मौत के ‘स्कूल’ में कैद मासूम..! महासमुंद के श्रद्धा पब्लिक स्कूल में बरती जा रही जानलेवा लापरवाही, प्रशासन मौन…!

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रिपोर्टर मयंक गुप्ता
​महासमुंद / 22 जून 2026 दिन रविवार (छत्तीसगढ़) क्या महासमुंद जिला प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतज़ार कर रहा है? पटेवा और पिथौरा में संचालित ‘श्रद्धा पब्लिक स्कूल’ शिक्षा का मंदिर नहीं, बल्कि एक ‘डेथ ट्रैप’ (मौत का जाल) बन चुका है। जहाँ एक ओर देश अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मना रहा है, वहीं इस स्कूल में मासूमों की सुरक्षा को ताक पर रखकर बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।

​जर्जर भवन और बुनियादी सुविधाओं का अकाल

​स्कूल के नाम पर केवल कमाई का धंधा चल रहा है। पटेवा की शाखा एक व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स के अंदर संचालित है, जहाँ न तो बच्चों के लिए सुरक्षित प्रवेश द्वार है और न ही स्वच्छ शौचालय। वहीं पिथौरा (रावण भाटा वार्ड) के मुख्य ब्रांच की हालत और भी भयानक है। यहाँ की जर्जर छतें किसी भी वक्त काल बनकर मासूमों पर गिर सकती हैं। न खेलने के लिए मैदान है और न ही पीने के लिए शुद्ध पानी। आखिर प्रशासन ने ऐसे भवन को स्कूल चलाने की अनुमति कैसे दी..?

​सड़कों पर दौड़ रही ‘मौत की सवारियां’

​सबसे चौंकाने वाली बात है स्कूल की बसों की स्थिति। अभिभावकों के जीवन भर की कमाई से फीस लेने वाला प्रबंधन बच्चों की जान बचाने के लिए बीमा (Insurance) तक कराने को तैयार नहीं है।

​वाहन CG04HS6939: इसका बीमा जून 2023 में ही समाप्त हो चुका है। पेट्रोल गाड़ी में अवैध रूप से गैस किट लगाकर परिवहन विभाग की आंखों में धूल झोंकी जा रही है।

​वाहन CG06GB5823: यह गाड़ी फरवरी 2023 से बिना बीमा के पिथौरा की सड़कों पर दौड़ रही है।

​यह सीधे तौर पर मोटर वाहन अधिनियम और शिक्षा विभाग के नियमों का उल्लंघन है। क्या प्रशासन को इन गाड़ियों पर पुलिसिया कार्रवाई करने के लिए किसी बड़ी दुर्घटना का इंतज़ार है..?

​अभिभावकों की मजबूरी और प्रबंधन की दादागिरी

​अभिभावकों ने आरोप लगाया है कि स्कूल संचालक फीस के नाम पर वसूली कर रहे हैं। विरोध करने पर बच्चों की टीसी (TC) और मार्कशीट रोकने की धमकी दी जाती है। स्कूल प्रशासन का खुला कहना है कि “मेरी पहुंच ऊपर तक है, जो उखाड़ना है उखाड़ लो।” क्या स्कूल संचालक कानून से ऊपर हैं..?

​प्रशासन को सीधे चेतावनी अब नहीं जागे तो जनता जागेगी

​यह मामला केवल कुछ सुविधाओं का नहीं, बल्कि सैकड़ों बच्चों के जीवन का है। जनता और अभिभावकों की ओर से जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) महासमुंद से सख्त मांग है।

1 ​तत्काल प्रभाव से स्कूल की दोनों शाखाओं की मान्यता रद्द की जाए।

2 ​बिना बीमा और दस्तावेजों वाली बसों को तत्काल जब्त कर स्कूल प्रबंधन पर FIR दर्ज हो।

3 ​स्कूल भवन की सुरक्षा ऑडिट कराई जाए और नियमों के उल्लंघन पर सील करने की कार्रवाई हो।

4 ​अभिभावकों से जबरन वसूली गई अतिरिक्त फीस वापस करवाई जाए।

​अभिभावकों के लिए संदेश

अपने बच्चों की सुरक्षा के प्रति सजग रहें। यदि प्रशासन इस लापरवाही पर तुरंत संज्ञान नहीं लेता है, तो अभिभावकों को सड़कों पर उतरकर अपने बच्चों के हक और सुरक्षा के लिए आंदोलन करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा।

​क्या जिला प्रशासन की नींद टूटेगी, या किसी हादसे के बाद फाइलें खुलेंगी..?

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