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महाघोटाले की ‘खट्टी’ पंचायत: सफाई के नाम पर 25 लाख का बंदरबांट, सरपंच पति का ‘अवैध कब्जा’, प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल!

महाघोटाले की ‘खट्टी’ पंचायत: सफाई के नाम पर 25 लाख का बंदरबांट, सरपंच पति का ‘अवैध कब्जा’, प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल!

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
​महासमुंद। 25 जून 2026 जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत खट्टी इन दिनों भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के घेरे में है। 24 जून को आयोजित ग्राम सभा उस समय अखाड़े में तब्दील हो गई, जब ग्रामीणों और पंचों ने सरपंच श्रीमती अनिता मोती मेहर के कार्यकाल में हुई कथित अनियमितताओं की पोल खोलते हुए तीखे सवाल खड़े किए। यह ग्राम सभा विकास कार्यों की समीक्षा के बजाय सरपंच के पति के हस्तक्षेप और लाखों रुपये के गबन के आरोपों पर केंद्रित रही।

​सफाई के नाम पर 25 लाख का गबन, धरातल पर केवल गंदगी का साम्राज्य

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​ग्राम सभा में सबसे बड़ा हंगामा ‘सफाई मद’ में खर्च की गई राशि को लेकर हुआ। ग्रामीणों के तीखे तेवरों ने प्रशासन को भी हैरत में डाल दिया। पंचों का आरोप है कि बीते समय में सफाई के नाम पर सरकारी खजाने से 25 लाख रुपये से अधिक की राशि निकाली जा चुकी है, लेकिन गांव की गलियां और नालियां आज भी गंदगी से पटी पड़ी हैं। ग्रामीणों ने इसे सीधे तौर पर सरकारी धन का दुरुपयोग और बड़ा घोटाला करार दिया है।

इसे भी पढ़े

​सरपंच पति का ‘पंचायत दरबार’, नियमों की उड़ाई जा रही धज्जियां

​विवाद का एक मुख्य केंद्र सरपंच के पति हैं, जो स्वयं खैरा पंचायत में सचिव के पद पर तैनात हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि वे अपनी ड्यूटी छोड़कर खट्टी पंचायत के हर प्रशासनिक निर्णय, बैठक और वित्तीय कामकाज में अवैध रूप से हस्तक्षेप कर रहे हैं। पंचायती राज अधिनियम के तहत निर्वाचित प्रतिनिधि के कार्य में बाहरी व्यक्ति का यह हस्तक्षेप न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था पर भी बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है।

​व्यावसायिक परिसर में ‘चखना सेंटर’, सरकारी स्कूल-अस्पताल के पास खिलवाड़

​पंचायत द्वारा बनाए गए व्यावसायिक परिसर को लेकर भी गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। बिना किसी आधिकारिक प्रस्ताव या नीलामी प्रक्रिया के, एक व्यक्ति को दुकान आवंटित कर वहां ‘चखना सेंटर’ संचालित करवाया जा रहा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह परिसर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और सरकारी स्कूल के अत्यंत निकट है। यहाँ फैली गंदगी, शराब की बोतलों और डिस्पोजल के कचरे से विद्यार्थियों और मरीजों का स्वास्थ्य खतरे में है।

​आंगनबाड़ी तक पहुंचना हुआ दूभर, बदबू और गंदगी के बीच मासूम

​पूर्व सरपंच की गली में स्थित आंगनबाड़ी केंद्र के बाहर का नजारा बेहद भयावह है। नाली निकासी बंद होने के कारण गंदा पानी जमा रहता है और चारों ओर सड़ांध फैली हुई है। नन्हे-मुन्ने बच्चे इसी दूषित माहौल से गुजरकर शिक्षा लेने को मजबूर हैं। साथ ही, क्षेत्र में महीनों से बंद पड़ा बोर खनन का अधूरा काम पंचायत की सुस्त कार्यप्रणाली और लापरवाही की कहानी खुद बयां कर रहा है।

​ग्रामीणों की चेतावनी “कार्रवाई नहीं तो होगा बड़ा आंदोलन”

​ग्राम सभा में आक्रोशित ग्रामीणों और पंचों ने एक सुर में उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच की मांग की है। ग्रामीणों ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि जिला प्रशासन ने इन अनियमितताओं की गहन जांच कर दोषी सरपंच, उनके पति और मिलीभगत करने वाले अधिकारियों पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई नहीं की, तो वे इसे लेकर प्रदेश स्तर पर उग्र आंदोलन करने को बाध्य होंगे।

​प्रशासन के लिए बड़ा सवाल

आखिर 25 लाख रुपये की सफाई राशि कहां गई? और एक सरकारी कर्मचारी (सचिव) को सरपंच के कार्यों में हस्तक्षेप करने की अनुमति किसने दी? खट्टी पंचायत के लोग अब सिर्फ जांच का आश्वासन नहीं, बल्कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई देखना चाहते हैं।

ग्राम पंचायत खट्टी का मामला संज्ञान में आया है जिसकी शिकायत को लेकर मै जिला सी ई ओ को कार्यवाही पंचायत अधिनियम की बिंदुवार जांच कर कार्यवाही करे।

विनय कुमार लंगेह
​कलेक्टर जिला महासमुंद छत्तीसगढ़

महाघोटाले की ‘खट्टी’ पंचायत: सफाई के नाम पर 25 लाख का बंदरबांट, सरपंच पति का ‘अवैध कब्जा’, प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल!

महाघोटाले की ‘खट्टी’ पंचायत: सफाई के नाम पर 25 लाख का बंदरबांट, सरपंच पति का ‘अवैध कब्जा’, प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल!रिपोर्टर मयंक गुप्ता महासमुंद। 25 जून 2026 जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत खट्टी इन दिनों भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के घेरे में है। 24 जून को आयोजित ग्राम सभा उस समय अखाड़े में तब्दील हो गई, जब ग्रामीणों और पंचों ने सरपंच श्रीमती अनिता मोती मेहर के कार्यकाल में हुई कथित अनियमितताओं की पोल खोलते हुए तीखे सवाल खड़े किए। यह ग्राम सभा विकास कार्यों की समीक्षा के बजाय सरपंच के पति के हस्तक्षेप और लाखों रुपये के गबन के आरोपों पर केंद्रित रही।सफाई के नाम पर 25 लाख का गबन, धरातल पर केवल गंदगी का साम्राज्यग्राम सभा में सबसे बड़ा हंगामा ‘सफाई मद’ में खर्च की गई राशि को लेकर हुआ। ग्रामीणों के तीखे तेवरों ने प्रशासन को भी हैरत में डाल दिया। पंचों का आरोप है कि बीते समय में सफाई के नाम पर सरकारी खजाने से 25 लाख रुपये से अधिक की राशि निकाली जा चुकी है, लेकिन गांव की गलियां और नालियां आज भी गंदगी से पटी पड़ी हैं। ग्रामीणों ने इसे सीधे तौर पर सरकारी धन का दुरुपयोग और बड़ा घोटाला करार दिया है।सरपंच पति का ‘पंचायत दरबार’, नियमों की उड़ाई जा रही धज्जियांविवाद का एक मुख्य केंद्र सरपंच के पति हैं, जो स्वयं खैरा पंचायत में सचिव के पद पर तैनात हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि वे अपनी ड्यूटी छोड़कर खट्टी पंचायत के हर प्रशासनिक निर्णय, बैठक और वित्तीय कामकाज में अवैध रूप से हस्तक्षेप कर रहे हैं। पंचायती राज अधिनियम के तहत निर्वाचित प्रतिनिधि के कार्य में बाहरी व्यक्ति का यह हस्तक्षेप न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था पर भी बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है।व्यावसायिक परिसर में ‘चखना सेंटर’, सरकारी स्कूल-अस्पताल के पास खिलवाड़पंचायत द्वारा बनाए गए व्यावसायिक परिसर को लेकर भी गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। बिना किसी आधिकारिक प्रस्ताव या नीलामी प्रक्रिया के, एक व्यक्ति को दुकान आवंटित कर वहां ‘चखना सेंटर’ संचालित करवाया जा रहा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह परिसर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और सरकारी स्कूल के अत्यंत निकट है। यहाँ फैली गंदगी, शराब की बोतलों और डिस्पोजल के कचरे से विद्यार्थियों और मरीजों का स्वास्थ्य खतरे में है।आंगनबाड़ी तक पहुंचना हुआ दूभर, बदबू और गंदगी के बीच मासूमपूर्व सरपंच की गली में स्थित आंगनबाड़ी केंद्र के बाहर का नजारा बेहद भयावह है। नाली निकासी बंद होने के कारण गंदा पानी जमा रहता है और चारों ओर सड़ांध फैली हुई है। नन्हे-मुन्ने बच्चे इसी दूषित माहौल से गुजरकर शिक्षा लेने को मजबूर हैं। साथ ही, क्षेत्र में महीनों से बंद पड़ा बोर खनन का अधूरा काम पंचायत की सुस्त कार्यप्रणाली और लापरवाही की कहानी खुद बयां कर रहा है।ग्रामीणों की चेतावनी “कार्रवाई नहीं तो होगा बड़ा आंदोलन”ग्राम सभा में आक्रोशित ग्रामीणों और पंचों ने एक सुर में उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच की मांग की है। ग्रामीणों ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि जिला प्रशासन ने इन अनियमितताओं की गहन जांच कर दोषी सरपंच, उनके पति और मिलीभगत करने वाले अधिकारियों पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई नहीं की, तो वे इसे लेकर प्रदेश स्तर पर उग्र आंदोलन करने को बाध्य होंगे।प्रशासन के लिए बड़ा सवाल आखिर 25 लाख रुपये की सफाई राशि कहां गई? 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और एक सरकारी कर्मचारी (सचिव) को सरपंच के कार्यों में हस्तक्षेप करने की अनुमति किसने दी? खट्टी पंचायत के लोग अब सिर्फ जांच का आश्वासन नहीं, बल्कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई देखना चाहते हैं।ग्राम पंचायत खट्टी का मामला संज्ञान में आया है जिसकी शिकायत को लेकर मै जिला सी ई ओ को कार्यवाही पंचायत अधिनियम की बिंदुवार जांच कर कार्यवाही करे।विनय कुमार लंगेह कलेक्टर जिला महासमुंद छत्तीसगढ़

मौत के ‘स्कूल’ में कैद मासूम..! महासमुंद के श्रद्धा पब्लिक स्कूल में बरती जा रही जानलेवा लापरवाही, प्रशासन मौन…!

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
​महासमुंद / 22 जून 2026 दिन रविवार (छत्तीसगढ़) क्या महासमुंद जिला प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतज़ार कर रहा है? पटेवा और पिथौरा में संचालित ‘श्रद्धा पब्लिक स्कूल’ शिक्षा का मंदिर नहीं, बल्कि एक ‘डेथ ट्रैप’ (मौत का जाल) बन चुका है। जहाँ एक ओर देश अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मना रहा है, वहीं इस स्कूल में मासूमों की सुरक्षा को ताक पर रखकर बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।

​जर्जर भवन और बुनियादी सुविधाओं का अकाल

​स्कूल के नाम पर केवल कमाई का धंधा चल रहा है। पटेवा की शाखा एक व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स के अंदर संचालित है, जहाँ न तो बच्चों के लिए सुरक्षित प्रवेश द्वार है और न ही स्वच्छ शौचालय। वहीं पिथौरा (रावण भाटा वार्ड) के मुख्य ब्रांच की हालत और भी भयानक है। यहाँ की जर्जर छतें किसी भी वक्त काल बनकर मासूमों पर गिर सकती हैं। न खेलने के लिए मैदान है और न ही पीने के लिए शुद्ध पानी। आखिर प्रशासन ने ऐसे भवन को स्कूल चलाने की अनुमति कैसे दी..?

​सड़कों पर दौड़ रही ‘मौत की सवारियां’

​सबसे चौंकाने वाली बात है स्कूल की बसों की स्थिति। अभिभावकों के जीवन भर की कमाई से फीस लेने वाला प्रबंधन बच्चों की जान बचाने के लिए बीमा (Insurance) तक कराने को तैयार नहीं है।

​वाहन CG04HS6939: इसका बीमा जून 2023 में ही समाप्त हो चुका है। पेट्रोल गाड़ी में अवैध रूप से गैस किट लगाकर परिवहन विभाग की आंखों में धूल झोंकी जा रही है।

​वाहन CG06GB5823: यह गाड़ी फरवरी 2023 से बिना बीमा के पिथौरा की सड़कों पर दौड़ रही है।

​यह सीधे तौर पर मोटर वाहन अधिनियम और शिक्षा विभाग के नियमों का उल्लंघन है। क्या प्रशासन को इन गाड़ियों पर पुलिसिया कार्रवाई करने के लिए किसी बड़ी दुर्घटना का इंतज़ार है..?

​अभिभावकों की मजबूरी और प्रबंधन की दादागिरी

​अभिभावकों ने आरोप लगाया है कि स्कूल संचालक फीस के नाम पर वसूली कर रहे हैं। विरोध करने पर बच्चों की टीसी (TC) और मार्कशीट रोकने की धमकी दी जाती है। स्कूल प्रशासन का खुला कहना है कि “मेरी पहुंच ऊपर तक है, जो उखाड़ना है उखाड़ लो।” क्या स्कूल संचालक कानून से ऊपर हैं..?

​प्रशासन को सीधे चेतावनी अब नहीं जागे तो जनता जागेगी

​यह मामला केवल कुछ सुविधाओं का नहीं, बल्कि सैकड़ों बच्चों के जीवन का है। जनता और अभिभावकों की ओर से जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) महासमुंद से सख्त मांग है।

1 ​तत्काल प्रभाव से स्कूल की दोनों शाखाओं की मान्यता रद्द की जाए।

2 ​बिना बीमा और दस्तावेजों वाली बसों को तत्काल जब्त कर स्कूल प्रबंधन पर FIR दर्ज हो।

3 ​स्कूल भवन की सुरक्षा ऑडिट कराई जाए और नियमों के उल्लंघन पर सील करने की कार्रवाई हो।

4 ​अभिभावकों से जबरन वसूली गई अतिरिक्त फीस वापस करवाई जाए।

​अभिभावकों के लिए संदेश

अपने बच्चों की सुरक्षा के प्रति सजग रहें। यदि प्रशासन इस लापरवाही पर तुरंत संज्ञान नहीं लेता है, तो अभिभावकों को सड़कों पर उतरकर अपने बच्चों के हक और सुरक्षा के लिए आंदोलन करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा।

​क्या जिला प्रशासन की नींद टूटेगी, या किसी हादसे के बाद फाइलें खुलेंगी..?

खल्लारी मंदिर पर मौत का साया! जर्जर रोपवे टूटा, श्रद्धा की राह में मौत का झूला… एक जान गई, पाँच जिंदगियाँ मौत से लड़ रही हैं! प्रशासन-ट्रस्टी की लापरवाही ने ली मासूम की जान

महासमुंद (रिपोर्टर मयंक गुप्ता): चैत्र नवरात्र के पावन पर्व पर माता खल्लारी के दरबार में श्रद्धालुओं का ताँता लगा हुआ था। पहाड़ की चोटी पर स्थित मंदिर तक पहुँचने का एकमात्र सहारा—वो पुराना रोपवे—आज मौत का झूला बन गया। अचानक तार टूटा, केबिन नीचे गिरा… और एक पल में छह परिवारों की दुनिया उजड़ गई। एक महिला की जान चली गई, पाँच अन्य गंभीर रूप से घायल हैं। पूरा इलाका गुस्से और दर्द से भरा हुआ है।

क्या हुआ था हादसा?

जिले से करीब 30 किलोमीटर दूर ग्राम खल्लारी में माता के दर्शन के लिए उमड़ रहे हजारों श्रद्धालुओं में से छह लोग रोपवे में सवार हुए। केबिन ऊपर चढ़ ही रहा था कि अचानक स्टील का मेन तार चटख गया। बिना किसी चेतावनी के केबिन अनियंत्रित होकर तेजी से नीचे गिर पड़ा। हादसा इतना भयानक था कि केबिन के अंदर मौजूद सभी श्रद्धालु बुरी तरह घायल हो गए।

घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय लोग दौड़ पड़े। घायलों को तुरंत बागबाहरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुँचाया गया। वहाँ डॉक्टरों की तत्काल कोशिशों के बावजूद एक महिला की मौत हो गई। बाकी पाँच घायलों की हालत अभी भी नाजुक बनी हुई है—कई की हड्डियाँ टूटी हैं, खून बह रहा है और आशंका है कि कुछ की हालत और बिगड़ सकती है।

बड़ा सवाल—आखिर जिम्मेदार कौन?

स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि खल्लारी मंदिर का यह रोपवे सालों पुराना और पूरी तरह जर्जर हो चुका था। बार-बार मरम्मत, नियमित तकनीकी जांच और सुरक्षा प्रमाण-पत्र की माँग की गई, लेकिन मंदिर ट्रस्टी और प्रशासन ने इसे लगातार नजरअंदाज किया। कोई फिटनेस सर्टिफिकेट, कोई वार्षिक ऑडिट, कोई इमरजेंसी प्रोटोकॉल… कुछ भी नहीं था।

लोग पूछ रहे हैं—

चैत्र नवरात्र जैसे बड़े पर्व पर हजारों श्रद्धालु रोजाना आते हैं, फिर भी रोपवे को बिना चेक किए चालू रखने की इजाजत किसने दी?

मंदिर ट्रस्टी ने पिछले कई सालों से मिले फंड का इस्तेमाल रोपवे की मरम्मत पर क्यों नहीं किया?

जिला प्रशासन और पर्यटन विभाग ने इतने खतरनाक रोपवे को बंद करने का आदेश क्यों नहीं दिया?

यह हादसा कोई अचानक दुर्घटना नहीं, बल्कि लंबे समय से चली आ रही लापरवाही का नतीजा है। आस्था के नाम पर लोगों की जान से खेला गया।

आक्रोश और माँगें

हादसे के बाद खल्लारी और आसपास के गाँवों में भारी गुस्सा फूट पड़ा है। सैकड़ों लोग सड़क पर उतर आए। उन्होंने मंदिर ट्रस्टी, जिला कलेक्टर और पुलिस पर सख्त कार्रवाई की माँग की है।

मुख्य माँगें:

दोषी अधिकारियों और ट्रस्टी पर तत्काल मुकदमा दर्ज हो

रोपवे की पूरी जांच हो और दोषियों को जेल भेजा जाए

मृतक परिवार को 20 लाख रुपये का मुआवजा और घायलों को उचित इलाज व मुआवजा

तुरंत नए और सुरक्षित रोपवे का निर्माण शुरू किया जाए

निष्कर्ष—सिस्टम की नाकामी का सबक

यह सिर्फ एक रोपवे का हादसा नहीं है। यह उस सिस्टम की नाकामी है जो आस्था को कमाई का जरिया समझती है, लेकिन सुरक्षा को तुच्छ मानती है। हर साल नवरात्र में लाखों श्रद्धालु पहाड़ चढ़ते हैं। क्या हर बार मौत का इंतजार करना पड़ेगा? क्या अब भी जिम्मेदार लोग सिर्फ बयान देंगे और मामला ठंडे बस्ते में चला जाएगा?

अब समय है सख्ती का।

अगर आज कार्रवाई नहीं हुई तो कल कोई और माँ-बहन, कोई और बेटा इसी मौत के झूले पर सवार हो सकता है।

माता खल्लारी की जय… लेकिन अब सुरक्षा भी चाहिए!

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 महासमुंद (रिपोर्टर मयंक गुप्ता): चैत्र नवरात्र के पावन पर्व पर माता खल्लारी के दरबार में श्रद्धालुओं का ताँता लगा हुआ था। पहाड़ की चोटी पर स्थित मंदिर तक पहुँचने का एकमात्र सहारा—वो पुराना रोपवे—आज मौत का झूला बन गया। अचानक तार टूटा, केबिन नीचे गिरा… और एक पल में छह परिवारों की दुनिया उजड़ गई। एक महिला की जान चली गई, पाँच अन्य गंभीर रूप से घायल हैं। पूरा इलाका गुस्से और दर्द से भरा हुआ है।

क्या हुआ था हादसा?

जिले से करीब 30 किलोमीटर दूर ग्राम खल्लारी में माता के दर्शन के लिए उमड़ रहे हजारों श्रद्धालुओं में से छह लोग रोपवे में सवार हुए। केबिन ऊपर चढ़ ही रहा था कि अचानक स्टील का मेन तार चटख गया। बिना किसी चेतावनी के केबिन अनियंत्रित होकर तेजी से नीचे गिर पड़ा। हादसा इतना भयानक था कि केबिन के अंदर मौजूद सभी श्रद्धालु बुरी तरह घायल हो गए।

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बड़ा सवाल—आखिर जिम्मेदार कौन?

स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि खल्लारी मंदिर का यह रोपवे सालों पुराना और पूरी तरह जर्जर हो चुका था। बार-बार मरम्मत, नियमित तकनीकी जांच और सुरक्षा प्रमाण-पत्र की माँग की गई, लेकिन मंदिर ट्रस्टी और प्रशासन ने इसे लगातार नजरअंदाज किया। कोई फिटनेस सर्टिफिकेट, कोई वार्षिक ऑडिट, कोई इमरजेंसी प्रोटोकॉल… कुछ भी नहीं था।

लोग पूछ रहे हैं—

चैत्र नवरात्र जैसे बड़े पर्व पर हजारों श्रद्धालु रोजाना आते हैं, फिर भी रोपवे को बिना चेक किए चालू रखने की इजाजत किसने दी?

मंदिर ट्रस्टी ने पिछले कई सालों से मिले फंड का इस्तेमाल रोपवे की मरम्मत पर क्यों नहीं किया?

जिला प्रशासन और पर्यटन विभाग ने इतने खतरनाक रोपवे को बंद करने का आदेश क्यों नहीं दिया?

यह हादसा कोई अचानक दुर्घटना नहीं, बल्कि लंबे समय से चली आ रही लापरवाही का नतीजा है। आस्था के नाम पर लोगों की जान से खेला गया।

आक्रोश और माँगें

हादसे के बाद खल्लारी और आसपास के गाँवों में भारी गुस्सा फूट पड़ा है। सैकड़ों लोग सड़क पर उतर आए। उन्होंने मंदिर ट्रस्टी, जिला कलेक्टर और पुलिस पर सख्त कार्रवाई की माँग की है।

मुख्य माँगें:

दोषी अधिकारियों और ट्रस्टी पर तत्काल मुकदमा दर्ज हो

रोपवे की पूरी जांच हो और दोषियों को जेल भेजा जाए

मृतक परिवार को 20 लाख रुपये का मुआवजा और घायलों को उचित इलाज व मुआवजा

तुरंत नए और सुरक्षित रोपवे का निर्माण शुरू किया जाए

निष्कर्ष—सिस्टम की नाकामी का सबक

यह सिर्फ एक रोपवे का हादसा नहीं है। यह उस सिस्टम की नाकामी है जो आस्था को कमाई का जरिया समझती है, लेकिन सुरक्षा को तुच्छ मानती है। हर साल नवरात्र में लाखों श्रद्धालु पहाड़ चढ़ते हैं। क्या हर बार मौत का इंतजार करना पड़ेगा? क्या अब भी जिम्मेदार लोग सिर्फ बयान देंगे और मामला ठंडे बस्ते में चला जाएगा?


अब समय है सख्ती का।

अगर आज कार्रवाई नहीं हुई तो कल कोई और माँ-बहन, कोई और बेटा इसी मौत के झूले पर सवार हो सकता है।

माता खल्लारी की जय… लेकिन अब सुरक्षा भी चाहिए!

(No Title)

 खल्लारी पहाड़ पर मौत का झूला! जर्जर रोपवे टूटा, महिला की मौत – प्रशासन की लापरवाही ने ली जान..?

रिपोर्टर मयंक गुप्ता 

महासमुंद। जिले से लगभग 30 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम खल्लारी में चैत्र नवरात्र के पावन अवसर पर उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब माता खल्लारी पहाड़ पर श्रद्धालुओं को ले जा रहा रोपवे अचानक हादसे का शिकार हो गया। श्रद्धा और आस्था के इस सफर ने कुछ ही पलों में भयावह रूप ले लिया।

बताया जा रहा है कि माता दर्शन के लिए 6 श्रद्धालु रोपवे में सवार होकर पहाड़ की ओर जा रहे थे। इसी दौरान अचानक रोपवे का तार टूट गया, जिससे केबिन अनियंत्रित होकर नीचे गिर पड़ा। हादसा इतना भीषण था कि उसमें सवार सभी लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।

घटना के बाद तत्काल घायलों को बागबाहरा स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान एक महिला की मौत हो गई। अन्य घायलों की हालत अब भी नाजुक बताई जा रही है, जिससे पूरे क्षेत्र में दहशत और आक्रोश का माहौल है।

 बड़ा सवाल – आखिर जिम्मेदार कौन..?

स्थानीय सूत्रों और ग्रामीणों का कहना है कि खल्लारी मंदिर में लगा रोपवे काफी पुराना और जर्जर स्थिति में था। कई बार इसकी मरम्मत और जांच की मांग उठी, लेकिन जिम्मेदार विभाग ने इसे नजरअंदाज किया। नतीजा आज सबके सामने है—एक श्रद्धालु की जान चली गई और कई जिंदगी मौत से जूझ रही हैं।

आस्था के नाम पर लापरवाही का खेल!

चैत्र नवरात्र जैसे बड़े पर्व में जहां हजारों श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं, वहां इस तरह की लापरवाही सीधे-सीधे प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े करती है। क्या बिना फिटनेस और सुरक्षा जांच के रोपवे का संचालन किया जा रहा था? अगर हां, तो यह किसी आपराधिक लापरवाही से कम नहीं।

मांग उठी – हो सख्त कार्रवाई

घटना के बाद ग्रामीणों और श्रद्धालुओं में भारी आक्रोश है। दोषियों पर कड़ी कार्रवाई, रोपवे की जांच और मृतक के परिजनों को उचित मुआवजा देने की मांग जोर पकड़ रही है।

 निष्कर्ष

यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सिस्टम की नाकामी का जीता-जागता उदाहरण है। सवाल यही है—क्या अब भी जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी या फिर हर बार की तरह मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?

“नकल का नेक्सस” उजागर..! मोंगरापाली ओपन परीक्षा केन्द्र पर व्हाइट बोर्ड से ‘पास कराने’ का खेल, लाखों की उगाही के आरोप से मचा हड़कंप

रिपोर्टर मयंक गुप्ता 

महासमुंद (छत्तीसगढ़)।

जिले के बागबाहरा क्षेत्र के छोटे से गांव मोंगरापाली में स्थित एक शासकीय स्कूल इन दिनों गंभीर आरोपों के चलते सुर्खियों में है। यहां संचालित छत्तीसगढ़ राज्य ओपन स्कूल का परीक्षा केन्द्र क्रमांक 0614 कथित रूप से नकल और अवैध वसूली के बड़े नेटवर्क का केंद्र बन गया है। आरोप केवल नकल तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पैसे लेकर परीक्षार्थियों को पास कराने के संगठित खेल की ओर इशारा करते हैं।

परीक्षा केन्द्र या ‘पास कराने की फैक्ट्री’..?

मोंगरापाली के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में संचालित इस केन्द्र को लेकर स्थानीय स्तर पर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। आरोप है कि यहां परीक्षा के दौरान खुलेआम नकल करवाई जाती थी।

बताया जा रहा है कि परीक्षार्थियों को पहले से सेटिंग के तहत बुलाया जाता था और परीक्षा के समय व्हाइट बोर्ड पर उत्तर लिखकर उन्हें कॉपी कराया जाता था।

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, यह पूरा सिस्टम सुनियोजित तरीके से चलता था, जहां पढ़ाई या योग्यता से ज्यादा महत्व पैसे को दिया जाता था।

 ‘पास कराने’ के नाम पर लाखों की वसूली..!

मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू आर्थिक लेन-देन से जुड़ा है। आरोप हैं कि केन्द्र से जुड़े कुछ जिम्मेदार लोग परीक्षार्थियों से मोटी रकम लेकर उन्हें पास कराने का भरोसा देते थे।

अनुमान लगाया जा रहा है कि इस कथित खेल के जरिए हर साल 20 से 25 लाख रुपये तक की वसूली की जाती थी।

दूर-दराज के जिलों से भी छात्रों को यहां परीक्षा दिलाने के लिए लाया जाता था, जिससे यह मामला और भी गंभीर बन जाता है।

 शिकायत के बाद पलटी कहानी

इस पूरे प्रकरण ने तब तूल पकड़ा जब स्कूल के कुछ शिक्षकों द्वारा उच्च स्तर पर शिकायत की गई। मामला लोक शिक्षण संचालनालय, रायपुर तक पहुंचा, जिसके बाद विभाग में हलचल मच गई।

लेकिन जांच की प्रक्रिया शुरू होते ही घटनाक्रम ने अचानक मोड़ ले लिया। शिकायत करने वाले ही अपने बयान से पीछे हट गए और लिखित में शिकायत से इनकार कर दिया।

इस यू-टर्न ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं—

क्या शिकायतकर्ताओं पर दबाव डाला गया?

या फिर मामला किसी प्रभावशाली नेटवर्क से जुड़ा हुआ है..?

 जांच में जुटा शिक्षा विभाग

मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला शिक्षा अधिकारी विजय लहरे ने टीम के साथ परीक्षा केन्द्र का निरीक्षण किया।

करीब दो घंटे तक चली जांच के दौरान उत्तर पुस्तिकाओं को सील कर सुरक्षित रूप से थाना में जमा कराया गया।

अधिकारियों के मुताबिक, जिले के अन्य ओपन परीक्षा केन्द्रों की भी जांच की जा रही है और इस मामले में उच्च स्तर से निर्देश मिलने की बात कही गई है।

उठते सवाल, जवाब का इंतजार

इस पूरे घटनाक्रम ने कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं—

यदि यह गड़बड़ी लंबे समय से चल रही थी, तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

क्या इसमें बड़े स्तर पर मिलीभगत शामिल है?

शिकायतकर्ताओं के पीछे हटने के पीछे असली वजह क्या है..?

 शिक्षा व्यवस्था पर गहरा असर

ओपन स्कूल प्रणाली उन विद्यार्थियों के लिए उम्मीद का जरिया होती है, जो किसी कारणवश नियमित पढ़ाई नहीं कर पाते।

लेकिन यदि इसी व्यवस्था में पैसे के दम पर परिणाम तय होने लगें, तो यह न केवल शिक्षा की विश्वसनीयता को कमजोर करता है, बल्कि समाज के भविष्य को भी प्रभावित करता है।

आगे क्या..?

फिलहाल प्रशासनिक जांच जारी है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या इस मामले में ठोस कार्रवाई होती है या यह मामला भी कागजों में सिमट कर रह जाएगा।

यह भी जांच का विषय है कि मामला केवल एक केन्द्र तक सीमित है या फिर किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा—जिसका खुलासा आने वाले दिनों में हो सकता है।

रोजगार से जुड़कर महिलाएं बदल रहीं अपनी पहचान – डॉ. एकता लंगेह

महासमुंद / ग्राम बावनकेरा में महिला सशक्तिकरण कार्यक्रम का सफल आयोजन ग्राम पंचायत के माध्यम से किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता के छायाचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. एकता लंगेह उपस्थित रहीं। कार्यक्रम में जनपद अध्यक्ष महासमुन्द दिशा रामस्वरूप दीवान, सभापति जनपद पंचायत महासमुन्द  धनेश गायकवाड, सरपंच गोपाल सिंह ध्रुव, उपसरपंच द्रोण चंद्राकर, पूर्व सरपंच नीलिमा चंद्राकर सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं ग्रामीण उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के दौरान महिलाओं ने अपने रोजगार एवं स्वरोजगार से जुड़े अनुभव मंच पर साझा किए। महिलाओं को शासन की विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत कम ब्याज दर पर ऋण लेकर आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया गया। ग्राम संगठन “दिव्या महिला समूह” की महिलाओं को उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया गया।

इसके साथ ही, शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को भी सम्मानित किया गया। मुख्य अतिथि डॉ. एकता लंगेह ने महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि महिलाएं स्वयं को कमजोर न समझें, बल्कि सशक्त बनकर परिवार एवं समाज को मजबूत करें।

कार्यक्रम में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। तुलसी यादव, हिना सिन्हा, लता ध्रुव, राधिका, उर्मिला, सरस्वती, खुशबू एवं हेमवती यादव के द्वारा सहित अन्य महिलाओं ने शासकीय योजनाओं पर खुलकर चर्चा की।

अंत में, छिंदोली की बालिकाओं द्वारा छत्तीसगढ़ी लोक नृत्य की आकर्षक प्रस्तुति दी गई, जिसने कार्यक्रम में सांस्कृतिक रंग भर दिया।

ईरान-इजरायल तनाव की आंच महासमुंद तक गैस की किल्लत में फुटपाथ दुकानदारों पर खाद्य विभाग का छापा

कमर्शियल गैस गायब, घरेलू सिलेंडर जब्त महासमुंद में कार्रवाई से छोटे व्यापारी नाराज़
रिपोर्टर मयंक गुप्ता 
महासमुंद। मध्य-पूर्व में चल रहे युद्ध का असर अब धीरे-धीरे भारत के स्थानीय बाजारों तक भी पहुंचने लगा है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार व्यवस्था प्रभावित हो रही है। विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाली कच्चे तेल, एलएनजी और उर्वरकों की सप्लाई बाधित होने से कई देशों की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा है। भारत भी इससे अछूता नहीं है और इसका असर आम लोगों की जेब पर साफ दिखाई देने लगा है।
ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने से घरेलू और व्यावसायिक गैस सिलेंडरों की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जानकारी के अनुसार घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में लगभग ₹60 और कमर्शियल सिलेंडर में करीब ₹115 तक की वृद्धि देखी गई है। इसके साथ ही समुद्री परिवहन महंगा होने के कारण अंतरराष्ट्रीय व्यापार की लागत भी बढ़ गई है, जिससे कई वस्तुओं के दाम बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

ईंधन और उर्वरक आपूर्ति पर असर
मध्य-पूर्व क्षेत्र वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का प्रमुख केंद्र माना जाता है। वहां तनाव बढ़ने से कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की सप्लाई पर असर पड़ रहा है। भारत अपनी उर्वरक जरूरतों के लिए भी खाड़ी देशों पर काफी हद तक निर्भर है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि यह स्थिति लंबी चली तो पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी, एलपीजी की उपलब्धता में कमी और कृषि क्षेत्र में उर्वरकों की किल्लत जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।
होटल-रेस्टोरेंट और छोटे कारोबारियों पर दबाव
कमर्शियल गैस सिलेंडरों की कमी का असर होटल, रेस्टोरेंट, मैस और छोटे खाद्य व्यवसायों पर भी पड़ रहा है। कई जगहों पर सिलेंडर की आपूर्ति बाधित होने से संचालकों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। राजस्थान के कोटा सहित कई शहरों में ऐसी स्थिति सामने आ चुकी है।
महासमुंद में भी दिखने लगा असर
वैश्विक परिस्थितियों के बीच महासमुंद जिले में भी गैस की कमी का असर देखने को मिल रहा है। बताया जा रहा है कि 5 मार्च के बाद से कई स्थानों पर कमर्शियल गैस सिलेंडर गोदामों में उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। ऐसे में फुटपाथ पर भोजन और नाश्ता बेचकर जीवनयापन करने वाले छोटे व्यवसायियों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
सिलेंडर की कमी के कारण कई फुटपाथ व्यवसायियों ने मजबूरी में घरेलू गैस सिलेंडर का उपयोग कर अपना काम चलाने की कोशिश की। इसी बीच बुधवार को खाद्य विभाग की टीम ने शहर के विभिन्न स्थानों पर अचानक दबिश देकर कई दुकानों से घरेलू गैस सिलेंडर जब्त करने की कार्रवाई की।
व्यापारियों में नाराजगी
कार्रवाई के बाद छोटे व्यापारियों में नाराजगी देखने को मिली। उनका कहना है कि जब कमर्शियल गैस सिलेंडर बाजार में उपलब्ध ही नहीं हैं, तो मजबूरी में घरेलू सिलेंडर का उपयोग करना पड़ रहा है। ऐसे समय में विभागीय कार्रवाई उनके रोज़गार पर सीधा असर डाल रही है।
खाद्य अधिकारी ने कहा – ऊपर से आया आदेश
इस संबंध में जब जिला खाद्य अधिकारी अजय कुमार यादव से संपर्क किया गया तो उन्होंने बताया कि कार्रवाई उच्च अधिकारियों के निर्देश पर की गई है। उन्होंने आदेश की प्रति उपलब्ध कराने की बात कही, हालांकि समाचार लिखे जाने तक संबंधित आदेश की कॉपी उपलब्ध नहीं हो सकी थी।
स्थानीय व्यापारियों का आरोप है कि विभाग द्वारा बिना पूर्व सूचना कार्रवाई करना उचित नहीं है, खासकर उस समय जब गैस की उपलब्धता पहले से ही प्रभावित है। ऐसे में प्रशासन से छोटे कारोबारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए संतुलित निर्णय लेने की मांग की जा रही है।
बढ़ती महंगाई से आम जनता भी परेशान
वैश्विक स्तर पर तेल-गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर सीधे तौर पर आम नागरिकों की जिंदगी पर पड़ता है। परिवहन लागत बढ़ने से खाद्य पदार्थों और दैनिक उपयोग की वस्तुओं के दाम भी बढ़ने लगते हैं। ऐसे में यदि ऊर्जा आपूर्ति की स्थिति जल्द सामान्य नहीं हुई, तो महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है।

महासमुंद में ‘पुनर्वास से पुनर्जीवन’ की मिसाल: 15 सशस्त्र माओवादियों ने छोड़ी हिंसा की राह, तिरंगे और संविधान के सामने किया आत्मसमर्पण

 

महासमुंद। छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती महासमुंद जिले से एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक खबर सामने आई है। प्रतिबंधित संगठन भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) से जुड़े 15 सशस्त्र माओवादियों ने आज महासमुंद पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया। यह आत्मसमर्पण केवल संख्या का मामला नहीं, बल्कि हिंसा से शांति की ओर बढ़ते कदम का प्रतीक माना जा रहा है।

9 महिलाएं और 6 पुरुष शामिल

आत्मसमर्पण करने वालों में 9 महिलाएं और 6 पुरुष शामिल हैं। सुरक्षा अधिकारियों का मानना है कि यह घटनाक्रम इस बात का संकेत है कि संगठन के भीतर भी अब बदलाव की सोच पनप रही है, विशेषकर महिला सदस्यों के बीच, जो हिंसात्मक गतिविधियों से अलग होकर सामान्य जीवन की ओर लौटना चाहती हैं।

“पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” अभियान का असर

इस पूरे प्रयास को “पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” नाम दिया गया है। यह अभियान संवाद, विश्वास और पुनर्वास की नीति पर आधारित है। पुलिस द्वारा लगातार चलाए गए जनजागरूकता कार्यक्रम, आकाशवाणी के माध्यम से संदेश, बैनर-पोस्टर और पाम्पलेट वितरण ने माओवादी सदस्यों तक शासन की पुनर्वास नीति की जानकारी पहुंचाई।
सूत्रों के अनुसार, ये सभी सदस्य ओडिशा राज्य कमेटी के पश्चिमी सब-जोन के अंतर्गत बरगढ़-बलांगीर-महासमुंद डिवीजन में सक्रिय थे। वर्ष 2010 के बाद गठित इस संरचना ने सीमावर्ती क्षेत्रों में कई घटनाओं को अंजाम दिया था। हालांकि, बीते कुछ समय से संगठन के भीतर असंतोष और कठिन परिस्थितियों के कारण सदस्य मुख्यधारा में लौटने को इच्छुक थे।

तिरंगा, संविधान और गुलाब से स्वागत

आत्मसमर्पण कार्यक्रम रक्षित केंद्र परसदा परिसर में आयोजित किया गया। इस दौरान समर्पण करने वाले सदस्यों को तिरंगा झंडा, संविधान की प्रति और लाल गुलाब भेंट कर सम्मानित किया गया। यह प्रतीकात्मक पहल शांति, विश्वास और नए जीवन की शुरुआत का संदेश देती है।

कठिन जंगल जीवन बना कारण

जानकारी के मुताबिक, जंगलों में लगातार दबाव, परिवार से दूरी, बीमारियों की समस्या और भविष्य की अनिश्चितता ने इन सदस्यों को आत्मचिंतन के लिए प्रेरित किया। शासन की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति ने उन्हें सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन की राह दिखाई।

पश्चिमी सब-जोन का खात्मा

पुलिस अधिकारियों का दावा है कि इस आत्मसमर्पण के बाद ओडिशा स्टेट कमेटी का पश्चिमी सब-जोन पूरी तरह निष्क्रिय हो चुका है। साथ ही छत्तीसगढ़ के रायपुर पुलिस रेंज और ओडिशा के संबलपुर रेंज को भी नक्सल प्रभाव से मुक्त घोषित किए जाने की जानकारी दी गई है। इसे मार्च 2026 तक नक्सलवाद के समूल उन्मूलन के लक्ष्य की दिशा में एक अहम उपलब्धि माना जा रहा है।

पुनर्वास नीति के तहत मिलेगी सुविधाएं

शासन की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के अंतर्गत समर्पण करने वाले सदस्यों को पदानुसार प्रोत्साहन राशि, स्वास्थ्य सुविधा, आवास सहायता और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। अधिकारियों का कहना है कि पूर्व में आत्मसमर्पण कर चुके कई सदस्य आज अपने परिवार के साथ सामान्य और सम्मानजनक जीवन व्यतीत कर रहे हैं, जो अन्य सक्रिय सदस्यों के लिए प्रेरणा बन रहे हैं।

बदलाव की नई दस्तक

महासमुंद से सामने आई यह घटना केवल 15 लोगों के आत्मसमर्पण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस व्यापक परिवर्तन की ओर संकेत करती है जहां बंदूक की जगह संविधान को स्वीकार किया जा रहा है। सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और विकास की संभावनाएं अब और मजबूत होती दिखाई दे रही हैं।
अब निगाहें बस्तर और ओडिशा के अन्य संवेदनशील इलाकों पर हैं — क्या वहां सक्रिय बचे हुए सदस्य भी इसी राह को चुनेंगे? फिलहाल महासमुंद में आज का दिन शांति और पुनर्वास की दिशा में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में दर्ज हो गया है।