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शासकीय क्वार्टर खाली क्यों नहीं हुआ? बलौदा बाजार पदस्थ कर्मचारी पर उठे सवाल

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महासमुंद/ बलौदा बाजार – शासन के आदेशों के बावजूद महासमुंद स्थित शासकीय आवास (क्वार्टर नंबर H-18) अब तक खाली नहीं कराया जा सका है। जानकारी के अनुसार यह आवास उद्यान विभाग की कर्मचारी कु. मोनिका बेसरा (सहायक ग्रेड-2) को पूर्व में आबंटित किया गया था। उनका स्थानांतरण 30 सितंबर 2022 को महासमुंद से बलौदा बाजार कर दिया गया था तथा 23 दिसंबर 2022 को उन्हें महासमुंद कार्यालय से भारमुक्त कर दिया गया था। इसके बाद 26 दिसंबर 2022 को उन्होंने बलौदा बाजार में कार्यभार भी ग्रहण कर लिया था।

आदेशों के बावजूद आवास खाली नहीं

  • कलेक्टर कार्यालय महासमुंद एवं उद्यान विभाग द्वारा कई बार पत्र जारी कर शासकीय क्वार्टर को रिक्त करने हेतु निर्देश दिए गए।

  • 13 दिसंबर 2024 को जारी आदेश में भी स्पष्ट रूप से कहा गया कि उक्त आवास अनधिकृत रूप से उपयोग किया जा रहा है, तथा इसे तुरंत खाली किया जाए।

  • छत्तीसगढ़ लोक परिसर (बेदखली) अधिनियम 1974 के अनुसार, अनधिकृत आधिपत्य की स्थिति में दोगुनी दर से लाइसेंस शुल्क वसूली और बेदखली की कार्यवाही का प्रावधान है।

संभावित कानूनी और प्रशासनिक कार्यवाही

  • भारतीय दंड संहिता की धारा 166A: सरकारी आदेशों की अवहेलना करने पर 6 माह से 2 वर्ष तक कारावास और जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।

  • अनुशासनात्मक कार्यवाही: सेवा नियमों के तहत निलंबन, पदोन्नति रोकना या सेवा समाप्ति जैसे दंड भी संभव हैं।

उठते सवाल

  1. आखिर आदेशों के बावजूद क्वार्टर H-18 क्यों खाली नहीं हुआ?

  2. क्या कर्मचारी को किसी उच्च अधिकारी या राजनैतिक व्यक्ति का संरक्षण प्राप्त है?

  3. यदि आवास खाली नहीं किया गया है तो अब तक दोगुनी दर से लाइसेंस शुल्क क्यों नहीं वसूला गया?

  4. क्या बलौदा बाजार में पदस्थापित रहते हुए उन्हें हाउस रेंट अलाउंस (HRA) का लाभ मिल रहा है?

  5. क्या बलौदा बाजार में नया आवास आबंटित किया गया है, और यदि हाँ, तो उसका उपयोग किया जा रहा है या नहीं?

जनहित का मुद्दा

लगातार आदेशों के बावजूद शासकीय आवास रिक्त न होना प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है। यह मामला न केवल शासनादेशों की अवहेलना से जुड़ा है, बल्कि सरकारी संपत्ति के अनुचित उपयोग और जवाबदेही पर भी सवाल खड़े करता है।

नीतीश कुमार का इशारा: बीजेपी–जेडीयू में दरार लाने वाले नेता मंच पर मौजूद

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बिहार की राजनीति में एक बार फिर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का बयान चर्चा का विषय बन गया है। पटना में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम में उन्होंने पुराने राजनीतिक घटनाक्रम को याद दिलाते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के बीच जो मतभेद और दरार पैदा हुई थी, वह किसी बाहरी साज़िश का नतीजा नहीं थी, बल्कि यह सब कुछ “घर के ही लोगों” की वजह से हुआ था।

ललन सिंह पर अप्रत्यक्ष टिप्पणी

नीतीश कुमार ने अपने संबोधन के दौरान जेडीयू के वरिष्ठ नेता और पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह की ओर इशारा करते हुए कहा कि “जो लोग उस समय यह सब कर रहे थे, वे आज हमारे बीच ही बैठे हैं।” उन्होंने नाम नहीं लिया, लेकिन पूरा मंच और उपस्थित श्रोतागण समझ गए कि यह टिप्पणी ललन सिंह की ओर इशारा करती है।

गठबंधन टूटने की पृष्ठभूमि

साल 2022 में जेडीयू और बीजेपी के बीच बढ़ते मतभेदों ने गठबंधन तोड़ने की नौबत ला दी थी। उस समय राजनीतिक गलियारों में तरह–तरह की चर्चाएँ थीं कि दोनों दलों के बीच तालमेल बिगाड़ने में जेडीयू के कुछ बड़े नेताओं की अहम भूमिका रही। नीतीश कुमार का ताज़ा बयान उसी दौर की ओर संकेत करता दिखा।

एकता पर दिया जोर

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि राजनीति में सबसे ज़रूरी बात आपसी एकता और सहयोग है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे पुराने विवादों को भुलाकर राज्य के विकास और जनता की सेवा पर ध्यान दें। नीतीश ने यह भी कहा कि “जो गलतियां हुईं, वे हम सबके सामने हैं, लेकिन अब हमें भविष्य की ओर देखना चाहिए।”

राजनीतिक हलचल तेज

नीतीश कुमार के इस बयान के बाद बिहार की सियासत में नई हलचल शुरू हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह वक्तव्य न केवल पुराने मतभेदों को उजागर करता है, बल्कि आने वाले चुनावों में पार्टी के अंदर की रणनीति का भी संकेत देता है। बीजेपी और जेडीयू के संबंधों को लेकर फिर से चर्चा गर्म है और सभी की नज़र अब ललन सिंह की प्रतिक्रिया पर टिकी हुई है।

ब्रेकिंग न्यूज़ अवैध संबंध बना मौत का कारण पहले पति अब प्रेमी..!

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देवकी के प्रेम जाल में पागल था मृतक पिलेश्वर साहू

पति की हत्या कर सजा काट रिहा हुई थी देवकी बघेल

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुन्द / अवैध संबंध का नतीजा हमेशा भयावह रहता है। इसका अंजाम किसी न किसी को अपनी जान देकर चुकाना पड़ता है। ऐसा क्या कारण है कि,लगातार इस तरह से वारदाते हो रही है कही न कही ईश्वर द्वारा बनाए गए दो आत्माओं को शादी जैसे बंधन से जोड़कर अपनी दाम्पत्य जीवन को खुशहाल बनाना होता है। परंतु कुछ समय व्यतित करने पश्चात दोनों एक दूसरे की हरकतों से भलीभांति परिचित हो जाते है और फिर बाद में एक नए रिश्तों का जन्म होता है जिसे अवैध संबंध या अवैध प्रेम प्रसंग कहा जाता है। एक हंसता खेलता परिवार के बीच में किसी तीसरे की एंट्री मानो मौत की घंटी जिसका खामियाजा पिलेश्वर साहू को अपनी जान देकर चुकाना पड़ा।
इसी तारतम्य में विगत दिनों बेमचा के नहर में एक 35 से 40 वर्षीय व्यक्ति नग्न अवस्था में लाश मिली थी जिसमें मृतक का बड़ी बे रहमी से गुप्तांग काट दिया गया था तथा चेहरे को ऐसा खरोचा गया था कि, कोई इसे पहचान न सके। किन्तु महासमुंद पुलिस को सेल्यूट है कि, कुछ ही दिनों टीम गठित कर आरोपियों को उनके ठिकाने पहुंचा दिया गया।
आज दिनांक 15 सितंबर को स्थानीय कंट्रोल रूम में महासमुंद पुलिस द्वारा ग्राम बेमचा में हुई हत्या का खुलासा करते हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर बताया गया कि, विगत दिनांक 09 सितंबर 2025 को ग्राम बेमचा में हुई हत्या की गुत्थी महासमुंद पुलिस ने सुलझा ली है।
बता दे कि, मृतक की पहचान पिलेश्वर साहू निवासी ग्राम पचेड़ा थाना खल्लारी के रूप में हुई है।

मृतक पिलेश्वर साहू की हत्या करने वाले प्रेमिका और उसका बेटा को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।

सायबर सेल की टीम एवं थाना महासमुन्द पुलिस की संयुक्त कार्यवाही।
घटना इस प्रकार है कि, थाना महासमुंद के मर्ग क्रमांक 143/2025 मृतक अज्ञात पुरूष उम्र करीबन 30-35 वर्ष की मर्ग जांच एवं पंचनामा कार्यवाही तथा ग्राम बेमचा के बड़ी नहर में एक अज्ञात व्यक्ति का शव पानी में उफ़ल रहा है। मृतक के मुंह में कपड़े ठूसने तथा मृतक के चेहरा गला व गुप्तांग में चोट पहुंचाने एवं साक्ष्य नष्ट करने मृतक के शव को पानी में फेंकने तथा मृतक के शव का पोस्टमार्टम डाक्टर द्वारा शार्ट पीएम रिपोर्ट में हत्या करना लेख किया है। मर्ग जांच एवं डॉक्टर द्वारा दिये गये शार्ट पीएम रिपोर्ट के आधार पर अपराध की धारा 103(1), 238 बी.एन.एस. का अपराध घटित होना पाया जाने से आरोपी अज्ञात के विरुद्ध थाना सिटी कोतवाली महासमुन्द में अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया।

सायबर सेल की टीम एवं थाना महासमुन्द पुलिस टीम को घटना स्थल मौका पहुंच कर घटना निरीक्षण कर अज्ञात शव एवं अज्ञात आरोपी के बारे में अलग-अलग 03 टीम गठित कर सूक्ष्म से सूक्ष्म जानकारी एकत्र करना शुरू किया गया।

विवेचना के दौरान अज्ञात शव की पहचान हेतु घटना के आस पास रहने वाले लोगों से पूछताछ कर जानकारी एकत्र की जा रही थी तभी पुलिस की टीम को जानकारी प्राप्त हई की घटना स्थल के पास रहने वाली देवकी बघेल जो कि,पूर्व में अपने पति की हत्या के मामले में जेल से रिहा हुई है। उक्त महिला के घर मृतक पिलेश्वर साहू पिता गजानंद साहू उम्र 35 वर्ष पचेड़ा थाना खल्लारी महासमुंद का आना जाना था और मृतक पिलेश्वर साहू और देवकी बघेल के बीच अवैध संबंध था।
मृतक पिलेश्वर साहू रायपुर में प्राईवेट सुरक्षा गार्ड का काम किया करता था जो कि, विगत दिनांक 08 सितम्बर 2025 से ड्यूटी में पर नहीं आ रहा है।
उक्त जानकारी के आधार पर बरामद अज्ञात शव की पहचान मृतक के परिजनों से जिन्होंने मृतक को पिलेश्वर साहू के रूप में पहचान किया मृतक की पहचान सुनिश्चित होने पर उसके परिजनों से पूछताछ में जानकारी प्राप्त हुई कि, मृतक देवकी बघेल के साथ विगत 05 वर्ष से रहता था जिसके चलते मृतक पिलेश्वर अपनी पत्नि और दो बच्चों को छोड़ दिया था ।
देवकी बघेल से पूछताछ किया गया देवकी बघेल ने पूछताछ में अपने पुत्र सुरेश बघेल के साथ मिलकर मृतक पिलेश्वर साहू की हत्या दिनांक 09 सितम्बर 2025 को रात्रि में करना स्वीकार किया देवकी बघेल से पूछताछ में बताया कि, मृतक पिलेश्वर साहू आये दिन देवकी बघेल के घर आकर परिवारिक मामले में हस्तक्षेप करता था।
मृतक के आचरण के कारण देवकी बघेल एवं उसका बेटा सुरेश बघेल परेशान हो गये थे। घटना दिनांक को रात्रि मृतक पिलेश्वर साहू के द्वारा आरोपीगण के घर में आकर वाद विवाद कर रहा था तभी आरोपी देवकी एवं सुरेश ने मृतक को रस्सी से खाट में बांध दिया और घर में रखे सब्जी काटने वाले चाकू से मृतक पिलेश्वर साहू का गला रेत दिया और आवाज न करे इसलिए उसके मुंह में कपड़ा (चड्डी) को डाल दिया एवं देवकी ने घर में रखे पेचकस से उसकी आंख में वार किया और मृतक के गुप्तांग को काट दिया। मृतक की पहचान छुपाने के लिए मृतक के चेहरे में मुरूम का ढेला पटक कर चेहरा को खरोचते हुए विकृत कर दिया एवं थोडी देर बाद मृतक पिलेश्वर साहू की मृत्यु हो गई।
बाद मृतक पिलेश्वर साहू के शव को घर से 100 मीटर की दूरी में नहर है वहां फेक दिया गया। साथ ही उसके कपड़े एवं मोबाईल को नहर फेंक देना आरोपियों ने स्वीकार किया है।

पुलिस टीम के द्वारा आरोपीगण के कब्जे से मृतक की हत्या में प्रयुक्त 01 नग चाकु, रस्सी, पेचकस एवं आरोपियों के द्वारा घटना के दौरान पहना हुआ कपड़ा जिसमें मृतक का रक्त लगा हुआ को जप्त किया गया। आरोपीगण के विरूध्द थाना सिटी कोतवाली महासमुन्द में अपराध धारा 103(1), 238 बी.एन. एस. के तहत् कार्यवाही कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेजा गया है।

आज के इस प्रेस कॉन्फ्रेंस महासमुंद जिला की अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्रीमती प्रतिभा पांडे

महासमुंद थाना प्रभारी शरद दुबे

साइबर प्रभारी एवं सयुक्त टीम की मेहनत रंग लाई ।

 

गिरफ्तार आरोपी :-

(01) देवकी बघेल पति स्व. धनीराम बघेल उम्र 45 वर्ष सा. बेमचा थाना महासमुन्द

(02) सुरेश बघेल पिता स्व. धनीराम बघेल उम्र 21 वर्ष सा. बेमचा थाना महासमुन्द

शासकीय क्वार्टर खाली क्यों नहीं हुआ? आदेशों के बावजूद कार्रवाई अधूरी

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रिपोर्ट: मयंक गुप्ता, महासमुंद

महासमुंद – शासन और कलेक्टर कार्यालय के आदेशों के बावजूद महासमुंद स्थित शासकीय क्वार्टर नंबर H-18 अब तक खाली नहीं हो पाया है। यह आवास पूर्व में उद्यान विभाग की कर्मचारी कु. मोनिका बेसरा (सहायक ग्रेड-2) को आबंटित किया गया था।

स्थानांतरण और आदेश

  • 30 सितंबर 2022 को शासन ने कु. मोनिका बेसरा का स्थानांतरण महासमुंद से बलौदा बाजार किया।

  • 23 दिसंबर 2022 को उन्हें महासमुंद कार्यालय से भारमुक्त किया गया और 26 दिसंबर 2022 को उन्होंने बलौदा बाजार कार्यालय में कार्यभार ग्रहण कर लिया।

  • इसके बाद कई पत्रों और आदेशों के माध्यम से क्वार्टर खाली करने के निर्देश दिए गए, जिनमें 13 अक्टूबर 2023 और 13 दिसंबर 2024 के आदेश प्रमुख हैं।

नियम और प्रावधान

  • IPC धारा 166A: सरकारी आदेशों की अवहेलना पर 6 माह से 2 वर्ष तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है।

  • सेवा नियम: दोषी पाए जाने पर निलंबन, पदोन्नति रोकना या सेवा से बर्खास्तगी तक की कार्रवाई संभव है।

  • छत्तीसगढ़ लोक परिसर (बेदखली) अधिनियम 1974: अनधिकृत कब्जे की स्थिति में दोगुनी दर से लाइसेंस शुल्क वसूली और बेदखली की प्रक्रिया का प्रावधान है।

वर्तमान स्थिति

कलेक्टर कार्यालय महासमुंद ने ज्ञापन जारी कर स्पष्ट किया कि कर्मचारी का स्थानांतरण हुए लगभग तीन वर्ष हो चुके हैं, इसके बावजूद आवास का अनधिकृत उपयोग किया जा रहा है। आदेश मिलने के बाद भी क्वार्टर खाली नहीं किया गया है।

उठते सवाल

  1. आदेशों के बावजूद शासकीय क्वार्टर क्यों खाली नहीं कराया जा सका?

  2. क्या कर्मचारी को किसी राजनैतिक या प्रशासनिक संरक्षण का लाभ मिल रहा है?

  3. क्या अब तक अनधिकृत अवधि के लिए दोगुने बाजार दर पर लाइसेंस शुल्क वसूला गया है?

  4. बलौदा बाजार में कार्यरत रहते हुए क्या उन्हें हाउस रेंट अलाउंस (HRA) भी मिल रहा है?

  5. क्या बलौदा बाजार में नया शासकीय आवास एलॉट हुआ है और यदि हुआ है तो उसका उपयोग हो रहा है या नहीं?

जनहित का प्रश्न

लगातार आदेशों के बावजूद आवास रिक्त न होना शासन-प्रशासन की कार्यवाही पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। यह मामला सरकारी आदेशों की अवहेलना और शासकीय संपत्ति के अनुचित उपयोग से जुड़ा हुआ है।

आखिर छुरा के अस्पतालों में ही क्यों होती है..! इलाज के दौरान मौत…!

14 वर्षीय जिज्ञासा की मौत चीख चीख कर न्याय मांग रही हैं।

मां बाप का रो-रो कर हो रहा बुरा हाल

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
गरियाबंद / गरियाबंद जिले का एक मात्र ऐसा आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र है। जहां पर सिर्फ और सिर्फ मौत की दास्तां दिखाई देती है।
इस क्षेत्र का पहला ऐसा घटना नहीं है यहां पर अनगिनत घटना घटित हो चुके है और तो और निजी अस्पतालों को भी सील किया जा चुका है।
फिर भी आज तक ऐसी कोई सराहना वाली कार्यशैली नहीं की गई है जिससे इस क्षेत्र का जिले भर में नाम हो।
समाचार लिखते हुए यह अहसास होता है कि, यहां पर बिना डिग्रीधारी चिकित्सकों के लिए प्रयोग शाला खुला हो। बता दे कि,इसीलिए यहां मरीज को जिस किसी भी अस्पतालों में इलाज के लिए ले जाने पर कोई रिफर नहीं करता है और तब तक उस मरीज की बॉडी पर वर्कआउट किया जाता है जब तक उनकी प्रयोग पूरी न हो जाए। प्रयोग पूरी होने मामला हाथ से फिसलने को स्थिति निर्मित होती है तो सब उस मरीज को किसी अन्यत्र जगह या छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर रिफर करने की सलाह देते है और पल्ला झाड़ने में लग जाते है। इसका अंतिम परिणाम परिजनों को केवल और केवल मृत शरीर ही प्राप्त होता है।

मरीज को रिफर करने वाले चिकित्सक को पता होता है ये कितने समय की मेहमान है।

अक्सर हम अपने आस पास के क्षेत्रों में देखते है या सुनते है की मरीज को रायपुर ले जाते या फिर किसी अन्य अस्पतालों में दाखिल के लिए ले जाते हुए मरीज की सांस थम जाती है।
कहने का तात्पर्य यह है कि, यदि मरीज को आपके अस्पताल में सही इलाज नहीं मिलने वाला है या फिर उस बीमारी से संबंधित चिकित्सक आपके पास उपलब्ध नहीं तो मरीज को एडमिट नहीं लेना चाहिए, किंतु यह भी झुठलाया नहीं जा सकता है यदि मरीज को एडमिट नहीं करेंगे तो इन निजी अस्पतालों का भट्ठा बैठ जाएगा इनकी दुकानदारी बंद हो जाएगी और यही कटु सत्य है।
हमको अपनो से दूर होना पड़ता है। ये कहानी सिर्फ एक व्यक्ति विशेष की नहीं है अपितु इस क्षेत्र के अनगिनत लोगों की है जो छुरा क्षेत्र में संचालित हो रहे निजी अस्पतालों की प्रकोप से पीड़ित है।

ऐसा ही फिर से एक मामला हमारे संज्ञान में आया है। किंतु ये निजी अस्पताल से संबंधित नहीं अपितु सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र छुरा का है जिसमें पढ़े लिखे अपने आप को एम.बी.बी.एस. से कम नहीं आंकते है।
बता दे कि, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र छुरा में घटी एक ऐसी दिल दहला देने घटना। महज़ 14 वर्षीय जिज्ञासा की मौत ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। मृतक जिज्ञासा के परिजनों ने आरोप लगाया है कि, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र छुरा में पदस्थ प्रशिक्षु चिकित्सकों की लापरवाही और ओवरडोज दवा देने की वजह से 14 वर्षीय जिज्ञासा की मौत हो गई है। अब सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिर कब तक स्वास्थ्य व्यवस्था की लापरवाहियों की कीमत आम लोगों को अपनी जान देकर चुकानी होगी..?

*क्या है पूरा मामला?*

वार्ड नं. 12, झूलेलाल पारा, छुरा निवासी जिज्ञासा (14 वर्ष) को 15 जुलाई 2025 की रात अचानक पेट दर्द, गैस, सीने में जलन और पीठ में तेज दर्द की शिकायत हुई। घबराए परिजन उसे रातों-रात सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र छुरा लेकर पहुँचे।

परिजनों के अनुसार, वहाँ ड्यूटी पर मौजूद प्रशिक्षु चिकित्सक डॉ.अभिषेक ने मरीज को बिना गंभीरता पूर्वक देखे बिना ही केवल प्राथमिक की प्रक्रिया किए और बोले कोई दिक्कत वाली बात नहीं है ठीक हो जाएगा।इसको रायपुर ले जाओ कहते हुए रायपुर रेफर कर दिया। इस दौरान डॉक्टर ने जो दवाएँ दीं, उसे लेकर परिजनों का बड़ा आरोप है – “डॉक्टर ने ओवरडोज़ दवा दे दी, जिससे हालत और बिगड़ गई।”

16 जुलाई की रात करीब 3 बजे, जिज्ञासा को कुर्रा आयुष्मान हॉस्पिटल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई…

*“जिज्ञासा जिंदा है” – परिजनों का रोना, डॉक्टरों के बयान में विरोधाभास*

परिजन शव को लेकर गोबरा-नयापारा सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पहुँचे। वहाँ भी डॉक्टरों ने स्पष्ट कहा कि “मौत ओवरडोज़ से हुई है, पोस्टमार्टम जरूरी है।”

परिजन पोस्टमार्टम नहीं कराना चाहते थे और सीधे घर चले आए। घर पहुँचकर परिजनों का दर्द और बढ़ गया। वे बार-बार कहते रहे – “जिज्ञासा अभी जिंदा है, उसकी नस-नाड़ी चल रही है।”

इस पर स्थानीय डॉक्टर को बुलाया गया, जिसने जांच के बाद साफ कहा – “जिज्ञासा की मौत को लगभग 1 घंटा हो चुका है।”

यानी एक ही प्रकरण में अलग-अलग डॉक्टरों के विरोधाभासी बयान सामने आए।

*अब उठ रहे हैं बड़े सवाल –*

1. क्यों प्रशिक्षु डॉक्टर ने गंभीर मरीज को बिना उचित इलाज सिर्फ रेफर कर दिया?

2. क्या दवाओं का ओवरडोज़ ही मौत का कारण बना?

3. आयुष्मान हॉस्पिटल और स्थानीय डॉक्टरों के बयान में इतना विरोधाभास क्यों है?

4. जब तक परिजन कहते रहे कि जिज्ञासा जीवित है, तब तक स्वास्थ्य तंत्र ने स्पष्टता क्यों नहीं दी?

*परिजनों का आक्रोश – “हमारी बेटी व्यर्थ न जाए”*

जिज्ञासा के पिता प्रकाश कुमार यादव (पत्रकार) ने आक्रोशित होते हुए कहा – “हमारी बेटी अब इस दुनिया में नहीं है। लेकिन उसकी मौत व्यर्थ नहीं जानी चाहिए। एक प्रशिक्षु डॉक्टर की लापरवाही ने उसकी जान ले ली। इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए और भविष्य में किसी अन्य बेटी को ऐसी लापरवाही का शिकार न होना पड़े।”

*जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की चुप्पी*

इस मामले पर अब तक सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र छुरा और जिला स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि “अगर अस्पतालों में प्रशिक्षु डॉक्टरों को इतनी बड़ी जिम्मेदारी दी जाएगी तो आने वाले दिनों में और भी ऐसी त्रासदी सामने आ सकती है।”

जिज्ञासा की मौत सिर्फ एक बच्ची की मौत नहीं, बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र पर सवाल है। छुरा अस्पताल की लापरवाही ने एक परिवार की हँसी-खुशी छीन ली। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेकर कार्रवाई करता है या इसे भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबा देता है।

किसानों को मिलेगा बड़ा मुनाफा प्रमाणित बीज उत्पादन से पंजीयन की आगामी आखिरी तारीख 31 अगस्त को

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुंद / लभरा खुर्द अगर आप भी खेती से ज्यादा कमाई करना चाहते हैं तो प्रमाणित बीज उत्पादन आपके लिए एक बेहतरीन मौका है। छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम हर साल खरीफ मौसम में किसानों को बीज उत्पादन कार्यक्रम में शामिल करता है। इस योजना से जुड़कर किसान सामान्य फसल उत्पादन की तुलना में ज्यादा मुनाफा कमा सकते हैं। अगर आप भी इस योजना से जुड़ना चाहते हैं तो ध्यान रखें कि पंजीयन की आखिरी तारीख 31 अगस्त है। तो फिर देर किस बात की। बीज प्रंबधक-ईशाक सोना मोबाईल
70490 97975,सहायक बीज प्रमाणीकरण अधिकारी-चंद्रकांत वर्मा मोबाईल 73544 79987 से तुरंत संपर्क करे।

विशेषज्ञों के अनुसार प्रमाणित बीज से सामान्य बीज की तुलना में 10 से 15 फीसदी तक अधिक उपज मिलती है। यही वजह है कि कृषि विभाग लगातार किसानों को प्रमाणित बीज उपयोग करने और बीज उत्पादन कार्यक्रम से जुड़ने के लिए प्रेरित करता है। इस कार्यक्रम में वही किसान शामिल हो सकते हैं जिनके पास कम से कम 2.5 एकड़ जमीन है। पंजीयन के लिए उन्हें अपने जिले के बीज प्रक्रिया केंद्र में मामूली शुल्क के साथ आवेदन करना होगा। पंजीयन के बाद बीज प्रमाणीकरण अधिकारी किसानों को पूरी प्रक्रिया समझाते हैं।

फसल कटाई के बाद किसान जब बीज प्रक्रिया केंद्र में अपना उत्पादन जमा कराते हैं तो एक सप्ताह में उन्हें बीज की कुल कीमत का लगभग 60 प्रतिशत अग्रिम भुगतान कर दिया जाता है। शेष 40 प्रतिशत राशि बीज की जांच रिपोर्ट आने के बाद दी जाती है। इसमें लगभग दो महीने का समय लगता है। पिछले खरीफ में बीज उत्पादन करने वाले किसानों को बाजार दर से काफी ज्यादा दाम मिले। उदाहरण के तौर पर धान की मोटी किस्म पर 3843 रुपये, पतली किस्म पर 4011 रुपये और सुगंधित किस्म पर 4444 रुपये प्रति क्विंटल का दाम मिला। जबकि सामान्य समर्थन मूल्य सिर्फ 3100 रुपये प्रति क्विंटल था। इसका मतलब किसानों को मोटे धान में ही करीब 743 रुपये प्रति क्विंटल ज्यादा फायदा हुआ। एक एकड़ में यह लाभ लगभग 15,603 रुपये और एक हेक्टेयर में करीब 40,000 रुपये तक पहुंच गया। हालांकि बीज की शेष 40 प्रतिशत राशि मिलने में 2 से ढाई माह का समय लगता है, लेकिन फिर भी यह खेती का सबसे ज्यादा लाभकारी विकल्प माना जा रहा है। अभी शासन स्तर पर इस पर मिलने वाले अनुदान को और बढ़ाने पर विचार हो रहा है।

तुमगांव अध्यक्ष बलराम उर्फ “बरहा” बना बलि का बकरा..?

क्या कभी तुमगांव की स्थिति सुधरेगी या फिर ऐसे ही विवादों के बीच चर्चा का विषय बना रहेगा

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुंद / जिले में लगातार बढ़ रहे अवैध नशे के कारोबारियों के ऊपर अब महासमुंद पुलिस ने शिकंजा कसना चालू कर दिया।लगातार एक के बाद एक कार्यवाही का सिलसिला प्रारंभ हो चुका है। इन्हीं पुलिसिया कार्यवाही की सराहना करते हुए तुमगांव नगर पंचायत अध्यक्ष बलराम कांत साहू उर्फ बरहा ने तुमगांव नगर पंचायत में बरसो से जिस्मफरोशी का कारोबार एवं अवैध शराब की बिक्री पर अंकुश लगाने विगत दिनों ज्ञापन सौंपे। ज्ञापन सौंपने लिखित शिकायत में बलराम कांत ने यदि शिकायत पश्चात पुलिस कार्यवाही नहीं करती है। उस परिस्थितियों में तुमगांव थाना का घेराव करने बाध्य रहेंगे ऐसा लेख किया गया है। साथ ही लिखित शिकायत से सोशल मीडिया को भी अवगत कराया गया। सोशल मीडिया में लिखित शिकायत के आधार पर न्यूज भी वायरल हुआ।

सोशल मीडिया न्यूज वायरल उपरांत तुमगांव की ही एक अन्य महिला द्वारा थाने में बलराम कांत के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई।

बता दे कि, ग्राम तुमगांव क्षेत्र के तथाकथित लोगों का कहना है कि, तुमगांव में बरसो से ही जिस्मफरोशी का धंधा संचालित हो रहा है किंतु आज दिवस तक किसी भी जनप्रतिनिधि ने इन अवैध कारोबार को खत्म करने की बात नहीं की है। किंतु वर्तमान निर्दलीय नगर पंचायत अध्यक्ष बलराम कांत साहू उर्फ बरहा ने सालों से संचालित हो रहे धंधे पर अंकुश लगाने लिखित शिकायत दर्ज की गई,
बा वजूद उनके लिखित शिकायत पर पुलिस कार्यवाही नहीं करते हुए। उल्टा शिकायत कर्ता के विरुद्ध षड्यंत्र रच कर प्रकरण दर्ज कर लिया गया।

मामला कुछ इस तरह से हुआ

आज शनिवार सुबह तड़के नगर पंचायत अध्यक्ष बलरामकांत साहू को पुलिस ने उनके घर से गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी की खबर फैलते ही पूरे नगर पंचायत क्षेत्र में आक्रोश फूट पड़ा। ग्रामीणों और समर्थकों ने थाने का घेराव कर दिया, बाजार की सभी दुकानें बंद करा दी गईं और मुख्य मार्ग पर चक्काजाम कर पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। भीड़ ने “बलरामकांत साहू को रिहा करो” के नारे लगाए।

गौरतलब है कि, बलरामकांत साहू ने महज़ एक दिन पहले ही पुलिस को ज्ञापन सौंपकर नगर क्षेत्र में फल-फूल रहे जिस्मफरोशी के कारोबार पर रोक लगाने की मांग की थी और आंदोलन की चेतावनी भी दी थी। परंतु हैरत की बात यह है कि अगले ही दिन पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उन्हीं को गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस का कहना है कि, बीती रात कुछ महिलाओं ने थाने पहुंचकर बलरामकांत साहू पर छेड़छाड़ और पेट्रोल डालकर घर जला देने की धमकी देने की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के आधार पर पुलिस ने साहू को गिरफ्तार कर लिया।

क्या पुलिस वाकई कानून के लिए काम कर रही है या फिर अवैध कारोबारियों के लिए…?

जिस व्यक्ति ने जिस्मफरोशी जैसे काले धंधे को बंद कराने की आवाज उठाई, क्या संयोग से उसी पर छेड़छाड़ का आरोप लग जाता है?

क्या यह महज़ इत्तेफाक है या फिर अवैध धंधों को बचाने की साज़िश?

क्या पुलिस की गिरफ्तारी कार्रवाई “पेट्रोल की धमकी” पर हुई, या फिर “जिस्मफरोशी की दुकानें बंद कराने की धमकी” पर?

तुमगांव थाना क्षेत्र वर्षों से जिस्मफरोशी का गढ़ माना जाता रहा है। कई बार प्रशासन ने यहां पीटा एक्ट के तहत कार्रवाई की, यहां तक कि कुछ साल पहले इस धंधे में लिप्त महिलाओं के घर तक तोड़े गए थे। लेकिन इसके बावजूद कारोबार आज भी बदस्तूर जारी है।

क्या कहती है तुमगांव की जनता

ग्रामीणों का कहना है कि,जब जब कोई अच्छा कार्य गांव के हित में होता है तो या कोई व्यक्ति आवाज उठाता तो उनकी आवाज को दबाने का कार्य किया जाता है। वैसे ही जब से नगर पंचायत तुमगांव में बलराम कांत उर्फ बरहा ने गांव के हित में आवाज उठाने का प्रयास किया तब तब कोई न कोई बाधा के रूप में उनके ऊपर शनि जैसा प्रकोप बरसा कर उनके खिलाफ कार्यवाही करने पुलिस प्रशासन को भी मजबूर कर देता है।

आखिर कब हटेगी तुमगांव की गंदगी

ऐसा नहीं है कि,शासन प्रशासन के कानों में यह बात नहीं गई होगी कि,तुमगांव में आज जो भी अवैध कारोबार संचालित हो रहे है। वो सामाज को और आने वाली पीढ़ियों को अंधकार में डुबोने का कार्य कर रही है। जब तक इन अवैध कारोबार पर अंकुश नहीं लगेगा तब तक कोई न कोई बेगुनाह इसकी भेट चढ़ता चला जाएगा।

बलरामकांत साहू पर निम्न धाराओं के तहत मामला दर्ज हुआ है।

धारा 351(3) – छेड़छाड़ किसी महिला से अशोभनीय व्यवहार, छेड़छाड़, सज़ा: 3 साल तक की कैद या जुर्माना या दोनों। धारा 296 – आपराधिक धमकी किसी व्यक्ति को जान-माल की हानि पहुँचाने की धमकी देना। सज़ा: 2 साल तक की कैद या जुर्माना या दोनों। धारा 74 – सामान्य मारपीट, किसी को चोट पहुँचाना। सज़ा: 1 साल तक की कैद या 10,000 रुपए तक जुर्माना।

4. धारा 75(2) – गंभीर मारपीट / खतरनाक हथियार से चोट,
हथियार, आग या खतरनाक पदार्थ से चोट पहुँचाना। जिसमें 7 साल तक की सख्त कैद + जुर्मान।

तुमगांव की जनता ने दिया समर्थन

निर्दलीय अध्यक्ष बलराम कांत साहू जब से तुमगांव की अध्यक्षता की बाग डोर का जिम्मा लिए है तब से तुमगांव के हित में ही अपना समर्पण दे रहे है और अच्छे लोगों के साथ ही बुरा व्यवहार ये तो आम बात हो गई। अब क्या होगा तुमगांव में अवैध कार्य करने वालों का क्या बलराम कांत को जमानत मिलने पर कोई ठोस कदम उठेंगे या फिर ऐसे ही अवैध कारोबारियों के हौसले बुलंद होते रहेंगे।

“जाने क्या होगा रामा रे” हर्बल लाईफ “रमा न्यूट्रिशन क्लब” का गोरख धंधा नेशनल हाईवे बिरकोनी में संचालित

ग्रामीण क्षेत्र के लोगों पर इस क्लब का सीधा प्रहार स्वास्थ के ठेकेदारों का व्यापार चकाचौंध से भ्रमित हो लोग अपनी ही स्वास्थ्य को बिगाड़ रहे है।

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुंद / आज की तेज रफ्तार जिंदगी में हमारा खान पान मानो पूरी तरह से बिगड़ गया हो और जैसे- जैसे हम जिंदगी की रफ्तार दे रहे है , वैसे वैसे हमारा शरीर भी रफ्तार से बेडौल अनफिट होते जा रहा है। आज हम लोग जो भी आहार का सेवन कर रहे है। वे संपूर्ण आहार टोटल “प्रेस्टीसाइट” केमिकल युक्त है। बता दे कि, आज की जो भी जमीन से जुड़े उत्पादन हो रहे है चाहे अनाज हो, सब्जी भाजी हो, फल फ्रूट हो, उसमें इतना ज्यादा केमिकल का प्रयोग किया जा रहा है। जो हमारे शरीर में स्लोपॉइजन की तरह धीमी धीमी हमारे शरीर को खोखला करते जा रहा है। धीरे धीरे ही सही पर केमिकल अपना कार्य पूर्ण ईमानदारी से कर रही है।

पूर्ववर्ती जिंदगी में जो स्वाद हमे खाने में मिलता था आज बेस्वाद हो गई।
समय से पहले किसी चीजों को पका कर खाना हमारे शरीर के लिए हानिकारक है।

आज से 40 साल पहले की जिंदगी में जो स्वाद हमको खाना खाने में मिला करता था आज नहीं मिल रहा है। आज स्वाद पाने के चक्कर में कई प्रकार के हाइजीनिक मसाले का उपयोग कर सेवन कर रहे जिससे की हमारी भूख तो मिट रही है किंतु मन को तृप्ति नहीं मिल पा रही है। समय से पहले हमारी बॉडी में कई प्रकार की बीमारियों का वास हो रहा है।
जिससे कि,हमारी बॉडी पहले की अपेक्षा बेडौल हो रहे है। समय से पहले हमारा पेट निकलना , चेहरे की चमक खत्म होना,पाचन क्रिया का बिगड़ना, कम उम्र में उम्रदराज दिखना ऐसी अनगिनत समस्याओं की पोटरी हमारे जीवन का हिस्सा बन चुकी है। आप मानो या न मानो इसी प्रकार की समस्याओं को मद्देनजर रखते हुए देश विदेश की निजी कंपनियां इसको अपॉर्चुनिटी यानी अवसर के रूप स्वीकार कर आम जनता को थाली परोसने का कार्य का विस्तार से कर रही है। जिसका ताजा तरीन उदाहरण बहुत सारे देशों में जिस कंपनी में बैन लगी है वहीं कंपनी आज हमारे छत्तीसगढ़ के भोले भाले लोगों को अच्छी सेहत के नाम से लुट मचा कर रखी हुई । ये केवल एक उदाहरण है जिला महासमुंद के नेशनल हाईवे ग्राम बिरकोनी में संचालित मेन रोड पर स्थित तथाकथित “रमा न्यूट्रिशन क्लब” आजकल चर्चा का बड़ा विषय बन गया है। जहां तक दावा किया जाता है, यह क्लब लोगों को स्वस्थ जीवनशैली, पोषण और फिटनेस की राह दिखाता है। मगर सच्चाई बिल्कुल इसके उलट है। यह कथित क्लब स्वास्थ्य सुधार के नाम पर न केवल झूठे सपने दिखा रहा है, बल्कि बिना किसी लाइसेंस और चिकित्सकीय मान्यता के लोगों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ कर रहा है।

सपनों का झांसा, सेहत पर हमला!

“Recharge Yourself”, “Feel the Power of Good Nutrition” और “पाचन क्रिया सुधारें”

जैसे आकर्षक स्लोगन लगाकर मासूम ग्राहकों को लुभाया जाता है। महिलाएँ, बच्चे और बुजुर्ग – हर किसी के लिए किसी न किसी तरह का पैकेज क्लब द्वारा तैयार किया गया है। लेकिन परदे के पीछे छिपा है खतरनाक सच – न तो कोई योग्य चिकित्सक मौजूद है, न ही उत्पादों पर कोई सरकारी प्रमाणक । ड्रग लाइसेंस तक हासिल किए बिना पाउडर, शेक, टैबलेट और सप्लिमेंट की धड़ल्ले से बिक्री की जा रही है।

इंडस्ट्रियल एरिया बिरकोनी में बीमारियों की फैक्ट्री बना हेल्थ क्लब!

इस क्लब से जुड़े कई लोगों ने शिकायत की है कि, सप्लिमेंट के नाम पर बेचे गए पाउडर और ड्रिंक लेने के बाद उनकी पाचन शक्ति बिगड़ गई, त्वचा पर दाने निकल आए, सिरदर्द और चक्कर आने जैसी समस्याएँ होने लगीं। किसी को गैस्ट्रिक समस्या बढ़ी तो किसी की जोड़ों की तकलीफ दोगुनी हो गई। जो लोग रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने की उम्मीद में यहाँ आए थे, वे एलर्जी और आंतरिक कमजोरी के शिकार हो गए।

नाटकीय दावे, खोखले वादे!

महासमुंद के बिरकोनी ग्राम में रमा न्यूट्रिशन क्लब बड़े-बड़े पोस्टर लगाकर और “शिरीष & नेहा अग्रवाल” नामक कोच के जरिए जागरूकता फैलाने का खेल खेला जा रहा है। यह खेल यही नहीं यह बहुत बड़ा स्कैम है ग्रामीण क्षेत्र के भोले भाले लोगों को भ्रमित करने का काम कर रहा है।

“पाचन क्रिया सुधारें” कहकर हाजमे की दवाइयाँ बेची गईं।

•क्या“महिलाओं का पोषण” कहकर कैल्शियम और हार्मोन संबंधी पाउडर ठोंसे गए..?

•क्या “बच्चों का पोषण” के नाम पर नकली प्रोटीन शेक दिया गया..?

•क्या“जोड़ों का स्वास्थ्य” कहकर दर्द निवारक जड़ी-बूटियाँ ठूस दी गईं..?

•क्या इन सभी दावों का कोई वैज्ञानिक आधार है अगर है तो जिम्मेदारी कौन लेगा..?

डॉक्टर की राय: “यह क्लब स्वास्थ्य के लिए बन रहा खतरा”!

स्थानीय डॉक्टरों का कहना है कि, ऐसे क्लब केवल मनोवैज्ञानिक तरीके से ग्राहकों को फँसाते हैं। सस्ते पाउडर और सप्लिमेंट महंगे दामों पर बेच दिए जाते हैं और अगर नुकसान हो भी जाए तो इसकी जिम्मेदारी लेने वाला कोई नहीं होता।
विशेषज्ञों का साफ कहना है – बिना लाइसेंस न्यूट्रिशन प्रोडक्ट बेचना कानूनन अपराध है।

छिप-छिप कर खुलेआम जनता को भावनाओं के साथ खिलवाड़

जाँच में सामने आया कि, यह क्लब विद्या वस्त्रालय के पास, चक्रधारी बाईंडिंग दुकान के ऊपर किराए की जगह लेकर चलता है। यहाँ आने वाले लोगों को आकर्षक बातें बताकर क्लब से जोड़ लिया जाता है। फिर हर सदस्य को और नए लोग लाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। यह एक तरह की नेटवर्क मार्केटिंग की जालसाजी भी हो सकती है।

नाटकीय घटनाक्रम!

एक सूत्र ने हमसे साझा किया है कि, उस महिला ने शिकायत की कि बच्चों की पोषण-दवा लेने के बाद उसके बेटे को उल्टियाँ शुरू हो गईं। मैने फिर उस प्रोडक्ट को डाक्टर को बताया क्या करोगी किसको शिकायत करोगी किसी का कुछ नहीं बिगाड़ सकती हो।

वही एक बुजुर्ग ने दावा किया कि, जोड़ सप्लीमेंट खाने के बाद उनके घुटने का दर्द कम होने के बजाय इतना बढ़ गया कि, उन्हें अस्पताल में भर्ती होना पड़ा।

युवाओं ने बताया कि, जल्दी फिटनेस पाने की चाह में उन्होंने जो प्रोटीन शेक खरीदा, उसने उनका लिवर कमजोर कर दिया।

प्रशासन से अपील!

यह पूरा मामला सीधे-सीधे जन-स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ है। इस तरह के नकली पोषण क्लब अगर रोके नहीं गए तो यह कई लोगों की जिंदगी को खतरे में डाल सकते हैं।
सामाजिक संगठनों और जागरूक नागरिकों ने पहले ही प्रशासन से माँग की है कि –

•क्लब की तुरंत जाँच हो।

•बिना लाइसेंस उत्पाद बेचने वालों पर कड़ी कार्रवाई हो।

•पीड़ित लोगों को न्याय दिलाया जाए।

पोषण की आड़ में जहर!

“रमा न्यूट्रिशन क्लब” की परतें जब उठीं तो सामने आया कि जहाँ लोगों को सेहत और सशक्तिकरण का सपना दिखाया जा रहा है, वहाँ असलियत में बीमारी और धोखा परोसा जा रहा है।
अगर समय रहते इन पर लगाम नहीं लगी, तो यह छोटा सा क्लब एक बड़े पैमाने की ठगी और स्वास्थ्य संकट का कारण बन सकता है।

हर्बल लाईफ वेलनेस के चक्कर में शिक्षक दिनेश साहू की सामूहिक हत्या दोषी कौन…?

 

विश्वास का नंगा नजारा विश्वास की सारी हदें पार

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुंद / पति पत्नी की गहरे विश्वास पर गला कलम जिंदगी खतम ।

अब शुरू होता है हर्बल लाईफ लाइफ शो प्रोग्राम

यह कहानी सिर्फ एक परिवार की बर्बादी की दास्तान नहीं है, बल्कि यह उस समाज का आईना भी है जहाँ रिश्तों की नींव अविश्वास, लालच और छल पर रखी जाती है। वार्ड नंबर 03, श्रीराम वाटिका, ईमलीभांठा, महासमुंद के एक साधारण परिवार में घटी यह घटना पूरे जिले ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख देने वाली है।

दिनांक 13 अगस्त 2025 की रात, खेमिन साहू के बेटे दिनेश साहू ने आत्महत्या कर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। आरोप है कि आत्महत्या के पीछे उसकी पत्नी चंदेश्वरी साहू और उसके पुरुष मित्र सिरीश अग्रवाल जो घोड़ारी निवासी है और इनका बड़े पैमाने पर फर्शी उद्योग का काम है और इनके द्वारा बिरकोनी में रामा हर्बल लाईफ नामक बोर्ड लगाकर प्रचार प्रसार किया जाता है और आस पास के ग्रामीणों को परेशान कर के हर्बल लाईफ में खुद और उनकी पत्नियों को जोड़ने का काम किया जा रहा है वहीं गिरीश साहू निवासी इमलीभाठा जो पेशे से शिक्षक है और वर्तमान में बालोद में पदस्थ है। यह मामला सिर्फ एक आत्महत्या का नहीं, बल्कि रिश्तों की बेवफाई, हर्बल लाईफ स्कैम, अवैध संबंध और धोखाधड़ी का एक काला सच है। कैसे भोले भाले लोगों को बीमारी का ताना देकर हर्बल लाईफ में जुड़ने के लिए स्कीम का लालच देकर फसाते है।

चरित्रहीनता और अपमान ने छीनी बेटे की जान” – माँ खेमिन साहू का आरोप!

अपनी फरियाद लेकर पुलिस अधीक्षक महासमुंद के दरबार में पहुँची वृद्धा खेमिन साहू की आँखों में सिर्फ आंसू ही नहीं, बल्कि न्याय की पुकार भी है। उनका आरोप है कि उनके बेटे दिनेश को उसकी पत्नी चंदेश्वरी साहू ने मानसिक रूप से प्रताड़ित किया।

खेमिन साहू का कहना है –
“मेरे बेटे ने अपनी पत्नी को बार-बार समझाया, लेकिन चंदेश्वरी का सिरीश अग्रवाल और गिरीश साहू के साथ रिश्ता दिन-ब-दिन गहराता गया। अश्लील व्हाट्सएप चैट और देर रात तक मोबाइल पर बातें करना, घर में पति के सामने दोस्तों को घंटों बैठाए रखना… इन सबसे दिनेश टूट गया।”और घर में फांसी के फंदे में झूल कर आत्महत्या कर ली।

जेवर, नकदी और जमीन के कागजात लेकर भागी बहू!

सबसे बड़ा सदमा तब मिला जब बेटे की मौत के बाद बहू चंदेश्वरी साहू घर से गायब हो गई। खेमिन साहू ने आरोप लगाया कि वह घर से सोने-चांदी के जेवर, लाखों रुपये नकदी और जमीन के महत्वपूर्ण दस्तावेज लेकर भाग गई।

“बेटे की चिता की राख भी ठंडी नहीं हुई थी कि बहू ने हमें पूरी तरह लूटकर बेसहारा बना दिया। हम बूढ़े माँ-बाप कहाँ जाएँ? किसके सहारे जिएँ?” – यह कहते हुए खेमिन साहू की आवाज़ भर्राकर रह जाती है।

हर्बल लाईफ स्कैम से भी जुड़ा तार?

मामले का एक और चौंकाने वाला पहलू यह है कि मृतक दिनेश साहू और गिरीश साहू दोनों हर्बल लाईफ नामक स्वास्थ्य-व्यवसाय से जुड़े हुए थे। खेमिन साहू ने पुलिस को दी अपनी शिकायत में स्पष्ट कहा है कि यह लोग लोगों को सपनों का झांसा देकर ठगने का काम भी कर रहे थे।

“मेरे बेटे को भी इस स्कैम में घसीटा गया और फिर मेरी बहु चंदेश्वरी को लेकिन हमे क्या पता था कि इस स्कैम के पीछे कुछ और चाल थी इन लोगों की, जब मेरे बेटे ने अपनी पत्नी और उसके अवैध संबंधों का सच जाना तो वह शर्म और अपमान से घिर गया।”

कानूनी जंग की शुरुआत – माँ ने मांगी कठोर कार्रवाई!

खेमिन साहू ने अपनी शिकायत में पुलिस अधीक्षक से तीन मुख्य माँगें रखी हैं—

•आत्महत्या के लिए उकसाने का अपराध (बी.एन.एस. की धारा 108 व अन्य धाराओं) में चंदेश्वरी साहू, सिरीश अग्रवाल और गिरीश साहू पर मामला दर्ज कर उनकी गिरफ्तारी हो।

घर से चोरी करके ले जाए गए जेवर और जमीन के दस्तावेज़ बरामद कर उन्हें वापस किया जाए।

•हर्बल लाईफ जैसे संदिग्ध कारोबार की गहन जाँच की जाए ताकि और लोग इसके शिकार न बनें।

“हम न्याय चाहते हैं, बदला नहीं”
खेमिन साहू ने राज्यपाल, मुख्यमंत्री, गृहमंत्री, पुलिस महानिदेशक और कार्मिक विभाग नई दिल्ली तक प्रतिलिपि भेजकर न्याय की गुहार लगाई है।

“हम बूढ़े हैं, बदला लेने की ताकत नहीं रखते। लेकिन हम अपने बेटे की आत्मा की शांति के लिए न्याय चाहते हैं। दोषियों को कठोर सजा मिले, ताकि कोई और बेटा दिनेश की तरह मौत को गले लगाने को मजबूर न हो।”

समाज के सामने बड़ा सवाल
यह मामला सिर्फ एक परिवार की व्यक्तिगत त्रासदी नहीं है। यह सवाल है –

क्या आधुनिकता और सोशल मीडिया की आंधी में रिश्तों की पवित्रता खत्म हो रही है?

क्या लालच और बेवफाई का मिलाजुला ज़हर ही नई पीढ़ी को बर्बादी की ओर धकेल रहा है?

और सबसे बड़ा सवाल – जब पति-पत्नी का रिश्ता विश्वास पर टिका होता है, तो बेवफाई और छल क्यों इतनी आसानी से उस नींव को तोड़ देते हैं?

महासमुंद के लोग स्तब्ध!
स्थानीय लोगों का कहना है कि दिनेश एक साधारण, मेहनती और मिलनसार इंसान था। किसी ने सोचा भी नहीं था कि वह आत्महत्या जैसा कदम उठा सकता है। लेकिन उसकी मौत ने पूरे समाज को झकझोर दिया है।

वार्ड के एक बुजुर्ग कहते हैं –
“हमारे मोहल्ले में ऐसे लोग आकर परिवारों को तोड़ रहे हैं। यह सिर्फ एक अपराध नहीं, यह सामाजिक महामारी है।”

पुलिस की जाँच अब अगली कड़ी
पुलिस अधीक्षक महासमुंद के पास पहुँची इस शिकायत पर अब सबकी निगाहें टिकी हैं। क्या चंदेश्वरी, सिरीश और गिरीश पर गिरफ्तारी होगी? क्या चोरी गए जेवर और जमीन के कागजात वापस मिलेंगे? और सबसे अहम – क्या दिनेश साहू को न्याय मिलेगा?

एक बेटे की मौत, बूढ़े माँ-बाप का रोना और समाज की चुप्पी!
दिनेश साहू की आत्महत्या ने यह साबित कर दिया कि जब रिश्तों में विश्वास टूटता है तो इंसान की ज़िंदगी भी चूर-चूर हो जाती है। चंदेश्वरी, सिरीश और गिरीश पर लगे आरोप अगर सही साबित होते हैं, तो यह न केवल हत्या के बराबर अपराध है बल्कि समाज के लिए भी एक बड़ा सबक है।

“न्याय सिर्फ अदालत की चारदीवारी में नहीं, समाज की आत्मा में भी होना चाहिए।”

अब देखना यह है कि महासमुंद की पुलिस और प्रशासन इस नाटकीय और दर्दनाक मामले में कितनी तेजी और गंभीरता से कदम उठाते हैं।

राजधानी के भू-लोक में सम्पन्न होगा छत्तीसगढ़ी महोत्सव तीज त्यौहार नई दिशा देंगे – आलोक

 

छत्तीसगढ़ कांग्रेस के संयुक्त महासचिव आलोक चंद्राकर ने गिरीश देवांगन के नेतृत्व में तीजा पोरा महोत्सव स्थल का निरीक्षण किया

वरिष्ठ नेता गिरीश देवांगन के मार्गदर्शन में आलोक चंद्राकर ने आयोजन की तैयारियों का किया सूक्ष्म मूल्यांकन, समयबद्ध और उच्चस्तरीय व्यवस्थाओं पर दिया जोर।

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
रायपुर / यह त्योहार भगवान शिव और देवी पार्वती के पुनर्मिलन का प्रतीक है, और यह वैवाहिक सुख, समृद्धि और पति की लंबी आयु के लिए मनाया जाता है।
इसी तारतम्य में प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी आगामी 23 अगस्त 2025 को तीजा पोरा त्योहार-खेल महोत्सव का आयोजन छत्तीसगढ़ पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल करने जा रहे हैं। आयोजन की तैयारियों का जायज़ा लेने के लिए छत्तीसगढ़ कांग्रेस के संयुक्त महासचिव एवं पूर्व उपाध्यक्ष, जीव जंतु कल्याण बोर्ड, छत्तीसगढ़ शासन, आलोक चंद्राकर ने महोत्सव स्थल का निरीक्षण किया। यह निरीक्षण छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के पूर्व अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता गिरीश देवांगन के नेतृत्व में संपन्न हुआ।

निरीक्षण के दौरान गिरीश देवांगन ने आलोक चंद्राकर को आयोजन की व्यवस्थाओं के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए और विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की जिसमें कार्यक्रम को सफल संचालन के साथ आगाज करेंगे।

गिरीश देवांगन ने कहा कि, “यह महोत्सव छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं का प्रतीक है। हमारी कोशिश है कि, तैयारियां पूरी तरह समय पर और उच्च स्तर पर पूरी हों, ताकि आयोजन अपने उद्देश्य को सफलतापूर्वक पूरा कर सके।”

आलोक चंद्राकर ने कहा, “गिरीश देवांगन जी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में आज स्थल का विस्तृत निरीक्षण किया गया। मैंने सभी संबंधित टीमों से बातचीत कर आवश्यक व्यवस्थाओं को मजबूत करने के निर्देश दिए हैं, ताकि यह आयोजन पूर्व वर्षों की तरह सफल और अनुकरणीय हो।”

मीडिया के समक्ष कांग्रेस नेता आलोक चंद्राकर ने तीज त्यौहार का महत्व बताते हुए बताया कि,

पारिवारिक महत्व

यह त्योहार विवाहित महिलाओं के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, जो अपने पति की लंबी उम्र और सुखद वैवाहिक जीवन के लिए व्रत रखती हैं।

सामाजिक महत्व

तीज एक सामाजिक त्योहार भी है, जहां महिलाएं इकट्ठा होती हैं, सजती-संवरती हैं, झूले झूलती हैं, पारंपरिक गीत गाती हैं और एक-दूसरे के साथ खुशियां बांटती हैं।

सांस्कृतिक महत्व

तीज भारतीय संस्कृति और परंपरा का एक अभिन्न अंग है, जिसमें लोकगीत, पारंपरिक नृत्य और रीति-रिवाजों की झलक मिलती है।

प्रकृति का उत्सव

तीज सावन के महीने में मनाया जाता है, जब प्रकृति हरी-भरी होती है, और यह त्योहार प्रकृति की सुंदरता, ताजगी और जीवन में हरियाली का प्रतीक है।
तीज कैसे मनाया जाता है?
महिलाएं हरे रंग के कपड़े पहनती हैं और सोलह श्रृंगार करती हैं।
वे भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा करती हैं।
वे निर्जला व्रत रखती हैं (बिना पानी पिए उपवास)।
महिलाएं झूले झूलती हैं और पारंपरिक गीत गाती हैं।
पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन करती हैं।
मेहंदी लगाती हैं।
एक-दूसरे को घेवर और अन्य मिठाइयां खिलाती हैं।
तीज का महत्व आज भी बरकरार है:
हालांकि आधुनिकता के कारण कुछ बदलाव आए हैं, तीज का त्योहार आज भी भारत में बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। यह त्योहार महिलाओं के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है, जो उन्हें अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ता है, और उन्हें अपने प्रियजनों के साथ खुशी मनाने का अवसर देता है।