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आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का विद्रोह: सुपरवाइजर की मनमानी से भड़का गुस्सा, 7 दिन में मानदेय न लौटा तो ब्लॉक-जिला स्तर पर धरना-प्रदर्शन..!

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रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुंद / 6 अक्टूबर 2025 छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के सरायपाली ब्लॉक में आंगनबाड़ी केंद्रों की कार्यकर्ताओं ने अपने कटे हुए मानदेय को लेकर खुला विद्रोह का ऐलान कर दिया है। ग्रामीण इलाकों में बच्चों और महिलाओं की देखभाल का जिम्मा संभालने वाली इन बहादुर महिलाओं का आरोप है कि उनकी मेहनत का इनाम सुपरवाइजर की मनमानी से छीना जा रहा है। जुलाई से सितंबर तक के तीन महीनों का मानदेय बिना किसी ठोस वजह के काट दिए जाने से नाराज कार्यकर्ताओं ने जिला कलेक्टर को औपचारिक शिकायत सौंपी है और साफ चेतावनी दी है—सात दिनों के अंदर अगर इंसाफ न मिला तो वे जिला मुख्यालय और ब्लॉक स्तर पर घेराबंदी करेंगी।
यह मामला केदुवा आंगनबाड़ी सेक्टर का है, जहां करीब तीन दर्जन से अधिक कार्यकर्ताओं का भविष्य दांव पर लटका हुआ है। सुपरवाइजर वर्षा अग्रवाल पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं कि उन्होंने हितग्राहियों के केवाईसी (फैमिली रजिस्टर सर्विस) अपडेट न होने का बहाना बनाकर कार्यकर्ताओं का कठोरता से मानदेय काट लिया। लेकिन सच्चाई इससे बिल्कुल उलट है। ग्रामीण क्षेत्रों में जहां नेटवर्क की किल्लत आम बात है, वहां हितग्राही समय पर केंद्र पहुंच ही नहीं पाते। ऊपर से मोबाइल सिग्नल की समस्या, ओटीपी वेरिफिकेशन की जटिलताएं और दूर-दराज के गांवों की दुर्गमता—ये सब मिलकर केवाईसी प्रक्रिया को लेट कर देते हैं। कार्यकर्ताओं का दर्द यहीं खत्म नहीं होता; वे बताती हैं कि जिला स्तर से पहले ही स्पष्ट आदेश जारी हो चुके थे कि अगर किसी हितग्राही का केवाईसी समय पर पूरा न हो पाए, तब भी उन्हें सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ मिलना चाहिए। फिर भी सुपरवाइजर ने इन नियमों की अनदेखी की और न सिर्फ मानदेय काटा, बल्कि अपमानजनक भाषा का भी सहारा लिया।
“हम दिन-रात गांव-गांव घूमकर पोषण, टीकाकरण और जागरूकता फैलाते हैं, लेकिन सुपरवाइजर का व्यवहार ऐसा है मानो हमारी मेहनत बेकार हो,” एक कार्यकर्ता ने गुस्से में कहा। उनका यह गुस्सा जायज लगता है, क्योंकि सुपरवाइजर द्वारा बार-बार दोहराए जाने वाले वाक्य जैसे “दूसरे विभाग आपको पैसे नहीं देते, फिर भी आप उनका काम क्यों करती हो?” न सिर्फ उनके मनोबल को चूर-चूर करते हैं, बल्कि आंगनबाड़ी सिस्टम की मूल भावना को भी ठेस पहुंचाते हैं। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताएं तो समाज की रीढ़ हैं—वे न सिर्फ बच्चों को पौष्टिक भोजन देती हैं, बल्कि गर्भवती महिलाओं की देखभाल से लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों तक सब संभालती हैं। ऐसी स्थिति में उनका शोषण न केवल व्यक्तिगत अन्याय है, बल्कि पूरे सिस्टम की कमजोरी को उजागर करता है।
शिकायत में कलेक्टर से तीन प्रमुख मांगें रखी गई हैं।

तत्काल बहाली

कटे हुए मानदेय की राशि को बिना देरी के बहाल किया जाए, ताकि कार्यकर्ताओं का आर्थिक संकट समाप्त हो।

निष्पक्ष जांच

सुपरवाइजर की पक्षपातपूर्ण और मनमाने फैसलों की गहन जांच हो, जिसमें यदि दोषी पाई गईं तो सख्त कार्रवाई सुनिश्चित हो।

भविष्योन्मुखी कदम

ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने हेतु जिला स्तर पर स्पष्ट गाइडलाइंस जारी की जाएं, जिसमें नेटवर्क जैसी व्यावहारिक चुनौतियों को ध्यान में रखा जाए।

यह शिकायत न सिर्फ कलेक्टर के पास पहुंची है, बल्कि जिला कार्यक्रम अधिकारी और सरायपाली के परियोजना अधिकारी को भी इसकी प्रतियां सौंप दी गई हैं। ज्ञापन सौंपने वालों में छत्तीसगढ़ सक्षम आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिका कल्याण संघ की प्रदेश अध्यक्ष सुधा रात्रे, जिला अध्यक्ष सुलेखा शर्मा, छाया हिरवानी, हाजरा खान, धनमती बघेल, रंभा जगत, रूपाभारती, विमला सोनी, पूर्णिमा ठाकुर, सुल्ताना खान, अंजू चंद्राकर, रागनी चंद्राकर, सुशीला और हरपाल जैसी प्रमुख नेता शामिल रहीं। संघ की यह एकजुटता दर्शाती है कि यह मुद्दा अब व्यक्तिगत नहीं, बल्कि पूरे आंगनबाड़ी समुदाय का हो चुका है।
यदि सात दिनों के अंदर कोई सकारात्मक कदम नहीं उठा, तो कार्यकर्ताओं का आंदोलन सड़कों पर उतर सकता है। यह न सिर्फ स्थानीय स्तर पर हलचल मचा सकता है, बल्कि राज्य सरकार को भी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की लंबे समय से चली आ रही समस्याओं—जैसे अपर्याप्त मानदेय, ट्रेनिंग की कमी और संसाधनों की किल्लत—पर ध्यान देने को मजबूर कर सकता है। जिला प्रशासन अब इस संवेदनशील मुद्दे पर त्वरित कार्रवाई करेगा या फिर आंदोलन की आग भड़कने देगा? आने वाले दिनों में इसका जवाब मिलेगा।

NH-353 पर खूनी खेल: महासमुंद जनपद उपाध्यक्ष के पति की दर्दनाक मौत,पुरानी रंजिश या हादसा..?

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रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुंद / 05 अक्टूबर 2025 छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया। जनपद पंचायत महासमुंद की उपाध्यक्ष हुलसी चंद्राकर के पति जितेंद्र चंद्राकर की शुक्रवार रात NH-353 पर हुए एक भीषण सड़क हादसे में मौत हो गई। यह हादसा साराडीह मोड़ के पास हुआ, जहां एक तेज रफ्तार सफारी गाड़ी ने उनकी स्कूटी को रौंद दिया। इस घटना ने न केवल एक परिवार को शोक में डुबो दिया, बल्कि स्थानीय राजनीति और सामाजिक माहौल में भी तनाव पैदा कर दिया।

हादसे की भयावहता

चश्मदीदों के अनुसार, रात के समय NH-353 पर तेज रफ्तार से आ रही सफारी गाड़ी ने जितेंद्र चंद्राकर की स्कूटी को इतनी जोर से टक्कर मारी कि उनकी मौके पर ही मौत हो गई। स्थानीय लोगों ने बताया कि टक्कर इतनी भयानक थी कि स्कूटी के परखच्चे उड़ गए, और जितेंद्र को बचाने का कोई मौका ही नहीं मिला। हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस और स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। जितेंद्र को जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

आरोपी का आत्मसमर्पण, लेकिन सवाल बरकरार

पुलिस के अनुसार, सफारी गाड़ी का मालिक और चालक अमन अग्रवाल है, जिसने घटना के बाद सिटी कोतवाली थाने में आत्मसमर्पण कर दिया। पुलिस ने गाड़ी को जब्त कर लिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। थाना प्रभारी ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह एक सड़क हादसा प्रतीत होता है, लेकिन मृतक के परिजनों और स्थानीय लोगों के आरोपों को देखते हुए सभी पहलुओं की गहराई से जांच की जा रही है।

पुरानी रंजिश: हादसा या साजिश..?

हादसे के बाद बेलसोडा गांव और आसपास के क्षेत्रों में चर्चा गरम है कि यह महज एक हादसा नहीं, बल्कि पुरानी दुश्मनी का नतीजा हो सकता है। सूत्रों के अनुसार, जितेंद्र चंद्राकर और अमन अग्रवाल के बीच जमीन को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। कुछ महीने पहले दोनों के बीच तीखी नोकझोंक और झगड़ा भी हुआ था। ग्रामीणों का दावा है कि इस हादसे के पीछे पुरानी रंजिश हो सकती है, और इसे साजिश के तौर पर देखा जा रहा है।

राजनीतिक उबाल और भाजपा की मांग

जितेंद्र चंद्राकर न केवल जनपद उपाध्यक्ष हुलसी चंद्राकर के पति थे, बल्कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सक्रिय कार्यकर्ता और स्थानीय नेता भी थे। उनकी मौत ने जिले के राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। भाजपा के स्थानीय नेताओं ने इस घटना को “संदिग्ध” करार देते हुए निष्पक्ष और गहन जांच की मांग की है। पार्टी नेताओं का कहना है कि जितेंद्र की मृत्यु केवल एक हादसा नहीं लगती, और इसके पीछे गहरी साजिश हो सकती है।

गांव में मातम, प्रशासन पर दबाव

जितेंद्र की मौत की खबर जैसे ही बेलसोडा गांव पहुंची, वहां मातम छा गया। हुलसी चंद्राकर की हालत गंभीर बताई जा रही है, और वे बार-बार बेहोश हो रही हैं। गांववालों ने गुस्से में सिटी कोतवाली थाने का घेराव किया और न्याय की मांग की। स्थिति तनावपूर्ण होने पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रतिभा पांडे मौके पर पहुंचीं और लोगों को समझाइश देकर शांत कराया।

हुलसी चंद्राकर के समर्थकों का अल्टीमेटम

हुलसी चंद्राकर के समर्थकों ने चेतावनी दी है कि यदि इस मामले में त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई, तो वे चक्का जाम और धरना-प्रदर्शन करेंगे। इस घटना ने महासमुंद की स्थानीय राजनीति को गरमा दिया है, और प्रशासन पर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का दबाव बढ़ रहा है।

पुलिस का आश्वासन

महासमुंद पुलिस ने शांति बनाए रखने की अपील की है और आश्वासन दिया है कि दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। जांच में हादसे के कारणों, पुरानी रंजिश के आरोपों और अन्य संभावित कोणों पर गौर किया जा रहा है। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच पूरी होने तक किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जा सकता।

जिले में शोक की लहर

यह घटना केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि पूरे महासमुंद जिले के लिए एक गहरा आघात है। जितेंद्र चंद्राकर की सामाजिक और राजनीतिक सक्रियता ने उन्हें क्षेत्र में सम्मानित व्यक्ति बनाया था। उनकी असामयिक मृत्यु ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनके जवाब पुलिस जांच पर निर्भर हैं।

आगे क्या..?

क्या यह हादसा केवल एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना थी, या इसके पीछे कोई गहरी साजिश थी? क्या पुरानी रंजिश ने जितेंद्र चंद्राकर की जान ले ली, या यह महज एक सड़क दुर्घटना थी? इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में पुलिस जांच से स्पष्ट होंगे। फिलहाल, महासमुंद का माहौल गम और गुस्से से भरा हुआ है, और सभी की नजरें जांच के नतीजों पर टिकी हैं।

गरियाबंद में प्रशासनिक हलचल: सचिवालय के आदेशों की अनदेखी, नवीन भगत पर सहायक आयुक्त पद छोड़ने का दबाव बढ़ा

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रिपोर्टर मयंक गुप्ता
गरियाबंद/छत्तीसगढ़ – छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में नौकरशाही की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आदिम जाति कल्याण विभाग के सहायक आयुक्त के पद पर प्रभार हस्तांतरित करने के स्पष्ट सरकारी निर्देशों के बावजूद, स्थानांतरित अधिकारी नवीन भगत पद से मुक्त नहीं हो रहे हैं। इससे जिला प्रशासन की विश्वसनीयता पर बट्टा लग रहा है, जबकि नया प्रभारी लोकेश्वर पटेल को जिम्मेदारी सौंपी जानी बाकी है।

आदेशों का पालन क्यों ठप..?

जानकारी के मुताबिक, विभाग के अपर कलेक्टर नवीन भगत का स्थानांतरण हो चुका है। मंत्रालय स्तर से उनके पदमुक्ति के आदेश जारी हो चुके हैं, साथ ही परियोजना प्रशासक लोकेश्वर पटेल को सहायक आयुक्त का दायित्व सौंपने का फरमान भी आ गया है। आश्चर्यजनक रूप से, कलेक्टर कार्यालय में इन निर्देशों का कार्यान्वयन अब तक नहीं हो सका।
जिला कलेक्टर की ओर से भी इस मामले में कोई सक्रियता नजर नहीं आ रही। विपक्षी धड़े और स्थानीय नागरिक अब पूछ रहे हैं कि आखिर एक स्थानांतरित अधिकारी को इतनी आसानी से जिम्मेदारी से क्यों नहीं हटाया जा रहा..?

चार वर्षों से चले आ रहा विवादास्पद पद

यह पद लंबे समय से विवादों का केंद्र रहा है। पहले प्रतिनियुक्ति पर तैनात राजेंद्र सिंह यहां कार्यरत थे, लेकिन दबावों के कारण यह जिम्मेदारी नवीन भगत के पास आ गई। लगभग चार साल से यह पद अस्थायी तौर पर उनके कब्जे में रहा। स्थानांतरण के बाद भी वे पद त्यागने को तैयार नहीं लग रहे, जिससे अफसरशाही में असंतोष फैल रहा है।

करोड़ों की योजनाओं में कथित अनियमितताएं

सूत्रों का दावा है कि इस पूरे प्रकरण की जड़ आदिवासी कल्याण की परियोजनाओं और छात्रावासों से जुड़ी फाइलों में छिपी है। सहायक आयुक्त के रूप में भगत पर आरोप लगे हैं कि उन्होंने कई विकास कार्यों में केवल दस्तावेजीकरण कर धन निकासी की।
छात्रावासों के निर्माण व मरम्मत के लिए मंजूर राशि फर्जी दावों से उड़ाई गई।
ठेकेदारों को पूर्ण भुगतान तो किया गया, लेकिन साइट पर काम या तो अधर में लटका या नाममात्र का।
कई प्रोजेक्ट्स में कागजी आंकड़ों और हकीकत के बीच युगांतर जितना फर्क मिला।
इन दावों से स्थानीय निवासियों और स्टाफ में यह संदेह गहरा गया है कि कहीं यही वजह तो नहीं कि भगत पद पर अड़े हुए हैं।

डाटा एंट्री ऑपरेटर भर्ती में भी उठे सवाल

विवाद केवल यहीं सीमित नहीं। गरियाबंद कलेक्ट्रेट में डाटा एंट्री ऑपरेटर के दो पदों पर भर्ती का विज्ञापन जारी हुआ था। आवेदनों की प्रक्रिया चली, लेकिन आरोप है कि भगत के इशारे पर लाखों की वसूली हुई। बाद में भर्ती आधिकारिक रूप से रद्द घोषित कर दी गई, लेकिन कथित तौर पर चुपचाप कुछ चयन भी हो गए। जनता के सामने निरस्ती का ऐलान, जबकि पर्दे के पीछे ‘समझौते’..!

सुपर कलेक्टर’ की उपाधि और प्रशासनिक असंतुलन

जिला मुख्यालय में अब खुली चर्चा है कि नवीन भगत ने वास्तविक कलेक्टर से ऊपर उठकर ‘सुपर कलेक्टर’ का दर्जा हासिल कर लिया है। उनके कार्यालय में लोगों की भारी भीड़ लगती है, जबकि कलेक्टर के दफ्तर में सन्नाटा। ऐसा लगता है मानो जिला का पूरा सिस्टम उनके संकेतों पर निर्भर हो।
यह हालात शासन तंत्र के लिए शर्मिंदगी का सबब बन चुके हैं। यदि उच्च अधिकारियों के आदेश भी नजरअंदाज हो रहे, तो जिले में कानून-व्यवस्था का क्या होगा..?

कलेक्टर की मौन भूमिका पर सवाल

सबसे उलझन वाली कड़ी जिला कलेक्टर की है। मंत्रालय के आदेश साफ हैं – भगत को पद से हटाओ और पटेल को सौंपो। लेकिन क्रियान्वयन शून्य।
क्या कलेक्टर किसी बाहरी दबाव में फंसे हैं..?
या पूरी मशीनरी भगत के इर्द-गिर्द ही घूम रही?
यह चुप्पी आशंकाओं को हवा दे रही है।

संपत्ति जांच की मांग तेज

स्थानीय स्तर पर आवाज उठ रही है कि भगत की अचल संपत्तियों की गहन पड़ताल हो। हाल के वर्षों में उनकी जीवनशैली और संपदा में वृद्धि पर भी उंगलियां उठ रही हैं। यदि आरोप सिद्ध हुए, तो यह छत्तीसगढ़ की अफसरशाही के लिए करारा प्रहार होगा।

आगे क्या..? कार्रवाई की उम्मीद

अब मुख्य प्रश्न यह है कि क्या मंत्रालय आदेशों की अवज्ञा बर्दाश्त करेगा..? कलेक्टर पर जिम्मेदारी तय होगी या करोड़ों के कथित घोटालों की स्वतंत्र जांच होगी..? फिलहाल, गरियाबंद का यह प्रकरण नौकरशाही के लिए परीक्षा बन गया है। यदि उच्च स्तर से मौन रहा, तो संदेश जाएगा कि नियम कागजों तक सीमित हैं, जबकि वास्तविक सत्ता ‘प्रभावशाली अफसरों’ के पास।
नवीन भगत का पद पर कायम रहना महज प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि शासन की मजबूती पर सवाल है। यह न केवल पद-मोह का मुद्दा, बल्कि उन योजनाओं के कथित दुरुपयोग का भी। हाल ही में देवभोग ब्लॉक के पत्रकारों ने भगत के खिलाफ धरना दिया था और उन्हें हटाने का ज्ञापन सौंपा था।
यदि शीघ्र कदम नहीं उठे, तो यह विवाद पूरे राज्य की छवि को प्रभावित कर सकता है। जनमानस अब तंज कस रहा है – “क्या सरकारी फरमान सिर्फ औपचारिकता हैं? क्या गरियाबंद में अब ‘भगत शासन’ की शुरुआत हो चुकी..?”

इस मुद्दे के अगले भाग में हम और खुलासे लाएंगे।

लखनपुर हादसा: नवरात्रि की भक्ति में बुजुर्ग की बेरहमी से मौत, ग्रामीणों की साजिश और BJP नेता पर आरोप

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लखनपुर में मीडिया की टीम पहुंचते ही BJP नेता और ग्रामीण के कान हुए ठंडे

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुंद / छत्तीसगढ़ नवरात्रि के उत्साह के बीच महासमुंद जिले के पटेवा थाना क्षेत्र के लखनपुर गांव में एक बुजुर्ग की क्रूर ठोकर से हुई मौत ने पूरे इलाके को सदमे में डाल दिया है। घटना को ‘साधारण दुर्घटना’ बताकर छिपाने की कोशिश में ग्रामीणों ने लाखों रुपये की डील की साजिश रची, जिसमें स्थानीय BJP नेता की कथित संलिप्तता ने मामले को राजनीतिक विवाद का रूप दे दिया। अब मृतक के परिजन और ग्रामीणों का एक वर्ग पुलिस से सख्त कार्रवाई की मांग कर रहा है, वरना आंदोलन की चेतावनी दी गई है।

घटना का दर्दनाक विवरण: ठोकर से अस्पताल तक की सच्चाई

शारदीय नवरात्रि के दूसरे दिन, जब गांव मां दुर्गा की आराधना में लीन था, तब लखनपुर की प्राथमिक शाला के पास दुर्गा पंडाल के सामने हाईवे की ओर बनी सड़क पर एक बिजली पोल के निकट भयावह घटना घटी। ग्रामवासी विक्रम जोशी (पिता: राजकुमार जोशी) ने कथित तौर पर बुजुर्ग को जानबूझकर जोरदार ठोकर मारी, जिससे वे बुरी तरह चोटिल हो गए। चश्मदीदों के अनुसार, बुजुर्ग विक्षिप्त स्थिति में सड़क पर लोटने लगे, लेकिन ग्रामीणों की फौरन मदद से उन्हें झलप के सियाराम मल्टी स्पेशलिस्ट अस्पताल ले जाया गया।
डॉक्टरों ने जान बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन चोटों की गंभीरता के चलते बुजुर्ग ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। अस्पताल प्रशासन ने तत्काल पटेवा थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई, जिसमें पूरी घटना का ब्योरा दिया गया। शव को तुमगांव के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया, जहां जांच के बाद परिजनों को सौंप दिया गया। लेकिन यहीं से शुरू हुई न्याय प्रक्रिया की सबसे बड़ी कमजोरी। पटेवा पुलिस ने न तो मर्ग दर्ज किया और न ही पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट पर कोई ठोस कदम उठाया। सूत्रों का दावा है कि यह जान-बूझकर की गई लापरवाही थी, ताकि आरोपी पर कोई कानूनी कार्रवाई न हो सके।

ग्रामीणों की कथित साजिश: पैसे का लालच और दुर्गा पूजा का वादा

मौत के तुरंत बाद गांव में एक ‘सामुदायिक बैठक’ बुलाई गई, जो वास्तव में आरोपी को बचाने का षड्यंत्र साबित हुई। इस बैठक में मृतक के परिवार को लाखों रुपये का प्रलोभन दिया गया, ताकि वे मामले को सुलझाने पर सहमत हो जाएं। आरोपी के पिता राजकुमार जोशी ने न केवल परिवार को आर्थिक मदद का लालच दिखाया, बल्कि पूरे गांव को प्रभावित करने के लिए भारी रकम बांटी। उन्होंने भावुक अपील की कि अगले नवरात्रि में दुर्गा प्रतिमा स्थापना का पूरा खर्च वे उठाएंगे, लेकिन बदले में विक्रम पर कोई मुकदमा न चले।
यह ‘समझौता’ न सिर्फ नैतिक रूप से गलत था, बल्कि कानूनी अपराध भी। ग्रामीणों ने साक्ष्यों को दबाने की कोशिश की, जिसमें घटनास्थल के पास किराने की दुकान पर लगे सीसीटीवी कैमरे की रिकॉर्डिंग को अनदेखा करने की योजना शामिल थी। विशेषज्ञों का कहना है कि इस फुटेज से घटना की सच्चाई साफ हो जाएगी, क्योंकि ठोकर का दृश्य स्पष्ट रूप से कैद है। फिर भी, इस ‘आपसी सुलह’ के नाम पर पुलिस ने कथित तौर पर फर्जी FIR दर्ज करने की कोशिश की, जो अब सामने आ रही है।

गांव में दो फाड़: न्याय की मांग बनाम बचाव की डील

लखनपुर में ग्रामीण दो गुटों में बंट गए हैं। एक गुट आरोपी को बचाने के लिए लाखों की डीलिंग में जुटा है, जबकि दूसरा गुट मृतक परिवार के साथ खड़ा होकर सख्त सजा की बात कर रहा है। दोषियों को जेल भेजने और FIR दर्ज करने की मांग तेज हो गई है।

BJP नेता पर सवाल: मामले दबाने में कथित भूमिका

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे विवादास्पद नाम कमल कौशिक का है, जो BJP के झलप मंडल महामंत्री और लखनपुर के उप सरपंच हैं। विश्वसनीय जानकारी के मुताबिक, कौशिक ने बैठक में सक्रिय भागीदारी निभाई और मामले को दबाने में मदद की। क्या यह महज संयोग है कि एक राजनीतिक नेता आरोपी पक्ष का साथ दे रहा है? कुछ ग्रामीणों का आरोप है कि उनकी पहुंच के कारण ही पुलिस निष्क्रिय हो गई। यह न सिर्फ स्थानीय प्रशासन की निष्पक्षता पर सवाल उठाता है, बल्कि BJP की छवि को भी नुकसान पहुंचा सकता है।

न्याय की अपील: तुरंत FIR और जांच की जरूरत

मृतक के परिजनों और सामाजिक संगठनों ने पटेवा थाने पर फर्जी FIR के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग की है। आरोपी विक्रम जोशी, उसके पिता राजकुमार जोशी और साजिश में शामिल सभी लोगों—खासकर कमल कौशिक की भूमिका—पर गहन जांच हो। सीसीटीवी फुटेज की फोरेंसिक जांच और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के आधार पर हत्या या गैर-इरादतन हत्या का केस दर्ज किया जाए। अगर उच्च अधिकारी शीघ्र कदम नहीं उठाते, तो यह आंदोलन का रूप ले सकता है और जिले भर में फैल सकता है।
यह घटना सिर्फ एक परिवार के दुख की कहानी नहीं, बल्कि समाज में फैले भ्रष्टाचार और ताकतवरों की मनमानी का प्रतीक है। महासमुंद प्रशासन और पुलिस से उम्मीद है कि वे पारदर्शिता सुनिश्चित करेंगे और न्याय दिलाएंगे। अन्यथा, आम लोगों का न्याय व्यवस्था पर भरोसा हमेशा के लिए डगमगा सकता है। क्या आला अधिकारी इस पुकार को सुनेंगे..?

छत्तीसगढ़ किसान कांग्रेस का बड़ा फैसला

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राज्यव्यापी जिला अध्यक्षों की नियुक्तियां, महासमुंद में मानिक साहू को सौंपी महत्वपूर्ण कमान

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
रायपुर / महासमुंद छत्तीसगढ़ की राजनीतिक जगत में शुक्रवार को उल्लेखनीय घटनाक्रम हुआ, जब प्रदेश किसान कांग्रेस ने राज्य के सभी जिलों के लिए जिला अध्यक्षों की सूची जारी कर दी। राजीव भवन स्थित कांग्रेस मुख्यालय से यह घोषणा किसान मुद्दों पर बढ़ती सक्रियता के बीच सामने आई है, जो राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।

नेतृत्व की सर्वसम्मति से मंजूरी

जानकारी के मुताबिक, यह सूची राज्य कांग्रेस के वरिष्ठ अधिकारियों और राष्ट्रीय स्तर के किसान कांग्रेस नेताओं की चर्चाओं के बाद अंतिम रूप दी गई। इसमें प्रदेश अध्यक्ष अभिषेक मिश्रा ,अखिल भारतीय किसान कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुखपाल सिंह खैरा, राष्ट्रीय प्रभारी अखिलेश शुक्ला, सचिन पायलट जैसे प्रमुख नामों के साथ-साथ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज, विपक्ष के नेता चरणदास महंत, महामंत्री मलकीत सिंह गेंदु, राष्ट्रीय महासचिव मनोज नचार तथा वरिष्ठ नेता राम मोहन बरुआ की भूमिका रही।
यह निर्णय किसान संगठन को मजबूत बनाने के साथ ही प्रत्येक जिले में किसान कल्याण से जुड़ी नई योजनाओं को अमल में लाने का आधार तैयार करेगा।

महासमुंद में नया चेहरा: मानिक साहू की नियुक्ति से उत्साह

महासमुंद जिले के लिए यह घोषणा खास तौर पर यादगार रही, जहां स्थानीय नेता मानिक साहू को किसान कांग्रेस का जिला अध्यक्ष बनाया गया। नामांकन की खबर फैलते ही क्षेत्र के कार्यकर्ताओं और किसान समुदाय में जोश भर गया।
मानिक साहू का राजनीतिक करियर प्रेरणादायक रहा है। वे पूर्व विधायक विनोद सेवन लाल चंद्राकर के करीबी सहयोगी रह चुके हैं और विधायी कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाई है। संगठन स्तर पर उनकी क्षमता को हमेशा सराहा गया है। इसके अलावा, सहकारिता क्षेत्र में भी उनकी मजबूत पकड़ रही, जहां बिरकोनी सहकारिता समिति के चेयरमैन के रूप में उन्होंने किसानों की चुनौतियों को सरकारी तंत्र तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। सामाजिक मोर्चे पर भी सक्रिय, वे छत्तीसगढ़ प्रदेश साहू संघ युवा प्रकोष्ठ के प्रदेश सचिव के तौर पर जानी जाते हैं।
साहू को एक संघर्षशील, बेबाक और किसान दर्द को अपना मानने वाले नेता के रूप में पहचाना जाता है, जिसके चलते उनकी यह जिम्मेदारी जिले के किसानों के बीच स्वागतयोग्य कदम साबित हो रही है।

किसान आंदोलनों की मजबूत नींव

मानिक साहू का इतिहास दर्शाता है कि उन्होंने हमेशा कृषक समस्याओं को प्रमुखता दी। धान क्रय प्रक्रिया में गड़बड़ी से लेकर उर्वरक-बीज वितरण में अनियमितताओं तक, वे किसानों के हितों की रक्षा के लिए प्रशासन के समक्ष अडिग रहे। किसान कांग्रेस ने इस नियुक्ति को “किसान आवाज को सशक्त बनाने वाला निर्णय” करार दिया है।

चुनावी तैयारी का संकेत..?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम 2028 के विधानसभा चुनावों की रणनीति का हिस्सा है। किसान कांग्रेस के जरिए पार्टी सीधे ग्रामीण मतदाताओं से जुड़ने की कोशिश कर रही है। कृषि-केंद्रित महासमुंद जैसे क्षेत्र में साहू की भूमिका न केवल संगठन को मजबूत करेगी, बल्कि किसान नेतृत्व को आगे लाकर पार्टी का आधार विस्तार भी सुनिश्चित करेगी।

संगठन को नई गति देने का संकल्प

प्रदेश अध्यक्ष अभिषेक मिश्रा ने जारी बयान में कहा, “हमारा उद्देश्य सिर्फ नामांकन तक सीमित नहीं, बल्कि किसानों को मुख्यधारा में शामिल करना है। जिला अध्यक्ष अपने क्षेत्रों में किसान मुद्दों को प्राथमिकता देंगे और पार्टी की नीतियों को जमीनी हकीकत से जोड़ेंगे।”

अब सभी की नजरें महासमुंद में साहू की टीम पर टिकी हैं। प्रदेश किसान कांग्रेस ने सभी जिलाध्यक्षों को निर्देश दिए हैं कि वे किसान शिकायतों पर तुरंत ध्यान दें और आंदोलनकारी रणनीतियां बनाएं। धान पर बोनस, फसल बीमा, न्यूनतम समर्थन मूल्य तथा सिंचाई सुविधाओं जैसे मुद्दों पर अधिक आक्रमक रुख अपनाना होगा।
छत्तीसगढ़ की राजनीति में यह विकास विपक्ष के लिए चुनौती तो समर्थकों के लिए विजय का प्रतीक है। कुल मिलाकर, मानिक साहू की यह भूमिका किसान संघर्ष को नई ऊर्जा प्रदान करने वाली साबित हो सकती है।
भविष्य में यह नई टीम लाखों किसानों की आकांक्षाओं को कितना पूरा कर पाती है, यह समय बताएगा।

महासमुंद की कुल देवी माता महामाया को चुनरी अर्पण करने नगर की जनता निकालेगी भव्य चुनरी यात्रा

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शहर में उमड़ेगा जन शैलाब उत्साह और भक्ति का माहौल, गरबा नाईट समिति के तत्वाधान में आयोजित होगी चुनरी यात्रा

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुंद/ शहर में नवरात्रि पर्व के पावन अवसर पर गरबा नाईट समिति के तत्वावधान में विगत 13 वर्षों से आयोजित होने वाली भव्य चुनरी यात्रा इस वर्ष 27 सितंबर 2025 को आयोजित की जाएगी। यह जानकारी समिति के सदस्य नीरज परोहा ने दी। उन्होंने बताया कि यह यात्रा शहर के मुख्य मार्गों से होकर गुजरेगी और नगर की कुलदेवी माँ महामाया को चुनरी अर्पित की जाएगी। इस आयोजन का संयोजन शहर की पूर्व पालिकाध्यक्ष श्रीमती राशि त्रिभुवन महिलांग के नेतृत्व में किया जा रहा है।

चुनरी यात्रा का भव्य आयोजन

चुनरी यात्रा का शुभारंभ 27 सितंबर को शाम 5 बजे स्थानीय हाई स्कूल मैदान से होगा। यह यात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए माँ महामाया मंदिर तक पहुंचेगी, जहां माता को चुनरी अर्पित की जाएगी। नीरज परोहा ने बताया कि इस आयोजन में शहर के वरिष्ठ नागरिकों और समाजसेवी व्यक्तियों का मार्गदर्शन प्राप्त हो रहा है, जो इस कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ाता है।

तैयारियां पूर्ण, मातृ शक्ति और पुरुषों के लिए विशेष व्यवस्था

समिति के सदस्य नीरज परोहा ने बताया कि चुनरी यात्रा की सभी तैयारियां श्रीमती राशि त्रिभुवन महिलांग के दिशा-निर्देशों के अनुसार पूर्ण कर ली गई हैं। यात्रा में शामिल होने वाले मातृ शक्ति (महिलाओं) और पुरुषों के लिए अलग-अलग वेशभूषा का निर्धारण किया गया है, ताकि आयोजन में एकरूपता और भव्यता बनी रहे। समिति ने यह भी सुनिश्चित किया है कि यात्रा के दौरान सभी व्यवस्थाएं सुचारू रूप से संचालित हों।

प्रशासन से सहयोग की अपेक्षा

गरबा नाईट समिति ने इस आयोजन को सफल बनाने के लिए जिला प्रशासन से पूर्ण सहयोग की अपेक्षा व्यक्त की है। विगत वर्षों की तरह इस बार भी प्रशासन के सहयोग से यात्रा को भव्य और व्यवस्थित रूप से संपन्न करने की योजना है। समिति ने सुरक्षा, यातायात व्यवस्था और अन्य आवश्यक सुविधाओं के लिए प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित किया है।

संयोजक की अपील: सभी नगरवासियों को निमंत्रण

चुनरी यात्रा की संयोजक और पूर्व पालिकाध्यक्ष श्रीमती राशि त्रिभुवन महिलांग ने शहरवासियों और आसपास के क्षेत्रों के निवासियों से इस भव्य आयोजन में शामिल होने की अपील की है। उन्होंने कहा, “यह यात्रा न केवल हमारी धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह सामाजिक एकता और भक्ति का उत्सव भी है। मैं सभी नगरवासियों और क्षेत्रवासियों से अनुरोध करती हूँ कि वे इस पवित्र आयोजन में अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराकर इसे और अधिक भव्य बनाएं।”

13 वर्षों की गौरवशाली परंपरा

गरबा नाईट समिति द्वारा आयोजित यह चुनरी यात्रा पिछले 13 वर्षों से नवरात्रि के अवसर पर शहर में एक प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन के रूप में स्थापित हो चुकी है। यह यात्रा न केवल माँ महामाया के प्रति भक्ति का प्रतीक है, बल्कि शहरवासियों के बीच एकता और उत्साह का संचार भी करती है। इस वर्ष भी समिति ने इसे और भव्य बनाने के लिए व्यापक तैयारियां की हैं।

नवरात्रि के रंग में रंगा शहर

नवरात्रि के अवसर पर शहर में उत्साह और भक्ति का माहौल है। चुनरी यात्रा के साथ-साथ शहर में गरबा और अन्य सांस्कृतिक आयोजनों की भी तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। यह आयोजन न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक एकता को भी बढ़ावा देता है।
नगरवासियों और क्षेत्रवासियों से अनुरोध है कि वे इस भव्य चुनरी यात्रा में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें और माँ महामाया के प्रति अपनी श्रद्धा अर्पित करें। यह आयोजन निश्चित रूप से शहर में भक्ति और उत्साह का एक अनुपम संगम प्रस्तुत करेगा।

कुलदेवी राजराजेश्वरी महामाया से जुड़ी कुछ तथ्यात्मक बाते

नगर की कुलदेवी राजराजेश्वरी महामाया के पावन दरबार में इस वर्ष शारदीय नवरात्र का भव्य आयोजन के शुभ अवसर पर प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी भव्य माता की चुनरी यात्रा निकाली जाएगी

लाखों श्रद्धालुओं की उमड़ती भीड़

शहर के मध्य स्थित प्राचीन महामाया मंदिर में नवरात्र के दौरान प्रतिवर्ष दूर-दूर से भक्त बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। अनुमान है कि इस बार भी लाखों श्रद्धालु दर्शन व पूजन के लिए यहाँ उपस्थित होंगे। खास बात यह है कि यहां स्त्रियों की उपस्थिति पुरुषों से कहीं अधिक रहती है। हर साल की तरह इस बार भी सभी धर्मों और समुदायों के लोग उत्साहपूर्वक भाग लेंगे, जिससे सर्वधर्म समभाव का अद्भुत दृश्य दिखाई देगा।

परंपराओं में बदलाव और इतिहास

पुरानी पीढ़ी के लोग बताते हैं कि कई दशक पहले यहां महिलाओं को मंदिर में प्रवेश करने की अनुमति नहीं थी। ऐसी मान्यता थी कि देवी के दर्शन से स्त्रियां निसंतान हो सकती हैं या गर्भस्थ शिशु को हानि हो सकती है। समय के साथ यह धारणा पूरी तरह समाप्त हो चुकी है। अब माता को “शापमोचनी” के रूप में पूजा जाता है और निःसंतान दंपति संतान प्राप्ति की कामना से यहाँ विशेष अनुष्ठान करते हैं।

एक समय पर यहां पशु बलि की परंपरा भी थी, लेकिन अहिंसा आंदोलन के बाद यह प्रथा पूरी तरह समाप्त कर दी गई। आज मंदिर अपनी भव्यता और शांतिपूर्ण वातावरण के लिए प्रसिद्ध है।

रहस्यमय उत्पत्ति

इतिहासकारों का अनुमान है कि इस मंदिर का निर्माण सम्राट समुद्रगुप्त के काल में हुआ होगा। किंवदंती के अनुसार प्राचीन काल में यहाँ चारों ओर घने जंगल थे। कहा जाता है कि एक किसान की भैंस खो जाने के बाद जब वापस लौटी, तो उसके सींगों पर जलकुंभी के पौधे लगे मिले। इससे आसपास पानी का स्रोत होने का संकेत मिला और खोजबीन के दौरान लोगों ने यहाँ तालाब और मंदिर का पता लगाया।

तालाब की वर्तमान स्थिति

मंदिर परिसर के सामने महामाया तालाब है, जो कभी विशाल क्षेत्र में फैला था। समय के साथ अतिक्रमण और उपेक्षा के कारण यह तालाब काफी सिमट गया है। कई बार इसके सौंदर्यीकरण की योजनाएँ बनीं, मगर अमल में नहीं आ सकीं। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि प्रशासन जल्द ही तालाब का कायाकल्प करेगा, जिससे मंदिर की शोभा और बढ़ सके।

संक्षेप में:
महासमुंद का यह ऐतिहासिक महामाया मंदिर आस्था, परंपरा और सामाजिक परिवर्तन का प्रतीक है। शारदीय नवरात्र के अवसर पर यहां का उल्लास, भक्तों की भीड़ और आध्यात्मिक वातावरण पूरे क्षेत्र में दिव्यता का अनुभव कराता है।

संपर्क: गरबा नाईट समिति
स्थान: हाई स्कूल मैदान, शहर
दिनांक और समय: 27 सितंबर 2025, शाम 5 बजे से
आयोजक: श्रीमती राशि त्रिभुवन महिलांग (पूर्व पालिकाध्यक्ष) और गरबा नाईट समिति

छत्तीसगढ़ को मिला नया मुख्य सचिव: विकासशील गुप्ता संभालेंगे कमान

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रिपोर्टर मयंक गुप्ता
रायपुर / 26 सितंबर 2025 छत्तीसगढ़ सरकार ने एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक बदलाव करते हुए 1994 बैच के वरिष्ठ भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी विकासशील गुप्ता को राज्य का 13वां मुख्य सचिव नियुक्त किया है। यह नियुक्ति वर्तमान मुख्य सचिव अमिताभ जैन के कार्यकाल की समाप्ति के बाद प्रभावी होगी, जो 30 सितंबर 2025 को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। विकासशील गुप्ता वर्तमान में एशियाई विकास बैंक (एडीबी), मनीला में कार्यकारी निदेशक के पद पर कार्यरत थे। उनकी इस नई भूमिका को लेकर प्रदेश में उत्साह का माहौल है, और उम्मीद की जा रही है कि उनके अनुभव और नेतृत्व से छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक ढांचे को नई दिशा मिलेगी।

नियुक्ति की पृष्ठभूमि

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाली सरकार ने विकासशील गुप्ता को विशेष रूप से इस महत्वपूर्ण पद के लिए चुना। सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री ने स्वयं गुप्ता को मनीला से वापस बुलाने की पहल की, ताकि उनकी विशेषज्ञता का लाभ राज्य के विकास में लिया जा सके। गुप्ता का चयन उनके व्यापक प्रशासनिक अनुभव, नीति निर्माण में दक्षता और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्राप्त विशेषज्ञता को देखते हुए किया गया है।

विकासशील गुप्ता का प्रोफाइल

विकासशील गुप्ता 1994 बैच के आईएएस अधिकारी हैं, जिन्होंने अपने करियर में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है। छत्तीसगढ़ के गठन के बाद से उन्होंने राज्य में कई महत्वपूर्ण विभागों में अपनी सेवाएं दी हैं। उनकी कार्यशैली को कुशल, पारदर्शी और परिणामोन्मुखी माना जाता है। मनीला में एडीबी में कार्यकारी निदेशक के रूप में उन्होंने विकास परियोजनाओं, नीति निर्माण और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनकी यह अंतरराष्ट्रीय अनुभवशीलता छत्तीसगढ़ जैसे विकासशील राज्य के लिए विशेष रूप से लाभकारी मानी जा रही है।
मुख्य सचिव के रूप में चुनौतियां और अपेक्षाएं
मुख्य सचिव के रूप में विकासशील गुप्ता के सामने कई महत्वपूर्ण चुनौतियां होंगी। छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद, बुनियादी ढांचे का विकास, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, और औद्योगिक विकास जैसे क्षेत्रों में विशेष ध्यान देने की जरूरत है। इसके अलावा, राज्य में हाल ही में बढ़ती नशे की समस्या और सामाजिक-आर्थिक असमानता जैसे मुद्दों पर भी प्रभावी नीतियों की आवश्यकता है। गुप्ता के अंतरराष्ट्रीय अनुभव को देखते हुए, विशेषज्ञों का मानना है कि वे केंद्र और राज्य सरकार के बीच समन्वय को और मजबूत करेंगे, साथ ही वैश्विक निवेश और तकनीकी सहायता को आकर्षित करने में सफल हो सकते हैं।

मुख्यमंत्री और सरकार की प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने गुप्ता की नियुक्ति पर प्रसन्नता जताते हुए कहा, “विकासशील गुप्ता एक अनुभवी और समर्पित अधिकारी हैं। उनका नेतृत्व छत्तीसगढ़ को विकास के नए आयाम देगा। हमें विश्वास है कि उनके मार्गदर्शन में राज्य नई ऊंचाइयों को छूएगा।” सरकार के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भी इस नियुक्ति को स्वागत योग्य कदम बताया है।
अमिताभ जैन का कार्यकाल
अमिताभ जैन, जिनकी जगह गुप्ता लेंगे, ने अपने कार्यकाल में कई महत्वपूर्ण नीतियों और परियोजनाओं को लागू करने में योगदान दिया। उनके नेतृत्व में छत्तीसगढ़ ने कई क्षेत्रों में प्रगति की, विशेष रूप से ग्रामीण विकास और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में। उनकी विदाई को लेकर प्रशासनिक हलकों में सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त की जा रही है।

आगे की राह

विकासशील गुप्ता के सामने अब यह जिम्मेदारी है कि वे छत्तीसगढ़ को एक समृद्ध और विकसित राज्य बनाने की दिशा में कार्य करें। उनकी नियुक्ति को लेकर न केवल प्रशासनिक हलकों में, बल्कि आम जनता में भी उत्साह है। विशेषज्ञों का मानना है कि गुप्ता की रणनीतिक सोच और वैश्विक दृष्टिकोण से राज्य में निवेश और विकास की नई संभावनाएं खुलेंगी।

निष्कर्ष

विकासशील गुप्ता की नियुक्ति छत्तीसगढ़ के लिए एक नई शुरुआत का प्रतीक है। उनके नेतृत्व में राज्य सरकार के ‘विकसित छत्तीसगढ़’ के विजन को साकार करने की उम्मीद है। जैसे-जैसे वे 1 अक्टूबर 2025 से अपना कार्यभार संभालेंगे, सभी की निगाहें उनकी नीतियों और योजनाओं पर टिकी होंगी।

सिरपुर के ऐतिहासिक गंधेश्वर महादेव मंदिर ट्रस्ट में वित्तीय घोटाले का सनसनीखेज खुलासा: सरकारी योजनाओं का कथित दुरुपयोग, करोड़ों का नुकसान!

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महासमुंद, 25 सितंबर 2025
छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के सिरपुर इलाके में स्थित प्राचीन गंधेश्वर महादेव मंदिर से जुड़े ट्रस्ट में वित्तीय अनियमितताओं का बड़ा मामला सामने आया है। इस धार्मिक स्थल की संपत्तियों से जुड़े कागजातों में गंभीर कमियां पाई गई हैं, जिसके चलते सरकारी सब्सिडी और बोनस योजनाओं का गैरकानूनी फायदा उठाने का आरोप लगा है। इससे राज्य के खजाने को भारी आर्थिक क्षति पहुंची है, और प्रारंभिक जांच में ट्रस्ट की जमीन के रिकॉर्ड में कई विसंगतियां उजागर हुई हैं, जो कानूनी नियमों का खुला उल्लंघन हैं।
लहंगर समिति के प्रमुख पर जमीन हड़पने का गंभीर आरोप
इस घोटाले का केंद्र बिंदु लहंगर समिति के जिम्मेदार तोषण सेन हैं। सरकारी दस्तावेजों के अनुसार, सेन ने मंदिर ट्रस्ट की कीमती खेती की जमीन को कथित तौर पर अपने निजी नाम पर हस्तांतरित करने की कोशिश की। धार्मिक ट्रस्टों की संपत्तियां सिर्फ संस्था के नाम पर ही रजिस्टर हो सकती हैं, लेकिन खड़सा गांव के खसरा नंबर 540/2 में दर्ज 2.20 हेक्टेयर के साथ-साथ कुल 27.79 हेक्टेयर जमीन के रिकॉर्ड में बदलाव के सबूत मिले हैं। समिति के आंतरिक फाइलें इन अनियमितताओं को साफ तौर पर प्रमाणित करती नजर आ रही हैं।
इसी फर्जी मालिकाना हक के आधार पर सरकारी बोनस स्कीम से लाखों-करोड़ों रुपये का दावा ठोंका गया, जो मंजूर भी हो गया। जानकारों का मानना है कि यह न सिर्फ सरकारी तंत्र की लापरवाही है, बल्कि पवित्र धार्मिक संपत्तियों की सुरक्षा में भी बड़ी चूक का मामला है।

रजिस्ट्रेशन विभाग में साजिश की आशंका: अधिकारियों की भूमिका पर सवाल

जांच आगे बढ़ने पर पंजीयन विभाग के अफसरों, समिति के निगरानीकर्ताओं और तकनीकी कर्मचारियों की मिलीभगत के संकेत मिले हैं। इतने बड़े पैमाने पर दस्तावेजों में छेड़छाड़ के बावजूद विभाग की तरफ से कोई चेतावनी न जारी होना बेहद शक पैदा कर रहा है। विशेषज्ञों का सवाल है—बिना ऊपरी स्तर के अधिकारियों की जानकारी के यह सब कैसे संभव हुआ? क्या राजनीतिक दबाव या आंतरिक गठजोड़ ने नजरबंदी को ढीला किया? स्थानीय स्रोत बताते हैं कि रजिस्ट्रेशन यूनिट की सुस्ती ने ही इस घपले को पनपने दिया। फिलहाल, जांच टीमें इन सबकी गतिविधियों की गहराई से जांच कर रही हैं।

ट्रस्ट के चेयरमैन और सर्वेक्षक पर भी इल्जाम: आंतरिक भ्रष्टाचार का चेहरा

विवाद तब और गहरा गया जब ट्रस्ट के सर्वेक्षक और अध्यक्ष दाऊलाल चंद्राकर पर भी यही आरोप लगे। दावा किया जा रहा है कि उन्होंने भी ट्रस्ट की जमीन को निजी स्वामित्व में दर्ज कराने में हाथ डाला और प्रतिबंधित सरकारी लाभ का लाभ उठाया। धार्मिक ट्रस्टों को सरकारी इंसेंटिव मिलना वैसे ही वर्जित है, लेकिन इसके बावजूद यह कदम उठाया गया, जिससे राज्य को करोड़ों का चूना लगा। यह घटना ट्रस्ट की आंतरिक व्यवस्था पर भारी सवाल खड़े करती है, जहां जिम्मेदार पदाधिकारी ही कथित रूप से नियम तोड़ने के आरोपी बन बैठे हैं।

श्रद्धालुओं में उबाल: सांस्कृतिक विरासत पर हमला

सिरपुर का गंधेश्वर महादेव मंदिर छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान का जीवंत प्रतीक है, जहां महानदी के किनारे बसा यह प्राचीन शिव मंदिर हर वर्ष लाखों भक्तों को आकर्षित करता है। शिवलिंग के दर्शन और आध्यात्मिक शांति के लिए दूर-दूर से लोग यहां पहुंचते हैं। लेकिन ट्रस्ट की इस कथित साजिश ने भक्तों के बीच गुस्सा भड़का दिया है। स्थानीय निवासी पूछ रहे हैं:

क्या धार्मिक संस्थाओं का इस्तेमाल निजी फायदे के लिए हो रहा है?

सरकारी कल्याण स्कीमों का दुरुपयोग कैसे अनदेखा रहा?
क्या प्रशासन की चुप्पी किसी बड़े रैकेट की ओर इशारा करती है?
यह महज आर्थिक नुकसान नहीं, बल्कि आस्था की जड़ों पर प्रहार है। सूत्रों का अनुमान है कि गहन जांच से राजनीतिक हस्तियों के नाम भी उभर सकते हैं।

जनाक्रोश: स्वतंत्र जांच की मांग तेज

समाचार फैलते ही सिरपुर और आसपास के गांवों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। भक्त संगठन और ग्रामीणों ने निष्पक्ष जांच समिति बनाने की मांग की है। एक बुजुर्ग निवासी ने कहा, “यह मंदिर हमारी श्रद्धा का केंद्र है। जमीन पर हाथ डालना बर्दाश्त नहीं। अगर दोषियों पर कार्रवाई न हुई तो बड़ा आंदोलन छेड़ेंगे।” लोग उम्मीद कर रहे हैं कि जिला कलेक्टर के सख्त आदेशों से जांच तेज हो और पारदर्शिता बनी रहे।
क्या प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेगा या यह फाइलों की धूल में दब जाएगा? विश्लेषकों का कहना है कि ऐसी लापरवाही से भविष्य में और मामले सामने आ सकते हैं।
आगे की राह: सख्त निगरानी और डिजिटल सुधार जरूरी
यह विवाद छत्तीसगढ़ सरकार के लिए गंभीर चुनौती पेश करता है। ट्रस्टों की जमीन पर बोनस वितरण पर साफ प्रतिबंध होने के बावजूद भुगतान कैसे हुआ, इसकी जड़ें खंगालना जरूरी है।

गंधेश्वर मंदिर ट्रस्ट का यह कांड बताता है कि आस्था और अर्थ के संगम में भ्रष्टाचार का खतरा हमेशा लटका रहता है। अब जरूरत है कड़े कानूनों, डिजिटल रिकॉर्डिंग और नियमित ऑडिट की, ताकि धार्मिक संपत्तियां सुरक्षित रहें। सत्य की जीत अंततः होगी, और राज्य का विकास निर्बाध चलेगा।

छत्तीसगढ़ पीएससी घोटाला: सीबीआई की बड़ी कार्रवाई, रिटायर्ड आईएएस समेत 5 गिरफ्तार

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रिपोर्टर मयंक गुप्ता
रायपुर / 24 सितंबर 2025 छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (सीजीपीएससी) परीक्षा में अनियमितताओं के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने एक सनसनीखेज कार्रवाई करते हुए पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। इस घोटाले ने पूरे राज्य में हड़कंप मचा दिया है, क्योंकि गिरफ्तार व्यक्तियों में एक रिटायर्ड आईएएस अधिकारी और उनका बेटा भी शामिल हैं। यह कार्रवाई सीजीपीएससी की भर्ती प्रक्रिया में कथित भ्रष्टाचार और गड़बड़ियों को उजागर करती है, जिसने हजारों उम्मीदवारों के भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए जांच को और तेज करने का निर्देश दिया है।

घटना का विवरण

सीजीपीएससी की विभिन्न भर्ती परीक्षाओं, विशेष रूप से 2020 और 2021 में आयोजित परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की शिकायतें लंबे समय से सामने आ रही थीं। इन शिकायतों में यह आरोप लगाया गया था कि कुछ प्रभावशाली लोगों ने अपने रिश्तेदारों और करीबियों को गलत तरीके से नौकरी दिलाने के लिए चयन प्रक्रिया में हेरफेर किया। शिकायतों में पेपर लीक, मेरिट लिस्ट में हेराफेरी, और अनुचित साधनों का उपयोग जैसे गंभीर आरोप शामिल थे।
सीबीआई ने इन शिकायतों के आधार पर जांच शुरू की थी, और कई महीनों की गहन छानबीन के बाद यह कार्रवाई की गई। सूत्रों के अनुसार, सीबीआई ने रायपुर और अन्य शहरों में कई ठिकानों पर छापेमारी की, जिसके दौरान महत्वपूर्ण दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, और अन्य सबूत जब्त किए गए। इन सबूतों ने सीजीपीएससी के कुछ अधिकारियों और बाहरी लोगों के बीच सांठगांठ की पुष्टि की।
गिरफ्तार व्यक्तियों की पहचान
सीबीआई ने जिन पांच लोगों को गिरफ्तार किया, उनमें शामिल हैं:
रिटायर्ड आईएएस अधिकारी: एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, जिनका नाम अभी गोपनीय रखा गया है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि वे सीजीपीएससी के कुछ महत्वपूर्ण निर्णयों में शामिल थे।
उनका बेटा: कथित तौर पर इस घोटाले में मध्यस्थ की भूमिका निभाने का आरोप है।
सीजीपीएससी का एक पूर्व कर्मचारी: जो भर्ती प्रक्रिया के दौरान महत्वपूर्ण पद पर था।
दो अन्य व्यक्ति: इनके बारे में बताया जा रहा है कि ये बिचौलियों के रूप में काम कर रहे थे, जो उम्मीदवारों से पैसे लेकर चयन सुनिश्चित करवाते थे।
सीबीआई के एक प्रवक्ता ने बताया कि गिरफ्तार किए गए लोगों पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। जांच में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना है।

घोटाले का स्वरूप

सीबीआई की प्रारंभिक जांच के अनुसार, यह घोटाला कई स्तरों पर संचालित था:
पेपर लीक: कुछ महत्वपूर्ण भर्ती परीक्षाओं के प्रश्नपत्र पहले ही चुनिंदा उम्मीदवारों तक पहुंचा दिए गए थे।
मेरिट लिस्ट में हेरफेर: योग्य उम्मीदवारों को नजरअंदाज कर अयोग्य उम्मीदवारों को चयनित किया गया।

रिश्वतखोरी: चयन के बदले उम्मीदवारों से लाखों रुपये की रिश्वत ली गई।

दस्तावेजों में गड़बड़ी: कुछ उम्मीदवारों के शैक्षणिक प्रमाणपत्र और अन्य दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा किया गया।
इस घोटाले का सबसे दुखद पहलू यह है कि इससे उन हजारों युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ है, जो मेहनत और ईमानदारी से सरकारी नौकरी पाने की कोशिश कर रहे थे।

हाईकोर्ट का सख्त रुख

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने सीबीआई को निष्पक्ष और तेजी से जांच करने का निर्देश दिया है। साथ ही, कोर्ट ने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों। कोर्ट ने सीजीपीएससी से भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाने को कहा है।

राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं

इस घोटाले ने छत्तीसगढ़ की राजनीति में भूचाल ला दिया है। विपक्षी दलों, विशेष रूप से कांग्रेस, ने सत्तारूढ़ बीजेपी सरकार पर निशाना साधा है और इस मामले में उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। दूसरी ओर, सरकार ने कहा है कि वह भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
सामाजिक स्तर पर, छात्र संगठनों और युवाओं ने इस घोटाले के खिलाफ रायपुर, बिलासपुर और अन्य शहरों में प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर #CGPSCScam ट्रेंड कर रहा है, जहां लोग अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं।
सीबीआई का अगला कदम
सीबीआई ने कहा है कि यह जांच अभी शुरुआती चरण में है। एजेंसी अब उन उम्मीदवारों की जांच कर रही है, जिन्हें कथित तौर पर गलत तरीके से चयनित किया गया था। साथ ही, सीजीपीएससी के अन्य अधिकारियों और बाहरी लोगों के शामिल होने की संभावना भी तलाशी जा रही है। सीबीआई ने जनता से अपील की है कि अगर किसी के पास इस घोटाले से संबंधित कोई जानकारी हो, तो वह आगे आए।

आगे की राह यह घोटाला छत्तीसगढ़ में

प्रशासनिक और भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं भविष्य में रोकने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए जाने चाहिए:

भर्ती प्रक्रिया में डिजिटल तकनीक का उपयोग बढ़ाना।

परीक्षा और चयन प्रक्रिया में तीसरे पक्ष की निगरानी।
शिकायत निवारण के लिए एक स्वतंत्र तंत्र की स्थापना।
भ्रष्टाचार के दोषियों के खिलाफ सख्त सजा।

निष्कर्ष

सीजीपीएससी घोटाला न केवल एक प्रशासनिक विफलता है, बल्कि यह उन युवाओं के सपनों पर भी चोट है, जो मेहनत और लगन से सरकारी नौकरी पाने की कोशिश कर रहे हैं। सीबीआई की इस कार्रवाई से उम्मीद जगी है कि दोषियों को सजा मिलेगी और भविष्य में ऐसी घटनाएं नहीं होंगी।

महासमुंद पुलिस विभाग की कार्यवाही शून्य शिक्षक दिनेश साहू की रहस्यमयी मौत, हर्बल लाइफ और न्यूट्रिशन क्लब पर गंभीर आरोप

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क्या पुलिस प्रशासन शिक्षक दिनेश साहू के दोषियों में शिरीष अग्रवाल, शिक्षक गिरीश कुमार साहू और पत्नी चंदेश्वरी साहू को कटघरे तक पहुंचा पाएगी या फिर मामले को कफ़न दफन कर फाइल बंद कर दी जाएगी।

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुंद / 24 सितंबर 2025 छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में एक शिक्षक की आत्महत्या ने न केवल एक परिवार को तोड़ दिया, बल्कि पूरे इलाके को सवालों के भंवर में उलझा दिया है। इमलीभाठा निवासी सरकारी स्कूल शिक्षक दिनेश साहू की फांसी से हुई मौत को अब महज एक व्यक्तिगत त्रासदी नहीं माना जा रहा। बल्कि, यह हर्बल लाइफ जैसे बहुराष्ट्रीय न्यूट्रिशन ब्रांड और स्थानीय रमा न्यूट्रिशन क्लब से जुड़े कथित धोखाधड़ी, मानसिक प्रताड़ना और षड्यंत्र की परतों से भरी एक जटिल कहानी बन चुकी है। घटना को हुए करीब दो महीने बीत चुके हैं, लेकिन पुलिस की ओर से कोई ठोस कार्रवाई न होने से पीड़ित परिवार और स्थानीय जनता में आक्रोश फैल रहा है। क्या यह मामला प्रभावशाली लोगों के दबाव में दबा दिया जाएगा, या न्याय की किरण दिखेगी? आइए, इस मामले की गहराई में उतरते हैं।

घटना का काला अध्याय: एक सामान्य जीवन का दर्दनाक अंत

दिनेश साहू, उम्र करीब 35 वर्ष, इमलीभाठा के एक सामान्य सरकारी स्कूल में पढ़ाते थे। स्थानीय लोगों के अनुसार, वे मेहनती, परिवार के प्रति समर्पित और समाज में सम्मानित व्यक्ति थे। लेकिन जुलाई 2025 के मध्य में एक रात, उन्होंने अपने घर में फांसी लगा ली। यह खबर जिले में बिजली की चमक की तरह फैली। प्रारंभिक जांच में इसे आत्महत्या ही बताया गया, लेकिन दिनेश के परिवार ने इसे साजिश का नतीजा करार दिया।
परिवार के मुताबिक, दिनेश की जिंदगी में तनाव का स्रोत उनकी पत्नी चंदेश्वरी साहू, हर्बल लाईफ कोच एवं अपलाइन लीडर शिक्षक गिरीश कुमार साहू ,बिरकोनी की रमा न्यूट्रिशन क्लब संचालिका घोड़ारी निवासी फर्शी फैक्ट्री मालिक शिरीष अग्रवाल थे। ये तीनों कथित रूप से हर्बल लाइफ के न्यूट्रिशन उत्पादों के वितरण और बिक्री से जुड़े हुए थे। दिनेश की बुजुर्ग मां ने 20 जुलाई 2025 को सिटी कोतवाली और पुलिस अधीक्षक को एक विस्तृत लिखित शिकायत सौंपी, जिसमें नामजद आरोप लगाए गए। शिकायत में दावा किया गया कि इन लोगों ने दिनेश को व्यापारिक झगड़ों, आर्थिक दबाव और व्यक्तिगत अपमान के जरिए इतना तोड़ दिया कि वे अवसाद के गहरे गर्त में डूब गए।

मुख्य बाते मां की आप बीती

मृतक दिनेश साहू की मां ने मीडिया के समक्ष रो-रो कर बयां करती हुई बताई की मेरे पुत्र दिनेश साहू जैसे ही स्कूल की ओर जाते थे उनके दोनों टीम पार्टनर गिरीश साहू और सुरेश अग्रवाल घर पर आ जाते थे और घंटों तक ऊपर रूम में रहकर न जाने क्या बाते करते थे। यहां तक हम दोनों बुजुर्गों को नाश्ता एवं खाना के लिए तरसाते थे। कुछ बोलने पर चंदेश्वरी साहू कहती थी मै तुम्हारी नौकरानी नहीं हूं जो तुम लोगो के इशारे पर नाचूंगी।

खास बात यह है कि दिनेश की मौत वाले दिन—18 जुलाई 2025—ये तीनों आरोपी दिल्ली में एक होटल में साथ स्पॉट किए गए थे। परिवार का कहना है कि यह कोई संयोग नहीं, बल्कि एक सुनियोजित योजना का हिस्सा था। “मेरा बेटा अकेला घर पर था, जबकि ये लोग दिल्ली में मौज-मस्ती कर रहे थे। क्या यह महज इत्तेफाक था?” मां के आंसुओं भरे सवाल ने मामले को और सनसनीखेज बना दिया।
मां की शिकायत: आरोपों की परतें खोलती एक चिट्ठी
दिनेश की मां की शिकायत न केवल भावुक है, बल्कि इसमें ठोस बिंदु भी हैं। उन्होंने बताया कि दिनेश हर्बल लाइफ के उत्पादों के वितरण में शामिल थे, लेकिन क्लब की अनियमितताओं—जैसे जबरन सदस्यता, ऊंची कीमतों पर बिक्री और कमीशन के नाम पर धोखा—के कारण वे तनाव में थे। रमा साहू, जो क्लब की प्रमुख हैं, और शिरीष अग्रवाल पर आरोप है कि उन्होंने दिनेश को व्यापार से बाहर करने की कोशिश की, जिससे पारिवारिक कलह बढ़ा। चंदेश्वरी साहू पर भी वैवाहिक विश्वासघात और मानसिक उत्पीड़न के आरोप लगे हैं।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, हर्बल लाइफ का यह नेटवर्क महासमुंद में तेजी से फैल रहा था। क्लबों में ‘स्वास्थ्य सेमिनार’ के नाम पर लोग लुभाए जाते थे, लेकिन पीछे छिपी सच्चाई थी मल्टी-लेवल मार्केटिंग (एमएलएम) का जाल। दिनेश जैसे कई लोग इसमें फंसकर आर्थिक नुकसान झेल चुके थे। एक पूर्व सदस्य ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “ये क्लब सेहत के नाम पर कमाई का धंधा चला रहे हैं। प्रोडक्ट महंगे हैं, और रिटर्न कम। दिनेश ने विरोध किया, तो उन्हें तोड़ने की साजिश रची गई।”
पुलिस की चुप्पी: दो महीने बाद भी एफआईआर का इंतजार
शिकायत दर्ज होने के बावजूद, सिटी कोतवाली ने अब तक किसी आरोपी के खिलाफ एफआईआर नहीं दर्ज की। न ही कोई आरोपी पूछताछ के लिए बुलाया गया। पुलिस के आधिकारिक बयान में कहा गया कि “मामला जांच के दायरे में है,” लेकिन कोई प्रगति रिपोर्ट नहीं सौंपी गई। परिवार ने आरोप लगाया कि आरोपी प्रभावशाली हैं—शिरीष अग्रवाल एक स्थापित व्यापारी हैं, जबकि रमा साहू का क्लब जिले में जाना-माना है। क्या दबाव के कारण जांच ठप है?
सवाल उठ रहे हैं:

क्या मृतक की मोबाइल कॉल डिटेल्स, व्हाट्सएप चैट्स और बैंक ट्रांजेक्शन की जांच हुई?

दिल्ली होटल के सीसीटीवी फुटेज और आरोपीयों की लोकेशन वेरिफिकेशन क्यों नहीं?
क्या हर्बल लाइफ के स्थानीय ऑपरेशंस पर कोई ऑडिट कराया जाएगा?
स्थानीय पत्रकारों के अनुसार, दिनेश की मौत की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने पोस्टमॉर्टम कर शव सौंप दिया, लेकिन गहन जांच शुरू नहीं की। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “आत्महत्या के मामलों में परिवार की शिकायत पर एक्शन लिया जाता है, लेकिन सबूतों की कमी से देरी हो रही है।” लेकिन परिवार इसे बहाना मानता है।

हर्बल लाइफ और रमा क्लब: स्वास्थ्य या धोखे का कारोबार?

हर्बल लाइफ, एक वैश्विक कंपनी, भारत में न्यूट्रिशन प्रोडक्ट्स के जरिए लाखों लोगों तक पहुंच चुकी है। महासमुंद जैसे छोटे शहरों में इसके क्लब—जैसे बिरकोनी का रमा न्यूट्रिशन क्लब—समाज सेवा का चेहरा अपनाते हैं। लेकिन इस मामले ने इनकी साख पर सवाल खड़े कर दिए। पूर्व सदस्यों के दावों के मुताबिक:
क्लब में जॉइनिंग फीस और प्रोडक्ट खरीद अनिवार्य है, जो कईयों के लिए बोझ बन जाती है।
कमीशन स्ट्रक्चर पिरामिड जैसा है, जहां ऊपरवाले ही फायदा कमाते हैं।
कुछ उत्पादों की कीमत बाजार से दोगुनी बताई जाती है, जिससे उपभोक्ता ठगे महसूस करते हैं।
रमा न्यूट्रिशन क्लब पर विशेष आरोप है कि उन्होंने क्लब को व्यक्तिगत लाभ के लिए इस्तेमाल किया। हर्बल लाइफ इंडिया ने इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की, लेकिन कंपनी की नीतियां स्पष्ट करती हैं कि वे अनैतिक प्रैक्टिसेज के खिलाफ हैं। फिर भी, स्थानीय स्तर पर नियमन की कमी ने समस्या बढ़ाई है। क्या यह क्लब वाकई स्वास्थ्य सुधारते हैं, या आर्थिक जाल बुनते हैं? दिनेश की मौत ने इस बहस को नई जान दी है।

दिनेश के छोटे भाई ने कहा, “भैया एक साधारण शिक्षक थे। इनके व्यापारिक झगड़ों ने उन्हें मार डाला। पुलिस चुप है, आरोपी खुले घूम रहे हैं।” परिवार ने कलेक्टर और एसपी से मिलने की कोशिश की, लेकिन कोई राहत नहीं। मां का दर्द छलका: “मेरा लाल चला गया, लेकिन दोषी सजा क्यों नहीं पा रहे? अगर न्याय न मिला, तो हम रायपुर तक धरना देंगे।”
शहर में चर्चा है कि क्या कानून अमीरों के लिए अलग है? स्थानीय एनजीओ और महिला संगठन मामले को उठा रहे हैं। एक सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा, “यह सिर्फ एक मौत नहीं, बल्कि एमएलएम स्कीम्स के खतरे की चेतावनी है। जागरूकता जरूरी है।” जनता की मांग है: तत्काल एफआईआर, आरोपीयों की गिरफ्तारी और स्वतंत्र जांच।
प्रशासन के सामने चुनौती: न्याय या लापरवाही?
महासमुंद एसपी ने कहा, “मामला संवेदनशील है। जल्द कार्रवाई होगी।” लेकिन वादों से आगे बढ़ना होगा। अगर जांच हुई, तो कॉल रिकॉर्ड्स, मेडिकल रिपोर्ट्स (अवसाद के लक्षण) और क्लब के फाइनेंशियल रिकॉर्ड्स खंगाले जाने चाहिए। केंद्र सरकार की एमएलएम गाइडलाइंस के तहत भी हस्तक्षेप संभव है।
यह मामला केवल दिनेश का नहीं, बल्कि हर उस परिवार का है जो धोखे के जाल में फंस सकता है। अगर दोषी बच गए, तो कानून पर भरोसा डगमगाएगा। महासमुंद प्रशासन अब फैसला ले—क्या यह फाइलों में दफन हो जाएगा, या न्याय की मिसाल बनेगा..? दिनेश की आत्मा शांति पाए, यही सबकी कामना है।