सोहम सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल की प्रेरणादायी मुहिम: लभरा खुर्द के बच्चों को मिला शिक्षा का सहारा, साथ में स्वास्थ्य-पर्यावरण के अनमोल टिप्स
रिपोर्टर मयंक गुप्ता/दिन सोमवार / 31 अगस्त 2026
महासमुंद (छत्तीसगढ़)। शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ जोड़ते हुए सोहम सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल ने आस्था वेलफेयर एंड एजुकेशन सोसाइटी तथा सोहम जन सेवा समिति के सहयोग से ग्राम लभरा खुर्द के प्राथमिक एवं मिडिल स्कूल में एक सराहनीय कार्यक्रम आयोजित किया।
आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के 15 विद्यार्थियों को निःशुल्क स्कूल बैग, कॉपी और पेन बांटे गए। उद्देश्य साफ था—संसाधनों की कमी के कारण किसी भी बच्चे की पढ़ाई न रुके और हर बच्चा आगे बढ़ सके।
सोहम सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल के प्रतिनिधि डॉ. युगल चंद्राकर और आस्था वेलफेयर की संस्था प्रमुख श्रीमती मधु तिवारी ने बच्चों को सामग्री सौंपी। डॉ. चंद्राकर ने कहा, “शिक्षा हर बच्चे का अधिकार है। संसाधनों के अभाव में कोई भी बच्चा पीछे न छूटे, इसी सोच से हम यह अभियान चला रहे हैं।”
कार्यक्रम में सिर्फ सामग्री वितरण नहीं हुआ, बल्कि बच्चों को जीवनोपयोगी टिप्स भी दिए गए। ये टिप्स अलग-अलग विषयों पर इस प्रकार हैं:
1 स्वच्छता का टिप (हाथ धोने की सही विधि)
डॉ. युगल चंद्राकर ने बच्चों को बताया कि बीमारियों से बचने के लिए नियमित और सही तरीके से हाथ धोना जरूरी है। साबुन से कम से कम 20 सेकंड तक हाथ रगड़ें, उंगलियों के बीच, नाखूनों के नीचे और कलाई तक अच्छी तरह धोएं। खाने से पहले, शौचालय के बाद और बाहर से आने पर जरूर हाथ धोएं।
2 जल संरक्षण का टिप (“जल है तो कल है”)
पानी की एक-एक बूंद बचाने की आदत डालें। नल खुला न छोड़ें, ब्रश करते समय पानी बंद रखें, और जरूरत से ज्यादा पानी न बहाएं। छोटी-छोटी बचत से ही भविष्य सुरक्षित रहता है।
3 कबाड़ से जुगाड़ का टिप
श्रीमती मधु तिवारी ने समझाया कि घर की बेकार पड़ी वस्तुएं फेंकने के बजाय उनसे नई उपयोगी चीजें बनाई जा सकती हैं। जैसे पुरानी बोतलों से पेन स्टैंड, अखबार से पेपर बैग या सजावटी सामान। इससे कचरा कम होता है और पर्यावरण बचता है।
पौधारोपण और किचन गार्डन का टिप
श्रीमती शोभा शर्मा ने बच्चों से अपील की कि घर के आसपास या स्कूल में छोटे पौधे लगाएं। किचन गार्डन में धनिया, पुदीना जैसी सब्जियां उगाएं। पेड़ लगाने से हवा शुद्ध होती है और तापमान भी नियंत्रित रहता है।
पॉलीथिन से बचाव का टिप
पॉलीथिन का इस्तेमाल पूरी तरह बंद करें। कपड़े या कागज के थैले अपनाएं। पॉलीथिन मिट्टी और पानी दोनों को नुकसान पहुंचाता है, इसलिए पर्यावरण बचाने के लिए प्लास्टिक से दूरी बनाए रखें।
कार्यक्रम का संचालन श्रीमती निरंजना चंद्राकर ने किया, जबकि आभार ज्ञापन श्रीमती तबस्सुम खान ने किया। विद्यालय के प्राचार्य, शिक्षक, छात्र-छात्राएं और संस्थाओं के सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
यह पहल सोहम सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल की उस प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जिसमें स्वास्थ्य सेवा के साथ-साथ समाज के बच्चों को शिक्षा, स्वच्छता और पर्यावरण के प्रति जागरूक बनाया जा रहा है।
