Home Blog Page 30

मछली जल की रानी है,ग्राम पंचायतों में भ्रष्टाचार करना मेरी कहानी है…?

0

छुरा जनपद में पदस्थ महिला पंचायत सचिव श्रीमती होमिन सेन के खिलाफ जुटे सरपंच संघ।

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
गरियाबंद / मामला जनपद पंचायत छुरा के पंचायत सचिव से आखिर कार थक हार कर बुर्जर्गो ने मुहावरा बताते हुए कहा कि, कर्मण्येवाधिका रस्तु मा फलेषु कदाचन अर्थात जैसा कर्म करोगे वैसा फल पाओगे । चाहे अच्छा कर्म हो या बुरा कीमत तो हर हाल में चुकाना ही पड़ेगा।
कम समय में ज्यादा आमदनी कमाने की लालच ने आखिरकार उसको गर्त में ला ही लिया। मामला छत्तीसगढ़ के जिला गरियाबंद अन्तर्गत जनपद पंचायत छुरा विकासखंड आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र से कुछ पंचायतों में पंचायत सचिव के रूप में पदस्थ श्रीमती होमिन सेन के विरुद्ध लगातार शिकायत मिलती रही है। पंचायत सचिव श्रीमती होमिन सेन जिस भी ग्राम पंचायत में अपना पदभार सम्हाली। वहां पर ग्रहण ही लग जाता है। ऐसा इसलिए कह रहें कि, पंचायत सचिव श्रीमती होमिन सेन हमेशा विवादितों से घिरी हुई रहती हैं। छुरा जनपद क्षेत्र में 74 पंचायत हैं जिसमें से लगभग 8 से 10 पंचायतों में सचिव होमीन सेन ने चार चांद ग्रहण लगा चुकी है। यह क्षेत्र आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र है। सभी सरपंच आदिवासी समाज के है कुछ पंचायतों में महिला मुखिया है और कुछ जगहों में पुरुष सरपंच है। सर्व ग्राम पंचायत सेम्हरा, टेंगनाबासा, कोसमी (नवापारा), चुरकीदादार, मुड़ागांव, लोहझर अन्य ग्राम को अपने चंगुल के शिकार बना चुकी है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पंचायत सचिव के रूप में पदस्थ श्रीमती हाेमिन सेन जिस पंचायत में अपनी कदम रखती है उस पंचायत में लड़ाई झगड़ा जैसे विवाद उत्पन्न करना इसका पेशा बन चुकी है। पुरुष सरपंच तो दूर की बात महिला सरपंच के अलावा अपने विभागीय अधिकारी कर्मचारियों के साथ अच्छे से बरताव नहीं करती हैं।

आपको ज्ञात होगा कि शासन प्रशासन के द्वारा ग्राम पंचायत की विकास के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित की है जिसमें नाना प्रकार के कार्य किए जाते हैं जिस पर सचिव होमीन सेन द्वारा बंदरबाट करने में लगी रहती हैं, स्थानीय सरपंच और पंच को लालच देने की खूब प्रयास करती है जिसमें से कुछ पंच चंगुल में फंस जाते है और इसका आरोप लगते है सीधे साधे आदिवासी सरपंच के ऊपर जिसका ताजा उदाहरण है – चुरकीदादर, मुड़ागांव, सेम्हारा, टेंगनाबासा, कोसमी एवं लोहझर के साथ अन्य ग्राम भी शामिल है जो शिकायत की जांच के दौरान कहीं निलंबित तो कहीं तबादला तो कहीं आपसी व्यवस्था में हुई है ज्यादातर पंचायतों में करीब लगभग 5 से 6 माह ही अपनी सेवा दे पाती है।

मीडिया की टीम द्वारा भ्रष्ट पंचायत सचिव श्रीमती होमीन सेन से पीड़ित सरपंच से लेकर सरपंच संघ अध्यक्ष से मुलाकात कर पुरी जानकारी एकत्रित की गई।

*किसने क्या कहा*

*ग्राम पंचायत चुरकीदादार के सरपंच चरण सिंह का कहना है कि*- होमिन सेन हमारे पंचायत में क्या आई शासन की योजनाओं मद की राशि की दुरुपयोग की और मुझे आरोपी ठहराने में लगी रही जिसकी शिकायत जनपद में की, दूध का दूध पानी का पानी हुआ। अंत में अपनी क्षेत्रीय विधायक रोहित साहु से मिलकर अपनी दुखड़ा अवगत कराई जिस पर विधायक ने ढेरहा राम कुर्रे लोहझर पंचायत सचिव और होमीन सेन की आपसी व्यवस्था कराते हुए एक दुसरे को स्थान दी।

*सरपंच प्यारे लाल दीवान ग्राम पंचायत मुड़ागांव का कहना है*- कि होमिन सेन हमारे मुड़ागांव के पंचायत में लगभग 5 से 6 माह रही है उनके विचारधारा सबसे अलग किस्म के हैं हमेशा हर कार्य को लेकर कमीशन की मांग करती रही है जिससे हमारे पंचायत के मुझसे लेकर पंच तक सहमत नहीं रहें कुछ पंचों भाइयों को बहला फुसला कर अपने भ्रष्टाचार में शामिल करने की कोशिश की जिसमें असफल रही। उनके द्वारा किए गए कार्य के लापरवाही में शिकायत जिला पंचायत में हुई जिसमें जांच कर दंडानात्मक कार्यवाही हुई।

*ग्राम पंचायत कोसमी के सरपंच उलशी दीवान का कहना है*- कि होमिन सेन सबसे पहले महिला होने के हम महिलाओं के साथ अच्छे से बरताव नहीं रखती हैं हम उनके जैसे षड्यंत्र कारी नहीं हैं जिससे उनके चंगुल में शिकार हो सकें हम जैसे सीधे साधे लोगो का फायदा उठाना खूब आता है।

*ग्राम लोहझर पंचायत सरपंच मंजु ध्रुव का कहना है*

होमिन सेन के द्वारा फर्जी काम करना आम बात है। क्योंकि उनके साथ जुड़कर कार्य करने से पता चली है भ्रष्ट सचिव होमिन सेन द्वारा हर काम के पीछे कमीशन की मांग की है उसके बात को नहीं मानी हूं तो मेरे खिलाप षडयंत्र रचना शुरु कर दी है। मुझे विश्वास है मै कोई गलत नहीं की हूं तो मुझे किसी का डर नहीं है।

*सरपंच संघ के अध्यक्ष लेखराज ध्रुव का कहना है*-

होमीन सेन की शिकायत हमेशा आते रहा हैं। हमारे आदिवासी भाईयों/बहनों सरपंचों के साथ मानसिक प्रताड़ना हुई भी है भ्रष्टचारी सचिव की कार्य प्रणाली को देखकर एक भी सरपंच उनके साथ कार्य करना पसंद नहीं करते है। चुरकीदादार पंचायत के कार्यकाल के दौरान ग्राम सरपंच अपने पंचों जनपद सदस्यो को लेकर क्षेत्रीय विधायक रोहित साहु के समक्ष प्रस्तुत होकर सचिव की कार्यप्रणाली और बरती जा रही अनियमिताओं पर प्रकाश डालते हुए। सचिव होमिन सेन लोहझर पंचायत गई है आज आखिरकार इनका तबादला अन्य ब्लॉक में हो ही गया। जिसमें भी अपना चार्ज नहीं दे रही है। भ्रष्टचारी सचिव होमिन सेन जैसे कर्मी के लिए कोई भी पंचायत में स्थान नहीं है। अपने कार्यकाल के दौरान शासन प्रशासन की योजना मद पर अपने द्वारा कराएं गए कार्यों में अब तक प्रशासन ने क्या कार्यवाही की हैं और किए गए भ्रष्टाचार की कार्य में क्या भरपाई की हैं। सरपंच संघ छुरा के द्वारा इनकी शिकायत जिलाधीश से शिकायत कर पुनः जांच करवाई जायेगी । भ्रष्ट सचिवों की खैर नहीं।

शिकायतों में जांच पश्चात पायी गई अनियमितताओं का निराकरण किया जायेगा अभी इनका स्थानांतरण विकासखंड फिंगेश्वर में किया गया है।

रूप सिंह ध्रुव (मुख्य कार्यपालन अधिकारी) जनपद पंचायत छुरा जिला गरियाबंद

छत्तीसगढ में आदिवासी मुख्यमंत्री पश्चात भी आदिवासियों पर अत्याचार क्यों..?

0

 

आदिवासियों द्वारा एक दिवसीय धरना प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री के नाम महासमुंद कलेक्टर को सौंपे ज्ञापन

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुंद / छत्तीसगढ़ में आदिवासी मुख्यमंत्री होने के बावजूद पूरे प्रदेश में हो रहे आदिवासियों के विरुद्ध अत्याचार, हत्याओं, शोषण के विरुद्ध त्वरित कार्यवाही करने, इन पर रोक लगाने तथा प्रदेश के लिए जनजातीय नीति बनाने हेतु आज महासमुंद के पटवारी कार्यालय के सामने छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज ने किया एक दिवसीय आंदोलन और आंदोलन पश्चात मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन।

छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज प्रदेश में हो रहे आदिवासी महिलाओं से बलात्कार, हत्याएं तथा शोषण के खिलाफ ध्यान आकृष्ट करने चार सूत्रीय मांगों को लेकर सर्व आदिवासी समाज ने एक दिवसीय आंदोलन किया।

दिनांक 10.08.2024 को बीजापुर जिला क्षेत्रान्तर्गत एक आदिवासी महिला की अज्ञात लोगों द्वारा जघन्य हत्या कर उसका शव फेंक दिया गया था। अभी तक अपराधी पुलिस गिरफ्त से बाहर है।
दिनांक 01.09.2024 को जिला दंतेवाड़ा के ग्राम पोन्दुम बाजार पारा से 6 माह के आदिवासी बच्चे के अपहरणकर्ताओं को अभी तक गिरफ्तार नहीं किया जा सका है। समाज के समक्ष यह भी जानकारी आई है कि विवेचना अधिकारी द्वारा मृतक परिवार के जिला अंबिकापुर के सीतापुर में एक आदिवासी युवक संदीप लकड़ा की निर्मम हत्था कर जमीन में गाड़ दिया गया एवं उसके ऊपर पानी की टंकी बना दिया गया था। हत्यारा अभी तक गिरफ्तार नहीं किया जा सका है।

औद्योगिकीकरण के चलते प्रदेश में वनों की कटाई तेजी से हो रही है जिससे पर्यावरण का संतुलन बिगड़ रहा है। आदिवासियों की जमीनों का अधिग्रहण हो रहा है एवं उनके पुनर्वास की व्यवस्था भी सही नहीं हैं। प्रदेश में कानून एवं शांति व्यवस्था संतोषप्रद नहीं है। भूमि अधिग्रहण से आदिवासियों की कृषि भूमि लुप्त होती जा रही है जिससे उनका जीवन यापन मुश्किल हो रहा है।

आदिवासियों के हित में आर्थिक, शैक्षणिक, सामाजिक, व्यवसायिक एवं सांस्कृतिक विकास के लिए इस राज्य में जनजातीय नीति भी नहीं बनाई गई है।

पत्रकारिता पर प्रहार और पत्रकारों पर अत्याचार अब बर्दास्त नहीं की जाएगी

0

 

राजधानी में छत्तीसगढ़ में कार्यरत सभी पत्रकार संगठनों के प्रदेश अध्यक्षों की संयुक्त बैठक में पत्रकारों के हित में लिए गये महत्वपूर्ण निर्णय

पत्रकारिता संकल्प महासभा के लिए 2 अक्तूबर को होंगे सभी संगठन एक मंच पर…

रायपुर । राज्य में लगातार पत्रकारों पर हो रहे उत्पीड़न मामले तथा पत्रकारिता पर हो रहे प्रहारों से निराकरण को लेकर राज्य के कई बड़े पत्रकार संगठनों के प्रदेश अध्यक्षों ने शनिवार 14 सितंबर को राजधानी रायपुर में संयुक्त बैठक संपन्न हुई । जिसमे तकरीबन 20 पत्रकार संगठनों के प्रदेश अध्यक्ष तथा बहुतायत में वरिष्ठ पत्रकार इस बैठक में मुख्य रूप से शामिल हुए। उपस्थित समस्त पत्रकार संगठनों के प्रदेश अध्यक्ष तथा वरिष्ठ पत्रकारों ने पत्रकारिता पर हो रहे प्रहारों तथा पत्रकारों पर आए दिन हो रहे झूठे मुकदमों एवं उन पर हो रहे जानलेवा हमले को लेकर शासन प्रशासन ,राजनीतिज्ञों, माफियाओं पर प्रहार करते हुए गहरा रोष प्रकट किया। सभी संघों के प्रमुखों ने सामूहिक मंच पर अपने अपने विचार रखे और समाधान पर गंभीरता से चर्चा की। और सभी ने एकमतेन सामूहिक रूप से पत्रकारों के हित में आर-पार की लडाई लड़ने पर सहमति जगाई। जिसके परिणाम स्वरूप समस्त संगठन के उपस्थित पदाधिकारियों की एक “संचालक समिति” का गठन किया गया। जो पत्रकारों के हित के लिए सदैव तत्पर रहेगी और उनकी हर लड़ाई मे संयुक्त रूप से मोर्चा सम्हालेगी।
बैठक में संयुक्त समिति के गठन के पश्चात पत्रकारों को लेकर कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई, जिसमे पत्रकार सुरक्षा कानून विधेयक पारित कराने से लेकर, पत्रकार कल्याण कोष, स्वास्थ्य सुविधाएं, स्वास्थ्य एवं दुर्घटना बीमा, अधिमान्यता में सरलीकरण के अलावा, छोटे मझोले अखबारों को चलाने मे सहायक शासन द्वारा मिलने वाले विज्ञापन के बंद किये जाने, हित संवर्धन व सुरक्षा एवं विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई। उपस्थित संगठनों के पदाधिकारियों ने क्रमानुसार अपने विचारों को साझा किया। यह समिति पूरी ताकत से एक होकर पत्रकारों के हित व न्याय की लड़ाई साथ लड़ेंगी। सभी पत्रकारों ने एकजुटता का परिचय देते हुए आगामी 02 अक्टूबर को होने वाले कार्यक्रम के लिए अपना समर्थन दिया।
इस कड़ी में आगामी 2 अक्टूबर को सभी पत्रकार संघ एकजुटता दिखाते हुए संयुक्त रूप से एक मंच उपस्थित रहकर पत्रकारों की आवाज बुलंद करेंगे।
2 अक्टूबर 2024 को “पत्रकारिता संकल्प” सभा का आव्हान किया जाएगा, जिसमे राज्य भर से विभिन्न स्थानों से संगठनों से जुड़े पत्रकारगण इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शिरकत करेंगे। आयोजित इस बैठक में मुख्य रूप से बैठक के संयोजक सुधीर तंबोली आजाद, पत्रकार सुरक्षा कानून संयुक्त मोर्चा के संयोजक कमल शुक्ला,
छत्तीसगढ़ जर्नलिस्ट यूनियन से प्रदेश अध्यक्ष ब्यास पाठक एवं शिवशंकर सोनपिपरे, इंडियन जर्नलिस्ट यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष पी सी रथ, छत्तीसगढ़ सक्रिय पत्रकार संघ से प्रदेश अध्यक्ष राज गोस्वामी, कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष मनोज सिंह बघेल, सचिव मनीष कुमार शर्मा, राहुल गोस्वामी, छ.ग. जर्नलिस्ट वेलफेयर यूनियन से प्रदेश अध्यक्ष अमित गौतम एवं उपाध्यक्ष महेश आचार्य, पत्रकार महासंघ छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष सुनील कुमार यादव , प्रेस एंड मीडिया वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष मनोज पाण्डे, उपाध्यक्ष राजेन्द्र गुप्ता, स्टेट वर्किंग जर्नलिस्ट्स यूनियन छत्तीसगढ़ से प्रदेश महासचिव विरेंद्र कुमार शर्मा, प्रदेश उपाध्यक्ष घनश्याम गुप्ता, पत्रकार कल्याण महासंघ छत्तीसगढ़ प्रदेश अध्यक्ष सेवक दास दीवान ,महासचिव प्रवीण करे, कार्यसमिति सदस्य दिनेश नामदेव, छत्तीसगढ़िया पत्रकार महासंघ से प्रदेश महासचिव अब्दुल शमीम, अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति से मो. नजीर, प्रेस क्लब आफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स से प्रदेशाध्यक्ष छत्तीसगढ़ अजित शर्मा, पवन सिंह ठाकुर, दिनेश कुमार, रमेश कुमार , सहित वरिष्ठ पत्रकार अजीत कुमार सिंह सहित बहुतायत में पत्रकार साथी उपस्थित थे।

सड़कों पर आवारा मवेशियों का जमावड़ा,प्रतिदिन हादसे को कर रहे आमंत्रित..?

0

 

हाई कोर्ट और कलेक्टर के आदेश का नहीं हो रहा है पालन।

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुंद / जिले में माननीय न्यायालय और जिला कलेक्टर के आदेश को ठेंगा दिखाने का काम किया जा रहा। जिम्मेदारी सिर्फ कागजों में तय दिख रही है। धरातल में सिर्फ लापरवाही नजर आ रही है।
हम आपको बता दें कि हाई कोर्ट के आदेश के बाद महासमुंद कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने 29 अगस्त को समय सीमा की बैठक में यह आदेश किया था कि सड़क में बैठे आवारा पशुओं को हटाया जाए। कलेक्टर इसका पालन कड़ाई से करने के निर्देश दिए थे। लेकिन दुर्भाग्य इस बात का हैं कि कलेक्ट्रेट रोड में ही रोजाना दिन और रात सैकड़ों मवेशी बीच सड़क पर बैठे रहते हैं। कलेक्ट्रेट सड़क की बात तो छोड़िए कलेक्टर बंगले के सामने भी आपकी बीच सड़क में मवेशियों का जमावड़ा दिखेगा।
9 सितम्बर की सुबह नेशनल हाईवे 53 झलप तोरला पड़ाव पास एक अज्ञात वाहन ने 10 मवेशियों को कुचल दिया। जिसमें 6 मवेशियों की घटना स्थल पर ही मौत हो चुकी थी।

हम आपको बता दें कि कलेक्टर ने विगत समय सीमा की बैठक में राष्ट्रीय राजमार्ग और सड़कों पर मवेशियों के जमवाड़ा को रोकने के लिए ग्राम पंचायत एवं नगरीय निकायों को जिम्मेदारी दिए थे। राष्ट्रीय राजमार्ग से गुजरने वाले ग्राम पंचायतों के द्वारा नामजद ड्यूटी लगाकर पेट्रोलिंग करने भी कहा गया था। मवेशियों के सड़क में रहने के कारण दुर्घटना की संभावना बनी रहती है। माननीय हाई कोर्ट के निर्देशानुसार ग्राम पंचायत और नगरीय निकायों की जिम्मेदारी तय की गयी है, इसे गंभीरता से लेते हुए पेट्रोलिंग सुनिश्चित करने कहा गया था। साथ ही उन्होंने कहा कि आवारा घूम रहे मवेशियों पर रेडियम और पट्टी लगाने कहा गया था। लेकिन महासमुंद के सड़कों पर खास कर कलेक्ट्रेट रोड में सारे आदेश निर्देष की धज्जियां उड़ाते दिख रही है।
जबकि उसी रोड से पूरे जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन के सारे अधिकारियों कर्मचारियों का आना जाना रोज हो रहा है।

शिक्षक भर्ती की मांग को लेकर 5 सितंबर को ज्ञापन सौंपेंगे युवा

 

विधानसभा में घोषणा के बाद भी शिक्षक भर्ती नहीं होने से आक्रोशित हैं युवा

महासमुंद – छत्तीसगढ़ प्रशिक्षित डीएड -बीएड संघ के बैनर तले बड़ी संख्या में डीएड एवं बीएड प्रशिक्षित युवा मुख्यमंत्री के नाम से 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के दिन प्रदेश के पुरे 33 जिलों मे कलेक्टर को ज्ञापन सौप रहे हैँ. इसी कड़ी मे महासमुंद जिले के प्रशिक्षित डीएड बीएड योग्यताधारी युवा कलेक्टर को मुख्यमंत्री के नाम से ज्ञापन सौंपेंगे. और प्रदेश में शीघ्र 33 हजार शिक्षक भर्ती की मांग करेंगे. कार्यक्रम के बारे में जानकारी देते हुए छत्तीसगढ़ प्रशिक्षित डीएड- बीएड संघ महासमुंद के जिला अध्यक्ष संजय ओगरे ने बताया कि प्रदेश भर में लाखों युवा लंबे समय से शिक्षक भर्ती की प्रतीक्षा कर रहे हैं विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा के घोषणा पत्र में मोदी की गारंटी के 57000 शिक्षक भर्ती किए जाने का उल्लेख किया गया था जिस पर भरोसा करते हुए अभी प्रशिक्षित बेरोजगारों ने बड़ी संख्या में भाजपा प्रत्याशियों के पक्ष में मतदान किया था जिसकी वजह से प्रदेश में भाजपा की बहुमत प्राप्त सरकार बन सकी. यही नहीं विधानसभा के प्रथम सत्र के दौरान तत्कालीन शिक्षा मंत्री माननीय श्री बृजमोहन अग्रवाल जी ने वर्तमान शिक्षण सत्र में 33000 शिक्षकों की भर्ती की घोषणा की थी. परंतु आज तक इस भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ नहीं किए जाने से प्रदेश भर के लाखों प्रशिक्षित डीएड एवं बीएड अभ्यर्थी ठगा सा महसूस कर रहे हैं.
जिला अध्यक्ष संजय ओगरे ने बताया कि महासमुंद के कचहरी चौक मे स्थित पटवारी कार्यालय समक्ष सभी युवा साथी इकट्ठा होंगे तत्पश्चात रैली की रूप में ज्ञापन सौपने कलेक्ट्रेट जाएंगे. तथा मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर महासमुंद को ज्ञापन सौपते हुए 15 सितंबर तक शिक्षक भर्ती आरंभ ना होने पर राजधानी रायपुर में उग्र आंदोलन की चेतावनी दी जावेगी. जिला अध्यक्ष ने महासमुंद जिले के समस्था प्रशिक्षित युवाओं को बड़ी से बड़ी संख्या में शामिल होने का आव्हान किया हैँ
साथ में छ्ग प्रशिक्षित डीएड बीएड संघ ने यह भी चेतावनी दी है कि शिक्षक भर्ती की मांग जल्द पूरी नहीं हुई तो आगामी नगरी निकाय और पंचायत चुनाव में भाजपा को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है

धमतरी के डीआई सुमित देवांगन के निर्देश पर खुलेआम हो रहा कुहकुहा में अवैध क्लीनिक का संचालन..?

 

झोलाछाप डॉक्टर जागेश्वर के पास है मेडिकल की डिग्री चला रहे है अवैध क्लिनिक

सरकार के सारे कायदे कानून को तांक में रख कर रहे हैं कमीशन खोरी

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
धमतरी / छत्तीसगढ सरकार के आदेशों की घोर अव्हेलना की जा रही एक तरफ आदेश दूसरी तरफ कमीशन खोरी के चक्कर में लोगो के जान से खिलवाड़ कर रहे है। लगातार समाचार के माध्यम से शासन प्रशासन को संज्ञान दिलाया जा रहा है किन्तु, इनका कोई असर नहीं दिख रहा है। इसीलिए आज झोलाछाप डाक्टरों के हौसले दिन ब दिन बढ़ते जा रहे है।संपूर्ण छत्तीसगढ़ प्रदेश में प्रशासनिक अधिकारियों के निकम्मेपन और कमीशन खोरी के चलते कई अवैध क्लिनिक और पैथोलॉजी लैब संचालित हो रहे हैं। एक तरह राज्य सरकार आम आदमी की स्वास्थ्य और जान की सुरक्षा के लिए नियम बना हैं तो दूसरी तरफ राज्य सरकार की नियमों की धज्जियां स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी उड़ा रहे हैं।
ऐसा ही एक मामला धमतरी जिले के कुरूद विकासखंड अन्तर्गत ग्राम कुहकुहा का है। जहां सांई क्लिनिक अवैध रूप से जागेश्वर साहू स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी ड्रग इंस्पेक्टर के मौखिक आदेश पर चला रहे है। क्लीनिक के संचालक को जब क्लिनिक कैसे संचालित किया जाता है। उसके क्या नियम होते हैं। इस पर उनका कहना था कि, हमारे लिए कोई नियम कानून नहीं है। हमारे ड्रग इंस्पेक्टर ही हमारे सारे नियम और कानून है और उनके आदेश पर ही हम यह क्लिनिक संचालित कर रहे हैं।

गौरतलब है कि, धमतरी जिले के खाद्य एवम औषधी प्रशासन विभाग में पदस्थ सुमित देवांगन द्वारा सारे कायदे कानूनों को तांक में रख कर मौखिक आदेश

देकर अवैध क्लिनिक संचालित करवा रहे हैं। इस तरह के आदेश देकर क्लिनिक संचालित करने के पीछे क्या कहानी है। यह जांच का विषय है।
बहरहाल कुहकुहा में संचालित कर रहे डॉक्टर बिना किसी डिग्री के आम आदमी के जीवन के साथ डीआई के संरक्षण में खिलवाड़ कर रहे हैं।

धमतरी के डीआई सुमित देवांगन के निर्देश पर खुलेआम हो रहा कुहकुहा में अवैध क्लीनिक का संचालन..?

 

झोलाछाप डॉक्टर जागेश्वर के पास है मेडिकल की डिग्री चला रहे है अवैध क्लिनिक

सरकार के सारे कायदे कानून को तांक में रख कर रहे हैं कमीशन खोरी

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
धमतरी / छत्तीसगढ सरकार के आदेशों की घोर अव्हेलना की जा रही एक तरफ आदेश दूसरी तरफ कमीशन खोरी के चक्कर में लोगो के जान से खिलवाड़ कर रहे है। लगातार समाचार के माध्यम से शासन प्रशासन को संज्ञान दिलाया जा रहा है किन्तु, इनका कोई असर नहीं दिख रहा है। इसीलिए आज झोलाछाप डाक्टरों के हौसले दिन ब दिन बढ़ते जा रहे है।संपूर्ण छत्तीसगढ़ प्रदेश में प्रशासनिक अधिकारियों के निकम्मेपन और कमीशन खोरी के चलते कई अवैध क्लिनिक और पैथोलॉजी लैब संचालित हो रहे हैं। एक तरह राज्य सरकार आम आदमी की स्वास्थ्य और जान की सुरक्षा के लिए नियम बना हैं तो दूसरी तरफ राज्य सरकार की नियमों की धज्जियां स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी उड़ा रहे हैं।
ऐसा ही एक मामला धमतरी जिले के कुरूद विकासखंड अन्तर्गत ग्राम कुहकुहा का है। जहां सांई क्लिनिक अवैध रूप से जागेश्वर साहू स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी ड्रग इंस्पेक्टर के मौखिक आदेश पर चला रहे है। क्लीनिक के संचालक को जब क्लिनिक कैसे संचालित किया जाता है। उसके क्या नियम होते हैं। इस पर उनका कहना था कि, हमारे लिए कोई नियम कानून नहीं है। हमारे ड्रग इंस्पेक्टर ही हमारे सारे नियम और कानून है और उनके आदेश पर ही हम यह क्लिनिक संचालित कर रहे हैं।

गौरतलब है कि, धमतरी जिले के खाद्य एवम औषधी प्रशासन विभाग में पदस्थ सुमित देवांगन द्वारा सारे कायदे कानूनों को तांक में रख कर मौखिक आदेश देकर अवैध क्लिनिक संचालित करवा रहे हैं। इस तरह के आदेश देकर क्लिनिक संचालित करने के पीछे क्या कहानी है। यह जांच का विषय है।

बहरहाल कुहकुहा में संचालित कर रहे डॉक्टर बिना किसी डिग्री के आम आदमी के जीवन के साथ डीआई के संरक्षण में खिलवाड़ कर रहे हैं।

वाह रे शासन तेरा खेल..! निजी अस्पतालों में हो रही मौतें कौन जायेगा जेल…?

 

कम पढ़े लिखे लोगों के नीचे काम कर रहे है पढ़े लिखे डॉक्टर

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
रायपुर / छत्तीसगढ़ सरकार ने सरकारी चिकित्सकों के निजी अस्पतालों में प्रैक्टिस करने पर सख्त रोक लगा दी है। स्वास्थ्य विभाग ने इस संबंध में नए निर्देश जारी किए हैं, जिनके अनुसार कार्यावधि के दौरान डॉक्टरों द्वारा निजी प्रैक्टिस करने पर कार्रवाई की जाएगी।
स्वास्थ्य विभाग के विशेष सचिव चंदन कुमार ने प्रदेशभर में आदेश जारी करते हुए निजी प्रैक्टिस पर प्रतिबंध का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं। यह आदेश सरकारी अस्पतालों की सेवाओं को प्राथमिकता देने के उद्देश्य से लिया गया है, जिससे सरकारी कामकाज में होने वाली अव्यवस्थाओं को दूर किया जा सके।

झोलाछाप डॉक्टरों के पास है हर बीमारी का इलाज, लोगों की जान से कर रहे हैं खिलवाड़…?

गली-मोहल्लों गांव और शहर की पाश कालोनियों में बुखार उल्टी-दस्त मलेरिया दाद-खाज और खुजली के अलावा सांस के गंभीर मरीजों का इलाज झोलाछाप डॉक्टर कर रहे हैं। अपनी जेब गर्म करने के लिऐ झोलाछाप डॉक्टर द्वारा भोले-भाले लोगों के जान से खिलवाड़ जैसा घिनौना कृत्य कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों एवं कुछ स्वास्थ्यकर्मियों की मिलीभगत से अनुभव विहिन झोलाछाप डॉक्टरों द्वारा आज निजी अस्पताल का भी संचालक बने बैठे हैं।
मलेरिया, ब्लड शुगर, टायफायड, प्रेगनेंसी और ब्लड प्रेशर की जांच करने में भी झोलाछाप डॉक्टर पीछे नहीं रहते। जबकि इनके पास इन बीमारियों के इलाज के लिए संसाधन भी उपलब्ध नहीं रहता। साथ ही ये बीमारियां बहुत ही खतरनाक एवम भयावह भी हैं। जरा सी लापरवाही बरतने पर मरीज का जान जा सकती है और ऐसा लगातार हमको देखने मिल ही रहा है। विगत दिनों एक छः वर्षीय बच्ची को अपनी इहलीला समाप्त करनी पड़ी इसका सीधा और साफ नतीजा है कि,यदि उनके पास कोई योग्य चिकित्सक नही थे तो इनको एडमिट नही किया जाना था शायद बच्ची की जान बच सकती थी।
झोलाछाप डॉक्टर की दुकान पर सुबह-शाम मरीजों की भीड़ लगी रहती है। परामर्श के साथ खुद ही दवा देते रहते हैं। अपंजीकृत क्लीनिक के साथ बिना लाइसेंस के दवाएं भी बेच रहे हैं। कई बार मरीजों की हालत बिगड़ने पर उसे त्वरित सरकारी अस्पताल तक भेजने का काम भी किया करते हैं।

गांवों में फेरी लगाकर करते है लोगो का उपचार-

जिले के समीपस्थ वनग्रामों में इन झोलाछाप डाक्टरों द्वारा अपने घरों में क्लिनिक तो खोलकर रखे ही है। साथ ही इसके अलावा ये झोलछाप डॉक्टर गांवों में बैग लटकाकर फेरी करते हुए भी मरीजों का उपचार करते नजर आते है। झोलाछाप डॉक्टर मरीजों की अपनी बातों में फंसाकर शत प्रतिशत इलाज की गारंटी का भरोसा दिलाते हुए मनमानी फीस वसूलते है। इनका इलाज मरीजों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। यह डॉक्टर अपने पास से मरीजों को एन्टीबायोटिक दवाईयां देने के साथ ही बकायदा पर्ची पर भी दवाई लिखकर मरीजों को बाजार से खरीदने को कहते है।

मेडिकल स्टोर्स संचालक संग भी गठबंधन

मेडिलक स्टोर्स संचालक भी झोलाछाप डॉक्टरों की पर्ची पर लिखी दवाएं मरीजों को दे देते है। इनके खिलाफ कार्रवाई नहीं होने से ग्रामीण क्षेत्रों में दिनों दिन झोलाछाप डाक्टरों संख्या भी बढ़ती ही जा रही है।

वसूलते है मनमानी फीस-

झोलाछाप डॉक्टरों द्वारा इंजेक्शन एवं बॉटल भी मरीजों को लगाई जाती है। दर्द निवारक टेबलेट के अलावा एन्टीबायोटिक दवाइयों एवं इंजेक्शनों का इन डॉक्टरों के पास भरपूर स्टॉक होता है। जो शहर के मेडिकल दुकानदार इन्हें भारी कमीशन लेते हुए उपलब्ध कराते है। इन दवाओं की कीमत मरीजों से मनमानी वसूलते है। ऐसा करके झोलाछाप डाक्टरों द्वारा लोगों से मोटी रकम वसूलने के साथ ही उनकी जान के साथ खिलवाड़ किया भी किया जा रहा है।

एक बॅाटल लगाने के लेते है लगभग 300 रुपए-

झोलाछाप डाक्टरों द्वारा मरीजों को एक बॉटल लगाने के 300 रुपए तक लिए जाते है। अपने पर्ची पर एन्टीबायोटिक गोलियां भी लिखते है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि, इन डॉक्टरो द्वारा किस तरह की लूट मचा रखी है। अगर बॉटल मरीज लाता है। बॉटल लगाने के 50 और इंजेक्शन लगवाने के 20 रुपए लिए जाते है।

गांव-गांव खोल रखे है क्लिनिक-

जिले से सटे अधिकांश गांवों में झोलाछाप डॉक्टरों द्वारा संचालित क्लिनिक भी दिखाई देते है। जहां मरीजों के लिए एक पंलग एवं अंटेडर एक लकड़ी की बैंच की व्यवस्था होती है। इन क्लिनिकों में मरीजों की भीड़ लगी रहती है। इस संबंध में कुछ ग्रामीणों से चर्चा की गई तो उनका कहना था कि, गांव के उप स्वास्थ्य केंद्रों में डाक्टर नहीं होने से उन्हें मजबूरी में इन्ही डाक्टरों से उपचार कराना पड़ता है।

छुरा के झोलाछाप डॉ.जैकब जार्ज चला रहे थे अवैध अस्पताल स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जड़े ताले।

 

सालों से संचालित अवैध अस्पताल के संचालक झोलाछाप डॉक्टर जैकब जॉर्ज की दुकानदारी में लगा ताला ।

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
गरियाबंद / जिला मुख्यालय से लगभग 25 किलोमीटर दूर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अन्तर्गत छुरा में सालों से संचालित हो रही निजी अस्पताल में दिनांक 30 अगस्त 2024 को गरियाबंद जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ श्रीमती गार्गी यदि के निर्देशानुसार स्वास्थ्य विभाग की टीम गठित कर छापेमारी की कार्यवाही कर एक अवैध रूप से संचालित हो रहे निजी अस्पताल को बंद कर दिया गया।

बुलंद हौसले लिए सालों से संचालित हो रही थी झोलाछाप डॉक्टर जैकब जॉर्ज की दुकानदारी

विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र के नाम से प्रसिद्धि प्राप्त विकासखंड छुरा जिला गरियाबंद में सालों से अवैधानिक निजी अस्पताल संचालक डॉक्टर जैकब जॉर्ज द्वारा बेखौफ होकर आदिवासियों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ जैसा जिन्होंने कृत्य किया जा रहा था।
जिसकी जानकारी मिलने पर मीडिया की टीम पहुंचने पश्चात स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों को दूरभाष के माध्यम से जानकारी देने उपरांत ही त्वरित कार्यवाही हेतु जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ श्रीमती गार्गी यदु के निर्देशन में स्वास्थ्य विभाग की टीम गठित कर छापामारी की कार्यवाही करने वाले टीमों में डॉ.अमन हुमने, डॉ.सुनील रेड्डी, डॉ. सोमेश्वर ठाकुर एवम डॉ.हरीश चौहान पहुंचे मौके पर अस्पताल संचालन हेतु वैध दस्तावेजों की कमी पाई गई। जिसमे डॉक्टर जैकब जॉर्ज को त्वरित लिखित स्पष्टीकरण मांगते हुए। अस्पताल में ताला जड़ दिया गया । साथ ही स्वास्थ्य विभाग की टीम ने डॉक्टर जैकब जार्ज को हिदायत देते हुए कहा कि,यदि आप पुनः अस्पताल का संचालन करना चाहते है तो आपको नर्सिंग होम एक्ट संबंधित संपूर्ण दस्तावेज सबमिट करना पड़ेगा उसके बाद ही आप अस्पताल का संचालन कर सकते है। यदि इसके बा वजूद आपने अस्पताल का संचालन किया तो ये आपकी स्वयं की जवाबदारी होगी।

स्वच्छता और जैव-चिकित्सा अपशिष्ट परमिट नही है।

डॉक्टर जैकब जार्ज के अस्पताल में बायोमेडिकल अपशिष्ट पाइपलाइन और अपशिष्ट कम करने वाली पाइप बिछाने के लिए नगर पंचायत को अनापत्ति प्रमाण पत्र हेतु अभी आवेदन किया गया है जबकि इनको पूर्व में ही कर लेना था। लेकिन अपने अड़ियल रवैए के चलते इन्होंने किसी के प्रकार से भी अस्पताल प्रबंधन हेतु वैध दस्तावेज नहीं रखे है।

जिले में संचालित हो रहे हैं अवैध निजी अस्पतालों की अब खैर नहीं।

डॉ श्रीमती गार्गी यदु (जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी) गरियाबंद छत्तीसगढ

घोड़ारी के सरपंच जोगी बना भोगी,अब बन बैठे है योगी…?

 

जनपद के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को लिखित शिकायत के बा-वजूद कोई कार्यवाही नहीं।

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुंद / अक्सर हम देखते आ रहे है। चाहे कांग्रेस कार्यकाल हो या फिर बीजेपी कार्यकाल लेकिन भ्रष्टाचार तो दोनो पार्टियां खुलकर करती है इसमें कोई शक नही,किंतु इन्ही भ्रष्टाचारों के खिलाफ कोई शिकायतकर्ता यदि शिकायत करता है या फिर सूचना के अधिकार के तहत जानकारी चाहता है तो उसे जानकारी प्रदाय नही करने से दिग्भ्रमित किया जाता है। ऐसे ही एक लिखित शिकायत पत्र 21 जून 2024 को महासमुंद जनपद पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी को दिया गया था जिसमे आज तक कोई कार्यवाही नहीं की गई। बता दे जिला और जनपद पंचायत मुख्यालय से महज 10 किलो मीटर दूर ग्राम पंचायत घोड़ारी में ग्राम पंचायत के सरपंच और सचिव मिलकर कर रहे हैं सरकारी नियम कानून की अनदेखी। लाखों रुपए की लागत से बने व्यवसायिक कॉम्प्लेक्स का बिना किसी पंचायत प्रस्ताव के कर रहे हैं निजी उपयोग।

जनता की गाढी कमाई से बने कॉम्प्लेक्स को किराए ग्राम घोड़ारी के सरपंच सचिव द्वारा एक ढाबे वाले को किराए पर दे दिया गया है। ढाबे से आने वाले किराए की राशि को कौन रख रहा है। उस राशि का क्या उपयोग किया जा रहा है। इसका कोई हिसाब किताब सचिव के पास नहीं है। प्रशासनिक अधिकारी होने के नाते ग्राम सचिव की जवाबदेही बनती है कि ग्राम पंचायत में होने वाले गैरकानूनी गतिविधियों की जानकारी जनपद पंचायत के सीईओ को देते पर सचिव द्वारा ऐसा नहीं किया गया।

गौरतलब है कि सन 2014_15 में घोड़ारी ग्राम पंचायत के बिरकोनी मार्ग पर 5 दुकानें लगभग 10 लाख की लागत से बनाई गई थी। जिसका अब तक सरकारी योजना के मुताबिक नीलामी नहीं हुई है। उसकी कॉम्लेक्स को गैर कानूनी तरीके से ढाबा खोल दिया गया है। ढाबे से मिलने वाले हजारों रुपए की राशि का ग्राम पंचायत के सचिव के पास कोई हिसाब किताब नहीं है।

ग्राम घोडारी में बने इस व्यवसायिक कॉम्प्लेक्स की गैर कानूनी रूप से उपयोग किए जाने की शिकायत जनपद पंचायत सीईओ को दो माह पूर्व लिखित में शिकायत की गई थी लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

गौरतलब है कि ग्राम घोड़ारी में तमाम कायदे कानूनों का खुला उलंघन कोई नई बात नहीं रह गई है। राज्य और केंद्र सरकार से आने वाले विकास कार्यों की राशि का भी सारे नियमों को तांक पर रख कर आहरण किया गया है।
ये तो सिर्फ शुरुआत है। डीएमएफ फंड , 14वे मद एवम 15वे मद की राशि और शासन की विभिन्न योजनाओं में की गई आपसी बंदरबाट का खुलेगा पोल और होंगे पर्दाफाश। बने रहिए बेबाक बयान न्यूज़ के साथ हर राज खुलकर हर बात खुलकर