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महासमुंद जिला दंडाधिकारी विनय कुमार लंगेह का चला प्रशासनिक डंडा घोंच सहकारी समिति में पुराना धान खपाने, घटिया गुणवत्ता और तौलाई में हेरफेर..!

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प्रबंधक निलंबित, एफआईआर के आदेश – जिले के सभी प्रभारी और नोडल अधिकारी लगे जांच-निगरानी में

रिपोर्टर
महासमुंद / 15 जनवरी 2026 – महासमुंद जिले में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और किसान-केंद्रित बनाने के लिए कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने एक बार फिर कड़ा रुख अपनाया है। आज उन्होंने विकासखंड पिथौरा के अंतर्गत प्राथमिक कृषि एवं साख सहकारी समिति घोंच का अचानक (औचक) निरीक्षण किया, जहां धान उपार्जन में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं।

निरीक्षण के दौरान सामने आई मुख्य गड़बड़ियां

पुराने रबी सीजन का धान इस साल की खरीदी में जानबूझकर शामिल करने की कोशिश की गई, जो शासन के नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है।

निम्न गुणवत्ता वाला (घटिया और अमानक स्तर का) धान खरीदे जाने के ठोस प्रमाण मिले, जिससे किसानों को उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा था।

तौलाई (वजन कांटा) में बड़े स्तर पर हेरफेर और गड़बड़ी पाई गई, जो भ्रष्टाचार की ओर इशारा करती है।

इन गंभीर अनियमितताओं पर कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने तुरंत कार्रवाई करते हुए समिति के प्रबंधक को तत्काल निलंबित करने के आदेश दिए। साथ ही पूरे प्रकरण में एफआईआर दर्ज कराने के सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। कलेक्टर ने स्पष्ट चेतावनी दी कि, धान खरीदी व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही, भ्रष्टाचार या किसानों के साथ धोखाधड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। दोषी पाए जाने पर चाहे कोई भी पदाधिकारी हो, उसके खिलाफ कठोर कानूनी और विभागीय कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
जिले में सतत निगरानी और जांच का अभियान तेज इस घटना के बाद जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। कलेक्टर के निर्देश पर सभी धान उपार्जन केंद्रों के प्रभारी, नोडल अधिकारी, सहकारी निरीक्षक और संबंधित विभागीय अधिकारी लगातार समिति और केंद्रों का दौरा कर रहे हैं। वे स्टेकिंग, बारदाना गुणवत्ता, तौलाई प्रक्रिया, नमी मापन, गुणवत्ता जांच और किसानों की टोकन व्यवस्था की सघन जांच कर रहे हैं। हाल के दिनों में भी कई केंद्रों पर अव्यवस्था पाए जाने पर प्राधिकृत अधिकारियों को पद से हटाया गया है और अवैध धान जब्ती का सिलसिला जारी है।

मौके पर मौजूद प्रमुख अधिकारी

एसडीएम पिथौरा बजरंग वर्मा

खाद्य अधिकारी अजय यादव

जिला विपणन अधिकारी आशुतोष कोसरिया

कलेक्टर ने सभी अधिकारियों को फिर से निर्देश दिए कि, जिले के हर उपार्जन केंद्र पर निरंतर और सतर्क निगरानी रखी जाए। शासन के सभी दिशा-निर्देशों का पूर्ण पालन सुनिश्चित किया जाए, ताकि किसानों को कोई परेशानी न हो और खरीदी प्रक्रिया सुचारू रूप से चले।
यह कार्रवाई महासमुंद जिले में कलेक्टर विनय कुमार लंगेह की जीरो टॉलरेंस नीति का एक और मजबूत उदाहरण है। प्रशासन का यह कदम न केवल भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने में सहायक साबित हो रहा है, बल्कि हजारों किसानों में विश्वास भी बढ़ा रहा है कि, उनकी मेहनत की उपज को उचित मूल्य और पारदर्शी तरीके से खरीदा जाएगा। भविष्य में ऐसी अनियमितताओं पर पूरी तरह रोक लगाने की दिशा में जिला प्रशासन का अभियान तेजी से चल रहा है।

महासमुंद जिले में धान खरीदी का नया कीर्तिमान कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने पौंसरा और खरोरा केंद्रों का किया सख्त निरीक्षण, राज्य में सबसे आगे..!

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रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुंद / 14 जनवरी 2026: छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में खरीफ धान उपार्जन अभियान जोर-शोर से चल रहा है। जिला प्रशासन की सतत निगरानी और पारदर्शी व्यवस्था के कारण यहां धान खरीदी राज्य में सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गई है। आज कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने ग्राम पौंसरा और खरोरा स्थित धान उपार्जन केंद्रों का अचानक दौरा किया और खरीदी प्रक्रिया की गहन समीक्षा की।
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने केंद्रों पर मौजूद सभी सुविधाओं जैसे तौल प्रणाली, किसान टोकन व्यवस्था, धान प्रबंधन, स्टैकिंग और ऑनलाइन रिकॉर्डिंग सिस्टम का बारीकी से जायजा लिया। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि खरीदी प्रक्रिया में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित करने को सर्वोच्च प्राथमिकता बताई गई।
कलेक्टर ने मौके पर मौजूद किसानों से सीधे संवाद किया, उनकी समस्याएं सुनीं और आश्वासन दिया कि प्रशासन निरंतर मॉनिटरिंग के माध्यम से पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और सुगम बनाए रख रहा है। उन्होंने केंद्र प्रभारियों को निर्देशित किया कि धान की स्टैकिंग, वजन मापन और डिजिटल रिकॉर्ड को नियमित रूप से अपडेट किया जाए। किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को तुरंत ठीक करने के सख्त आदेश दिए गए।
खास बात यह रही कि कलेक्टर ने अनावश्यक धान भंडारण को रोकने पर जोर दिया। मिलर्स और परिवहन एजेंसियों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित कर धान के तेजी से उठाव सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि बारिश या अन्य प्राकृतिक कारणों से अनाज को कोई नुकसान न पहुंचे। जिन केंद्रों पर उठाव की गति धीमी है, वहां तत्काल सुधार लाने और दैनिक प्रगति की लगातार निगरानी करने को कहा गया।
जिले की शानदार उपलब्धि
राज्य सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप महासमुंद जिले में धान खरीदी पूरी पारदर्शिता और सुव्यवस्थित ढंग से चल रही है। 13 जनवरी 2026 की स्थिति के अनुसार, जिले के कुल 182 धान उपार्जन केंद्रों के माध्यम से अब तक 6 लाख 88 हजार 326 मीट्रिक टन से अधिक धान की खरीदी पूरी हो चुकी है, जो पूरे छत्तीसगढ़ में सर्वाधिक है।
इसके अलावा, मिलर्स द्वारा अब तक लगभग 2 लाख 37 हजार मीट्रिक टन धान का उठाव किया जा चुका है, जबकि 4 लाख 89 हजार 421 मीट्रिक टन धान का डिलीवरी ऑर्डर (डी.ओ.) जारी हो चुका है। यह आंकड़े जिले की मजबूत प्रशासनिक व्यवस्था और किसान-हितैषी नीतियों का प्रमाण हैं।
कलेक्टर विनय कुमार लंगेह के सक्रिय नेतृत्व में महासमुंद जिला धान उत्पादक किसानों के लिए एक आदर्श बनता जा रहा है। प्रशासन का यह प्रयास न केवल किसानों को उचित मूल्य दिला रहा है, बल्कि राज्य स्तर पर भी खरीदी के मानकों को ऊंचा उठा रहा है। अभियान अंत तक इसी गति से जारी रहेगा, ताकि हर पंजीकृत किसान को निर्बाध लाभ मिल सके।

वन विभाग की ताबड़तोड़ छापेमारी महासमुंद में अवैध सागौन लकड़ी का बड़ा जखीरा बरामद, आरोपी ने कबूला जुर्म

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रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुंद (छत्तीसगढ़) 13 जनवरी 2026 छत्तीसगढ़ के महासमुंद वन मंडल में एक बड़ी सफलता हाथ लगी है, जहां वन अधिकारियों ने गुप्त सूचना के आधार पर ग्राम जम्हर में एक घर पर छापा मारकर अवैध रूप से काटी गई सागौन की कीमती लकड़ी जब्त की है। इस कार्रवाई में सागौन के लट्ठे और चिरान सहित लगभग 1 लाख 32 हजार रुपये मूल्य की ईमारती लकड़ी बरामद हुई, जो जंगल से चोरी-छिपे काटकर घर की बाड़ी में छिपाई गई थी। आरोपी ने पूछताछ में स्वीकार किया कि उसने अपनी बेटी की शादी के लिए फर्नीचर बनवाने के उद्देश्य से मजदूरों से जंगल से लकड़ी मंगवाई थी। वन विभाग की इस सख्त कार्रवाई से अवैध कटाई पर लगाम लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है, जो पर्यावरण संरक्षण के लिए एक मिसाल बन सकती है।
घटना की शुरुआत एक मुखबिर की विश्वसनीय सूचना से हुई, जिसके आधार पर वन परिक्षेत्र पिथौरा की टीम ने 13 जनवरी 2026 को तड़के सुबह ग्राम जम्हर में सीताराम चौधरी के घर पर दबिश दी। सीताराम, जो गणेशराम चौधरी का पुत्र है, के घर और बाड़ी की गहन तलाशी ली गई। जांच के दौरान अधिकारियों को घर के अंदर और बाड़ी के पैरा (घास-फूस) में छिपाए गए सागौन के गोले मिले, जो लगभग एक सप्ताह पहले पास के जंगल से काटकर लाए गए थे। अधिकारियों का अनुमान है कि यह लकड़ी सांगा (एक प्रकार का जंगल क्षेत्र) से अवैध रूप से प्राप्त की गई थी। आरोपी ने पूछताछ में बताया कि उसका इरादा सिर्फ व्यक्तिगत उपयोग के लिए फर्नीचर तैयार करवाना था, लेकिन यह कार्य भारतीय वन अधिनियम के तहत गंभीर अपराध माना जाता है।
यह पूरी कार्रवाई वन मंडलाधिकारी मयंक पांडेय के सीधे निर्देशन में संपन्न हुई, जबकि संयुक्त वन मंडलाधिकारी डिम्पी बैस ने मार्गदर्शन प्रदान किया। ऑपरेशन का नेतृत्व वन परिक्षेत्र अधिकारी शालिकराम डड़सेना ने किया, जिनकी टीम में सहायक परिक्षेत्र अधिकारी पश्चिम पिथौरा ननकुशिया साहू, ललित पटेल, परिसर रक्षी जम्हर मोहम्मद रज्जाक, परिसर रक्षी राजाडेरा प्रीतराम साहू, शुभम तिवारी, कोकिल कांत दिनकर, विरेंद्र बंजारे, कुलेश्वर डड़सेना, प्रभा ठाकुर, दीपिका रात्रे, पुष्पा नेताम जैसे अधिकारी और कर्मचारी शामिल थे। इसके अलावा, सुरक्षा श्रमिकों और स्थानीय जन प्रतिनिधियों की मौजूदगी में यह छापेमारी की गई, जिससे पारदर्शिता सुनिश्चित हुई। जब्त की गई वन संपदा को तुरंत काष्ठागार पिथौरा ले जाया गया, जहां आगे की जांच और मूल्यांकन किया जाएगा।
कानूनी रूप से, इस मामले में वन अपराध प्रकरण संख्या 13417/25 दर्ज किया गया है, जो भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 33 के अलावा लोक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम 1984 और अन्य संबंधित धाराओं के तहत है। वन विभाग के अधिकारी बताते हैं कि ऐसी अवैध कटाई न केवल वन संपदा को नुकसान पहुंचाती है, बल्कि पर्यावरण संतुलन को भी बिगाड़ती है। सागौन जैसी मूल्यवान लकड़ी की चोरी जंगलों की जैव विविधता पर गहरा असर डालती है, और इससे जुड़े अपराधों पर सख्ती बरतना जरूरी है। आरोपी सीताराम चौधरी से पूछताछ अभी भी जारी है, और जांच में और भी खुलासे होने की संभावना है। यदि कोई अन्य व्यक्ति इसमें शामिल पाया जाता है, तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
वन विभाग ने अपील की है कि ग्रामीण क्षेत्रों में जंगलों की रक्षा के लिए स्थानीय समुदाय सक्रिय भूमिका निभाएं और ऐसी अवैध गतिविधियों की सूचना तुरंत दें। इस घटना से साफ है कि वन संरक्षण के लिए सतर्कता और त्वरित कार्रवाई कितनी महत्वपूर्ण है। आगे की जांच रिपोर्ट आने पर मामले में और विवरण सामने आएंगे।

सब्जी से उंगलियों के राज खोलने वाला पाउडर! मृणाल विदानी की अनोखी खोज ने छत्तीसगढ़ को गौरवान्वित किया, मिला प्रतिष्ठित ‘युवा रत्न’

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महासमुंद से मास्टर्स तक का सफर: मृणाल विदानी ने स्थानीय संसाधनों से फोरेंसिक में क्रांति लाई, CM ने दिया 1 लाख का ‘युवा रत्न’ सम्मान

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
रायपुर / 13 जनवरी 2026 छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले की प्रतिभाशाली बेटी मृणाल विदानी ने नवाचार के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाते हुए राज्य स्तरीय युवा रत्न सम्मान से सम्मानित होने का गौरव प्राप्त किया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर आयोजित भव्य समारोह में उन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया।

यह सम्मान खेल एवं युवा कल्याण विभाग, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा कन्वेंशन हॉल, सर्किट हाउस, रायपुर में आयोजित किया गया। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री एवं खेल मंत्री अरुण साव तथा राज्य युवा आयोग के अध्यक्ष विश्वविजय सिंह तोमर भी उपस्थित रहे। मृणाल को उनके उत्कृष्ट नवाचारों के लिए 1 लाख रुपये की नकद राशि और प्रमाण-पत्र प्रदान किया गया।
मृणाल विदानी के अनूठे नवाचार
मृणाल विदानी ने छत्तीसगढ़ की स्थानीय प्राकृतिक सामग्रियों का उपयोग करके फोरेंसिक साइंस में क्रांतिकारी योगदान दिया है।

उनके प्रमुख नवाचार निम्नलिखित हैं

कोसे (एक स्थानीय पौधा) के धागों से पर्यावरण-अनुकूल फोरेंसिक ब्रश तैयार करना।

छत्तीसगढ़ में प्रचलित चेंच भाजी (एक प्रकार की स्थानीय सब्जी) से सुरक्षित और सस्ता फोरेंसिक पाउडर विकसित करना, जो अपराध स्थलों पर गुप्त फिंगरप्रिंट उजागर करने में प्रभावी है।

गोबर खरसी (एक स्थानीय पौधा) की राख से भी उच्च गुणवत्ता वाला फोरेंसिक पाउडर बनाना।

इन नवाचारों के लिए मृणाल को भारत सरकार से कॉपीराइट प्राप्त हो चुका है। ये उत्पाद न केवल पर्यावरण के अनुकूल हैं, बल्कि पारंपरिक केमिकल-आधारित फोरेंसिक सामग्रियों की तुलना में बहुत कम लागत वाले भी हैं।

अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर मिली मान्यता

मृणाल विदानी की प्रतिभा सिर्फ राज्य तक सीमित नहीं है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी छाप छोड़ी है।

विवेकानंद ग्लोबल यूनिवर्सिटी, जयपुर में आयोजित इंटरनेशनल फोरेंसिक वैज्ञानिक कॉन्फ्रेंस में

वर्ष 2023 में कोसे के धागे से बने फोरेंसिक ब्रश के लिए बेस्ट इंटरनेशनल साइंटिस्ट अवॉर्ड।

2025 में चेंच भाजी से बने फोरेंसिक पाउडर के लिए बेस्ट इंटरनेशनल इनोवेशन।

खरसी की राख आधारित प्रक्रिया के लिए बेस्ट प्रेजेंटेशन और बेस्ट इनोवेशन का सम्मान।

नेशनल लेवल रिसर्च कांक्लेव 2025 में बेस्ट प्रोडक्ट डिस्प्ले अवॉर्ड।

मृणाल नियमित रूप से इंटरनेशनल फोरेंसिक साइंटिस्ट मीट कार्यक्रमों का सफल संचालन भी करती हैं।

शिक्षा और प्रारंभिक जीवन

मृणाल विदानी वर्तमान में विवेकानंद ग्लोबल यूनिवर्सिटी, जयपुर में फोरेंसिक साइंस में मास्टर्स (डीएनए विषय सहित) की अंतिम सेमेस्टर की पढ़ाई कर रही हैं। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा वेडनर मेमोरियल सीनियर सेकेंडरी स्कूल महासमुंद से कक्षा पहली से बारहवीं तक पूरी की, जहां वे शुरू से ही मेधावी छात्रा रहीं। उनके पिता रविंद्र विदानी और माता उत्तरा विदानी सुभाष नगर महासमुंद के निवासी हैं। साथ ही मृणाल के माता और पिता भी पत्रकारिता की जगत में अपनी अनूठी छाप भी छोड़े है।

युवा रत्न सम्मान योजना का उद्देश्य

यह योजना 15 से 29 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं एवं स्वैच्छिक संगठनों को सामाजिक, सांस्कृतिक, साहित्यिक, शैक्षणिक, खेल एवं अन्य क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य के लिए प्रेरित करती है। इसका मुख्य लक्ष्य युवाओं में समुदाय के प्रति जिम्मेदारी की भावना जगाना, व्यक्तिगत क्षमता विकास करना और राष्ट्रीय विकास व समाज सेवा में योगदान के लिए प्रोत्साहित करना है।

मृणाल विदानी की यह उपलब्धि

न केवल महासमुंद और छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है, बल्कि पूरे देश के युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत है। उन्होंने साबित किया है कि स्थानीय संसाधनों से भी वैश्विक स्तर के नवाचार संभव हैं।

छत्तीसगढ़ की यह बेटी निश्चित रूप से भविष्य में संपूर्ण देश जगत में अपनी छाप छोड़ेगी।

सिंघोडा पुलिस की बड़ी कार्रवाई जंगल में हाथ भट्टी से 60 लीटर अवैध महुआ शराब बनाते रंगे हाथ पकड़ा आरोपी, 12 हजार की कीमत का जखीरा जब्त..!

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रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुंद, 11 जनवरी 2026 – छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में अवैध शराब के खिलाफ पुलिस का सख्त रुख जारी है। थाना सिंघोडा की पुलिस ने एक बार फिर अपनी मुस्तैदी दिखाते हुए अवैध महुआ शराब के उत्पादन और बिक्री के धंधे पर करारा प्रहार किया है। सूचना के आधार पर पुलिस ने ग्राम गुठानीपाली के जंगल में छापेमारी कर 30 वर्षीय एक व्यक्ति को रंगे हाथ पकड़ा, जिसके पास से कुल 60 लीटर हाथ भट्टी (देशी) महुआ शराब जब्त की गई। इस शराब की अनुमानित बाजार कीमत करीब 12,000 रुपये बताई जा रही है।
पुलिस अधीक्षक महासमुंद एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर तथा अनुविभागीय अधिकारी पुलिस सरायपाली के मार्गदर्शन में यह कार्रवाई 10 जनवरी 2026 को अंजाम दी गई। एक विश्वसनीय मुखबीर से सूचना मिली थी कि गुठानीपाली गांव के निकट जंगल में एक व्यक्ति गुप्त रूप से हाथ भट्टी में महुआ शराब तैयार कर अवैध लाभ कमाने के लिए बेचने की तैयारी कर रहा है।
सूचना मिलते ही पुलिस टीम तुरंत मौके पर पहुंची। वहां पहुंचकर देखा कि बताए गए हुलिए का एक व्यक्ति वाकई महुआ शराब बना रहा था। टीम ने त्वरित घेराबंदी कर आरोपी को पकड़ लिया। पूछताछ पर उसने अपना नाम रंजीत दास, पिता ब्रह्मा दास, उम्र 30 वर्ष, निवासी गुठानीपाली, थाना सिंघोडा, जिला महासमुंद बताया।
आरोपी के कब्जे से तीन सफेद रंग की प्लास्टिक जरीकन (जरकीन) बरामद हुईं, जिनमें कुल 60 लीटर ताजा तैयार हाथ भट्टी महुआ शराब भरी हुई थी। मौके पर ही मौजूद गवाहों के सामने यह शराब जब्त की गई और उसे सीलबंद कर पुलिस कस्टडी में ले लिया गया।
आरोपी रंजीत दास को घटनास्थल पर ही गवाहों के सामने 10 जनवरी 2026 को शाम 5:10 बजे विधिवत गिरफ्तार कर लिया गया। जांच में उसके कृत्य में छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम की धारा 34(2) के तहत अपराध सिद्ध पाया गया। यह धारा अवैध रूप से शराब बनाने, रखने, बेचने या परिवहन करने पर सख्त सजा का प्रावधान करती है, जिसमें न्यूनतम 6 महीने से लेकर 2 वर्ष तक की कैद और जुर्माना शामिल हो सकता है।
आरोपी को गिरफ्तारी के बाद कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया। पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई अवैध शराब के कारोबार पर लगाम कसने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। जिले में लगातार चल रहे ऐसे अभियानों से अवैध शराब के धंधेबाजों में खलबली मची हुई है।
महुआ शराब का संदर्भ
छत्तीसगढ़ के आदिवासी इलाकों में महुआ शराब पारंपरिक रूप से प्रचलित है, लेकिन बिना लाइसेंस के इसका उत्पादन और बिक्री पूरी तरह अवैध है। पुलिस का दावा है कि ऐसे धंधे से न केवल राजस्व को नुकसान होता है, बल्कि समाज में नशे की लत और अपराध भी बढ़ते हैं।
पुलिस ने जनता से अपील की है कि यदि किसी को अवैध शराब बनाने-बेचने की जानकारी हो तो तुरंत सूचित करें। गुमनाम सूचना पर भी कार्रवाई की जाएगी। ऐसे मामलों में पुलिस की यह सतर्कता जारी रहेगी।

महासमुंद के तुमगांव रोड MDR घटिया और गुणवत्ता विहिन सड़क निर्माण में भ्रष्टाचार की नैय्या गोते खा रही है – मानिक साहू

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भ्रष्टाचारियों के खिलाफ किसान नेता मानिक साहू ने फूंका बिगुल , अब अव नई सहिबों चुन चुन सब हिसाब ल करबो 

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुंद / जिले में किसानों की जीवनरेखा पर सवाल
छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में महासमुंद शहर से तुमगांव तक बन रही मेजर डिस्ट्रिक्ट रोड (MDR) किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यह सड़क उनकी कृषि उपज को बाजार तक पहुंचाने का मुख्य माध्यम है, लेकिन अब इसके निर्माण में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और गुणवत्ता मानकों की अनदेखी के गंभीर आरोप लगे हैं।

ठेकेदार JD Construction पर लगे भारी आरोप

ठेकेदार कंपनी JD Construction को सौंपे गए इस प्रोजेक्ट में इंडियन रोड्स कांग्रेस (IRC: 37-2018), MoRTH स्पेसिफिकेशंस और छत्तीसगढ़ PWD के सभी निर्धारित मानकों का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है। सड़क की बुनियादी परतों (सबग्रेड और GSB) में निर्धारित मोटाई 200-300 mm की जगह काफी कम काम किया जा रहा है। प्रति किलोमीटर 1400-2100 क्यूबिक मीटर गिट्टी-मुरूम की जगह घटिया सामग्री और कटौती का सहारा लिया जा रहा है।

सड़क की उम्र महज 1-2 साल..?

ऐसे घटिया निर्माण से यह सड़क अधिकतम 1-2 साल ही टिक पाएगी, जबकि सामान्य MDR सड़कें 10-12 साल तक मजबूत रहनी चाहिए। इससे किसानों की रोजमर्रा की परेशानियां बढ़ेंगी और जिले की कनेक्टिविटी पर गहरा असर पड़ेगा।

जल निकासी व्यवस्था पूरी तरह फेल

सड़क के बीच में लगाए जा रहे सीमेंट पाइप कल्वर्ट्स टूटे-फूटे और निम्न गुणवत्ता के हैं। बारिश के मौसम में जलभराव की समस्या बढ़ेगी, जिससे सड़क जल्दी क्षतिग्रस्त हो जाएगी।

अनिवार्य जांचों की पूरी तरह अनदेखी

कॉम्पैक्शन टेस्ट, फील्ड डेंसिटी टेस्ट, CBR टेस्ट और मार्शल स्टेबिलिटी टेस्ट जैसी जरूरी जांचें बिल्कुल नहीं कराई जा रही हैं। यह स्पष्ट रूप से तकनीकी खामी नहीं, बल्कि ठेकेदार और कुछ PWD अधिकारियों की मिलीभगत से जनता के करोड़ों रुपये की लूट है।

  किसान कांग्रेस अध्यक्ष मानिक साहू की तीखी शिकायत

जिला किसान कांग्रेस के अध्यक्ष मानिक साहू ने साहू समाज के शपथ ग्रहण समारोह में उप मुख्यमंत्री एवं लोक निर्माण (PWD) मंत्री अरुण साव को लिखित शिकायत सौंपी। उन्होंने तत्काल जांच, निर्माण कार्य रोकने और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

मांगें और चेतावनी

निर्माण कार्य तुरंत रोका जाए।
NIT, IIT या स्वतंत्र केंद्रीय संस्थान से कोर कटिंग और लैब टेस्टिंग कराई जाए।
ठेकेदार JD Construction पर भारी पेनल्टी, ब्लैकलिस्टिंग और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत FIR दर्ज हो।
दोषी PWD अधिकारियों पर विभागीय एवं आपराधिक कार्रवाई हो।
BoQ, टेस्ट रिपोर्ट्स, भुगतान विवरण और प्रोग्रेस रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएं।
जांच किसानों और शिकायतकर्ताओं की उपस्थिति में हो।
मानिक साहू ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई तो उच्च न्यायालय, मीडिया और किसानों के साथ उग्र आंदोलन का सहारा लिया जाएगा।

उप मुख्यमंत्री से त्वरित हस्तक्षेप की अपेक्षा

यह मामला पूरे जिले में चर्चा का विषय बन गया है। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि उप मुख्यमंत्री अरुण साव भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम उठाएंगे, अन्यथा जनता का पैसा बार-बार बर्बाद होता रहेगा और सड़कें कुछ महीनों में उखड़ती रहेंगी। क्या इस बार सरकार पारदर्शिता सुनिश्चित करेगी? यह सवाल अब हर किसी के मन में है।

नशेड़ी ड्राइवर की लापरवाही से स्कूली बच्चों की जान पर बनी आफत: वेंकटेश्वर सिग्नेचर स्कूल प्रबंधन की संवेदनहीनता और सुरक्षा में चूक पर सवाल

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रिपोर्टर मयंक गुप्ता
रायपुर, 09 जनवरी 2026 छत्तीसगढ़ के आरंग इलाके में विगत 07 जनवरी 2026 दिन बुधवार को अल सुबह एक दिल दहला देने वाला सड़क हादसा हुआ, जिसमें वेंकटेश्वर सिग्नेचर स्कूल की वैन ने तेज रफ्तार में एक ट्रक को पीछे से टक्कर मार दी। इस भयानक दुर्घटना में वैन में सवार कई मासूम स्कूली बच्चे बुरी तरह घायल हो गए। घटना की जड़ में ड्राइवर की शराबखोरी बताई जा रही है, लेकिन असली दोषी स्कूल प्रबंधन की घोर लापरवाही को माना जा रहा है, जिसने बच्चों की सुरक्षा को ताक पर रखकर एक नशेड़ी चालक को वाहन सौंप दिया। परिजनों का गुस्सा सातवें आसमान पर है, और वे प्रबंधन पर बच्चों की जिंदगी से खिलवाड़ करने का आरोप लगा रहे हैं।
घटना की पूरी तस्वीर बेहद चौंकाने वाली है। जानकारी के मुताबिक, उमरिया गांव के पास स्थित इस स्कूल की वैन महासमुंद और आरंग इलाके से बच्चों को लेकर जा रही थी। सफेद रंग की यह एसयूवी-स्टाइल वैन (पंजीकरण नंबर CG 06 GRS 5223) सुबह के समय हाईवे पर तेज गति से दौड़ रही थी। चालक और उसके साथी दोनों शराब के नशे में इतने धुत थे कि वाहन पर उनका कोई नियंत्रण नहीं रहा। अचानक वैन आगे चल रहे एक भारी ट्रक के पिछले हिस्से से जा टकराई, जिससे वैन का अगला हिस्सा पूरी तरह चकनाचूर हो गया। इंजन, बंपर, ग्रिल और विंडशील्ड सब बिखर गए, और सड़क पर मलबे के टुकड़े बिखर पड़े। ट्रक के पीछे लदे सामान की वजह से टक्कर और भी जोरदार हुई, लेकिन शुक्र है कि ट्रक चालक को ज्यादा चोट नहीं आई।
हादसे के तुरंत बाद जो हुआ, वह स्कूल प्रबंधन की असंवेदनशीलता की मिसाल है। घायल बच्चों को फौरन अस्पताल पहुंचाने की बजाय, प्रबंधन ने उन्हें स्कूल कैंपस में ही ले जाने का फैसला किया। यह फैसला बच्चों की हालत को और बिगाड़ सकता था, क्योंकि कई बच्चों के सिर, हाथ-पैर और चेहरे पर गंभीर चोटें आई थीं। कुछ बच्चे सदमे में थे और रो-रोकर सहमे हुए थे। परिजनों को जब इसकी खबर मिली, तो उनका गुस्सा फूट पड़ा। वे स्कूल पहुंचे और प्रबंधन पर जमकर बरसे। एक अभिभावक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “हम अपने बच्चों को स्कूल इसलिए भेजते हैं कि वे सुरक्षित रहें, लेकिन यहां तो प्रबंधन ने एक शराबी को ड्राइवर बना दिया। क्या बच्चों की जान इतनी सस्ती है?” परिजनों का आरोप है कि स्कूल ने ड्राइवर की जांच-पड़ताल नहीं की, न ही कोई बैकग्राउंड चेक किया, जो कि बच्चों की परिवहन सुरक्षा के लिए अनिवार्य है।
स्कूल प्रबंधन की तरफ से आशीष गुप्ता ने मीडिया से बातचीत में सफाई दी कि उन्होंने ड्राइवर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी है और स्कूल का नाम बदनाम न करने की अपील की। लेकिन परिजनों और स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सिर्फ लीपापोती है। प्रबंधन ने हादसे की गंभीरता को हल्के में लिया और बच्चों की सेहत पर ध्यान नहीं दिया। वेंकटेश्वर सिग्नेचर स्कूल, जो खुद को “क्रिएट योर ओन सिग्नेचर” जैसे नारे से प्रचारित करता है, अब अपनी ही लापरवाही के कारण सवालों के घेरे में है। स्कूल का भव्य कैंपस और आधुनिक सुविधाएं बच्चों की सुरक्षा की गारंटी नहीं दे सकतीं, जब प्रबंधन बुनियादी नियमों की अनदेखी करे।
आरंग पुलिस को घटना की सूचना मिलते ही टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। पुलिस ने ड्राइवर और उसके साथी को हिरासत में लिया है, और उनका मेडिकल टेस्ट कराया जा रहा है ताकि नशे की पुष्टि हो सके। घायल बच्चों को अब स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है। लेकिन कई बच्चे अभी भी ट्रॉमा से गुजर रहे हैं, और उनके माता-पिता चिंतित हैं। स्थानीय ग्रामीणों ने भी इस घटना पर रोष जताया है और मांग की है कि स्कूल के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो। वे शिक्षा विभाग से अपील कर रहे हैं कि स्कूल का लाइसेंस तुरंत रद्द किया जाए और परिसर को सील कर दिया जाए, ताकि ऐसी लापरवाही दोबारा न हो।
यह हादसा न सिर्फ एक दुर्घटना है, बल्कि स्कूली परिवहन में सुरक्षा मानकों की कमी को उजागर करता है। देशभर में ऐसे कई मामले सामने आते हैं जहां नशेड़ी ड्राइवरों या खराब रखरखाव वाली गाड़ियों से बच्चों की जान जोखिम में पड़ती है। विशेषज्ञों का कहना है कि स्कूलों को ड्राइवरों की नियमित जांच, अल्कोहल टेस्ट और वाहनों की फिटनेस सर्टिफिकेट अनिवार्य रूप से लागू करनी चाहिए। इस घटना से सबक लेते हुए, शिक्षा विभाग को सभी स्कूलों की जांच करानी चाहिए ताकि मासूमों की जिंदगी सुरक्षित रहे।
अगर आपके पास इस घटना से जुड़ी कोई जानकारी है या आप प्रभावित हैं, तो स्थानीय पुलिस या शिक्षा विभाग से संपर्क करें। बच्चों की सुरक्षा हम सबकी जिम्मेदारी है, और ऐसी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जा सकती।

हिंदू संगठनों की ज्वाला भड़की श्रीराम के नाम को कुत्ते का विकल्प देने वाले महासमुंद जिला शिक्षाधिकारी विजय कुमार लहरें का पुतला दहन

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भगवान राम का अपमान: शिक्षा विभाग की घोर लापरवाही से हिंदू आस्था को गहरी ठेस, पूरे छत्तीसगढ़ में आक्रोश की लहर!

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुंद (छत्तीसगढ़), 08 जनवरी 2026 छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में शिक्षा विभाग की एक ऐसी करतूत सामने आई है, जिसने पूरे प्रदेश के हिंदू समाज को स्तब्ध और क्रोधित कर दिया है। सरकारी स्कूलों में कक्षा चौथी की अर्धवार्षिक अंग्रेजी परीक्षा के प्रश्नपत्र में एक सवाल ने भगवान श्रीराम की पवित्र आस्था को सीधी चुनौती दी है। प्रश्न था – “मोना के कुत्ते का नाम क्या है?” और इसके विकल्पों में एक विकल्प था ‘राम’! अन्य विकल्पों में ‘बाला’, ‘शेरू’ और ‘नो वन’ शामिल थे।
यह घटना मात्र एक ‘प्रिंटिंग त्रुटि’ नहीं, बल्कि हिंदू धर्म की भावनाओं पर सीधा प्रहार मानी जा रही है। विश्व हिंदू परिषद (विहिप), बजरंग दल और अन्य हिंदू संगठनों ने इसे सुनियोजित साजिश करार देते हुए जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) विजय कुमार लहरे के खिलाफ तत्काल बर्खास्तगी और एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। संगठनों का कहना है कि ऐसे प्रश्न बच्चों के कोमल मन में धार्मिक आस्था के प्रति गलत संदेश पैदा करते हैं और यह शिक्षा विभाग की संवेदनहीनता का जीता-जागता प्रमाण है।
प्रदर्शनों की आग पूरे जिले में फैली
विवाद सामने आते ही हिंदू संगठनों ने त्वरित प्रतिक्रिया दी। बुधवार को परीक्षा के दिन ही कार्यकर्ताओं ने महासमुंद शहर में रैली निकाली और पैदल मार्च करते हुए डीईओ कार्यालय का घेराव किया। वहां जमकर नारेबाजी हुई और डीईओ विजय कुमार लहरे का पुतला दहन किया गया। कार्यकर्ताओं ने “भगवान राम का अपमान बर्दाश्त नहीं” और “शिक्षा विभाग मुर्दाबाद” के नारे लगाए।
जिले के सभी पांच विकासखंडों – महासमुंद, बागबहारा, बसना, पिथौरा और सरायपाली – में हिंदू संगठनों ने एकजुट होकर विरोध प्रदर्शन किए। हर ब्लॉक में डीईओ का पुतला फूंका गया और मुर्दाबाद के नारे लगाए गए। इसके अलावा, जिले के सभी थानों में शिकायत दर्ज कराते हुए ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें त्वरित एफआईआर और सख्त कार्रवाई की मांग की गई।
विहिप जिला प्रमुख हर्षवर्धन चंद्राकर ने कहा, “यह कोई साधारण गलती नहीं है। भगवान राम हिंदुओं के आराध्य हैं, उनके नाम को कुत्ते के साथ जोड़ना घोर अपमान है। जिम्मेदारों को जेल भेजा जाए और डीईओ को तुरंत बर्खास्त किया जाए।”
शिक्षा विभाग की सफाई: ‘प्रिंटिंग में त्रुटि’
विवाद बढ़ने पर डीईओ विजय कुमार लहरे ने सफाई दी कि मूल प्रश्नपत्र में ऐसा कोई प्रश्न नहीं था। प्रिंटिंग प्रेस में तकनीकी या मानवीय त्रुटि के कारण गलत प्रश्न जुड़ गया। उन्होंने खेद जताते हुए कहा कि भविष्य में ऐसी त्रुटि नहीं होगी और संबंधित वेंडर से स्पष्टीकरण मांगा गया है। हालांकि, हिंदू संगठनों ने इस सफाई को अस्वीकार कर दिया और इसे लीपापोती बताया।
प्रश्नपत्र तैयार करने की जिम्मेदारी समग्र शिक्षा की एपीसी सम्पा बोस को सौंपी गई थी, लेकिन विभाग के अंदर जिम्मेदारी की खींचतान भी सामने आ रही है।
पूरे प्रदेश में गूंजा मामला
यह घटना अब महासमुंद से निकलकर पूरे छत्तीसगढ़ में चर्चा का विषय बन गई है। सोशल मीडिया पर #RamApman और #MahasamundControversy ट्रेंड कर रहे हैं। कई राजनीतिक दल भी इस पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं। हिंदू संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर त्वरित कार्रवाई नहीं हुई तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
शिक्षा विभाग के लिए यह एक बड़ा सबक है – बच्चों की किताबों और परीक्षाओं में धार्मिक संवेदनशीलता का पूरा ख्याल रखा जाना चाहिए। क्या यह मात्र लापरवाही थी या कुछ और? जांच से ही साफ होगा, लेकिन फिलहाल हिंदू समाज का आक्रोश शिक्षा विभाग के लिए झकझोर देने वाला है।

सिरपुर की प्राचीन धरोहर को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का संकल्प केंद्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत का दौरा

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पुरातत्व स्थलों के संरक्षण से पर्यटन को मिलेगा मजबूत आधार

केंद्रीय मंत्री शेखावत
सिरपुर की सांस्कृतिक विरासत पर गर्व यहां आकर अनुभव हो रहा गौरव – केंद्रीय मंत्री शेखावत

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुंद, 01 जनवरी 2026: भारत सरकार के संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में बसे प्राचीन सिरपुर स्थल का दौरा कर इसके पुरातात्विक महत्व को राष्ट्रीय पटल पर उभारने का आह्वान किया। उनके साथ छत्तीसगढ़ के विजय शर्मा और राज्य के संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल भी शामिल रहे।
दौरा शुरू होते ही सिरपुर हेलीपैड पर मंत्री शेखावत का भव्य स्वागत हुआ। महासमुंद सांसद रूपकुमारी चौधरी, विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा, कलेक्टर विनय कुमार लंगेह, पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार तथा स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने पुष्पगुच्छ भेंटकर उनका स्वागत किया। यह स्वागत न केवल औपचारिक था, बल्कि सिरपुर की समृद्ध विरासत के प्रति समर्पण का प्रतीक भी था।
केंद्रीय मंत्री ने सिरपुर के प्रमुख ऐतिहासिक स्थलों का गहन अवलोकन किया। लक्ष्मण मंदिर की भव्यता से लेकर आनंद प्रभु कुटी विहार की शांतिमय वास्तुकला, तीवरदेव विहार के बौद्ध अवशेषों, सुरंग टीला की रहस्यमयी संरचनाओं और स्थानीय हाट बाजार की जीवंतता तक – हर स्थान पर उन्होंने विस्तार से जांच की। सिरपुर को भारत की सांस्कृतिक धरोहर का एक चमकदार रत्न बताते हुए मंत्री शेखावत ने कहा कि इसकी ऐतिहासिकता को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे।
निरीक्षण के क्रम में संरक्षण कार्यों की समीक्षा करते हुए उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए। पुरातत्व स्थलों की मूल संरचना को अक्षुण्ण रखते हुए आधुनिक सुविधाओं का समावेश सुनिश्चित करने पर बल दिया गया। पर्यटकों के लिए उन्नत सड़कें, स्पष्ट साइन बोर्ड, सूचना केंद्र, स्वच्छता अभियान और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं को प्राथमिकता देने की बात कही गई। मंत्री ने जोर देकर कहा कि बेहतर कनेक्टिविटी से सिरपुर पर्यटन का एक प्रमुख केंद्र बनेगा, जो आर्थिक समृद्धि का वाहक भी होगा।
सिरपुर पहुंचने पर अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए मंत्री शेखावत ने कहा, “यहां आकर गौरव की अनुभूति हो रही है।” उन्होंने सिरपुर को यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल करने के प्रयासों को तेज करने का भरोसा दिलाया। यह प्राचीन नगरी हमारी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपराओं का जीवंत उदाहरण है, जिसके संरक्षण से नई पीढ़ियां प्रेरित होंगी।
दौरे के अंतिम चरण में उन्होंने गंधेश्वर मंदिर जाकर गंधेश्वर महादेव की पूजा-अर्चना की। इस दौरान देश की समृद्धि और सांस्कृतिक उन्नति की कामना की गई, जो सिरपुर के धार्मिक महत्व को और उजागर करती है।

राज्य स्तर पर सिरपुर विकास की मजबूत योजना

उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने अवसर का लाभ उठाते हुए कहा कि राज्य सरकार केंद्र के सहयोग से सिरपुर को पर्यटन हब के रूप में विकसित करने के लिए कटिबद्ध है। इससे न केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। उन्होंने भोरमदेव कॉरिडोर के शुभारंभ की घोषणा की, जो सिरपुर को और अधिक सुलभ बनाएगा।
सांसद रूपकुमारी चौधरी और विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा ने सिरपुर को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने के लिए रचनात्मक सुझाव दिए। इनमें स्थानीय कारीगरों को बढ़ावा, सांस्कृतिक उत्सवों का आयोजन और डिजिटल प्रचार शामिल थे।

सिरपुर प्राचीनता का अनमोल खजाना

प्राचीन श्रीपुर या श्रिपुरा के नाम से जाना जाने वाला सिरपुर महानदी के किनारे बसा एक ऐतिहासिक शहर है। 5वीं से 12वीं शताब्दी तक फला-फूला यह स्थल दक्षिण कोसल का राजनीतिक, धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र रहा। यहां हिंदू, बौद्ध तथा जैन परंपराओं के अद्भुत मिश्रण के प्रमाण मिलते हैं। पुरातत्व खुदाई से 22 शिव मंदिर, 5 विष्णु मंदिर, 10 बौद्ध विहार और 3 जैन विहार के अवशेष सामने आए हैं, जो इसकी धार्मिक समन्वय की कहानी बयां करते हैं।

लक्ष्मण मंदिर का प्रेम और भक्ति का प्रतीक

6वीं-7वीं शताब्दी का यह विष्णु मंदिर लाल ईंटों की अनूठी कृति है। रानी वासटादेवी ने इसे अपने पति राजा हर्षगुप्त की स्मृति में बनवाया, जो प्रेम की एक मार्मिक कथा का प्रतीक है।

आनंद प्रभु कुटी विहार की शांति की छवि

भिक्षु आनंद प्रभु द्वारा स्थापित यह 14 कमरों वाला बौद्ध मठ नक्काशीदार स्तंभों और बुद्ध की भव्य मूर्तियों से सजा है। ध्यान और शिक्षा का केंद्र रहा यह विहार आज भी आध्यात्मिक ऊर्जा का स्रोत है।

तीवरदेव विहार: बौद्ध दर्शन का जीवंत प्रमाण

7वीं-8वीं शताब्दी का यह ईंटों से निर्मित विहार बौद्ध अनुयायियों की धार्मिक क्रियाओं का साक्षी है। खुदाई से प्राप्त अवशेष इसकी भव्यता का वर्णन करते हैं।

सुरंग टीला की रहस्यमयी संरचना

7वीं शताब्दी का यह मंदिर पांच गर्भगृहों वाला अनोखा स्थल है। शिवलिंग और गणेश प्रतिमाओं की उपस्थिति यहां की धार्मिक विविधता को प्रमाणित करती है।
यह दौरा सिरपुर के पुनरुद्धार की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो रहा है। केंद्र-राज्य सहयोग से यह प्राचीन नगरी जल्द ही पर्यटकों का प्रमुख आकर्षण बनेगी, जो हमारी सभ्यता की गाथा को नई पीढ़ियों तक पहुंचाएगी।

सरकारी शिक्षिका का तीर्थ घोटाला झूठे शपथ पत्र से परिवार सहित फ्री यात्रा, अब बर्खास्तगी और जेल की मांग जोरों पर..!

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रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुंद 31 दिसंबर 2025 बुजुर्गों के लिए बनाई गई मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना को एक सरकारी शिक्षिका ने परिवार के साथ मिलकर “लूट” लिया..! शासकीय उच्चतर माध्यमिक स्कूल बेमचा में पदस्थ व्याख्याता श्रीमती किरण पटेल पर गंभीर आरोप लगे हैं कि उन्होंने फर्जी बीपीएल सूची में नाम जुड़वाकर और झूठा शपथ पत्र देकर खुद को “गैर-सरकारी कर्मचारी” बताते हुए योजना का फायदा उठाया। इतना ही नहीं, अपने पति पवन पटेल, मौसी गौरी बाई पटेल और अन्य रिश्तेदारों को भी अपात्र होते हुए तीर्थ यात्रा पर ले गईं। अब पूर्व पार्षद पंकज साहू ने मोर्चा खोल दिया है – शिक्षिका को फौरन बर्खास्त करने और धोखाधड़ी के लिए एफआईआर दर्ज करने की जोरदार मांग की जा रही है।
यह मामला उस समय सामने आया जब 27 से 31 अक्टूबर 2025 तक महासमुंद जिले से प्रयागराज, काशी विश्वनाथ और हनुमान मंदिर की विशेष तीर्थ यात्रा आयोजित की गई। छत्तीसगढ़ सरकार की इस लोकप्रिय योजना का मकसद 65 वर्ष से अधिक उम्र के गरीब बुजुर्गों को मुफ्त धार्मिक यात्रा कराना है। समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित इस योजना में सख्त नियम हैं – सरकारी कर्मचारी पूरी तरह अपात्र हैं, और आवेदन में शपथ पत्र देकर यह घोषणा करनी पड़ती है कि आवेदक शासकीय सेवा में नहीं है।
लेकिन आरोपों के मुताबिक, श्रीमती किरण पटेल ने इन नियमों को ताक पर रख दिया। उन्होंने आवेदन फॉर्म में स्पष्ट झूठ बोला कि वे सरकारी नौकरी में नहीं हैं, जबकि हकीकत यह है कि वे बेमचा स्कूल में व्याख्याता (एलबी) के पद पर कार्यरत हैं। फर्जी तरीके से बीपीएल कैटेगरी में नाम शामिल करवाकर उन्होंने न केवल खुद, बल्कि पूरे परिवार को इस मुफ्त यात्रा का टिकट दिलवाया। यह सीधे-सीधे शासन के साथ छलावा और धोखाधड़ी है, जो छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियमों का खुला उल्लंघन है।
इस घोटाले का पर्दाफाश करने वाले छत्तीसगढ़ नागरिक कल्याण समिति के सदस्य एवं पूर्व पार्षद पंकज साहू ने तुरंत एक्शन लिया। उन्होंने मुख्य सचिव (स्कूल शिक्षा विभाग), संचालक लोक शिक्षण, कलेक्टर महासमुंद और जिला शिक्षा अधिकारी को विस्तृत पत्र लिखा। पत्र में आरटीआई से प्राप्त साक्ष्यों की प्रमाणित कॉपियां भी जोड़ी गईं – जिसमें किरण पटेल का आवेदन, झूठा शपथ पत्र और यात्रियों की पूरी लिस्ट शामिल है। साहू ने साफ कहा, “ऐसे लोग वास्तविक गरीब बुजुर्गों का हक मार रहे हैं। यह सिर्फ अनुचित लाभ नहीं, बल्कि आपराधिक कृत्य है।”
साहू की मांगें बेहद सख्त हैं:
श्रीमती पटेल को तत्काल निलंबित किया जाए।
विभागीय जांच के बाद सेवा से बर्खास्तगी।
धोखाधड़ी और छल के लिए महासमुंद थाने में एफआईआर दर्ज हो।
यह मामला स्थानीय स्तर पर आग की तरह फैल रहा है। लोग सवाल उठा रहे हैं – योजना की जांच-पड़ताल इतनी ढीली कैसे? अपात्र लोग कैसे घुसपैठ कर रहे हैं? सामाजिक कार्यकर्ता इसे सरकारी योजनाओं में बढ़ते भ्रष्टाचार का जीता-जागता सबूत बता रहे हैं। अगर ऐसे मामलों पर सख्ती नहीं हुई, तो गरीब बुजुर्गों का सपना हमेशा अधूरा रह जाएगा।
समाज कल्याण विभाग और शिक्षा विभाग के अधिकारी अभी चुप हैं, लेकिन सूत्र बता रहे हैं कि शिकायत पर जांच शुरू हो सकती है। अगर आरोप साबित हुए, तो यह शिक्षिका के करियर पर तो ग्रहण लगेगा ही, साथ ही योजना की पूरी व्यवस्था पर भी बड़ा सवालिया निशान लग जाएगा।
अब नजरें अधिकारियों पर टिकी हैं – क्या शासन इस “तीर्थ घोटाले” पर कड़ी कार्रवाई करेगा, या मामला दब जाएगा..? वास्तविक हकदारों की आवाज को न्याय मिलेगा या नहीं? आने वाले दिन बताएंगे, लेकिन फिलहाल महासमुंद में यह मामला गरम है..!