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सालिकराम डड़सेना की भावुक विदाई 43 वर्षों की समर्पित सेवा के बाद वन विभाग से सेवानिवृत्ति, पिथौरा में गरिमामय सम्मान समारोह

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रिपोर्टर मयंक गुप्ता
पिथौरा (महासमुंद जिला, छत्तीसगढ़)। छत्तीसगढ़ वन विभाग के एक वरिष्ठ और समर्पित अधिकारी सालिकराम डड़सेना ने 43 वर्षों की लंबी, निष्ठावान और प्रेरणादायी सेवा के बाद 31 जनवरी 2026 को सरकारी नौकरी से सेवानिवृत्ति प्राप्त की। इस ऐतिहासिक क्षण को चिह्नित करने के लिए पिथौरा वन परिक्षेत्र कार्यालय परिसर में एक भावपूर्ण और गरिमापूर्ण विदाई समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी-कर्मचारी, न्यायिक पदाधिकारी, स्थानीय जनप्रतिनिधि तथा पिथौरा नगर के प्रमुख गणमान्य नागरिकों की भारी संख्या में उपस्थिति रही, जो डड़सेना के योगदान की व्यापक स्वीकृति का प्रमाण थी।

समारोह के प्रमुख अतिथिगण और अध्यक्षता

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में स्वयं सेवानिवृत्त अधिकारी सालिकराम डड़सेना उपस्थित रहे, जबकि उनकी धर्मपत्नी संतोषी डड़सेना विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुईं। समारोह की अध्यक्षता संयुक्त वनमंडलाधिकारी सरायपाली यू.आर. बसंत ने की, जिन्होंने डड़सेना के सेवाकाल की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए सभी को प्रेरित किया। अति विशिष्ट अतिथियों में पिथौरा के न्यायिक मजिस्ट्रेट शौरभ बारा और बसना के न्यायिक मजिस्ट्रेट मंजीत जांगड़े भी शरीक हुए, जिनकी उपस्थिति ने समारोह को और अधिक प्रतिष्ठित बना दिया।
इसके अतिरिक्त, सेवानिवृत्त सहायक वनसंरक्षक आर.पी. साहू, संयुक्त वनमंडलाधिकारी पिथौरा डिम्पी बैस, सेवानिवृत्त रेंजर बी.आर. खुंटे, विजय शंकर साहू, अभिराम साहू, तोषराम सिन्हा, पिथौरा रेंज के नव नियुक्त प्रभारी रेंजर सुखराम निराला तथा पिथौरा नगर की पार्षद रामकुंवर सिन्हा की विशेष उपस्थिति ने समारोह को और समृद्ध किया।

वक्ताओं की सराहना और प्रेरणादायी वक्तव्य

समारोह के दौरान विभिन्न वक्ताओं ने सालिकराम डड़सेना के लंबे सेवा काल में किए गए असाधारण योगदानों, उनके सशक्त नेतृत्व, कठोर अनुशासन, सौम्य स्वभाव और टीम वर्क की भावना की खुलकर प्रशंसा की। मंचासीन अतिथियों के अलावा, श्रृंखला साहित्य मंच के प्रख्यात कवि प्रवीण प्रवाह, तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के ब्लॉक अध्यक्ष उमेश दीक्षित, सेवानिवृत्त डिप्टी रेंजर रमेश सिंह ठाकुर सहित अन्य वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त करते हुए डड़सेना के कार्यों को भावी पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत बताया। उन्होंने उनके द्वारा वन संरक्षण, कर्मचारी कल्याण और सामुदायिक विकास में निभाई गई भूमिका पर विशेष जोर दिया।
विशेष आकर्षण का केंद्र रहा जब सेवानिवृत्त डिप्टी रेंजर रतन सिंह डड़सेना ने सालिकराम डड़सेना के जन्म से लेकर सेवानिवृत्ति तक के समृद्ध जीवन, उनके सौम्य व्यक्तित्व और अनुकरणीय कार्यशैली पर विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने उनके पूरे 43 वर्षों के सेवा सफर का एक जीवंत और प्रेरक सारांश प्रस्तुत किया, जो उपस्थितजनों को गहन चिंतन के लिए प्रेरित करने वाला था।

मुख्य अतिथि का भावुक संबोधन सेवा यात्रा का रोचक खुलासा

मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए सालिकराम डड़सेना भावुक हो उठे और उन्होंने अपने सेवा जीवन की एक प्रेरक यात्रा साझा की। उन्होंने बताया कि उनका सफर 1983 में पिथौरा काष्ठागार में दैनिक वेतनभोगी (दिन मजदूर) के रूप में शुरू हुआ था। धीरे-धीरे मेहनत और लगन से 1990 में वनरक्षक, 2012 में वनपाल और अंततः 2018 में उपवनक्षेत्रपाल (वन परिक्षेत्र अधिकारी) के पद पर पदोन्नति प्राप्त की।
अपने पूरे करियर में उन्होंने छत्तीसगढ़ के विविध भौगोलिक क्षेत्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। इनमें बस्तर संभाग के चारामा, कांकेर, भानुप्रतापपुर तथा उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व शामिल हैं। इसी प्रकार, बलौदाबाजार जिले के बारनवापारा, चरौदा, देवपुर क्षेत्र तथा महासमुंद और कसडोल में रेंजर के पद पर उन्होंने वन संरक्षण और जैव विविधता की रक्षा में उल्लेखनीय कार्य किया।

संगठनात्मक और सामाजिक योगदान एक बहुआयामी व्यक्तित्व

सेवाकाल के साथ-साथ सालिकराम डड़सेना सामाजिक और संगठनात्मक क्षेत्रों में भी अग्रणी रहे। उन्होंने प्रारंभ से ही भारतीय मजदूर संघ से जुड़कर अविभाजित रायपुर जिले में अरुण कुमार चौबे के मार्गदर्शन में संगठनात्मक दायित्व निभाए। नागदा, बैंगलोर, दिल्ली और भोपाल में आयोजित संघ के प्रमुख अधिवेशनों में सक्रिय भागीदारी की तथा संगठन के माध्यम से सैकड़ों दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को नियमित पदों पर स्थापित करने में निर्णायक भूमिका अदा की।
वे छत्तीसगढ़ वन कर्मचारी संघ महासमुंद के लगातार दस वर्षों तक जिला अध्यक्ष रहे और रायपुर संभाग तथा प्रांतीय स्तर पर भी मजबूत नेतृत्व प्रदान किया। सामाजिक मोर्चे पर, सिन्हा कलार समाज पिथौरा के मंडलेश्वर जिला अध्यक्ष के रूप में कार्यरत रहने के साथ ही वर्तमान में प्रांतीय कार्यकारिणी सदस्य के पद पर भी सक्रिय योगदान दे रहे हैं।

सम्मान का भावुक क्षण और शुभकामनाएं

सेवानिवृत्ति पर प्राप्त सम्मान को सालिकराम डड़सेना ने अपने समस्त सेवा कार्यकाल का सर्वोच्च प्रतिफल बताते हुए इसे जीवन की ‘अमूल्य निधि’ करार दिया। इस भावुक पल में वे आंसुओं से भीग गए, जिसने उपस्थित सभी को गहराई से प्रभावित किया। सभी अधिकारियों, कर्मचारियों और अतिथियों ने उनके सुखी, स्वस्थ, दीर्घायु और समृद्ध जीवन की हार्दिक कामना की तथा नई जीवन यात्रा के लिए हर्ष की शुभकामनाएं प्रदान कीं।

कार्यक्रम का संचालन और अन्य सम्मान

कार्यक्रम का संचालन शिक्षा जगत के संकुल प्रभारी राजाराम पटेल ने अत्यंत कुशलता से किया, जो पूरे समारोह को एक सुव्यवस्थित रूप प्रदान करने में सहायक रहा। आभार प्रदर्शन डिप्टी रेंजर ननकुसिया साहू ने भावपूर्ण ढंग से किया। इस अवसर पर वनरक्षक प्रशिक्षण शाला के वनपाल मो. शफी को भी शाल, श्रीफल और प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया, जो समारोह की समावेशी भावना को दर्शाता है।
समारोह में महासमुंद के रेंजर सियाराम कर्मकार, डिप्टी रेंजर सतीश पटेल, ललित पटेल, राजकुमार साहू, वीरेंद्र पाठक, छबिराम साहू, सुशीला साहू सहित वन विभाग और अन्य विभागों के अनेक अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। सभी ने सेवानिवृत्त अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से बधाई दी और उनके भविष्य के लिए शुभेच्छा व्यक्त की।
सालिकराम डड़सेना का यह सेवा सफर न केवल वन संरक्षण और पर्यावरण रक्षा के क्षेत्र में अपितु कर्मचारी हितों की रक्षा तथा सामाजिक उत्थान में भी एक जीवंत मिसाल के रूप में हमेशा याद रखा जाएगा। उनकी विदाई छत्तीसगढ़ वन विभाग के लिए एक महत्वपूर्ण अध्याय का समापन तो है, लेकिन उनके आदर्श लाखों युवाओं को प्रेरित करते रहेंगे।

CG News: राज्य जीव जंतु कल्याण बोर्ड उपाध्यक्ष आलोक चंद्राकर का तूफानी दौरा, महासमुंद से भिलाई तक का शेड्यूल जारी

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छत्तीसगढ़/रायपुर | 05 फरवरी 2026 छत्तीसगढ़ की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में इन दिनों सक्रियता काफी बढ़ गई है। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ राज्य जीव जंतु कल्याण बोर्ड के उपाध्यक्ष आलोक चंद्राकर जी का एक विस्तृत और व्यस्त दौरा कार्यक्रम (प्रोटोकॉल) जारी किया गया है। आज 5 फरवरी 2026 को होने वाले इस दौरे में श्री चंद्राकर प्रदेश के कई महत्वपूर्ण जिलों का दौरा करेंगे और स्थानीय कार्यक्रमों में शिरकत करेंगे। इस दौरे को लेकर प्रशासनिक स्तर पर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और संबंधित जिलों के कलेक्टरों व पुलिस अधीक्षकों को सूचित कर दिया गया है।

क्या है पूरा मामला?

आलोक चंद्राकर जी का यह दौरा मुख्य रूप से सामाजिक और स्थानीय कार्यक्रमों पर केंद्रित है। आधिकारिक प्रोटोकॉल के अनुसार, यह यात्रा महासमुंद से शुरू होकर राजनांदगांव, भिलाई, रायपुर और फिर वापस महासमुंद पर समाप्त होगी। राज्य जीव जंतु कल्याण बोर्ड में उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालने के बाद से ही श्री चंद्राकर लगातार क्षेत्रों का भ्रमण कर रहे हैं।

इस दौरे का उद्देश्य न केवल स्थानीय कार्यकर्ताओं और जनता से मुलाकात करना है, बल्कि विभिन्न सामाजिक आयोजनों में शामिल होकर जनसंपर्क को मजबूत करना भी है। छत्तीसगढ़ सरकार के इस महत्वपूर्ण बोर्ड के सदस्य होने के नाते, उनके दौरों पर जीव-जंतुओं के कल्याण और बोर्ड की आगामी योजनाओं पर भी चर्चा होने की संभावना रहती है।

घटना/दौरा कैसे सामने आया? (पूरा शेड्यूल)

आलोक चंद्राकर जी का यह दौरा सुबह तड़के शुरू होकर देर रात तक चलेगा। उनके प्रोटोकॉल की मुख्य बातें इस प्रकार हैं:

  • शुरुआत: सुबह 10:00 बजे अपने निज निवास ‘भरतलीला मेंशन’, महासमुंद से प्रस्थान करेंगे।

  • राजनांदगांव आगमन: दोपहर 12:00 बजे राजनांदगांव जिला पहुंचेंगे, जहां वे स्थानीय कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे।

  • भिलाई दौरा: दोपहर 02:00 बजे राजनांदगांव से निकलकर दोपहर 03:00 बजे भिलाई (दुर्ग जिला) पहुंचेंगे।

  • रायपुर वापसी: रात 08:00 बजे भिलाई से प्रस्थान कर रात 09:00 बजे रायपुर पहुंचेंगे।

  • शादी समारोह: रात 11:00 बजे रायपुर के फरफौद (आरंग) पहुंचेंगे, जहां वे सरपंच श्री देवेन्द्र चंद्राकर जी के विवाह समारोह में शामिल होंगे।

  • समापन: देर रात 12:30 बजे वापस अपने निवास स्थान महासमुंद लौटेंगे।

इस पूरे सफर के दौरान वे वाहन क्रमांक CG 04 NE 8486 का उपयोग करेंगे।

प्रशासन ने क्या कहा?

दौरा कार्यक्रम जारी होते ही छत्तीसगढ़ राज्य जीव जंतु कल्याण बोर्ड के संयुक्त संचालक ने संबंधित जिलों के आला अधिकारियों को पत्र जारी कर दिया है। महासमुंद, रायपुर, दुर्ग और राजनांदगांव के कलेक्टरों को सुरक्षा और आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

साथ ही, इन जिलों के पुलिस अधीक्षकों (SP) को भी सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद रखने को कहा गया है। प्रोटोकॉल के अनुसार, सर्किट हाउस और विश्राम गृहों में कक्ष आरक्षित करने की जिम्मेदारी भी स्थानीय प्रशासन को सौंपी गई है। महत्वपूर्ण बात यह है कि इस दौरे के दौरान श्री संतोष चंद्राकर जी भी उनके साथ उपस्थित रहेंगे।

स्थानीय लोगों और कार्यकर्ताओं की प्रतिक्रिया

आलोक चंद्राकर जी के राजनांदगांव और भिलाई आगमन को लेकर स्थानीय कार्यकर्ताओं में काफी उत्साह देखा जा रहा है। महासमुंद और रायपुर के बीच पड़ने वाले क्षेत्रों में समर्थकों द्वारा उनके स्वागत की तैयारियां की जा रही हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि इस तरह के दौरों से शासन और जनता के बीच की दूरी कम होती है।

विशेष रूप से आरंग क्षेत्र के सरपंच के घर होने वाले विवाह समारोह में उनकी उपस्थिति को लेकर वहां के ग्रामीण भी उत्साहित हैं। कार्यकर्ताओं का कहना है कि श्री चंद्राकर हमेशा से जमीन से जुड़े रहे हैं और व्यस्त कार्यक्रम के बावजूद सामाजिक संबंधों को प्राथमिकता देते हैं।

आगे क्या हो सकता है?

आलोक चंद्राकर जी के इस सघन दौरे से आने वाले समय में जीव जंतु कल्याण बोर्ड की गतिविधियों में तेजी आने की उम्मीद है। बोर्ड द्वारा राज्य में जीव-जंतुओं के संरक्षण और अस्पतालों की स्थिति सुधारने के लिए जो प्रयास किए जा रहे हैं, उन पर फीडबैक लेने का यह अच्छा अवसर हो सकता है।

प्रोटोकॉल में एक विशेष जानकारी यह भी साझा की गई है कि माननीय उपाध्यक्ष महोदय का ब्लड ग्रुप “B +ve” है, जो किसी भी आपातकालीन स्थिति के लिए प्रशासन द्वारा रिकॉर्ड में रखा गया है। इस दौरे के सफल समापन के बाद, वे राज्य स्तर पर होने वाली आगामी बैठकों में भाग ले सकते हैं।

हाथ की हड्डी टूटी पर हौसला अडिग: चोट के बावजूद दतिया पहुंचे तेली कर्मा सेना के संस्थापक अश्वंत साहू

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छत्तीसगढ़/महासमुंद| 05 फरवरी 2026 समाज सेवा और संगठन के प्रति समर्पण की मिसाल अक्सर किताबों में मिलती है, लेकिन जमीनी स्तर पर ऐसे उदाहरण विरले ही देखने को मिलते हैं। अश्वंत तुषार साहू तेली कर्मा सेना के संस्थापक ने हाल ही में कुछ ऐसा ही कर दिखाया है, जिसकी चर्चा अब पूरे प्रदेश के सामाजिक गलियारों में हो रही है। गंभीर शारीरिक चोट और असहनीय दर्द के बावजूद उन्होंने अपने व्यक्तिगत स्वास्थ्य से ऊपर समाज के हितों को रखा। दतिया में आयोजित प्रदेश स्तरीय तेली, साहू, राठौर चिंतन बैठक में उनकी उपस्थिति ने न केवल कार्यकर्ताओं में जोश भर दिया, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि यदि संकल्प मजबूत हो, तो शरीर की बाधाएं मायने नहीं रखतीं।

यह आयोजन केवल एक औपचारिक बैठक नहीं थी, बल्कि समाज के भविष्य की रूपरेखा तैयार करने का एक महत्वपूर्ण मंच था। अश्वंत साहू का वहां पहुंचना उन तमाम लोगों के लिए एक कड़ा संदेश था जो छोटी-छोटी बाधाओं के सामने हार मान लेते हैं। बैठक में मौजूद लोगों ने जब उन्हें पट्टी बंधे हाथ के साथ मंच पर देखा, तो पूरा परिसर उनके स्वागत में तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

क्या है पूरा मामला?

घटना की पृष्ठभूमि उस वक्त तैयार हुई जब पूरा समाज दतिया में होने वाली इस बड़ी चिंतन बैठक की तैयारियों में जुटा था। राष्ट्रीय तेली कर्मा सेना के संस्थापक अश्वंत तुषार साहू इस बैठक के मुख्य स्तंभों में से एक थे। श्री साहू ने कार्यक्रम के दौरान खुद इस वाकये का जिक्र किया कि कैसे नियति ने उनकी परीक्षा ली। तय कार्यक्रम के मुताबिक, 29 जनवरी को वे महासमुंद से रायपुर रेलवे स्टेशन के लिए रवाना हुए थे, जहाँ से उन्हें दतिया के लिए ट्रेन पकड़नी थी।

इसी सफर के दौरान वे एक दुर्भाग्यपूर्ण सड़क हादसे का शिकार हो गए। हादसे की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनके हाथ की हड्डी टूट गई। आनन-फानन में उन्हें प्राथमिक उपचार दिया गया और डॉक्टरों ने उन्हें सख्त हिदायत दी थी कि वे यात्रा न करें और पूरी तरह बेड रेस्ट पर रहें। लेकिन, अश्वंत साहू के मन में समाज के उन हजारों लोगों की उम्मीदें तैर रही थीं, जो दतिया में उनका इंतजार कर रहे थे। उन्होंने डॉक्टरों की सलाह और शारीरिक पीड़ा को पीछे छोड़ते हुए दतिया जाने का कठिन फैसला लिया।

घटना कैसे सामने आई?

दतिया में जब कार्यक्रम की शुरुआत हुई, तो आयोजक इस बात को लेकर संशय में थे कि क्या श्री साहू ऐसी स्थिति में पहुंच पाएंगे। लेकिन जैसे ही वे कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे, वहां मौजूद हर व्यक्ति उनकी कर्तव्यनिष्ठा देखकर दंग रह गया। उन्होंने अपने उद्बोधन की शुरुआत ही उन शब्दों से की जिसने सबकी आंखों में चमक भर दी। उन्होंने कहा, “भले ही मेरे हाथ की हड्डी टूटी है, लेकिन मेरा हौसला कभी नहीं टूट सकता”।

बैठक के दौरान यह बात तेजी से फैली कि संस्थापक महोदय इतनी बड़ी चोट के बाद भी सफर तय करके आए हैं। स्थानीय मीडिया और समाज के प्रतिनिधियों ने इसे एक ‘साहसिक कदम’ करार दिया। श्री साहू ने बताया कि उनके लिए समाज का संगठन किसी भी व्यक्तिगत पीड़ा से कहीं बड़ा है। उन्होंने मंच से साझा किया कि जब वे दर्द से जूझ रहे थे, तब उन्हें समाज की एकता का विचार ही शक्ति दे रहा था।

प्रशासन और समाज के प्रबुद्ध जनों की राय

बैठक में केवल राजनीतिक या सामाजिक चर्चा ही नहीं हुई, बल्कि समाज के बौद्धिक वर्ग ने भी अपनी बात रखी। अश्वंत साहू के इस कदम पर स्थानीय प्रशासन के कुछ अधिकारियों (जो समाज से जुड़े थे) ने अनौपचारिक रूप से कहा कि नेतृत्व वही होता है जो मुश्किल घड़ी में सामने खड़ा दिखे। समाज के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने कहा कि अश्वंत जी ने आज जो उदाहरण पेश किया है, वह युवाओं के लिए मार्गदर्शक बनेगा।

प्रशासनिक दृष्टिकोण से भी ऐसी बैठकों का महत्व बढ़ जाता है क्योंकि यहाँ से समाज की मुख्यधारा की मांगें शासन तक पहुँचती हैं। साहू समाज के बुजुर्गों ने कहा कि पिछले कई दशकों में उन्होंने कई नेता देखे, लेकिन अपने स्वास्थ्य को दांव पर लगाकर समाज के बीच आने वाला जुनून बहुत कम देखने को मिलता है। उन्होंने कहा कि अश्वंत साहू की यह सक्रियता संगठन को एक नई ऊंचाई पर ले जाएगी।

स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया

महासमुंद और दतिया दोनों ही जगहों पर इस घटना की खूब चर्चा है। महासमुंद के स्थानीय निवासी, जो अश्वंत साहू को करीब से जानते हैं, उनका कहना है कि वे शुरू से ही जुझारू व्यक्तित्व के धनी रहे हैं। दतिया के युवाओं में इस बात को लेकर काफी उत्साह दिखा। कॉलेज जाने वाले छात्रों से लेकर छोटे व्यापारियों तक, जो इस तेली, साहू, राठौर बैठक का हिस्सा थे, उन्होंने इसे ‘प्रेरणा का महाकुंभ’ बताया।

सोशल मीडिया पर भी उनकी तस्वीरें वायरल हो रही हैं, जिसमें वे एक हाथ में माइक थामे और दूसरे हाथ में पट्टी बांधे समाज को संबोधित कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि आज के दौर में जब नेता केवल चुनाव के समय दिखते हैं, अश्वंत साहू जैसे लोग समाज को वैचारिक रूप से मजबूत करने के लिए दिन-रात एक कर रहे हैं।

आगे क्या हो सकता है और समाज का लक्ष्य

अश्वंत साहू ने इस चिंतन बैठक के माध्यम से भविष्य का एक स्पष्ट रोडमैप तैयार कर दिया है। उनका लक्ष्य केवल भीड़ जुटाना नहीं, बल्कि समाज के हर अंतिम व्यक्ति को सशक्त बनाना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आगामी महीनों में तेली कर्मा सेना गांव-गांव जाकर सदस्यता अभियान चलाएगी और लोगों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करेगी।

आगे की रणनीति पर चर्चा करते हुए उन्होंने निम्नलिखित बिंदुओं पर काम करने का संकल्प लिया:

  • शिक्षा और छात्रवृत्ति: समाज के मेधावी लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों के लिए विशेष कोष की स्थापना।

  • रोजगार सृजन: समाज के युवाओं के लिए स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम और छोटे उद्योगों को बढ़ावा देना।

  • राजनीतिक प्रतिनिधित्व: जनसंख्या के अनुपात में समाज की राजनीतिक भागीदारी सुनिश्चित करना।

External Link Suggestion: Department of Public Relations, Chhattisgarh

बैठक का समापन एक संकल्प के साथ हुआ। अश्वंत साहू ने सभी से अपील की कि वे अपनी व्यक्तिगत जिम्मेदारियों के साथ-साथ समाज के प्रति अपने ऋण को भी याद रखें। कार्यक्रम के अंत में एक सकारात्मक संदेश प्रसारित किया गया कि एकता ही वह सूत्र है जिससे समाज का समग्र विकास संभव है।

T20 World Cup: भारत के खिलाफ मैच नहीं खेलेगा पाकिस्तान, पीएम शहबाज शरीफ ने फैसले पर लगाई मुहर

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नई दिल्ली/इस्लामाबाद | 05 फरवरी 2026 क्रिकेट के मैदान पर दुनिया के सबसे बड़े मुकाबले यानी भारत और पाकिस्तान की भिड़ंत को लेकर एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने करोड़ों फैंस का दिल तोड़ दिया है। T20 World Cup India vs Pakistan मैच को लेकर पिछले कई दिनों से चल रही अनिश्चितताओं के बीच अब पाकिस्तान सरकार ने अपना रुख पूरी तरह साफ कर दिया है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने आधिकारिक तौर पर इस फैसले पर अपनी मुहर लगा दी है कि उनकी टीम भारत के खिलाफ विश्व कप का मैच नहीं खेलेगी। शरीफ ने स्पष्ट लहजे में कहा है कि यह फैसला देश के आत्मसम्मान और मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए लिया गया है, और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) को इस दिशा में कड़े निर्देश दे दिए गए हैं।

पाकिस्तान की राजनीति और खेल गलियारों में इस चर्चा ने तब जोर पकड़ा जब प्रधानमंत्री ने खुद इस मसले पर कैबिनेट और खेल मंत्रालय के साथ लंबी बैठक की। शहबाज शरीफ ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि पाकिस्तान हमेशा से खेल को बढ़ावा देने का पक्षधर रहा है, लेकिन मौजूदा हालात में एकतरफा रिश्तों के बीच मैदान पर उतरना मुमकिन नहीं है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट संस्थाओं को इस बात पर गौर करना चाहिए कि खेल के जरिए किसी एक देश को निशाना न बनाया जाए।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, यह पूरा विवाद चैंपियंस ट्रॉफी की मेजबानी और भारत के पाकिस्तान दौरे से इनकार के बाद शुरू हुआ था। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) के कैलेंडर के हिसाब से भारत और पाकिस्तान को आगामी T20 वर्ल्ड कप में एक ही ग्रुप में रखा गया था। शेड्यूल के मुताबिक दोनों टीमों के बीच हाई-वोल्टेज मुकाबला होना तय था, जिससे ब्रॉडकास्टर्स और आईसीसी को सबसे ज्यादा कमाई की उम्मीद थी।

हालांकि, बीसीसीआई (BCCI) ने सुरक्षा कारणों और सरकार की अनुमति न मिलने का हवाला देते हुए पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय सीरीज या उनके देश में जाकर खेलने से पहले ही मना कर दिया था। इसके जवाब में पाकिस्तान में भी विरोध के सुर तेज होने लगे। वहां के पूर्व क्रिकेटरों और जनता का दबाव था कि अगर भारत हमारे यहां खेलने नहीं आ सकता, तो हमें भी उनके साथ किसी भी आईसीसी इवेंट में नहीं खेलना चाहिए। इसी दबाव और राजनीतिक तनाव के बीच प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अब यह फाइनल कॉल ले ली है।

घटना कैसे सामने आई?

इस बड़े फैसले की पटकथा पिछले हफ्ते ही लिखी जा चुकी थी जब पीसीबी के अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री से मुलाकात कर आईसीसी के साथ हुए पत्राचार की जानकारी साझा की थी। कल शाम इस्लामाबाद में हुई एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान जब पीएम शरीफ से खेल और कूटनीति पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने दोटूक शब्दों में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, “हमने बहुत इंतजार किया और खेल भावना का परिचय भी दिया, लेकिन जब बात हमारे देश के गौरव की आती है, तो हम समझौता नहीं करेंगे।”

जैसे ही यह बयान टीवी स्क्रीन्स पर फ्लैश हुआ, क्रिकेट जगत में खलबली मच गई। आईसीसी के अधिकारी जो अब तक इस मामले को ठंडे बस्ते में डालने की कोशिश कर रहे थे, उन्हें अचानक से आपातकालीन बैठक बुलानी पड़ी। सूत्रों की मानें तो पाकिस्तान सरकार ने लिखित में पीसीबी को आदेश दिया है कि वह आईसीसी को सूचित करे कि वे भारत के साथ होने वाले मैच से अपना नाम वापस ले रहे हैं, चाहे इसके लिए उन्हें अंक ही क्यों न गंवाने पड़ें।

प्रशासन और खेल मंत्रालय ने क्या कहा?

पाकिस्तान के खेल मंत्रालय ने इस फैसले का पुरजोर समर्थन किया है। मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि खेल और राजनीति को अलग रखा जाना चाहिए, लेकिन जब एक देश लगातार दूसरे का बहिष्कार कर रहा हो, तो वहां खेल भावना का कोई अर्थ नहीं रह जाता। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अपने संबोधन में कहा कि “यह कदम सोच-समझकर उठाया गया है और यह केवल एक मैच की बात नहीं है, बल्कि यह हमारे स्टैंड की बात है।”

प्रशासनिक स्तर पर पाकिस्तान अब इस मामले को आईसीसी की विवाद समाधान समिति (Dispute Resolution Committee) के पास ले जाने की तैयारी में है। शहबाज शरीफ का मानना है कि यदि आईसीसी भारत को पाकिस्तान के खिलाफ खेलने के लिए मजबूर नहीं कर सकता या हाइब्रिड मॉडल पर सहमत नहीं कर सकता, तो पाकिस्तान के पास भी अपने हितों की रक्षा करने का पूरा अधिकार है। उन्होंने यह भी कहा कि “खेल में राजनीति नहीं होनी चाहिए,” लेकिन यह नियम सभी देशों पर समान रूप से लागू होना चाहिए।

स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया

पाकिस्तान में इस फैसले को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। लाहौर और कराची जैसे शहरों में कई क्रिकेट फैंस इस बात से दुखी हैं कि उन्हें बाबर आजम और रोहित शर्मा की टीमों के बीच टक्कर देखने को नहीं मिलेगी। वहीं, एक बड़ा धड़ा ऐसा भी है जो प्रधानमंत्री के इस कड़े रुख की तारीफ कर रहा है। सोशल मीडिया पर #BoycottIndia और #StandWithPCB जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं।

आम जनता का कहना है कि अगर भारत की टीम पाकिस्तान आने को तैयार नहीं है, तो पाकिस्तान को भी अपनी गरिमा बनाए रखनी चाहिए। स्थानीय बाजारों में चर्चा है कि क्रिकेट सिर्फ एक खेल नहीं रह गया है, बल्कि यह अब राष्ट्रीय अस्मिता का मुद्दा बन चुका है। लोगों का मानना है कि बार-बार झुकने से बेहतर है कि एक बार कड़ा फैसला लिया जाए, भले ही इसका असर भविष्य के टूर्नामेंट्स पर पड़े।

आगे क्या हो सकता है?

शहबाज शरीफ के इस ऐलान के बाद अब गेंद आईसीसी के पाले में है। यदि पाकिस्तान वास्तव में भारत के खिलाफ मैच नहीं खेलता है, तो आईसीसी को करोड़ों रुपये का नुकसान उठाना पड़ सकता है। इतना ही नहीं, टूर्नामेंट के फॉर्मेट और पॉइंट्स टेबल पर भी इसका बुरा असर पड़ेगा। आईसीसी अब पाकिस्तान को मनाने की कोशिश कर सकता है या फिर भारत के मैचों को किसी न्यूट्रल वेन्यू पर शिफ्ट करने का विकल्प दोबारा तलाश सकता है।

दूसरी ओर, भारत के रुख में भी किसी बदलाव की गुंजाइश कम ही नजर आती है। बीसीसीआई पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि वह सरकार के आदेशों का पालन करेगा। ऐसे में अगर पाकिस्तान अपने फैसले पर अड़ा रहता है, तो शायद क्रिकेट इतिहास में यह पहली बार होगा कि विश्व कप जैसे बड़े मंच पर ये दोनों टीमें एक-दूसरे के सामने होने के बावजूद मैदान पर नहीं उतरेंगी। क्रिकेट एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे पाकिस्तान पर प्रतिबंध लगने का खतरा भी बढ़ सकता है, लेकिन शरीफ सरकार ने संकेत दे दिए हैं कि वे हर परिणाम भुगतने को तैयार हैं।

CGBSE Board Exam Helpline: छत्तीसगढ़ बोर्ड परीक्षार्थियों के लिए हेल्पलाइन शुरू, अब दूर होगा तनाव

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छत्तीसगढ़ में बोर्ड परीक्षाओं की तारीखें जैसे-जैसे नजदीक आ रही हैं, छात्रों के माथे पर चिंता की लकीरें गहरी होने लगी हैं। इसी मानसिक दबाव को कम करने और छात्रों की शंकाओं को दूर करने के लिए CGBSE Board Exam Helpline सेवा आज से आधिकारिक तौर पर शुरू कर दी गई है। माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) ने इस बार खास तैयारी की है ताकि दूर-दराज के गांवों में बैठे छात्रों को भी विषय विशेषज्ञों की सलाह मिल सके। यह हेल्पलाइन न सिर्फ विषयों की गुत्थियां सुलझाएगी, बल्कि परीक्षा के डर से जूझ रहे किशोरों को मनोवैज्ञानिक सहारा भी देगी।

रायपुर स्थित माशिमं मुख्यालय में आज सुबह इस सेवा का विधिवत आगाज़ हुआ। जैसे ही हेल्पलाइन के नंबर सक्रिय हुए, पहले ही घंटे में प्रदेश भर से दर्जनों फोन कॉल्स आने शुरू हो गए। इनमें सबसे ज्यादा सवाल गणित और विज्ञान जैसे विषयों को लेकर थे, लेकिन कुछ छात्र ऐसे भी थे जो केवल अपनी घबराहट साझा करना चाहते थे। मंडल के अधिकारियों का कहना है कि यह सेवा परीक्षा खत्म होने तक लगातार जारी रहेगी, जिससे छात्र खुद को अकेला महसूस न करें।

क्या है पूरा मामला?

हर साल फरवरी और मार्च का महीना स्कूली छात्रों के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं होता। छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल की 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं में लाखों छात्र शामिल होते हैं। अक्सर देखा गया है कि परीक्षा पूर्व तैयारी के दौरान छात्र छोटे-छोटे डाउट्स में उलझ जाते हैं या फिर परफॉरमेंस के प्रेशर में आकर डिप्रेशन का शिकार होने लगते हैं। इसी समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए माशिमं ने अपनी वार्षिक हेल्पलाइन सेवा को इस साल और अधिक अपडेटेड वर्जन में पेश किया है।

इस हेल्पलाइन में दो स्तर पर मदद दी जा रही है। पहले स्तर पर शिक्षा मंडल के अधिकारी प्रशासनिक जानकारी जैसे एडमिट कार्ड, सेंटर की दूरी या नियमों के बारे में बता रहे हैं। वहीं, दूसरे और सबसे महत्वपूर्ण स्तर पर विषय विशेषज्ञ और मनोचिकित्सक तैनात किए गए हैं। ये एक्सपर्ट्स सुबह 10:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक छात्रों के सवालों का जवाब देने के लिए उपलब्ध रहेंगे। इसमें छुट्टी के दिनों को छोड़कर बाकी सभी दिन छात्र अपनी समस्या दर्ज करा सकते हैं।

घटना कैसे सामने आई?

दरअसल, पिछले कुछ वर्षों के आंकड़ों और फीडबैक पर नजर डालें तो बोर्ड परीक्षा के दौरान छात्रों में ‘एग्जाम फोबिया’ के मामले तेजी से बढ़े हैं। पिछले साल भी कई ऐसे मामले सामने आए थे जहां छात्रों ने घबराहट में आकर गलत कदम उठाने की कोशिश की या फिर तनाव के कारण उनकी तबीयत बिगड़ गई। इन परिस्थितियों को देखते हुए राज्य सरकार और शिक्षा विभाग ने यह महसूस किया कि छात्रों को एक ऐसे मंच की जरूरत है जहां वे अपनी बात बिना किसी हिचकिचाहट के रख सकें।

आज सुबह जब रायपुर के पेंशन बाड़ा स्थित माशिमं कार्यालय में फोन की घंटी बजी, तो पहला कॉल बस्तर संभाग के एक छात्र का था। छात्र अपनी तैयारी को लेकर काफी डरा हुआ था। वहां मौजूद काउंसलर ने करीब 15 मिनट तक उससे बात की और उसे ‘टाइम मैनेजमेंट’ के टिप्स दिए। इसके बाद धीरे-धीरे कॉल्स का सिलसिला बढ़ता गया और दोपहर होते-होते दुर्ग, बिलासपुर और अंबिकापुर जैसे शहरों से भी बड़ी संख्या में छात्र जुड़ने लगे।

पुलिस / प्रशासन ने क्या कहा?

छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल के सचिव ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि इस हेल्पलाइन का मुख्य उद्देश्य छात्रों के भीतर से परीक्षा का डर निकालना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हेल्पलाइन नंबर 1800-233-4363 (Toll-Free) पर कोई भी परीक्षार्थी, अभिभावक या शिक्षक संपर्क कर सकता है। प्रशासन ने इस बार मनोवैज्ञानिकों की संख्या में भी इजाफा किया है ताकि करियर काउंसलिंग और तनाव प्रबंधन पर बेहतर ध्यान दिया जा सके।

मंडल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “हमने इस सेवा को पूरी तरह से निशुल्क रखा है। कई बार छात्र अपने शिक्षकों या माता-पिता से अपनी कमजोरी साझा नहीं कर पाते, लेकिन एक अनजान काउंसलर से वे खुलकर बात करते हैं। हमने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में भी इस हेल्पलाइन नंबर का प्रचार-प्रसार करें ताकि अंतिम पंक्ति में खड़ा छात्र भी इसका लाभ उठा सके।”

स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया

राजधानी रायपुर सहित प्रदेश के अन्य हिस्सों में अभिभावकों ने मंडल के इस कदम का स्वागत किया है। एक अभिभावक, रमेश सिन्हा ने बताया कि उनका बेटा गणित को लेकर काफी परेशान रहता था, लेकिन हेल्पलाइन पर विशेषज्ञ से बात करने के बाद उसे कुछ जरूरी टॉपिक्स को समझने में आसानी हुई है। अभिभावकों का मानना है कि घर पर वे बच्चों को सांत्वना तो दे सकते हैं, लेकिन विषयों की तकनीकी बारीकियां केवल एक शिक्षक ही समझा सकता है।

वहीं, कुछ शिक्षकों का कहना है कि हेल्पलाइन से उन छात्रों को सबसे ज्यादा फायदा होगा जो कोचिंग या एक्स्ट्रा ट्यूशन नहीं ले पाते। सरकारी स्कूल के छात्रों के लिए यह सेवा एक वरदान की तरह है। छात्रों में भी इसे लेकर काफी उत्साह देखा जा रहा है। रायपुर के एक स्कूली छात्र आयुष ने कहा, “मुझे डर था कि अगर मैं परीक्षा हॉल में कुछ भूल गया तो क्या होगा? काउंसलर मैम ने मुझे बताया कि ब्रीदिंग एक्सरसाइज और रिविज़न के सही तरीके से इस डर को जीता जा सकता है।”https://cgbse.nic.in

आगे क्या हो सकता है?

आने वाले दिनों में जैसे-जैसे परीक्षाएं और करीब आएंगी, हेल्पलाइन पर कॉल करने वालों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है। शिक्षा मंडल इसके लिए वेटिंग लिस्ट मैनेजमेंट और अतिरिक्त लाइन्स बिछाने पर भी विचार कर रहा है। इसके अलावा, मंडल की योजना है कि परीक्षा के दौरान भी सेंटर से जुड़ी शिकायतों के लिए एक त्वरित रिस्पांस टीम सक्रिय रखी जाए।

विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस साल डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के कारण छात्र सोशल मीडिया डिस्ट्रैक्शन को लेकर भी सवाल पूछ सकते हैं। इसके लिए मनोवैज्ञानिकों को विशेष ट्रेनिंग दी गई है। आने वाले सप्ताह में माशिमं कुछ मोटिवेशनल वीडियो और ‘डूज़ एंड डोंट्स’ (Do’s and Don’ts) की लिस्ट भी अपनी वेबसाइट पर जारी कर सकता है, जिससे छात्रों का मनोबल बना रहे।

तैयारी के लिए कुछ खास टिप्स (एक्सपर्ट्स के अनुसार)

हेल्पलाइन पर मौजूद विशेषज्ञों ने छात्रों के लिए कुछ बेसिक लेकिन जरूरी सलाह साझा की है:

  1. पुराने प्रश्न पत्र हल करें: पिछले 5 सालों के पेपर्स देखने से कॉन्फिडेंस बढ़ता है।

  2. नींद से समझौता न करें: कम से कम 6-7 घंटे की नींद अनिवार्य है, वरना परीक्षा के दिन दिमाग सुस्त रहेगा।

  3. लिखकर याद करें: केवल पढ़ने के बजाय लिखकर प्रैक्टिस करने से चीजें लंबे समय तक याद रहती हैं।

  4. ब्रेक लें: हर एक घंटे की पढ़ाई के बाद 10 मिनट का छोटा ब्रेक जरूर लें।

छत्तीसगढ़ बोर्ड की यह पहल निश्चित रूप से राज्य के शिक्षा स्तर में सुधार और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यदि आप या आपके आसपास कोई छात्र परीक्षा को लेकर चिंतित है, तो उसे तुरंत इस हेल्पलाइन की जानकारी दें।

WPL 2026 Grand Finale: दिल्ली का ‘चौका’ या बेंगलुरु की ‘बादशाहत’? आज होगा महिला क्रिकेट की नई रानी का फैसला!

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नई दिल्ली/मुंबई | 05 फरवरी 2026 महिला प्रीमियर लीग (WPL) का चौथा सीजन आज अपने निर्णायक मोड़ पर पहुँच गया है। आज शाम जब रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) और दिल्ली कैपिटल्स (DC) की टीमें मैदान पर उतरेंगी, तो दांव पर केवल ट्रॉफी नहीं, बल्कि करोड़ों फैंस की उम्मीदें और इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज कराने का मौका होगा।

दिल्ली कैपिटल्स: ‘लगातार चार फाइनल, क्या अब होगा अंत?’

दिल्ली कैपिटल्स के लिए यह फाइनल किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है। लीग के इतिहास में यह लगातार चौथी बार है जब दिल्ली ने फाइनल में जगह बनाई है, लेकिन पिछले तीन मौकों पर उन्हें उपविजेता बनकर ही संतोष करना पड़ा।

  • मेग लैनिंग की रणनीति: दिल्ली की कप्तान अपनी अनुभवी कप्तानी से ‘चोकर्स’ का टैग हटाना चाहेंगी।

  • प्रमुख खिलाड़ी: शैफाली वर्मा और जेमिमा रोड्रिग्स की जोड़ी पर शुरुआती विस्फोटक शुरुआत की जिम्मेदारी होगी।

RCB: ‘डिफेंडिंग चैंपियन का दबदबा’

पिछले साल की विजेता रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) इस बार भी उसी अंदाज में खेल रही है जिसके लिए वह जानी जाती है। स्मृति मंधाना की अगुवाई में टीम ने पूरे टूर्नामेंट में शानदार संतुलन दिखाया है।

“हम यहाँ अपनी बादशाहत बचाने आए हैं। पिछले साल की जीत कोई इत्तेफाक नहीं थी, और आज हम यह साबित करेंगे। मैदान पर ‘Ee Sala Cup Namde’ (यह कप हमारा है) केवल नारा नहीं, हमारा भरोसा होगा।”स्मृति मंधाना (मैच से पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस में)

हेड-टू-हेड और वेन्यू का मिजाज

आज का मुकाबला मुंबई के प्रतिष्ठित डीवाई पाटिल स्टेडियम में खेला जाएगा। पिच बल्लेबाजों के लिए स्वर्ग मानी जा रही है, लेकिन ओस (Dew) का प्रभाव टॉस जीतने वाली टीम को पहले गेंदबाजी की ओर आकर्षित कर सकता है।

मैच की 3 बड़ी टक्कर:

  1. एलिस पेरी बनाम मारिज़ैन कप्प: दुनिया की दो बेहतरीन ऑलराउंडर्स के बीच की जंग मैच का रुख बदल सकती है।

  2. ऋचा घोष का फिनिशिंग टच: अंतिम ओवरों में ऋचा की पावर-हिटिंग दिल्ली के गेंदबाजों के लिए सिरदर्द बन सकती है।

  3. राधा यादव की फिरकी: दिल्ली की स्पिन जोड़ी मिडिल ओवरों में RCB की रन गति पर लगाम लगाने की कोशिश करेगी।

जेल की सलाखों से बाहर आए कवासी लखमा: बस्तर के ‘शेर’ की वापसी पर भावुक हुए समर्थक, पत्नी बोलीं- “उनके बिना सूख कर कांटा हो गई थी”

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रायपुर/बस्तर | 05 फरवरी 2026 छत्तीसगढ़ की राजनीति के सबसे कद्दावर और चर्चित चेहरों में से एक, पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा आखिरकार एक लंबे अंतराल के बाद जेल से बाहर आ गए हैं। लगभग एक साल तक न्यायिक हिरासत में रहने के बाद जब लखमा जेल के मुख्य द्वार से बाहर निकले, तो उनके समर्थकों का सैलाब उमड़ पड़ा। ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक बस्तरिया वाद्ययंत्रों की गूंज के बीच लखमा का स्वागत किसी उत्सव जैसा रहा, लेकिन इस पूरी गहमागहमी के बीच सबसे मार्मिक तस्वीर उनकी पत्नी के साथ मुलाकात की रही।

“हर दिन पहाड़ जैसा कटा”: पत्नी का छलका दर्द

कवासी लखमा की रिहाई पर उनकी पत्नी सुलोचना (बदला हुआ नाम) अपनी भावनाओं को रोक नहीं पाईं। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए अपनी शारीरिक और मानसिक पीड़ा का जिक्र किया।

“पिछले एक साल से घर सूना पड़ा था। जब से वे जेल गए, मुझे न भूख लगती थी और न नींद आती थी। उनकी रिहाई की चिंता ने मुझे अंदर से खोखला कर दिया था। लोग कहते हैं मैं बहुत दुबली हो गई हूँ, पर सच तो यह है कि उनके बिना मेरी दुनिया ही थम गई थी। आज घर में फिर से चूल्हा खुशियों के साथ जलेगा।”कवासी लखमा की पत्नी

जेल से निकलते ही दिखा वही पुराना अंदाज

सफेद धोती-कुर्ता और गले में गमछा डाले कवासी लखमा जब बाहर आए, तो उनकी ऊर्जा में कोई कमी नहीं दिखी। उन्होंने मीडिया से संक्षिप्त बात करते हुए कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था और वे बस्तर की जनता की सेवा के लिए फिर से तैयार हैं।

घटनाक्रम की बड़ी बातें:

  • लंबी कानूनी लड़ाई: लखमा को कथित अनियमितताओं के मामले में पिछले साल हिरासत में लिया गया था। कई बार जमानत याचिका खारिज होने के बाद अब उन्हें राहत मिली है।

  • बस्तर में जश्न: सुकमा और बीजापुर के कई गांवों में ग्रामीणों ने लखमा की रिहाई पर नाच-गाकर अपनी खुशी जाहिर की।

  • सियासी हलचल: लखमा की वापसी के साथ ही छत्तीसगढ़ कांग्रेस में फिर से जान फूँकने की उम्मीद जताई जा रही है, खासकर आदिवासी अंचलों में उनका प्रभाव चुनाव परिणामों को प्रभावित करने की ताकत रखता है।

ग्राउंड जीरो से विश्लेषण

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि कवासी लखमा की रिहाई केवल एक व्यक्ति की रिहाई नहीं है, बल्कि यह बस्तर की राजनीति का एक टर्निंग पॉइंट है। लखमा का “देसी अंदाज” और सीधा संवाद उन्हें जनता के बीच लोकप्रिय बनाता है। जेल में बिताए समय ने उन्हें सहानुभूति की एक नई लहर भी दी है, जिसका फायदा आने वाले समय में पार्टी को मिल सकता है।

लोकसभा में भिड़े राहुल और पीयूष: भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर ‘आर-पार’, क्या दांव पर है भारतीय किसान?

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नई दिल्ली | 05 फरवरी 2026 संसद का बजट सत्र आज उस समय हंगामे की भेंट चढ़ गया जब ‘भारत-अमेरिका व्यापार समझौते’ (India-US Trade Deal) को लेकर विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच तीखी बहस छिड़ गई। विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस समझौते को भारतीय किसानों के लिए ‘डेथ वारंट’ करार दिया, जिसके जवाब में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने मोर्चा संभालते हुए सरकार का बचाव किया।

राहुल गांधी का हमला: “खेत और खलिहान दांव पर”

सदन को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार अमेरिका के दबाव में आकर भारतीय बाजारों को विदेशी कंपनियों के लिए खोल रही है।

“यह समझौता केवल व्यापार नहीं है, बल्कि देश के करोड़ों किसानों और पशुपालकों की आजीविका का सौदा है। अमेरिका से आने वाला सस्ता दूध और अनाज हमारे छोटे किसानों को बर्बाद कर देगा। आखिर सरकार किसे फायदा पहुँचाने के लिए यह डील कर रही है?”राहुल गांधी, विपक्ष के नेता (लोकसभा में)

पीयूष गोयल का पलटवार: “भ्रम फैला रहा है विपक्ष”

राहुल गांधी के आरोपों को निराधार बताते हुए वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने सदन के पटल पर स्पष्ट किया कि भारत की ‘रेड लाइन्स’ (सीमाएं) तय हैं। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि देश के संवेदनशील क्षेत्रों से कोई समझौता नहीं किया गया है।

सरकार की 3 बड़ी दलीलें:

  1. कृषि और डेयरी बाहर: भारत ने स्पष्ट किया है कि अमेरिकी डेयरी उत्पाद और अनाज इस समझौते के दायरे से बाहर रखे गए हैं।

  2. MSME को सुरक्षा: भारतीय लघु उद्योगों के हितों की सुरक्षा के लिए विशेष क्लॉज जोड़े गए हैं।

  3. निर्यात को बढ़ावा: इस डील से भारत के रत्न-आभूषण, टेक्सटाइल और फार्मास्युटिकल सेक्टर को अमेरिकी बाजार में बड़ी जगह मिलेगी।

एक्सपर्ट व्यू: क्यों है यह डील इतनी चर्चा में?

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है, लेकिन भारत हमेशा से अपने ‘डेयरी सेक्टर’ को लेकर सुरक्षात्मक रहा है। 2026 के इस दौर में, जब वैश्विक अर्थव्यवस्था बदल रही है, भारत के लिए यह संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण है कि वह व्यापार भी बढ़ाए और अपने किसानों को भी बचाए।

स्किल के नाम पर ‘खोल दी’ दुकानें: 41 स्किल इंडिया केंद्रों पर FIR, CAG की रिपोर्ट के बाद सरकार का बड़ा एक्शन

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नई दिल्ली | 05 फरवरी 2026 देश के युवाओं को हुनरमंद बनाने के दावे के साथ शुरू किए गए ‘स्किल इंडिया मिशन’ में एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की ताजा ऑडिट रिपोर्ट में गंभीर वित्तीय अनियमितताएं और कागजी प्रशिक्षण के सबूत मिलने के बाद, केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए 41 स्किल इंडिया प्रशिक्षण केंद्रों (Training Centres) के खिलाफ FIR दर्ज करने के आदेश दे दिए हैं।

क्या है पूरा मामला? (The Big Reveal)

CAG की रिपोर्ट के अनुसार, कई केंद्रों ने केवल कागजों पर छात्रों का रजिस्ट्रेशन दिखाया और सरकार से मिलने वाली ‘ट्रेनिंग ग्रांट’ को अपनी जेब में डाल लिया। जांच में पाया गया कि कई केंद्रों का अस्तित्व ही नहीं था, फिर भी वे सरकारी पोर्टल पर सक्रिय थे।

प्रमुख बिंदु:

  • भूतिया छात्र (Ghost Students): हजारों ऐसे छात्रों के नाम पर फंड निकाला गया जिन्होंने कभी किसी कक्षा में पैर तक नहीं रखा।

  • फर्जी बायोमेट्रिक: हाजिरी लगाने के लिए आधार और बायोमेट्रिक डेटा के साथ छेड़छाड़ की गई।

  • नो-शो ट्रेनिंग: कई जगहों पर लैब और मशीनों के नाम पर खाली कमरे मिले।

ग्राउंड रिपोर्ट: उम्मीदों के साथ खिलवाड़

“हमने सोचा था कि यहाँ से वेल्डिंग सीखकर नौकरी मिल जाएगी, लेकिन 3 महीने बीत गए और हमें एक बार भी मशीन छूने नहीं दी गई। सर कहते थे बस साइन कर दो, पैसा आ जाएगा।”सुमित (बदला हुआ नाम), एक प्रभावित छात्र जिसने इस घोटाले की कड़वी सच्चाई बयां की।

यह घोटाला सिर्फ पैसों की हेराफेरी नहीं है, बल्कि उन लाखों युवाओं के सपनों के साथ धोखा है जो रोजगार की तलाश में इन केंद्रों का रुख करते हैं। सरकार ने अब 11 बड़ी संस्थाओं (Entities) को कारण बताओ नोटिस जारी किया है, जिन्हें जल्द ही ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है।

सरकार का पक्ष

कौशल विकास मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत यह कार्रवाई की गई है। हम हर एक पैसे का हिसाब लेंगे और दोषियों को जेल भेजा जाएगा। डिजिटल ऑडिट को अब और सख्त किया जा रहा है।”

महासमुंद में 19 करोड़ का धान ‘हवा’ में गायब! अधिकारियों ने बताया—’वजन में कमी’, विपक्ष ने पूछा—क्या धान उड़कर अमेरिका चला गया?

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महासमुंद/रायपुर (ब्यूरो): छत्तीसगढ़ की राजनीति में ‘धान’ सिर्फ फसल नहीं, सत्ता की चाबी है। लेकिन महासमुंद जिले के धान संग्रहण केंद्रों (Storage Centers) से आई एक खबर ने शासन से लेकर प्रशासन तक हड़कंप मचा दिया है। रिकॉर्ड के अनुसार, संग्रहण केंद्रों से लगभग 19 करोड़ रुपये मूल्य का धान गायब पाया गया है। अब सवाल यह है कि क्या यह महज एक ‘तकनीकी कमी’ है या धान के नाम पर करोड़ों का ‘वारा-न्याय’ कर दिया गया है।

‘शॉर्टेज’ या ‘सिस्टमैटिक चोरी’? (Original Angle) महासमुंद के राइस मिलर्स और संग्रहण केंद्रों के बीच का तालमेल हमेशा चर्चा में रहता है। इस बार का ‘ओरिजनल एंगल’ यह है कि गायब हुए धान की मात्रा इतनी अधिक है कि इसे केवल ‘सूखत’ (Drying loss) नहीं माना जा सकता। जानकारों का कहना है कि धान को कागजों में मिलर्स को जारी (Issue) दिखा दिया गया, जबकि हकीकत में वह धान केंद्रों से कभी निकला ही नहीं, या फिर उसे खुले बाजार में औने-पौने दाम पर बेच दिया गया।

अधिकारियों का ‘हैरान’ करने वाला तर्क (Reporting Feel): जब इस भारी कमी पर कलेक्टर और खाद्य विभाग के अधिकारियों से सवाल किया गया, तो उनका जवाब था— “लंबे समय तक भंडारण और नमी के कारण वजन में कमी (Weight Loss) आई है।” लेकिन 19 करोड़ रुपये की ‘कमी’ का मतलब है हजारों क्विंटल धान का गायब होना। क्या महासमुंद की गर्मी इतनी ज्यादा है कि करोड़ों का धान ‘वाष्प’ (Vapor) बनकर उड़ गया? यह तर्क अब सोशल मीडिया पर मजाक का विषय बन रहा है।

सियासी उबाल और ग्राउंड रिपोर्ट (Human Touch): विपक्ष ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए महासमुंद में ‘चक्काजाम’ की चेतावनी दी है। पूर्व खाद्य मंत्री ने बयान दिया है कि “यह गरीब किसानों के पसीने की कमाई पर डाका है, इसकी जांच CBI या हाईकोर्ट के जज से होनी चाहिए।” महासमुंद के एक स्थानीय किसान रामलाल साहू ने ‘बेबाक बयान’ से अपना दर्द साझा करते हुए कहा— “साहब, हम एक-एक दाना तौलकर देते हैं, वहां रिजेक्शन (Rejection) के नाम पर हमारा धान काट लिया जाता है, और अब कह रहे हैं कि सरकार का 19 करोड़ का धान गायब हो गया? यह सब अधिकारियों की मिलीभगत है।”