नवरात्रि से पहले उपभोक्ताओं को राहत: 375 वस्तुओं पर जीएसटी दरों में कटौती, दूध, घी, दवाएं और इलेक्ट्रॉनिक्स हुए सस्ते

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23 सितंबर 2025 को केंद्र सरकार ने उपभोक्ताओं को बड़ी राहत देते हुए 375 वस्तुओं और सेवाओं पर जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) दरों में कटौती की घोषणा की। यह निर्णय नवरात्रि के शुभ अवसर से लागू हो गया है, जिससे आम लोगों को दैनिक उपयोग की वस्तुओं और सेवाओं पर आर्थिक बोझ कम होने की उम्मीद है। इस कटौती के दायरे में दूध, घी, पनीर, इलेक्ट्रॉनिक्स, दवाइयां, ऑटोमोबाइल, और कई अन्य आवश्यक वस्तुएं शामिल हैं, जो अब सस्ती हो जाएंगी।

जीएसटी परिषद की हालिया बैठक में लिए गए इस फैसले के तहत, कई वस्तुओं पर कर की दर को 28% से घटाकर 18% या उससे भी कम किया गया है। उदाहरण के लिए, दूध और दुग्ध उत्पादों जैसे घी और पनीर पर जीएसटी दर को 12% से घटाकर 5% किया गया है। इसी तरह, चिकित्सा क्षेत्र से जुड़ी दवाइयों और आवश्यक उपकरणों पर भी कर में कमी की गई है, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं अधिक किफायती होंगी। इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे टीवी, फ्रिज, और मोबाइल फोन पर भी जीएसटी दरों में 5-10% की कमी की गई है, जिसका सीधा लाभ मध्यम वर्ग को मिलेगा। ऑटोमोबाइल सेक्टर में कार और दोपहिया वाहनों पर कर की दरें कम होने से वाहन खरीदना भी अब सस्ता होगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस कटौती को “डबल बोनांजा” करार देते हुए कहा कि यह कदम न केवल उपभोक्ताओं को राहत देगा, बल्कि अर्थव्यवस्था को भी गति प्रदान करेगा। उन्होंने अपने बयान में कहा, “नवरात्रि के पावन अवसर पर यह निर्णय मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों के लिए एक तोहफा है। इससे न केवल उनकी बचत बढ़ेगी, बल्कि बाजार में मांग भी बढ़ेगी, जो रोजगार सृजन में मदद करेगा।”

वित्त मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, इस कटौती का उद्देश्य मुद्रास्फीति को नियंत्रित करना और उपभोक्ता खर्च को बढ़ावा देना है। विशेषज्ञों का मानना है कि दैनिक उपयोग की वस्तुओं पर कर कम होने से मध्यम और निम्न आय वर्ग के लोगों को सबसे अधिक लाभ होगा। साथ ही, ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में मांग बढ़ने से उद्योगों को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

हालांकि, कुछ आलोचकों ने इस कदम को चुनावी रणनीति का हिस्सा बताया है, लेकिन व्यापार संगठनों और उपभोक्ता समूहों ने इस फैसले का स्वागत किया है। व्यापारियों का कहना है कि जीएसटी दरों में कमी से त्योहारी सीजन में बिक्री बढ़ने की उम्मीद है, खासकर नवरात्रि और दीवाली के दौरान।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जीएसटी दरों में यह कटौती राजस्व पर ज्यादा असर नहीं डालेगी, क्योंकि मांग बढ़ने से कर संग्रह में कमी की भरपाई हो जाएगी। जीएसटी परिषद अगली बैठक में अन्य वस्तुओं और सेवाओं पर भी कर दरों की समीक्षा कर सकती है।

*यह समाचार कॉपीराइट-मुक्त है और सार्वजनिक उपयोग के लिए उपलब्ध है।*

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