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धान तस्करी पर प्रशासन का जोरदार प्रहार 557 बोरी अवैध धान जब्त, सख्त कार्रवाई जारी..!

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुंद / 14 नवम्बर 2025
कलेक्टर विनय लंगेह के सख्त निर्देशों पर जिले में अवैध धान परिवहन, भंडारण और तस्करी के खिलाफ बड़ा अभियान चलाया गया। संयुक्त टीमों ने विभिन्न स्थानों पर छापेमारी कर कुल 557 कट्टे/बोरी अवैध धान जब्त किया। यह कार्रवाई समर्थन मूल्य पर धान खरीदी शुरू होने से पहले अवैध गतिविधियों पर लगाम कसने के उद्देश्य से की गई है। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि ऐसी गैरकानूनी हरकतों पर कड़ी नजर रखी जा रही है और अभियान आगे भी बिना रुके जारी रहेगा।

प्रमुख जब्ती स्थलों का विस्तृत ब्योरा

ग्राम कोमाखान: एक स्थानीय किराना दुकान से 100 कट्टे अवैध धान बरामद किए गए। दुकान मालिक पर अवैध भंडारण का आरोप लगा।
ग्राम टेमरी (तहसील कोमाखान): यहां से भी 100 कट्टे अवैध धान जब्त हुए। टीम ने मौके पर ही धान को सील कर दिया।
नर्रा चेकपोस्ट: परिवहन के दौरान पकड़े गए वाहन से 40 कट्टे अवैध धान जप्त किए गए। चेकपोस्ट पर सघन जांच से यह सफलता मिली।
ग्राम गनेकेरा: किसानों और व्यापारियों के संदिग्ध गोदामों से 105 पॉकेट अवैध धान बरामद हुए।
ग्राम मोहन्दा (तहसील सराईपाली): फुटकर व्यापारी के गोदाम से सबसे बड़ी खेप जब्त की गई – पूरे 212 बोरी अवैध धान। यह कार्रवाई स्थानीय स्तर पर तस्करी नेटवर्क को झटका देने वाली साबित हुई।
कुल मिलाकर 557 कट्टे/बोरी अवैध धान को जब्त कर संबंधित थानों में सुपुर्द कर दिया गया। सभी मामलों में छत्तीसगढ़ कृषि उपज मंडी अधिनियम के प्रावधानों के तहत प्राथमिकी दर्ज की जा रही है और आगे की कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
प्रशासन के प्रवक्ता ने बताया कि समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की प्रक्रिया शुरू होने से पहले अवैध क्रय-विक्रय, परिवहन और भंडारण को पूरी तरह रोका जाएगा। जिले भर में चेकपोस्टों पर चौबीसों घंटे निगरानी, गश्ती दल और खुफिया सूचनाओं के आधार पर छापेमारी जारी रहेगी। किसानों से अपील की गई है कि वे केवल अधिकृत चैनलों से ही धान बेचें, अन्यथा सख्त दंड का सामना करना पड़ेगा।
यह अभियान जिले में धान तस्करी के खिलाफ प्रशासन की जीरो टॉलरेंस नीति का प्रमाण है। आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे होने की संभावना है।

नशे के सौदागरों पर महासमुंद पुलिस का कहर 60 किलो गांजा, 22 लाख का ट्रक-माल बरामद

ओडिशा-यूपी ड्रग रूट पर महासमुंद पुलिस की धमाकेदार पकड़..!

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुंद / ऐंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स और बसना पुलिस ने मिलकर नशे के सौदागरों को करारा झटका दिया है। ओडिशा से उत्तर प्रदेश ले जाई जा रही 60 किलोग्राम गांजे की विशाल खेप को बीच रास्ते में पकड़ लिया गया। आयशर ट्रक में छिपाकर ले जाए जा रहे इस माल की कीमत 12 लाख रुपये है, जबकि ट्रक और मोबाइल समेत कुल 22 लाख 10 हजार रुपये की संपत्ति जब्त की गई। दोनों आरोपी – सद्दाम हुसैन (34) और कियामुद्दीन (26) – उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के कुख्यात तस्कर निकले, जो लंबे समय से इस रूट पर सक्रिय थे।

मुखबिर की गुप्त सूचना से चला ऑपरेशन, जिले की सीमाओं पर कसा घेरा

10 नवंबर 2025 को थाना बसना को खुफिया सूचना मिली कि ओडिशा से गांजे का बड़ा जखीरा आयशर ट्रक (UP 72 BT 3907) में लोड होकर पदमपुर → बसना → महासमुंद → उत्तर प्रदेश के रास्ते जा रहा है। तुरंत ऐक्शन में आई पुलिस ने जिले के सभी एंट्री पॉइंट्स पर नाकाबंदी कर दी।
पलसापाली बैरियर पर जैसे ही यह ट्रक दिखा, ऐंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स और बसना पुलिस की संयुक्त टीम ने बिजली की तेजी से घेराबंदी की और वाहन को रोक लिया।

ट्रक की तलाशी में खुला राज – तालपत्री के नीचे छिपे थे 3 बोरे गांजा

वाहन में सवार दोनों व्यक्तियों ने पूछताछ में अपना नाम बताया:
सद्दाम हुसैन, पिता रिजवान हुसैन, उम्र 34 वर्ष, पंडरीजबर, थाना कंधई, प्रतापगढ़ (उ.प्र.)
कियामुद्दीन, पिता कमरूद्दीन, उम्र 26 वर्ष, ताला, थाना कंधई, प्रतापगढ़ (उ.प्र.) ट्रक की गहन तलाशी में तालपत्री के नीचे छिपे 3 बोरे बरामद हुए।

इन्हें खोलते ही 60 किलोग्राम उच्च गुणवत्ता वाला गांजा बाहर आया। मौके पर ही तौल और पैकेजिंग की जांच की गई।

जब्ती का पूरा ब्यौरा – 22 लाख से ज्यादा का माल पुलिस के हत्थे

वस्तु – मात्रा/विवरण – अनुमानित कीमत
अवैध गांजा – 60 किलोग्राम – ₹12,00,000

आयशर ट्रक – UP 72 BT 3907 – ₹10,00,000
मोबाइल फोन – 2 नग – ₹10,000
कुल जब्ती

₹22,10,000

आरोपी बेनकाब: ओडिशा से सस्ते में खरीद, यूपी में मोटा मुनाफा

पूछताछ में दोनों ने कबूल किया –
“हम ओडिशा के जंगलों से गांजा सस्ते में खरीदते हैं और उत्तर प्रदेश में दोगुनी-तिगुनी कीमत पर बेचते हैं। यह खेप प्रतापगढ़ और आसपास के इलाकों में सप्लाई होनी थी।”
पुलिस को शक है कि यह सिर्फ एक खेप नहीं, बल्कि एक अंतरराज्यीय ड्रग रैकेट का हिस्सा है।

कानूनी शिकंजा: NDPS एक्ट के तहत FIR, आरोपी जेल में

दोनों के खिलाफ थाना बसना में धारा 20(ख) NDPS एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज। सभी सबूतों के साथ न्यायालय में पेशी के बाद न्यायिक रिमांड पर जेल भेजा गया।

पुलिस की तारीफ, आगे की जांच में खुलेगा पूरा नेटवर्क

यह सनसनीखेज कार्रवाई ऐंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स और महासमुंद पुलिस की संयुक्त टीम की बहादुरी का नतीजा है। एसपी ने टीम को तत्काल बधाई दी है।
अब जांच का दायरा बढ़ाया जा रहा है:
ओडिशा में गांजा उत्पादन के सोर्स पॉइंट तक पहुंच
यूपी में डिलीवरी और बिक्री नेटवर्क की पहचान
फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन और बैंक खातों की छानबीन

पुलिस का संदेश साफ है – “नशे का कारोबार करने वालों की अब खैर नहीं!”

महासमुंद जिले में मतदाता सूची पुनरीक्षण अभियान ने पकड़ी रफ्तार

मतगणना पुनरीक्षण क्यों जरूरी? सटीक सूची से मजबूत लोकतंत्र

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुंद / 11 नवम्बर 2025 भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश पर महासमुंद जिले में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के बीच एक सवाल बार-बार उठ रहा है – मतदाता सूची की मतगणना पुनरीक्षण आखिर क्यों जरूरी है?

मतगणना पुनरीक्षण का मतलब और महत्व

मतगणना पुनरीक्षण का अर्थ है मतदाता सूची को पूरी तरह जांचना, शुद्ध करना और अद्यतन करना। इसमें मृत मतदाताओं के नाम हटाना, स्थानांतरित हुए व्यक्तियों को नई जगह पर जोड़ना, 18 वर्ष पूरे कर चुके नए मतदाताओं को शामिल करना और दोहरे/गलत प्रविष्टियों को सुधारना शामिल है।

यह क्यों जरूरी है..?

सटीक प्रतिनिधित्व: अगर सूची में मृत या अनुपस्थित व्यक्ति के नाम रहें, तो वास्तविक मतदाताओं का प्रतिनिधित्व कम हो जाता है।
निष्पक्ष चुनाव: गलत सूची से बोगस वोटिंग की आशंका बढ़ती है। पुनरीक्षण इसे रोकता है।
नवमतदाताओं का हक: हर साल हजारों युवा 18 वर्ष के होते हैं। बिना पुनरीक्षण उनके मताधिकार का हनन होता है।
डेटा की विश्वसनीयता: आधार, जन्म प्रमाण आदि से लिंक कर सूची को पारदर्शी बनाया जाता है।
कानूनी अनुपालन: निर्वाचन आयोग का नियम है कि हर वर्ष 1 जनवरी को अर्हता तिथि मानकर सूची अपडेट हो।

महासमुंद में अभियान की झलक

4 नवंबर से शुरू अभियान में बीएलओ योजना यादव की अगुवाई वाली टीम ने आज सुबह कलेक्टर विनय लंगेह के घर पहुंचकर गणना-घोषणा प्रपत्र सौंपे। सरपंच प्रमिला ध्रुव, उप सरपंच जीतेंद्र साहू, पंच शिव साहू आदि मौजूद रहे।
जिले में 8,86,422 पंजीकृत मतदाता हैं। चारों विधानसभा क्षेत्रों में बीएलओ घर-घर जाकर:
गणना प्रपत्र वितरित कर रहे हैं
आधार, जन्म प्रमाण, निवास प्रमाण आदि जांच रहे हैं
मृत/स्थानांतरित नाम हटा रहे हैं

कलेक्टर की अपील

कलेक्टर विनय लंगेह ने कहा,
“एक गलत नाम सूची में रहना लोकतंत्र पर बोझ है, और एक पात्र नाम का छूटना अन्याय है। पुनरीक्षण आपका अधिकार और कर्तव्य दोनों है।”

प्रपत्र भरें
दस्तावेज जमा करें
25 नवंबर तक सहयोग करें
अंतिम सूची प्रकाशन के बाद कोई सुधार नहीं होगा।
आपका एक कदम – लोकतंत्र का एक मजबूत स्तंभ।

महासमुंद का छोटा जोगी और पिता की जोड़ी गिरफ्तार

वैश्यावृत्ति में संलिप्त युवराज लॉज का काला कारोबार बेनकाब..!

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुंद / महासमुंद शहर में नैतिकता और कानून की खुलेआम अवहेलना का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। रायपुर रोड पर स्थित युवराज लॉज में रात के सन्नाटे में फल-फूल रही संदिग्ध गतिविधियों पर सिटी कोतवाली पुलिस ने तेज तर्रार कार्रवाई को अंजाम दिया। इस अभियान में लॉज के मालिक युवराज साहू को हिरासत में ले लिया गया, जिससे इलाके में सनसनी फैल गई। पुलिस का यह कदम न केवल अवैध कारोबार के खिलाफ एक कड़ा संदेश है, बल्कि शहरवासियों की सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी साबित हो रहा है।
सूत्रों की मानें तो यह कार्रवाई एक विश्वसनीय मुखबिर की गोपनीय टिप से शुरू हुई। मुखबिर ने पुलिस को बताया कि युवराज लॉज में देर रात तक संदिग्ध लोग आ-जा रहे हैं और वहां ऐसी गतिविधियां संचालित हो रही हैं जो समाज के लिए घातक साबित हो सकती हैं। सिटी कोतवाली की टीम ने सूचना की गहन जांच की और जब पुष्टि हो गई, तो रात के अंधेरे में ही छापेमारी का प्लान तैयार किया। लगभग 11 बजे के आसपास पुलिस की टीम ने लॉज पर धावा बोल दिया, जिससे वहां मौजूद लोग सकते में आ गए।
छापे के दौरान पुलिस ने लॉज के विभिन्न कमरों की तलाशी ली। एक कमरे में एक युवक और एक युवती को संदिग्ध अवस्था में पाया गया, जबकि दूसरे कमरे में दो महिलाएं अकेले ठहरी हुई थीं। सबसे चौंकाने वाली बात तो तब सामने आई जब लॉज के रजिस्टर की पड़ताल हुई। इसमें ठहरने वालों का कोई वैध पहचान पत्र, जैसे आधार कार्ड या वोटर आईडी, दर्ज नहीं था। न ही कोई प्रामाणिक विवरण उपलब्ध था, जो छत्तीसगढ़ दुकान एवं स्थापना अधिनियम के प्रावधानों का खुला उल्लंघन दर्शाता है। यह अधिनियम स्पष्ट रूप से लॉज संचालकों को बाध्य करता है कि वे हर मेहमान का पूरा ब्योरा रिकॉर्ड करें, ताकि अपराधी तत्वों की घुसपैठ रोकी जा सके।
पुलिस ने तुरंत लॉज संचालक युवराज साहू, जो दिलीप साहू के पुत्र हैं, को हिरासत में ले लिया। प्रारंभिक पूछताछ में खुलासा हुआ कि यह लॉज पिछले दो सालों से अवैध गतिविधियों का अड्डा बना हुआ था। यहां बिना किसी जांच-परख के लोग ठहराए जाते थे, जो न केवल वेश्यावृत्ति जैसी सामाजिक बुराइयों को बढ़ावा दे रहा था, बल्कि संभावित अपराधों जैसे मानव तस्करी या अन्य आपराधिक साजिशों का भी खतरा पैदा कर रहा था। सिटी कोतवाली पुलिस ने इस मामले में युवराज साहू के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNSS) की धारा 170 (झूठी जानकारी देना), 126 (अवैध सभा) और 135(3) (सार्वजनिक शांति भंग करने वाले कार्य) के तहत एफआईआर दर्ज की है। जांच अधिकारी ने बताया कि यह कार्रवाई केवल शुरुआत है और आगे और भी लोगों को चिह्नित किया जा रहा है।
सिटी कोतवाली के प्रभारी शरद दुबे ने इस कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “महासमुंद जैसे शांतिप्रिय शहर में ऐसी काली करतूतों को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हमारी पुलिस टीम 24 घंटे सतर्क है और जो भी इस तरह की अवैधता में लिप्त पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानून की पूरी ताकत झोंक दी जाएगी। शहर की सुरक्षा और नैतिकता हमारी प्राथमिकता है।” दुबे के इस बयान ने न केवल अपराधियों में भय पैदा किया है, बल्कि आम नागरिकों में विश्वास भी जगाया है।
पुलिस अब इस लॉज को पूरी तरह सील करने की प्रक्रिया में जुट गई है। साथ ही, स्थानीय प्रशासन से लॉज का लाइसेंस तत्काल रद्द करने की सिफारिश की गई है। यह कदम भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए एक नजीर कायम करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि लॉज और होटलों पर सख्त निगरानी बढ़ाने से न केवल अवैध कारोबार रुकेगा, बल्कि पर्यटकों और यात्रियों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा हाल ही में जारी दिशा-निर्देशों के तहत, सभी सराय संचालकों को डिजिटल रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया गया है, जिसका पालन न करने पर कड़ी सजा का प्रावधान है।
इस घटना ने पूरे महासमुंद शहर में हड़कंप मचा दिया है। स्थानीय निवासियों ने सोशल मीडिया पर पुलिस की तारीफ की झड़ी लगा दी है। एक वरिष्ठ नागरिक ने कहा, “यह सराहनीय कदम है। अब पुलिस से अपेक्षा है कि रायपुर रोड जैसे व्यस्त इलाकों में नियमित पैट्रोलिंग और सीसीटीवी निगरानी बढ़ाई जाए, ताकि कोई भी अपराधी छिप न सके।” वहीं, महिला संगठनों ने भी इस मुद्दे पर आवाज बुलंद की है, मांग की है कि अवैध गतिविधियों में फंसी महिलाओं को पुनर्वासित करने के लिए विशेष योजनाएं शुरू की जाएं।
महासमुंद पुलिस की यह सफल कार्रवाई एक चेतावनी है कि कानून का राज किसी की मनमानी पर हावी नहीं होने देगा। शहरवासी अब उम्मीद कर रहे हैं कि ऐसी मुहिमें नियमित रूप से चलेंगी, जिससे महासमुंद एक सुरक्षित और नैतिक शहर के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर सके। आगे की जांच में और भी राज खुलने की संभावना है, जिसकी अपडेट्स पर नजर रखी जा रही है।

छत्तीसगढ़ धान खरीदी महासंकट: हड़ताल की ज्वाला भड़की, 1500+ कर्मचारी सड़कों पर..?

12 नवंबर से पूर्ण तालाबंदी, 25 लाख किसान तबाह, साय सरकार को 72 घंटे का अंतिम अल्टीमेटम..!!

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
रायपुर / महासमुंद (8 नवंबर 2025): छत्तीसगढ़ में 15 नवंबर से शुरू होने वाले धान खरीदी मेगा सीजन की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है, लेकिन राज्य सरकार के सामने अब तक का सबसे भयंकर संकट खड़ा हो गया है! सहकारी समिति कर्मचारी महासंघ की रायपुर संभागीय हड़ताल पांचवें दिन भी आग की तरह धधक रही है। रायपुर, गरियाबंद, धमतरी, बलौदाबाजार और महासमुंद – इन पांच जिलों की 500+ समितियां पूरी तरह ठप, ताले लटके, सन्नाटा पसरा! 1500 से ज्यादा कर्मचारी सड़कों पर डटे, नारे गूंज रहे, धान रजिस्ट्रेशन-टोकन वितरण सब बंद! अगर सरकार नहीं झुकी तो 15 नवंबर का ‘धान खरीदी महोत्सव’ कब्रिस्तान बन जाएगा – पूरा सीजन बर्बाद, किसान सड़कों पर!

सुखत का कहर: समितियां कंगाल, कर्मचारी विद्रोह पर उतरे!

हड़ताल की जड़ में ‘सुखत’ का वह पुराना भूत, जो हर साल समितियों को निगल जाता है! नियम कहता है – 17% नमी वाला धान खरीदो, लेकिन गोदाम पहुंचते-पहुंचते परिवहन की लेटलतीफी और प्राकृतिक सुखाव से नमी 10-12% तक गिर जाती है। यह पूरा घाटा – करोड़ों रुपये – समितियों और कर्मचारियों के सिर! पिछले साल सैकड़ों समितियां डूब गईं, विश्वसनीयता चौपट, कर्मचारी वेतन से हाथ धो बैठे!

प्रदेश अध्यक्ष नरेंद्र कुमार साहू ने गरजते हुए कहा:

“2008 से हम चीख रहे हैं, हर बार झूठे आश्वासन! इस बार सुखत भत्ते का स्थायी कानून, शून्य सुखत वाली समितियों को लाखों का इनाम और 72 घंटे में धान उठाव अनिवार्य – नहीं तो 15 नवंबर का मेगा इवेंट फ्लॉप शो, सरकार की थू-थू!”

पूर्व भूपेश सरकार ने दी थी 250 करोड़ की ऑक्सीजन, साय सरकार बेहोश!

कोरोना काल में भूपेश बघेल सरकार ने समितियों को बचाने के लिए 250 करोड़ रुपये की सुखत राहत दी – वह जीवनरेखा बनी! अब विष्णुदेव साय सरकार से यही मांग, लेकिन मुख्यमंत्री से कृषि मंत्री, सहकारिता विभाग तक – सब मौन, कोई जवाब नहीं!

संघ के योद्धा नेता एक स्वर में धमकाया

“मध्य प्रदेश की तर्ज पर हर समिति को सालाना 3 लाख रुपये प्रबंधकीय अनुदान दो, वरना 2058 समितियां बंद, 25 लाख किसान सड़कों पर – आग लग जाएगी!”
– जयप्रकाश साहू, कौशल साहू, भेखराम यादव, गुमान साहू, मनीष चंद्राकर, मनोज भारद्वाज, गोपाल साहू, माखन सिन्हा

चार सूत्रीय मांगें न्याय की पुकार या विद्रोह की हुंकार..?

1. सुखत भत्ते का स्थायी कानूनी प्रावधान + शून्य सुखत पर लाखों का प्रोत्साहन

2. 72 घंटे में अनिवार्य धान उठाव – एक मिनट देरी पर जुर्माना!

3. कंप्यूटर ऑपरेटरों का तत्काल नियमितीकरण – कोई बहाना नहीं!

4. आउटसोर्सिंग पर पूर्ण प्रतिबंध – सरकारी नौकरी सरकारी कर्मचारियों को!

कंप्यूटर ऑपरेटरों का साथ खरीदी पूरी तरह लकवाग्रस्त..!

धान खरीदी कंप्यूटर ऑपरेटर संघ ने भी हड़ताल में कंधे से कंधा जोड़ा! उनके बिना एक रजिस्ट्रेशन, एक टोकन, एक बारदाना आवंटन नामुमकिन! दोनों संघों की steel-like एकजुटता से किसान त्राहिमाम – लंबी कतारें, लेकिन दरवाजे पर ताले!

किसान चीख रहे: “धान सड़ रहा, हम बर्बाद..!”

आंदोलन का वॉर रोडमैप अब पूरे प्रदेश में जंग…!

11 नवंबर तक: रायपुर संभाग में संपूर्ण तालाबंदी – एक दाना नहीं छुएंगे!
12 नवंबर से: पूरे छत्तीसगढ़ में अनिश्चितकालीन हड़ताल – कैबिनेट फैसला तक पूर्ण बंद, धान खरीदी शून्य!

प्रदेश अध्यक्ष नरेंद्र साहू का अंतिम वॉर क्राई

“यह कर्मचारियों की नहीं, 25 लाख किसानों की जंग है! सरकार वार्ता करे, समाधान निकाले – वरना धान खरीदी का पूरा सीजन जलकर राख! जिम्मेदार सिर्फ विष्णुदेव साय सरकार – इतिहास गवाह रहेगा!”
छत्तीसगढ़ की सड़कें लाल हैं, समितियां सूनी, किसान बेबस और गुस्से में..!

क्या साय सरकार झुकेगी या 15 नवंबर का मेगा इवेंट धरने की भेंट चढ़ेगा..?
अगले 72 घंटे – समाधान या संपूर्ण विनाश!
टिक-टिक… समय खत्म हो रहा है.!

महासमुंद में स्वास्थ्य माफिया का काला साम्राज्य ध्वस्त श्री राम केयर क्लिनिक सील, 24 घंटे में खुला – लाखों की रिश्वत, मरीजों की लाशें और फर्जीवाड़े का खौफनाक सच..!

क्लिनिक सील फिर ओपन और हुई विज्ञापनों की बौछार

रिपोर्टर मयंक गुप्ता

महासमुंद / छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के जिला कलेक्टर विनय कुमार लंगेह के निर्देश में राजस्व विभाग की टीम तहसीलदार एवं स्वास्थ्य विभाग की टीम में जिला नोडल अधिकारी छत्रपाल चंद्राकर (नर्सिंग होम एक्ट), महासमुंद विकास खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ विकास चंद्राकर , डॉ घनश्याम चंद्राकर की टीम कुम्हार पारा स्थित श्री राम केयर क्लिनिक पहुंची जिसमें मौके पर संचालक शेषनारायण गुप्ता द्वारा किसी प्रकार से कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया। जो कि,महासमुंद जिले में अब तक की सबसे बड़ी रेड ने पूरे सिस्टम को हिला दिया है। घनी बस्ती के बीच 15 साल से अवैध रूप से चल रहा श्री राम केयर क्लिनिक आखिरकार प्रशासन के हत्थे चढ़ा। संचालक शेष नारायण गुप्ता पर जानलेवा लापरवाही, ठगी, अश्लील हरकतें और रिश्वत का खेल खेलने के संगीन इल्ज़ाम लगे हैं। 29 अक्टूबर 2025 को क्लिनिक सील हुआ, लेकिन 30 अक्टूबर को ही दोबारा खुल गया। सवाल एक ही – रातों-रात लाइसेंस कैसे..? क्या ये करोड़ों की डील है..?

15 साल का अवैध साम्राज्य: बिना लाइसेंस के हजारों मरीजों की लूट..!

शेष नारायण गुप्ता उर्फ ‘नाड़ी मसीहा’ पिछले डेढ़ दशक से नर्सिंग होम एक्ट को ठेंगा दिखाकर क्लिनिक चला रहे थे। कोई रजिस्ट्रेशन नहीं, कोई क्वालिफाइड डॉक्टर नहीं, कोई वैध दस्तावेज नहीं। फिर भी गरीब बस्तियों के लोग यहां झांसे में आते रहे। मोटी फीस वसूलकर महंगी दवाएं थोपी जातीं, इलाज के नाम पर जेब काटी जाती। स्थानीय लोग बताते हैं – “ये क्लिनिक प्रशासन की नाक के नीचे फलता-फूलता रहा, क्योंकि ऊपर तक सांठ-गांठ थी।”

29 को ताला, 30 को खुला एक दिन में लाइसेंस का ‘चमत्कार’ या रिश्वत का खेल..?

29 अक्टूबर को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने छापा मारा, कोई कागज नहीं मिला, क्लिनिक सील कर ताला लगा दिया। लेकिन अगले ही दिन संचालक CMHO ऑफिस पहुंचे और उसी दिन अप्रूवल मिल गया। सूत्रों के मुताबिक जिला स्वास्थ्य अधिकारी और गुप्ता के बीच लाखों की डील हुई ऐसा संदेहास्पद प्रतीत होता है। जब क्लिनिक सीलिंग के वक्त एक भी दस्तावेज नहीं था, तो 24 घंटे में सारे कागजात कैसे जुट गए..? ये सवाल अब पूरे जिले में गूंज रहा है और तो और मजेदार बात यह भी है कि,इस मामले में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ आई नागेश्वर राव से उनका वर्षण लेने दूरभाष के माध्यम से संपर्क किया गया यहां तक उनके कार्यालय में भी पहुंच जानकारी हेतु मिलने की बात की तो उनके द्वारा किसी प्रकार से कोई रिस्पांस नहीं मिला इससे स्पष्ट होता है कि, जिला चिकित्सा अधिकारी और श्री राम केयर संचालक के बीच आपसी गठबंधन से क्लिनिक फिर से खुल गई।

मीडिया में झूठ की आंधी: विज्ञापनों से मुंह बंद करवाने की साजिश..!

सीलिंग के बाद कुछ अखबारों में खबर छपी कि गुप्ता ने चार महीने पहले आवेदन किया था और दीपावली की छुट्टी से देरी हुई। हकीकत? आवेदन सीलिंग के मात्र चार दिन पहले किया गया। जिला नोडल अधिकारी छत्रपाल चंद्राकर ने साफ कहा – “ये सरासर झूठ है।” दिवाली में एक भी विज्ञापन नहीं, लेकिन क्लिनिक खुलते ही पेज भरकर एड्स! क्या मीडिया हाउस भी इस कवर-अप के पार्टनर हैं..?

मरीजों की मौतों का खूनी खेल: ओवरडोज से गई जानें, सिर्फ लूट का धंधा..!

क्लिनिक की लापरवाही ने कई घर उजाड़ दिए। एक युवती की ओवरडोज से मौत हो गई। एक मासूम बच्चा मौत के मुंह से बाल-बाल बचा। दर्जनों मरीजों का कहना है – महीनों इलाज के बाद भी कुछ नहीं हुआ, लेकिन बाहर की 5 रुपये की दवा ने ठीक कर दिया। गुप्ता मरीजों को डराते, महंगी इंजेक्शन थोपते और पैसे ऐंठते। शिकायतकर्ता बोले – “ये इलाज नहीं, कत्ल का लाइसेंस था!”

7.5 लाख की ठगी का काला राज: खुद लुटा, लेकिन नकदी कहां से..?

शेष नारायण गुप्ता से खुद 7.5 लाख रुपये ठग लिए गए। ड्रग इंस्पेक्टर बनकर डर दिखाया गया, सिटी कोतवाली में FIR हुई, आरोपी गिरफ्तार हुआ। लेकिन गुप्ता को एक पैसा वापस नहीं मिला। सवाल ये कि एकमुश्त इतनी नकदी कहां से आई? सूत्र बताते हैं – ठग पहले भी कई बार पैसे ले चुका है। क्या उसके पास गुप्ता का कोई बड़ा राज है? या अवैध कमाई का कोई और धंधा..?

अश्लीलता का शर्मनाक इतिहास: बैडटच से CCTV तक, कुछ नहीं बदला..!

डॉ साहब के क्लिनिक में एक घटना ऐसी भी घटी जिसमें पीड़ित पक्ष युवती अपने भाई के साथ चिकित्सकीय परीक्षण हेतु आई थी जिससे कि उस युवती के साथ बेड टच जैसा घिनौना कृत्य भी डॉ साहब के द्वारा किया गया था बाद उस युवती के भाई और डॉ साहब के बीच जमकर हंगामा भी हुआ था । जिसके पश्चात डॉ साहब अपनी क्लिनिक में सीसीटीवी कैमरा लगवाए ताकी मेरी बदनामी न हो ये कोई कहा सुनी नहीं ये सच्ची घटना है जो कि,उसी वार्ड के एक विश्वसनीय सूत्र के माध्यम से जानकारी मिली। लेकिन घटनाएं नहीं रुकीं। अब फिर वही सवाल – मरीजों की सुरक्षा सिर्फ कागजी शेर थी?

धमकियों का खौफ वकील सौरभ साहू की मानहानि की धमकी..!

शिकायतकर्ता एवं सच्चाई उजागर करने वालों को मिली धमकियां। नामचीन वकील सौरभ साहू मोबाईल 9009132885 ने खुलेआम कहा – “मानहानि का केस ठोकूंगा!” लेकिन शिकायतकर्ता डटे हुए हैं – “सत्य को कोई नहीं दबा सकता।”

प्रशासन की आंखें खुलीं: पूरे जिले में अवैध क्लिनिकों पर ताबड़तोड़ एक्शन..!

15 साल तक प्रशासन सोता रहा? अब CMHO ने सभी अवैध क्लिनिकों की लिस्ट बनाने के आदेश दिए। पुलिस धोखाधड़ी, अवैध संचालन और धमकी के तहत FIR दर्ज करने की तैयारी कर रही है।

जनता जागो: फर्जी डॉक्टरों से बचो – ये सिस्टम की सबसे बड़ी नाकामी है..!

ये सिर्फ एक क्लिनिक की कहानी नहीं, पूरे स्वास्थ्य तंत्र की सड़ांध है। गरीब जनता फर्जी डॉक्टरों के जाल में फंसकर लुट रही है। अब वक्त है सतर्क होने का, सच्चाई उजागर करने का और सख्त कार्रवाई की मांग करने का।
महासमुंद की जनता अब इंतज़ार कर रही है – क्या गुप्ता जेल जाएंगे या रिश्वत का जादू फिर चलेगा..? ये केस पूरे छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य व्यवस्था को हमेशा के लिए बदल देगा..!

ये तो ट्रेलर है पिक्चर अभी बाकी है अगले न्यूज के लिए थोड़ा सब्र करे
बेबाक बयान न्यूज हर बात खुलकर, हर राज खुलकर

राज्योत्सव रजत जयंती महोत्सव कलेक्टर विनय लंगेह के नेतृत्व में विकास और संस्कृति का अनुपम संगम

8 अंतर्जातीय दंपत्तियों को 20 लाख की प्रोत्साहन राशि, जनजातीय गांवों में बहुउद्देशीय केंद्रों का शुभारंभ

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुंद, 3 नवम्बर 2025// छत्तीसगढ़ के 25वें स्थापना दिवस की रजत जयंती के दूसरे दिन जिला मुख्यालय के मिनी स्टेडियम में आयोजित राज्योत्सव में कलेक्टर विनय लंगेह ने स्वयं मोर्चा संभाला। विभागीय स्टालों का गहन निरीक्षण कर उन्होंने हर योजना की बारीकियां जांचीं, प्रदर्शन की भरपूर सराहना की और अधिकारियों को जनकेंद्रित कार्यशैली अपनाने का कड़ा संदेश दिया। उनके साथ जिला पंचायत सीईओ हेमंत नंदनवार, अपर कलेक्टर रवि साहू और एसडीएम अक्षा गुप्ता कदम से कदम मिलाकर चल रही थीं।
कलेक्टर विनय लंगेह ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “राज्योत्सव कोई औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की आत्मा—हमारी संस्कृति और जनकल्याण योजनाओं का जीवंत दर्शन है। हर स्टाल पर आम नागरिक को उसकी हकदारी का पूरा हक मिलना चाहिए।” उनकी इस सक्रियता ने पूरे आयोजन में नई ऊर्जा का संचार किया।

सांस्कृतिक संध्या: नशा मुक्ति से कमार नृत्य तक, मंच पर छत्तीसगढ़ की धड़कन

वल्लभाचार्य शासकीय महाविद्यालय के छात्रों ने नशा मुक्ति पर ऐसा नाटक किया कि दर्शक दीर्घा में सन्नाटा छा गया—फिर तालियों की गड़गड़ाहट। कमार जनजाति के कलाकारों ने पारंपरिक घूंघरू, ढोल-मांदर और रंग-बिरंगी पोशाकों में मंच को आदिवासी संस्कृति का जीता-जागता म्यूजियम बना दिया।
4:30 से 5:00 बजे: कमार जनजाति का पारंपरिक नृत्य
5:00 से 7:45 बजे: विभिन्न लोक नृत्य दलों का सांस्कृतिक तूफान
8:00 से 9:30 बजे: फोक फ्यूजन 36 बैंड की धमाकेदार प्रस्तुति (आज रात का ग्रैंड फिनाले)
रेड क्रॉस ने सीपीआर का लाइव डेमो दिया, तो महिला एवं बाल विकास विभाग ने कुपोषण पर लघु नाटिका से मांओं को सीधा संदेश पहुंचाया।

20 लाख की प्रोत्साहन राशि: 8 अंतर्जातीय दंपत्तियों को कलेक्टर के हाथों सम्मान

मुख्य अतिथि सांसद रूपकुमारी चौधरी और कलेक्टर विनय लंगेह ने मंच पर 8 दंपत्तियों को 2.5 लाख रुपये प्रत्येक की प्रोत्साहन राशि और प्रमाण-पत्र सौंपे। ये दंपत्ति हैं:
मुकेश कुमार बघेल & जुगेश्वरी साहू
लोकेश & भूमिका साहू
भीष्मदेव खुटे & शालिनी यादव
अभिलास आवड़े & खिलेश्वरी निषाद
नागेंद्र & रमा
रूपेश कुमार बंजारे & कुसुमलता साहू
लाभार्थी मुकेश बघेल ने कहा: “यह राशि नहीं, हमारे सम्मान की गारंटी है।”

छात्रवृत्ति: मेधावियों के सपनों को पंख

अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के 5 मेधावी छात्रों—दिलेश तलक, चांदनी जांगड़े, अनीता जांगड़े, प्रमोद कुमार साव और भूमिका साहू—को पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति प्रदान की गई।
छात्रा चांदनी ने कहा: “अब मेडिकल की पढ़ाई का सपना हकीकत बनेगा।”

जनजातीय गांवों में क्रांति: दो बहुउद्देशीय केंद्रों का उद्घाटन

पीएम-जनमन योजना के तहत धनसुली (महासमुंद) और जोरातराई (बागबाहरा) में दो अत्याधुनिक बहुउद्देशीय केंद्रों का शुभारंभ।
एक छत के नीचे:
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र
आंगनबाड़ी
कौशल विकास प्रशिक्षण
सामुदायिक हॉल
कलेक्टर बोले: “अब गांव का बच्चा डॉक्टर बनेगा, युवा नौकरी पाएगा—यही छत्तीसगढ़ का नया मॉडल है।”

स्टालों में योजनाओं का मेला: एक क्लिक, सारी जानकारी

मुख्यमंत्री बाल भविष्य योजना → प्रयास परीक्षा की तैयारी
एकलव्य आवासीय विद्यालय → मुफ्त शिक्षा + हॉस्टल
जवाहर उत्कृष्ट भर्ती → सरकारी नौकरियों की सीधी राह
बीएससी नर्सिंग & होटल मैनेजमेंट → मुफ्त कोचिंग
वन अधिकार पत्र → आदिवासियों को जमीन का मालिकाना हक
नागरिक बोले: “सारी योजनाएं एक जगह—पहले कभी नहीं देखा!”

राज्योत्सव का तीसरा दिन:

सुबह 10 बजे: मेगा स्वास्थ्य शिविर
दोपहर 2 बजे: 500 लाभार्थियों को सामग्री वितरण
शाम 6 बजे: ग्रैंड क्लोजिंग सेरेमनी

कलेक्टर विनय लंगेह का संकल्प

“हर योजना का अंतिम लाभार्थी तक पहुंचना—यह हमारी जिम्मेदारी है।”[contact-form][contact-field label=”Name” type=”name” required=”true” /][contact-field label=”Email” type=”email” required=”true” /][contact-field label=”Website” type=”url” /][contact-field label=”Message” type=”textarea” /][/contact-form]

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महासमुंद DEO लहरे का ‘कमीशन किंगडम’ ढहा: रेट कार्ड वायरल, शिक्षा बिकी — CM साय, अब फैसला लो..!

3 लाख का शांति फंड, 25K में फाइल गायब, जंगल ट्रांसफर का आतंक — महासमुंद चीखा: “बच्चों की किताबें बेची जा रही!”

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
सरायपाली (महासमुंद)
चाय की टपरी पर एक शिक्षक ने चाय का घूँट रोका और फुसफुसाया,
“सर, स्कूल में क्लास नहीं, सौदा चल रहा है।”
अगले पल सन्नाटा।
क्योंकि सब जानते हैं — DEO विजय कुमार लहरे का नाम लेते ही हवा में डर नहीं, डील की खुशबू फैलती है।
यह खबर नहीं।
यह शिक्षा के अंतिम संस्कार का निमंत्रण पत्र है।

पहला कांड: हर्बल लाइफ वाला शिक्षक, सजा सिर्फ “चाय कटौती”

1 अगस्त।
स्कूल में क्लास की जगह हर्बल लाइफ का सेमिनार।
जांच हुई। रिपोर्ट आई। दोष साबित।
फिर हुआ क्या?
DEO लहरे ने फोन घुमाया।
सस्पेंशन रद्द।
सजा? “अगले महीने चाय नहीं मिलेगी।”
एक अफसर ने नाम न छापने की शर्त पर कहा:
“यहाँ सजा नहीं, सौदा होता है। 10 हजार में फाइल साफ।”

दूसरा खुलासा: DEO की डायरी में लिखा है पूरा ‘रेट कार्ड’

सूत्रों ने बताया — लहरे की डायरी कोई डायरी नहीं।
यह कमीशन की खाता-बही है।
पेज पर साफ लिखा:
छोटी शिकायत दबानी हो? → 15 हजार
फाइल गायब करनी हो? → 25 हजार
साइड बिजनेस चलाना हो? → 20 हजार + ट्रांसफर फ्री
एक शिक्षक बोला:
“हम बच्चों को ईमानदारी पढ़ाते हैं। वो हमें सौदा सिखाते हैं।”

तीसरा डर: शिकायत की तो जंगल में ट्रांसफर

अभिनय शाह ने शिकायत की।
जवाब मिला:
“शिकायत वापस लो, वरना जंगल का स्कूल पक्का।”
अब अभिनय कोर्ट जा रहा है।
उसकी आवाज अब चाय की टपरी पर रिंगटोन बन गई है।
शिक्षक कहते हैं:
“यहाँ बोलने की कीमत नौकरी है।”

चौथा सबूत: 5 महीने, 22 शिकायतें, एक भी सस्पेंशन नहीं

मई से सितंबर तक:
4 शिकायतें धमकी से दबीं
5 ट्रांसफर के डर से चुप हो गईं
6 प्राइवेट सौदे से सुलझीं
3 फाइलें गायब
4 कमीशन देकर माफ
कुल जमा: लगभग 3 लाख रुपये का ‘शांति फंड’।
सस्पेंशन? जीरो।
पाँचवां विद्रोह: शिक्षक संघ ने दी चेतावनी
छत्तीसगढ़ शिक्षक संघ ने कहा:

DEO लहरे को हटाओ, वरना महासमुंद में धरना, फिर पूरे जिले में हड़ताल।”

BEO मांझी ने रिपोर्ट दी थी।
ऊपर से फाड़ दी गई।
अब वो चुप हैं।
डर गए हैं।

आखिरी गुहार: CM साय तक पहुँचा मामला

जनता ने रायपुर तक आवाज पहुँचाई:
“मुख्यमंत्री जी, शिक्षा बचा लो। यहाँ बच्चे नहीं, सौदे हो रहे हैं।”
स्कूलों के बाहर अब मजाक में बोर्ड लग रहे हैं:
“हर्बल लाइफ कोर्स — फ्री, कमीशन — जरूरी।”

जनता का फैसला

लहरे का तख्त डगमगा रहा है।
अगर जांच नहीं हुई, तो जनता सड़क पर उतरेगी।

शिक्षा बचेगी या सौदे चलते रहेंगे..?

यह सवाल अब सिर्फ महासमुंद का नहीं, पूरे छत्तीसगढ़ का है

यह खबर नहीं।
यह शिक्षा की चीख है।
जो सुन ले, वही बचेगा।
जो अनसुना करे, वही डूबेगा।

‘नाम गायब, परंपरा टूटी, लोकतंत्र शर्मसार’ – राशि महिलांग

छत्तीसगढ़ नए विधानसभा भवन की पट्टिका पर विपक्ष नेता को ‘अनदेखा’ करने पर कांग्रेस का तीखा प्रहार

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुंद। छत्तीसगढ़ के रजत जयंती वर्ष में नए विधानसभा भवन का लोकार्पण एक ऐतिहासिक अवसर था, लेकिन यह समारोह अब राजनीतिक विवाद की आग में झुलस रहा है। भाजपा सरकार पर आरोप है कि उन्होंने जानबूझकर पट्टिका से नेता प्रतिपक्ष का नाम हटा दिया, जिसे कांग्रेस ने ‘कुंठित मानसिकता’, ‘संकीर्ण सोच’ और ‘लोकतंत्र की हत्या’ करार दिया है।
इस मुद्दे पर सबसे तीखी आवाज उठाई है कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और पूर्व पालिकाध्यक्ष श्रीमती राशि त्रिभुवन महिलांग ने। अपनी प्रेस विज्ञप्ति में उन्होंने सरकार के इस कदम को ‘राजनीतिक बदले की भावना’ और ‘विपक्ष के प्रति घोर उपेक्षा’ का जीवंत प्रमाण बताया।

परंपरा का अपमान, इतिहास का मजाक

श्रीमती महिलांग ने कहा –
“यह कोई छोटी-मोटी चूक नहीं है। यह राज्य की राजनीतिक संस्कृति पर काला धब्बा है। बड़े शासकीय भवनों के भूमिपूजन या लोकार्पण में विपक्षी नेता का नाम पट्टिका पर अंकित करना छत्तीसगढ़ की स्थापित परंपरा रही है – चाहे समारोह में राष्ट्रपति हों, प्रधानमंत्री हों या मुख्यमंत्री।”
उन्होंने कांग्रेस शासनकाल का उदाहरण देते हुए याद दिलाया:
“जब कांग्रेस की सरकार ने नए विधानसभा भवन का भूमिपूजन किया था, तब तत्कालीन विपक्षी नेता श्री धरमलाल कौशिक का नाम पट्टिका पर सम्मानपूर्वक अंकित किया गया था। यह हमारी ‘विकास में सबकी भागीदारी’ वाली सोच का प्रतीक था।”
लेकिन अब, भाजपा सरकार ने उसी भवन के लोकार्पण में नेता प्रतिपक्ष का नाम हटाकर न सिर्फ परंपरा तोड़ी, बल्कि शालीनता, मर्यादा और राजनीतिक सौहार्द को भी ठेंगा दिखाया।

राग-द्वेष की राजनीति’ vs ‘समावेशी विकास’

श्रीमती महिलांग ने दोनों दलों की विचारधारा में अंतर स्पष्ट किया

कांग्रेस भाजपा

विकास में सबकी हिस्सेदारी
राग-द्वेष की राजनीति
विपक्ष को सम्मान
विपक्ष को अपमान
लोकतंत्र की मर्यादा
सत्ता का अहंकार
“कांग्रेस ने हमेशा समावेशी विकास को प्राथमिकता दी। लेकिन भाजपा ने सत्ता के नशे में परंपराओं को कुचल दिया। यह कदम लोकतांत्रिक व्यवस्था को दूषित करने की साजिश है,” उन्होंने चेतावनी दी।

राजनीतिक गलियारों में हलचल

कांग्रेस ने इस मुद्दे को विधानसभा के आगामी सत्र में जोर-शोर से उठाने का ऐलान किया है।
पार्टी नेताओं का कहना है – “पट्टिका पर नाम न होना सिर्फ एक व्यक्ति का अपमान नहीं, बल्कि पूरे विपक्ष और लोकतंत्र का अपमान है।”
भाजपा खेमे में खामोशी: अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं, लेकिन सूत्र बता रहे हैं कि इसे ‘प्रशासनिक त्रुटि’ बताने की तैयारी है।

राज्य के 25 साल, परंपरा के 25 घाव..?

नए विधानसभा भवन का निर्माण और लोकार्पण छत्तीसगढ़ के गौरव का प्रतीक था। लेकिन एक नाम की अनुपस्थिति ने पूरे उत्सव को राजनीतिक युद्ध का मैदान बना दिया।

सवाल यह है –

क्या सत्ता के अहंकार में डूबी सरकार राजनीतिक शिष्टाचार की अंतिम कड़ी भी तोड़ देगी?
क्या ‘विकास’ अब सिर्फ सत्ताधारी दल का पर्याय बनकर रह जाएगा..?

आगे क्या..?

कांग्रेस ने मांग की है कि पट्टिका में तुरंत सुधार किया जाए और नेता प्रतिपक्ष का नाम जोड़ा जाए।
पार्टी ने जनजागरण अभियान शुरू करने का ऐलान किया है – “नाम नहीं, सम्मान चाहिए!”
राजनीतिक पंडितों का मानना है – यह विवाद आगामी स्थानीय निकाय चुनावों में बड़ा मुद्दा बन सकता है।

श्रीमती राशि त्रिभुवन महिलांग का अंतिम संदेश

“लोकतंत्र तब तक जीवित है, जब तक उसमें सम्मान है।
नाम हटाना आसान है, लेकिन परंपरा का अपमान माफ़ नहीं किया जाएगा।”

महासमुंद में फर्जी नाड़ी जादूगर का काला कारोबार बेनकाब करोड़ों की ठगी का अंत, क्लीनिक पर प्रशासन का हथौड़ा..!

पूर्व में इनकी चिकित्सकीय परीक्षण से एक बच्ची की हुई थी मौत

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुंद / 30 अक्टूबर 2025 छत्तीसगढ़ के शांतिप्रिय शहर महासमुंद में बुधवार को एक बड़ा धमाका हुआ, जब जिला प्रशासन ने एक कुख्यात फर्जी डॉक्टर के क्लीनिक को सील कर दिया। नाड़ी परीक्षण के नाम पर वर्षों से भोले-भाले लोगों को ठगने वाले शेषनारायण गुप्ता का श्रीराम केयर क्लीनिक अब इतिहास बन चुका है। यह कार्रवाई न केवल एक व्यक्ति की ठगी का अंत है, बल्कि पूरे क्षेत्र में फैले फर्जी चिकित्सा रैकेट की चेतावनी भी है। जिला कलेक्टर विनय कुमार लगेंह के सख्त आदेश पर हुई इस छापेमारी ने शहरवासियों को राहत की सांस दी, लेकिन साथ ही सवाल भी खड़े कर दिए कि इतने सालों तक यह खेल कैसे चलता रहा..?

ठगी का साम्राज्य नाड़ी के नाम पर करोड़ों की कमाई

शेषनारायण गुप्ता, जो खुद को नाड़ी रोग विशेषज्ञ बताते थे, कुम्हारपारा इलाके में एक साधारण घर से अपना ‘सुपर क्लीनिक’ चला रहे थे। बाहर से देखने में यह कोई सामान्य दवाखाना लगता था, लेकिन अंदर की हकीकत किसी बड़े अस्पताल से कम नहीं थी। यहां हर रोज सैकड़ों मरीजों की भीड़ लगती थी, खासकर ग्रामीण इलाकों से आने वाले गरीब और अशिक्षित लोग। गुप्ता का तरीका बड़ा शातिराना था – वे मरीजों की नाड़ी पकड़कर ‘जादुई’ निदान बताते और फिर इलाज के नाम पर मोटी रकम वसूलते। प्रत्येक मरीज से 1200 से 1500 रुपये तक लिए जाते थे, और महीनों में यह रकम करोड़ों में पहुंच गई थी।
गुप्ता के पास कोई वैध मेडिकल डिग्री नहीं थी। वे न तो इंडियन मेडिकल काउंसिल से रजिस्टर्ड थे और न ही आयुर्वेदिक या किसी अन्य चिकित्सा प्रणाली के प्रमाणित विशेषज्ञ। फिर भी, वे एलोपैथिक, आयुर्वेदिक और यहां तक कि इंजेक्शन वाली दवाओं का इस्तेमाल करते थे। क्लीनिक में दवाओं के ढेर लगे रहते थे – सिरिंज, टैबलेट्स, और तरह-तरह की मेडिसिन्स। मरीजों को डराया जाता कि ‘अगर इलाज नहीं कराया तो बीमारी जानलेवा हो जाएगी’। यह सब चिकित्सा अधिनियम का खुला उल्लंघन था, जो फर्जी डॉक्टरों पर सख्त पाबंदी लगाता है।

मौत का साया: एक युवती की दर्दनाक कहानी ने खोला राज

इस फर्जीवाड़े का सबसे दुखद पहलू अप्रैल 2022 में सामने आया, जब 21 वर्षीय हंशी श्रीवास्तव नामक युवती की मौत हो गई। हंशी टीबी से पीड़ित थीं और सरकारी अस्पताल ने उन्हें छह महीने की नियमित दवा की सलाह दी थी। लेकिन गुप्ता ने परिवार को बहकाया कि ‘टीबी कोई बड़ी बीमारी नहीं, मैं इसे जड़ से उखाड़ फेंकूंगा’। उनकी ओवरडोज दवाओं ने युवती की हालत बिगाड़ दी, और 30 अक्टूबर 2022 को उसकी मौत हो गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने चौंकाने वाला खुलासा किया – उसके शरीर में सिर्फ छह ग्राम खून बचा था।
परिजनों की शिकायतों ने आग में घी डाला। वे न्याय की गुहार लगाते रहे, लेकिन शुरुआत में कोई सुनवाई नहीं हुई। यह घटना फर्जी डॉक्टरों की खतरनाक दुनिया की एक मिसाल है, जहां गलत इलाज से जानें चली जाती हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में अक्सर गरीब परिवार चुप रह जाते हैं, लेकिन हंशी की मौत ने कई अन्य पीड़ितों को आवाज दी।

प्रशासन का तूफानी एक्शन: छापा और सीलिंग की पूरी कहानी

पत्रकार मयंक गुप्ता की लगातार कोशिशों से यह मामला उजागर हुआ। उन्होंने ‘बेबाक बयान’ पोर्टल पर वीडियो साक्ष्य और दस्तावेजों के साथ शिकायत की, जो सीधे कलेक्टर विनय लगेंह और मुख्य चिकित्सा अधिकारी तक पहुंची। कलेक्टर ने तुरंत जांच के आदेश दिए।
बुधवार सुबह 9 बजे टीम ने क्लीनिक पर धावा बोला। टीम में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आई. नागेश्वर, डॉ. विकास चंद्राकर, तहसीलदार जुगल किशोर पटेल, मेडिकल ऑफिसर डॉ. घनश्याम चंद्राकर और नोडल अधिकारी छत्रपाल चंद्राकर शामिल थे। मौके पर पहुंचते ही टीम स्तब्ध रह गई – क्लीनिक में मरीजों की लंबी लाइन लगी थी, एक युवती रिसेप्शन पर नाम दर्ज कर रही थी, और अंदर गुप्ता मरीजों को ‘इलाज’ दे रहे थे।
जांच में गुप्ता कोई वैध दस्तावेज नहीं दिखा सके। टीम ने दवाओं, सिरिंजों, बायोमेडिकल वेस्ट और मरीजों के रिकॉर्ड्स को जब्त कर लिया। क्लीनिक में अवैध लैब जैसी सुविधाएं भी मिलीं, जहां टेस्ट किए जाते थे। आखिरकार, कलेक्टर के आदेश पर क्लीनिक को सील कर दिया गया। यह कार्रवाई फर्जी चिकित्सा के खिलाफ एक मिसाल बनेगी, जो पूरे प्रदेश में फैले ऐसे रैकेट्स को चेतावनी देती है।

शहरवासियों की मिली-जुली प्रतिक्रिया गुस्सा और उम्मीद

कार्रवाई के बाद शहर में हलचल मच गई। स्थानीय निवासी संजय वर्मा ने कहा, “हमारे मोहल्ले में रोज सैकड़ों लोग आते थे, हमें लगा कोई बड़ा डॉक्टर है। लेकिन अब पता चला कि यह सब धोखा था। प्रशासन को धन्यवाद।” महिला वकील अदिति दुबे ने जोर दिया, “ऐसे फर्जी डॉक्टर गरीबों की जिंदगी से खेलते हैं। इनके खिलाफ मौत की सजा जैसी कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि कोई और न डराए।”
पत्रकार मयंक गुप्ता ने अपनी जांच का जिक्र करते हुए कहा, “कई हफ्तों की मेहनत से यह संभव हुआ। मीडिया और प्रशासन की साझेदारी से ही ऐसे फर्जीवाड़े रुक सकते हैं।” वहीं, कलेक्टर विनय लगेंह ने साफ चेतावनी दी: “जिले में किसी भी फर्जी क्लीनिक या डॉक्टर को बख्शा नहीं जाएगा। सभी को वैध लाइसेंस और योग्यता साबित करनी होगी, वरना सख्त एक्शन होगा।”

बड़ा सबक जागरूकता है असली दवा

यह घटना पूरे छत्तीसगढ़ और देश के लिए एक बड़ा सबक है। नाड़ी परीक्षण या पारंपरिक चिकित्सा के नाम पर ठगी के कई मामले सामने आते रहते हैं, लेकिन महासमुंद का केस सबसे चर्चित बन गया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि किसी भी डॉक्टर के पास जाने से पहले उसकी डिग्री, रजिस्ट्रेशन और रिव्यू जांचें। सरकारी अस्पतालों को प्राथमिकता दें, जहां मुफ्त और विश्वसनीय इलाज मिलता है।
अब कुम्हारपारा का वह क्लीनिक, जो कभी विश्वास की दुकान था, कानून के कठघरे में है। यह कार्रवाई साबित करती है कि सतर्क नागरिक, जागरूक मीडिया और सक्रिय प्रशासन मिलकर किसी भी काले कारोबार को नेस्तनाबूद कर सकते हैं। महासमुंद के लोग अब सुरक्षित महसूस कर रहे हैं, लेकिन सवाल बाकी है – कितने और फर्जी डॉक्टर अभी भी अंधेरे में खेल रहे हैं..?