और सेवा भाव का मिला सम्मान

श्रीमती शशिकांता पैंकरा के सामाजिक कार्यों, कुशल नेतृत्व और मानव समाज के प्रति उनकी निष्ठा को देखते हुए संगठन ने उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी है। इस नियुक्ति से जशपुर सहित आसपास के क्षेत्रों में मानवाधिकार रक्षा और समाज कल्याण के कार्यों को और गति मिलेगी।

​दायित्व मिलने पर जताई कृतज्ञता, लिया जनसेवा का संकल्प

अपनी इस नियुक्ति पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए श्रीमती शशिकांता पैंकरा ने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष जय सिंह यादव, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अजीत यादव, और महिला प्रकोष्ठ की प्रदेश उपाध्यक्ष मुक्ता देवी यादव सहित शीर्ष नेतृत्व का आभार व्यक्त किया।

​उन्होंने कहा, “संगठन ने मुझ जैसे छोटे से कार्यकर्ता पर जो भरोसा जताया है, मैं उस पद की गरिमा को सदैव बनाए रखूंगी। मेरा लक्ष्य 24 घंटे मानव सेवा के लिए समर्पित रहना है। मैं जल्द ही जशपुर जिले में एक मजबूत और सक्रिय टीम का गठन करूंगी।”

​श्रीमती पैंकरा की प्रमुख प्राथमिकताएं:

​नशा मुक्ति अभियान: जिले भर में नशा मुक्ति को लेकर विशेष जागरूकता अभियान चलाना।

​शिक्षा और कानूनी जागरूकता: ग्रामीण व दूरदराज के क्षेत्रों में लोगों को शिक्षा के महत्व और उनके मौलिक व कानूनी अधिकारों की जानकारी देना।

​अंतिम व्यक्ति तक योजनाएं पहुंचाना: केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक पहुंचाना।

​पूरे प्रदेश में खुशी की लहर, बधाइयों का लगा तांता
श्रीमती शशिकांता पैंकरा के जशपुर जिलाध्यक्ष बनने की खबर मिलते ही पूरे छत्तीसगढ़ और जशपुर जिले में खुशी का माहौल है। उनके समर्थकों, शुभचिंतकों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं द्वारा लगातार बधाइयां दी जा रही हैं।

​बधाई देने वालों में प्रदेश उपाध्यक्ष मुक्ता सिंह यादव, जाहर सिंह तोमर, कैलाश यादव, धन्नू यादव, राजेंद्र सिंह क्षत्री, गजेंद्र सिंह यादव (अधिवक्ता), कपूर यादव, निल सिंह तोमर, मयंक गुप्ता, सुनील साय, महेश राम, राहुल कुमार, माधव यादव, जलेश यादव, सूर्या ठाकुर, अजय जायसवाल, सरिता राजपूत, कविता साहू, डॉ. सविता, डॉ. कमला देवी, अनिल कुमार, महेश कुमार, दिनेश कुमार, अंकित सिंह, मिलेश, त्रिलोचन यादव, संजय कुमार और कुंदन सिंह सहित प्रदेश भर के गणमान्य नागरिक एवं कार्यकर्ता शामिल हैं। सभी ने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उम्मीद जताई कि उनके नेतृत्व में क्षेत्र और प्रदेश का नाम रोशन होगा।

मानवाधिकार रक्षा को मिलेगी नई दिशा: वरिष्ठ अधिवक्ता जितेन्द्र सिंह क्षत्रिय बने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार फाउंडेशन के राज्य कानूनी सलाहकार

मानवाधिकार रक्षा को मिलेगी नई दिशा: वरिष्ठ अधिवक्ता जितेन्द्र सिंह क्षत्रिय बने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार फाउंडेशन के राज्य कानूनी सलाहकार

प्रधान संपादक मयंक गुप्ता/20 सितम्बर 2026/दिन रविवार
​रायपुर / ​समाज के हर वर्ग तक न्याय, शिक्षा, स्वास्थ्य और अधिकारों की पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार फाउंडेशन ने एक बड़ा कदम उठाया है। फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष जय सिंह यादव (प्रधान) की अगुवाई में देशभर में संगठन का विस्तार किया जा रहा है, ताकि आम जनमानस को उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक किया जा सके और उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाई जा सके। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ प्रदेश के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता जितेन्द्र सिंह क्षत्रिय को राज्य कानूनी सलाहकार की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है।

​समाज सेवा और कुशल नेतृत्व का मिला सम्मान

​जितेन्द्र सिंह क्षत्रिय के लंबे विधिक अनुभव, समाज के प्रति निस्वार्थ सेवा भाव और कुशल नेतृत्व क्षमता को देखते हुए संगठन ने उन्हें यह अहम दायित्व दिया है। संगठन को पूर्ण विश्वास है कि उनके जुड़ने से प्रदेश में मानवाधिकार संरक्षण और जनकल्याणकारी कार्यों को और गति मिलेगी।

​जन-जन तक कानून और योजनाओं का लाभ पहुंचाना ही प्राथमिकता: जितेन्द्र सिंह

​अपनी इस नियुक्ति पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता जितेन्द्र सिंह क्षत्रिय ने राष्ट्रीय अध्यक्ष जय सिंह यादव और राष्ट्रीय सचिव सह छत्तीसगढ़ प्रभारी अजीत यादव सहित पूरे केंद्रीय नेतृत्व का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा:
​”मुझ जैसे एक छोटे से कार्यकर्ता पर इतना बड़ा विश्वास जताने के लिए मैं संगठन का हृदय से आभारी हूँ। मैं अपने पद की गरिमा को सदैव बनाए रखूँगा। मेरा मुख्य उद्देश्य 24 घंटे मानव सेवा के लिए तत्पर रहना, लोगों को उनके संवैधानिक व विधिक अधिकारों की जानकारी देना और समाज में नशा मुक्ति व शिक्षा के प्रति जागरूकता अभियान चलाना है।”
​उन्होंने आगे यह भी संकल्प दोहराया कि केंद्र और राज्य सरकार द्वारा संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक पहुँचे, इसके लिए वह निरंतर प्रयासरत रहेंगे। उन्होंने जल्द ही पूरे छत्तीसगढ़ में एक सशक्त और सक्रिय टीम के गठन की बात भी कही।

​पूरे प्रदेश में खुशी की लहर, बधाई देने वालों का लगा तांता

​जितेन्द्र सिंह क्षत्रिय को राज्य कानूनी सलाहकार बनाए जाने की खबर मिलते ही पूरे छत्तीसगढ़ और विधिक जगत में खुशी का माहौल व्याप्त हो गया है। समर्थकों, अधिवक्ताओं और शुभचिंतकों द्वारा उन्हें निरंतर बधाइयाँ और उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ दी जा रही हैं।

​बधाई देने वालों में प्रमुख रूप से

​प्रदेश उपाध्यक्ष: मुक्ता सिंह यादव

​संगठन पदाधिकारी व सदस्य: जाहर सिंह तोमर, कैलाश यादव, धन्नू यादव, राजेंद्र सिंह क्षत्री, गजेंद्र सिंह यादव, कपुर यादव, निल सिंह तोमर, मयंक गुप्ता, शुनिल साय, महेश राम, राहूल कुमार, माधव यादव, जलेश यादव, सूर्या ठाकुर, अजय जायसवाल, सरिता राजपूत, कविता साहू, डॉ. सविता, डॉ. कमला देवी, अनिल कुमार, महेश कुमार, दिनेश कुमार, अंकित सिंह, मिलेश, त्रिलोचन यादव, संजय कुमार, कुंदन सिंह सहित प्रदेशभर के अनेकों गणमान्य नागरिक और कार्यकर्ता शामिल हैं।

​सभी पदाधिकारियों और समर्थकों ने उम्मीद जताई है कि उनके नेतृत्व में अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार फाउंडेशन छत्तीसगढ़ में न्याय और जनसेवा की नई मिसाल कायम करेगा।

महासमुंद में भक्ति और जनसेवा का महासंगम: 17 सितंबर को 6 लाख दीयों की अलौकिक रोशनी से जगमगाएगा पूरा जिला, अटल परिसर में रोशन होंगी 8 हजार ज्योति शिखाएं

महासमुंद में भक्ति और जनसेवा का महासंगम: 17 सितंबर को 6 लाख दीयों की अलौकिक रोशनी से जगमगाएगा पूरा जिला, अटल परिसर में रोशन होंगी 8 हजार ज्योति शिखाएं

रिपोर्टर मयंक गुप्ता/14 सितंबर 2026/दिन सोमवार
​महासमुंद। जिला प्रशासन और आम जनता के साझा प्रयासों से महासमुंद जिला एक ऐतिहासिक और अभूतपूर्व पल का साक्षी बनने जा रहा है। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत आगामी 17 सितंबर को ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम का आयोजन बेहद भव्य और व्यापक स्तर पर किया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 25 वर्षों के बेमिसाल सार्वजनिक सेवा, सुशासन और जन-कल्याणकारी यात्रा को समर्पित इस उत्सव में पूरे जिले भर में एक साथ 6 लाख दीप प्रज्ज्वलित कर कृतज्ञता और संकल्प व्यक्त किया जाएगा।
​इस जिला स्तरीय आयोजन का मुख्य केंद्र शहर का अटल परिसर रहेगा, जहाँ 8 हजार दीपों की एक साथ प्रज्ज्वलन से पूरा परिसर आलोकित उठेगा। इसके अलावा जिले के सभी पौराणिक एवं ऐतिहासिक मंदिरों, प्रमुख चौक-चौराहों, ग्राम पंचायत भवनों, शासकीय परिसरों, पीडीएस भवनों, अमृत सरोवरों और ग्रामीण हाट-बाजारों में सामूहिक दीपदान का आयोजन होगा। प्रशासन ने ‘हर घर एक दीया’ जलाकर हर नागरिक से इस सेवा उत्सव का हिस्सा बनने का भावुक आह्वान किया है।

​कलेक्टर ने दीया जलाओ अभियान की तैयारियों की समीक्षा की

​आयोजन को व्यवस्थित और भव्य रूप देने के लिए प्रभारी कलेक्टर एवं जिला पंचायत सीईओ सुश्री अनुपमा आनंद ने टास्कफोर्स तथा विभागवार नोडल अधिकारियों की एक अति-महत्वपूर्ण बैठक ली। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी प्रशासनिक विभाग आपसी तालमेल के साथ 16 सितंबर की शाम तक समस्त आवश्यक तैयारियां पूरी कर लें। उन्होंने अधिक से अधिक नागरिकों, स्व-सहायता समूहों और युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया। बैठक में अपर कलेक्टर सचिन भूतड़ा, रवि साहू सहित विभिन्न विभागों के प्रमुख नोडल अधिकारी उपस्थित रहे।

​शाम 7 बजे एक साथ जलेगी संकल्प की अखंड ज्योति

​कार्यक्रम की समय-सारणी के अनुसार, 17 सितंबर को शाम 5:00 से 6:00 बजे के बीच सभी चयनित स्थलों पर आकर्षक सजावट, बैठक तथा ध्वनि और प्रकाश (लाइट एवं साउंड) व्यवस्था पूरी की जाएगी। शाम 6:00 से 6:30 बजे तक आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, स्वयं सहायता समूह (SHG) की दीदियों और स्थानीय नागरिकों की मदद से भव्य रंगोली सजाई जाएगी और दीयों में तेल-बाती की व्यवस्था की जाएगी।
​इसके पश्चात, ठीक शाम 7:00 बजे जिला मुख्यालय से लेकर दूरस्थ ग्रामीण अंचलों, शासकीय भवनों और मोहल्लों में एक साथ लाखों दीप प्रज्ज्वलित किए जाएंगे। यह रोशनी सेवा, समर्पण, पारदर्शी शासन और जनभागीदारी का एक सशक्त संदेश फैलाएगी।

​ग्रामीण और नगरीय क्षेत्रों के लिए तय हुए विशाल लक्ष्य

​अभियान के तहत ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में दीप प्रज्ज्वलन के लिए व्यापक
लक्ष्य तय किए गए है।

​ग्रामीण अंचलों का लक्ष्य
(कुल 5.51 लाख से अधिक दीए)

​पिथौरा ब्लॉक: 1 लाख 26 हजार दीप
​बागबाहरा ब्लॉक: 1 लाख 11 हजार दीप
​सरायपाली ब्लॉक: 1 लाख 07 हजार दीप
​महासमुंद ब्लॉक: 1 लाख 05 हजार दीप
​बसना ब्लॉक: 1 लाख 02 हजार दीप

​नगरीय अंचलों का लक्ष्य

(कुल 20 हजार दीप):
​बसना, पिथौरा, तुमगांव एवं सरायपाली के नगरीय निकाय क्षेत्रों में विशेष स्थल दीपों से सजाए जाएंगे।

​प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार प्रारंभिक तौर पर 5 लाख 83 हजार दीपों का खाका तैयार किया गया था, जिसे जन-उत्साह और भागीदारी के बल पर 6 लाख के पार ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। प्रभारी कलेक्टर सुश्री अनुपमा आनंद ने समस्त जिलावासियों से अपील की है कि वे 17 सितंबर को अपने-अपने घरों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और सार्वजनिक स्थलों पर ‘आशीर्वाद का दीया’ प्रज्ज्वलित कर इस महाअभियान को ऐतिहासिक बनाएं।

मौत के साए में ‘भविष्य’! महासमुंद के आदिवासी बालक छात्रावास की छत से गिर रहे पत्थर, विभाग को बड़े हादसे का इंतजार

मौत के साए में ‘भविष्य’! महासमुंद के आदिवासी बालक छात्रावास की छत से गिर रहे पत्थर, विभाग को बड़े हादसे का इंतजार

रिपोर्टर मयंक गुप्ता/दिन रविवार/ दिनांक 13 सितंबर 2026
​महासमुंद। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिला मुख्यालय स्थित ‘शासकीय पोस्ट मैट्रिक आदिवासी बालक छात्रावास (खैरा)’ की हालत इतनी बदतर और जर्जर हो चुकी है कि यहाँ रह रहे दर्जनों मासूम छात्रों की जान हर पल खतरे में है। इमारत की स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि केवल एक डंडे से हल्का सा छूने पर भी छत का प्लास्टर उखड़कर नीचे गिरने लगता है।
​हाल ही में जब छात्र सुबह की प्रार्थना के लिए एकत्रित हुए थे, उसी दौरान छत का एक बड़ा हिस्सा टूटकर नीचे आ गिरा। किस्मत से उस समय कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ, लेकिन जर्जर छत, फटी दीवारें, टूटे फर्श और क्षतिग्रस्त खिड़की-दरवाजे किसी बड़े हादसे को न्योता दे रहे हैं।

​33kV हाईटेंशन लाइन और झुका पेड़: मंडरा रहा दोहरा खतरा

​छात्रावास परिसर के बिल्कुल किनारे एक काफी पुराना और विशाल पेड़ स्थित है, जिसकी डालियां 33kV हाईटेंशन विद्युत लाइन की ओर झुकी हुई हैं। मामूली हवा या आंधी चलने पर भी पेड़ की टहनियां तारों से टकराती हैं, जिससे आए दिन भीषण स्पार्किंग होती है। बरसात के मौसम में पेड़ के गिरने या करंट फैलने का गंभीर खतरा बना हुआ है, जिसे लेकर छात्रावास प्रशासन ने बिजली विभाग (CPDCL) के कनिष्ठ यंत्री को पत्र लिखकर पेड़ कटवाने की मांग की है।

​आंकड़ों का खेल और बदहाली का शिकार छात्र

​छात्रावास में सीटों के आवंटन और जमीनी हकीकत में भी भारी लापरवाही सामने आई है।

​अनुसूचित जनजाति (ST) छात्रावास: 50 सीटों की स्वीकृत क्षमता में से 40 सीटें भरी गई हैं।

​अनुसूचित जाति (SC) छात्रावास: 50 सीटों में से केवल 12 छात्र ही पंजीकृत हैं।

​चौंकाने वाली बात यह है कि अनुसूचित जाति (SC) के छात्रों को भी इसी जर्जर और बदहाल आदिवासी छात्रावास भवन में रहने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। छात्रावास अधीक्षक छन्नू लाल साहू के अनुसार, इस छात्रावास के लिए महासमुंद के ग्राम परसकोल मार्ग पर नया भवन स्वीकृत (सैंक्शन) हुआ है, लेकिन आज तक वहां निर्माण कार्य की एक ईंट भी नहीं रखी गई है।

​जिले का सेंट्रल स्टोर बना जर्जर भवन, लाखों के सामान की बलि चढ़ने का अंदेशा

​महासमुंद विकासखंड के समस्त आदिवासी छात्रावासों के लिए विभागीय उपकरण और सामग्रियों का संग्रहण (स्टोर) इसी बदहाल इमारत में किया जाता है। यहाँ से जिले भर में वितरण होता है। इमारत की हालत इतनी नाजुक है कि यदि कोई दुर्घटना होती है, तो छात्रों की जान के साथ-साथ शासन का लाखों रुपये का सामान भी एक झटके में मलबे में तब्दील हो जाएगा।

​5 सालों से पत्राचार, पर सो रहा आदिवासी विकास विभाग

​छात्रावास अधीक्षक मोहनीश दीवान और छन्नू लाल साहू के कथनानुसार पिछले 5-6 वर्षों से लगातार विभाग के चक्कर काट रहे हैं। लेकिन कोई सुनता ही नहीं है। हम भी मजबूर है।

​पत्रों की लंबी फेहरिस्त: 19 दिसंबर 2025 को सहायक आयुक्त (आदिवासी विकास विभाग) को पत्र लिखकर नए भवन निर्माण और तात्कालिक मरम्मत की गुहार लगाई गई थी।

​अनुरक्षण मद से गुहार: पत्र क्रमांक 26/2021 के जरिए 10 कमरों की दीवारें, 15 नए दरवाजे, 15 नई खिड़कियां, 35 वेंटिलेशन ग्रिल, 8 शौचालय (सीट व टाइल्स) और 6 स्नानागारों के मरम्मत की मांग की जा चुकी है।

​इसके बावजूद आदिवासी विकास विभाग की सहायक आयुक्त श्रीमती शिल्पा साय (जो बीते लगभग 4 वर्षों से पदस्थ हैं) और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के कानों में जूं तक नहीं रेंग रही है। सवाल यह उठता है कि क्या विभाग किसी बड़े हादसे और निर्दोष छात्रों की बलि का इंतजार कर रहा है? यदि जिला मुख्यालय के छात्रावास का यह हाल है, तो अंदरूनी इलाकों की स्थिति का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।

​छात्रावास की व्यवस्था संभाल रहा स्टाफ

​इस विषम स्थिति के बावजूद छात्रावास की व्यवस्था को संभालने में निम्नलिखित कर्मचारी तैनात हैं

​व्यवस्थापक एवं संरक्षक

​मोहनीश दीवान – छात्रावास अधीक्षक (व्यवस्था/संरक्षक)
​छन्नूलाल साहू – छात्रावास अधीक्षक

​सहयोगी स्टाफ

​भोजन व्यवस्था: अनुप कुमार यादव, मनीराम चक्रधारी, लच्छन राम ध्रुव, शिवचरण बंजारे, शुभम सिंह, दुर्गेश यादव
​सुरक्षा व्यवस्था: कृष्ण कुमार बघेल
​स्वच्छता व्यवस्था: पुरानिक ध्रुव, सिद्धेश नागेश

लोहारडीह का महा-कवरेज: जर्जर तंत्र, लाचार सुरक्षा और बदहाल व्यवस्था… क्या यही है महासमुंद का ‘मॉडल विकास’..?

लोहारडीह का महा-कवरेज: जर्जर तंत्र, लाचार सुरक्षा और बदहाल व्यवस्था… क्या यही है महासमुंद का ‘मॉडल विकास’..?

रिपोर्टर मयंक गुप्ता/दिन शनिवार/12 सितंबर 2026
​महासमुंद (छत्तीसगढ़)
एक ओर शासन-प्रशासन ग्रामीण क्षेत्रों के सर्वांगीण विकास, शिक्षा के आधुनिकीकरण और सुरक्षा का डंका पीट रहा है, वहीं दूसरी ओर महासमुंद जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाला ग्राम पंचायत लोहारडीह प्रशासनिक उपेक्षा और बदहाली का जीवंत उदाहरण बन चुका है। प्राथमिक सुविधाओं से लेकर सुरक्षा व्यवस्था तक, यहाँ की पूरी व्यवस्था पटरी से उतर चुकी है। विद्यालय प्रशासन और स्थानीय ग्रामीणों द्वारा शासन-प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने के लिए निरंतर मांग पत्र और ज्ञापन सौंपे जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत जस की तस बनी हुई है।

​1. एक ही प्रांगण में 5 प्रमुख संस्थान, सुरक्षा ‘शून्य’: असामाजिक तत्वों और चोरों का अड्डा बना परिसर

​लोहारडीह ग्राम पंचायत का सबसे संवेदनशील पहलू यह है कि एक ही प्रांगण के भीतर ग्राम पंचायत भवन, आंगनबाड़ी केंद्र, उप स्वास्थ्य केंद्र, शासकीय प्राथमिक शाला भवन तथा शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला भवन संचालित होते हैं।

​इतनी बड़ी गतिविधियों वाले इस साझा प्रांगण में बाउंड्रीवाल (अहाता) का न होना एक गंभीर सुरक्षा संकट पैदा कर रहा है।

​असामाजिक तत्वों का जमावड़ा: शाम ढलते ही और सभी शासकीय भवनों के बंद होते ही इस लावारिस परिसर में असमाजिक तत्वों की महफिलें सजने लगती हैं।

​चोरी और तोड़-फोड़: घेराबंदी न होने का फायदा उठाकर आए दिन यहाँ चोरी-चाकरी और सरकारी संपत्तियों की तोड़-फोड़ की घटनाएं घट रही हैं।

​मवेशियों का जमावड़ा: खुले परिसर में पशुओं का निर्बाध प्रवेश रहता है, जिससे स्वच्छता और शांति दोनों भंग होती हैं।

​शासकीय शाला विकास एवं प्रबंधन समिति (SMDC) और ग्रामीणों ने कई बार इस गंभीर समस्या को लेकर ज्ञापन सौंपे हैं, किंतु प्रशासन की नींद नहीं टूट रही है।

​2. जर्जर दीवारें, उखड़ता प्लास्टर: बदहाली बयां करता ग्राम पंचायत भवन

​सुरक्षा के अभाव के साथ-साथ पंचायत व्यवस्था का ढांचा भी पूरी तरह चरमरा गया है। ग्राम पंचायत लोहारडीह का कार्यालय भवन वर्षों से मरम्मत की राह तक रहा है:

​संरचनात्मक क्षति: भवन की बाहरी दीवारों से प्लास्टर गिर चुका है और अंदर की ईंटें व छड़ें बाहर झांक रही हैं।

​धुंधली पड़ी योजनाएं: दीवारों पर उकेरी गई ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ के लाभार्थियों की सूचियां और अन्य जनकल्याणकारी शासकीय सूचनाएं देख-रेख के अभाव में मिट चुकी हैं।

​पारदर्शिता पर सवाल: ग्रामीणों का आरोप है कि रखरखाव और पेंट-पुट्टी के नाम पर कोई कार्य नहीं कराया गया है, जिससे सरकारी योजनाओं की स्पष्ट जानकारी तक लोगों को नहीं मिल पा रही है।

​3. शासकीय हाई स्कूल लोहारडीह: बुनियादी सुविधाओं के लिए विधायक से लगाई गुहार

​एक ओर प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक शाला परिसर असुरक्षा से जूझ रहा है, वहीं दूसरी ओर शासकीय हाई स्कूल लोहारडीह के विद्यार्थी धूप, बारिश और असुरक्षा के बीच पढ़ाई करने को मजबूर हैं। शाला प्रशासन, प्राचार्य (प्रधान पाठक) और संकुल समन्वयक (संकुल स्रोत केन्द्र समग्र शिक्षा लोहारडीह) ने महासमुंद विधानसभा क्षेत्र के विधायक श्री योगेश्वर राजू सिन्हा को तीन अलग-अलग औपचारिक मांग पत्र सौंपकर बजट स्वीकृत करने की अपील की है।

​मजबूत बाउंड्रीवाल निर्माण की मांग: शाला परिसर को सुरक्षित और भयमुक्त शैक्षणिक माहौल देने के लिए चारों ओर अहाता निर्माण हेतु राशि स्वीकृत करने का आग्रह किया गया है।

​छायादार सायकल स्टैंड का अभाव: दूर-दराज के गांवों से आने वाले छात्र-छात्राओं की साइकिलें खुले आसमान के नीचे खड़ी रहती हैं। तेज धूप और बारिश के कारण साइकिलें लगातार क्षतिग्रस्त हो रही हैं। विद्यार्थियों की सुविधा हेतु तत्काल सायकल स्टैंड निर्माण की मांग रखी गई है।

​प्रार्थना शेड का निर्माण: रोजाना होने वाली सुबह की प्रार्थना सभा और सांस्कृतिक आयोजनों के लिए उपयुक्त शेड न होने से बच्चों को भीषण गर्मी व बारिश में खड़ा होना पड़ता है। मौसम की इस मार से बचाने के लिए प्रार्थना शेड निर्माण की गुहार लगाई गई है।

​4. विद्यालयों में दर्ज संख्या, पदस्थ शिक्षक और शिक्षकों की कमी का पूरा विवरण

​लोहारडीह के शैक्षणिक संस्थानों की स्थिति और यहाँ पदस्थ शिक्षकों तथा दर्ज छात्र-छात्राओं का आंकड़ा इस प्रकार है:

​शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला (मिडिल स्कूल):
प्रधान पाठक तरुण कहार ने बताया कि कक्षा 6वीं से 8वीं तक कुल 178 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। यहाँ सहयोगी शिक्षक नीलिमा गुप्ता, कुलदीप सिंह, डोमन लाल साहू, गणेश टंडन एवं सोमेश्वर प्रसाद पटेल द्वारा अध्यापन कराया जा रहा है।

​शासकीय प्राथमिक शाला:
प्रधान पाठक रोमन लाल चंद्राकर के अनुसार कक्षा 1लीं से 5वीं तक 102 बालक-बालिकाएं अध्ययनरत हैं। इन्हें पढ़ाने की जिम्मेदारी सहायक शिक्षिका श्रीमती दुर्गा साहू, श्रीमती मंदाकिनी साहू और श्रीमती प्रभा सूर्यवंशी संभाल रही हैं।

​शासकीय हाई स्कूल:
प्राचार्य शिव प्रसाद मरकाम ने बताया कि कक्षा 9वीं एवं 10वीं में कुल 66 विद्यार्थी दर्ज हैं। यहाँ श्रीमती नेहा सिंह (व्याख्याता अंग्रेजी), देवराज सेन (व्याख्याता गणित), श्रीमती हर्षिता चंद्राकर (व्याख्याता विज्ञान), श्रीमती दुर्गा कमार (सहायक शिक्षिका विज्ञान सहायक), नंद किशोर वर्मा (सहायक ग्रेड 2) एवं आकाश यादव (सहायक ग्रेड 3) कार्यरत हैं।

​शिक्षकों की कमी से पढ़ाई प्रभावित

प्राचार्य श्री मरकाम ने आगे बताया कि हाई स्कूल में दो शिक्षकों की कमी है, जिसके कारण सामाजिक विज्ञान और संस्कृत जैसे महत्वपूर्ण विषयों के अध्ययन-अध्यापन में भारी बाधा उत्पन्न हो रही है।

​कब जागेगा जिम्मेदार प्रशासन..?

​लोहारडीह का संपूर्ण परिसर—चाहे वह शिक्षा व्यवस्था हो, स्वास्थ्य केंद्र हो या फिर पंचायत का प्रशासनिक ढांचा—इस समय भारी उपेक्षा का शिकार है। शाला परिवार, SMDC और स्थानीय निवासियों ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि जल्द ही विधायक निधि या शासकीय बजट से अहाता निर्माण, मरम्मत व अन्य विकास कार्यों को स्वीकृति नहीं मिली, तो क्षेत्र का शैक्षणिक और सामाजिक वातावरण पूरी तरह प्रभावित हो जाएगा।

​अब देखना यह होगा कि जनहित से जुड़ी इन जायज मांगों और शिक्षकों की कमी दूर करने पर विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा और जनपद प्रशासन क्या त्वरित कदम उठाते हैं, या लोहारडीह के ग्रामीण और नौनिहाल यूँ ही बदहाली के साए में दिन गुजारने को मजबूर रहेंगे।

समृद्धि का रहस्यमयी जाल: डिजिटल हस्ताक्षरों पर कब्ज़ा, फर्जी बिलों की बारिश और 39 लाख के पुराने घोटाले का नया अध्याय

समृद्धि का रहस्यमयी जाल: डिजिटल हस्ताक्षरों पर कब्ज़ा, फर्जी बिलों की बारिश और 39 लाख के पुराने घोटाले का नया अध्याय

प्रधान संपादक मयंक गुप्ता
महासमुंद (छत्तीसगढ़) | 09 सितंबर 2026/बुधवार
जनपद पंचायत महासमुंद में शासकीय खजाने की रखवाली करने वाले तंत्र में एक ऐसा रहस्यमयी खेल चल रहा है, जिसमें डिजिटल हस्ताक्षर (DSC) को हथियार बनाकर फर्जी भुगतानों का साम्राज्य खड़ा कर लिया गया है। सरपंचों और सचिवों के डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट अवैध रूप से अपने कब्जे में रखकर भुगतान की पूरी प्रक्रिया को नियंत्रित करने का आरोप एक महिला कर्मचारी पर लगा है। यह ताजा मामला सिर्फ मौजूदा अनियमितताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि कोरोना काल के 39 लाख रुपये के बहुचर्चित घोटाले से भी सीधे जुड़ता नजर आ रहा है।

DSC पर अवैध कब्ज़ा और ब्लैकमेलिंग का खुला खेल

आधिकारिक शिकायत पत्र (क्रमांक 01, दिनांक 04 अगस्त 2026) के अनुसार, जनपद पंचायत महासमुंद की संकाय शाखा में पदस्थ श्रीमती समृद्धि शर्मा के खिलाफ विभिन्न ग्राम पंचायतों के सरपंचों और सचिवों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि उनके डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट अवैध रूप से अपने पास जमा रख लिए गए हैं। इन DSC के जरिए भुगतान की पूरी प्रक्रिया खुद संचालित की जा रही है।
कार्य से जुड़े वैध दस्तावेजों के बजाय अपूर्ण और कोरे बिल-वाउचर अपलोड करके शासकीय धनराशि निकाल ली जा रही है। जब सरपंच या सचिव अपनी DSC वापस मांगते हैं, तो उन्हें टरकाया जाता है। शिकायतों में यह भी उल्लेख है कि खुलेआम धमकी दी जाती है—“यदि भुगतान हमारे माध्यम से नहीं हुआ तो DSC निरस्त कर दी जाएगी या पंचायत का भुगतान रोक दिया जाएगा।” यह स्थिति न केवल वित्तीय नियमों का उल्लंघन है, बल्कि पंचायती राज व्यवस्था की स्वायत्तता पर भी सीधा प्रहार है।

39 लाख के पुराने घोटाले से जुड़ते तार

ताजा DSC कांड ने वर्ष 2019-20 के कोरोना काल के 15वें वित्त आयोग की 39 लाख रुपये की राशि के गबन को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। महामारी के दौरान जब लॉकडाउन और धारा 144 लागू थी, तब सैनिटाइजर, मास्क और सुरक्षा सामग्री खरीदने के नाम पर फर्जी बिल-वाउचर लगाकर केंद्रीय राशि का बंदरबांट किया गया था।
वर्तमान में DSC दबाकर फर्जी भुगतान का जो तरीका अपनाया जा रहा है, उससे यही संकेत मिलता है कि उस पुराने घोटाले में भी संकाय शाखा और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका रही होगी। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि इसी सिंडिकेट को बचाने के लिए उच्च स्तर पर फाइलों को दबाने की कोशिशें जारी हैं।

जांच रिपोर्ट जमा, फिर भी कार्यवाही शून्य

39 लाख रुपये के घोटाले की जांच पिछले दो वर्षों से लगभग ठप पड़ी हुई है। कभी जांच अधिकारी का तबादला हो जाता है, कभी वे सेवानिवृत्त हो जाते हैं। हाल ही में शिकायतकर्ताओं ने वर्तमान जनपद पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) मिषा कोसले से मुलाकात की। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपने स्तर पर निष्पक्ष जांच पूरी करके रिपोर्ट जिला पंचायत कार्यालय में जमा कर दी है।
अब सवाल यह उठता है कि जब जनपद CEO की जांच रिपोर्ट जमा हो चुकी है, तो जिला पंचायत के वर्तमान मुख्य कार्यपालन अधिकारी एस.आलोक और उनका अमला कार्यवाही करने से क्यों बच रहा है..? शिकायतकर्ताओं के अनुसार, जब इस विषय पर जानकारी मांगी जाती है, तो गैर-जिम्मेदाराना जवाब दिया जाता है—“इसमें और क्या कार्यवाही करेंगे?” क्या जिला पंचायत कार्यालय के किसी कर्मचारी की संलिप्तता के कारण कार्रवाई रोकी जा रही है? यह सवाल अभी भी अनुत्तरित है।

शासन-प्रशासन को चेतावनी

जनता के हक का पैसा
डकारना और फर्जी दस्तावेजों के सहारे शासकीय खजाने को चूना लगाना गंभीर अपराध है। केंद्र सरकार की योजनाओं के पैसे का इस तरह गबन प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा है।

यदि शासन-प्रशासन द्वारा इस पूरे प्रकरण में संलिप्त अधिकारियों और कर्मचारियों पर त्वरित, निष्पक्ष जांच कर कड़ी दंडात्मक और विधिक कार्रवाई (FIR सहित) नहीं की गई, तो आने वाले दिनों में नए-नए मामलों और काली करतूतों का सिलसिलेवार खुलासा किया जाता रहेगा। पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग अब सिर्फ शिकायतकर्ताओं की नहीं, बल्कि पूरे जनपद की आम जनता की भी बन गई है।

महासमुंद जिला पंचायत में फैला ‘सन्नाटा’ या साठगांठ का ‘साया’..? जांच में दोषी सिद्ध, ग्रामीणों की गवाही पक्की… फिर भी जिला CEO की ‘रहस्यमयी चुप्पी’ पर उठे तीखे सवाल..!

महासमुंद जिला पंचायत में फैला ‘सन्नाटा’ या साठगांठ का ‘साया’..? जांच में दोषी सिद्ध, ग्रामीणों की गवाही पक्की… फिर भी जिला CEO की ‘रहस्यमयी चुप्पी’ पर उठे तीखे सवाल..!

​खास रिपोर्ट: मयंक गुप्ता (प्रधान संपादक, बेबाक बयान)
दिनांक: 08 सितंबर 2026
स्थान: महासमुंद (छत्तीसगढ़)

​महासमुंद। क्या महासमुंद जिला पंचायत में नियम-कानून ताक पर रख दिए गए हैं..? क्या छत्तीसगढ़ की पंचायती राज व्यवस्था में पारदर्शिता का ढिंढोरा पीटने वाले आला अधिकारी खुद भ्रष्टाचारियों और मनचले कर्मचारियों की ढाल बन चुके हैं..? ग्राम पंचायत खैरा और खट्टी के चर्चित ‘सचिव कांड’ में अब तक की प्रशासनिक निष्क्रियता तो यही इशारा कर रही है।

​घटना के पूरे ढाई महीने बीत चुके हैं, जांच टीम ने 6 अगस्त को ही अपनी रिपोर्ट में दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया, दर्जनों ग्रामीणों ने कड़े शब्दों में गवाही दर्ज कराई, लेकिन इसके बावजूद महासमुंद जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) और उप संचालक (पंचायत) का ‘कार्रवाई मीटर’ शून्य पर अटका हुआ है।
​आखिर किस दबाव या ‘खास नजर-ए-करम’ के तहत दोषी सचिव को खुलेआम अभयदान दिया जा रहा है..?

​कांड का पूरा लेखा-जोखा: जब अपनी पंचायत छोड़ पत्नी के ‘शक्ति केंद्र’ पहुंचे सचिव साहब

​24 जून 2026 की मनमानी: शासन के स्पष्ट आदेश थे कि ‘प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण’ के तहत अति-महत्वपूर्ण ग्राम सभा में अपनी मूल पदस्थापना ग्राम पंचायत खैरा में सचिव मोतीलाल मेहरा मौजूद रहें। लेकिन साहब ने शासकीय आदेशों की धज्जियां उड़ाते हुए खैरा का बहिष्कार किया और पहुंच गए अपनी धर्मपत्नी (सरपंच श्रीमती अनिता मेहरा) की पंचायत खट्टी।

​शासकीय नियमों को ठेंगा: ग्राम पंचायत खट्टी में अपनी पत्नी के पद का धौंस जमाते हुए सचिव मोती मेहरा ने न सिर्फ पंचायत की आधिकारिक कार्यवाही में अवैध हस्तक्षेप किया, बल्कि ग्रामीणों से सीधे भिड़ गए।

​26.05.2010 के आदेश का खुला उल्लंघन: शासन का नियम साफ कहता है कि महिला प्रतिनिधियों के कार्यों में पति या रिश्तेदार का हस्तक्षेप पूरी तरह प्रतिबंधित है। एक सरकारी लोक सेवक द्वारा दूसरी पंचायत में जाकर गुंडागर्दी और मनमानी करना अनुशासनहीनता का सबसे घिनौना उदाहरण है।

​6 अगस्त की जांच: सबूत पक्के, गवाही ठोस… फिर फाइलों पर धूल क्यों..?

​शिकायतकर्ता मयंक गुप्ता की शिकायत पर जनपद पंचायत द्वारा गठित जांच टीम ने 06 अगस्त 2026 को खट्टी के पंचायत भवन में जांच पूरी की थी।

​दर्जनों ग्रामीणों ने खोला मोर्चा: ग्रामीणों ने मौके पर उपस्थित होकर सचिव के अनुचित दबाव, अभद्र व्यवहार और मूल पदस्थापना से नदारद रहने की पुष्टि की।

​पुख्ता साक्ष्य समर्पित: बैठक के फोटोग्राफ, रजिस्टर की प्रविष्टियां और सरकारी आदेशों की धज्जियां उड़ाने के सबूत जांच अधिकारी को सौंप दिए गए।

​सबूत हाथ में हैं, बयान दर्ज हैं… फिर भी जिला पंचायत CEO और उप संचालक की कलम क्यों ठिठक रही है..?

​जनता के चुभते सवाल: दोषी कौन—जिला CEO या उप संचालक..?

1 ​कागजी नियम या असली शह? जब महिला सरपंच के शासकीय कार्यों में पति के हस्तक्षेप पर पूर्ण पाबंदी है, तो वर्दीधारी लोक सेवक (सचिव) पर अब तक FIR या निलंबन की गाज क्यों नहीं गिरी..?

2 ​कुर्सी का दबाव या पर्दे के पीछे का खेल? जांच रिपोर्ट ठंडे बस्ते में डालना इस बात का साफ संकेत है कि या तो जिला पंचायत के जिम्मेदार अधिकारी किसी राजनीतिक/वित्तीय दबाव में हैं, या फिर दोषी सचिव को बचाने की सुनियोजित साठगांठ जारी है।

3 ​संवैधानिक संस्था का अपमान कब तक? ग्राम सभा जैसी पवित्र संस्था का अपमान करके दूसरी पंचायत में उपद्रव मचाने वाले सचिव के हौसले इतने बुलंद क्यों हैं..?

​आक्रोशित ग्रामीणों और जागरूक जनता की सीधी चेतावनी

​क्षेत्र के ग्रामीणों और शिकायतकर्ता का साफ कहना है कि छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम और लोक सेवक आचरण नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाने वाले सचिव मोती मेहरा को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाए।

​यदि जिला प्रशासन और जिला पंचायत CEO अब भी अपनी ‘रहस्यमयी चुप्पी’ नहीं तोड़ते हैं, तो यह मान लिया जाएगा कि महासमुंद में भ्रष्टाचार और स्वेच्छाचारिता को सीधे जिला पंचायत कार्यालय से ही संरक्षण मिल रहा है!

महासमुंद – रिटायरमेंट के 180 दिन बाकी, फिर भी DEO बीएल देवांगन का ‘संरक्षण’ — भुरका के प्रधान पाठक धनुर्जय पटेल पर गंभीर आरोपों के बावजूद क्यों नहीं गिर रही कार्रवाई की गाज..?

महासमुंद – रिटायरमेंट के 180 दिन बाकी, फिर भी DEO बीएल देवांगन का ‘संरक्षण’ — भुरका के प्रधान पाठक धनुर्जय पटेल पर गंभीर आरोपों के बावजूद क्यों नहीं गिर रही कार्रवाई की गाज..?

जांच में 264 में से सिर्फ 91 दिन आए हेडमास्टर, फिर भी मेहरबान बने DEO; क्या रिटायरमेंट का मिल रहा ‘सुरक्षा कवच’..?

रिपोर्टर मयंक गुप्ता/ मंगलवार / 08 सितम्बर 2026
​महासमुंद (छत्तीसगढ़)। शासकीय प्राथमिक शाला भुरका में पदस्थ प्रधान पाठक धनुर्जय पटेल का मामला इन दिनों जिला शिक्षा महकमे में चर्चा और जन-आक्रोश का केंद्र बना हुआ है। गंभीर विभागीय गड़बड़ियों, लंबे समय से गैर-हाजिरी और अनुशासनहीनता के पुख्ता सबूत मिलने के बाद भी जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) बी.एल. देवांगन की चुप्पी पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। मामले में सबसे बड़ा पेंच यह है कि आरोपी प्रधान पाठक की सेवानिवृत्ति में अब सिर्फ 180 दिन (छह महीने) का समय बचा है, जिसे लेकर कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या विभाग कार्रवाई टालकर उन्हें सुरक्षित सम्मानजनक विदाई देने की फिराक में है..?

​क्लासरूम में सोए मिले प्रधान पाठक, बच्चों का भविष्य दांव पर

​पूरा मामला 13 अगस्त 2026 को सामने आया, जब निरीक्षण और मीडिया कवरेज के दौरान प्राथमिक शाला भुरका में अजीबो-गरीब स्थिति देखने को मिली। पहली और दूसरी कक्षा के छोटे बच्चे जहां जमीन पर बिलखते-खेलते नजर आए, वहीं प्रधान पाठक धनुर्जय पटेल स्कूल परिसर में कथित तौर पर बेखबर सोए हुए पाए गए। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि शिक्षक का अक्सर शराब के नशे में आना, लेट पहुंचना और कक्षा में सो जाना रोज की बात बन चुकी थी।
​मामला बिगड़ने पर उसी दिन शाम 6 बजे के बाद प्रधान पाठक ने आनन-फानन में ऑनलाइन छुट्टी का आवेदन ठोका और एक निजी क्लीनिक से मेडिकल सर्टिफिकेट बनवाकर पेश कर दिया। जबकि नियमतः शासकीय कर्मचारियों के स्वास्थ्य अवकाश के लिए सरकारी अस्पताल के विशेषज्ञ (MBBS) डॉक्टर की रिपोर्ट अनिवार्य होती है।

​जांच रिपोर्ट में खुली पोल:
सालभर में 173 दिन गायब!

​विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) द्वारा गठित जांच टीम (प्राचार्य भरत सिंह साहू एवं संकुल समन्वयक लक्ष्मीनाथ सहसरिया) की पड़ताल में जो आंकड़े सामने आए, वे हैरान करने वाले हैं:

​उपस्थिति का रिकॉर्ड: जुलाई 2025 से जुलाई 2026 के बीच कुल 264 कार्य दिवसों में से प्रधान पाठक महज 91 दिन ही स्कूल पहुंचे। यानी साल के ज्यादातर हिस्से में वे स्वेच्छा से अनुपस्थित रहे।

​जांच के दिन भी फरार: 13 अगस्त के हंगामे के ठीक अगले दिन 14 अगस्त को जब जांच टीम स्कूल पहुंची, तो प्रधान पाठक फिर से गायब मिले। फोन करने पर उन्होंने अधिकारियों का कॉल तक उठाना मुनासिब नहीं समझा।

​अचानक गायब होने की आदत: जांच में पुष्टि हुई कि घटना के दिन वे सुबह 10:15 बजे आए, हाजिरी रजिस्टर में दस्तखत किए और दोपहर 12:30 बजे बिना बताए रफूचक्कर हो गए।
​इसके बावजूद, रिपोर्ट के अंतिम निष्कर्ष में ‘शराब के नशे का प्रत्यक्ष मेडिकल साक्ष्य न मिलने’ की बात कहकर ढील देने की कोशिश की गई, जिसे स्थानीय लोग और अभिभावक मामले को ठंडे बस्ते में डालने का प्रयास बता रहे हैं।

​नियम-कानून ताक पर: आखिर क्यों नहीं हो रहा निलंबन?

​जांच अधिकारियों और संकुल समन्वयक ने स्पष्ट लिखा है कि स्कूल के अनुशासन और बच्चों की पढ़ाई के हित में शिक्षक पर immediate disciplinary action (तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई) बेहद जरूरी है। इसके बावजूद 18 साल से एक ही स्कूल में डटे शिक्षक पर डीईओ स्तर से अब तक कोई एक्शन नहीं लिया गया है।

​कानूनी प्रावधानों के तहत आरोपी शिक्षक पर ये नियम सीधे तौर पर लागू होते हैं:

​छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 (नियम 3): शासकीय सेवक के लिए कर्तव्यपरायणता और गरिमामय आचरण अनिवार्य है। बिना सूचना गायब रहना और बच्चों की पढ़ाई से खिलवाड़ ‘कदाचरण’ (Misconduct) की श्रेणी में आता है।

​छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 (नियम 9 एवं 10/11): गंभीर चूक और गैर-जिम्मेदाराना रवैये पर नियम 9 के तहत तत्काल निलंबन (Suspension) और नियम 10/11 के तहत वेतन वृद्धि रोकने या बर्खास्तगी जैसी सख्त शास्तियां लगाने का स्पष्ट अधिकार सक्षम प्राधिकारी के पास है।

​कलेक्टर से हस्तक्षेप की मांग

​बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ और विभागीय उदासीनता को देखते हुए स्थानीय अभिभावकों और सजग नागरिकों ने कलेक्टर महासमुंद से गुहार लगाई है। मांग की जा रही है कि घोर लापरवाही के आरोपी धनुर्जय पटेल को अविलंब निलंबित किया जाए और मामले को दबाने में शामिल जिम्मेदार अफसरों की भूमिका की भी जांच हो। अब देखना यह होगा कि प्रशासन कड़ा रुख अपनाता है या रिटायरमेंट की आड़ में मामला यूं ही फाइलों में दबा रह जाएगा।

शिक्षा में आध्यात्मिकता का समावेश ही करेगा विश्व नवनिर्माण: ब्रह्माकुमारीज़ द्वारा भव्य शिक्षक सम्मान समारोह आयोजित

शिक्षा में आध्यात्मिकता का समावेश ही करेगा विश्व नवनिर्माण: ब्रह्माकुमारीज़ द्वारा भव्य शिक्षक सम्मान समारोह आयोजित

रिपोर्टर मयंक गुप्ता/ दिन सोमवार/ 07 सितंबर 2026
​महासमुंद / प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के शिक्षाविद प्रभाग द्वारा शिक्षक दिवस के उपलक्ष्य में एक भव्य ‘शिक्षक सम्मान कार्यक्रम’ का आयोजन बड़े ही हर्षोल्लास के साथ किया गया। इस विशेष समारोह में महासमुंद जिले के विभिन्न स्कूल एवं कॉलेजों से आए उत्कृष्ट शिक्षकों को उनकी अतुलनीय सेवाओं के लिए सम्मानित किया गया।
​कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन एवं प्रभु स्मृति के साथ भक्तिमय माहौल में हुई। इसके पश्चात सभी नवागत अतिथियों का पुष्पगुच्छ देकर भावभिना स्वागत किया गया। मंच का कुशल एवं प्रभावपूर्ण संचालन बीके दोमेश्वरी दीदी द्वारा किया गया।

​मूल्य आधारित शिक्षा से ही होगा स्वर्णिम समाज का निर्माण

​रायपुर से पधारीं मुख्य वक्ता बीके चंद्रकला दीदी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि विश्व नवनिर्माण की नींव मूल्य आधारित शिक्षा पर टिकी है। जब तक शिक्षा के साथ आध्यात्मिकता का समावेश नहीं होगा, तब तक नई पीढ़ी में उच्च नैतिक संस्कारों का बीजारोपण संभव नहीं है।

​उन्होंने ‘शिक्षक’ शब्द की अनूठी व्याख्या करते हुए कहा:

​शि (शिखर): जो विद्यार्थियों को सफलता के शिखर तक पहुँचाए।

​क्ष (क्षमा): जो क्षमाशीलता का गुण सिखाए।

​क (कमजोरी मिटाने वाला): जो बच्चों की आंतरिक कमजोरियों को दूर करे।

​उन्होंने शिक्षकों को ‘लव एंड लॉ’ (प्रेम और अनुशासन) का संतुलन बनाए रखने की सलाह दी। उन्होंने जोर देकर कहा कि विद्यार्थियों में मूल्यों का विकास करने से पहले शिक्षकों को स्वयं उन आदर्शों, मूल्यों और शांति (साइलेंस) को अपने जीवन में धारण करना होगा।

​किताबी ज्ञान से आगे बढ़कर बच्चों का मार्गदर्शन करें:
सुजाता विश्वनाथन

​समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद वृंदावन स्कूल की डायरेक्टर सुजाता विश्वनाथन ने कहा कि एक सच्चे शिक्षक को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रहना चाहिए। जब शिक्षक व्यावहारिक और नैतिक शिक्षा देंगे, तभी शिक्षक दिवस मनाने की सार्थकता सिद्ध होगी।
​कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में क्षेत्रीय विधायक माननीय योगेश्वर राजू सिंहा की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिन्होंने शिक्षकों के राष्ट्र निर्माण में योगदान की मुक्तकंठ से सराहना की।

​परमपिता परमात्मा ही सर्वश्रेष्ठ शिक्षक: बीके प्रीति दीदी

​सेवाकेंद्र संचालिका ब्रह्माकुमारी प्रीति दीदी ने अपने आशीर्वचन में कहा कि इस सृष्टि का सबसे महान और सच्चा शिक्षक वह परमपिता परमात्मा ही है। राजयोग मेडिटेशन के नियमित अभ्यास से हम ईश्वर से जुड़कर अपने भीतर दिव्य संस्कारों का समावेश कर सकते हैं। इससे समाज में एक श्रेष्ठ शिक्षक और अनुशासित विद्यार्थी का सुंदर उदाहरण प्रस्तुत किया जा सकता है।
​कार्यक्रम के समापन अवसर पर उपस्थित सभी सम्मानित शिक्षकों एवं अतिथियों को ईश्वरीय सौगात और प्रसाद भेंट कर उनका आभार व्यक्त किया गया।