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ब्रेकिंग न्यूज़: रायपुर संभाग में किसानों को बड़ी राहत! 18 दिन बाद अनिश्चितकालीन हड़ताल खत्म, 21 नवंबर से धान उपार्जन केंद्रों पर पूरी रफ्तार से शुरू होगी खरीदी

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रिपोर्टर मयंक गुप्ता
रायपुर / महासमुंद 21 नवंबर 2025
जिले के हजारों किसानों के लिए राहत भरी खबर! जिला सहकारी समिति कर्मचारी संघ एवं कंप्यूटर ऑपरेटर संघ ने अपनी 18 दिन पुरानी अनिश्चितकालीन संभागीय स्तर पर संचालित हड़ताल आखिरकार बुधवार देर शाम औपचारिक रूप से समाप्त कर दी। संघ के पदाधिकारियों ने जिला प्रशासन को लिखित पत्र सौंपते हुए घोषणा की कि, गुरुवार 21 नवंबर 2025 की सुबह से सभी समिति प्रबंधक, सहायक प्रबंधक, विक्रेता, डाटा एंट्री ऑपरेटर, वेयरहाउस स्टाफ और अन्य कर्मचारी अपने-अपने धान उपार्जन केंद्रों पर उपस्थित होकर पूर्ण रूप से कार्य शुरू कर देंगे।

क्या थी पूरी कहानी..?

3 नवंबर 2025 से रायपुर संभाग के पांच जिलों में शुरू हुई यह हड़ताल महासमुंद में सबसे ज्यादा असर दिखा रही थी। कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में पुरानी पेंशन योजना की बहाली, वेतन विसंगति दूर करना, नियमितीकरण, पदोन्नति में आरक्षण और कार्यबहाली के दौरान हुई निलंबन-कार्रवाई वापस लेना आदि शामिल थे। हड़ताल के दौरान संघ ने सामूहिक इस्तीफे सौंपे, जेल भरो आंदोलन किया और धरना-प्रदर्शन भी किए।
परिणामस्वरूप जिले के 108 धान उपार्जन केंद्रों में खरीदी पूरी तरह ठप हो गई थी। किसानों को बारदाने नहीं मिले, टोकन नहीं कटे, ट्रांसपोर्टर परेशान रहे और गोदामों में पहले से रखा धान भी नहीं निकल पाया। कई केंद्रों पर तो ताले लटके दिखाई दिए।

किसानों की मजबूरी बनी हड़ताल वापसी का बड़ा कारण

संघ के जिलाध्यक्ष मनहरण साहू, सचिव घनश्याम पटेल, ऑपरेटर संघ के अध्यक्ष नरेश सahu और अन्य पदाधिकारियों ने स्पष्ट कहा,
“हमारी मांगें जायज हैं और हम उनसे पीछे नहीं हटे हैं, लेकिन किसान भाइयों का नुकसान देखकर मन नहीं माना। खेतों में धान कटाई जोरों पर है, मौसम खराब होने का डर है, मजदूर खड़े हैं, कर्ज का बोझ है। हम अन्नदाता के साथ अन्याय नहीं होने दे सकते। इसलिए शासन-प्रशासन पर भरोसा जताते हुए हम हड़ताल वापस ले रहे हैं।”

प्रशासन के साथ हुई मैराथन बैठक

बुधवार शाम 6 बजे से रात 9:30 बजे तक जिला पंचायत के सभाकक्ष में लगातार बैठक चली। इसमें अपर कलेक्टर रवि साहू ने मुख्य भूमिका निभाई। खाद्य अधिकारी अजय यादव, जिला सहकारी बैंक के प्रबंध संचालक, नोडल अधिकारी अविनाश शर्मा, उप पंजीयक द्वारिका नाथ, सहकारी संघ के महाप्रबंधक समेत सभी संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।
बैठक में प्रशासन ने कर्मचारियों को आश्वासन दिया कि उनकी मांगों को गंभीरता से लेकर शासन तक पहुंचाया जाएगा और हड़ताल वापसी के बाद कोई प्रतिशोधात्मक कार्रवाई नहीं होगी। इसके बाद संघ ने हड़ताल समाप्ति का पत्र सौंप दिया।

आज सुबह से क्या होगा..?

सभी 108 धान उपार्जन केंद्र पूरी तरह चालू हो जाएंगे
टोकन कटिंग, बारदाना वितरण, तुलाई, भुगतान सब शुरू
पहले से रजिस्टर्ड किसानों का धान तुरंत खरीदा जाएगा
नए किसानों के लिए भी स्पॉट रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था रहेगी
गोदामों में रखे पुराने धान की भी तुरंत निकासी होगी

कलेक्टर ने की अपील

अपर कलेक्टर रवि साहू ने सभी कर्मचारियों को धन्यवाद देते हुए कहा, “यह किसानों के हित में लिया गया सराहनीय कदम है। प्रशासन हर स्तर पर सहयोग करेगा। किसान भाइयों से अनुरोध है कि शांति और धैर्य बनाए रखें, अब कोई दिक्कत नहीं आएगी।”
इसके साथ ही महासमुंद जिले में रबी सीजन की सबसे बड़ी धान खरीदी अब बिना किसी रुकावट के पूरी रफ्तार पकड़ने को तैयार है। किसानों के चेहरों पर राहत और कर्मचारियों के मन में संतोष

बस बहुत हुआ अपमान..! 7000 समिति योद्धाओं ने फेंका इस्तीफा, कल से ‘जेल भरो’ आंदोलन – छत्तीसगढ़ सरकार की उल्टी गिनती शुरू…!

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क्या जिला प्रशासन राजस्व विभाग और पंचायत सचिवों की बदौलत समर्थन मूल्य में धान की खरीदी करेगी या कुछ और नया माजरा नजर आने वाला है, और कितने कर्मचारियों के ऊपर प्रशासन की गाज गिरेगी..?

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
रायपुर / महासमुंद स्थानीय लोहिया चौक में विगत 03 नवम्बर 2025 से आज 17 नवंबर 2025 को समितियों के कर्मचारियों का सामूहिक इस्तीफा के बाद कल जेल भरो आंदोलन के साथ उग्र कर्मचारियों की व्यथा कथा एवं आप बीती की अजीबों गरीब दास्तान बता दे कि, छत्तीसगढ़ में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान खरीदी शुरू होने में महज कुछ ही दिन बचे हैं, लेकिन पूरा सिस्टम ठप होने की कगार पर पहुँच गया है। प्रदेश की 2058 प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों (PACS) के हजारों नियमित, संविदा और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों ने सोमवार को सामूहिक इस्तीफा दे दिया। यह इस्तीफा सीधे राज्यपाल, मुख्यमंत्री और संभागीय आयुक्त को भेजा गया है।
कर्मचारी संगठनों का साफ कहना है – “जब तक दमन बंद नहीं होता, ESMA हटाया नहीं जाता, बकाया वेतन नहीं दिया जाता और हमारी सभी माँगें पूरी नहीं होतीं, तब तक हम धान खरीदी के किसी भी काम में हिस्सा नहीं लेंगे।”

इस्तीफे की मुख्य वजहें

कई-कई महीनों से वेतन बकाया, घर चलाना मुश्किल
अवैध तरीके से लगाया गया ESMA (Essential Services Maintenance Act)
बिना वजह थाना, FIR और कोर्ट-कचहरी के चक्कर
मनमाने ढंग से सेवा मुक्ति के आदेश
कंप्यूटर ऑपरेटरों को सिर्फ 6 महीने का वेतन, जबकि साल भर काम
धान में नमी आने पर कमीशन कटौती, जबकि समय पर उठाव सरकार/मार्केटिंग फेडरेशन की जिम्मेदी है।

कर्मचारियों का दिल दहला देने वाला बयान

संयुक्त कर्मचारी संगठन के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा –
“हम अपराधी नहीं हैं कि हम पर ESMA थोपा जाए। हम सिर्फ अपना हक माँग रहे हैं, बदले में मिल रहा है जुल्म, अपमान और FIR। अब बहुत हुआ। हमने सम्मान के साथ इस्तीफा दे दिया है। अब छत्तीसगढ़ सरकार खुद आकर धान तौलें, टोकन काटें, डेटा अपलोड करें और किसानों को भुगतान करें।”

धान खरीदी पूरी तरह ठप होने का खतरा

किसान पंजीयन, टोकन वितरण, बारदाना वितरण, तौलाई, भंडारण, डेटा अपलोड, भुगतान – सब कुछ इन्हीं समिति कर्मचारियों के हाथ में होता है।
एक भी कर्मचारी काम पर नहीं आएगा तो हजारों केंद्रों पर ताला लटक जाएगा।
लाखों किसान सड़कों पर उतरने को मजबूर हो जाएँगे।

सरकार के सामने चार बड़े सवाल

क्या मुख्यमंत्री कार्यालय खुद 2058 समितियों में धान खरीदी चलाएगा?
क्या 10-15 दिन में नया स्टाफ तैयार हो जाएगा?
क्या बिना प्रशिक्षण के कोई नया व्यक्ति 48 घंटे में पूरा पोर्टल, सॉफ्टवेयर और प्रक्रिया सीख लेगा?
क्या इस बार भी किसानों का गुस्सा सड़कों पर दिखेगा..?

आंदोलन अब सिर्फ वेतन का नहीं, सम्मान का संघर्ष बन चुका है।

कर्मचारियों ने साफ कर दिया है – “अब पीछे हटना नामुमकिन है। हमने इस्तीफा दे दिया, अब सरकार चाहे तो स्वीकार कर ले या हमारी माँगें मान ले। जब तक न्याय नहीं मिलेगा, धान खरीदी के मैदान में हम नहीं उतरेंगे।”
छत्तीसगढ़ की जनता और किसान हैरान-परेशान हैं। हर तरफ एक ही सवाल –
“अगर समिति कर्मचारी ही नहीं रहेंगे तो धान खरीदी कौन करेगा?”
अब गेंद पूरी तरह सरकार के पाले में है।
या तो तुरंत वार्ता करके सभी माँगें मानी जाएँ और ESMA हटाया जाए,
या फिर प्रदेश सबसे बड़े प्रशासनिक और कृषि संकट की ओर बढ़ता दिख रहा है।
आने वाले 48-72 घंटे तय करेंगे कि इस बार किसान का धान गोदाम में पहुँचेगा या सड़क पर आंदोलन में..!

ब्रेकिंग: फर्जी DSP का धांसू ठगी कांड फेल! 72 लाख ठगकर आदिवासी महिला को लगाया चूना

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छत्तीसगढ़ पुलिस ने असली हीरो बनकर पकड़ा जाल – 22 लाख फॉलोअर्स वाला फेक अकाउंट ध्वस्त!

बलरामपुर-ग्वालियर सनसनी: ठेकेदार बना DSP, असली अफसर की फोटो से रचा 72 लाख का ‘ऑपरेशन ठग’! पुलिस का ड्रामाई एनकाउंटर, अब ठग की शामत!

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
बलरामपुर (छत्तीसगढ़)। सुपर शातिर ठग का सुपर फ्लॉप शो! छत्तीसगढ़ पुलिस ने एक ऐसे फर्जी DSP को धर दबोचा, जिसने मध्य प्रदेश के असली DSP संतोष पटेल की फोटो चुराकर सोशल मीडिया पर 2.2 मिलियन (22 लाख) फॉलोअर्स का साम्राज्य खड़ा किया और आदिवासी महिला से नौकरी के नाम पर 72 लाख रुपये लूट लिए! लेकिन पुलिस का दिमागी दांव और असली DSP का सहयोग देखकर ठग के होश उड़ गए। अब ठेकेदार से DSP बना ठग सलाखों के पीछे जाने को बेताब!

कैसे रचा गया 72 लाख का ‘DSP ड्रामा’..?

शिकार: बलरामपुर की आदिवासी महिला।
लालच: “मैं MP पुलिस का DSP हूँ, सरकारी नौकरी दिलाऊंगा!”
हथियार: असली DSP संतोष पटेल की वर्दी वाली फोटो, फर्जी प्रोफाइल, 22 लाख फॉलोअर्स वाला इंस्टाग्राम अकाउंट।
टोटका: रिश्वत, फाइल चार्ज, ट्रांसफर फीस के नाम पर कई किश्तों में 72 लाख उड़ाए!
महिला ने जैसे ही FIR ठोकी, कुसमी थाना की टीम ने ‘ऑपरेशन फेक DSP’ लॉन्च कर दिया।

पुलिस का मास्टरस्ट्रोक: ग्वालियर से बालाघाट तक हाई-वोल्टेज चेज..!

लोकेशन ट्रेस: फर्जी DSP का IP ग्वालियर दिखा।
असली DSP को फोन: संतोष पटेल (अब बालाघाट हॉक फोर्स में असिस्टेंट कमांडेंट) को खबर – “आपको छत्तीसगढ़ पुलिस ढूंढ रही है!”
ड्रामाई मुलाकात: संतोष पटेल ने SI को बालाघाट बुलाया। आमने-सामने हुआ शॉकिंग खुलासा –
“ये मेरी फोटो है, लेकिन ठग ठेकेदार है!”

ठग की असली पहचान DSP नहीं, ठेकेदार..!

नाम: अभी गोपनीय (गिरफ्तारी में देरी न हो)
प्रोफेशन: ठेकेदारी, अब ठगी का ठेका!
हथकंडा: असली DSP की पुरानी ग्वालियर पोस्टिंग की फोटो चुराई, फर्जी प्रोफाइल बनाया, लाखों फॉलोअर्स खरीदे या फर्जी तरीके से बढ़ाए।
शिकार लिस्ट: सिर्फ एक महिला नहीं, कई और लोग भी जाल में!

पुलिस का धमाकेदार ऐक्शन प्लान

स्टेप
ऐक्शन
1
ठग का अकाउंट फ्रीज, IP ट्रेस
2
ठेकेदार की लोकेशन लॉक, छापेमारी टीम रवाना
3
72 लाख की रिकवरी के लिए बैंक ट्रांजेक्शन चेक
4
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को नोटिस – फर्जी अकाउंट डिलीट
बलरामपुर SP का ऐलान: “24 घंटे में ठग गिरफ्तार, 72 लाख वापस! सोशल मीडिया ठगों की अब खैर नहीं!”

असली DSP संतोष पटेल का गुस्सा

“मेरी वर्दी और नाम का दुरुपयोग? अब ठग को असली सलाखें दिखेंगी!”

संदेश ठगों को सबक, जनता को अलर्ट..!

नौकरी के नाम पर पैसे? ❌ थाने में शिकायत!
DSP की फोटो, लाखों फॉलोअर्स? ❌ वीडियो कॉल मांगो, ID चेक करो!
सोशल मीडिया = ठगों का अड्डा? ✅ पुलिस अब AI से ट्रैक कर रही!
अगला अपडेट: ठग की गिरफ्तारी का LIVE ड्रामा – 72 लाख की रिकवरी कब?

धान खरीदी में लापरवाही बर्दाश्त नहीं: कलेक्टर विनय कुमार लंगेह की सख्त चेतावनी

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134 प्रभारी प्रबंधकों और 126 ऑपरेटरों को अंतिम नोटिस

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुंद / 16 नवंबर 2025, जिला मुख्यालय
धान खरीदी के पहले दिन ही जिले में बड़ी संख्या में प्रभारी प्रबंधक और कंप्यूटर ऑपरेटरों की अनुपस्थिति सामने आने पर कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने कड़ा रुख अपनाते हुए तत्काल कार्रवाई की। जिले के कुल 182 उपार्जन केंद्रों में से मात्र 48 प्रभारी प्रबंधक और 56 डाटा एंट्री ऑपरेटर ही ड्यूटी पर उपस्थित पाए गए। शेष 134 प्रभारी प्रबंधकों और 126 ऑपरेटरों को कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने व्यक्तिगत रूप से हस्ताक्षरित अंतिम चेतावनी पत्र जारी करते हुए तत्काल ड्यूटी जॉइन करने के सख्त निर्देश दिए।
कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि निर्धारित समय में उपस्थिति नहीं हुई तो नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित कर्मचारी की होगी। उन्होंने कहा, “धान खरीदी किसानों के हित का मामला है। इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनुपस्थिति बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”

ESMA लागू: कार्य से इंकार पर होगी कानूनी कार्रवाई

राज्य शासन के निर्देशानुसार 15 नवंबर 2025 से 31 जनवरी 2026 तक खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के लिए धान खरीदी अवधि में छत्तीसगढ़ अत्यावश्यक सेवा संधारण तथा विच्छिन्नता निवारण अधिनियम (ESMA) को पूरे जिले में तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।
कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने इस अधिनियम के तहत सभी धान खरीदी केंद्रों में तैनात अधिकारियों-कर्मचारियों को अत्यावश्यक सेवा में कार्य करने से इंकार करने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। उन्होंने सभी अनुविभागीय अधिकारियों (SDMs) को ESMA का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के लिखित निर्देश जारी किए हैं।
“ESMA के प्रावधानों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ तुरंत कानूनी कार्रवाई होगी। कोई छूट नहीं दी जाएगी।”
— कलेक्टर विनय कुमार लंगेह

पहले दिन की स्थिति: केवल 26% प्रभारी और 31% ऑपरेटर मौजूद

कुल केंद्र: 182
उपस्थित प्रभारी प्रबंधक: 48 (केवल 26%)
उपस्थित ऑपरेटर: 56 (केवल 31%)
अनुपस्थित प्रभारी: 134
अनुपस्थित ऑपरेटर: 126
कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने सभी केंद्रों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग के लिए विशेष टीम गठित की है। साथ ही, अनुपस्थित कर्मचारियों के विरुद्ध कारण बताओ नोटिस जारी करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

किसानों से अपील: धैर्य रखें, व्यवस्था दुरुस्त की जा रही

कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने किसानों से अपील की है कि पहले दिन कुछ असुविधाएं हो सकती हैं, लेकिन 24 घंटे के भीतर सभी केंद्र पूरी तरह सक्रिय कर दिए जाएंगे। उन्होंने आश्वासन दिया कि समर्थन मूल्य पर धान खरीदी सुचारु रूप से चलेगी और किसी भी किसान को परेशानी नहीं होने दी जाएगी।
यह कार्रवाई जिले में धान खरीदी व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने की दिशा में कलेक्टर विनय कुमार लंगेह की सख्त प्रशासकीय इच्छाशक्ति का प्रमाण है।

धान खरीदी 2025 महासमुंद में 182 में से 18 केंद्रों पर टोकन फेल! कल से शुरू, पर किसान लाइन में लटके – प्रशासन है ब्रो..!

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रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुंद | 16 नवंबर 2025 धान खरीदी महोत्सव
शुभारंभ तो हुआ, लेकिन टोकन नहीं कटा – किसान बोले: “प्रशासन है ब्रो, पर सिस्टम कहाँ है..?”
छत्तीसगढ़ में धान खरीदी का महाउत्सव कल (15 नवंबर) से शुरू हुआ। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पूरे राज्य को संबोधित किया। महासमुंद जिले में 182 उपार्जन केंद्रों पर ताले खुले, पूजा हुई, रिबन कटा – लेकिन 18 केंद्रों पर टोकन ही नहीं कटा..!

किसान सुबह 6 बजे से लाइन में, पर ‘तुहर टोकन’ ऐप क्रैश, सर्वर डाउन, कर्मचारी गायब – और जवाब मिला: “प्रशासन है ब्रो..!”

महासमुंद ग्राउंड जीरो रिपोर्ट – कहाँ हुई खरीदी, कहाँ फेल..?

क्षेत्र
केंद्र संख्या
खरीदी शुरू?
टोकन स्टेटस
मुख्य समस्या
झालखमहरिया
1
✅ हाँ (पहला धान खरीदा)
✅ 120 टोकन कटे
कोई दिक्कत नहीं
महासमुंद शहर
12
✅ 10 में शुरू
⚠️ 2 में देरी
सर्वर स्लो
सरायपाली
28
❌ 8 में पूरी तरह बंद
❌ टोकन नहीं
कर्मचारी हड़ताल
बसना
35
✅ 30 में शुरू
❌ 5 में टोकन फेल
ऐप क्रैश
पिथौरा
22
✅ 20 में शुरू
❌ 3 में टोकन नहीं
बिजली/नेटवर्क
बागबाहरा
84
✅ 79 में शुरू
❌ 2 में टोकन रुका
स्टाफ कम
कुल: 182 में से 164 केंद्रों पर खरीदी शुरू
18 केंद्रों पर टोकन कटाई पूरी तरह ठप
95% केंद्र चालू, 5% फेल – लेकिन 5% का मतलब 12,000+ किसान प्रभावित!

किसान की जुबानी: “लाइन में खड़े-खड़े धूप में पसीना, टोकन नहीं – प्रशासन है ब्रो?”

दुर्गेश साहू (झालखमहरिया):
“मैं पहला किसान था जिसका धान खरीदा गया। 40 क्विंटल, ₹3,200/क्विंटल। टोकन सुबह 7 बजे कटा। लेकिन मेरे पड़ोस के गांव बागबाहरा में भाई लोग 11 बजे तक लाइन में थे, टोकन नहीं मिला।”
रामेश्वर साहू (सरायपाली):
“समिति बंद थी। ताला लगा था। बोर्ड पर लिखा – ‘कर्मचारी हड़ताल के कारण बंद’। हम 15 किमी दूर से धान लेकर आए। अब क्या करें? प्रशासन है ब्रो, पर यहाँ कोई नहीं!”

प्रशासन का जवाब: “हड़ताल का असर, लेकिन 24 घंटे में ठीक करेंगे”

कलेक्टर विनय लंगेह ने रात 10 बजे मीटिंग की:
“18 केंद्रों की लिस्ट बनाई गई। आज सुबह 6 बजे तक वैकल्पिक स्टाफ (वन विभाग, राजस्व, शिक्षा) तैनात। मोबाइल टोकन वैन 10 गांवों में भेजी गई।”
SDM बसना ने कहा:
“सर्वर लोड की वजह से ऐप हैंग हुआ। ऑफलाइन टोकन मॉड्यूल एक्टिवेट कर दिया। अब SMS से भी टोकन मिलेगा।”
हेल्पलाइन 0771-2222200 पर 300+ कॉल्स पहले 6 घंटे में।

क्या है नया सिस्टम? (जो फेल हो रहा है!)

फीचर
क्या था प्लान
क्या हो रहा ग्राउंड पर
तुहर टोकन ऐप
ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन + स्लॉट
⚠️ क्रैश, OTP नहीं आ रहा
च्वाइस सेंटर
किसान चुनें केंद्र
❌ लाइन में धक्का-मुक्की
ऑफलाइन बैकअप
पंचायत में मैनुअल
✅ अब शुरू, लेकिन देर से
SMS टोकन
वैकल्पिक

आज से चालू
आज (16 नवंबर) का प्लान प्रशासन की कवायद

समय
कार्रवाई
सुबह 5:00 बजे
18 फेल केंद्रों पर वैकल्पिक स्टाफ पहुँचेगा
सुबह 6:00 बजे
10 मोबाइल वैन गाँव-गाँव टोकन काटेंगी
सुबह 8:00 बजे
कलेक्टर फील्ड विजिट – सरायपाली, बसना
दोपहर 12:00 बजे
SMS से 50,000 किसानों को टोकन भेजा जाएगा

किसान भाइयों के लिए तुरंत टिप्स (ब्रो स्टाइल! )

ऐप मत खोलो अभी – सर्वर डाउन है।
ग्राम पंचायत जाओ – ऑफलाइन टोकन मिल रहा।
SMS चेक करो – 56767 पर DHAN<स्पेस>आधार नंबर भेजो।
हेल्पलाइन: 0771-2222200 (24×7)
अगर धान तैयार है – आज ही समिति पहुँचो, पहले आओ पहले पाओ!

आखिरी लाइन: प्रशासन है ब्रो, लेकिन सिस्टम को अपडेट चाहिए!

धान खरीदी 2025 का पहला दिन: 50% उत्साह, 30% सफलता, 20% अफरा-तफरी।
लेकिन आज शाम तक 100% केंद्र चालू करने का वादा है।

**कलेक्टर साहब फील्ड में, CM मॉनिटरिंग कर रहे – अब देखना ये कि “प्रशासन है ब्रो” का मतलब काम बने या सिर्फ डायलॉग!
अपडेट के लिए जुड़े रहें – हम ग्राउंड से लाइव रिपोर्टिंग कर रहे हैं!
अगला बुलेटिन: शाम 6 बजे – “टोकन मिला या नहीं?”
जय जोहार! जय किसान!

जनजातीय गौरव दिवस केशव चंद्राकर ने सैकड़ों को दिलाई ‘नायकों के आदर्शों से समाज-सेवा’ की शपथ

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बागबाहरा में ऐतिहासिक समारोह

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
बागबाहरा (महासमुंद), 15 नवंबर 2025: धरतीपुत्र भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर मनाए जा रहे जनजातीय गौरव दिवस को जनपद पंचायत बागबाहरा ने एक ऐतिहासिक और प्रेरणादायी आयोजन में बदल दिया। सैकड़ों की संख्या में एकत्रित आदिवासी भाई-बहन, जनप्रतिनिधि, अधिकारी और ग्रामीणों के बीच मुख्य अतिथि जनपद अध्यक्ष केशव चंद्राकर ने न केवल वीर नारायण सिंह और वीर गुंडाधुर को सलाम किया, बल्कि सभी को उनके आदर्शों पर चलते हुए समाज-सेवा की शपथ दिलाई।
यह आयोजन सिर्फ एक औपचारिकता नहीं, बल्कि आदिवासी अस्मिता, संघर्ष और विकास की नई गाथा का साक्षी बना।

सुबह से शुरू हुआ उत्साह, शाम तक गूंजती रहीं जयकारें

सुबह 10 बजे से ही जनपद परिसर में पारंपरिक ढोल-मांदर की थाप और बिरसा मुंडा, वीर नारायण सिंह व गुंडाधुर के नारे गूंजने लगे। कार्यक्रम स्थल को आदिवासी संस्कृति की झलक से सजाया गया था। मंच के ठीक सामने तीनों नायकों की विशाल प्रतिमाएं स्थापित की गईं, जिनके सामने पुष्पांजलि और दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ।

मुख्य अतिथि केशव चंद्राकर का धमाकेदार आगमन

जैसे ही जनपद अध्यक्ष केशव चंद्राकर का काफिला परिसर में दाखिल हुआ, पूरा सभागार तालियों और नारों से गूंज उठा। केशव चंद्राकर ने सबसे पहले बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और दो मिनट का मौन रखकर तीनों नायकों को श्रद्धांजलि दी।

नायकों की गाथा सीईओ ने सुनाई अनसुनी कहानियां

जनपद सीईओ एम.एल. मंडावी और एडिशनल सीईओ जी.आर. बरिहा ने मंच पर आकर पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन के जरिए नायकों की कहानियां सुनाईं:
कैसे बिरसा मुंडा ने ब्रिटिश नीतियों के खिलाफ विद्रोह का बिगुल फूंका।
कैसे वीर नारायण सिंह ने 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में छत्तीसगढ़ का नेतृत्व किया।
कैसे गुंडाधुर ने 1910 में बस्तर विद्रोह की कमान संभाली।

क्लाइमेक्स: केशव चंद्राकर ने दिलाई ऐतिहासिक शपथ

मुख्य अतिथि केशव चंद्राकर ने मंच पर आते ही तीनों नायकों को “राष्ट्रनायक” घोषित किया। फिर दाहिना हाथ उठाकर पूरे सभागार को यह शपथ दिलाई:
“मैं शपथ लेता हूं कि बिरसा, नारायण और गुंडाधुर के आदर्शों को जीवन में उतारूंगा।
समाज में भाईचारा बढ़ाऊंगा।
जनहित के हर कार्य में हिस्सा लूंगा।
आदिवासी संस्कृति को संरक्षित करूंगा।”
सैकड़ों लोगों ने एक स्वर में शपथ दोहराई – यह दृश्य ऐतिहासिक था।

सम्मान समारोह आदि कर्मयोगी सम्मानित

आयोजन का सबसे हृदयस्पर्शी हिस्सा रहा सम्मान समारोह। मुख्य अतिथि केशव चंद्राकर ने स्वयं महिला कर्मियों को शॉल, श्रीफल और प्रशस्ति पत्र भेंट किए।
आदि कर्मयोगी अभियान में उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित होने वालों में शामिल रहीं:
मीना चंद्राकर
भावना गुप्ता
रमा अग्रवाल
जामिनी बरिहा
सरोजिनी आदित्य
नूतन ध्रुव
हीरा ध्रुव
चित्रा शर्मा
मनिका ठाकुर
शकुंतला चौहान
तुलेश्वरी खूंटे
सीमा नायक
रूपा पारेशर
केशव चंद्राकर ने कहा, “ये महिलाएं ही असली बिरसा मुंडा हैं – समाज के लिए लड़ रही हैं।”

महिला अधिकारी मीना चंद्राकर का संदेश

मीना चंद्राकर ने कहा:
“जनजातीय गौरव दिवस संस्कृति का उत्सव है। हमें अपनी परंपरा को अगली पीढ़ी तक पहुंचाना है।”

संचालन में कमाल ऐकाल देव निषाद की तारीफ

ऐकाल देव निषाद ने हिंदी और छत्तीसगढ़ी में संचालन कर सबका दिल जीत लिया। उनकी कविता पंक्तियां – “बिरसा की हुंकार, नारायण का बलिदान, गुंडाधुर का पराक्रम – यही हमारा सम्मान” – ने बार-बार तालियां बटोरीं।

समापन: ढोल की थाप पर नाच और जोहार

कार्यक्रम का समापन आदिवासी नृत्य और “जय बिरसा, जय जोहार” के नारों के साथ हुआ।
केशव चंद्राकर ने घोषणा की:
“अगले साल जनजातीय गौरव दिवस को और भव्य बनाएंगे। हर पंचायत में बिरसा मुंडा की प्रतिमा लगेगी।”

यह आयोजन बागबाहरा के लिए एक नई शुरुआत था – जहां इतिहास ने वर्तमान को दिशा दी और भविष्य को प्रेरणा।

बागबाहरा में बच्चों की सुरक्षा पर जनपद अध्यक्ष केशव नायक का सख्त तेवर

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7 दिन में जर्जर आंगनबाड़ी भवनों की रिपोर्ट, नहीं चलेगी लापरवाही..!

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
बागबाहरा (महासमुंद)। “बच्चों की जान से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं होगा!” – यह साफ संदेश देते हुए जनपद पंचायत अध्यक्ष केशव नायक राम चंद्राकर ने आज आंगनबाड़ी केंद्रों की बदहाल अधोसंरचना पर ऐतिहासिक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। 381 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और 13 सेक्टर पर्यवेक्षकों की मौजूदगी में अध्यक्ष नायक ने हर केंद्र की भवन स्थिति, शौचालय, पेयजल और सुरक्षा व्यवस्था पर खुद एक-एक बिंदु पर सवाल उठाए और अधिकारियों को 7 दिन की सख्त डेडलाइन दी।

अध्यक्ष नायक का साफ आदेश: “सुरक्षा पहले, बाकी बाद में!”

बैठक की शुरुआत में ही जनपद अध्यक्ष केशव नायक ने सभी पर्यवेक्षकों को खरी-खोटी सुनाते हुए कहा –
“आंगनबाड़ी भवन अगर जर्जर है, तो बच्चे वहां क्यों पढ़ रहे? यह आपकी जिम्मेदारी है कि हर बच्चा सुरक्षित हो। 7 दिन में पूरी रिपोर्ट मेरे टेबल पर होनी चाहिए।”
उन्होंने अभियंताओं को तुरंत मैदानी निरीक्षण के आदेश दिए और कहा कि संयुक्त टीम (अभियंता + पर्यवेक्षक + सरपंच + सचिव) हर केंद्र का वास्तविक स्टीमेट तैयार करेगी।
“रिपोर्ट में झूठ या औपचारिकता मिली, तो सीधे कार्रवाई होगी।” – केशव नायक

खतरनाक भवनों के लिए तत्काल वैकल्पिक इंतजाम

अध्यक्ष नायक ने साफ कहा –
“जहां भवन जानलेवा है, वहां पढ़ाई तुरंत रोको। स्कूल, पंचायत भवन या किराए का मकान – कोई भी सुरक्षित जगह चुनो। बजट की कमी आड़े नहीं आएगी।”
उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि सुरक्षा से समझौता करने वाले किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा।

शिक्षा और पोषण में गुणवत्ता का नया मानक

जनपद अध्यक्ष केशव नायक ने आंगनबाड़ी को “केवल राशन की दुकान” नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य की पहली सीढ़ी बताया। उनके नेतृत्व में यह तय हुआ कि:
हर केंद्र में खेल सामग्री और शिक्षण किट अनिवार्य।
साफ-सफाई और शौचालय-पेयजल की कमी तुरंत दूर हो।
पोषण पुनर्वास (एनआरसी) की गुणवत्ता में कोई कोताही नहीं।

अध्यक्ष नायक के साथ पूरी टीम मैदान में

बैठक में मुख्य कार्यपालन अधिकारी एमएल मंडावी, सभापति मधुलिका चंद्राकर, मनरेगा प्रभारी खूबचंद वर्मा, एडिशनल सीईओ जीआर बारिहा और कई सरपंच मौजूद रहे।
उल्लेखनीय सरपंच:
एडिशन ठाकुर
पद्मिनी बांधे
जितेंद्र साहू
सुशीला लाखाराम साहू
पर्यवेक्षक: भावना गुप्ता, जमीनी बारिहा, सरोजनी आदित्य, चित्रा शर्मा आदि।

बागबाहरा के बच्चों का भविष्य अब सुरक्षित हाथों में

जनपद अध्यक्ष केशव नायक राम चंद्राकर के इस सख्त और संवेदनशील नेतृत्व से बागबाहरा के 381 आंगनबाड़ी केंद्रों में नया बदलाव आने वाला है। अगले 7 दिन में जर्जर भवनों की सूची, मरम्मत प्लान और वैकल्पिक व्यवस्था की पूरी कार्ययोजना तैयार हो जाएगी।

मेरा संकल्प है – हर बच्चा सुरक्षित, स्वस्थ और शिक्षित हो।”

– केशव नायक राम चंद्राकर, जनपद अध्यक्ष

धान तस्करी पर प्रशासन का जोरदार प्रहार 557 बोरी अवैध धान जब्त, सख्त कार्रवाई जारी..!

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रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुंद / 14 नवम्बर 2025
कलेक्टर विनय लंगेह के सख्त निर्देशों पर जिले में अवैध धान परिवहन, भंडारण और तस्करी के खिलाफ बड़ा अभियान चलाया गया। संयुक्त टीमों ने विभिन्न स्थानों पर छापेमारी कर कुल 557 कट्टे/बोरी अवैध धान जब्त किया। यह कार्रवाई समर्थन मूल्य पर धान खरीदी शुरू होने से पहले अवैध गतिविधियों पर लगाम कसने के उद्देश्य से की गई है। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि ऐसी गैरकानूनी हरकतों पर कड़ी नजर रखी जा रही है और अभियान आगे भी बिना रुके जारी रहेगा।

प्रमुख जब्ती स्थलों का विस्तृत ब्योरा

ग्राम कोमाखान: एक स्थानीय किराना दुकान से 100 कट्टे अवैध धान बरामद किए गए। दुकान मालिक पर अवैध भंडारण का आरोप लगा।
ग्राम टेमरी (तहसील कोमाखान): यहां से भी 100 कट्टे अवैध धान जब्त हुए। टीम ने मौके पर ही धान को सील कर दिया।
नर्रा चेकपोस्ट: परिवहन के दौरान पकड़े गए वाहन से 40 कट्टे अवैध धान जप्त किए गए। चेकपोस्ट पर सघन जांच से यह सफलता मिली।
ग्राम गनेकेरा: किसानों और व्यापारियों के संदिग्ध गोदामों से 105 पॉकेट अवैध धान बरामद हुए।
ग्राम मोहन्दा (तहसील सराईपाली): फुटकर व्यापारी के गोदाम से सबसे बड़ी खेप जब्त की गई – पूरे 212 बोरी अवैध धान। यह कार्रवाई स्थानीय स्तर पर तस्करी नेटवर्क को झटका देने वाली साबित हुई।
कुल मिलाकर 557 कट्टे/बोरी अवैध धान को जब्त कर संबंधित थानों में सुपुर्द कर दिया गया। सभी मामलों में छत्तीसगढ़ कृषि उपज मंडी अधिनियम के प्रावधानों के तहत प्राथमिकी दर्ज की जा रही है और आगे की कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
प्रशासन के प्रवक्ता ने बताया कि समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की प्रक्रिया शुरू होने से पहले अवैध क्रय-विक्रय, परिवहन और भंडारण को पूरी तरह रोका जाएगा। जिले भर में चेकपोस्टों पर चौबीसों घंटे निगरानी, गश्ती दल और खुफिया सूचनाओं के आधार पर छापेमारी जारी रहेगी। किसानों से अपील की गई है कि वे केवल अधिकृत चैनलों से ही धान बेचें, अन्यथा सख्त दंड का सामना करना पड़ेगा।
यह अभियान जिले में धान तस्करी के खिलाफ प्रशासन की जीरो टॉलरेंस नीति का प्रमाण है। आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे होने की संभावना है।

नशे के सौदागरों पर महासमुंद पुलिस का कहर 60 किलो गांजा, 22 लाख का ट्रक-माल बरामद

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ओडिशा-यूपी ड्रग रूट पर महासमुंद पुलिस की धमाकेदार पकड़..!

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुंद / ऐंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स और बसना पुलिस ने मिलकर नशे के सौदागरों को करारा झटका दिया है। ओडिशा से उत्तर प्रदेश ले जाई जा रही 60 किलोग्राम गांजे की विशाल खेप को बीच रास्ते में पकड़ लिया गया। आयशर ट्रक में छिपाकर ले जाए जा रहे इस माल की कीमत 12 लाख रुपये है, जबकि ट्रक और मोबाइल समेत कुल 22 लाख 10 हजार रुपये की संपत्ति जब्त की गई। दोनों आरोपी – सद्दाम हुसैन (34) और कियामुद्दीन (26) – उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के कुख्यात तस्कर निकले, जो लंबे समय से इस रूट पर सक्रिय थे।

मुखबिर की गुप्त सूचना से चला ऑपरेशन, जिले की सीमाओं पर कसा घेरा

10 नवंबर 2025 को थाना बसना को खुफिया सूचना मिली कि ओडिशा से गांजे का बड़ा जखीरा आयशर ट्रक (UP 72 BT 3907) में लोड होकर पदमपुर → बसना → महासमुंद → उत्तर प्रदेश के रास्ते जा रहा है। तुरंत ऐक्शन में आई पुलिस ने जिले के सभी एंट्री पॉइंट्स पर नाकाबंदी कर दी।
पलसापाली बैरियर पर जैसे ही यह ट्रक दिखा, ऐंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स और बसना पुलिस की संयुक्त टीम ने बिजली की तेजी से घेराबंदी की और वाहन को रोक लिया।

ट्रक की तलाशी में खुला राज – तालपत्री के नीचे छिपे थे 3 बोरे गांजा

वाहन में सवार दोनों व्यक्तियों ने पूछताछ में अपना नाम बताया:
सद्दाम हुसैन, पिता रिजवान हुसैन, उम्र 34 वर्ष, पंडरीजबर, थाना कंधई, प्रतापगढ़ (उ.प्र.)
कियामुद्दीन, पिता कमरूद्दीन, उम्र 26 वर्ष, ताला, थाना कंधई, प्रतापगढ़ (उ.प्र.) ट्रक की गहन तलाशी में तालपत्री के नीचे छिपे 3 बोरे बरामद हुए।

इन्हें खोलते ही 60 किलोग्राम उच्च गुणवत्ता वाला गांजा बाहर आया। मौके पर ही तौल और पैकेजिंग की जांच की गई।

जब्ती का पूरा ब्यौरा – 22 लाख से ज्यादा का माल पुलिस के हत्थे

वस्तु – मात्रा/विवरण – अनुमानित कीमत
अवैध गांजा – 60 किलोग्राम – ₹12,00,000

आयशर ट्रक – UP 72 BT 3907 – ₹10,00,000
मोबाइल फोन – 2 नग – ₹10,000
कुल जब्ती

₹22,10,000

आरोपी बेनकाब: ओडिशा से सस्ते में खरीद, यूपी में मोटा मुनाफा

पूछताछ में दोनों ने कबूल किया –
“हम ओडिशा के जंगलों से गांजा सस्ते में खरीदते हैं और उत्तर प्रदेश में दोगुनी-तिगुनी कीमत पर बेचते हैं। यह खेप प्रतापगढ़ और आसपास के इलाकों में सप्लाई होनी थी।”
पुलिस को शक है कि यह सिर्फ एक खेप नहीं, बल्कि एक अंतरराज्यीय ड्रग रैकेट का हिस्सा है।

कानूनी शिकंजा: NDPS एक्ट के तहत FIR, आरोपी जेल में

दोनों के खिलाफ थाना बसना में धारा 20(ख) NDPS एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज। सभी सबूतों के साथ न्यायालय में पेशी के बाद न्यायिक रिमांड पर जेल भेजा गया।

पुलिस की तारीफ, आगे की जांच में खुलेगा पूरा नेटवर्क

यह सनसनीखेज कार्रवाई ऐंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स और महासमुंद पुलिस की संयुक्त टीम की बहादुरी का नतीजा है। एसपी ने टीम को तत्काल बधाई दी है।
अब जांच का दायरा बढ़ाया जा रहा है:
ओडिशा में गांजा उत्पादन के सोर्स पॉइंट तक पहुंच
यूपी में डिलीवरी और बिक्री नेटवर्क की पहचान
फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन और बैंक खातों की छानबीन

पुलिस का संदेश साफ है – “नशे का कारोबार करने वालों की अब खैर नहीं!”

महासमुंद जिले में मतदाता सूची पुनरीक्षण अभियान ने पकड़ी रफ्तार

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मतगणना पुनरीक्षण क्यों जरूरी? सटीक सूची से मजबूत लोकतंत्र

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुंद / 11 नवम्बर 2025 भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश पर महासमुंद जिले में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के बीच एक सवाल बार-बार उठ रहा है – मतदाता सूची की मतगणना पुनरीक्षण आखिर क्यों जरूरी है?

मतगणना पुनरीक्षण का मतलब और महत्व

मतगणना पुनरीक्षण का अर्थ है मतदाता सूची को पूरी तरह जांचना, शुद्ध करना और अद्यतन करना। इसमें मृत मतदाताओं के नाम हटाना, स्थानांतरित हुए व्यक्तियों को नई जगह पर जोड़ना, 18 वर्ष पूरे कर चुके नए मतदाताओं को शामिल करना और दोहरे/गलत प्रविष्टियों को सुधारना शामिल है।

यह क्यों जरूरी है..?

सटीक प्रतिनिधित्व: अगर सूची में मृत या अनुपस्थित व्यक्ति के नाम रहें, तो वास्तविक मतदाताओं का प्रतिनिधित्व कम हो जाता है।
निष्पक्ष चुनाव: गलत सूची से बोगस वोटिंग की आशंका बढ़ती है। पुनरीक्षण इसे रोकता है।
नवमतदाताओं का हक: हर साल हजारों युवा 18 वर्ष के होते हैं। बिना पुनरीक्षण उनके मताधिकार का हनन होता है।
डेटा की विश्वसनीयता: आधार, जन्म प्रमाण आदि से लिंक कर सूची को पारदर्शी बनाया जाता है।
कानूनी अनुपालन: निर्वाचन आयोग का नियम है कि हर वर्ष 1 जनवरी को अर्हता तिथि मानकर सूची अपडेट हो।

महासमुंद में अभियान की झलक

4 नवंबर से शुरू अभियान में बीएलओ योजना यादव की अगुवाई वाली टीम ने आज सुबह कलेक्टर विनय लंगेह के घर पहुंचकर गणना-घोषणा प्रपत्र सौंपे। सरपंच प्रमिला ध्रुव, उप सरपंच जीतेंद्र साहू, पंच शिव साहू आदि मौजूद रहे।
जिले में 8,86,422 पंजीकृत मतदाता हैं। चारों विधानसभा क्षेत्रों में बीएलओ घर-घर जाकर:
गणना प्रपत्र वितरित कर रहे हैं
आधार, जन्म प्रमाण, निवास प्रमाण आदि जांच रहे हैं
मृत/स्थानांतरित नाम हटा रहे हैं

कलेक्टर की अपील

कलेक्टर विनय लंगेह ने कहा,
“एक गलत नाम सूची में रहना लोकतंत्र पर बोझ है, और एक पात्र नाम का छूटना अन्याय है। पुनरीक्षण आपका अधिकार और कर्तव्य दोनों है।”

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अंतिम सूची प्रकाशन के बाद कोई सुधार नहीं होगा।
आपका एक कदम – लोकतंत्र का एक मजबूत स्तंभ।