जंगल के लुटेरों को लगा बिजली का करंट..! 149 हरे पेड़ों की हत्या करने वाले दो भाइयों को सीधे जेल, वन अधिकार पट्टा भी छिना

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रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुंद/पिथौरा 06 दिसंबर 2025 वन विभाग ने जंगल माफियाओं के खिलाफ जो ताबड़तोड़ एक्शन लिया है, उसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। पिथौरा रेंज के संरक्षित वन कक्ष क्रमांक 248 में दो सगे भाइयों ने मिलकर 0.61 हेक्टेयर जंगल को पूरी तरह बर्बाद कर दिया था। 149 हरे-भरे पेड़ों को कुल्हाड़ी से काटकर, जंगल साफ करके ये लोग उसे अपनी खेती में मिलाने की साजिश रच रहे थे। लेकिन वन विभाग की नजर उन पर पड़ी और 24 घंटे के अंदर इनका पूरा खेल खत्म!
आरोपी हैं।
मधुसूदन साहू
साधु साहू
(दोनों सगे भाई, पिता समारू साहू, ग्राम मेमरा, तहसील बसना)
इन दोनों को 2-3 साल पहले वन अधिकार अधिनियम के तहत 5-5 एकड़ पट्टा मिला था। लेकिन लालच ने इनकी अक्ल मार ली। अपने पट्टे से सटा संरक्षित जंगल धीरे-धीरे काटकर ये लोग उसे अपनी जमीन में मिलाने का प्लान बना रहे थे। इनकी इस हरकत से न सिर्फ 149 कीमती पेड़ नष्ट हुए, बल्कि जंगल में रहने वाले तेंदुआ, सांभर, जंगली मुर्गे समेत कई वन्यजीवों के घोंसले और अंडे भी तबाह हो गए। मौके पर वन्यजीवों के पैरों के निशान, मल-मूत्र और घोंसले के अवशेष मिले हैं, जिन्हें सबूत के तौर पर जब्त कर लिया गया।

घर पर छापा → मिला माल

आरोपियों के घर दबिश दी गई तो वहाँ से बरामद हुए:
21 सागौन के ताजे चिरान
2 खून से सने कुल्हाड़ी
1 हाथ आरी
दोनों ने पुलिसिया पूछताछ में कबूल कर लिया कि “इन्हीं कुल्हाड़ियों से हमने पेड़ काटे थे।”

सख्त से सख्त कार्रवाई

वनमंडलाधिकारी मयंक पांडेय के सीधे आदेश पर तुरंत एफआईआर दर्ज हुई। आरोपियों पर ठोके गए ये भारी-भरकम कानूनी हथियार:
भारतीय वन अधिनियम 1927
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972
लोक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम 1984
छत्तीसगढ़ काष्ठ चिरान अधिनियम 1984
05 दिसंबर को अपराध दर्ज → 06 दिसंबर को सुबह-सुबह दोनों को गिरफ्तार कर बसना कोर्ट में पेश किया गया। माननीय प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट मंजीत जांगड़े ने एक मिनट भी गँवाए बिना दोनों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जिला जेल महासमुंद भेज दिया।
साथ ही सबसे बड़ा झटका:
इनके द्वारा पहले मिला वन अधिकार पट्टा तत्काल प्रभाव से रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। यानी अब न जंगल बचेगा, न इनका पट्टा!

पूरी टीम थी एक्शन में

यह धमाकेदार कार्रवाई वनमंडलाधिकारी मयंक पांडेय के नेतृत्व में हुई। संयुक्त वनमंडलाधिकारी डिम्पी बैस ने मौके पर मार्गदर्शन किया, जबकि वन परिक्षेत्र अधिकारी सालिकराम डडसेना ने पूरी टीम को लीड किया।
हीरो रहे फील्ड के जांबाज:
ललित पटेल, ननकुसिया साहू, प्रभा ठाकुर, वीरेंद्र बंजारे, कोकिलकांत दिनकर, पुष्पा नेताम और कुलेश्वर डडसेना।
वन विभाग का साफ मैसेज:
“जंगल हमारी अमानत है। जो हाथ भी उठाएगा, उसका हाथ काट दिया जाएगा।
अतिक्रमण, अवैध कटाई और वन्यजीवों को नुकसान पहुँचाने वालों के लिए अब कोई माफी नहीं।”
जंगल बचाओ — जंगल बचाएगा!

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