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जंगल के लुटेरों को लगा बिजली का करंट..! 149 हरे पेड़ों की हत्या करने वाले दो भाइयों को सीधे जेल, वन अधिकार पट्टा भी छिना

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुंद/पिथौरा 06 दिसंबर 2025 वन विभाग ने जंगल माफियाओं के खिलाफ जो ताबड़तोड़ एक्शन लिया है, उसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। पिथौरा रेंज के संरक्षित वन कक्ष क्रमांक 248 में दो सगे भाइयों ने मिलकर 0.61 हेक्टेयर जंगल को पूरी तरह बर्बाद कर दिया था। 149 हरे-भरे पेड़ों को कुल्हाड़ी से काटकर, जंगल साफ करके ये लोग उसे अपनी खेती में मिलाने की साजिश रच रहे थे। लेकिन वन विभाग की नजर उन पर पड़ी और 24 घंटे के अंदर इनका पूरा खेल खत्म!
आरोपी हैं।
मधुसूदन साहू
साधु साहू
(दोनों सगे भाई, पिता समारू साहू, ग्राम मेमरा, तहसील बसना)
इन दोनों को 2-3 साल पहले वन अधिकार अधिनियम के तहत 5-5 एकड़ पट्टा मिला था। लेकिन लालच ने इनकी अक्ल मार ली। अपने पट्टे से सटा संरक्षित जंगल धीरे-धीरे काटकर ये लोग उसे अपनी जमीन में मिलाने का प्लान बना रहे थे। इनकी इस हरकत से न सिर्फ 149 कीमती पेड़ नष्ट हुए, बल्कि जंगल में रहने वाले तेंदुआ, सांभर, जंगली मुर्गे समेत कई वन्यजीवों के घोंसले और अंडे भी तबाह हो गए। मौके पर वन्यजीवों के पैरों के निशान, मल-मूत्र और घोंसले के अवशेष मिले हैं, जिन्हें सबूत के तौर पर जब्त कर लिया गया।

घर पर छापा → मिला माल

आरोपियों के घर दबिश दी गई तो वहाँ से बरामद हुए:
21 सागौन के ताजे चिरान
2 खून से सने कुल्हाड़ी
1 हाथ आरी
दोनों ने पुलिसिया पूछताछ में कबूल कर लिया कि “इन्हीं कुल्हाड़ियों से हमने पेड़ काटे थे।”

सख्त से सख्त कार्रवाई

वनमंडलाधिकारी मयंक पांडेय के सीधे आदेश पर तुरंत एफआईआर दर्ज हुई। आरोपियों पर ठोके गए ये भारी-भरकम कानूनी हथियार:
भारतीय वन अधिनियम 1927
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972
लोक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम 1984
छत्तीसगढ़ काष्ठ चिरान अधिनियम 1984
05 दिसंबर को अपराध दर्ज → 06 दिसंबर को सुबह-सुबह दोनों को गिरफ्तार कर बसना कोर्ट में पेश किया गया। माननीय प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट मंजीत जांगड़े ने एक मिनट भी गँवाए बिना दोनों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जिला जेल महासमुंद भेज दिया।
साथ ही सबसे बड़ा झटका:
इनके द्वारा पहले मिला वन अधिकार पट्टा तत्काल प्रभाव से रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। यानी अब न जंगल बचेगा, न इनका पट्टा!

पूरी टीम थी एक्शन में

यह धमाकेदार कार्रवाई वनमंडलाधिकारी मयंक पांडेय के नेतृत्व में हुई। संयुक्त वनमंडलाधिकारी डिम्पी बैस ने मौके पर मार्गदर्शन किया, जबकि वन परिक्षेत्र अधिकारी सालिकराम डडसेना ने पूरी टीम को लीड किया।
हीरो रहे फील्ड के जांबाज:
ललित पटेल, ननकुसिया साहू, प्रभा ठाकुर, वीरेंद्र बंजारे, कोकिलकांत दिनकर, पुष्पा नेताम और कुलेश्वर डडसेना।
वन विभाग का साफ मैसेज:
“जंगल हमारी अमानत है। जो हाथ भी उठाएगा, उसका हाथ काट दिया जाएगा।
अतिक्रमण, अवैध कटाई और वन्यजीवों को नुकसान पहुँचाने वालों के लिए अब कोई माफी नहीं।”
जंगल बचाओ — जंगल बचाएगा!

टोकन की जद्दोजहद ने तोड़ी किसान की उम्मीदें: धान खरीदी केंद्र की घोर लापरवाही से हताश किसान ने की खुदकुशी की कोशिश

ब्लेड से गला काटकर फैलाया दहशत का माहौल..!

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुंद / बागबाहरा छत्तीसगढ़: राज्य में धान की खरीद प्रक्रिया एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गई है। सरकारी योजनाओं और किसान कल्याण की बड़ी-बड़ी बातों के बीच एक साधारण किसान की जिंदगी पर संकट मंडरा रहा है, जो पूरे तंत्र की नाकामी को उजागर कर रहा है। बागबाहरा ब्लॉक के सेनभांठा गांव में रहने वाले किसान मनबोध गाड़ा ने प्रशासनिक उदासीनता और सहकारी संस्थाओं की बेरुखी से तंग आकर एक बेहद दर्दनाक कदम उठाया, जिसने पूरे इलाके को झकझोर दिया। इस घटना ने सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या किसानों के लिए बनाई गई सुविधाएं वाकई उनकी मदद कर रही हैं या उन्हें और ज्यादा परेशान कर रही हैं?

घटना का पूरा ब्योरा महीनों की मेहनत बर्बाद, टोकन न मिलने से बढ़ी हताशा

किसान मनबोध गाड़ा ने अपनी फसल उगाने के लिए साहूकारों और बैंकों से भारी कर्ज लिया था। कड़ी मेहनत से तैयार किए गए धान को बेचने की उम्मीद लेकर वह बार-बार खेमडा धान खरीदी केंद्र पहुंचा, जो मुंगासेर सहकारी बैंक से जुड़ा हुआ है। लेकिन हर बार उसे निराशा ही हाथ लगी। टोकन जारी करने की प्रक्रिया में लगातार देरी होती रही—कभी सर्वर की खराबी का बहाना, कभी समय खत्म होने की दलील, तो कभी अगले दिन आने की सलाह। इन सबके बीच किसान के धान घर में ही पड़े सड़ते रहे, जबकि कर्ज की किस्तें सिर पर चढ़ती जा रही थीं।
ग्रामीणों के मुताबिक, मनबोध ने कई बार केंद्र के अधिकारियों और कर्मचारियों से मदद की गुहार लगाई। वह अपनी समस्या बताता रहा, लेकिन हर बार उसे खाली हाथ लौटना पड़ा। जैसे-जैसे दिन गुजरते गए, आर्थिक दबाव के साथ-साथ उसकी मानसिक हालत भी बिगड़ती चली गई। परिवार की रोजमर्रा की जरूरतें पूरी न होने से घर में तनाव बढ़ता गया, और किसान खुद को असहाय महसूस करने लगा। यह स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि उसने आखिरकार एक खतरनाक फैसला ले लिया।

दर्दनाक पल: केंद्र से लौटते वक्त उठाया आत्मघाती कदम

घटना वाले दिन मनबोध एक बार फिर धान खरीदी केंद्र पहुंचा, उम्मीद के साथ कि शायद आज टोकन मिल जाए। लेकिन वहां भी वही पुराना जवाब मिला—’आज टोकन नहीं कटेगा।’ यह सुनकर उसकी सारी उम्मीदें चकनाचूर हो गईं। घर लौटते हुए उसकी हताशा गुस्से में बदल गई, और इसी उन्माद में उसने ब्लेड से अपना गला काट लिया। खून से सना किसान सड़क पर गिर पड़ा, जिसे देखकर आसपास के लोग स्तब्ध रह गए। पूरे गांव में अफरा-तफरी मच गई, और लोग इधर-उधर भागने लगे।
तुरंत ही ग्रामीणों ने 112 इमरजेंसी सेवा को कॉल किया। पुलिस और मेडिकल टीम मौके पर पहुंची, और घायल किसान को फौरन बागबाहरा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। डॉक्टरों ने बताया कि गले पर गहरा कट लगा है, और काफी खून बह चुका है। उसकी हालत बेहद नाजुक बनी हुई है, और प्राथमिक इलाज के बाद उसे बड़े अस्पताल में शिफ्ट करने की योजना बनाई जा रही है। परिवार वाले सदमे में हैं, और गांव में हर तरफ मातम का माहौल है।

ग्रामीणों का उबलता गुस्सा ‘सरकार की नीतियां सिर्फ कागजों तक सीमित’

इस घटना ने स्थानीय किसानों और संगठनों में जबरदस्त आक्रोश पैदा कर दिया है। लोग कह रहे हैं कि सरकार हर चुनावी मंच पर किसानों की आमदनी दोगुनी करने और उनकी मदद करने की बात करती है, लेकिन हकीकत में सिस्टम उन्हें और ज्यादा पीड़ा दे रहा है। ग्रामीणों ने कई सवाल उठाए हैं:
अगर धान खरीदी की व्यवस्था इतनी कुशल है, तो किसान टोकन के लिए महीनों क्यों भटकते रहते हैं?
सहकारी बैंक और खरीदी केंद्रों के कर्मचारियों की जिम्मेदारी कौन तय करेगा?
क्या किसानों की मानसिक पीड़ा और आर्थिक नुकसान की भरपाई कोई अधिकारी करेगा?
किसान संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर ऐसी घटनाएं जारी रहीं, तो बड़े स्तर पर आंदोलन हो सकता है। वे मांग कर रहे हैं कि टोकन सिस्टम को और ज्यादा सरल, पारदर्शी और तेज बनाया जाए, ताकि किसानों को अनावश्यक परेशानी न झेलनी पड़े।

प्रशासन पर सवालों की बौछार: क्या होगा दोषियों का..?

यह मामला सीधे तौर पर सहकारी विभाग, खरीदी केंद्र के प्रबंधन और जिला प्रशासन की भूमिका पर उंगली उठाता है। टोकन प्रणाली को किसानों की सहूलियत के लिए शुरू किया गया था, लेकिन अब यह उनके लिए अभिशाप बनती जा रही है। क्या सर्वर की समस्याएं और कर्मचारियों की लापरवाही को रोकने के लिए कोई ठोस कदम उठाए जाएंगे? स्थानीय निवासियों की मांग है कि:
दोषी कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, और उन्हें निलंबित किया जाए।
पीड़ित किसान और उसके परिवार को तत्काल आर्थिक मदद दी जाए, ताकि वे इस संकट से उबर सकें।
पूरे राज्य में धान खरीदी प्रक्रिया की समीक्षा की जाए, और तकनीकी खामियों को दूर किया जाए।

बड़ा सबक एक किसान की पीड़ा, पूरे तंत्र की नाकामी

मनबोध गाड़ा की यह कहानी सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि उस पूरे सिस्टम की असफलता की मिसाल है जो किसानों को उनका हक समय पर देने में विफल हो रहा है। अगर प्रशासन ने समय रहते ध्यान दिया होता, तो शायद यह दुखद घटना टाली जा सकती थी। आज मनबोध अस्पताल में मौत से लड़ रहा है, जबकि पूरा सिस्टम जवाब तलाश रहा है। सवाल यह है कि क्या एक टोकन की कीमत किसी किसान की जिंदगी से ज्यादा है? यह घटना राज्य सरकार को झकझोरने के लिए काफी है, और उम्मीद है कि इससे सबक लेकर भविष्य में ऐसी लापरवाहियां न दोहराई जाएं। किसानों का सब्र टूट रहा है, और अगर व्यवस्था नहीं सुधरी, तो ऐसे हादसे और बढ़ सकते हैं।

शिक्षा में क्रांति का बिगुल गजेन्द्र यादव ने रायपुर संभाग को दे डाला 90%+ का वारंट, लापरवाही करने वाले तैयार रहें..!

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुंद, 05 दिसम्बर 2025
स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने आज महासमुंद में रायपुर संभाग के शिक्षा तंत्र को पूरी तरह हिला कर रख दिया। जिला पंचायत सभाकक्ष में हुई मैराथन समीक्षा बैठक में मंत्री ने अधिकारियों को साफ-साफ सुनाते हुए कहा, “अब कागजी घोड़े दौड़ाने का जमाना गया। 2026 का बोर्ड रिजल्ट ही बताएगा कि कौन अफसर नौकरी करने लायक है और कौन नहीं।”
बैठक में सचिव स्कूल शिक्षा सिद्धार्थ कोमल परदेशी, आयुक्त समग्र शिक्षा डॉ. प्रियंका शुक्ला के साथ रायपुर, बलौदाबाजार, धमतरी, गरियाबंद और महासमुंद के सभी डीईओ, डीएमसी, बीईओ, बीआरसी मौजूद रहे।

मंत्री के टॉप-10 नॉन-नेगोशिएबल टारगेट

1/ 31 दिसंबर 2025 तक अपार आईडी 100% – एक भी बच्चा छूटा तो डीईओ सीधे जवाबदेह

2/ 2026 बोर्ड: 10वीं में न्यूनतम 85%, 12वीं में न्यूनतम 90% और अधिकतम बच्चे फर्स्ट डिविजन में

3/ बायोमेट्रिक उपस्थिति 100% अनिवार्य – लेट आने वालों का नाम व फोटो पोर्टल पर सार्वजनिक

4/ हर बीईओ हर महीने न्यूनतम 40 स्कूलों का दौरा, जीपीएस फोटो के साथ रिपोर्ट

5/ जनवरी 2026 से “धारा-प्रवाह हिंदी अभियान” – कक्षा 5 तक हर बच्चा फरवरी तक फर्राटेदार हिंदी पढ़े

6/ माध्यमिक स्तर पर बेसिक गणित + अंग्रेजी रेमेडियल क्लासेस अनिवार्य

7/ ड्रॉपआउट रेट 0.1% से ऊपर हुआ तो पूरा ब्लॉक फेल, बीईओ निलंबित

8/ सेवानिवृत्त शिक्षक को रिटायरमेंट के दिन ही पूरा पेंशन-ग्रेच्युटी, देरी करने वाले बीईओ पर एफआईआर

9 / एक हफ्ते में हर स्कूल में PM ई-विद्या चैनल रोज चलेगा
अगले 3 साल की मास्टर प्लान 31 जनवरी 2026 तक विभाग को जमा

10/ मंत्री ने कड़े लहजे में कहा, “शिक्षा सुधार मेरी प्राथमिकता नहीं, मजबूरी है। जो नहीं कर सकता, वो अभी इस्तीफा दे दे।”

बच्चों की क्रिएटिविटी ने जीता दिल

बैठक के बाद मंत्री ने प्रदर्शनी देखी और मूड 180 डिग्री पलट गया।
अटल टिंकरिंग लैब का स्मार्ट डेम सिंचाई मॉडल देखकर बच्चे को गले लगा लिया
बसना के बच्चों का “जादुई गणित पिटारा” देखकर खुद खेलने लगे
बागबाहरा की AI प्रदर्शनी पर बोले, “ये बच्चे दुनिया बदलेंगे, बस हमें अपना काम ठीक करना है”
अंत में मंत्री का क्लोजिंग पंच:
“बच्चे तैयार हैं, संसाधन तैयार हैं, अब सिर्फ आपकी इच्छाशक्ति बाकी है।
2026 में रिजल्ट आएगा, तब देखते हैं कौन खड़ा रहता है और कौन गिरता है!”
रायपुर संभाग में आज से काउंटडाउन शुरू:
90% या goodbye!
जल्दी देखते हैं कौन बचता है…

“कोविड की लाशों पर 39 लाख का केक काटा महासमुंद के अफसरों ने – 5 साल बाद भी कोई कार्यवाही नहीं..?”

5 साल बाद भी दोषी खुले घूम रहे, गुनाह कबूला फिर भी सजा ज़ीरो – पत्रकार ने CM साय को लिखा पत्र

रायपुर / आप लोगों ने कई प्रकार की बीमारियों वाली महामारी के बारे में सुना और देखा होगा जैसे कि,मलेरिया,हैजा,चिकन पॉक्स,फाइलेरिया किंतु एक महामारी ने पूरे प्रदेश नहीं सम्पूर्ण जगत में अपनी एक अलग पहचान बना लिया जिसे कोविड 19 वैश्विक महामारी कोरोना के नाम से एक अलग पहचान मिली जो कि,संपूर्ण जगत को झकझोर कर रख दिया गया। बता दे कि , इस महामारी ने अपना नाम एक इतिहास रच कीर्तिमान स्थापित कर दिया और तो और अब स्कूलों में होने वाले एग्जाम में भी पूछा जाएगा कि, कोरोना महामारी के जन्मदाता कौन है कब इसकी शुरुआत हुई कितने लोगों ने अपनो को खोया शासन प्रशासन कैसे कैसे हथकंडे अपनाए ये सब सवाल आने वाले है । इसी तारतम्य में छत्तीसगढ़ के जिला महासमुंद जब पूरा देश कोविड-19 की भयानक लहर से त्राहिमाम कर रहा था…
जब लोग अस्पताल के बाहर ऑक्सीजन के लिए गिड़गिड़ा रहे थे…
जब श्मशान घाटों में लकड़ियाँ तक खत्म हो गई थीं…
जब माँ-बाप, बच्चे, नौजवान एक-एक साँस के लिए जद्दोजहद कर रहे थे…
ठीक उसी वक्त छत्तीसगढ़ के महासमुंद में कुछ “जनसेवक” सरकारी खजाने को लूटने में लगे थे!

जनपद पंचायत महासमुंद में 15वें वित्त आयोग की 39 लाख रुपये की राशि का खुलेआम गबन

बता दे कि, हर योजनाओं का एक मद होता है वैसे ही कोरोना काल के समय विवेकानंद मद से ओपन जिम, मास्क-सैनिटाइजर की खरीदी में दो-ढाई गुना रेट पर लूट
नियमों को रौंदकर सीधे वेंडर के खाते में पैसे ट्रांसफर
फर्जी बिल, फर्जी कोटेशन, फर्जी सप्लाई… सब कुछ!
जब जनता मर रही थी, ये लोग “कोविड फंड” से अपनी जेबें भर रहे थे
पत्रकार अश्वनी सोनी “जनता की ताकत” ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को 3 दिसंबर 2025 को जो चिट्ठी लिखी है, उसे पढ़कर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। पत्र में लिखा है।
“कोविड किसी के लिए आपदा था, तो किसी के लिए अवसर जो आपदा में रहे उन्होंने अपनों को खो दिया जिसे अपना समझे वो आपदा को अवसर बनाकर लूट लिये किसी ने कोई कसर नहीं छोड़े। जिन्हें अवसर मिला, उन्होंने लोगों की जान से खिलवाड़ करते हुए लाखों-करोड़ों की राशियों को आपसी बंदरबांट कर हजम कर लिये… और डकार तक नहीं लिए ।”

दोषी अधिकारियों ने गुनाह कबूल किया, माफी मांगी, फिर भी बच निकले..!

39 लाख घोटाला मामले में संलिप्त ..!

दिलीप मनहरे – सहायक लेखा परीक्षा एवं करारोपण अधिकारी
समृद्धि शर्मा – संकाय सदस्य (BPRC) इन दोनों ने जांच में अपना अपराध कबूल कर लिया था। माफी मांग ली थी।
फिर भी निलंबन नहीं, बर्खास्तगी नहीं, वसूली नहीं… बल्कि संरक्षण और प्रमोशन!

सबसे बड़ा सवाल तत्कालीन CEO एस. आलोक जिला पंचायत ने दोषियों को क्यों बचाया..?

पत्रकार अश्वनी सोनी ने खुला आरोप लगाया है: “तत्कालीन CEO एस. आलोक ने जांच टीम को मौखिक निर्देश देकर दोषियों को क्लीन चिट दिलवाई।
साक्ष्यों को दबाया गया, जांच को शिथिल किया गया।
यह साफ-साफ भ्रष्टाचार की मिलीभगत है।
इसलिए 39 लाख की पूरी वसूली सबसे पहले एस. आलोक से ही हो!”

कोविड काल में हुआ था खेल, 5 साल बाद भी फाइलें दबी हैं

जांच हुई – अनियमितता साबित हुई
दस्तावेजों में गड़बड़ी पकड़ी गई
छत्तीसगढ़ भंडार क्रय नियम-2002 की धज्जियाँ उड़ाई गईं
बिना टेंडर, बिना कोटेशन, दोगुने दाम पर खरीदी
फिर भी कार्रवाई = शून्य

पत्रकार ने CM से 5 बड़ी मांगें कीं

दोनों आरोपी अधिकारियों का तत्काल निलंबन
39 लाख + ब्याज की पूरी वसूली (सबसे पहले CEO एस. आलोक से)
शिकायतकर्ता की मौजूदगी में नई स्वतंत्र जांच
सभी दस्तावेजों का फोरेंसिक ऑडिट
जनदर्शन की लंबित शिकायत का तुरंत निराकरण

आखिरी लाइन जो दिल झकझोर देती है… पत्रकार ने लिखा है..?

“मैंने बार-बार शिकायत की, न्यूज़ चलाई, सोशल मीडिया पर बेनकाब किया।
लेकिन ऊपर बैठे लोगों के कान पर जूं तक नहीं रेंगी।
अगर एक पत्रकार को ही न्याय नहीं मिलेगा,
तो उस आम आदमी का क्या होगा जो अस्पताल में आखिरी साँस लेते हुए भी
इन लुटेरों के पाप का शिकार बना था?”
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने “भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस” का नारा दिया था।
अब मौका है उसे साबित करने का।

क्या कोविड काल के इन “लुटेरों” पर गाज गिरेगी..?
या 39 लाख का यह घोटाला भी फाइलों में दफ्न हो जाएगा..?

गरियाबंद आवास निर्माण में लापरवाही बर्दाश्त नहीं, सचिवों की अब खुद CEO लेंगे क्लास..!

26 जनवरी और 31 दिसंबर की डेडलाइन तय, PM जनमन के 488 और MMAY के 104 घर गणतंत्र दिवस तक पूरे करने के सख्त निर्देश

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
गरियाबंद। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रखर चंद्राकर ने गुरुवार को प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण, महात्मा गांधी नरेगा और स्वच्छ भारत मिशन की महत्वपूर्ण योजनाओं की गहन समीक्षा की और अधिकारियों-कर्मचारियों को साफ चेतावनी दी कि आवास निर्माण में अब कोई ढिलाई या कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने ऐलान किया कि अब वे स्वयं हर ग्राम पंचायत सचिव की कार्य प्रगति की व्यक्तिगत समीक्षा करेंगे।
बैठक में सीईओ ने साफ शब्दों में कहा, “प्रधानमंत्री आवास योजना देश की सबसे महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक है। इसमें गुणवत्ता और समय-सीमा से कोई समझौता नहीं होगा। जनपद पंचायत के सीईओ, एसडीओ, सचिव, रोजगार सहायक और आवास मित्र मिलकर दिन-रात एक कर दें, लेकिन तय लक्ष्य हर हाल में पूरा करना है।”

तय किए गए सख्त लक्ष्य

PM जनमन योजना के 488 आवास और MMAY के 104 आवास 26 जनवरी 2026 तक पूर्ण करने अनिवार्य।
PMAY-G 2024-25 में दूसरी किस्त जारी हो चुके 720 अपूर्ण आवास 31 दिसंबर 2025 तक हर हाल में पूरे हों।
2025-26 में नव स्वीकृत सैकड़ों आवासों के लिए एक सप्ताह में हितग्राहियों से इकरारनामा लेकर काम शुरू हो।
सभी नए आवास न्यूनतम 272 वर्ग फुट में बनाए जाएं, कोई छूट नहीं।
SHG समूहों के माध्यम से PM जनमन आवासों के लिए सेंट्रिंग प्लेट की आपूर्ति तुरंत सुनिश्चित की जाए।
सीईओ ने मैदानी अमले को निर्देश दिए कि वे लगातार गांवों का भ्रमण करें, हितग्राहियों को प्रेरित करें और निर्माण कार्य की रोजाना मॉनिटरिंग करें। उन्होंने चेताया कि सचिव, रोजगार सहायक और आवास मित्र अब सीधे उनकी निगरानी में हैं।

मनरेगा और स्वच्छ भारत मिशन पर भी कड़ा रुख

सभी स्वीकृत आंगनवाड़ी भवनों का निर्माण एक सप्ताह में शुरू हो।
सामुदायिक शौचालयों का काम तेजी से पूरा कर जियो-टैगिंग अनिवार्य रूप से की जाए।
युक्तधारा पोर्टल पर सभी ग्राम पंचायतों के प्लान तुरंत अपलोड हों।
जलदूत ऐप से लिए गए कूपों का माप पंचायत भवन की दीवार पर अनिवार्य रूप से लिखवाया जाए।
बैठक में जनपद पंचायत के सीईओ, एसडीओ (आरईएस), स्वच्छ भारत मिशन एवं PMAY-G के जिला-ब्लॉक स्तरीय अधिकारी, कार्यक्रम अधिकारी, तकनीकी सहायक तथा गरियाबंद जनपद की सभी ग्राम पंचायतों के सचिव, रोजगार सहायक और आवास मित्र बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
सीईओ प्रखर चंद्राकर का स्पष्ट संदेश था – “अब परिणाम चाहिए, बहाने नहीं।” जिले में चल रहे आवास निर्माण अभियान को रफ्तार देने के लिए प्रशासन ने कमर कस ली है और अगले दो महीने गरियाबंद के ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य देखने को मिलेंगे।

पत्रकारिता के योद्धा से छालीवुड के सितारे तक,महासमुंद के रेखराज साहू की ‘हाय पईसा’ से धमाकेदार डेब्यू..!

लाफिन खुर्द का रेखराज साहू ‘हाय पईसा’ में एडिशनल SP के भूमिका नजर आएंगे।

महासमुंद / 04 दिसंबर 2025
छत्तीसगढ़ के दिल में बसा महासमुंद जिला और जिले के पश्चिम तट पर बसा एक छोटा सा गाँव है – लाफिन खुर्द जो कि,जिले से मात्र 8 किलोमीटर दूर है । खेतों के बीच बसा ये गाँव कल सुबह से पूरे प्रदेश की ज़ुबान पर होगा। क्योंकि इसी गाँव के एक सामान्य मध्यम वर्गी परिवार में जन्मा किसान का बेटा, पत्रकारिता का बेताज बादशाह रेखराज साहू कल 5 दिसंबर को छत्तीसगढ़ी सुपरहिट फिल्म ‘हाय पईसा’ में एडिशनल SP की वर्दी में पहन थिएटर मे नजर आएंगे।

2015-16 में कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय, रायपुर से की डिग्री
2017 में टीवी की दुनिया में धमाकेदार एंट्री । 2018 से ‘खबर छत्तीसगढ़’ न्यूज़ चैनल के संपादक तक।

पहले ही दिल जीत चुके हैं कैमरे के सामने भी

जब पूरा देश कोरोना से डर रहा था, तब रेखराज ने बनाई डॉक्यूमेंट्री ‘करोना के जंग’ – लोगों को हिम्मत दी, जागरूक किया।
फिर पर्यावरण के लिए बनाई फिल्म ‘पेड़ बर झगड़ा’ – खुद हीरो बने, खुद डायलॉग मारे, और दर्शकों का दिल जीत लिया।
अब तीसरा धमाका – ‘हाय पईसा’ में एडिशनल SP का रोल! वर्दी में, स्टार्च लगी शर्ट, कंधे पर स्टार और आँखों में वो तेज जो अपराधी देखकर काँप जाएँ!

5 दिसंबर – दो फिल्में, एक ही दिन, लेकिन छत्तीसगढ़ का दिल सिर्फ ‘हाय पईसा’ पर!

बॉलीवुड वाले अपनी फिल्म लेकर आ रहे हैं, लेकिन हमारा अपना रेखराज साहू छत्तीसगढ़ी अंदाज में पूरे प्रदेश के थिएटर में दिखने वाले है।
फिल्म में हंसी भी है, रोमांच भी है, छत्तीसगढ़ी संस्कृति भी है और सबसे ऊपर है।

रेखराज साहू ने कहा –
“पत्रकारिता ने मुझे सच बोलना सिखाया, अब सिनेमा के जरिए उस सच को छत्तीसगढ़ के हर घर तक पहुँचाऊंगा। ये सिर्फ मेरा डेब्यू नहीं, मेरे गाँव लाफिन खुर्द का, मेरे जिला महासमुंद का और पूरे छत्तीसगढ़ का गर्व है!”
तो तैयार हो जाइए भाई लोग!
कल 5 दिसंबर को थिएटर पहुँचिए, टिकट कटाइए और जोर से चिल्लाइए – हाय पईसा।

महासमुंद CMHO डॉ. आई. नागेश्वर राव का घिनौना भ्रष्टाचार बेनकाब 55 लाख की चार सरकारी बोलेरो को बना दिया “निजी प्राइवेट लिमोज़ीन” और “कबाड़ का ढेर”!

“कागजों में बंट गईं गाड़ियाँ, हकीकत में एक भी ब्लॉक तक नहीं पहुँची” – स्वास्थ्य कर्मियों का दर्द छलका

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुंद / छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में स्वास्थ्य विभाग का एक ऐसा घोटाला सामने आया है जो न सिर्फ सरकारी लापरवाही की मिसाल है, बल्कि सीधे-सीधे जनता की जान से खिलवाड़ भी। संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं रायपुर से जिले को मिली चार नई-नकोर महिंद्रा बोलेरो गाड़ियाँ (कीमत करीब 50-55 लाख रुपए) पिछले 6-7 महीने से CMHO कार्यालय के बाहर पार्किंग में खड़ी-खड़ी धूल और कीचड़ की मोटी परतें चाट रही हैं।
जब जिला कलेक्टर ने सख्ती दिखाते हुए CMHO डॉ. आई. नागेश्वर राव से पूछा,
“ये चारों गाड़ियाँ ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर और नोडल अधिकारियों को दे दी गईं ना?”
तो CMHO साहब ने बिना झिझके जवाब दिया –
“जी सर, सब दे दी गई हैं।”
लेकिन हकीकत देखिए:

चार में से तीन गाड़ियाँ आज भी CMHO ऑफिस के बाहर टिनशेड के नीचे खड़ी हैं।

इन पर इतनी मोटी धूल जमी है कि नंबर प्लेट भी साफ नहीं दिख रही।

चौथी गाड़ी..? वो तो बड़े साहब अपने निजी और परिवार के कामों में इस्तेमाल कर रहे हैं – सूत्रों का सनसनीखेज दावा!

जब पत्रकारों ने खोदकर देखा तो जो निकला, उससे रोंगटे खड़े हो गए:

किसी भी पांचों ब्लॉक (महासमुंद, बागबाहरा, बसना, पिथौरा, सरायपाली) में एक भी नई बोलेरो नहीं पहुँची।
जिला नोडल अधिकारी, RCH अधिकारी, डेटा मैनेजर, टीकाकरण टीम – सब आज भी अपनी जेब से पेट्रोल डालकर निजी गाड़ी या बाइक से गांव-गांव भटक रहे हैं।
एक स्वास्थ्य कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “साहब ने सिर्फ फाइल में लिख दिया कि गाड़ी दे दी। असल में चाबी तक किसी को नहीं दी गई हो, ऐसा कोई सबूत नहीं।”

कलेक्टर को दी गई झूठी रिपोर्ट

– अब जांच जरूरी!
जिला कलेक्टर विनय कुमार लंगेह को जब इसकी भनक लगी तो उन्होंने CMHO से साफ-साफ रिपोर्ट मांगी थी। लेकिन CMHO कार्यालय ने जो जवाब दिया, वो पूरी तरह झूठा निकला। अब सवाल यह है कि
क्या जानबूझकर कलेक्टर को गुमराह किया गया?
क्या ये सरकारी संपत्ति का दुरुपयोग और धोखाधड़ी का मामला है?

गाड़ियाँ खराब होने की कगार पर
– जनता भुगतेगी कीमत

नई गाड़ियाँ खड़ी-खड़ी बैटरी डाउन, टायर फटने, पेंट उड़ने की स्थिति में पहुँच गई हैं।
बारिश में पानी भर गया, अब इनमें जंग लगना शुरू हो गया है।
अगर यही हाल रहा तो एक-दो महीने में ये गाड़ियाँ कबाड़ बन जाएंगी – और फिर नई गाड़ी के लिए फिर बजट मांगेंगे!

स्वास्थ्य कर्मियों का दर्द:

“हम कुपोषण सर्वे, टीकाकरण, प्रसव पूर्व जाँच के लिए 50-60 किलोमीटर रोज चलते हैं। जेब से पेट्रोल डालो, गाड़ी खराब हो तो खुद ठीक कराओ। ऊपर से CMHO साहब को लगता है हम आराम कर रहे हैं। गाड़ी है ही नहीं तो हम कैसे जाएँ?”

अब जनता पूछ रही है

CMHO साहब ने कलेक्टर को झूठ क्यों बोला?
चौथी बोलेरो किसके निजी काम में चल रही है?
कब तक ये गाड़ियाँ धूल खाती रहेंगी?
क्या जिला कलेक्टर इस मामले की उच्चस्तरीय जांच करवाएंगे?
जिले के स्वास्थ्य कर्मी और आम जनता अब खुलकर मांग कर रहे हैं –
तत्काल चार्जशीट, गाड़ियों का मीटर चेक कराओ, और सभी गाड़ियाँ 48 घंटे में संबंधित ब्लॉकों को सौंप दी जाएं।
अगर ऐसा नहीं हुआ तो ये मामला सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि सरकारी संपत्ति के दुरुपयोग और आपराधिक विश्वासघात का केस बनेगा।
अब देखना ये है कि जिला कलेक्टर इस “धूल भरी बोलेरो घोटाले” पर कब एक्शन लेता है…
या फिर ये गाड़ियाँ यूं ही कब्रिस्तान बनकर रह जाएंगी?

छत्तीसगढ़ में मतदाता सूची का सबसे बड़ा शुद्धिकरण अभियान शुरू

घर-घर सर्वे से लाखों फर्जी और मृत मतदाताओं के नाम हटेंगे, 07 फरवरी 2026 को आएगी पूरी तरह साफ-सुथरी अंतिम सूची

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
रायपुर / 27 नवंबर 2025 भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश पर छत्तीसगढ़ में मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) जोर-शोर से चल रहा है। यह राज्य के इतिहास का अब तक का सबसे व्यापक और सख्त मतदाता सूची शुद्धिकरण अभियान है, जिसका मकसद एक भी फर्जी, डुप्लीकेट, मृत या स्थानांतरित मतदाता का नाम सूची में न रहे और एक भी पात्र नागरिक का नाम छूटे नहीं, यह सुनिश्चित करना है।

घर-घर दस्तक अभियान 4 नवंबर से 4 दिसंबर तक

राज्य के हर बूथ पर तैनात बूथ लेवल अधिकारी (BLO) 4 नवंबर 2025 से 4 दिसंबर 2025 तक घर-घर जाकर मतदाताओं से विशेष गणना फॉर्म (Enumeration Form) भरवा रहे हैं। इस फॉर्म में पुराने मतदाता सूची के अनुसार नाम, पता, उम्र, फोटो आदि की पूरी जानकारी फिर से ली जा रही है।
BLO फॉर्म की एक कॉपी दस्तावेजों सहित अपने पास रखेंगे और दूसरी कॉपी पर रसीद देकर मतदाता को देंगे।
अगर कोई व्यक्ति ऑनलाइन फॉर्म भरकर दस्तावेज अपलोड करता है, तो भी BLO उसके घर जाकर दस्तावेजों का फिजिकल सत्यापन अनिवार्य रूप से करेगा।

महत्वपूर्ण तारीखें एक नजर में

घर-घर गणना चरण : 04 नवंबर 2025 से 04 दिसंबर 2025
ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशन : 09 दिसंबर 2025
दावा-आपत्ति की अवधि : 09 दिसंबर 2025 से 08 जनवरी 2026
नोटिस, सुनवाई एवं सत्यापन : 09 दिसंबर 2025 से 31 जनवरी 2026
अंतिम मतदाता सूची प्रकाशन : 07 फरवरी 2026

जो फॉर्म नहीं भरेंगे, उनका नाम ड्राफ्ट सूची से बाहर!

सबसे बड़ी बात यह है कि 9 दिसंबर 2025 को प्रकाशित होने वाली ड्राफ्ट मतदाता सूची में सिर्फ वही मौजूदा मतदाता शामिल रहेंगे जिन्होंने BLO को विधिवत भरा हुआ गणना फॉर्म जमा कर दिया हो या जिनका ऑनलाइन फॉर्म BLO ने घर जाकर सत्यापित कर दिया हो। बाकी सभी पुराने मतदाताओं के नाम स्वतः ड्राफ्ट सूची से गायब हो जाएंगे। यानी अगर आपने अभी तक फॉर्म नहीं भरा है तो आपका नाम 9 दिसंबर की ड्राफ्ट सूची में नहीं होगा।

बाद में भी नाम जुड़वा सकते हैं, लेकिन अतिरिक्त कागजात लगेंगे

अगर कोई व्यक्ति 4 दिसंबर तक फॉर्म नहीं भर पाया तो भी घबराएं नहीं। 9 दिसंबर 2025 से 8 जनवरी 2026 तक दावा-आपत्ति की अवधि में फॉर्म-6 के साथ घोषणा-पत्र जमा करके नाम जुड़वाया जा सकता है। लेकिन इस स्थिति में जन्मतिथि के आधार पर अतिरिक्त दस्तावेज देने होंगे:
जन्म 1 जुलाई 1987 से पहले हुआ → अपना कोई एक जन्मतिथि/जन्मस्थान वाला दस्तावेज
जन्म 1 जुलाई 1987 से 2 दिसंबर 2004 के बीच → अपना + माता या पिता में से किसी एक का दस्तावेज
जन्म 2 दिसंबर 2004 के बाद → अपना + माता + पिता तीनों का दस्तावेज (अगर माता-पिता में कोई विदेशी है तो उसका पासपोर्ट-वीजा भी)

फर्जी नामों पर सख्ती, हर संदिग्ध को मिलेगा नोटिस

निर्वाचन आयोग ने साफ कहा है कि अगर किसी मतदाता का पुराना रिकॉर्ड डेटाबेस से मैच नहीं करता तो ERO उसे नोटिस जारी करेगा। जवाब और दस्तावेज नहीं देने पर नाम हटा दिया जाएगा। साथ ही ERO खुद भी संदिग्ध प्रविष्टियों पर स्वतः संज्ञान ले सकते हैं।

पारदर्शिता के लिए खास इंतजाम

हर दिन फॉर्म 9, 10, 11, 11A, 11B में आए दावे-आपत्तियों की सूची ERO कार्यालय के नोटिस बोर्ड पर चस्पा होगी।
साप्ताहिक आधार पर राजनीतिक दलों को सूची दी जाएगी।
CEO छत्तीसगढ़ की वेबसाइट पर रोजाना अपडेट होगी।
कोई भी नागरिक वेबसाइट पर सूची देखकर ERO के पास आपत्ति दर्ज करा सकेगा।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि पुनरीक्षण पूरी तरह पारदर्शी, निष्पक्ष और कानून के दायरे में हो। अंतिम सूची प्रकाशन से पहले भारत निर्वाचन आयोग की औपचारिक अनुमति भी ली जाएगी।
अगर आप छत्तीसगढ़ के मतदाता हैं और अभी तक अपना गणना फॉर्म नहीं भरा है तो तुरंत अपने BLO से संपर्क करें। 4 दिसंबर 2025 बीतने के बाद प्रक्रिया जटिल और दस्तावेज ज्यादा लगेंगे। यह आपके वोट का अधिकार भी है और कर्तव्य भी कि मतदाता सूची पूरी तरह शुद्ध और सटीक बने।

मां महालक्ष्मी की कृपा बरसी सलखंड में CM विष्णुदेव साय ने टेका मत्था, गांव को दी दो बड़ी सौगातें – महतारी सदन और एनीकट की घोषणा..!

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुंद / 27 नवंबर 2025
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय बुधवार को महासमुंद जिले के बसना तहसील स्थित ग्राम सलखंड के दौरे पर पहुंचे। ग्रामीणों ने उनका गर्मजोशी और पारंपरिक तरीके से भव्य स्वागत किया। इस दौरान वे ग्रामवासियों द्वारा पिछले 25 वर्षों से निरंतर आयोजित होने वाले मां महालक्ष्मी पूजन कार्यक्रम में शामिल हुए और विधि-विधान से माता के दर्शन कर विशेष पूजा-अर्चना की।
पूजन के दौरान मुख्यमंत्री ने मां महालक्ष्मी से प्रदेशवासियों के साथ-साथ पूरे क्षेत्र के लोगों के लिए सुख-समृद्धि, अच्छा स्वास्थ्य, शांति और समृद्धि की कामना की। पारंपरिक मंत्रोच्चार के बीच आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान में उन्होंने पूरी श्रद्धा से हिस्सा लिया। पूजा के बाद मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों से मुलाकात की और उनकी समस्याएं सुनीं तथा स्थानीय विकास कार्यों की जानकारी ली।
इस मौके पर मुख्यमंत्री की पत्नी कौशल्या साय, रायपुर उत्तर विधायक पुरंदर मिश्रा, बसना विधायक संपत अग्रवाल, महिला आयोग सदस्य सरला कोसरिया, छत्तीसगढ़ राज्य बीज निगम अध्यक्ष चंद्रशेखर चंद्राकर, जिला स्काउट गाइड अध्यक्ष येतराम साहू, कलेक्टर विनय कुमार लंगेह, पुलिस अधीक्षक आशुतोष सिंह सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, अधिकारी और ग्रामीण उपस्थित रहे।

गांव के लिए दो बड़ी घोषणाएं

मुख्यमंत्री ने सलखंड गांव में महतारी सदन बनाने की घोषणा की।
गांव में सिंचाई के लिए एनीकट निर्माण हेतु जल संसाधन विभाग को तत्काल सर्वे कर प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए।

संविधान दिवस पर प्रदेशवासियों को दी बधाई

मुख्यमंत्री ने मौके पर ही 26 नवंबर यानी संविधान दिवस के अवसर पर पूरे प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई दी। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान न केवल अधिकारों का दस्तावेज है, बल्कि कर्तव्यों की भी याद दिलाता है और देश को एकजुट, सशक्त व प्रगतिशील बनाने का मार्ग दिखाता है।

2047 तक विकसित छत्तीसगढ़ बनाने का संकल्प

जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश विकसित भारत की ओर तेज गति से बढ़ रहा है और छत्तीसगढ़ भी इसमें अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने 2047 तक छत्तीसगढ़ को पूर्ण रूप से विकसित राज्य बनाने और मोदी की गारंटी को पूरा करने का संकल्प दोहराया।
उन्हाेंने केंद्र व राज्य सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत छत्तीसगढ़ को 18 लाख घरों की स्वीकृति मिली है तथा महतारी वंदन योजना से 70 लाख से अधिक महिलाओं को सीधा आर्थिक लाभ पहुंचाया जा रहा है।

अगहन मास और 25 साल पुरानी परंपरा

मुख्यमंत्री ने अगहन मास को अन्न, धन और समृद्धि का प्रतीक बताते हुए कहा कि यह महीना छत्तीसगढ़ की ग्रामीण संस्कृति में विशेष महत्व रखता है। सलखंड गांव में पिछले 25 वर्षों से महालक्ष्मी समिति और ग्रामवासियों द्वारा निरंतर आयोजित होने वाला यह पूजन और पांच दिवसीय मेला सामाजिक एकता, भाईचारा और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत उदाहरण है। उन्होंने आयोजन समिति और ग्रामीणों की इस अनूठी परंपरा की भूरि-भूरि प्रशंसा की।
कार्यक्रम में पूर्व विधायक त्रिलोचन पटेल, हरिदास भारद्वाज, महालक्ष्मी समिति अध्यक्ष प्राण नाथ साहू, सरपंच अंजू साहू सहित सैकड़ों ग्रामीण मौजूद रहे।
यह आयोजन एक बार फिर छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक परंपरा और विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का जीता-जागता प्रमाण बना।

महाकाल बैडमिंटन प्रीमियम लीग 13 दिसंबर से महासमुंद में धमाकेदार शुरुआत, 80 हजार तक नकद इनाम..!

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुंद। जय महाकाल बैडमिंटन प्रीमियम लीग का आयोजन 13 दिसंबर 2025, शनिवार से शुरू हो रहा है। शहर के केंद्रीय विद्यालय के आंगन, सामुदायिक भवन के पीछे, रमन टोला महासमुंद में शाम 6 बजे से रात 10 बजे तक रोशनी में जोरदार मुकाबले खेले जाएंगे।

आकर्षक इनामी राशि

इस टूर्नामेंट में सिंगल और डबल दोनों वर्गों में महिला-पुरुष खिलाड़ियों के लिए कुल 80 हजार रुपये से अधिक की नकद इनामी राशि रखी गई है

सिंगल प्लेयर

प्रथम इनाम : ₹31,000 + शील्ड
द्वितीय इनाम : ₹21,000 + शील्ड
तृतीय इनाम : ₹11,000 + शील्ड
एंट्री फीस : ₹1001/-

डबल प्लेयर

प्रथम इनाम : ₹51,000 + शील्ड
द्वितीय इनाम : ₹31,000 + शील्ड
तृतीय इनाम : ₹21,000 + शील्ड
एंट्री फीस : ₹1001/- (प्रति खिलाड़ी)

नियम सख्त, खेल रोमांचक

सभी मैच बेस्ट ऑफ थ्री (21 पॉइंट) होंगे
खिलाड़ियों की उम्र की कोई सीमा नहीं
हाथ से बाहर खेलने पर बाहर
सेमीफाइनल और फाइनल तीन राउंड का होगा
रैफरी का फैसला अंतिम होगा
आयोजक सनराइज रमन टोला कालोनीवासी, महासमुंद के युवा उत्साही हैं। मुख्य आयोजक बालाजी मोबाइल बी.टी.आई. रोड और सिटी विनायक ट्रेडर्स (जी.टी.ए.) के संचालक हैं।

संपर्क करें

लोकेश कुमार ध्रुव : 9516555522, 9826267696
विजय वर्मा : 9826540562, 9754123889
विवेक चंद्राकर : 7000466624
लालू यादव : 7693019207
नवीन साहू : 8827760045
नवीन शर्मा : 9583389833

बैडमिंटन प्रेमियों के लिए यह टूर्नामेंट साल का सबसे बड़ा मौका है। अभी रजिस्ट्रेशन कराएं और जीत का दम भरें!