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बाघामुडा धान घोटाला 3304 कट्टा ‘गायब’ कर शासन को ठगा 41 लाख का चूना..! समिति प्रभारी प्रेमसिंह ध्रुव पर FIR दर्ज

 

प्रशासन की ट्रेन अब रफ़्तार पकड़ ली है पहले जगदीशपुर स्टेशन अब बाघामुड़ा स्टेशन अब ट्रेन की रुख किस ओर जाएगी और किसकी शामत आएगी क्यों कि,महासमुंद में धान घोटाले बाजों की जांच की आग भड़की

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुंद / 25 जनवरी 2026 महासमुंद जिले के बागबाहरा विकासखंड अंतर्गत ग्रामीण सेवा सहकारी समिति मर्यादित बाघामुडा अब धान घोटाले का सबसे ताजा और चर्चित केंद्र बन चुका है। यहां के उपार्जन केंद्र से 3,304 कट्टा धान (करीब 1,321.6 क्विंटल) रातों-रात गायब हो गया, जिससे शासन को 40,96,960 रुपये (लगभग 41 लाख) का सीधा नुकसान हुआ। इस बड़े वित्तीय घपले के मुख्य आरोपी समिति प्रभारी प्रेमसिंह ध्रुव पर कोमाखान थाने में FIR दर्ज कर ली गई है।
कलेक्टर विनय लंगेह के सख्त निर्देश पर हुई आकस्मिक जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए:
ऑनलाइन रिकॉर्ड में उपलब्ध दिखाया गया: 1,25,878 कट्टा धान (50,351.20 क्विंटल)
भौतिक सत्यापन में फड़ पर मिला: सिर्फ 1,22,574 कट्टा
कमी: ठीक 3,304 कट्टा — समर्थन मूल्य 3,100 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से 40.96 लाख रुपये की हेराफेरी!
डिप्टी कलेक्टर की टीम ने प्रेमसिंह ध्रुव और उनके सहकर्मियों की मौजूदगी में ही प्रत्येक स्टैक की गिनती की। कुल 74 स्टैक मिले, लेकिन कुल मात्रा में भारी कमी साफ नजर आई। जांच रिपोर्ट और पंचनामा में स्पष्ट लिखा है कि यह कमी जानबूझकर की गई है, ताकि शासन को आर्थिक हानि पहुंचाई जा सके। प्रेमसिंह ध्रुव पर धोखाधड़ी, वित्तीय अनियमितता और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के गंभीर आरोप लगे हैं।

बाघामुडा क्यों बना फोकस..?

यह मामला महासमुन्द जिले में धान खरीदी सीजन 2025-26 के दौरान सामने आया सबसे ताजा और स्पष्ट घोटाला है।
बाकी घोटालों में ज्यादातर संग्रहण केंद्रों में ‘शॉर्टेज’ की आड़ में दीमक-चूहों का बहाना बनाया जाता है, लेकिन बाघामुडा में ऑनलाइन vs भौतिक रिकॉर्ड का सीधा अंतर साबित हुआ।
प्रभारी की मौजूदगी में ही गिनती हुई, फिर भी कमी — इससे साफ है कि यह संयोग नहीं, बल्कि सुनियोजित लूट थी।
FIR के बाद पुलिस अब प्रेमसिंह ध्रुव के बैंक खातों, फोन रिकॉर्ड, संपर्कों और पिछले लेन-देन की गहन जांच कर रही है। गिरफ्तारी की संभावना मजबूत है।

महासमुंद जिले में धान लूट का बड़ा सिलसिला

बाघामुडा का यह मामला अकेला नहीं है। जिले में ही अन्य केंद्रों से भी करोड़ों का धान गायब होने की खबरें हैं:
बागबाहरा संग्रहण केंद्र: 3.65% शॉर्टेज से 5.71 करोड़ का गबन (चूहे-दीमक का बहाना!)
जिले के 5 संग्रहण केंद्रों से कुल 81,620 क्विंटल धान लापता — नुकसान 25 करोड़ से ज्यादा!
अन्य केंद्रों में सूखत धान, अवैध परिवहन, फर्जी पर्ची और ओवरलोडिंग के मामले।
किसान संगठन और स्थानीय लोग आक्रोशित हैं। वे कह रहे हैं — “किसानों का धान हम देते हैं, लेकिन प्रभारी और कर्मचारी मिलकर लूट रहे हैं। पूरी रकम वसूली जाए और दोषियों को सलाखों के पीछे भेजा जाए!”
कलेक्टर विनय लंगेह ने साफ कहा है: “अनियमितता में शामिल किसी को बख्शा नहीं जाएगा। जांच सतत जारी रहेगी, रैंडम ऑडिट बढ़ाए जाएंगे और डिजिटल सत्यापन को और मजबूत किया जाएगा।”

बाघामुडा घोटाला अब पूरे महासमुंद जिले में ‘धान के जादूगरों’ के खिलाफ कार्रवाई की मिसाल बन चुका है।

सवाल ये है — क्या यह सिर्फ शुरुआत है? राज्यभर के अन्य जिलों में भी ऐसे ही ‘गायब धान’ के मामले सामने आने की आशंका बढ़ गई है।

धान गबन का बड़ा खेल जगदीशपुर केंद्र में 8 लाख का चूना, प्रभारी कुशाग्र प्रधान पर FIR – महासमुंद में बढ़ते घोटालों की नई कड़ी..!

 

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुंद, 24 जनवरी 2026 छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में धान उपार्जन और संग्रहण केंद्रों पर घोटालों की बाढ़ आ गई है। जहां एक तरफ जिले के कई केंद्रों से करोड़ों रुपये के धान सूखने, चूहों-कीड़ों के नाम पर गायब होने की खबरें आ रही हैं, वहीं अब बसना ब्लॉक के जगदीशपुर प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति में एक और सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां के समिति प्रभारी कुशाग्र प्रधान पर 260 क्विंटल (650 पैकेट) धान गबन करने का गंभीर आरोप लगा है। इस कमी से शासन को कुल 8 लाख 6 हजार रुपये का सीधा नुकसान हुआ है – जिसमें समर्थन मूल्य के तहत 6 लाख 15 हजार 940 रुपये और कृषक उन्नति योजना की अतिरिक्त सहायता राशि 1 लाख 90 हजार 60 रुपये शामिल हैं।

भौतिक सत्यापन ने खोला राज

खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के तहत चल रही धान खरीदी प्रक्रिया के दौरान 21 जनवरी 2026 को पिथौरा के एसडीएम बजरंग वर्मा ने जगदीशपुर केंद्र का अचानक भौतिक सत्यापन किया। ऑनलाइन रिकॉर्ड और रिपोर्ट के अनुसार:
कुल खरीद: 58,556.40 क्विंटल धान
अब तक उठाव: 44,430 क्विंटल
स्टॉक में दिखाया गया: 14,126.40 क्विंटल
प्रभारी कुशाग्र प्रधान ने स्टॉक रजिस्टर में 22 स्टेक पर कुल 35,316 पैकेट धान होने का दावा किया। लेकिन सत्यापन टीम ने मौके पर गिनती की तो सिर्फ 34,666 पैकेट ही मिले। यानी 650 पैकेट (260 क्विंटल) धान कागजों पर तो थे, लेकिन हकीकत में गायब! यह कमी स्पष्ट रूप से जानबूझकर की गई लगती है, क्योंकि इतनी बड़ी मात्रा बिना किसी साजिश के अचानक गायब नहीं हो सकती।

कानूनी कार्रवाई और जांच शुरू

इस गबन को धान खरीद नीति 2025-26 का खुला उल्लंघन मानते हुए 23 जनवरी को बसना थाने में कुशाग्र प्रधान के खिलाफ धारा 316(5) BNSS (भारतीय न्याय संहिता) के तहत एफआईआर दर्ज कर ली गई। पुलिस ने मामले की गहन जांच शुरू कर दी है। जांचकर्ताओं का मानना है कि इतनी बड़ी मात्रा में धान की कमी अकेले एक व्यक्ति के बस की बात नहीं – इसमें मिलीभगत या अन्य लोगों की संलिप्तता की आशंका जताई जा रही है। यदि जांच गहराई में गई तो यह मामला और बड़े नेटवर्क तक पहुंच सकता है।

महासमुंद में धान घोटालों का सिलसिला

यह घटना महासमुंद जिले में अकेली नहीं है। हाल के दिनों में:
बागबाहरा धान संग्रहण केंद्र में 5.71 करोड़ रुपये की शॉर्टेज (3.65% कमी) का मामला सामने आया, जहां चूहे, कीड़े और सूखने का बहाना बनाया गया।
जिले के कई केंद्रों से कुल 25 करोड़ रुपये तक के धान गायब होने की खबरें आईं।
कुछ जगहों पर धान सूख जाने का दावा किया जा रहा है, जबकि सुरक्षा और रखरखाव पर लाखों-करोड़ों खर्च होने के बावजूद कमी दिखाई गई।
कांग्रेस और किसान संगठन पहले से ही इस मुद्दे पर आक्रामक हैं और शासन से सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि उनकी मेहनत से उगाया धान जब सरकारी योजनाओं के नाम पर गायब हो रहा है, तो यह न केवल आर्थिक नुकसान है, बल्कि किसानों के विश्वास पर भी डाका है।

प्रशासन का रुख

जिला प्रशासन ने साफ कहा है कि ऐसे सभी केंद्रों पर अब नियमित और सख्त सत्यापन बढ़ाया जाएगा। दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने पर आरोपित को जल्द गिरफ्तार किया जा सकता है।
यह मामला सवाल उठाता है – क्या धान उपार्जन व्यवस्था में सिस्टमेटिक गड़बड़ी है? या सिर्फ कुछ लोगों की लालच? जांच के नतीजे आने बाकी हैं, लेकिन महासमुंद के किसानों के लिए यह धान महापर्व अब घोटालों का सिलसिला बनता जा रहा है।

महासमुंद अधिवक्ता संघ में संदीप कुमार साहू का धमाल..!

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुंद / 22 जनवरी 2026 जिला अधिवक्ता संघ महासमुंद के 2026-27 कार्यकाल के लिए आज हुए चुनाव ने एक बार फिर साबित कर दिया कि, लोकप्रियता और मेहनत का कोई जवाब नहीं होता। कुल 243 मतदाताओं वाले इस महत्वपूर्ण चुनाव में संदीप कुमार साहू ने सचिव पद पर ऐसी धमाकेदार जीत दर्ज की कि सभी हैरान रह गए।
मतदान सुबह से शाम तक चला और शाम को मतगणना के बाद जो नतीजे आए, वो संदीप कुमार साहू की मेहनत और साथियों के भरोसे की जीती-जागती मिसाल हैं।

प्रतिद्वंद्वी नूतन कुमार साहू को सिर्फ 111 मत
अवैध मतपत्र शून्य

यानी संदीप कुमार साहू ने 20 मतों के भारी अंतर से सचिव पद पर कब्जा जमाया। यह जीत महज संख्या नहीं, बल्कि अधिवक्ता समुदाय में उनकी गहरी पैठ, सक्रियता और संगठन बनाने की काबिलियत का प्रमाण है। कई अधिवक्ताओं का कहना है कि संदीप पिछले कुछ सालों से संघ के मुद्दों पर लगातार आवाज़ उठाते रहे हैं – कोर्ट की सुविधाओं से लेकर अधिवक्ताओं की समस्याओं तक। आज का रिजल्ट उसी निरंतर प्रयास का फल है।
अन्य पदों पर भी आए रोचक नतीजे

सह-सचिव राजेश कुमार दीवान ने 120 मतों के साथ जीत हासिल की (कुल वैध मत 122)। राजेंद्र सिंह बांसवार को 50 और सुमित्रा वस्त्रकार को 69 मत मिले। अवैध 2
कोषाध्यक्ष: शिवकुमार भारद्वाज ने 138 मतों से बाजी मारी, ओमप्रकाश साहू को 105 मिले। अवैध: शून्य
कार्यकारिणी सदस्य (महिला): गिरिजा साहू 124 मतों के साथ निर्वाचित, दूसरी उम्मीदवार को 118 मत। अवैध: 1
पूरे चुनाव में कुल वैध मतों का प्रतिशत बहुत अच्छा रहा और प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रही। निर्वाचन अधिकारी ने शाम को सभी परिणाम घोषित किए और नई टीम को बधाई दी।
संदीप कुमार साहू की इस शानदार जीत से महासमुंद के अधिवक्ता वर्ग में नई ऊर्जा का संचार हो गया है। वे न सिर्फ कोर्ट में मजबूत पैरवी के लिए जाने जाते हैं, बल्कि साथी अधिवक्ताओं की छोटी-बड़ी समस्याओं को सुलझाने में भी आगे रहते हैं। उनकी जीत से उम्मीद है कि आने वाले समय में संघ ज्यादा मजबूत, ज्यादा सक्रिय और अधिवक्ताओं के हितों की बेहतर पैरवी करने वाला बनेगा।
संदीप कुमार साहू और पूरी नई कार्यकारिणी को दिल से बधाई!
अब देखना ये है कि ये टीम मिलकर महासमुंद की न्याय व्यवस्था को कैसे और बेहतर बनाती है।

महासमुंद जिला दंडाधिकारी विनय कुमार लंगेह का चला प्रशासनिक डंडा घोंच सहकारी समिति में पुराना धान खपाने, घटिया गुणवत्ता और तौलाई में हेरफेर..!

 

प्रबंधक निलंबित, एफआईआर के आदेश – जिले के सभी प्रभारी और नोडल अधिकारी लगे जांच-निगरानी में

रिपोर्टर
महासमुंद / 15 जनवरी 2026 – महासमुंद जिले में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और किसान-केंद्रित बनाने के लिए कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने एक बार फिर कड़ा रुख अपनाया है। आज उन्होंने विकासखंड पिथौरा के अंतर्गत प्राथमिक कृषि एवं साख सहकारी समिति घोंच का अचानक (औचक) निरीक्षण किया, जहां धान उपार्जन में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं।

निरीक्षण के दौरान सामने आई मुख्य गड़बड़ियां

पुराने रबी सीजन का धान इस साल की खरीदी में जानबूझकर शामिल करने की कोशिश की गई, जो शासन के नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है।

निम्न गुणवत्ता वाला (घटिया और अमानक स्तर का) धान खरीदे जाने के ठोस प्रमाण मिले, जिससे किसानों को उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा था।

तौलाई (वजन कांटा) में बड़े स्तर पर हेरफेर और गड़बड़ी पाई गई, जो भ्रष्टाचार की ओर इशारा करती है।

इन गंभीर अनियमितताओं पर कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने तुरंत कार्रवाई करते हुए समिति के प्रबंधक को तत्काल निलंबित करने के आदेश दिए। साथ ही पूरे प्रकरण में एफआईआर दर्ज कराने के सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। कलेक्टर ने स्पष्ट चेतावनी दी कि, धान खरीदी व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही, भ्रष्टाचार या किसानों के साथ धोखाधड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। दोषी पाए जाने पर चाहे कोई भी पदाधिकारी हो, उसके खिलाफ कठोर कानूनी और विभागीय कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
जिले में सतत निगरानी और जांच का अभियान तेज इस घटना के बाद जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। कलेक्टर के निर्देश पर सभी धान उपार्जन केंद्रों के प्रभारी, नोडल अधिकारी, सहकारी निरीक्षक और संबंधित विभागीय अधिकारी लगातार समिति और केंद्रों का दौरा कर रहे हैं। वे स्टेकिंग, बारदाना गुणवत्ता, तौलाई प्रक्रिया, नमी मापन, गुणवत्ता जांच और किसानों की टोकन व्यवस्था की सघन जांच कर रहे हैं। हाल के दिनों में भी कई केंद्रों पर अव्यवस्था पाए जाने पर प्राधिकृत अधिकारियों को पद से हटाया गया है और अवैध धान जब्ती का सिलसिला जारी है।

मौके पर मौजूद प्रमुख अधिकारी

एसडीएम पिथौरा बजरंग वर्मा

खाद्य अधिकारी अजय यादव

जिला विपणन अधिकारी आशुतोष कोसरिया

कलेक्टर ने सभी अधिकारियों को फिर से निर्देश दिए कि, जिले के हर उपार्जन केंद्र पर निरंतर और सतर्क निगरानी रखी जाए। शासन के सभी दिशा-निर्देशों का पूर्ण पालन सुनिश्चित किया जाए, ताकि किसानों को कोई परेशानी न हो और खरीदी प्रक्रिया सुचारू रूप से चले।
यह कार्रवाई महासमुंद जिले में कलेक्टर विनय कुमार लंगेह की जीरो टॉलरेंस नीति का एक और मजबूत उदाहरण है। प्रशासन का यह कदम न केवल भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने में सहायक साबित हो रहा है, बल्कि हजारों किसानों में विश्वास भी बढ़ा रहा है कि, उनकी मेहनत की उपज को उचित मूल्य और पारदर्शी तरीके से खरीदा जाएगा। भविष्य में ऐसी अनियमितताओं पर पूरी तरह रोक लगाने की दिशा में जिला प्रशासन का अभियान तेजी से चल रहा है।

महासमुंद जिले में धान खरीदी का नया कीर्तिमान कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने पौंसरा और खरोरा केंद्रों का किया सख्त निरीक्षण, राज्य में सबसे आगे..!

 

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुंद / 14 जनवरी 2026: छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में खरीफ धान उपार्जन अभियान जोर-शोर से चल रहा है। जिला प्रशासन की सतत निगरानी और पारदर्शी व्यवस्था के कारण यहां धान खरीदी राज्य में सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गई है। आज कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने ग्राम पौंसरा और खरोरा स्थित धान उपार्जन केंद्रों का अचानक दौरा किया और खरीदी प्रक्रिया की गहन समीक्षा की।
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने केंद्रों पर मौजूद सभी सुविधाओं जैसे तौल प्रणाली, किसान टोकन व्यवस्था, धान प्रबंधन, स्टैकिंग और ऑनलाइन रिकॉर्डिंग सिस्टम का बारीकी से जायजा लिया। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि खरीदी प्रक्रिया में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित करने को सर्वोच्च प्राथमिकता बताई गई।
कलेक्टर ने मौके पर मौजूद किसानों से सीधे संवाद किया, उनकी समस्याएं सुनीं और आश्वासन दिया कि प्रशासन निरंतर मॉनिटरिंग के माध्यम से पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और सुगम बनाए रख रहा है। उन्होंने केंद्र प्रभारियों को निर्देशित किया कि धान की स्टैकिंग, वजन मापन और डिजिटल रिकॉर्ड को नियमित रूप से अपडेट किया जाए। किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को तुरंत ठीक करने के सख्त आदेश दिए गए।
खास बात यह रही कि कलेक्टर ने अनावश्यक धान भंडारण को रोकने पर जोर दिया। मिलर्स और परिवहन एजेंसियों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित कर धान के तेजी से उठाव सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि बारिश या अन्य प्राकृतिक कारणों से अनाज को कोई नुकसान न पहुंचे। जिन केंद्रों पर उठाव की गति धीमी है, वहां तत्काल सुधार लाने और दैनिक प्रगति की लगातार निगरानी करने को कहा गया।
जिले की शानदार उपलब्धि
राज्य सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप महासमुंद जिले में धान खरीदी पूरी पारदर्शिता और सुव्यवस्थित ढंग से चल रही है। 13 जनवरी 2026 की स्थिति के अनुसार, जिले के कुल 182 धान उपार्जन केंद्रों के माध्यम से अब तक 6 लाख 88 हजार 326 मीट्रिक टन से अधिक धान की खरीदी पूरी हो चुकी है, जो पूरे छत्तीसगढ़ में सर्वाधिक है।
इसके अलावा, मिलर्स द्वारा अब तक लगभग 2 लाख 37 हजार मीट्रिक टन धान का उठाव किया जा चुका है, जबकि 4 लाख 89 हजार 421 मीट्रिक टन धान का डिलीवरी ऑर्डर (डी.ओ.) जारी हो चुका है। यह आंकड़े जिले की मजबूत प्रशासनिक व्यवस्था और किसान-हितैषी नीतियों का प्रमाण हैं।
कलेक्टर विनय कुमार लंगेह के सक्रिय नेतृत्व में महासमुंद जिला धान उत्पादक किसानों के लिए एक आदर्श बनता जा रहा है। प्रशासन का यह प्रयास न केवल किसानों को उचित मूल्य दिला रहा है, बल्कि राज्य स्तर पर भी खरीदी के मानकों को ऊंचा उठा रहा है। अभियान अंत तक इसी गति से जारी रहेगा, ताकि हर पंजीकृत किसान को निर्बाध लाभ मिल सके।

वन विभाग की ताबड़तोड़ छापेमारी महासमुंद में अवैध सागौन लकड़ी का बड़ा जखीरा बरामद, आरोपी ने कबूला जुर्म

 

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुंद (छत्तीसगढ़) 13 जनवरी 2026 छत्तीसगढ़ के महासमुंद वन मंडल में एक बड़ी सफलता हाथ लगी है, जहां वन अधिकारियों ने गुप्त सूचना के आधार पर ग्राम जम्हर में एक घर पर छापा मारकर अवैध रूप से काटी गई सागौन की कीमती लकड़ी जब्त की है। इस कार्रवाई में सागौन के लट्ठे और चिरान सहित लगभग 1 लाख 32 हजार रुपये मूल्य की ईमारती लकड़ी बरामद हुई, जो जंगल से चोरी-छिपे काटकर घर की बाड़ी में छिपाई गई थी। आरोपी ने पूछताछ में स्वीकार किया कि उसने अपनी बेटी की शादी के लिए फर्नीचर बनवाने के उद्देश्य से मजदूरों से जंगल से लकड़ी मंगवाई थी। वन विभाग की इस सख्त कार्रवाई से अवैध कटाई पर लगाम लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है, जो पर्यावरण संरक्षण के लिए एक मिसाल बन सकती है।
घटना की शुरुआत एक मुखबिर की विश्वसनीय सूचना से हुई, जिसके आधार पर वन परिक्षेत्र पिथौरा की टीम ने 13 जनवरी 2026 को तड़के सुबह ग्राम जम्हर में सीताराम चौधरी के घर पर दबिश दी। सीताराम, जो गणेशराम चौधरी का पुत्र है, के घर और बाड़ी की गहन तलाशी ली गई। जांच के दौरान अधिकारियों को घर के अंदर और बाड़ी के पैरा (घास-फूस) में छिपाए गए सागौन के गोले मिले, जो लगभग एक सप्ताह पहले पास के जंगल से काटकर लाए गए थे। अधिकारियों का अनुमान है कि यह लकड़ी सांगा (एक प्रकार का जंगल क्षेत्र) से अवैध रूप से प्राप्त की गई थी। आरोपी ने पूछताछ में बताया कि उसका इरादा सिर्फ व्यक्तिगत उपयोग के लिए फर्नीचर तैयार करवाना था, लेकिन यह कार्य भारतीय वन अधिनियम के तहत गंभीर अपराध माना जाता है।
यह पूरी कार्रवाई वन मंडलाधिकारी मयंक पांडेय के सीधे निर्देशन में संपन्न हुई, जबकि संयुक्त वन मंडलाधिकारी डिम्पी बैस ने मार्गदर्शन प्रदान किया। ऑपरेशन का नेतृत्व वन परिक्षेत्र अधिकारी शालिकराम डड़सेना ने किया, जिनकी टीम में सहायक परिक्षेत्र अधिकारी पश्चिम पिथौरा ननकुशिया साहू, ललित पटेल, परिसर रक्षी जम्हर मोहम्मद रज्जाक, परिसर रक्षी राजाडेरा प्रीतराम साहू, शुभम तिवारी, कोकिल कांत दिनकर, विरेंद्र बंजारे, कुलेश्वर डड़सेना, प्रभा ठाकुर, दीपिका रात्रे, पुष्पा नेताम जैसे अधिकारी और कर्मचारी शामिल थे। इसके अलावा, सुरक्षा श्रमिकों और स्थानीय जन प्रतिनिधियों की मौजूदगी में यह छापेमारी की गई, जिससे पारदर्शिता सुनिश्चित हुई। जब्त की गई वन संपदा को तुरंत काष्ठागार पिथौरा ले जाया गया, जहां आगे की जांच और मूल्यांकन किया जाएगा।
कानूनी रूप से, इस मामले में वन अपराध प्रकरण संख्या 13417/25 दर्ज किया गया है, जो भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 33 के अलावा लोक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम 1984 और अन्य संबंधित धाराओं के तहत है। वन विभाग के अधिकारी बताते हैं कि ऐसी अवैध कटाई न केवल वन संपदा को नुकसान पहुंचाती है, बल्कि पर्यावरण संतुलन को भी बिगाड़ती है। सागौन जैसी मूल्यवान लकड़ी की चोरी जंगलों की जैव विविधता पर गहरा असर डालती है, और इससे जुड़े अपराधों पर सख्ती बरतना जरूरी है। आरोपी सीताराम चौधरी से पूछताछ अभी भी जारी है, और जांच में और भी खुलासे होने की संभावना है। यदि कोई अन्य व्यक्ति इसमें शामिल पाया जाता है, तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
वन विभाग ने अपील की है कि ग्रामीण क्षेत्रों में जंगलों की रक्षा के लिए स्थानीय समुदाय सक्रिय भूमिका निभाएं और ऐसी अवैध गतिविधियों की सूचना तुरंत दें। इस घटना से साफ है कि वन संरक्षण के लिए सतर्कता और त्वरित कार्रवाई कितनी महत्वपूर्ण है। आगे की जांच रिपोर्ट आने पर मामले में और विवरण सामने आएंगे।

सब्जी से उंगलियों के राज खोलने वाला पाउडर! मृणाल विदानी की अनोखी खोज ने छत्तीसगढ़ को गौरवान्वित किया, मिला प्रतिष्ठित ‘युवा रत्न’

महासमुंद से मास्टर्स तक का सफर: मृणाल विदानी ने स्थानीय संसाधनों से फोरेंसिक में क्रांति लाई, CM ने दिया 1 लाख का ‘युवा रत्न’ सम्मान

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
रायपुर / 13 जनवरी 2026 छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले की प्रतिभाशाली बेटी मृणाल विदानी ने नवाचार के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाते हुए राज्य स्तरीय युवा रत्न सम्मान से सम्मानित होने का गौरव प्राप्त किया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर आयोजित भव्य समारोह में उन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया।

यह सम्मान खेल एवं युवा कल्याण विभाग, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा कन्वेंशन हॉल, सर्किट हाउस, रायपुर में आयोजित किया गया। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री एवं खेल मंत्री अरुण साव तथा राज्य युवा आयोग के अध्यक्ष विश्वविजय सिंह तोमर भी उपस्थित रहे। मृणाल को उनके उत्कृष्ट नवाचारों के लिए 1 लाख रुपये की नकद राशि और प्रमाण-पत्र प्रदान किया गया।
मृणाल विदानी के अनूठे नवाचार
मृणाल विदानी ने छत्तीसगढ़ की स्थानीय प्राकृतिक सामग्रियों का उपयोग करके फोरेंसिक साइंस में क्रांतिकारी योगदान दिया है।

उनके प्रमुख नवाचार निम्नलिखित हैं

कोसे (एक स्थानीय पौधा) के धागों से पर्यावरण-अनुकूल फोरेंसिक ब्रश तैयार करना।

छत्तीसगढ़ में प्रचलित चेंच भाजी (एक प्रकार की स्थानीय सब्जी) से सुरक्षित और सस्ता फोरेंसिक पाउडर विकसित करना, जो अपराध स्थलों पर गुप्त फिंगरप्रिंट उजागर करने में प्रभावी है।

गोबर खरसी (एक स्थानीय पौधा) की राख से भी उच्च गुणवत्ता वाला फोरेंसिक पाउडर बनाना।

इन नवाचारों के लिए मृणाल को भारत सरकार से कॉपीराइट प्राप्त हो चुका है। ये उत्पाद न केवल पर्यावरण के अनुकूल हैं, बल्कि पारंपरिक केमिकल-आधारित फोरेंसिक सामग्रियों की तुलना में बहुत कम लागत वाले भी हैं।

अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर मिली मान्यता

मृणाल विदानी की प्रतिभा सिर्फ राज्य तक सीमित नहीं है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी छाप छोड़ी है।

विवेकानंद ग्लोबल यूनिवर्सिटी, जयपुर में आयोजित इंटरनेशनल फोरेंसिक वैज्ञानिक कॉन्फ्रेंस में

वर्ष 2023 में कोसे के धागे से बने फोरेंसिक ब्रश के लिए बेस्ट इंटरनेशनल साइंटिस्ट अवॉर्ड।

2025 में चेंच भाजी से बने फोरेंसिक पाउडर के लिए बेस्ट इंटरनेशनल इनोवेशन।

खरसी की राख आधारित प्रक्रिया के लिए बेस्ट प्रेजेंटेशन और बेस्ट इनोवेशन का सम्मान।

नेशनल लेवल रिसर्च कांक्लेव 2025 में बेस्ट प्रोडक्ट डिस्प्ले अवॉर्ड।

मृणाल नियमित रूप से इंटरनेशनल फोरेंसिक साइंटिस्ट मीट कार्यक्रमों का सफल संचालन भी करती हैं।

शिक्षा और प्रारंभिक जीवन

मृणाल विदानी वर्तमान में विवेकानंद ग्लोबल यूनिवर्सिटी, जयपुर में फोरेंसिक साइंस में मास्टर्स (डीएनए विषय सहित) की अंतिम सेमेस्टर की पढ़ाई कर रही हैं। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा वेडनर मेमोरियल सीनियर सेकेंडरी स्कूल महासमुंद से कक्षा पहली से बारहवीं तक पूरी की, जहां वे शुरू से ही मेधावी छात्रा रहीं। उनके पिता रविंद्र विदानी और माता उत्तरा विदानी सुभाष नगर महासमुंद के निवासी हैं। साथ ही मृणाल के माता और पिता भी पत्रकारिता की जगत में अपनी अनूठी छाप भी छोड़े है।

युवा रत्न सम्मान योजना का उद्देश्य

यह योजना 15 से 29 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं एवं स्वैच्छिक संगठनों को सामाजिक, सांस्कृतिक, साहित्यिक, शैक्षणिक, खेल एवं अन्य क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य के लिए प्रेरित करती है। इसका मुख्य लक्ष्य युवाओं में समुदाय के प्रति जिम्मेदारी की भावना जगाना, व्यक्तिगत क्षमता विकास करना और राष्ट्रीय विकास व समाज सेवा में योगदान के लिए प्रोत्साहित करना है।

मृणाल विदानी की यह उपलब्धि

न केवल महासमुंद और छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है, बल्कि पूरे देश के युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत है। उन्होंने साबित किया है कि स्थानीय संसाधनों से भी वैश्विक स्तर के नवाचार संभव हैं।

छत्तीसगढ़ की यह बेटी निश्चित रूप से भविष्य में संपूर्ण देश जगत में अपनी छाप छोड़ेगी।

सिंघोडा पुलिस की बड़ी कार्रवाई जंगल में हाथ भट्टी से 60 लीटर अवैध महुआ शराब बनाते रंगे हाथ पकड़ा आरोपी, 12 हजार की कीमत का जखीरा जब्त..!

 

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुंद, 11 जनवरी 2026 – छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में अवैध शराब के खिलाफ पुलिस का सख्त रुख जारी है। थाना सिंघोडा की पुलिस ने एक बार फिर अपनी मुस्तैदी दिखाते हुए अवैध महुआ शराब के उत्पादन और बिक्री के धंधे पर करारा प्रहार किया है। सूचना के आधार पर पुलिस ने ग्राम गुठानीपाली के जंगल में छापेमारी कर 30 वर्षीय एक व्यक्ति को रंगे हाथ पकड़ा, जिसके पास से कुल 60 लीटर हाथ भट्टी (देशी) महुआ शराब जब्त की गई। इस शराब की अनुमानित बाजार कीमत करीब 12,000 रुपये बताई जा रही है।
पुलिस अधीक्षक महासमुंद एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर तथा अनुविभागीय अधिकारी पुलिस सरायपाली के मार्गदर्शन में यह कार्रवाई 10 जनवरी 2026 को अंजाम दी गई। एक विश्वसनीय मुखबीर से सूचना मिली थी कि गुठानीपाली गांव के निकट जंगल में एक व्यक्ति गुप्त रूप से हाथ भट्टी में महुआ शराब तैयार कर अवैध लाभ कमाने के लिए बेचने की तैयारी कर रहा है।
सूचना मिलते ही पुलिस टीम तुरंत मौके पर पहुंची। वहां पहुंचकर देखा कि बताए गए हुलिए का एक व्यक्ति वाकई महुआ शराब बना रहा था। टीम ने त्वरित घेराबंदी कर आरोपी को पकड़ लिया। पूछताछ पर उसने अपना नाम रंजीत दास, पिता ब्रह्मा दास, उम्र 30 वर्ष, निवासी गुठानीपाली, थाना सिंघोडा, जिला महासमुंद बताया।
आरोपी के कब्जे से तीन सफेद रंग की प्लास्टिक जरीकन (जरकीन) बरामद हुईं, जिनमें कुल 60 लीटर ताजा तैयार हाथ भट्टी महुआ शराब भरी हुई थी। मौके पर ही मौजूद गवाहों के सामने यह शराब जब्त की गई और उसे सीलबंद कर पुलिस कस्टडी में ले लिया गया।
आरोपी रंजीत दास को घटनास्थल पर ही गवाहों के सामने 10 जनवरी 2026 को शाम 5:10 बजे विधिवत गिरफ्तार कर लिया गया। जांच में उसके कृत्य में छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम की धारा 34(2) के तहत अपराध सिद्ध पाया गया। यह धारा अवैध रूप से शराब बनाने, रखने, बेचने या परिवहन करने पर सख्त सजा का प्रावधान करती है, जिसमें न्यूनतम 6 महीने से लेकर 2 वर्ष तक की कैद और जुर्माना शामिल हो सकता है।
आरोपी को गिरफ्तारी के बाद कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया। पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई अवैध शराब के कारोबार पर लगाम कसने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। जिले में लगातार चल रहे ऐसे अभियानों से अवैध शराब के धंधेबाजों में खलबली मची हुई है।
महुआ शराब का संदर्भ
छत्तीसगढ़ के आदिवासी इलाकों में महुआ शराब पारंपरिक रूप से प्रचलित है, लेकिन बिना लाइसेंस के इसका उत्पादन और बिक्री पूरी तरह अवैध है। पुलिस का दावा है कि ऐसे धंधे से न केवल राजस्व को नुकसान होता है, बल्कि समाज में नशे की लत और अपराध भी बढ़ते हैं।
पुलिस ने जनता से अपील की है कि यदि किसी को अवैध शराब बनाने-बेचने की जानकारी हो तो तुरंत सूचित करें। गुमनाम सूचना पर भी कार्रवाई की जाएगी। ऐसे मामलों में पुलिस की यह सतर्कता जारी रहेगी।

महासमुंद के तुमगांव रोड MDR घटिया और गुणवत्ता विहिन सड़क निर्माण में भ्रष्टाचार की नैय्या गोते खा रही है – मानिक साहू

भ्रष्टाचारियों के खिलाफ किसान नेता मानिक साहू ने फूंका बिगुल , अब अव नई सहिबों चुन चुन सब हिसाब ल करबो 

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुंद / जिले में किसानों की जीवनरेखा पर सवाल
छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में महासमुंद शहर से तुमगांव तक बन रही मेजर डिस्ट्रिक्ट रोड (MDR) किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यह सड़क उनकी कृषि उपज को बाजार तक पहुंचाने का मुख्य माध्यम है, लेकिन अब इसके निर्माण में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और गुणवत्ता मानकों की अनदेखी के गंभीर आरोप लगे हैं।

ठेकेदार JD Construction पर लगे भारी आरोप

ठेकेदार कंपनी JD Construction को सौंपे गए इस प्रोजेक्ट में इंडियन रोड्स कांग्रेस (IRC: 37-2018), MoRTH स्पेसिफिकेशंस और छत्तीसगढ़ PWD के सभी निर्धारित मानकों का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है। सड़क की बुनियादी परतों (सबग्रेड और GSB) में निर्धारित मोटाई 200-300 mm की जगह काफी कम काम किया जा रहा है। प्रति किलोमीटर 1400-2100 क्यूबिक मीटर गिट्टी-मुरूम की जगह घटिया सामग्री और कटौती का सहारा लिया जा रहा है।

सड़क की उम्र महज 1-2 साल..?

ऐसे घटिया निर्माण से यह सड़क अधिकतम 1-2 साल ही टिक पाएगी, जबकि सामान्य MDR सड़कें 10-12 साल तक मजबूत रहनी चाहिए। इससे किसानों की रोजमर्रा की परेशानियां बढ़ेंगी और जिले की कनेक्टिविटी पर गहरा असर पड़ेगा।

जल निकासी व्यवस्था पूरी तरह फेल

सड़क के बीच में लगाए जा रहे सीमेंट पाइप कल्वर्ट्स टूटे-फूटे और निम्न गुणवत्ता के हैं। बारिश के मौसम में जलभराव की समस्या बढ़ेगी, जिससे सड़क जल्दी क्षतिग्रस्त हो जाएगी।

अनिवार्य जांचों की पूरी तरह अनदेखी

कॉम्पैक्शन टेस्ट, फील्ड डेंसिटी टेस्ट, CBR टेस्ट और मार्शल स्टेबिलिटी टेस्ट जैसी जरूरी जांचें बिल्कुल नहीं कराई जा रही हैं। यह स्पष्ट रूप से तकनीकी खामी नहीं, बल्कि ठेकेदार और कुछ PWD अधिकारियों की मिलीभगत से जनता के करोड़ों रुपये की लूट है।

  किसान कांग्रेस अध्यक्ष मानिक साहू की तीखी शिकायत

जिला किसान कांग्रेस के अध्यक्ष मानिक साहू ने साहू समाज के शपथ ग्रहण समारोह में उप मुख्यमंत्री एवं लोक निर्माण (PWD) मंत्री अरुण साव को लिखित शिकायत सौंपी। उन्होंने तत्काल जांच, निर्माण कार्य रोकने और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

मांगें और चेतावनी

निर्माण कार्य तुरंत रोका जाए।
NIT, IIT या स्वतंत्र केंद्रीय संस्थान से कोर कटिंग और लैब टेस्टिंग कराई जाए।
ठेकेदार JD Construction पर भारी पेनल्टी, ब्लैकलिस्टिंग और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत FIR दर्ज हो।
दोषी PWD अधिकारियों पर विभागीय एवं आपराधिक कार्रवाई हो।
BoQ, टेस्ट रिपोर्ट्स, भुगतान विवरण और प्रोग्रेस रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएं।
जांच किसानों और शिकायतकर्ताओं की उपस्थिति में हो।
मानिक साहू ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई तो उच्च न्यायालय, मीडिया और किसानों के साथ उग्र आंदोलन का सहारा लिया जाएगा।

उप मुख्यमंत्री से त्वरित हस्तक्षेप की अपेक्षा

यह मामला पूरे जिले में चर्चा का विषय बन गया है। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि उप मुख्यमंत्री अरुण साव भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम उठाएंगे, अन्यथा जनता का पैसा बार-बार बर्बाद होता रहेगा और सड़कें कुछ महीनों में उखड़ती रहेंगी। क्या इस बार सरकार पारदर्शिता सुनिश्चित करेगी? यह सवाल अब हर किसी के मन में है।

नशेड़ी ड्राइवर की लापरवाही से स्कूली बच्चों की जान पर बनी आफत: वेंकटेश्वर सिग्नेचर स्कूल प्रबंधन की संवेदनहीनता और सुरक्षा में चूक पर सवाल

 

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
रायपुर, 09 जनवरी 2026 छत्तीसगढ़ के आरंग इलाके में विगत 07 जनवरी 2026 दिन बुधवार को अल सुबह एक दिल दहला देने वाला सड़क हादसा हुआ, जिसमें वेंकटेश्वर सिग्नेचर स्कूल की वैन ने तेज रफ्तार में एक ट्रक को पीछे से टक्कर मार दी। इस भयानक दुर्घटना में वैन में सवार कई मासूम स्कूली बच्चे बुरी तरह घायल हो गए। घटना की जड़ में ड्राइवर की शराबखोरी बताई जा रही है, लेकिन असली दोषी स्कूल प्रबंधन की घोर लापरवाही को माना जा रहा है, जिसने बच्चों की सुरक्षा को ताक पर रखकर एक नशेड़ी चालक को वाहन सौंप दिया। परिजनों का गुस्सा सातवें आसमान पर है, और वे प्रबंधन पर बच्चों की जिंदगी से खिलवाड़ करने का आरोप लगा रहे हैं।
घटना की पूरी तस्वीर बेहद चौंकाने वाली है। जानकारी के मुताबिक, उमरिया गांव के पास स्थित इस स्कूल की वैन महासमुंद और आरंग इलाके से बच्चों को लेकर जा रही थी। सफेद रंग की यह एसयूवी-स्टाइल वैन (पंजीकरण नंबर CG 06 GRS 5223) सुबह के समय हाईवे पर तेज गति से दौड़ रही थी। चालक और उसके साथी दोनों शराब के नशे में इतने धुत थे कि वाहन पर उनका कोई नियंत्रण नहीं रहा। अचानक वैन आगे चल रहे एक भारी ट्रक के पिछले हिस्से से जा टकराई, जिससे वैन का अगला हिस्सा पूरी तरह चकनाचूर हो गया। इंजन, बंपर, ग्रिल और विंडशील्ड सब बिखर गए, और सड़क पर मलबे के टुकड़े बिखर पड़े। ट्रक के पीछे लदे सामान की वजह से टक्कर और भी जोरदार हुई, लेकिन शुक्र है कि ट्रक चालक को ज्यादा चोट नहीं आई।
हादसे के तुरंत बाद जो हुआ, वह स्कूल प्रबंधन की असंवेदनशीलता की मिसाल है। घायल बच्चों को फौरन अस्पताल पहुंचाने की बजाय, प्रबंधन ने उन्हें स्कूल कैंपस में ही ले जाने का फैसला किया। यह फैसला बच्चों की हालत को और बिगाड़ सकता था, क्योंकि कई बच्चों के सिर, हाथ-पैर और चेहरे पर गंभीर चोटें आई थीं। कुछ बच्चे सदमे में थे और रो-रोकर सहमे हुए थे। परिजनों को जब इसकी खबर मिली, तो उनका गुस्सा फूट पड़ा। वे स्कूल पहुंचे और प्रबंधन पर जमकर बरसे। एक अभिभावक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “हम अपने बच्चों को स्कूल इसलिए भेजते हैं कि वे सुरक्षित रहें, लेकिन यहां तो प्रबंधन ने एक शराबी को ड्राइवर बना दिया। क्या बच्चों की जान इतनी सस्ती है?” परिजनों का आरोप है कि स्कूल ने ड्राइवर की जांच-पड़ताल नहीं की, न ही कोई बैकग्राउंड चेक किया, जो कि बच्चों की परिवहन सुरक्षा के लिए अनिवार्य है।
स्कूल प्रबंधन की तरफ से आशीष गुप्ता ने मीडिया से बातचीत में सफाई दी कि उन्होंने ड्राइवर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी है और स्कूल का नाम बदनाम न करने की अपील की। लेकिन परिजनों और स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सिर्फ लीपापोती है। प्रबंधन ने हादसे की गंभीरता को हल्के में लिया और बच्चों की सेहत पर ध्यान नहीं दिया। वेंकटेश्वर सिग्नेचर स्कूल, जो खुद को “क्रिएट योर ओन सिग्नेचर” जैसे नारे से प्रचारित करता है, अब अपनी ही लापरवाही के कारण सवालों के घेरे में है। स्कूल का भव्य कैंपस और आधुनिक सुविधाएं बच्चों की सुरक्षा की गारंटी नहीं दे सकतीं, जब प्रबंधन बुनियादी नियमों की अनदेखी करे।
आरंग पुलिस को घटना की सूचना मिलते ही टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। पुलिस ने ड्राइवर और उसके साथी को हिरासत में लिया है, और उनका मेडिकल टेस्ट कराया जा रहा है ताकि नशे की पुष्टि हो सके। घायल बच्चों को अब स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है। लेकिन कई बच्चे अभी भी ट्रॉमा से गुजर रहे हैं, और उनके माता-पिता चिंतित हैं। स्थानीय ग्रामीणों ने भी इस घटना पर रोष जताया है और मांग की है कि स्कूल के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो। वे शिक्षा विभाग से अपील कर रहे हैं कि स्कूल का लाइसेंस तुरंत रद्द किया जाए और परिसर को सील कर दिया जाए, ताकि ऐसी लापरवाही दोबारा न हो।
यह हादसा न सिर्फ एक दुर्घटना है, बल्कि स्कूली परिवहन में सुरक्षा मानकों की कमी को उजागर करता है। देशभर में ऐसे कई मामले सामने आते हैं जहां नशेड़ी ड्राइवरों या खराब रखरखाव वाली गाड़ियों से बच्चों की जान जोखिम में पड़ती है। विशेषज्ञों का कहना है कि स्कूलों को ड्राइवरों की नियमित जांच, अल्कोहल टेस्ट और वाहनों की फिटनेस सर्टिफिकेट अनिवार्य रूप से लागू करनी चाहिए। इस घटना से सबक लेते हुए, शिक्षा विभाग को सभी स्कूलों की जांच करानी चाहिए ताकि मासूमों की जिंदगी सुरक्षित रहे।
अगर आपके पास इस घटना से जुड़ी कोई जानकारी है या आप प्रभावित हैं, तो स्थानीय पुलिस या शिक्षा विभाग से संपर्क करें। बच्चों की सुरक्षा हम सबकी जिम्मेदारी है, और ऐसी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जा सकती।