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लोकसभा में भिड़े राहुल और पीयूष: भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर ‘आर-पार’, क्या दांव पर है भारतीय किसान?

नई दिल्ली | 05 फरवरी 2026 संसद का बजट सत्र आज उस समय हंगामे की भेंट चढ़ गया जब ‘भारत-अमेरिका व्यापार समझौते’ (India-US Trade Deal) को लेकर विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच तीखी बहस छिड़ गई। विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस समझौते को भारतीय किसानों के लिए ‘डेथ वारंट’ करार दिया, जिसके जवाब में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने मोर्चा संभालते हुए सरकार का बचाव किया।

राहुल गांधी का हमला: “खेत और खलिहान दांव पर”

सदन को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार अमेरिका के दबाव में आकर भारतीय बाजारों को विदेशी कंपनियों के लिए खोल रही है।

“यह समझौता केवल व्यापार नहीं है, बल्कि देश के करोड़ों किसानों और पशुपालकों की आजीविका का सौदा है। अमेरिका से आने वाला सस्ता दूध और अनाज हमारे छोटे किसानों को बर्बाद कर देगा। आखिर सरकार किसे फायदा पहुँचाने के लिए यह डील कर रही है?”राहुल गांधी, विपक्ष के नेता (लोकसभा में)

पीयूष गोयल का पलटवार: “भ्रम फैला रहा है विपक्ष”

राहुल गांधी के आरोपों को निराधार बताते हुए वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने सदन के पटल पर स्पष्ट किया कि भारत की ‘रेड लाइन्स’ (सीमाएं) तय हैं। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि देश के संवेदनशील क्षेत्रों से कोई समझौता नहीं किया गया है।

सरकार की 3 बड़ी दलीलें:

  1. कृषि और डेयरी बाहर: भारत ने स्पष्ट किया है कि अमेरिकी डेयरी उत्पाद और अनाज इस समझौते के दायरे से बाहर रखे गए हैं।

  2. MSME को सुरक्षा: भारतीय लघु उद्योगों के हितों की सुरक्षा के लिए विशेष क्लॉज जोड़े गए हैं।

  3. निर्यात को बढ़ावा: इस डील से भारत के रत्न-आभूषण, टेक्सटाइल और फार्मास्युटिकल सेक्टर को अमेरिकी बाजार में बड़ी जगह मिलेगी।

एक्सपर्ट व्यू: क्यों है यह डील इतनी चर्चा में?

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है, लेकिन भारत हमेशा से अपने ‘डेयरी सेक्टर’ को लेकर सुरक्षात्मक रहा है। 2026 के इस दौर में, जब वैश्विक अर्थव्यवस्था बदल रही है, भारत के लिए यह संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण है कि वह व्यापार भी बढ़ाए और अपने किसानों को भी बचाए।

स्किल के नाम पर ‘खोल दी’ दुकानें: 41 स्किल इंडिया केंद्रों पर FIR, CAG की रिपोर्ट के बाद सरकार का बड़ा एक्शन

नई दिल्ली | 05 फरवरी 2026 देश के युवाओं को हुनरमंद बनाने के दावे के साथ शुरू किए गए ‘स्किल इंडिया मिशन’ में एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की ताजा ऑडिट रिपोर्ट में गंभीर वित्तीय अनियमितताएं और कागजी प्रशिक्षण के सबूत मिलने के बाद, केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए 41 स्किल इंडिया प्रशिक्षण केंद्रों (Training Centres) के खिलाफ FIR दर्ज करने के आदेश दे दिए हैं।

क्या है पूरा मामला? (The Big Reveal)

CAG की रिपोर्ट के अनुसार, कई केंद्रों ने केवल कागजों पर छात्रों का रजिस्ट्रेशन दिखाया और सरकार से मिलने वाली ‘ट्रेनिंग ग्रांट’ को अपनी जेब में डाल लिया। जांच में पाया गया कि कई केंद्रों का अस्तित्व ही नहीं था, फिर भी वे सरकारी पोर्टल पर सक्रिय थे।

प्रमुख बिंदु:

  • भूतिया छात्र (Ghost Students): हजारों ऐसे छात्रों के नाम पर फंड निकाला गया जिन्होंने कभी किसी कक्षा में पैर तक नहीं रखा।

  • फर्जी बायोमेट्रिक: हाजिरी लगाने के लिए आधार और बायोमेट्रिक डेटा के साथ छेड़छाड़ की गई।

  • नो-शो ट्रेनिंग: कई जगहों पर लैब और मशीनों के नाम पर खाली कमरे मिले।

ग्राउंड रिपोर्ट: उम्मीदों के साथ खिलवाड़

“हमने सोचा था कि यहाँ से वेल्डिंग सीखकर नौकरी मिल जाएगी, लेकिन 3 महीने बीत गए और हमें एक बार भी मशीन छूने नहीं दी गई। सर कहते थे बस साइन कर दो, पैसा आ जाएगा।”सुमित (बदला हुआ नाम), एक प्रभावित छात्र जिसने इस घोटाले की कड़वी सच्चाई बयां की।

यह घोटाला सिर्फ पैसों की हेराफेरी नहीं है, बल्कि उन लाखों युवाओं के सपनों के साथ धोखा है जो रोजगार की तलाश में इन केंद्रों का रुख करते हैं। सरकार ने अब 11 बड़ी संस्थाओं (Entities) को कारण बताओ नोटिस जारी किया है, जिन्हें जल्द ही ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है।

सरकार का पक्ष

कौशल विकास मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत यह कार्रवाई की गई है। हम हर एक पैसे का हिसाब लेंगे और दोषियों को जेल भेजा जाएगा। डिजिटल ऑडिट को अब और सख्त किया जा रहा है।”

महासमुंद में 19 करोड़ का धान ‘हवा’ में गायब! अधिकारियों ने बताया—’वजन में कमी’, विपक्ष ने पूछा—क्या धान उड़कर अमेरिका चला गया?

महासमुंद/रायपुर (ब्यूरो): छत्तीसगढ़ की राजनीति में ‘धान’ सिर्फ फसल नहीं, सत्ता की चाबी है। लेकिन महासमुंद जिले के धान संग्रहण केंद्रों (Storage Centers) से आई एक खबर ने शासन से लेकर प्रशासन तक हड़कंप मचा दिया है। रिकॉर्ड के अनुसार, संग्रहण केंद्रों से लगभग 19 करोड़ रुपये मूल्य का धान गायब पाया गया है। अब सवाल यह है कि क्या यह महज एक ‘तकनीकी कमी’ है या धान के नाम पर करोड़ों का ‘वारा-न्याय’ कर दिया गया है।

‘शॉर्टेज’ या ‘सिस्टमैटिक चोरी’? (Original Angle) महासमुंद के राइस मिलर्स और संग्रहण केंद्रों के बीच का तालमेल हमेशा चर्चा में रहता है। इस बार का ‘ओरिजनल एंगल’ यह है कि गायब हुए धान की मात्रा इतनी अधिक है कि इसे केवल ‘सूखत’ (Drying loss) नहीं माना जा सकता। जानकारों का कहना है कि धान को कागजों में मिलर्स को जारी (Issue) दिखा दिया गया, जबकि हकीकत में वह धान केंद्रों से कभी निकला ही नहीं, या फिर उसे खुले बाजार में औने-पौने दाम पर बेच दिया गया।

अधिकारियों का ‘हैरान’ करने वाला तर्क (Reporting Feel): जब इस भारी कमी पर कलेक्टर और खाद्य विभाग के अधिकारियों से सवाल किया गया, तो उनका जवाब था— “लंबे समय तक भंडारण और नमी के कारण वजन में कमी (Weight Loss) आई है।” लेकिन 19 करोड़ रुपये की ‘कमी’ का मतलब है हजारों क्विंटल धान का गायब होना। क्या महासमुंद की गर्मी इतनी ज्यादा है कि करोड़ों का धान ‘वाष्प’ (Vapor) बनकर उड़ गया? यह तर्क अब सोशल मीडिया पर मजाक का विषय बन रहा है।

सियासी उबाल और ग्राउंड रिपोर्ट (Human Touch): विपक्ष ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए महासमुंद में ‘चक्काजाम’ की चेतावनी दी है। पूर्व खाद्य मंत्री ने बयान दिया है कि “यह गरीब किसानों के पसीने की कमाई पर डाका है, इसकी जांच CBI या हाईकोर्ट के जज से होनी चाहिए।” महासमुंद के एक स्थानीय किसान रामलाल साहू ने ‘बेबाक बयान’ से अपना दर्द साझा करते हुए कहा— “साहब, हम एक-एक दाना तौलकर देते हैं, वहां रिजेक्शन (Rejection) के नाम पर हमारा धान काट लिया जाता है, और अब कह रहे हैं कि सरकार का 19 करोड़ का धान गायब हो गया? यह सब अधिकारियों की मिलीभगत है।”

‘रनों का महाकुंभ’ 26 मार्च से: IPL 19 में अब 74 नहीं बल्कि होंगे 84 मुकाबले; क्या डिफेंडिंग चैंपियन RCB रायपुर में खेलेगी अपना पहला मैच?

नई दिल्ली (ब्यूरो): क्रिकेट प्रेमियों के लंबे इंतजार पर आज BCCI ने विराम लगा दिया है। इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के 19वें सीजन का बिगुल बज चुका है। दुनिया की सबसे बड़ी क्रिकेट लीग इस साल 26 मार्च 2026 से शुरू होकर 31 मई तक चलेगी। लेकिन इस बार का IPL पिछले सभी सीजनों से अलग और ज्यादा रोमांचक होने वाला है, क्योंकि क्रिकेट के इस छोटे फॉर्मेट का कद और भी बड़ा कर दिया गया है।

84 मैचों का नया रोमांच (Original Angle) BCCI ने इस साल मैचों की संख्या 74 से बढ़ाकर 84 कर दी है। इसका मतलब है कि फैंस को इस बार 10 अतिरिक्त मुकाबले देखने को मिलेंगे। यह कदम ब्रॉडकास्टर्स की भारी मांग और ‘होम-अवे’ फॉर्मेट को और अधिक विस्तार देने के लिए उठाया गया है। अब हर टीम को लीग स्टेज में ज्यादा मौके मिलेंगे, जिससे प्लेऑफ की रेस और भी कटीली हो जाएगी।

RCB का ‘नया घर’ और ओपनिंग मैच का सस्पेंस (Reporting Feel) परंपरा के अनुसार, सीजन का पहला मैच डिफेंडिंग चैंपियन के घरेलू मैदान पर होता है। पिछले साल अपना पहला खिताब जीतने वाली रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) को लीग का आगाज करना है। लेकिन यहाँ एक बड़ा पेंच है! बेंगलुरु का एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम सुरक्षा कारणों (पिछले साल की भगदड़ की घटना) से अभी पूरी तरह से ग्रीन सिग्नल नहीं पा सका है।

सूत्रों और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के बयानों के अनुसार, रायपुर का शहीद वीर नारायण सिंह स्टेडियम इस बार RCB के दो घरेलू मैचों की मेजबानी करेगा। अगर चिन्नास्वामी को क्लियरेंस नहीं मिलती, तो इतिहास में पहली बार IPL का ओपनिंग मैच रायपुर या नवी मुंबई (DY पाटिल) में शिफ्ट किया जा सकता है।

फैंस की धड़कनें तेज (Human Touch) बेंगलुरु के एक कट्टर RCB फैन, आकाश ने ‘बेबाक बयान’ से कहा— “हमने 17 साल ट्रॉफी का इंतज़ार किया, और अब जब हम चैंपियन बनकर उतर रहे हैं, तो अपने घर में मैच न देख पाना थोड़ा दुखद है। पर रायपुर हो या मुंबई, हम ‘ई साला कप नामदू’ के बाद अब ‘हर साल कप नामदू’ के नारे के साथ तैयार हैं।”

‘सत्य’ की ज़िद या नियमों का उल्लंघन? संसद में लद्दाख और ‘नरवणे की किताब’ पर आर-पार; क्या राहुल गांधी ने मोदी सरकार को फंसा दिया है?

नई दिल्ली (ब्यूरो): संसद का बजट सत्र आज किसी रणक्षेत्र से कम नजर नहीं आ रहा है। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बीच जारी ‘शब्द युद्ध’ ने आज फिर सदन की कार्यवाही को ठप कर दिया। मामला उस ‘अप्रकाशित’ किताब का है जिसे सरकार ने अब तक रोक कर रखा है, लेकिन राहुल गांधी उसके पन्नों को सदन के पटल पर लहराकर सरकार की रणनीति पर सवाल उठा रहे हैं।

असली विवाद क्या है? (Original Angle) विवाद की जड़ में पूर्व थल सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की यादें (Memoir) हैं, जिसका शीर्षक है ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ (Four Stars of Destiny)। राहुल गांधी ने ‘द कारवां’ मैगजीन में छपे उस लेख का हवाला दिया जिसमें दावा किया गया है कि अगस्त 2020 की उस रात जब चीनी टैंक कैलाश रेंज (Rechin La) की ओर बढ़ रहे थे, तब शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व ने सेना को स्पष्ट निर्देश देने में देरी की थी। राहुल का तर्क है कि सरकार इस किताब के प्रकाशन को इसलिए रोक रही है क्योंकि इसमें 2020 के लद्दाख संकट के दौरान पीएमओ (PMO) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए हैं।

सदन का माहौल: ‘परमिशन’ शब्द पर तकरार (Reporting Feel) आज सुबह लोकसभा में तब माहौल और गरमा गया जब राहुल गांधी ने चेयर (अध्यक्ष) द्वारा ‘परमिशन’ (अनुमति) शब्द के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई। राहुल ने सीना तानकर कहा— “मैं विपक्ष का नेता हूँ, मुझे बोलने के लिए किसी की अनुमति की जरूरत नहीं, यह मेरा संवैधानिक अधिकार है।” इसके बाद ट्रेजरी बेंच (सत्ता पक्ष) से ‘नियम 349’ का हवाला दिया गया, जो कहता है कि सदन में बिना ऑथेंटिकेशन के किसी भी बाहरी लेख या अप्रकाशित किताब का जिक्र नहीं किया जा सकता। राजनाथ सिंह ने इसे ‘देश को गुमराह करने वाली राजनीति’ करार दिया।

क्या कहते हैं ग्राउंड के लोग? (Human Touch) संसद की कैंटीन से लेकर दिल्ली के सियासी गलियारों तक, चर्चा सिर्फ एक ही है— “क्या एक फौजी की अधूरी किताब सरकार के लिए गले की हड्डी बन गई है?” पूर्व सैनिकों के बीच भी इस पर दो राय हैं। कुछ का कहना है कि सैन्य संस्मरणों को सेंसर करना सुरक्षा के लिए जरूरी है, तो कुछ इसे ‘इतिहास को दबाने’ की कोशिश मान रहे हैं। लद्दाख के एक स्थानीय युवा ने फोन पर ‘बेबाक बयान’ से कहा— “हमें आंकड़ों से मतलब नहीं, हमें यह जानना है कि हमारी ज़मीन पर उस रात क्या हुआ था।”

ट्रंप का ‘टैरिफ वार’ खत्म, मोदी की ‘दोस्ती’ शुरू: अमेरिका ने भारतीय सामान पर घटाई दीवारें; क्या अब आपकी जेब पर पड़ेगा असर?

नई दिल्ली/वॉशिंगटन (ब्यूरो): आज सुबह जब दलाल स्ट्रीट पर ट्रेडिंग की घंटी बजी, तो माहौल में एक अलग ही करंट था। वजह थी वॉशिंगटन से आई वह खबर, जिसका इंतजार भारतीय एक्सपोर्टर्स और शेयर बाजार पिछले कई महीनों से कर रहे थे। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुई 40 मिनट की फोन कॉल के बाद, अमेरिका ने भारतीय सामानों पर लगाए गए सख्त ‘रेसिप्रोकल टैरिफ’ को 50% से घटाकर 18% करने का ऐलान कर दिया है।

वो क्या था, जिसने बाजी पलट दी? (Original Angle) आमतौर पर ट्रंप अपनी ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति के लिए जाने जाते हैं, लेकिन इस बार ‘मोदी मैजिक’ काम कर गया। जानकारों का कहना है कि भारत ने अमेरिका से बड़ी मात्रा में ‘शेल गैस’ और ‘एग्रो प्रोडक्ट्स’ खरीदने का जो भरोसा दिया, उसने ट्रंप का दिल जीत लिया। यह समझौता केवल व्यापार नहीं, बल्कि चीन को वैश्विक सप्लाई चेन से बाहर धकेलने की एक सोची-समझी रणनीतिक चाल है।

बाजार का ‘सुनामी’ जैसा उछाल (Reporting Feel) खबर आते ही बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स 3,100 अंकों की छलांग लगाकर रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया। सूरत के कपड़ा व्यापारी हों या बेंगलुरु के आईटी प्रोफेशनल, हर कोई इस डील में अपना मुनाफा देख रहा है। रिलायंस, टाटा मोटर्स और विप्रो जैसे शेयरों में आज ऐसी खरीदारी देखी गई जैसे कोई दिवाली का सेल हो।

ग्राउंड रिपोर्ट: क्या बदलेगा आपके लिए? (Human Touch) सूरत के एक कपड़ा निर्यातक, महेश भाई ने ‘बेबाक बयान’ से बात करते हुए कहा— “पिछले साल टैरिफ बढ़ने से हमारे गोदाम माल से भरे पड़े थे, ऑर्डर कैंसिल हो रहे थे। आज की इस खबर ने हमें नई जिंदगी दी है। अब हम गर्व से ‘मेड इन इंडिया’ लेबल के साथ अमेरिकी मॉल्स में मुकाबला कर पाएंगे।” इस डील का सीधा असर केवल बड़े घरानों पर नहीं, बल्कि उन लाखों कारीगरों पर पड़ेगा जो हस्तशिल्प, जेम्स और ज्वेलरी के काम से जुड़े हैं। सस्ते निर्यात का मतलब है—ज्यादा ऑर्डर, ज्यादा काम और बेहतर मजदूरी।

सिरपुर महोत्सव 2026: बाबा हंसराज रघुवंशी की शिव भक्ति में डूबी ऐतिहासिक नगरी, मुख्यमंत्री ने दी 200 करोड़ की सौगात

महासमुंद / सिरपुर | 02 फरवरी 2026 छत्तीसगढ़ की प्राचीन और पावन नगरी सिरपुर में ‘सिरपुर महोत्सव 2026’ का आगाज़ किसी दिव्य उत्सव की तरह हुआ है। महानदी के तट पर स्थित इस ऐतिहासिक धरोहर में तीन दिवसीय महोत्सव का भव्य शुभारंभ प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सिरपुर के सर्वांगीण विकास के लिए 200 करोड़ रुपये के विकास कार्यों की घोषणा कर क्षेत्रवासियों को बड़ी सौगात दी। 1 से 3 फरवरी तक चलने वाला यह महोत्सव इस बार भक्ति, लोक कला और शास्त्रीय संगीत के अद्भुत संगम के कारण पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है।

भक्ति संध्या: जब बाबा हंसराज की आवाज़ से शिवमय हुआ सिरपुर

महोत्सव के पहले दिन की शाम पूरी तरह महादेव के नाम रही। प्रसिद्ध भक्ति गायक बाबा हंसराज रघुवंशी ने जैसे ही मंच संभाला, हजारों की संख्या में मौजूद जनसैलाब ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष से गूंज उठा। बाबा हंसराज ने अपने चिर-परिचित अंदाज़ में जब “मेरा भोला है भंडारी”, “शिव समा रहे मुझमें” और “लागी लगन शंकरा” जैसे भजनों की प्रस्तुति दी, तो दर्शक अपनी सुध-बुध खोकर झूमने लगे।

अयोध्या के राम मंदिर की गूंज भी यहाँ सुनाई दी, जब उन्होंने “अयोध्या आए मेरे प्यारे, राम सिया राम जी” गाकर माहौल को भावुक और भक्तिपूर्ण बना दिया। उनकी टीम के संगीत और सुरों ने सिरपुर की प्राचीन भूमि पर एक ऐसी आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार किया, जिसे लोग लंबे समय तक याद रखेंगे।

लोक कला और संस्कृति का अनूठा प्रदर्शन

पहले दिन केवल भक्ति ही नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की माटी की खुशबू भी बिखरी। सुनील तिवारी लोक कला मंच की ‘रंग-झांझर’ प्रस्तुति ने दर्शकों का मन मोह लिया। वहीं, फुलझरिया कर्मा पार्टी के पारंपरिक कर्मा नृत्य ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय संस्कृति का सजीव चित्रण किया।

विशेष आकर्षण इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ के कलाकारों का रहा। उन्होंने कत्थक, ओडिसी, ध्रुपद गायन, सितार वादन और ‘तथागत’ नाटक के माध्यम से सिरपुर के बौद्ध इतिहास और कलात्मक गहराई को मंच पर उतारा। सूफी और शास्त्रीय संगीत की प्रस्तुतियों ने महोत्सव की गरिमा में चार चाँद लगा दिए।

आज की बड़ी तैयारी: ‘इंडियन आइडल’ के सितारे बिखेरेंगे जलवा

महोत्सव का दूसरा दिन यानी आज (2 फरवरी) और भी ज्यादा धमाकेदार होने वाला है। आज शाम 7 बजे से रात 10 बजे तक सुरों की महफिल सजेगी, जिसमें इंडियन आइडल के मशहूर सितारे अपनी आवाज़ का जादू बिखेरेंगे:

  • नतिन कुमार (सीजन 10): अपनी ऊर्जावान और सूफी गायकी के लिए मशहूर।

  • नचिकेत लेले (सीजन 12): जो अपनी शास्त्रीय और बॉलीवुड गायकी से पहचान बना चुके हैं।

  • वैशाली रायकवार: सुप्रसिद्ध गायिका जो आधुनिक और लोक गीतों का तड़का लगाएंगी।

आज शाम 4 बजे से ही शास्त्रीय गायन, कबीर संगीत संध्या और भरतनाट्यम जैसे कार्यक्रमों की शुरुआत हो जाएगी। साथ ही, भिलाई की पुष्पा साहू द्वारा ‘नवा किस्मत लोक कला मंच’ की प्रस्तुति भी मुख्य आकर्षण होगी।

विश्व धरोहर की ओर बढ़ते कदम

जिला प्रशासन महासमुंद और सिरपुर विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण (SADA) द्वारा आयोजित यह महोत्सव केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं है, बल्कि सिरपुर को यूनेस्को (UNESCO) विश्व धरोहर स्थल की सूची में शामिल कराने की दिशा में एक सशक्त प्रयास है। यहाँ बौद्ध विहारों, शिव मंदिरों और विष्णु प्रतीकों का अद्भुत संगम है, जो दुनिया भर के पर्यटकों को आकर्षित कर रहा है।

महानदी के तट पर आस्था का यह मेला छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहा है। श्रद्धालु ऐतिहासिक स्थलों के भ्रमण के साथ-साथ इन सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भरपूर आनंद ले रहे हैं।

छत्तीसगढ़ में महासमुंद का जलवा: धान खरीदी में तोड़े सारे रिकॉर्ड, राजधानी भी रह गई पीछे!

महासमुंद | विशेष रिपोर्ट छत्तीसगढ़ के कृषि प्रधान ढांचे में महासमुंद जिले ने एक बार फिर अपनी धाक जमाई है। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के अंतर्गत समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के महाअभियान में महासमुंद ने पूरे प्रदेश में सर्वाधिक धान की खरीदी कर प्रथम स्थान हासिल किया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जिले में कुल 10,00,187.16 मीट्रिक टन धान की खरीदी सफलतापूर्वक संपन्न हुई। यह उपलब्धि न केवल जिले के किसानों की मेहनत का परिणाम है, बल्कि जिला प्रशासन के उस सुव्यवस्थित प्रबंधन की भी जीत है, जिसने 182 धान उपार्जन केंद्रों पर खरीदी की प्रक्रिया को पारदर्शी और सुगम बनाए रखा। कलेक्टर विनय लंगेह के कुशल मार्गदर्शन में इस वर्ष शासन द्वारा निर्धारित 11,93,570 मीट्रिक टन के लक्ष्य को हासिल करने के लिए हर संभव प्रयास किए गए, जिसके फलस्वरूप जिला इस आंकड़े के बेहद करीब पहुंचने में सफल रहा।

धान खरीदी की इस प्रक्रिया में किसानों की भागीदारी ने नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। जिले में कुल 1,60,118 किसान पंजीकृत थे, जिनमें से 1,48,418 किसानों ने अपना धान विक्रय किया। यह कुल पंजीयन का 92.69 प्रतिशत है, जो कि राज्य के औसत भागीदारी प्रतिशत (91.22%) से कहीं अधिक है। यह आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि महासमुंद के किसानों का भरोसा सरकारी व्यवस्था और प्रशासन पर अटूट रहा है। खरीदी के पश्चात 1,09,676 किसानों द्वारा 9,883.24 हेक्टेयर रकबा समर्पित करना भी इस भरोसे की पुष्टि करता है। हालांकि, यदि पिछले वित्तीय वर्ष (2024-25) से तुलना की जाए, तो इस बार खरीदी में 9.43 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है—पिछले वर्ष यह आंकड़ा 11,04,273.24 मीट्रिक टन था—परंतु इसके बावजूद महासमुंद ने अपनी शीर्ष स्थिति को बरकरार रखा है।

प्रशासन की सबसे बड़ी परीक्षा अवैध धान के परिवहन और भंडारण को रोकने में थी, जिसमें महासमुंद पुलिस और राजस्व विभाग ने अभूतपूर्व कड़ाई दिखाई। कलेक्टर के स्पष्ट निर्देशों के बाद, अंतरराज्यीय सीमाओं पर 16 विशेष जांच चौकियां स्थापित की गई थीं, जहां से बाहरी धान के प्रवेश को पूरी तरह प्रतिबंधित किया गया। एसडीएम और तहसीलदारों के नेतृत्व में गठित उड़नदस्तों ने लगातार छापेमारी की, जिसके परिणामस्वरूप अवैध परिवहन और अवैध स्टॉकिंग के कुल 399 प्रकरण दर्ज किए गए। इस सख्त निगरानी के दौरान 1,69,862 क्विंटल धान जब्त किया गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में कई गुना अधिक है (पिछले वर्ष केवल 184 प्रकरणों में 12,828 क्विंटल जब्ती हुई थी)। अवैध धान पर की गई इस कठोर कार्यवाही के मामले में भी महासमुंद जिला पूरे छत्तीसगढ़ में नंबर वन पर रहा।

कुल मिलाकर, महासमुंद जिले में धान खरीदी का यह सत्र अनुशासन, पारदर्शिता और त्वरित क्रियान्वयन की एक मिसाल बनकर उभरा है। धान उपार्जन केंद्रों पर किसानों को टोकन तुंहर हाथ ऐप और भौतिक सुविधाओं के जरिए जो राहत प्रदान की गई, उसने पूरी प्रक्रिया को सुगम बनाया। समय पर भुगतान और बेहतर मिलिंग प्रबंधन ने इस सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह समग्र परिणाम जिले के प्रशासनिक अधिकारियों, खाद्य विभाग, मंडी बोर्ड और किसानों के बीच के मजबूत तालमेल का प्रतीक है, जो भविष्य में छत्तीसगढ़ के अन्य जिलों के लिए एक ‘बेंचमार्क’ (आदर्श मानक) के रूप में कार्य करेगा।

छत्तीसगढ़ में धान खरीदी का संकट: किसान कांग्रेस का उग्र आंदोलन, SDM दफ्तर घेरा, राज्यपाल को 7 मांगों का अल्टीमेटम

 

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
सरायपाली (महासमुंद)। छत्तीसगढ़ की कृषि अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले धान उत्पादन में इस साल भारी अव्यवस्था का सामना कर रहे किसानों ने अपनी आवाज बुलंद कर दी है। सोमवार को किसान कांग्रेस के बैनर तले सैकड़ों किसानों ने महासमुंद जिले के सरायपाली इलाके में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। स्थानीय विधायक चतुरीनंद और जिला किसान कांग्रेस अध्यक्ष मानिक साहू की अगुवाई में किसानों का जत्था अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) कार्यालय पहुंचा, जहां उन्होंने घेराव कर अपनी नाराजगी जाहिर की। प्रदर्शनकारियों ने राज्यपाल के नाम एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें धान खरीदी प्रक्रिया में सुधार के लिए सात प्रमुख मांगें रखी गईं। यह आंदोलन प्रदेश भर में फैली धान खरीदी की बदहाली को उजागर करता है, जहां किसानों को अपनी मेहनत की फसल बेचने में भी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
प्रदर्शन की पृष्ठभूमि में छत्तीसगढ़ सरकार की धान खरीदी नीति पर गंभीर सवाल उठाए गए। किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि खरीदी केंद्रों पर व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। हजारों किसान अभी भी अपनी उपज को सरकारी केंद्रों पर बेचने से महरूम हैं, जबकि पहले से जमा धान का उठाव न होने से बारिश या अन्य प्राकृतिक आपदाओं से नुकसान का खतरा मंडरा रहा है। सरकार द्वारा घोषित “एकमुश्त भुगतान” की नीति को भी किसानों ने महज एक जुमला करार दिया, क्योंकि वास्तव में भुगतान में देरी और कटौती की शिकायतें आम हैं। इस प्रदर्शन ने न केवल स्थानीय मुद्दों को उठाया, बल्कि पूरे प्रदेश में किसानों की व्यथा को प्रतिबिंबित किया, जहां कृषि संकट गहराता जा रहा है।
किसान कांग्रेस के पदाधिकारियों ने प्रदर्शन के दौरान जोर देकर कहा कि धान खरीदी की प्रक्रिया में प्रशासन की उदासीनता और भ्रष्टाचार किसानों को तबाह कर रहा है। उन्होंने बताया कि कई किसान लंबे समय से टोकन का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन सरकारी तंत्र की लापरवाही से उनकी मेहनत बर्बाद हो रही है। प्रदर्शन में शामिल किसानों ने नारे लगाते हुए अपनी मांगों को दोहराया, जिससे इलाके में तनाव का माहौल बन गया। एसडीएम कार्यालय के बाहर घंटों चले इस घेराव ने स्थानीय प्रशासन को भी हिलाकर रख दिया।

किसानों की सात सूत्रीय मांगें विस्तार से समझें

किसानों ने ज्ञापन में अपनी मांगों को स्पष्ट रूप से रखा है, जो धान खरीदी की पूरी प्रक्रिया में सुधार की दिशा में एक रोडमैप की तरह हैं। ये मांगें न केवल तात्कालिक राहत प्रदान करेंगी, बल्कि भविष्य में ऐसी समस्याओं को रोकने में भी मददगार साबित हो सकती हैं:
खरीदी की समयसीमा में विस्तार: वर्तमान अंतिम तिथि को बढ़ाकर 28 फरवरी 2026 तक किया जाए, ताकि सभी किसान अपनी फसल बेच सकें। इससे उन किसानों को फायदा होगा जो मौसम या अन्य कारणों से देरी से कटाई कर रहे हैं।
जमा धान का तेज उठाव: खरीदी केंद्रों पर पड़े धान को तुरंत उठाया जाए, जिससे भंडारण की समस्या हल हो और नुकसान से बचा जा सके। किसानों का कहना है कि उठाव की देरी से धान सड़ने या चोरी होने का खतरा बढ़ जाता है।
तत्काल एकमुश्त भुगतान: घोषित 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से पूरा भुगतान एक बार में किया जाए, बिना किसी कटौती या देरी के। यह मांग सरकार के वादों पर सवाल उठाती है, जहां किसानों को किस्तों में पैसा मिलता है।
लंबित टोकन का शीघ्र जारी होना: सभी कटे या लंबित टोकन सात दिनों के अंदर जारी किए जाएं, ताकि किसान बिना विलंब के अपनी उपज बेच सकें। यह उन किसानों के लिए महत्वपूर्ण है जो प्रशासनिक गड़बड़ियों का शिकार हो रहे हैं।
वन पट्टा धारक किसानों की समस्याओं का समाधान: तकनीकी दिक्कतों को तुरंत दूर किया जाए, जैसे दस्तावेजों की वैधता या रजिस्ट्रेशन में अड़चनें। ये किसान जंगल क्षेत्रों में रहते हैं और सरकारी योजनाओं से अक्सर वंचित रह जाते हैं।
रकबा कटौती और उत्पीड़न पर रोक: गिरदावरी के नाम पर किसानों के खेतों के रकबे में कटौती बंद हो, साथ ही मानसिक उत्पीड़न की शिकायतों पर सख्त कार्रवाई की जाए। किसान नेताओं ने इसे प्रशासनिक दमन का रूप बताया।
टोकन सत्यापन की जांच प्रक्रिया बंद: किसानों के घरों या कोठारों में जाकर धान की जांच करने की प्रथा तत्काल रोकी जाए, क्योंकि यह उनके सम्मान और गोपनीयता का उल्लंघन है। इससे किसानों में डर का माहौल बन रहा है।
इन मांगों के पीछे किसानों की मुख्य शिकायत यह है कि टोकन सत्यापन के बहाने अधिकारियों द्वारा उनके घरों में दखलअंदाजी की जा रही है, जो न केवल अपमानजनक है बल्कि अनावश्यक भी। नेताओं ने इसे किसानों के स्वाभिमान पर हमला बताया और कहा कि ऐसी प्रथाएं लोकतंत्र में अस्वीकार्य हैं।

नेताओं की चेतावनी आंदोलन होगा और तेज

प्रदर्शन में प्रदेश स्तर के कई किसान कांग्रेस पदाधिकारी शामिल हुए, जिनमें राजेश मुखर्जी (प्रदेश कोषाध्यक्ष), अशोक शर्मा, कमल अग्रवाल, देवेंद्र पटेल, नवदीप चंद्राकर, फारम लाल पटेल (भंवरपुर ब्लॉक अध्यक्ष), भगत राम पटेल (छुहीपाली ब्लॉक अध्यक्ष), कौशल कुमार बघेल, दीपक साहू, विजय यादव और प्रभात पटेल प्रमुख थे। इन नेताओं ने एक स्वर में चेतावनी दी कि यदि इन मांगों पर तुरंत अमल नहीं किया गया, तो आंदोलन को और उग्र रूप दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसान अब चुप नहीं बैठेंगे और पूरे प्रदेश में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे।
प्रशासन की ओर से ज्ञापन को स्वीकार कर उच्च अधिकारियों को भेजने का आश्वासन दिया गया, लेकिन किसानों का कहना है कि वे अब महज वादों से संतुष्ट नहीं होंगे। उन्हें ठोस कार्रवाई चाहिए, अन्यथा संकट और गहरा सकता है। यह घटना छत्तीसगढ़ की कृषि राजनीति में एक नया मोड़ ला सकती है, जहां किसानों की मांगें अब चुनावी मुद्दा बन सकती हैं।

सिरपुर महोत्सव 2026: प्राचीन विरासत और आधुनिक संगीत का भव्य संगम! बाबा हंसराज रघुवंशी, हेमंत बृजवासी और मीत ब्रदर्स करेंगे धमाल

 

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुंद / 25 जनवरी 2026 – छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक और पुरातात्विक नगरी सिरपुर एक बार फिर संस्कृति, कला और संगीत के रंगों से सराबोर होने वाली है। सिरपुर महोत्सव 2026 का तीन दिवसीय भव्य आयोजन 1 से 3 फरवरी 2026 तक जिला प्रशासन और सिरपुर विकास प्राधिकरण के संयुक्त तत्वावधान में होने जा रहा है। यह महोत्सव न केवल छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक-संस्कृति और शास्त्रीय कला का उत्सव होगा, बल्कि आधुनिक बॉलीवुड संगीत के सितारों से भी जगमगाएगा।
यह महोत्सव सिरपुर की प्राचीन बौद्ध और हिंदू विरासत को जीवंत करते हुए प्रदेश और देशभर के कलाकारों को एक मंच पर लाएगा। यहां लोक नृत्य, शास्त्रीय संगीत, भक्ति भजन और बॉलीवुड के हिट गानों का अनोखा मिश्रण देखने को मिलेगा, जो इतिहास, आस्था और मनोरंजन का अद्भुत संगम प्रस्तुत करेगा।

पहले दिन (1 फरवरी) भक्ति और लोक संगीत की शुरुआत

महोत्सव की शुरुआत दोपहर से सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ होगी। दिनभर लोक नृत्य, पंथी, कथक, ओडिसी और अन्य मंचीय प्रस्तुतियां दर्शकों को आकर्षित करेंगी। शाम होते-होते रंगारंग कार्यक्रम शुरू होंगे और रात्रि सत्र में प्रसिद्ध भक्ति गायक बाबा हंसराज रघुवंशी अपनी टीम के साथ मंच संभालेंगे। “मेरा भोला है भंडारी” जैसे सुपरहिट भजनों के लिए जाने-माने बाबा हंसराज अपनी मधुर और भक्ति से भरी आवाज से श्रोताओं का दिल जीत लेंगे। उनकी प्रस्तुति लोक और भक्ति संगीत का शानदार मेल होगी, जो महोत्सव को दिव्य आभा प्रदान करेगी।

दूसरे दिन (2 फरवरी) शास्त्रीय संगीत का जादू

दूसरे दिन का फोकस पूरी तरह शास्त्रीय संगीत और वाद्य प्रस्तुतियों पर रहेगा। इंदिराकला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ के प्रतिभाशाली कलाकार क्लासिकल वोकल, इंस्ट्रूमेंटल, तबला वादन और सुगम संगीत की मनमोहक प्रस्तुतियां देंगे। यह दिन शास्त्रीय कला प्रेमियों के लिए स्वर्ग समान होगा।
रात्रि में सारेगामा लिटिल चैंप्स फेम गायक हेमंत बृजवासी अपनी सुमधुर और भावपूर्ण आवाज से मंच पर छा जाएंगे। हेमंत की मधुर स्वर लहरियां श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देंगी और महोत्सव को एक नई ऊर्जा प्रदान करेंगी।

तीसरे दिन (3 फरवरी): भव्य समापन के साथ धमाकेदार प्रदर्शन

अंतिम दिन पूरे दिन लोक नृत्य, ओडिसी, कथक, डंडा नृत्य और विविध मंचीय कार्यक्रमों की श्रृंखला चलेगी। शाम को समापन संध्या में लोकप्रिय बॉलीवुड गायक मीत ब्रदर्स की धमाकेदार प्रस्तुति होगी। मीत ब्रदर्स अपने एनर्जेटिक गानों और स्टेज परफॉर्मेंस से महोत्सव का शानदार समापन करेंगे, जो दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर देगा।
सिरपुर महोत्सव में छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश के ख्यातनाम कलाकार शामिल होंगे। यह आयोजन न केवल सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित और प्रचारित करने का माध्यम बनेगा, बल्कि पर्यटन को भी बढ़ावा देगा।
जिला प्रशासन ने सभी आम नागरिकों, पर्यटकों और संस्कृति प्रेमियों से अपील की है कि वे बड़ी संख्या में पहुंचकर इस भव्य महोत्सव को सफल और यादगार बनाएं। आइए, सिरपुर की प्राचीन गलियों में संगीत और नृत्य की लहरें दौड़ाएं और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक वैभव को नजदीक से महसूस करें..!

सिरपुर महोत्सव 2026 – जहां इतिहास जीवंत होता है और संगीत दिलों को छूता है..!