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बागबाहरा रोड स्थित आनंदम पैलेस नेशनल हाईवे 53 पर मौत का स्वागत गेट..!

शादी की चमक में छिपा खतरनाक खेल, आनंदम मैरिज पैलेस ने लगा दिया हाईवे पर अवैध गेट – हादसा हुआ तो कौन लेगा जिम्मेदारी..?

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुंद / 25 नवंबर 2025
नेशनल हाईवे-53 के किनारे बसे लभरा खुर्द गांव में स्थित आनंदम मैरिज पैलेस एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार वजह शादी की रौनक नहीं, बल्कि जानलेवा लापरवाही है। हाईवे से सटा यह मैरिज पैलेस आज एक थाधानी परिवार की शादी की मेजबानी कर रहा है, लेकिन शादी के स्वागत में लगा भव्य गेट सीधे नेशनल हाईवे की मुख्य सड़क पर खड़ा कर दिया गया है। लिखा है – “थाधानी फैमिली हार्टली वेलकम्स यू”।
यह गेट न सिर्फ हाईवे की चौड़ाई को कम कर रहा है, बल्कि तेज रफ्तार ओवरलोडेड ट्रक, कंटेनर और अन्य भारी वाहनों के लिए सीधा खतरा बन गया है। दिन-रात दौड़ते वाहनों के बीच यह अवैध स्वागत गेट किसी बड़े हादसे को न्योता दे रहा है।

मयंक ध्रुव सरपंच ने खोला चौंकाने वाला सच

ग्राम पंचायत लभरा खुर्द के सरपंच मयंक ध्रुव ने फोन पर बताया,
“हमने आनंदम मैरिज पैलेस के संचालक नत्थू साहू को तलब किया था कि नेशनल हाईवे पर गेट लगाने की अनुमति किसने दी? लेकिन वे आज तक पंचायत नहीं आए। हमने पंचायत की मीटिंग भी की। ग्राम पंचायत की ओर से कोई अनुमति नहीं दी गई है। यह पूरी तरह अवैध और मनमानी है। अगर यहाँ कोई बड़ा हादसा हो गया तो खून की होली किसके सिर जाएगी?”

जिम्मेदारी का बोझ किसके कंधे पर..?

सवाल यह है कि अगर इस अवैध स्वागत गेट की वजह से कोई जान चली गई, कोई परिवार बर्बाद हो गया, तो जिम्मेदार कौन होगा?
आनंदम मैरिज पैलेस के मालिक नत्थू साहू?
शादी कराने वाला थाधानी परिवार?
अनुमति न देकर भी चुप बैठी ग्राम पंचायत?
हाईवे के रखरखाव का जिम्मेदार एनएचएआई?
या फिर पूरी तरह सोया हुआ छत्तीसगढ़ का जिला प्रशासन और पुलिस विभाग?

यह कोई पहली घटना नहीं

स्थानीय लोगों का कहना है कि आनंदम मैरिज पैलेस के संचालक आए दिन हाईवे किनारे अवैध पार्किंग, सड़क पर टेंट और अब स्वागत गेट लगाकर मनमानी करते रहे हैं। बार-बार शिकायत के बावजूद न तो जिला प्रशासन और न ही एनएचएआई ने कोई ठोस कार्रवाई की है।

अब भी वक्त है, वरना…

यह स्वागत गेट अभी भी खड़ा है। एक पल की चूक, एक ट्रक का ब्रेक फेल, एक ड्राइवर की छोटी सी गलती – और पूरा इलाका मातम में डूब सकता है। क्या इंतजार है प्रशासन को? किसी के बेटे-बेटी की अर्थी निकलने का?
प्रशासन जागे, इससे पहले कि हाईवे पर लगा यह “स्वागत गेट” किसी के लिए “विदाई गेट” बन जाए।
क्या महासमुंद कलेक्टर, एसपी और एनएचएआई के अधिकारी मौके पर पहुंचकर इस अवैध निर्माण को तत्काल हटवाएंगे? या फिर एक और हादसे का इंतजार करेंगे?
जनता की जान से बड़ा कोई वीआईपी प्रोग्राम नहीं होता।
कार्रवाई होनी ही चाहिए – अभी और तुरंत!

RMA लख्मेंद्र सिन्हा ने गढ़सिवनी को छोड़ तुमगांव CHC पर जमाया कब्ज़ा

 

रिपोर्टर मयंक गुप्ता ने
महासमुंद / 25 नवंबर 2025
जिस पद का नाम ही है “ग्रामीण चिकित्सक सहायक  – जिसका एकमात्र काम है गाँव-गाँव में सरकारी स्वास्थ्य योजनाएँ पहुँचाना, लोगों को जागरूक करना, टीकाकरण चलाना, गर्भवती महिलाओं की देखभाल करना, स्वच्छता अभियान चलाना और राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (NRHM – अब NHM) को धरातल पर उतारना –
उसी पद पर बैठा RMA लख्मेंद्र सिन्हा पिछले दो साल से कुछ और ही कर रहा है।
अपना पूरा कार्यक्षेत्र गढ़सिवनी को अनाथ छोड़कर तुमगांव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में अवैध कब्ज़ा जमाए बैठा है और मरीजों को कृष्णा पैथोलॉजी लैब (तुमगांव) व महासमुंद के प्राइवेट मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटलों में ठूँसकर मोटा कमीशन कमा रहा है!

असली ड्यूटी क्या है RMA की..?

स्वास्थ्य विभाग के नियमों के अनुसार ग्रामीण चिकित्सक सहायक (RMA) का मुख्य कार्य
गाँवों में घर-घर जाकर NHM की योजनाओं की जानकारी देना
आशा कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर टीकाकरण, प्रसव पूर्व जाँच, कुपोषण सर्वे करना
ग्राम स्वास्थ्य एवं स्वच्छता समिति की बैठकें कराना
गाँव में स्वच्छ पेयजल, शौचालय उपयोग जैसे अभियान चलाना
किसी भी मरीज को प्राइवेट अस्पताल रेफर करना सख्त मना है, जब तक सरकारी सुविधा पूरी तरह खत्म न हो

लेकिन लख्मेंद्र सिन्हा कर क्या रहे हैं..?

गढ़सिवनी क्षेत्र में एक दिन भी नहीं जाते
आशा कार्यकर्ताओं से कोई मीटिंग नहीं, कोई फील्ड विजिट नहीं
टीकाकरण कवरेज, मातृ-शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रम, कुपोषण सर्वे – सब ठप
NHM के तहत मिलने वाली सारी फ्री जाँचें (ब्लड, यूरिन, अल्ट्रासाउंड) तुमगांव CHC में उपलब्ध होते हुए भी मरीजों को बाहर भेज रहे
कमीशन के लिए कृष्णा पैथोलॉजी लैब (तुमगांव) और महासमुंद के बड़े प्राइवेट हॉस्पिटलों में “पक्की सेटिंग”

गढ़सिवनी के ग्रामीणों का दर्द

गढ़सिवनी पंचायत के एक विश्वसनीय सज्जन व्यक्ति ने खुलकर कहा
“हमारे यहाँ RMA का नाम तक कोई नहीं जानता। दो साल से कोई आशा मीटिंग नहीं हुई, कोई टीकाकरण कैंप नहीं लगा। बच्चे कुपोषित हो रहे हैं, गर्भवती महिलाओं की जाँच नहीं हो रही। लख्मेंद्र साहब तो तुमगांव में बैठकर धंधा कर रहे हैं। ये ग्रामीण चिकित्सक सहायक नहीं, रेफरल दलाल हैं!”
एक आशा कार्यकर्ता (नाम गोपनीय) ने रोते हुए बताया:
“हम लोग फोन करते हैं तो कहते हैं – मैं तुमगांव में व्यस्त हूँ। NHM का सारा काम बंद पड़ा है। ऊपर से डाँटते हैं कि ज्यादा सवाल मत करो।”

सरकारी योजनाएँ हुईं लापता

जननी सुरक्षा योजना – कोई प्रचार नहीं
प्रसव पूर्व जाँच के लिए फ्री अल्ट्रासाउंड – मरीज प्राइवेट में 800-1200 रुपये खर्च कर रहे
कुपोषण उपचार केंद्र – कोई सर्वे नहीं, कोई रेफरल नहीं
स्वच्छ भारत मिशन – ग्राम स्वास्थ्य समिति की बैठक दो साल से नहीं हुई।

अब विभाग जागा, कड़ी कार्रवाई तय

जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ आई नागेश्वर राव ने बताया कि, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तुमगांव में जबरदस्ती बिना किसी आदेश के बैठे हुए है। RMA लख्मेंद्र सिन्हा को स्थानीय विधायक का संरक्षण मिलने से कोई इनका कुछ बिगाड़ नहीं पा रहा है हम भी मजबूर है।
“ग्रामीण चिकित्सक सहायक का काम गाँव में जाकर योजना लागू करना है, न कि CHC में बैठकर मरीज रेफर करना। लख्मेंद्र सिन्हा ने अपने मूल दायित्व का घोर उल्लंघन किया है। उनके खिलाफ तत्काल कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा । तीन दिन में निलंबन और गढ़सिवनी क्षेत्र में नई तैनाती होगी। साथ ही प्राइवेट लैब व हॉस्पिटल में कमीशन की जाँच अलग से होगी।”

ग्रामीणों ने दी आखिरी चेतावनी

गढ़सिवनी, तुमगांव और आसपास के 15 गाँवों के लोग एकजुट हो चुके हैं। उन्होंने घोषणा की:
“अगर 5 दिसंबर तक लख्मेंद्र सिन्हा को निलंबित कर गढ़सिवनी नहीं भेजा गया और NHM के सारे काम फिर से शुरू नहीं हुए, तो हम हजारों की संख्या में महासमुंद कलेक्टर कार्यालय और तुमगांव CHC को घेरेंगे।”

एक युवा ग्रामीण ने गुस्से में कहा

“जिस अफसर को गाँव में हमारी सेवा करनी थी, वही हमारी जेब काट रहा है। ये बर्दाश्त नहीं होगा।”
यह मामला अब सिर्फ एक RMA की करतूत नहीं, बल्कि पूरे ग्रामीण स्वास्थ्य तंत्र की नाकामी का प्रतीक बन चुका है।
सवाल यह है – कितने और लख्मेंद्र सिन्हा अभी भी गाँवों को लावारिस छोड़कर कमीशन का धंधा कर रहे हैं..?

महासमुंद में धान खरीदी का धमाकेदार सीन..!

7 दिन, 1.44 लाख क्विंटल, और किसानों के चेहरे पर दिवाली वाली रौनक…!

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुंद, 21 नवंबर 2025। मानो पूरा जिला ही धान के खेत में बदल गया हो! ट्रैक्टरों की गड़गड़ाहट, बोरियों का ढेर, और किसानों की हंसी-खुशी का शोर; महासमुंद में इस वक्त यही माहौल है। खरीफ 2025-26 की धान खरीदी ने सिर्फ 7 दिनों में ही रफ्तार नहीं, रिकॉर्ड तोड़ने का इरादा पक्का कर लिया है।
123 केंद्रों पर अब तक खरीदा गया: 1 लाख 44 हजार 506.80 क्विंटल धान
182 में से बाकी केंद्र भी 24-48 घंटे में शुरू!
कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने साफ कहा है,
“एक भी किसान को परेशान नहीं होना चाहिए। जिस केंद्र में अभी खरीदी शुरू नहीं हुई, वहां भी पूरी मशीनरी तैयार है।”

बेमचा मंडी में त्योहार सा माहौल

सुबह 9 बजे से ही लाइन लगनी शुरू हो जाती है। कौंदकेरा गांव के प्रहलाद चंद्राकर 550 बोरे लेकर पहुंचे। चेहरे पर चौड़ी मुस्कान, हाथ में चाय का गिलास और मुंह से एक ही बात:
“अरे भाई, घर बैठे ऐप से टोकन कट गया। लाइन में खड़ा होना भूल ही गए हम लोग। तौलाई एकदम पारदर्शी, बारदाना फटाफट मिल गया। विष्णुदेव साय सरकार ने तो कमाल कर दिया!”
पास में ही देवेन्द्र साहू (25 एकड़ वाले मालिक) अपनी ट्रॉली खाली करवाते हुए जोर से हंसे,
“60 क्विंटल धान बेच दिया। हमारे लिए ये दिवाली भी है, दशहरा भी है, छेरता भी है! पैसा सीधे खाते में आएगा, टेंशन जीरो। अब तो बस यही दुआ है कि ऐसे ही चलता रहे।”

खास बातें एक नजर में

✔ घर बैठे टोकन: ‘टोकन तुहर हाथ’ ऐप से सेकंडों में काम
✔ जीरो लाइन, जीरो परेशानी
✔ तौलाई डिजिटल, कोई गड़बड़ नहीं
✔ बारदाना तुरंत उपलब्ध
✔ भुगतान 48 घंटे के अंदर खाते में
✔ 5 पंचायतों के 12 गांवों के किसान बेमचा में ही उत्साह से पहुंच रहे।

अब तक का स्कोर (21 नवंबर शाम 6 बजे तक)

कुल टोकन कटे: हजारों
बेमचा समिति में अकेले: 34 किसान, 2000+ क्विंटल
किसानों का मूड: 100% खुश

महासमुंद के खेतों से मंडी तक बस एक ही नारा गूंज रहा है:
“धान नहीं बिक रहा, किसान का दिल जीत रहा है!”
अगले कुछ दिनों में बाकी केंद्र भी शुरू होते ही ये आंकड़ा दोगुना होने की पूरी उम्मीद है।
तो बस, अबकी बार… किसान का त्योहार पूरे जोर-शोर से मन रहा है!

ब्रेकिंग न्यूज़: रायपुर संभाग में किसानों को बड़ी राहत! 18 दिन बाद अनिश्चितकालीन हड़ताल खत्म, 21 नवंबर से धान उपार्जन केंद्रों पर पूरी रफ्तार से शुरू होगी खरीदी

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
रायपुर / महासमुंद 21 नवंबर 2025
जिले के हजारों किसानों के लिए राहत भरी खबर! जिला सहकारी समिति कर्मचारी संघ एवं कंप्यूटर ऑपरेटर संघ ने अपनी 18 दिन पुरानी अनिश्चितकालीन संभागीय स्तर पर संचालित हड़ताल आखिरकार बुधवार देर शाम औपचारिक रूप से समाप्त कर दी। संघ के पदाधिकारियों ने जिला प्रशासन को लिखित पत्र सौंपते हुए घोषणा की कि, गुरुवार 21 नवंबर 2025 की सुबह से सभी समिति प्रबंधक, सहायक प्रबंधक, विक्रेता, डाटा एंट्री ऑपरेटर, वेयरहाउस स्टाफ और अन्य कर्मचारी अपने-अपने धान उपार्जन केंद्रों पर उपस्थित होकर पूर्ण रूप से कार्य शुरू कर देंगे।

क्या थी पूरी कहानी..?

3 नवंबर 2025 से रायपुर संभाग के पांच जिलों में शुरू हुई यह हड़ताल महासमुंद में सबसे ज्यादा असर दिखा रही थी। कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में पुरानी पेंशन योजना की बहाली, वेतन विसंगति दूर करना, नियमितीकरण, पदोन्नति में आरक्षण और कार्यबहाली के दौरान हुई निलंबन-कार्रवाई वापस लेना आदि शामिल थे। हड़ताल के दौरान संघ ने सामूहिक इस्तीफे सौंपे, जेल भरो आंदोलन किया और धरना-प्रदर्शन भी किए।
परिणामस्वरूप जिले के 108 धान उपार्जन केंद्रों में खरीदी पूरी तरह ठप हो गई थी। किसानों को बारदाने नहीं मिले, टोकन नहीं कटे, ट्रांसपोर्टर परेशान रहे और गोदामों में पहले से रखा धान भी नहीं निकल पाया। कई केंद्रों पर तो ताले लटके दिखाई दिए।

किसानों की मजबूरी बनी हड़ताल वापसी का बड़ा कारण

संघ के जिलाध्यक्ष मनहरण साहू, सचिव घनश्याम पटेल, ऑपरेटर संघ के अध्यक्ष नरेश सahu और अन्य पदाधिकारियों ने स्पष्ट कहा,
“हमारी मांगें जायज हैं और हम उनसे पीछे नहीं हटे हैं, लेकिन किसान भाइयों का नुकसान देखकर मन नहीं माना। खेतों में धान कटाई जोरों पर है, मौसम खराब होने का डर है, मजदूर खड़े हैं, कर्ज का बोझ है। हम अन्नदाता के साथ अन्याय नहीं होने दे सकते। इसलिए शासन-प्रशासन पर भरोसा जताते हुए हम हड़ताल वापस ले रहे हैं।”

प्रशासन के साथ हुई मैराथन बैठक

बुधवार शाम 6 बजे से रात 9:30 बजे तक जिला पंचायत के सभाकक्ष में लगातार बैठक चली। इसमें अपर कलेक्टर रवि साहू ने मुख्य भूमिका निभाई। खाद्य अधिकारी अजय यादव, जिला सहकारी बैंक के प्रबंध संचालक, नोडल अधिकारी अविनाश शर्मा, उप पंजीयक द्वारिका नाथ, सहकारी संघ के महाप्रबंधक समेत सभी संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।
बैठक में प्रशासन ने कर्मचारियों को आश्वासन दिया कि उनकी मांगों को गंभीरता से लेकर शासन तक पहुंचाया जाएगा और हड़ताल वापसी के बाद कोई प्रतिशोधात्मक कार्रवाई नहीं होगी। इसके बाद संघ ने हड़ताल समाप्ति का पत्र सौंप दिया।

आज सुबह से क्या होगा..?

सभी 108 धान उपार्जन केंद्र पूरी तरह चालू हो जाएंगे
टोकन कटिंग, बारदाना वितरण, तुलाई, भुगतान सब शुरू
पहले से रजिस्टर्ड किसानों का धान तुरंत खरीदा जाएगा
नए किसानों के लिए भी स्पॉट रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था रहेगी
गोदामों में रखे पुराने धान की भी तुरंत निकासी होगी

कलेक्टर ने की अपील

अपर कलेक्टर रवि साहू ने सभी कर्मचारियों को धन्यवाद देते हुए कहा, “यह किसानों के हित में लिया गया सराहनीय कदम है। प्रशासन हर स्तर पर सहयोग करेगा। किसान भाइयों से अनुरोध है कि शांति और धैर्य बनाए रखें, अब कोई दिक्कत नहीं आएगी।”
इसके साथ ही महासमुंद जिले में रबी सीजन की सबसे बड़ी धान खरीदी अब बिना किसी रुकावट के पूरी रफ्तार पकड़ने को तैयार है। किसानों के चेहरों पर राहत और कर्मचारियों के मन में संतोष

बस बहुत हुआ अपमान..! 7000 समिति योद्धाओं ने फेंका इस्तीफा, कल से ‘जेल भरो’ आंदोलन – छत्तीसगढ़ सरकार की उल्टी गिनती शुरू…!

क्या जिला प्रशासन राजस्व विभाग और पंचायत सचिवों की बदौलत समर्थन मूल्य में धान की खरीदी करेगी या कुछ और नया माजरा नजर आने वाला है, और कितने कर्मचारियों के ऊपर प्रशासन की गाज गिरेगी..?

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
रायपुर / महासमुंद स्थानीय लोहिया चौक में विगत 03 नवम्बर 2025 से आज 17 नवंबर 2025 को समितियों के कर्मचारियों का सामूहिक इस्तीफा के बाद कल जेल भरो आंदोलन के साथ उग्र कर्मचारियों की व्यथा कथा एवं आप बीती की अजीबों गरीब दास्तान बता दे कि, छत्तीसगढ़ में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान खरीदी शुरू होने में महज कुछ ही दिन बचे हैं, लेकिन पूरा सिस्टम ठप होने की कगार पर पहुँच गया है। प्रदेश की 2058 प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों (PACS) के हजारों नियमित, संविदा और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों ने सोमवार को सामूहिक इस्तीफा दे दिया। यह इस्तीफा सीधे राज्यपाल, मुख्यमंत्री और संभागीय आयुक्त को भेजा गया है।
कर्मचारी संगठनों का साफ कहना है – “जब तक दमन बंद नहीं होता, ESMA हटाया नहीं जाता, बकाया वेतन नहीं दिया जाता और हमारी सभी माँगें पूरी नहीं होतीं, तब तक हम धान खरीदी के किसी भी काम में हिस्सा नहीं लेंगे।”

इस्तीफे की मुख्य वजहें

कई-कई महीनों से वेतन बकाया, घर चलाना मुश्किल
अवैध तरीके से लगाया गया ESMA (Essential Services Maintenance Act)
बिना वजह थाना, FIR और कोर्ट-कचहरी के चक्कर
मनमाने ढंग से सेवा मुक्ति के आदेश
कंप्यूटर ऑपरेटरों को सिर्फ 6 महीने का वेतन, जबकि साल भर काम
धान में नमी आने पर कमीशन कटौती, जबकि समय पर उठाव सरकार/मार्केटिंग फेडरेशन की जिम्मेदी है।

कर्मचारियों का दिल दहला देने वाला बयान

संयुक्त कर्मचारी संगठन के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा –
“हम अपराधी नहीं हैं कि हम पर ESMA थोपा जाए। हम सिर्फ अपना हक माँग रहे हैं, बदले में मिल रहा है जुल्म, अपमान और FIR। अब बहुत हुआ। हमने सम्मान के साथ इस्तीफा दे दिया है। अब छत्तीसगढ़ सरकार खुद आकर धान तौलें, टोकन काटें, डेटा अपलोड करें और किसानों को भुगतान करें।”

धान खरीदी पूरी तरह ठप होने का खतरा

किसान पंजीयन, टोकन वितरण, बारदाना वितरण, तौलाई, भंडारण, डेटा अपलोड, भुगतान – सब कुछ इन्हीं समिति कर्मचारियों के हाथ में होता है।
एक भी कर्मचारी काम पर नहीं आएगा तो हजारों केंद्रों पर ताला लटक जाएगा।
लाखों किसान सड़कों पर उतरने को मजबूर हो जाएँगे।

सरकार के सामने चार बड़े सवाल

क्या मुख्यमंत्री कार्यालय खुद 2058 समितियों में धान खरीदी चलाएगा?
क्या 10-15 दिन में नया स्टाफ तैयार हो जाएगा?
क्या बिना प्रशिक्षण के कोई नया व्यक्ति 48 घंटे में पूरा पोर्टल, सॉफ्टवेयर और प्रक्रिया सीख लेगा?
क्या इस बार भी किसानों का गुस्सा सड़कों पर दिखेगा..?

आंदोलन अब सिर्फ वेतन का नहीं, सम्मान का संघर्ष बन चुका है।

कर्मचारियों ने साफ कर दिया है – “अब पीछे हटना नामुमकिन है। हमने इस्तीफा दे दिया, अब सरकार चाहे तो स्वीकार कर ले या हमारी माँगें मान ले। जब तक न्याय नहीं मिलेगा, धान खरीदी के मैदान में हम नहीं उतरेंगे।”
छत्तीसगढ़ की जनता और किसान हैरान-परेशान हैं। हर तरफ एक ही सवाल –
“अगर समिति कर्मचारी ही नहीं रहेंगे तो धान खरीदी कौन करेगा?”
अब गेंद पूरी तरह सरकार के पाले में है।
या तो तुरंत वार्ता करके सभी माँगें मानी जाएँ और ESMA हटाया जाए,
या फिर प्रदेश सबसे बड़े प्रशासनिक और कृषि संकट की ओर बढ़ता दिख रहा है।
आने वाले 48-72 घंटे तय करेंगे कि इस बार किसान का धान गोदाम में पहुँचेगा या सड़क पर आंदोलन में..!

ब्रेकिंग: फर्जी DSP का धांसू ठगी कांड फेल! 72 लाख ठगकर आदिवासी महिला को लगाया चूना

छत्तीसगढ़ पुलिस ने असली हीरो बनकर पकड़ा जाल – 22 लाख फॉलोअर्स वाला फेक अकाउंट ध्वस्त!

बलरामपुर-ग्वालियर सनसनी: ठेकेदार बना DSP, असली अफसर की फोटो से रचा 72 लाख का ‘ऑपरेशन ठग’! पुलिस का ड्रामाई एनकाउंटर, अब ठग की शामत!

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
बलरामपुर (छत्तीसगढ़)। सुपर शातिर ठग का सुपर फ्लॉप शो! छत्तीसगढ़ पुलिस ने एक ऐसे फर्जी DSP को धर दबोचा, जिसने मध्य प्रदेश के असली DSP संतोष पटेल की फोटो चुराकर सोशल मीडिया पर 2.2 मिलियन (22 लाख) फॉलोअर्स का साम्राज्य खड़ा किया और आदिवासी महिला से नौकरी के नाम पर 72 लाख रुपये लूट लिए! लेकिन पुलिस का दिमागी दांव और असली DSP का सहयोग देखकर ठग के होश उड़ गए। अब ठेकेदार से DSP बना ठग सलाखों के पीछे जाने को बेताब!

कैसे रचा गया 72 लाख का ‘DSP ड्रामा’..?

शिकार: बलरामपुर की आदिवासी महिला।
लालच: “मैं MP पुलिस का DSP हूँ, सरकारी नौकरी दिलाऊंगा!”
हथियार: असली DSP संतोष पटेल की वर्दी वाली फोटो, फर्जी प्रोफाइल, 22 लाख फॉलोअर्स वाला इंस्टाग्राम अकाउंट।
टोटका: रिश्वत, फाइल चार्ज, ट्रांसफर फीस के नाम पर कई किश्तों में 72 लाख उड़ाए!
महिला ने जैसे ही FIR ठोकी, कुसमी थाना की टीम ने ‘ऑपरेशन फेक DSP’ लॉन्च कर दिया।

पुलिस का मास्टरस्ट्रोक: ग्वालियर से बालाघाट तक हाई-वोल्टेज चेज..!

लोकेशन ट्रेस: फर्जी DSP का IP ग्वालियर दिखा।
असली DSP को फोन: संतोष पटेल (अब बालाघाट हॉक फोर्स में असिस्टेंट कमांडेंट) को खबर – “आपको छत्तीसगढ़ पुलिस ढूंढ रही है!”
ड्रामाई मुलाकात: संतोष पटेल ने SI को बालाघाट बुलाया। आमने-सामने हुआ शॉकिंग खुलासा –
“ये मेरी फोटो है, लेकिन ठग ठेकेदार है!”

ठग की असली पहचान DSP नहीं, ठेकेदार..!

नाम: अभी गोपनीय (गिरफ्तारी में देरी न हो)
प्रोफेशन: ठेकेदारी, अब ठगी का ठेका!
हथकंडा: असली DSP की पुरानी ग्वालियर पोस्टिंग की फोटो चुराई, फर्जी प्रोफाइल बनाया, लाखों फॉलोअर्स खरीदे या फर्जी तरीके से बढ़ाए।
शिकार लिस्ट: सिर्फ एक महिला नहीं, कई और लोग भी जाल में!

पुलिस का धमाकेदार ऐक्शन प्लान

स्टेप
ऐक्शन
1
ठग का अकाउंट फ्रीज, IP ट्रेस
2
ठेकेदार की लोकेशन लॉक, छापेमारी टीम रवाना
3
72 लाख की रिकवरी के लिए बैंक ट्रांजेक्शन चेक
4
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को नोटिस – फर्जी अकाउंट डिलीट
बलरामपुर SP का ऐलान: “24 घंटे में ठग गिरफ्तार, 72 लाख वापस! सोशल मीडिया ठगों की अब खैर नहीं!”

असली DSP संतोष पटेल का गुस्सा

“मेरी वर्दी और नाम का दुरुपयोग? अब ठग को असली सलाखें दिखेंगी!”

संदेश ठगों को सबक, जनता को अलर्ट..!

नौकरी के नाम पर पैसे? ❌ थाने में शिकायत!
DSP की फोटो, लाखों फॉलोअर्स? ❌ वीडियो कॉल मांगो, ID चेक करो!
सोशल मीडिया = ठगों का अड्डा? ✅ पुलिस अब AI से ट्रैक कर रही!
अगला अपडेट: ठग की गिरफ्तारी का LIVE ड्रामा – 72 लाख की रिकवरी कब?

धान खरीदी में लापरवाही बर्दाश्त नहीं: कलेक्टर विनय कुमार लंगेह की सख्त चेतावनी

134 प्रभारी प्रबंधकों और 126 ऑपरेटरों को अंतिम नोटिस

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुंद / 16 नवंबर 2025, जिला मुख्यालय
धान खरीदी के पहले दिन ही जिले में बड़ी संख्या में प्रभारी प्रबंधक और कंप्यूटर ऑपरेटरों की अनुपस्थिति सामने आने पर कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने कड़ा रुख अपनाते हुए तत्काल कार्रवाई की। जिले के कुल 182 उपार्जन केंद्रों में से मात्र 48 प्रभारी प्रबंधक और 56 डाटा एंट्री ऑपरेटर ही ड्यूटी पर उपस्थित पाए गए। शेष 134 प्रभारी प्रबंधकों और 126 ऑपरेटरों को कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने व्यक्तिगत रूप से हस्ताक्षरित अंतिम चेतावनी पत्र जारी करते हुए तत्काल ड्यूटी जॉइन करने के सख्त निर्देश दिए।
कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि निर्धारित समय में उपस्थिति नहीं हुई तो नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित कर्मचारी की होगी। उन्होंने कहा, “धान खरीदी किसानों के हित का मामला है। इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनुपस्थिति बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”

ESMA लागू: कार्य से इंकार पर होगी कानूनी कार्रवाई

राज्य शासन के निर्देशानुसार 15 नवंबर 2025 से 31 जनवरी 2026 तक खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के लिए धान खरीदी अवधि में छत्तीसगढ़ अत्यावश्यक सेवा संधारण तथा विच्छिन्नता निवारण अधिनियम (ESMA) को पूरे जिले में तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।
कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने इस अधिनियम के तहत सभी धान खरीदी केंद्रों में तैनात अधिकारियों-कर्मचारियों को अत्यावश्यक सेवा में कार्य करने से इंकार करने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। उन्होंने सभी अनुविभागीय अधिकारियों (SDMs) को ESMA का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के लिखित निर्देश जारी किए हैं।
“ESMA के प्रावधानों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ तुरंत कानूनी कार्रवाई होगी। कोई छूट नहीं दी जाएगी।”
— कलेक्टर विनय कुमार लंगेह

पहले दिन की स्थिति: केवल 26% प्रभारी और 31% ऑपरेटर मौजूद

कुल केंद्र: 182
उपस्थित प्रभारी प्रबंधक: 48 (केवल 26%)
उपस्थित ऑपरेटर: 56 (केवल 31%)
अनुपस्थित प्रभारी: 134
अनुपस्थित ऑपरेटर: 126
कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने सभी केंद्रों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग के लिए विशेष टीम गठित की है। साथ ही, अनुपस्थित कर्मचारियों के विरुद्ध कारण बताओ नोटिस जारी करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

किसानों से अपील: धैर्य रखें, व्यवस्था दुरुस्त की जा रही

कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने किसानों से अपील की है कि पहले दिन कुछ असुविधाएं हो सकती हैं, लेकिन 24 घंटे के भीतर सभी केंद्र पूरी तरह सक्रिय कर दिए जाएंगे। उन्होंने आश्वासन दिया कि समर्थन मूल्य पर धान खरीदी सुचारु रूप से चलेगी और किसी भी किसान को परेशानी नहीं होने दी जाएगी।
यह कार्रवाई जिले में धान खरीदी व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने की दिशा में कलेक्टर विनय कुमार लंगेह की सख्त प्रशासकीय इच्छाशक्ति का प्रमाण है।

धान खरीदी 2025 महासमुंद में 182 में से 18 केंद्रों पर टोकन फेल! कल से शुरू, पर किसान लाइन में लटके – प्रशासन है ब्रो..!

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुंद | 16 नवंबर 2025 धान खरीदी महोत्सव
शुभारंभ तो हुआ, लेकिन टोकन नहीं कटा – किसान बोले: “प्रशासन है ब्रो, पर सिस्टम कहाँ है..?”
छत्तीसगढ़ में धान खरीदी का महाउत्सव कल (15 नवंबर) से शुरू हुआ। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पूरे राज्य को संबोधित किया। महासमुंद जिले में 182 उपार्जन केंद्रों पर ताले खुले, पूजा हुई, रिबन कटा – लेकिन 18 केंद्रों पर टोकन ही नहीं कटा..!

किसान सुबह 6 बजे से लाइन में, पर ‘तुहर टोकन’ ऐप क्रैश, सर्वर डाउन, कर्मचारी गायब – और जवाब मिला: “प्रशासन है ब्रो..!”

महासमुंद ग्राउंड जीरो रिपोर्ट – कहाँ हुई खरीदी, कहाँ फेल..?

क्षेत्र
केंद्र संख्या
खरीदी शुरू?
टोकन स्टेटस
मुख्य समस्या
झालखमहरिया
1
✅ हाँ (पहला धान खरीदा)
✅ 120 टोकन कटे
कोई दिक्कत नहीं
महासमुंद शहर
12
✅ 10 में शुरू
⚠️ 2 में देरी
सर्वर स्लो
सरायपाली
28
❌ 8 में पूरी तरह बंद
❌ टोकन नहीं
कर्मचारी हड़ताल
बसना
35
✅ 30 में शुरू
❌ 5 में टोकन फेल
ऐप क्रैश
पिथौरा
22
✅ 20 में शुरू
❌ 3 में टोकन नहीं
बिजली/नेटवर्क
बागबाहरा
84
✅ 79 में शुरू
❌ 2 में टोकन रुका
स्टाफ कम
कुल: 182 में से 164 केंद्रों पर खरीदी शुरू
18 केंद्रों पर टोकन कटाई पूरी तरह ठप
95% केंद्र चालू, 5% फेल – लेकिन 5% का मतलब 12,000+ किसान प्रभावित!

किसान की जुबानी: “लाइन में खड़े-खड़े धूप में पसीना, टोकन नहीं – प्रशासन है ब्रो?”

दुर्गेश साहू (झालखमहरिया):
“मैं पहला किसान था जिसका धान खरीदा गया। 40 क्विंटल, ₹3,200/क्विंटल। टोकन सुबह 7 बजे कटा। लेकिन मेरे पड़ोस के गांव बागबाहरा में भाई लोग 11 बजे तक लाइन में थे, टोकन नहीं मिला।”
रामेश्वर साहू (सरायपाली):
“समिति बंद थी। ताला लगा था। बोर्ड पर लिखा – ‘कर्मचारी हड़ताल के कारण बंद’। हम 15 किमी दूर से धान लेकर आए। अब क्या करें? प्रशासन है ब्रो, पर यहाँ कोई नहीं!”

प्रशासन का जवाब: “हड़ताल का असर, लेकिन 24 घंटे में ठीक करेंगे”

कलेक्टर विनय लंगेह ने रात 10 बजे मीटिंग की:
“18 केंद्रों की लिस्ट बनाई गई। आज सुबह 6 बजे तक वैकल्पिक स्टाफ (वन विभाग, राजस्व, शिक्षा) तैनात। मोबाइल टोकन वैन 10 गांवों में भेजी गई।”
SDM बसना ने कहा:
“सर्वर लोड की वजह से ऐप हैंग हुआ। ऑफलाइन टोकन मॉड्यूल एक्टिवेट कर दिया। अब SMS से भी टोकन मिलेगा।”
हेल्पलाइन 0771-2222200 पर 300+ कॉल्स पहले 6 घंटे में।

क्या है नया सिस्टम? (जो फेल हो रहा है!)

फीचर
क्या था प्लान
क्या हो रहा ग्राउंड पर
तुहर टोकन ऐप
ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन + स्लॉट
⚠️ क्रैश, OTP नहीं आ रहा
च्वाइस सेंटर
किसान चुनें केंद्र
❌ लाइन में धक्का-मुक्की
ऑफलाइन बैकअप
पंचायत में मैनुअल
✅ अब शुरू, लेकिन देर से
SMS टोकन
वैकल्पिक

आज से चालू
आज (16 नवंबर) का प्लान प्रशासन की कवायद

समय
कार्रवाई
सुबह 5:00 बजे
18 फेल केंद्रों पर वैकल्पिक स्टाफ पहुँचेगा
सुबह 6:00 बजे
10 मोबाइल वैन गाँव-गाँव टोकन काटेंगी
सुबह 8:00 बजे
कलेक्टर फील्ड विजिट – सरायपाली, बसना
दोपहर 12:00 बजे
SMS से 50,000 किसानों को टोकन भेजा जाएगा

किसान भाइयों के लिए तुरंत टिप्स (ब्रो स्टाइल! )

ऐप मत खोलो अभी – सर्वर डाउन है।
ग्राम पंचायत जाओ – ऑफलाइन टोकन मिल रहा।
SMS चेक करो – 56767 पर DHAN<स्पेस>आधार नंबर भेजो।
हेल्पलाइन: 0771-2222200 (24×7)
अगर धान तैयार है – आज ही समिति पहुँचो, पहले आओ पहले पाओ!

आखिरी लाइन: प्रशासन है ब्रो, लेकिन सिस्टम को अपडेट चाहिए!

धान खरीदी 2025 का पहला दिन: 50% उत्साह, 30% सफलता, 20% अफरा-तफरी।
लेकिन आज शाम तक 100% केंद्र चालू करने का वादा है।

**कलेक्टर साहब फील्ड में, CM मॉनिटरिंग कर रहे – अब देखना ये कि “प्रशासन है ब्रो” का मतलब काम बने या सिर्फ डायलॉग!
अपडेट के लिए जुड़े रहें – हम ग्राउंड से लाइव रिपोर्टिंग कर रहे हैं!
अगला बुलेटिन: शाम 6 बजे – “टोकन मिला या नहीं?”
जय जोहार! जय किसान!

जनजातीय गौरव दिवस केशव चंद्राकर ने सैकड़ों को दिलाई ‘नायकों के आदर्शों से समाज-सेवा’ की शपथ

बागबाहरा में ऐतिहासिक समारोह

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
बागबाहरा (महासमुंद), 15 नवंबर 2025: धरतीपुत्र भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर मनाए जा रहे जनजातीय गौरव दिवस को जनपद पंचायत बागबाहरा ने एक ऐतिहासिक और प्रेरणादायी आयोजन में बदल दिया। सैकड़ों की संख्या में एकत्रित आदिवासी भाई-बहन, जनप्रतिनिधि, अधिकारी और ग्रामीणों के बीच मुख्य अतिथि जनपद अध्यक्ष केशव चंद्राकर ने न केवल वीर नारायण सिंह और वीर गुंडाधुर को सलाम किया, बल्कि सभी को उनके आदर्शों पर चलते हुए समाज-सेवा की शपथ दिलाई।
यह आयोजन सिर्फ एक औपचारिकता नहीं, बल्कि आदिवासी अस्मिता, संघर्ष और विकास की नई गाथा का साक्षी बना।

सुबह से शुरू हुआ उत्साह, शाम तक गूंजती रहीं जयकारें

सुबह 10 बजे से ही जनपद परिसर में पारंपरिक ढोल-मांदर की थाप और बिरसा मुंडा, वीर नारायण सिंह व गुंडाधुर के नारे गूंजने लगे। कार्यक्रम स्थल को आदिवासी संस्कृति की झलक से सजाया गया था। मंच के ठीक सामने तीनों नायकों की विशाल प्रतिमाएं स्थापित की गईं, जिनके सामने पुष्पांजलि और दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ।

मुख्य अतिथि केशव चंद्राकर का धमाकेदार आगमन

जैसे ही जनपद अध्यक्ष केशव चंद्राकर का काफिला परिसर में दाखिल हुआ, पूरा सभागार तालियों और नारों से गूंज उठा। केशव चंद्राकर ने सबसे पहले बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और दो मिनट का मौन रखकर तीनों नायकों को श्रद्धांजलि दी।

नायकों की गाथा सीईओ ने सुनाई अनसुनी कहानियां

जनपद सीईओ एम.एल. मंडावी और एडिशनल सीईओ जी.आर. बरिहा ने मंच पर आकर पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन के जरिए नायकों की कहानियां सुनाईं:
कैसे बिरसा मुंडा ने ब्रिटिश नीतियों के खिलाफ विद्रोह का बिगुल फूंका।
कैसे वीर नारायण सिंह ने 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में छत्तीसगढ़ का नेतृत्व किया।
कैसे गुंडाधुर ने 1910 में बस्तर विद्रोह की कमान संभाली।

क्लाइमेक्स: केशव चंद्राकर ने दिलाई ऐतिहासिक शपथ

मुख्य अतिथि केशव चंद्राकर ने मंच पर आते ही तीनों नायकों को “राष्ट्रनायक” घोषित किया। फिर दाहिना हाथ उठाकर पूरे सभागार को यह शपथ दिलाई:
“मैं शपथ लेता हूं कि बिरसा, नारायण और गुंडाधुर के आदर्शों को जीवन में उतारूंगा।
समाज में भाईचारा बढ़ाऊंगा।
जनहित के हर कार्य में हिस्सा लूंगा।
आदिवासी संस्कृति को संरक्षित करूंगा।”
सैकड़ों लोगों ने एक स्वर में शपथ दोहराई – यह दृश्य ऐतिहासिक था।

सम्मान समारोह आदि कर्मयोगी सम्मानित

आयोजन का सबसे हृदयस्पर्शी हिस्सा रहा सम्मान समारोह। मुख्य अतिथि केशव चंद्राकर ने स्वयं महिला कर्मियों को शॉल, श्रीफल और प्रशस्ति पत्र भेंट किए।
आदि कर्मयोगी अभियान में उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित होने वालों में शामिल रहीं:
मीना चंद्राकर
भावना गुप्ता
रमा अग्रवाल
जामिनी बरिहा
सरोजिनी आदित्य
नूतन ध्रुव
हीरा ध्रुव
चित्रा शर्मा
मनिका ठाकुर
शकुंतला चौहान
तुलेश्वरी खूंटे
सीमा नायक
रूपा पारेशर
केशव चंद्राकर ने कहा, “ये महिलाएं ही असली बिरसा मुंडा हैं – समाज के लिए लड़ रही हैं।”

महिला अधिकारी मीना चंद्राकर का संदेश

मीना चंद्राकर ने कहा:
“जनजातीय गौरव दिवस संस्कृति का उत्सव है। हमें अपनी परंपरा को अगली पीढ़ी तक पहुंचाना है।”

संचालन में कमाल ऐकाल देव निषाद की तारीफ

ऐकाल देव निषाद ने हिंदी और छत्तीसगढ़ी में संचालन कर सबका दिल जीत लिया। उनकी कविता पंक्तियां – “बिरसा की हुंकार, नारायण का बलिदान, गुंडाधुर का पराक्रम – यही हमारा सम्मान” – ने बार-बार तालियां बटोरीं।

समापन: ढोल की थाप पर नाच और जोहार

कार्यक्रम का समापन आदिवासी नृत्य और “जय बिरसा, जय जोहार” के नारों के साथ हुआ।
केशव चंद्राकर ने घोषणा की:
“अगले साल जनजातीय गौरव दिवस को और भव्य बनाएंगे। हर पंचायत में बिरसा मुंडा की प्रतिमा लगेगी।”

यह आयोजन बागबाहरा के लिए एक नई शुरुआत था – जहां इतिहास ने वर्तमान को दिशा दी और भविष्य को प्रेरणा।

बागबाहरा में बच्चों की सुरक्षा पर जनपद अध्यक्ष केशव नायक का सख्त तेवर

7 दिन में जर्जर आंगनबाड़ी भवनों की रिपोर्ट, नहीं चलेगी लापरवाही..!

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
बागबाहरा (महासमुंद)। “बच्चों की जान से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं होगा!” – यह साफ संदेश देते हुए जनपद पंचायत अध्यक्ष केशव नायक राम चंद्राकर ने आज आंगनबाड़ी केंद्रों की बदहाल अधोसंरचना पर ऐतिहासिक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। 381 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और 13 सेक्टर पर्यवेक्षकों की मौजूदगी में अध्यक्ष नायक ने हर केंद्र की भवन स्थिति, शौचालय, पेयजल और सुरक्षा व्यवस्था पर खुद एक-एक बिंदु पर सवाल उठाए और अधिकारियों को 7 दिन की सख्त डेडलाइन दी।

अध्यक्ष नायक का साफ आदेश: “सुरक्षा पहले, बाकी बाद में!”

बैठक की शुरुआत में ही जनपद अध्यक्ष केशव नायक ने सभी पर्यवेक्षकों को खरी-खोटी सुनाते हुए कहा –
“आंगनबाड़ी भवन अगर जर्जर है, तो बच्चे वहां क्यों पढ़ रहे? यह आपकी जिम्मेदारी है कि हर बच्चा सुरक्षित हो। 7 दिन में पूरी रिपोर्ट मेरे टेबल पर होनी चाहिए।”
उन्होंने अभियंताओं को तुरंत मैदानी निरीक्षण के आदेश दिए और कहा कि संयुक्त टीम (अभियंता + पर्यवेक्षक + सरपंच + सचिव) हर केंद्र का वास्तविक स्टीमेट तैयार करेगी।
“रिपोर्ट में झूठ या औपचारिकता मिली, तो सीधे कार्रवाई होगी।” – केशव नायक

खतरनाक भवनों के लिए तत्काल वैकल्पिक इंतजाम

अध्यक्ष नायक ने साफ कहा –
“जहां भवन जानलेवा है, वहां पढ़ाई तुरंत रोको। स्कूल, पंचायत भवन या किराए का मकान – कोई भी सुरक्षित जगह चुनो। बजट की कमी आड़े नहीं आएगी।”
उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि सुरक्षा से समझौता करने वाले किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा।

शिक्षा और पोषण में गुणवत्ता का नया मानक

जनपद अध्यक्ष केशव नायक ने आंगनबाड़ी को “केवल राशन की दुकान” नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य की पहली सीढ़ी बताया। उनके नेतृत्व में यह तय हुआ कि:
हर केंद्र में खेल सामग्री और शिक्षण किट अनिवार्य।
साफ-सफाई और शौचालय-पेयजल की कमी तुरंत दूर हो।
पोषण पुनर्वास (एनआरसी) की गुणवत्ता में कोई कोताही नहीं।

अध्यक्ष नायक के साथ पूरी टीम मैदान में

बैठक में मुख्य कार्यपालन अधिकारी एमएल मंडावी, सभापति मधुलिका चंद्राकर, मनरेगा प्रभारी खूबचंद वर्मा, एडिशनल सीईओ जीआर बारिहा और कई सरपंच मौजूद रहे।
उल्लेखनीय सरपंच:
एडिशन ठाकुर
पद्मिनी बांधे
जितेंद्र साहू
सुशीला लाखाराम साहू
पर्यवेक्षक: भावना गुप्ता, जमीनी बारिहा, सरोजनी आदित्य, चित्रा शर्मा आदि।

बागबाहरा के बच्चों का भविष्य अब सुरक्षित हाथों में

जनपद अध्यक्ष केशव नायक राम चंद्राकर के इस सख्त और संवेदनशील नेतृत्व से बागबाहरा के 381 आंगनबाड़ी केंद्रों में नया बदलाव आने वाला है। अगले 7 दिन में जर्जर भवनों की सूची, मरम्मत प्लान और वैकल्पिक व्यवस्था की पूरी कार्ययोजना तैयार हो जाएगी।

मेरा संकल्प है – हर बच्चा सुरक्षित, स्वस्थ और शिक्षित हो।”

– केशव नायक राम चंद्राकर, जनपद अध्यक्ष