Home Blog Page 34

मुख्य मार्ग बन गया है गरियाबंद हाई स्कूल का खेल मैदान…?

 

असामाजिक तत्वों की जमती है, हर शाम महफिले उड़ती है गांजे धुएं, टूटती है शराब की बोतले..?

विशेष संवाददाता सुनील यादव
गरियाबंद। वर्तमान समय में शिक्षा का महत्व क्या है बताने की आवश्यकता नहीं है। अमीर हो या गरीब, शिक्षा हम सबके लिए जरुरी है और हमारे देश के संविधान ने हम सभी को शिक्षा का अधिकार दिया है। इसके लिए सरकार हर साल करोड़ों रूपये खर्च करती है। शायद ही ऐसा कोई गाँव हो जहाँ शिक्षा का मंदिर न हो। सरकार के अलावा ऐसे कई सामाजिक संस्थाएं, संगठन व व्यक्ति विशेष भी हैं जो किसी न किसी रूप में सहयोग करते रहते हैं, लेकिन इसे एक विडम्बना ही कहेंगे कि गरियाबंद का हाई स्कूल शासन की अनदेखी का शिकार हो चला है। चारों ओर बस्ती से घिरे इस हाई स्कूल के खेल मैदान का अस्तित्व धीरे-धीरे मिटने के कगार पर है।

💥खिलाड़ियों से गुलजार रहता है ये मैदान:-

यहाँ न जाने कितने राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर के खेल प्रतियोगिताएं होती रही हैं, गरियाबंद जिला मुख्यालय का यह एक ऐसा हाई स्कूल खेल मैदान है जहाँ आज भी बच्चों व छात्र-छात्राओं के साथ स्थानीय लोग भी बॉलीबॉल, क्रिकेट, दौड़, हॉकी या अन्य खेल खेलने यहां आते हैं। इस मैदान में शीतकालीन मौसम में 4 महीने कई खेल की ट्रेनिंग भी करते हैं।

💥बन रहा असामाजिक तत्वों का अड्डा :-

स्कूल मैदान का गेट जो कि बरसों से टूटा हुआ है जिसे आज तक नहीं लगाया गया, मैदान के चारों ओर बाउंड्री (दीवार) के टूट जाने के चलते यह खेल का मैदान शराबियों और गंजेडियों का अड्डा बन गया है, जो मैदान खेल के नाम से सुरक्षित और आरक्षित होनी चाहिए उस मैदान में शाम ढलते ही शराबियों के महफिल जमने लगते हैं। नशे की झोंक में फोड़ दिए गए शराब की बोतलों के कांच के टुकड़े जगह–जगह पर बिखरे नजर आ जायेंगे, सामने ही क्रीड़ा परिसर है जहाँ छात्र इस मैदान में आकर सुबह शाम दौड़ लगाते हैं,जरा सोचिए की इस बीच कोई कांच का टुकड़ा यदि चुभ जाए तो क्या होगा ?

💥विकास के नाम पर करोड़ों की स्वीकृति :-

गरियाबंद को जिले का रूप दिए जाने के बाद से ही अक्सर यह होता आया है कि जिस धरोहर को हमें संजोकर सुरक्षित रखना चाहिए उसे नष्ट होते हमारे ही बीच के प्रतिनिधि या प्रशासन में बैठे अधिकारीगण देखते रहते हैं। करोड़ों–अरबों रुपए जिला मुख्यालय में विकास की गंगा बहाने के नाम पर स्वीकृत तो होती है किंतु वह कार्य नहीं होता जो कराना या होना आवश्यक होता है।

💥अपनी सुविधा के लिए तोड़ दिये बाउंड्री :-

बीच बस्ती में स्थित स्कूल मैदान के चारों तरफ बनी बाउंड्री (दीवार) को आसपास के लोगों ने अपने–अपने घरों के सामने तोड़कर रास्ता का रूप दे दिया है और बीच मैदान से लोग आम निस्तारी का रास्ता बनाकर आवागमन करते हैं। इनमें कुछ ऐसे भी होंगे जिनके बच्चे इस स्कूल में पढ़ते होंगे या पढ़ कर निकल चूके होंगे। सवाल उठता है, ऐसे में कौन करेगा इस खेल मैदान की रक्षा ? इस मैदान में उपद्रव करने वालों पर रोकटोक क्यों नही है ? अपने निज स्थान धरोहर की रक्षा में हम सामने नहीं आयेंगे तो और कौन आएगा ?
स्कूल मैदान के चारों तरफ यदि दीवारें दुरुस्त कर गेट लगाकर एक चौकीदार की व्यवस्था कर दी जाती तो इस मैदान की सुरक्षा बेहतर तरीके से किया जा सकता है। वास्तव में देखा जाय तो हकीकत की तहतक की जो तस्वीरें सामने आ रही हैं उससे तो यही प्रतीत होता है कि शिक्षा का राग अलापने वाले न तो नेता मंत्री ध्यान दे रहे हैं और ना ही स्थानीय प्रशासन। यही हाल रहा तो वह दिन दूर नहीं जब लोग गरियाबंद में खेल प्रतियोगिताओं के लिए मैदान ढूंढते रह जायेंगे।

बीजापुर विधायक से प्रमाण पत्र की आवश्यकता नही केदार कश्यप पर आरोप लगाने से पूर्व खुद के गिरेंबान में झांके

 

बस्तर का हर एक कार्यकर्ता में है भाजपा के प्रति समर्पण भाव चित्रकोट विधानसभा से कांग्रेस की हार पर चुप क्यों है मंडावी

बीजापुर / नारायणपुर
बीजापुर विधायक द्वारा वन मंत्री केदार कश्यप्प पर लगाये गये आरोप को लेकर भाजपा नेता जी. वेंकट ने आड़े हाथों लेते हुए कहा कि किसी कांग्रेस के विधायक से चुनाव परिणामों को लेकर प्रमाण पत्र की आवश्यकता नही है।
बस्तर लोकसभा चुनाव मंत्री केदार कश्यप के साथ साथ हर एक कार्यकर्ता ने धरातल पर आकर कार्य करके 50 हजार से भी अधिक मतों से चुनाव में विजयश्री प्राप्त कर ली है।

बीजापुर विधायक विक्रम मंडावी द्वारा वन मंत्री केदार कश्यप पर लोकसभा चुनाव में निष्क्रिय रहने के आरोप के बाद बीजापुर जिला भाजपा के पूर्व अध्यक्ष जी वेंकट ने कहा कि कांग्रेसी नेता स्वयं अपने गिरेबांन में झांके। बस्तर लोकसभा सीट से भाजपा प्रत्यासी महेश कश्यप जी ने 50 हजार से अधिक मतों से जीत हासिल की है और जीत में प्रदेश अध्यक्ष किरण देव जी, वनमंत्री केदार कश्यप जी सहित भाजपा के प्रत्येक कार्यकर्ताओं ने धरातल पर आकर कार्य किया और 6 बार के विधायक को पटखनी दे दी। श्री वेंकट ने कहा कि बस्तर लोकसभा सीट से चित्रकोट, दंतेवाड़ा,कोन्टा से कांग्रेस को मुंह की खानी पड़ी है जबकि चित्रकोट से स्वयं प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज का गृह विधानसभा है बावजुद इसके उक्त विधानसभा से 7502 व्होट की लीड भाजपा को है। क्या विधायक मंडावी प्रदेश अध्यक्ष बैज से इस हार का कारण पुछेंगे। क्या उनसे भी वही सवाल करेंगे जो श्री केदार कश्यप जी के लिऐ कर रहे है।

इसी तरह दंतेवाड़ा विधानसभा से कांग्रेस भाजपा से 12884 मतो से पीछे थी तो क्या इसके लिए श्रीमति देवती कर्मा को दोषी ठहरायेंगे। इसी तरह कोंटा विधानसभा सीट से स्वयं कांग्रेस से लोकसभा प्रत्यासी रहे 6 बार के विधायक कवासी लखमा 4000 व्होटो से पीछे रह गये क्या इसमें भी कवासी लखमा की भाजपा से सांठगांठ थी। श्री वेंकट ने कहा कि विक्रम मंडावी की जमीन धीरे-धीरे खिसक रही है इसलिये अनापशनाप बयानबाजी कर रहे है। श्री वेंकट ने कहा कि विधायक श्री मंडावी अपनी पार्टी कांग्रेस की चिंता करे, इस चुनाव में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सहित कई दिग्गज धराशाही हुए है। उसकी समीक्षा करें। रही बात केदार कश्यप जी की तो बस्तर के हर भाजपा कार्यकर्ता को अपने परिवार की तरह रखा है और बस्तर की राजनीति में कश्यप परिवार का योगदान अमूल्य है।

कांग्रेस के दुष्प्रचार के बाद भी मिली लीड

नारायणपुर भाजपा जिलाध्यक्ष रूपसाय सलाम ने कहा कि बीजापुर विधायक विक्रम मंडावी सिर्फ बयानबाजी करके मीडिया में अपनी उपस्थिति दर्ज कराना चाहते है। नारायणपुर विधानसभा में भाजपा को विषम परिस्थितियों के बावजुद 4500 से अधिक व्होटो की लीड मिलना लाखों के बराबर है। विधायक विक्रम मंडावी को अच्छी तरह से पता होगा कि किस तरह से धर्मांतरण व नक्सलवाद का आतंक फैला कर कांग्रेस ने भाजपाईयों को चुनाव प्रचार से रोकने का असफल प्रयास किया।
लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा कार्यकर्ताओ की हत्या व नक्सल धमकी के बाद भी भाजपा कार्यकर्ता मंत्री केदार कश्यप के नेतृत्व में दिन रात जुटे रहे।
कांग्रेस ने संपूर्ण बस्तर लोकसभा क्षेत्र में फर्जी आरक्षण का विडियों
वायरल कर आदिवासी क्षेत्रों मे दुष्प्रचार करने का प्रयास किया था लेकिन यहां के आदिवासी उसके झांसे में नही आये। इस विधानसभा में कांग्रेस व लखमा के बेटा हरीश कवासी रात में भी चुनाव प्रचार करती थी जबकि भाजपा
कार्यकर्ताओ को नक्सलियों द्वारा धमकी दी जाती थी।

रायपुर में शिवमहापुराण कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा के कार्यक्रम का आज अंतिम दिन….! किया बड़ा कांठ दोषी कौन…?

 

पीड़िता आरती राजपूत ने अम्लेश्वर थाने दर्ज कराई शिकायत कहा इनके विरुद्ध कड़ी कार्यवाही होनी चाइए।

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
रायपुर / छत्तीसगढ़ कहते है आप साल के 365 दिनों में 364 दिन अच्छे कार्य करते है और एक दिन आप कुछ के साथ गलत करते है तो आपके एक दिन की गलतियों का हरजाना 364 दिनों के अच्छे कार्यों की गिनती नहीं गिनी जाती है। ऐसे ही हिन्दुत्व के प्रति लोगों में भगवान शिव की महिमा का बखान व पूजा अर्चना हेतु प्रचार प्रसार करने वाले

मध्यप्रदेश के सीहोर आश्रम के प्रसिद्ध शिवपुराण कथावाचक पं. प्रदीप मिश्रा का कार्यक्रम 27 मई से 2 जून तक
आयोजित कथा का आज समापन दिवस है।
स्थानीय महादेव घाट से लगभग चार किलोमीटर की दूरी पर अमलेश्वर के समीप 55 एकड़ क्षेत्र में शिवपुराण कथा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम पूर्व अनुमान लगाया गया था कि, इस कथा वाचन कार्यक्रम में चार लाख से अधिक श्रद्धालु कथा सुनने पहुंचेंगे।
श्रद्धालुओं के बैठने के लिए दो लाख वर्गफीट क्षेत्र में तीन भव्य डोम का निर्माण किया गया था । एक डोम में एक लाख श्रद्धालु बैठ सकेंगे। ऐसी व्यवस्था बनाई गई थी । वीवीआइपी पर्सन के लिए दो हजार सोफा, पांच हजार कुर्सियों की व्यवस्था भी की गई थी । कथा स्थल के समीप ही पार्किंग की व्यवस्था की गई थी। जो की नौतपा की गर्मी में श्रद्धालुओं को ज्यादा पैदल ना चलना पड़े। कथा स्थल पर 100 से ज्यादा सीसीटीवी से निगरानी की जाएगी। पंडाल के आसपास ठंडकता के लिए फव्वारे भी लगाए जा रहे हैं।
शिवमहापुराण कथा के मुख्य आयोजक विशाल खंडेलवाल, पवन खंडेलवाल के अनुसार छत्तीसगढ़ के अलावा मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा से भी हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचेंगे। बाहर से आने वालों के लिए पंडाल में ही सोने की व्यवस्था की गई थी । साथ ही प्रतिदिन 50 हजार श्रद्धालुओं के लिए भोजन की भी व्यवस्था रखी गई थी।

*इतनी व्यवस्थाओं के बा वजूद एक श्रद्धालु परिवार के साथ मारपीट क्यों..?*

रायपुर के महादेव घाट से चार किलोमीटर की दूरी पर स्थित ग्राम अम्लेश्वर जो कि,जिला दुर्ग विकासखंड पाटन अंतर्गत आता है। अम्लेश्वर निवासी श्रीमती आरती राजपूत ने थाना अम्लेश्वर में लिखित शिकायत पत्र दिए हुए है।

शिकायत पत्र में उन्होंने स्पष्ट किया है कि,विगत 01 जून 24 को पंडित प्रदीप मिश्रा के आयोजित कार्यक्रम में स्थल में श्रीमती आरती राजपूत पति कुलेश्वर राजपूत अपने दो बच्चों के साथ पहुंचे थे। उन्होंने पूर्व में भी प्रदीप मिश्रा से मिलने हेतु विगत दिनांक 28.05.24 को दोपहर 2 बजे कार्यक्रम आयोजक विवेक खंडेलवाल से मुलाकात किए। मुलाकात में उन्होंने पीड़ित परिवार को मोबाइल नंबर 9827946425 दिए। मोबाइल में बात करने पर बोले आप वंदना खंडेलवाल दीदी से मिल लो बोले,वंदना खंडेलवाल बोली मैं नहीं मिलवाऊंगी। ठीक उसी वक्त बसंत अग्रवाल वहा पर पहुंचे उन्होंने कहा महाराज किसी से नहीं मिलेंगे।
पीड़ित परिवार द्वारा बच्ची की हट के चलते निवेदन किया गया। हमको नही तो केवल हमारी बच्ची को महाराज से मिलवा के ला दो।
लेकिन बसंत अग्रवाल इतने में उत्तेजित हो उठे और सुरक्षाकर्मियों को आवाज दिए जिसमे पंडित प्रदीप मिश्रा के दो बॉडीगार्ड दौड़कर आए और आते ही श्रीमती आरती राजपूत को दो थप्पड़ मारे उतने में दो महिला कर्मी भी पहुंचे और बाल खींच खींच कर मारे मेरे पति कुलेश्वर राजपूत के विरोध करने पर उनको भी मारे और कार्यक्रम स्थल के बाहर निकाल दिए।
घटना पश्चात 112 हेल्पलाइन नंबर में डायल करने पर पहुंचे 112 के कर्मियों द्वारा भी कुछ एक्शन नहीं लिया गया। कुछ देर बाद पुलिस की एक और गाड़ी वहा पर आई जिसमे 3 पुलिसकर्मी पुरुष व 2 महिलाकर्मी पुलिस थे। उन्होंने हमे ही धमकाने लगे यहां पर गुंडागर्दी क्यों कर रहे हो। उन्होंने भी हमे वहा से भगाने लगे। थोड़ी देर बाद लग-भग 10 – 12 पुलिसकर्मी और आ गए। वे लोग भी हम लोगों से ऐसी बदतमीजी करने और कहने लगे यहां से भागो नही तो हम लोग भगाएंगे तो भाग भी नही पाओगे ऐसा कहने लगे।
सुरक्षाकर्मियों की मार से मेरी दाहिने हाथ ,कान व आंख में अंदरूनी चोटे आने के कारण मैं बेहोश हो गई थी। होश आने पर मैं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र झीट में थी।
मीडिया कर्मियो से मुखातिब होते हुए। राजपूत परिवार ने पंडित प्रदीप मिश्रा के सुरक्षाकर्मी एवम बसंत अग्रवाल आयोजक के विरुद्ध उचित कार्यवाही की करने गुहार लगाई है।

रायपुर अम्लेश्वर में पंडित प्रदीप मिश्रा के कार्यक्रम में सुरक्षाकर्मी द्वारा एक परिवार की जमकर पिटाई कर दिए है।

 

पीड़ित परिवार को कार्यक्रम स्थल से बाहर भगा दिया गया है।

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
रायपुर / इस वक्त की सबसे बड़ी खबर रायपुर के अमलेश्वर मैं पहुंचे पंडित प्रदीप मिश्रा के कार्यक्रम में एक पूरे परिवार को जमकर मारपीट की गई है।
पीड़िता आरती राजपूत अपने परिवार के साथ प्रदीप मिश्रा के कार्यक्रम में शामिल होने गई थी। बच्ची को जिद के कारण माता पिता ने प्रदीप मिश्रा के सुरक्षाकर्मी के द्वारा पूरे परिवार की जमकर पिटाई कर बाहर कार्यक्रम स्थल से बाहर निकाल दिए है। इस तरह से ऐसी घटना बहुत ही निंदनीय है। ऐसी घटना को अंजाम देने वालों के विरुद्ध त्वरित कार्यवाही होनी चाइए।

जीवन बहुत ही कष्ट कारक थे, लेकिन हार नही माने मिली कामयाबी …!

 

कामयाबी की मिशाल है, जामुल निवासी दिलीप साहू

जामुल / अनेक विद्वानों ने जीवन को इस रूप में देखा या जिया है कि जीवन एक संघर्ष है। संघर्ष-हीन जीवन मृत्यु का पर्याय है। संघर्ष वह अज्ञात शक्ति है जो व्यक्ति को निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। इसलिए संघर्ष के अभाव में जीवन का सही आनंद नहीं उठाया जाता।

जीवन में संघर्ष है प्रकृति के साथ, स्वयं के साथ, परिस्थितियों के साथ। तरह-तरह के संघर्षों का सामना आए दिन हम सबको करना पड़ता है और इनसे जूझना होता है। जो इन संघर्षों का सामना करने से कतराते हैं, वे जीवन से भी हार जाते हैं, जीवन भी उनका साथ नहीं देता। हर सफल इंसान की जिंदगी में एक संघर्ष की कहानी जरूर होगी।

हम एक सफल इंसान को तो देखकर बहुत खुश होते हैं और उसके लिए गर्व महसूस करते हैं। पर उनके जीवन की सफलता के पीछे की संघर्ष की कहानी से बिल्कुल अनजान होते हैं! जब हम जीवन में संघर्ष कर रहे होते हैं, तो आंतरिक शांति बनाए रखना बहुत मुश्किल है। एक बात याद रखना चाहिए कि जब हमारे जीवन में चीजें अलग हो रही होती हैं तो वे हमारे भले के लिए ही होती हैं।


इसी संघर्षों से जुडी जामुल के एक संघर्षशील व्यक्ति से रू ब रू कराते है – *मेहनत की लत, नशा शर्मसार*

दिलीप कुमार साहू (सार्वा) का जन्म 25 जून 1971 को संतोषी चौक के पास, जामुल जिला दुर्ग (छत्तीसगढ़) में हुआ । इनके पिता स्व. रामसिंह साहू व माता श्रीमती कलाबाई साहू के चार सुपुत्र एक सुपुत्री में एक बड़े भाई व एक बड़ी बहन के बाद आपका नंबर आता है।
इनके पिता एक प्राइवेट कंपनी में कार्य करते हुए अपने परिवार का भरण पोषण सहित बच्चों की स्कूली शिक्षा में भी पीछे नहीं हटे । इनके पिता की परिवार की जिम्मेदारियों को पूरा करते हुए आकस्मिक निधन हो गया । दिलीप साहू की शिक्षा कक्षा आठवीं तक ही सिमट के रह गई । दिलीप साहू घर बड़ा पुत्र और भाई होने के नाते घर की संपूर्ण जवाबदारी आपके और आपकी मां पर आ गई ।


पारिवारिक जिम्मेदारियो के चलते पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी। काम की तलाश में भटकना पड़ा ।
आपकी कार्य की शुरुआत जिले से सटे ग्रामों में जाकर साप्ताहिक बाजार में सब्जी बेचने का कार्य शुरू किया गया । दिलीप साहू ने अपने जीवन काल में मेहनत के रूप में अनेकों कार्य पान की टपरी , सायकल रिपेयरिंग की दुकान, चाय की टपरी भी लगाना पड़ा । इस दौरान आप लोहे की आलमारी बनाने का काम शुरू किये जहां आप मेहनत करते हुए सफलता पूर्वक आलमारी बनाने में महारत हासिल किए । आप के कदम सफलता की सीढ़ी की ओर बढ़ने लगे । इस दौरान आपकी शादी हुई, आपके 2 बच्चें हुए ।
आप ने अपनी मेहनत में कभी कोताही नहीं बरते आप मेहनत करते रहें और कामयाबी आपकी कदम चूमती रही। इस दौरान आप अपनी कड़ी मेहनत से कई प्रतिष्ठान बनाकर ग्राम जामुल के सफल नागरिक बन नया कीर्तिमान रचे है ।
आपकी मधुर वाणी, व्यवहार, ईमानदारी, आप निश्चित रूप से सामाजिक, आर्थिक एवं आध्यात्मिक क्षेत्र में भी आपका एक सर्वोच्च स्थान है ।

मेडिकल कॉलेज में एक्स-रे अल्ट्रासाउंड और लिथोट्रिप्सी मशीन खराब..?

एक्सरे फोटो प्रिंट नही निकल रहा मोबाईल से चला रहे है काम

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुंद / आधुनिक युग का नया भारत आज नौतपा ने लोगो को इतना व्याकुल कर रखा है। बात करे तापमान की तो 44 डिग्री से नीचे नही आ रहा है । इंसान अपने शरीर का तापमान 37 डिग्री तक झेल सकता है किन्तु 44 डिग्री का तापमान शायद बर्दास्त से बाहर है। अब का समय वो समय आ गया मानो लोग सुबह नौ बजे से अपने घरों से निकलने कतरा रहे है। वही मेडिकल कॉलेज महासमुंद में व्यवस्थाओं की कमी के चलते लोगो को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। लाखो नही करोड़ो रुपए स्वास्थ्य के पीछे सरकार सुविधाएं मुहैया करा रही है। वही दूसरी ओर स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह से चरमराई हुई है। मेडिकल कॉलेज में सुविधाओं की भारी कमी है। एक्स-रे अल्ट्रासाउंड और लिथोट्रिप्सी मशीन खराब हो गई है।
मेडिकल कॉलेज में सुविधाओं की कमी के चलते लोगों के इलाज को लेकर खानापूर्ति हो रही है।


मेडिकल कॉलेज प्रबंधन पर सवाल उठ रहे हैं कि, ऐसा क्या कारण है कि मेडिकल कॉलेज में कोई भी मशीन ठीक से काम नहीं करती या फिर बंद पड़ी है।
मेडिकल कॉलेज में विगत 4 -5 दिनों से एक्सरे मशीन कार्य नहीं कर रहा है। जिससे मरीजों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

एक्सरे मशीन से प्रिंट नही निकल पा रहा है मोबाइल से काम चला रहे है।
बसंत माहेश्वरी
(अधीक्षक  मेडिकल कॉलेज महासमुंद)

साईं पीकरी धाम टेका को धार्मिक पर्यटक स्थल घोषित करने की मांग

 

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
गरियाबंद / जिले के राजिम तहसील स्थित छोटा सा गांव टेका जहां साईं बाबा की ग्राम देवता के रूप में प्राचीन समय से पूजा होती है , कहा जाता है कि सदियों पहले श्री शिरडी साईं का अपने शिष्यों के साथ आगमन हुआ था और तब से वह स्थान साई पीकरी कहलाने लगा और धीरे धीरे अपने सेवक मोहन ठाकुर की सेवा भक्ति और प्रचार प्रसार से यह स्थान साई पीकरी धाम कहलाने लगा ।
दिन , दुखी, अनाथ, बेसहारा और बुजुर्गो की सेवा करते हुए मोहन ठाकुर साईं भक्तो के सहयोग से समय समय पर सामाजिक कार्य , धार्मिक और जन कल्याणकारी कार्यक्रमों जिनमें प्रमुख रुप से निशुल्क चिकित्सा शिविर, गरीबों को वस्त्र ,कम्बल , शाल वितरण , गरीबों को भोजन , स्कूली बच्चों को पेन , कापी , किताब, पेन्सिल वितरण, बुजुर्गो का सम्मान, शिक्षकों का सम्मान, विभिन्न क्षेत्रों में प्रतिभावान छात्र-छात्राओं का सम्मान और जरुरत मंदों को सहयोग किया जाता है ।कोविड (कोरोनाकाल) में भी साईं पीकरी धाम टेका और साईं सेवा संस्थान राजिम में जन सेवा की गयी थी ।
25 मई 2006 से निरन्तर साईं भक्ति में समर्पित मोहन ठाकुर ने लगातार साईं पीकरी धाम टेका के विस्तार के लिए प्रयास किया मगर अभी तक किसी जन प्रतिनिधि ने ध्यान नहीं दिया है तब छत्तीसगढ़ के सभी साईं भक्तो , छत्तीसगढ़ वासियों और जन प्रतिनिधियों से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में साईं बाबा का प्राचीन स्थान होना साईं भक्तो और छत्तीसगढ़ वासियों के लिए गौरव की बात है देश विदेश के साईं नेटवर्क में साईं पीकरी धाम टेका की चर्चा है साईं पीकरी धाम टेका को धार्मिक पर्यटन स्थल घोषित करने से छत्तीसगढ़ की प्रतिष्ठा और बढ़ जायेगी । महाराष्ट्र के अलावा कहीं भी साईं बाबा का प्राचीन स्थान नहीं है और ना सरकार द्वारा अधिकृत किया गया स्थान ।
साईं पीकरी धाम टेका के धार्मिक पर्यटक स्थल बनने से छत्तीसगढ़ में साईं भक्ति प्रवाह की दिशा में आमूलचूल परिवर्तन होगा ।
हम सभी साईं भक्त और क्षेत्र वासी साईं पीकरी धाम टेका को धार्मिक पर्यटक स्थल घोषित करने की मांग करते हुए अपना समर्थन देते हैं ।
समर्थन देने वालों में प्रमुख रूप से मोहन ठाकुर ,रूपेश ,लोकनाथ, रोहित,आदि, माताएं बहनें आदि उपस्थित थे ।

शाबाश – महासमुंद पुलिस लोहानी बिल्डिंग में सुनियोजित तरीके से दफन लाश के सभी आरोपी अब सड़ेंगे जेल में..!!

 

आकर्षण से जन्मे प्रेम का अंजाम किसी न किसी को अपनी जान देकर चुकानी पड़ती है।

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुंद। अक्सर हम टीवी चैनल में सावधान इंडिया , क्राइम पेट्रोल जैसी सीरियल देखकर सीख लेते है कि, गलत तरीके से जन्मे रिश्ते का अंजाम बड़ा भयानक व भयावह होता है।

विगत दिनों महासमुन्द हड़कंप मचाने वाला मामला आया जिले के पूर्व विधायक गली लोहानी बिल्डिंग के कमरे में दफन लाश की गुत्थी पुलिस ने सुलझा लिया है। हत्यारा कोई और नहीं बल्कि मृतक यपेश चंद्राकर की पत्नी देविका चन्द्राकर व आशिक मुकुंद त्रिपाठी ने अवैध संबंध के चलते साथ मिलकर हत्या की थी। पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लाश को दफनाने में मदद करने वाली मृतक के सास की तलाश कर रही है।
कोतवाली थाना में आवेदिका देविका चन्द्राकर ने 14 दिसंबर 2023 को थाना आकर सूचना दी कि उसका पति 8 दिसंबर से लापता है। पुलिस ने गुम इंसान कायम कर जांच शुरू की। पुलिस को 6 माह बाद जानकारी हुई कि आवेदिका का अपने पड़ोसी से अक्सर मोबाइल पर बातचीत होता था। पुलिस ने जब आवेदिका के मोबाइल का काल डिटेल निकाला तो कहानी प्रेस प्रसंग की ओर इशारा कर रहा था।

पुलिस ने आवेदिका के पड़ोसी ज्योतिषी मुकुंद त्रिपाठी को थाना बुलाकर पूछताछ की तो मुकुंद ने पहले तो घुमाने का प्रयास किया। पुलिस ने जब कड़ाई से पूछताछ किया तो मुकुंद टूट गया और पूरी कहानी बता दिया। पुलिस ने प्रेसवार्ता में बताया कि आवेदिका देविका के पति ( मृतक ) यूपेश को दोनों के प्रेम संबंध की जानकारी लग गयी थी और इसी बात को लेकर दोनों पति- पत्नी में अक्सर झगड़ा हुआ करता था । चूंकि आवेदिका का पति शराब का आदि था इसलिए रोजाना विवाद हुआ करता था।

घटना दिनांक 8 दिसंबर को दोपहर आवेदिका का पति यूपेश चन्द्राकर शराब पीकर आया और अपनी पत्नी से उसी बात को लेकर झगड़ा करने लगा। विवाद बढ़ने पर मृतक यूपेश ने डंड़ा लेकर अपनी पत्नी (आवेदिका ) देविका को मारना चाहा। तब तक उसका पडोसी व देविका का आशिक मुकुंद भी वहाँ आ गया।

देविका ने अपने पति से डंडा छीनकर अपने पति के सिर पर दे मारा। उसके बाद आशिक पड़ोसी मुकुंद ने यूपेश को धक्का दे दिया, जिससे यूपेश जमीन पर गिर गया और तत्काल उसकी मौत हो गयी।

प्लानिंग पश्चात कार्य को अंजाम दिया गया।

उसके बाद देविका व उसकी मां अंजनी चन्द्राकर व मुकुंद ने मृतक यूपेश को प्लास्टिक के बोरी में बांधकर मुकुंद के कमरे में रख दिया । घटना के दो दिन बाद देविका व प्रेमी मुकुंद ने एक बाक्स में भरकर उसे मुकुंद के आफिस लोहानी बिल्डिंग ले गये । जहां एक कमरे में 5 फुट गहरा गड्ढा खोदकर दफना दिया । पुलिस ने मुकुंद की निशान देही पर उसके आफिस से यूपेश की बाडी रिकवर कर हत्या में प्रयुक्त डंड़ा, फावड़ा आदि जब्त कर धारा 201, 302, 34 के तहत मामला दर्ज कर आवेदिका देविका, प्रेमी मुकुंद को गिरफ्तार कर लिया है और लाश को ठिकाने लगाने में मदद करने वाली मृतक की सास अंजनी चन्द्राकर की तलाश कर रही है।

महासमुन्द के लोहानी बिल्डिंग में छह माह से दबी थी लाश, निकली तो मची हड़कंप – क्या है पूरा राज..!!

 

बिरकोनी निवासी युपेश चंद्राकर की मौत का राज, कितनो को सलाखों तक लेकर जायेगी पीएम रिपोर्ट आने तक की है आस..!

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुंद / कहते है बुरे कर्मो का फल आज नही तो कल यदि आप किसी के साथ गलत किए हो तो भुगतना पड़ेगा। जिले में लगातार अनगिनत खुलासे हो रहे है। महासमुंद जिले में ये पहली ऐसी घटना है जो विगत छह माह से दफन थी। इसको हारर जैसी फिल्मों या फिर दृश्यम जैसी फिल्मों से अंदाजा लगाया जा सकता है जो चीख चीख कर कहता है मेरे साथ ना इंसाफी हुई है मुझे इंसाफ चाइये। इसी तारतम्य में जिले के कोतवाली थाना अन्तर्गत अब तक की सबसे बड़ी घटना जिससे इंसान की रूह कांप उठेगी और पूरा शहर सदमे में है। घटना सामने आने से हडकंप मच गया। दरअसल कोतवाली पुलिस को 14 दिसबंर से लापता यूपेश चन्द्राकर उम्र 41 वर्ष निवासी बिरकोनी के संदर्भ में कुछ जानकारी मिली तो पुलिस ने आरोपी मुकुंद त्रिपाठी को हिरासत में लेकर पूछताछ किया तो सारा माजरा सामने आ गया। आरोपी मुकुंद ने पुलिस को बताया कि यूपेश चन्द्राकर की हत्या कर वह अपने आफिस के एक कमरे में 5 फुट गड्ढा खोदकर दफना दिया है। पुलिस ने आरोपी के निशान देही पर लोहानी बिल्डिंग के आफिस से लाश को बरामद किया और मृतक के भाई मनीष चन्द्राकर ने उसकी शिनाख्त की। मृतक की बाडी 40 प्रतिशत डिकंपोज हो चुकी है। पुलिस ने मजिस्ट्रेट के समक्ष लाश का पंचनामा कर बाडी को पीएम हेतु जिला चिकित्सालय भेज दिया गया है ।

पीएम रिपोर्ट पश्चात और भी खुलासे होने वाले है कि, मृतक की मौत किन कारणों से और कैसे की गई है।

महासमुन्द सिटी कोतवाली प्रभारी मोनिका श्याम ने बताया कि, मृतक खेती किसानी व फर्शी खदान चलाता था और मृतक की पत्नी ज्योति चन्द्राकर शिक्षिका है। मृतक अपनी पत्नी के साथ नवबंर 2023 मे
बिरकोनी से महासमुंद आकर क्लबपारा में रहते थे और उसी बगल में आरोपी मुकुंद त्रिपाठी भी रहता था। मुकुंद त्रिपाठी किराये पर लोहानी बिल्डिंग मे अपना आफिस बनाकर रखे थे । मुकुंद ज्योतिषी का काम किया करते थे । मुकुंद व मृतक यूपेश में अक्सर विवाद होता था।
8 दिसंबर से मृतक लापता थे
जिसकी लापता की रिपोर्ट परिजनो ने 14 दिसंबर को सिटी कोतवाली दर्ज कराए थे ।
समाचार लिखे जाने तक वास्तविकता व कथित कारण से मौत का से अनभिज्ञ है।

बने रहिए बेबाक बयान न्यूज़ के साथ
हर बात खुलकर,हर राज खुलकर

महासमुंद लोहानी बिल्डिंग में नर कंकाल मिलने से मचा हड़कंप..?

 

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुंद / स्थानीय विधायक गली लोहानी बिल्डिंग में नर कंकाल मिलने से मचा हड़कंप।
सुविज्ञ सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार 7 से 8 माह पूर्व गुमसुदा व्यक्ति की कंकाल मिला है। सूत्र अनुसार लड़का बिरकोनी का बताया जा रहा है। समाचार लिखे जाने तक पुलिस की टीम जांच में जुटी हुई है।