महासमुंद की तर्ज पर पूरे प्रदेश में शिक्षा विभाग का कड़ा रुख: अटैच शिक्षकों को 7 दिन में मूल स्कूल में देना होगा योगदान, वरना होगी सख्त कार्रवाई

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महासमुंद की तर्ज पर पूरे प्रदेश में शिक्षा विभाग का कड़ा रुख: अटैच शिक्षकों को 7 दिन में मूल स्कूल में देना होगा योगदान, वरना होगी सख्त कार्रवाई

49 शिक्षकों की वापसी के बाद पूरे प्रदेश में बड़ा एक्शन, शिक्षा विभाग ने जारी किया नया आदेश

रिपोर्टर मयंक गुप्ता / 17 जुलाई 2026
​महासमुंद/नवा रायपुर छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए शिक्षा विभाग ने अब प्रदेशव्यापी सख्त कदम उठाए हैं। महासमुंद जिले में 49 शिक्षकों की संलग्नक (Attachment) समाप्त कर उन्हें मूल स्कूलों में भेजने की पहल के बाद, अब लोक शिक्षण संचालनालय ने पूरे प्रदेश के लिए कड़े निर्देश जारी कर दिए हैं।

​महासमुंद के संलग्न कर्मचारी जिन्हें वापस लौटना होगा

​शिक्षा विभाग द्वारा जारी सूची के अनुसार, महासमुंद जिले के विभिन्न कार्यालयों में संलग्न जिन 49 शिक्षकों और कर्मचारियों को अपने मूल विद्यालय में कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं, उनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
​सुबोध कुमार तिवारी, प्रमोद कन्नौजे, हर्षिता चन्द्राकर, रामता मन्नाड़े, पूर्णानंद मिश्रा, जागेश्वर सिन्हा, भुवनेश्वरी साहू, नरेश पटेल, अनिल साव, देवानंद, डी. बसंत कुमार साव, यश कुमार चक्रधारी, विवेक कुमार चन्द्राकर, परस कुमार, भागवत प्रसाद पटेल, और रितेश नायक सहित अन्य कर्मचारी। ये सभी अब तक समग्र शिक्षा अभियान, बीआरसी कार्यालय, नवकिरण अकादमी और आदिवासी विकास विभाग जैसे कार्यालयों में सेवाएं दे रहे थे।

पूरे छत्तीसगढ़ के लिए नया आदेश: ‘एक सप्ताह में ज्वाइनिंग अनिवार्य’

​महासमुंद की इस पहल के बाद, लोक शिक्षण संचालनालय, छत्तीसगढ़ ने 15 जुलाई 2026 को एक आधिकारिक आदेश जारी किया है। इस आदेश के तहत

​प्रदेश के समस्त जिलों के कार्यालयों और विभागों में कार्यरत सभी गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों का संलग्नक तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया गया है।

​सभी संलग्न कर्मचारियों को एक सप्ताह के भीतर अपने मूल पदस्थापना वाले स्कूलों में कार्यभार ग्रहण करना अनिवार्य है।

​शिक्षकों को अपनी उपस्थिति ऑनलाइन ऐप के माध्यम से सुनिश्चित करनी होगी।

पालन न करने पर होगी सख्त कार्रवाई

​संचालनालय ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई कर्मचारी निर्धारित समय-सीमा के भीतर कार्यभार ग्रहण नहीं करता है, तो उसके विरुद्ध कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। ऐसे कर्मचारियों की निर्धारित समय के बाद की अनुपस्थिति अवधि को ‘सेवा हरण’ (Break in service) मानते हुए संचालनालय को प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए गए हैं।

शैक्षणिक गुणवत्ता सुधारने की प्राथमिकता

​विभाग का मानना है कि शिक्षकों की मूल विद्यालयों में वापसी से विद्यार्थियों को सीधा लाभ मिलेगा और लंबे समय से बनी शिक्षकों की कमी की समस्या काफी हद तक दूर हो सकेगी। यह निर्णय सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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