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सड़कों पर आवारा मवेशियों का जमावड़ा,प्रतिदिन हादसे को कर रहे आमंत्रित..?

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हाई कोर्ट और कलेक्टर के आदेश का नहीं हो रहा है पालन।

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुंद / जिले में माननीय न्यायालय और जिला कलेक्टर के आदेश को ठेंगा दिखाने का काम किया जा रहा। जिम्मेदारी सिर्फ कागजों में तय दिख रही है। धरातल में सिर्फ लापरवाही नजर आ रही है।
हम आपको बता दें कि हाई कोर्ट के आदेश के बाद महासमुंद कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने 29 अगस्त को समय सीमा की बैठक में यह आदेश किया था कि सड़क में बैठे आवारा पशुओं को हटाया जाए। कलेक्टर इसका पालन कड़ाई से करने के निर्देश दिए थे। लेकिन दुर्भाग्य इस बात का हैं कि कलेक्ट्रेट रोड में ही रोजाना दिन और रात सैकड़ों मवेशी बीच सड़क पर बैठे रहते हैं। कलेक्ट्रेट सड़क की बात तो छोड़िए कलेक्टर बंगले के सामने भी आपकी बीच सड़क में मवेशियों का जमावड़ा दिखेगा।
9 सितम्बर की सुबह नेशनल हाईवे 53 झलप तोरला पड़ाव पास एक अज्ञात वाहन ने 10 मवेशियों को कुचल दिया। जिसमें 6 मवेशियों की घटना स्थल पर ही मौत हो चुकी थी।

हम आपको बता दें कि कलेक्टर ने विगत समय सीमा की बैठक में राष्ट्रीय राजमार्ग और सड़कों पर मवेशियों के जमवाड़ा को रोकने के लिए ग्राम पंचायत एवं नगरीय निकायों को जिम्मेदारी दिए थे। राष्ट्रीय राजमार्ग से गुजरने वाले ग्राम पंचायतों के द्वारा नामजद ड्यूटी लगाकर पेट्रोलिंग करने भी कहा गया था। मवेशियों के सड़क में रहने के कारण दुर्घटना की संभावना बनी रहती है। माननीय हाई कोर्ट के निर्देशानुसार ग्राम पंचायत और नगरीय निकायों की जिम्मेदारी तय की गयी है, इसे गंभीरता से लेते हुए पेट्रोलिंग सुनिश्चित करने कहा गया था। साथ ही उन्होंने कहा कि आवारा घूम रहे मवेशियों पर रेडियम और पट्टी लगाने कहा गया था। लेकिन महासमुंद के सड़कों पर खास कर कलेक्ट्रेट रोड में सारे आदेश निर्देष की धज्जियां उड़ाते दिख रही है।
जबकि उसी रोड से पूरे जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन के सारे अधिकारियों कर्मचारियों का आना जाना रोज हो रहा है।

शिक्षक भर्ती की मांग को लेकर 5 सितंबर को ज्ञापन सौंपेंगे युवा

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विधानसभा में घोषणा के बाद भी शिक्षक भर्ती नहीं होने से आक्रोशित हैं युवा

महासमुंद – छत्तीसगढ़ प्रशिक्षित डीएड -बीएड संघ के बैनर तले बड़ी संख्या में डीएड एवं बीएड प्रशिक्षित युवा मुख्यमंत्री के नाम से 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के दिन प्रदेश के पुरे 33 जिलों मे कलेक्टर को ज्ञापन सौप रहे हैँ. इसी कड़ी मे महासमुंद जिले के प्रशिक्षित डीएड बीएड योग्यताधारी युवा कलेक्टर को मुख्यमंत्री के नाम से ज्ञापन सौंपेंगे. और प्रदेश में शीघ्र 33 हजार शिक्षक भर्ती की मांग करेंगे. कार्यक्रम के बारे में जानकारी देते हुए छत्तीसगढ़ प्रशिक्षित डीएड- बीएड संघ महासमुंद के जिला अध्यक्ष संजय ओगरे ने बताया कि प्रदेश भर में लाखों युवा लंबे समय से शिक्षक भर्ती की प्रतीक्षा कर रहे हैं विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा के घोषणा पत्र में मोदी की गारंटी के 57000 शिक्षक भर्ती किए जाने का उल्लेख किया गया था जिस पर भरोसा करते हुए अभी प्रशिक्षित बेरोजगारों ने बड़ी संख्या में भाजपा प्रत्याशियों के पक्ष में मतदान किया था जिसकी वजह से प्रदेश में भाजपा की बहुमत प्राप्त सरकार बन सकी. यही नहीं विधानसभा के प्रथम सत्र के दौरान तत्कालीन शिक्षा मंत्री माननीय श्री बृजमोहन अग्रवाल जी ने वर्तमान शिक्षण सत्र में 33000 शिक्षकों की भर्ती की घोषणा की थी. परंतु आज तक इस भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ नहीं किए जाने से प्रदेश भर के लाखों प्रशिक्षित डीएड एवं बीएड अभ्यर्थी ठगा सा महसूस कर रहे हैं.
जिला अध्यक्ष संजय ओगरे ने बताया कि महासमुंद के कचहरी चौक मे स्थित पटवारी कार्यालय समक्ष सभी युवा साथी इकट्ठा होंगे तत्पश्चात रैली की रूप में ज्ञापन सौपने कलेक्ट्रेट जाएंगे. तथा मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर महासमुंद को ज्ञापन सौपते हुए 15 सितंबर तक शिक्षक भर्ती आरंभ ना होने पर राजधानी रायपुर में उग्र आंदोलन की चेतावनी दी जावेगी. जिला अध्यक्ष ने महासमुंद जिले के समस्था प्रशिक्षित युवाओं को बड़ी से बड़ी संख्या में शामिल होने का आव्हान किया हैँ
साथ में छ्ग प्रशिक्षित डीएड बीएड संघ ने यह भी चेतावनी दी है कि शिक्षक भर्ती की मांग जल्द पूरी नहीं हुई तो आगामी नगरी निकाय और पंचायत चुनाव में भाजपा को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है

धमतरी के डीआई सुमित देवांगन के निर्देश पर खुलेआम हो रहा कुहकुहा में अवैध क्लीनिक का संचालन..?

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झोलाछाप डॉक्टर जागेश्वर के पास है मेडिकल की डिग्री चला रहे है अवैध क्लिनिक

सरकार के सारे कायदे कानून को तांक में रख कर रहे हैं कमीशन खोरी

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
धमतरी / छत्तीसगढ सरकार के आदेशों की घोर अव्हेलना की जा रही एक तरफ आदेश दूसरी तरफ कमीशन खोरी के चक्कर में लोगो के जान से खिलवाड़ कर रहे है। लगातार समाचार के माध्यम से शासन प्रशासन को संज्ञान दिलाया जा रहा है किन्तु, इनका कोई असर नहीं दिख रहा है। इसीलिए आज झोलाछाप डाक्टरों के हौसले दिन ब दिन बढ़ते जा रहे है।संपूर्ण छत्तीसगढ़ प्रदेश में प्रशासनिक अधिकारियों के निकम्मेपन और कमीशन खोरी के चलते कई अवैध क्लिनिक और पैथोलॉजी लैब संचालित हो रहे हैं। एक तरह राज्य सरकार आम आदमी की स्वास्थ्य और जान की सुरक्षा के लिए नियम बना हैं तो दूसरी तरफ राज्य सरकार की नियमों की धज्जियां स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी उड़ा रहे हैं।
ऐसा ही एक मामला धमतरी जिले के कुरूद विकासखंड अन्तर्गत ग्राम कुहकुहा का है। जहां सांई क्लिनिक अवैध रूप से जागेश्वर साहू स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी ड्रग इंस्पेक्टर के मौखिक आदेश पर चला रहे है। क्लीनिक के संचालक को जब क्लिनिक कैसे संचालित किया जाता है। उसके क्या नियम होते हैं। इस पर उनका कहना था कि, हमारे लिए कोई नियम कानून नहीं है। हमारे ड्रग इंस्पेक्टर ही हमारे सारे नियम और कानून है और उनके आदेश पर ही हम यह क्लिनिक संचालित कर रहे हैं।

गौरतलब है कि, धमतरी जिले के खाद्य एवम औषधी प्रशासन विभाग में पदस्थ सुमित देवांगन द्वारा सारे कायदे कानूनों को तांक में रख कर मौखिक आदेश

देकर अवैध क्लिनिक संचालित करवा रहे हैं। इस तरह के आदेश देकर क्लिनिक संचालित करने के पीछे क्या कहानी है। यह जांच का विषय है।
बहरहाल कुहकुहा में संचालित कर रहे डॉक्टर बिना किसी डिग्री के आम आदमी के जीवन के साथ डीआई के संरक्षण में खिलवाड़ कर रहे हैं।

धमतरी के डीआई सुमित देवांगन के निर्देश पर खुलेआम हो रहा कुहकुहा में अवैध क्लीनिक का संचालन..?

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झोलाछाप डॉक्टर जागेश्वर के पास है मेडिकल की डिग्री चला रहे है अवैध क्लिनिक

सरकार के सारे कायदे कानून को तांक में रख कर रहे हैं कमीशन खोरी

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
धमतरी / छत्तीसगढ सरकार के आदेशों की घोर अव्हेलना की जा रही एक तरफ आदेश दूसरी तरफ कमीशन खोरी के चक्कर में लोगो के जान से खिलवाड़ कर रहे है। लगातार समाचार के माध्यम से शासन प्रशासन को संज्ञान दिलाया जा रहा है किन्तु, इनका कोई असर नहीं दिख रहा है। इसीलिए आज झोलाछाप डाक्टरों के हौसले दिन ब दिन बढ़ते जा रहे है।संपूर्ण छत्तीसगढ़ प्रदेश में प्रशासनिक अधिकारियों के निकम्मेपन और कमीशन खोरी के चलते कई अवैध क्लिनिक और पैथोलॉजी लैब संचालित हो रहे हैं। एक तरह राज्य सरकार आम आदमी की स्वास्थ्य और जान की सुरक्षा के लिए नियम बना हैं तो दूसरी तरफ राज्य सरकार की नियमों की धज्जियां स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी उड़ा रहे हैं।
ऐसा ही एक मामला धमतरी जिले के कुरूद विकासखंड अन्तर्गत ग्राम कुहकुहा का है। जहां सांई क्लिनिक अवैध रूप से जागेश्वर साहू स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी ड्रग इंस्पेक्टर के मौखिक आदेश पर चला रहे है। क्लीनिक के संचालक को जब क्लिनिक कैसे संचालित किया जाता है। उसके क्या नियम होते हैं। इस पर उनका कहना था कि, हमारे लिए कोई नियम कानून नहीं है। हमारे ड्रग इंस्पेक्टर ही हमारे सारे नियम और कानून है और उनके आदेश पर ही हम यह क्लिनिक संचालित कर रहे हैं।

गौरतलब है कि, धमतरी जिले के खाद्य एवम औषधी प्रशासन विभाग में पदस्थ सुमित देवांगन द्वारा सारे कायदे कानूनों को तांक में रख कर मौखिक आदेश देकर अवैध क्लिनिक संचालित करवा रहे हैं। इस तरह के आदेश देकर क्लिनिक संचालित करने के पीछे क्या कहानी है। यह जांच का विषय है।

बहरहाल कुहकुहा में संचालित कर रहे डॉक्टर बिना किसी डिग्री के आम आदमी के जीवन के साथ डीआई के संरक्षण में खिलवाड़ कर रहे हैं।

वाह रे शासन तेरा खेल..! निजी अस्पतालों में हो रही मौतें कौन जायेगा जेल…?

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कम पढ़े लिखे लोगों के नीचे काम कर रहे है पढ़े लिखे डॉक्टर

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
रायपुर / छत्तीसगढ़ सरकार ने सरकारी चिकित्सकों के निजी अस्पतालों में प्रैक्टिस करने पर सख्त रोक लगा दी है। स्वास्थ्य विभाग ने इस संबंध में नए निर्देश जारी किए हैं, जिनके अनुसार कार्यावधि के दौरान डॉक्टरों द्वारा निजी प्रैक्टिस करने पर कार्रवाई की जाएगी।
स्वास्थ्य विभाग के विशेष सचिव चंदन कुमार ने प्रदेशभर में आदेश जारी करते हुए निजी प्रैक्टिस पर प्रतिबंध का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं। यह आदेश सरकारी अस्पतालों की सेवाओं को प्राथमिकता देने के उद्देश्य से लिया गया है, जिससे सरकारी कामकाज में होने वाली अव्यवस्थाओं को दूर किया जा सके।

झोलाछाप डॉक्टरों के पास है हर बीमारी का इलाज, लोगों की जान से कर रहे हैं खिलवाड़…?

गली-मोहल्लों गांव और शहर की पाश कालोनियों में बुखार उल्टी-दस्त मलेरिया दाद-खाज और खुजली के अलावा सांस के गंभीर मरीजों का इलाज झोलाछाप डॉक्टर कर रहे हैं। अपनी जेब गर्म करने के लिऐ झोलाछाप डॉक्टर द्वारा भोले-भाले लोगों के जान से खिलवाड़ जैसा घिनौना कृत्य कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों एवं कुछ स्वास्थ्यकर्मियों की मिलीभगत से अनुभव विहिन झोलाछाप डॉक्टरों द्वारा आज निजी अस्पताल का भी संचालक बने बैठे हैं।
मलेरिया, ब्लड शुगर, टायफायड, प्रेगनेंसी और ब्लड प्रेशर की जांच करने में भी झोलाछाप डॉक्टर पीछे नहीं रहते। जबकि इनके पास इन बीमारियों के इलाज के लिए संसाधन भी उपलब्ध नहीं रहता। साथ ही ये बीमारियां बहुत ही खतरनाक एवम भयावह भी हैं। जरा सी लापरवाही बरतने पर मरीज का जान जा सकती है और ऐसा लगातार हमको देखने मिल ही रहा है। विगत दिनों एक छः वर्षीय बच्ची को अपनी इहलीला समाप्त करनी पड़ी इसका सीधा और साफ नतीजा है कि,यदि उनके पास कोई योग्य चिकित्सक नही थे तो इनको एडमिट नही किया जाना था शायद बच्ची की जान बच सकती थी।
झोलाछाप डॉक्टर की दुकान पर सुबह-शाम मरीजों की भीड़ लगी रहती है। परामर्श के साथ खुद ही दवा देते रहते हैं। अपंजीकृत क्लीनिक के साथ बिना लाइसेंस के दवाएं भी बेच रहे हैं। कई बार मरीजों की हालत बिगड़ने पर उसे त्वरित सरकारी अस्पताल तक भेजने का काम भी किया करते हैं।

गांवों में फेरी लगाकर करते है लोगो का उपचार-

जिले के समीपस्थ वनग्रामों में इन झोलाछाप डाक्टरों द्वारा अपने घरों में क्लिनिक तो खोलकर रखे ही है। साथ ही इसके अलावा ये झोलछाप डॉक्टर गांवों में बैग लटकाकर फेरी करते हुए भी मरीजों का उपचार करते नजर आते है। झोलाछाप डॉक्टर मरीजों की अपनी बातों में फंसाकर शत प्रतिशत इलाज की गारंटी का भरोसा दिलाते हुए मनमानी फीस वसूलते है। इनका इलाज मरीजों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। यह डॉक्टर अपने पास से मरीजों को एन्टीबायोटिक दवाईयां देने के साथ ही बकायदा पर्ची पर भी दवाई लिखकर मरीजों को बाजार से खरीदने को कहते है।

मेडिकल स्टोर्स संचालक संग भी गठबंधन

मेडिलक स्टोर्स संचालक भी झोलाछाप डॉक्टरों की पर्ची पर लिखी दवाएं मरीजों को दे देते है। इनके खिलाफ कार्रवाई नहीं होने से ग्रामीण क्षेत्रों में दिनों दिन झोलाछाप डाक्टरों संख्या भी बढ़ती ही जा रही है।

वसूलते है मनमानी फीस-

झोलाछाप डॉक्टरों द्वारा इंजेक्शन एवं बॉटल भी मरीजों को लगाई जाती है। दर्द निवारक टेबलेट के अलावा एन्टीबायोटिक दवाइयों एवं इंजेक्शनों का इन डॉक्टरों के पास भरपूर स्टॉक होता है। जो शहर के मेडिकल दुकानदार इन्हें भारी कमीशन लेते हुए उपलब्ध कराते है। इन दवाओं की कीमत मरीजों से मनमानी वसूलते है। ऐसा करके झोलाछाप डाक्टरों द्वारा लोगों से मोटी रकम वसूलने के साथ ही उनकी जान के साथ खिलवाड़ किया भी किया जा रहा है।

एक बॅाटल लगाने के लेते है लगभग 300 रुपए-

झोलाछाप डाक्टरों द्वारा मरीजों को एक बॉटल लगाने के 300 रुपए तक लिए जाते है। अपने पर्ची पर एन्टीबायोटिक गोलियां भी लिखते है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि, इन डॉक्टरो द्वारा किस तरह की लूट मचा रखी है। अगर बॉटल मरीज लाता है। बॉटल लगाने के 50 और इंजेक्शन लगवाने के 20 रुपए लिए जाते है।

गांव-गांव खोल रखे है क्लिनिक-

जिले से सटे अधिकांश गांवों में झोलाछाप डॉक्टरों द्वारा संचालित क्लिनिक भी दिखाई देते है। जहां मरीजों के लिए एक पंलग एवं अंटेडर एक लकड़ी की बैंच की व्यवस्था होती है। इन क्लिनिकों में मरीजों की भीड़ लगी रहती है। इस संबंध में कुछ ग्रामीणों से चर्चा की गई तो उनका कहना था कि, गांव के उप स्वास्थ्य केंद्रों में डाक्टर नहीं होने से उन्हें मजबूरी में इन्ही डाक्टरों से उपचार कराना पड़ता है।

छुरा के झोलाछाप डॉ.जैकब जार्ज चला रहे थे अवैध अस्पताल स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जड़े ताले।

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सालों से संचालित अवैध अस्पताल के संचालक झोलाछाप डॉक्टर जैकब जॉर्ज की दुकानदारी में लगा ताला ।

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
गरियाबंद / जिला मुख्यालय से लगभग 25 किलोमीटर दूर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अन्तर्गत छुरा में सालों से संचालित हो रही निजी अस्पताल में दिनांक 30 अगस्त 2024 को गरियाबंद जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ श्रीमती गार्गी यदि के निर्देशानुसार स्वास्थ्य विभाग की टीम गठित कर छापेमारी की कार्यवाही कर एक अवैध रूप से संचालित हो रहे निजी अस्पताल को बंद कर दिया गया।

बुलंद हौसले लिए सालों से संचालित हो रही थी झोलाछाप डॉक्टर जैकब जॉर्ज की दुकानदारी

विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र के नाम से प्रसिद्धि प्राप्त विकासखंड छुरा जिला गरियाबंद में सालों से अवैधानिक निजी अस्पताल संचालक डॉक्टर जैकब जॉर्ज द्वारा बेखौफ होकर आदिवासियों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ जैसा जिन्होंने कृत्य किया जा रहा था।
जिसकी जानकारी मिलने पर मीडिया की टीम पहुंचने पश्चात स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों को दूरभाष के माध्यम से जानकारी देने उपरांत ही त्वरित कार्यवाही हेतु जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ श्रीमती गार्गी यदु के निर्देशन में स्वास्थ्य विभाग की टीम गठित कर छापामारी की कार्यवाही करने वाले टीमों में डॉ.अमन हुमने, डॉ.सुनील रेड्डी, डॉ. सोमेश्वर ठाकुर एवम डॉ.हरीश चौहान पहुंचे मौके पर अस्पताल संचालन हेतु वैध दस्तावेजों की कमी पाई गई। जिसमे डॉक्टर जैकब जॉर्ज को त्वरित लिखित स्पष्टीकरण मांगते हुए। अस्पताल में ताला जड़ दिया गया । साथ ही स्वास्थ्य विभाग की टीम ने डॉक्टर जैकब जार्ज को हिदायत देते हुए कहा कि,यदि आप पुनः अस्पताल का संचालन करना चाहते है तो आपको नर्सिंग होम एक्ट संबंधित संपूर्ण दस्तावेज सबमिट करना पड़ेगा उसके बाद ही आप अस्पताल का संचालन कर सकते है। यदि इसके बा वजूद आपने अस्पताल का संचालन किया तो ये आपकी स्वयं की जवाबदारी होगी।

स्वच्छता और जैव-चिकित्सा अपशिष्ट परमिट नही है।

डॉक्टर जैकब जार्ज के अस्पताल में बायोमेडिकल अपशिष्ट पाइपलाइन और अपशिष्ट कम करने वाली पाइप बिछाने के लिए नगर पंचायत को अनापत्ति प्रमाण पत्र हेतु अभी आवेदन किया गया है जबकि इनको पूर्व में ही कर लेना था। लेकिन अपने अड़ियल रवैए के चलते इन्होंने किसी के प्रकार से भी अस्पताल प्रबंधन हेतु वैध दस्तावेज नहीं रखे है।

जिले में संचालित हो रहे हैं अवैध निजी अस्पतालों की अब खैर नहीं।

डॉ श्रीमती गार्गी यदु (जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी) गरियाबंद छत्तीसगढ

घोड़ारी के सरपंच जोगी बना भोगी,अब बन बैठे है योगी…?

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जनपद के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को लिखित शिकायत के बा-वजूद कोई कार्यवाही नहीं।

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुंद / अक्सर हम देखते आ रहे है। चाहे कांग्रेस कार्यकाल हो या फिर बीजेपी कार्यकाल लेकिन भ्रष्टाचार तो दोनो पार्टियां खुलकर करती है इसमें कोई शक नही,किंतु इन्ही भ्रष्टाचारों के खिलाफ कोई शिकायतकर्ता यदि शिकायत करता है या फिर सूचना के अधिकार के तहत जानकारी चाहता है तो उसे जानकारी प्रदाय नही करने से दिग्भ्रमित किया जाता है। ऐसे ही एक लिखित शिकायत पत्र 21 जून 2024 को महासमुंद जनपद पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी को दिया गया था जिसमे आज तक कोई कार्यवाही नहीं की गई। बता दे जिला और जनपद पंचायत मुख्यालय से महज 10 किलो मीटर दूर ग्राम पंचायत घोड़ारी में ग्राम पंचायत के सरपंच और सचिव मिलकर कर रहे हैं सरकारी नियम कानून की अनदेखी। लाखों रुपए की लागत से बने व्यवसायिक कॉम्प्लेक्स का बिना किसी पंचायत प्रस्ताव के कर रहे हैं निजी उपयोग।

जनता की गाढी कमाई से बने कॉम्प्लेक्स को किराए ग्राम घोड़ारी के सरपंच सचिव द्वारा एक ढाबे वाले को किराए पर दे दिया गया है। ढाबे से आने वाले किराए की राशि को कौन रख रहा है। उस राशि का क्या उपयोग किया जा रहा है। इसका कोई हिसाब किताब सचिव के पास नहीं है। प्रशासनिक अधिकारी होने के नाते ग्राम सचिव की जवाबदेही बनती है कि ग्राम पंचायत में होने वाले गैरकानूनी गतिविधियों की जानकारी जनपद पंचायत के सीईओ को देते पर सचिव द्वारा ऐसा नहीं किया गया।

गौरतलब है कि सन 2014_15 में घोड़ारी ग्राम पंचायत के बिरकोनी मार्ग पर 5 दुकानें लगभग 10 लाख की लागत से बनाई गई थी। जिसका अब तक सरकारी योजना के मुताबिक नीलामी नहीं हुई है। उसकी कॉम्लेक्स को गैर कानूनी तरीके से ढाबा खोल दिया गया है। ढाबे से मिलने वाले हजारों रुपए की राशि का ग्राम पंचायत के सचिव के पास कोई हिसाब किताब नहीं है।

ग्राम घोडारी में बने इस व्यवसायिक कॉम्प्लेक्स की गैर कानूनी रूप से उपयोग किए जाने की शिकायत जनपद पंचायत सीईओ को दो माह पूर्व लिखित में शिकायत की गई थी लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

गौरतलब है कि ग्राम घोड़ारी में तमाम कायदे कानूनों का खुला उलंघन कोई नई बात नहीं रह गई है। राज्य और केंद्र सरकार से आने वाले विकास कार्यों की राशि का भी सारे नियमों को तांक पर रख कर आहरण किया गया है।
ये तो सिर्फ शुरुआत है। डीएमएफ फंड , 14वे मद एवम 15वे मद की राशि और शासन की विभिन्न योजनाओं में की गई आपसी बंदरबाट का खुलेगा पोल और होंगे पर्दाफाश। बने रहिए बेबाक बयान न्यूज़ के साथ हर राज खुलकर हर बात खुलकर

 

मांगे पूरी नहीं होने पर होगी सहकारी समितियों मे हड़ताल – जयप्रकाश

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धान खरीदी के पूर्व प्रदेश स्तरीय कर्मचारी सम्मेलन की तैयारी

महासमुंद समेत बस्तर से सरगुजा के 24जिलों के जिलाध्यक्ष हुए शामिल

महासमुंद //छत्तीसगढ़ सहकारी समिति कर्मचारी महासंघ रायपुर पं क्र 6685 की बैठक जिला सहकारी बैंक के सभा हाल मे प्रदेश अध्यक्ष नरेंद्र सोनबेर की अध्यक्षता मे सम्पन्न हुआ ।जिसमे तीन सूत्रीय लंबित मांगों की पूर्ति हेतु कर्मचारी हितों व भविष्य को ध्यान में रखते हुए बार-बार लिखित मांग पत्र ,जन् दर्शन ,धरना प्रदर्शन के बाद अब महासंघ की महासम्मेलन एवं सम्मान समारोह महासंघ द्वारा आयोजित करने माननीय मुख्यमंत्री, खाद्य मंत्री, सहकारिता मंत्री एवं उपमुख्यमंत्रियों के माध्यम से भेंट मुलाकात किया जाएगा।इसके बाद सम्मेलन होगा और यदि हमारी मांगों को सकारात्मक रूप से शासन पहल नहीं करती है तो अक्टूबर में ही धान खरीदी के पूर्व अनिश्चितकालीन आंदोलन चरणबद्ध किया जाने का निर्णय लिया गया है एवं जिला संघ महासंघ की कर्मचारी चुनाव हेतु, सहयोग राशि लेने, कार्यकाल सदस्यता,निर्धारित करने, आदि नियमों का निर्माण करने 6 सदस्यों का कमेटी गठन करने निर्णय लिया गया है।इस प्रकार पूरे बस्तर और सरगुजा से पदाधिकारी जिला अध्यक्ष गण अन्य प्रतिनिधि गण लगभग 24 जिलों से उपस्थित थे । उक्त प्रस्ताव पर सबने एक मत से अपनी सहमति दिया है।

छ. ग.सहकारी समिति कर्मचारी संघ प. क्र.6685 महासंघ रायपुर के बैनर तले कर्मचारी हित में अपने परिवार के भविष्य को संवारने के लिए लड़ाई लड़ेंगे संघ के जिलाध्यक्ष जयप्रकाश साहू ने तीन सूत्रीय मांगो के संबंध मे बताया की –मध्य प्रदेश सरकार की भांति छत्तीसगढ़ सरकार भी प्रतिवर्ष प्रदेश के 2058 सहकारी समितियों को पांच-पांच लाख रुपया प्रबंधकीय बयय अनुदान राशि दी जाए जिससे कर्मचारियों को वेतन मान, महंगाई भत्ता, टीए,डीए ,ग्रेजुएटी,भविष्य निधि, पेंशन आदि राशि दी जा सके ।दूसरा मांग है –सेवा नियम 2018 आंशिक संशोधन करते हुए वेतनमान अन्य भत्ते में बढ़ोतरी कर बैंक के क्रेडर समिति प्रबंधक पद पर भर्ती तत्काल जारी किया जावे, बैंक के त्रितीय एवं चतुर्थ खाली रिक्त पदों पर शत् प्रतिशत समिति कर्मचारियों से पूरी किया जावे, तीसरी मांग है –समर्थन मूल्य धान खरीदी पर सुखत का प्रावधान किया जावे अथवा विक्रताओ को प्रति क्विंटल 500 ग्राम चावल क्षतिपूर्ति दी जावे एवं धान खरीदी ,खाद ,बीज, राशन कमिशन समर्थन मूल्य प्रासंगिक ,सुरक्षा ब्यय को चार गुना बढ़ोतरी कर खाद परिवहन निःशुल्क देते हुए ब्याज अनुदान राशि शीघ्र दी जावे.

महासमुंद जिले में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी की कमान अब डॉ के.आजमानी के हाथों में।

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डॉ.पी.कुदेशिया अब अपनी सेवा जिला अस्पताल में देंगे

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुन्द / छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य विभाग में बड़ा उलट फेर बीते दिनों स्वास्थ्य विभाग ने जिले के अधिकांश अधिकारियों के पदों को बदल दिया बता दे कि, महासमुन्द जिले में तत्कालीन मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी पी.कुदेशिया की जगह डॉ. कुलवंत अजमानी को महासमुन्द जिला के स्वास्थ्य विभाग मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी का पदभार सौंपा गया है। डॉ. कुलवंत अजमानी कई वर्षों से जिला स्वास्थ्य विभाग में अपनी सेवाये देते आ रहे है। डॉ.के.अजमानी निरंतर अपने हर कामो को बड़े ही नि:स्वार्थ भाव से करते आये है। वही डॉ.पी. कुदेशिया ने भी अपने कार्यकाल मे जिला स्वास्थ्य विभाग में जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था सुदृढ़ करते हुऐ काफी परिवर्तन लाए है। डॉ.पी.कुदेशिया को स्वास्थ्य विभाग में अपनी एक अलग पहचान के रूप में नाम मिला उनको एक एनर्जी मेन के नाम से जाने जाते है।

झलप स्थित उत्तम साईं केयर हॉस्पिटल संचालक करवा रहे हैं अवैध पैथोलॉजी लैब का संचालन..?

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न तो रजिस्ट्रेशन था, न ही टेक्नीशियन और न मिले डाक्टर

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुंद / जिले के झलप छिलपावन चौक स्थित श्री उत्तम साईं केयर हॉस्पिटल के संचालक डॉ टी. के.डडसेना संचालित करवा रहे है अवैध पैथोलॉजी लैब जो कि,गुलशन पैथोलॉजी लैब के नाम से संचालन किया जा रहा है।
आज दिनांक 10 अगस्त 2024 शनिवार को मीडिया के औचक निरीक्षण पर पाया गया कि, झलप चौक स्थित एक निजी अस्पताल के बाजू गुलशन पैथोलॉजी लैब संचालित हो रही है। जिसका मुआयना करने पर द्रोणाचार्य टंडन नामक व्यक्ति का मोबाइल नंबर बोर्ड में अंकित होने से उनको संपर्क किया गया तो बताए कि, ये मेरा लैब नहीं है ये श्री उत्तम साईं केयर हॉस्पिटल संचालक का है।

जिले में संचालित होने वाले अवैध पैथोलॉजी लैब कार्रवाई न होने की वजह से अवैध लैब संचालकों के हौंसले इतने बढ़ गए हैं कि लैब में मरीजों का खुले आम खून चूसा जा रहा है। शनिवार को मीडिया की टीम ने दस्तक दी तो जो पैथालाजी लैब पकड़ में आई है, जिसका न तो रजिस्ट्रेशन है न ही टेक्नीशियन और न ही डाक्टर है । जो यहां पर लिए जाने वाले ब्लड सैंपल की जांच कर सके।

फैला है फर्जी पैथालाजी का जाल, कमीशन तय

स्वास्थ्य विभाग के सूत्र बता रहे कि, मरीजों को जांच के नाम पर भी होने वाली सभी जांच में भारी मुनाफे के साथ-साथ एक बड़ा हिस्सा संबंधित डाक्टरों को भी कमीशन के तौर पर दिया जाता है। पैथालाजी लैब में जांच करवाने आए बहुत कम लोगों को पता है कि, यहां होने वाली जांच के एवज में मरीज से लिया जाने वाला शुल्क का एक हिस्सा डाक्टरों को भी दिया जाता है।
स्वस्थ्य जीवन के लिए एक उचित आहार और फिटनेस आहार एक पूर्वा पेक्षा है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी ने कई लोगों को गलत खान-पान अपनाने पर मजबूर कर दिया है। लोग चलते-फिरते फास्ट या जंक फूड का सेवन करते हैं और व्यायाम के लिए समय नहीं निकाल पाते हैं। इन सभी का परिणाम खराब स्वास्थ्य परिणाम होता है और वे किसी न किसी प्रकार की बीमारी के शिकार हो जाते हैं।

पैथोलॉजी लैब किसी विशेष बीमारी के कारण को निर्धारित करने में मदद करती हैं। एक पैथोलॉजी लैब नैदानिक परीक्षण करती है और परिणामों के आधार पर, आपको एक उपचार पर सलाह प्रदान करती है जो सबसे उपयुक्त होगा। अनियमित जलवायु परिवर्तन, वायरल संक्रमण, खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता और गलत जीवन शैली जैसे कई कारकों के लिए विभिन्न बीमारियों में वृद्धि को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। इससे पैथालॉजी लैबोरेटरी की बाढ़ सी आ गई है।

हॉस्पिटल का संचालक में हूं और पैथोलॉजी भी मेरा है। पैथोलॉजी पहले अस्पताल प्रांगण में चलता था अब बगल में कर दिया गया है।

डॉ.टी.के.डडसेना (संचालक श्री उत्तम साईं केयर हॉस्पिटल)

आप लिखित में शिकायत दीजिए मैं कल कार्यवाही करवाता हूं।

छत्रपाल चंद्राकर
(जिला नोडल अधिकारी नर्सिंग होम एक्ट)

झलप स्थित उत्तम साईं केयर हॉस्पिटल का एक बहुत बड़ा मामले का खुलासा होने वाला है।
बने रहिए हमारे साथ में..!!