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महासमुंद कृषि विभाग में घमासान जितेंद्र पटेल को हटाओ विभाग बचाओ..!

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13 साल की लूट और उत्पीड़न के आरोप, अधिकारियों की हड़ताल से किसानों का भविष्य खतरे में…!

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुंद / 14 अक्टूबर 2025 छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में कृषि विभाग के अंदर उबाल आ चुका है। यहां के सभी ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी एकजुट होकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठ गए हैं। यह आंदोलन छत्तीसगढ़ कृषि स्नातक शासकीय कृषि अधिकारी संघ की अगुवाई में चल रहा है, और इनकी सिर्फ एक मांग है – जितेंद्र पटेल नामक अधिकारी को फौरन उनके मूल पद पर वापस भेजा जाए। पटेल पर गंभीर आरोप लगे हैं कि वे मैदानी स्तर के कर्मचारियों के साथ बदसलूकी करते हैं, झूठी जानकारियां फैलाते हैं और उप संचालक कृषि का नाम लेकर उन्हें मानसिक रूप से तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। संघ के नेता बताते हैं कि पहले भी कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन ऊपर से कोई सुनवाई नहीं हुई, जिससे मजबूरन हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ा।
इस हड़ताल से जिले भर के कृषि कार्यालयों में सन्नाटा पसर गया है। ये ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी किसानों के लिए जीवनरेखा जैसे हैं – वे बीज बांटते हैं, सब्सिडी वाली योजनाओं को लागू करते हैं और फसलों पर सलाह देते हैं। अब जब ये धरने पर हैं, तो किसानों की मुसीबतें दोगुनी हो गई हैं। खासकर पोस्ट-मानसून सीजन में, जब बुआई का समय है और उर्वरक की जरूरत चरम पर है। जिला मुख्यालय के कृषि कार्यालय के बाहर सैकड़ों प्रदर्शनकारी जमा हैं, उनके हाथों में तख्तियां हैं जिन पर लिखा है: “पटेल को हटाओ, किसानों को न्याय दो!” और “उत्पीड़न बंद करो, विभाग बचाओ!” माहौल में गुस्सा और निराशा साफ झलक रही है, और अगर जल्द कोई हल न निकला तो स्थिति और बिगड़ सकती है।

पटेल का 13 सालों का ‘राज’: अनियमितताओं की लंबी फेहरिस्त

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, जितेंद्र पटेल पिछले 13 साल से महासमुंद में ही अटैचमेंट पर जमे हुए हैं, जो सरकारी नियमों की खुली अवहेलना है। सामान्यत: अधिकारियों को एक जगह पर ज्यादा समय नहीं रखा जाता ताकि सिस्टम में पारदर्शिता बनी रहे, लेकिन यहां मामला उलटा है। इन सालों में पटेल पर आरोप है कि उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार की कई कृषि योजनाओं में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां कीं। मिसाल के तौर पर, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना में सहायता राशि का गलत वितरण, फसल बीमा स्कीम में फर्जी क्लेम, उर्वरक सब्सिडी में घपला और बीज वितरण में मिलीभगत। कई किसानों ने गुमनाम रहते हुए बताया कि उनकी मदद की रकम या तो देर से आती है या फिर बिचौलियों के जेब में चली जाती है। पटेल के चहेतों को फायदा पहुंचाने के लिए कागजी कार्रवाई में हेरफेर किया जाता था, जिससे गरीब और छोटे किसान सबसे ज्यादा मारे गए। एक प्रभावित किसान ने कहा, “हमारी फसलें तो सूख रही हैं, लेकिन कागजों पर सब्सिडी का पैसा उड़ गया। ऐसे अधिकारी किसानों के लिए अभिशाप हैं।”
यह सिर्फ पैसे की लूट नहीं, बल्कि सिस्टम की जड़ों को खोखला करने की कहानी है। महासमुंद जैसे कृषि-प्रधान जिले में जहां धान, दालें, सब्जियां और फल मुख्य फसलें हैं, वहां ऐसी अनियमितताएं किसानों की कमर तोड़ देती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक एक जगह रहने से अधिकारी स्थानीय प्रभावशाली लोगों से सांठगांठ कर लेते हैं, जो योजनाओं को पटरी से उतार देता है।

संघ की आवाज अविनाश चंद्राकर का बयान

संघ के जिला अध्यक्ष अविनाश चंद्राकर ने इस मुद्दे पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा, “यह महज विभागीय झगड़ा नहीं है, बल्कि किसानों के अधिकारों की लड़ाई है। पटेल ने 13 सालों में लूट का कोई मौका नहीं छोड़ा – हर योजना में घोटाले हुए। मैदानी अधिकारियों को डराया-धमकाया जाता है, गलत डेटा थोपा जाता है। उप संचालक का नाम लेकर हमें तंग किया जा रहा है। हमने कई बार लिखित शिकायतें दीं, लेकिन कोई एक्शन नहीं। अब हड़ताल से अपनी आवाज उठा रहे हैं। जब तक पटेल को उनकी मूल पोस्टिंग पर नहीं भेजा जाता, हमारा संघर्ष थमेगा नहीं।” चंद्राकर ने यह भी जोड़ा कि अगर मांगें न मानी गईं तो राज्य स्तर पर आंदोलन फैल सकता है, जिसमें किसान संगठन भी शामिल होंगे।

विभाग में डर का साया, सरकार की खामोशी

महासमुंद छत्तीसगढ़ का एक महत्वपूर्ण कृषि केंद्र है, जहां लाखों परिवार खेती पर निर्भर हैं। ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी किसानों के साथ सीधे जुड़े रहते हैं, लेकिन पटेल की कथित ज्यादतियों से विभाग में डर का माहौल है। एक अनाम वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मीटिंग्स में पटेल सहकर्मियों को अपमानित करते हैं और काम न करने पर धमकियां देते हैं। इससे कर्मचारियों का उत्साह गिरा है और योजनाओं का फायदा सही लोगों तक नहीं पहुंच रहा।
उप संचालक कृषि कार्यालय की ओर से अब तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। जितेंद्र पटेल से संपर्क करने की कोशिशें भी नाकाम रहीं। राज्य के कृषि विभाग के उच्चाधिकारियों ने सिर्फ इतना कहा कि जांच चल रही है, लेकिन कोई कंक्रीट ऐलान नहीं। विश्लेषकों का मानना है कि अगर जल्द समाधान न हुआ तो यह आंदोलन पूरे छत्तीसगढ़ में फैल सकता है, जो किसानों के लिए और बड़ी मुश्किलें पैदा करेगा।

भविष्य की चुनौतियां किसानों की उम्मीदें टिकीं

यह पूरा वाकया छत्तीसगढ़ कृषि विभाग में जवाबदेही और ईमानदारी की कमी को उजागर करता है। पटेल जैसे अधिकारियों की लंबी पोस्टिंग पर सवाल उठ रहे हैं कि क्या नियम सिर्फ कागजों तक सीमित हैं? संघ ने 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है कि अगर मांगें न मानी गईं तो आंदोलन तेज होगा। कई किसान संघों ने समर्थन जताया है और कह रहे हैं कि यह लड़ाई सिर्फ अधिकारियों की नहीं, बल्कि किसानों की जीविका की है। हम इस घटनाक्रम पर पैनी नजर रखे हुए हैं। अगर आपके पास कोई अतिरिक्त विवरण है, तो हमें बताएं।

बांसकुड़ा पंचायत में लापरवाही की सजा सचिव जगदीश ध्रुव पर तत्काल निलंबन की तलवार, किशोर कुमार को मिली कमान.!

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महासमुंद में प्रशासन की सख्ती ग्रामीण विकास में बाधा डालने पर गिरी गाज, नया प्रभार सौंपकर योजनाओं को दी गति..!

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुंद / 11 अक्टूबर 2025
जिला पंचायत महासमुंद के प्रशासनिक दायरे में एक बड़ी हलचल मची है, जहां ग्राम पंचायत बांसकुड़ा के सचिव जगदीश ध्रुव की लापरवाही और अनुशासनहीनता पर शासन ने कड़ी कार्रवाई की है। मुख्य कार्यपालन अधिकारी हेमंत नंदनवार के हस्ताक्षरित आदेश के तहत जगदीश ध्रुव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इस फैसले ने न केवल पंचायत क्षेत्र में सनसनी फैला दी है, बल्कि पूरे जिले के प्रशासनिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है। ग्रामीणों के बीच यह निर्णय एक राहत की तरह देखा जा रहा है, क्योंकि सचिव की उदासीनता से कई सरकारी योजनाएं ठप पड़ी हुई थीं।

पंचायत कार्यों में लगातार अनदेखी नियमित उपस्थिति से लेकर आदेशों की अनदेखी तक की शिकायतें..!

बांसकुड़ा पंचायत, जो आदिवासी बहुल क्षेत्र में स्थित है और शासन की कई महत्वपूर्ण योजनाओं का केंद्र बिंदु मानी जाती है, वहां सचिव जगदीश ध्रुव की जिम्मेदारियों में भारी कोताही पाई गई। सूत्रों के अनुसार, वे न केवल कार्यालय में नियमित रूप से हाजिर नहीं होते थे, बल्कि वरिष्ठ अधिकारियों के फोन कॉल्स और लिखित निर्देशों का भी कोई प्रतिसाद नहीं देते थे। इससे पंचायत स्तर पर विकास कार्यों में देरी हुई, जैसे कि मनरेगा के तहत रोजगार सृजन, प्रधानमंत्री आवास योजना के आवंटन और जल संरक्षण से जुड़ी परियोजनाएं प्रभावित हुईं।
प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए पहले जगदीश ध्रुव को कारण बताओ नोटिस जारी किया था, जिसमें उन्हें अपना पक्ष रखने के लिए पर्याप्त समय दिया गया। लेकिन तय समय सीमा के बाद भी कोई जवाब न मिलने पर इसे छत्तीसगढ़ पंचायत सेवा (आचरण) नियम, 1998 का स्पष्ट उल्लंघन माना गया। मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने आदेश में जोर देकर कहा कि ऐसे पदों पर तैनात कर्मचारियों से अपेक्षा की जाती है कि वे जनता की सेवा में तत्पर रहें, और किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

निलंबन के दौरान मुख्यालय में तैनाती केवल निर्वाह भत्ता, कोई अतिरिक्त सुविधा नहीं..!

निलंबन की अवधि के दौरान जगदीश ध्रुव को जिला पंचायत महासमुंद के मुख्यालय में रिपोर्ट करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्हें केवल जीवन निर्वाह भत्ता ही प्रदान किया जाएगा, और कोई अन्य वेतन या लाभ नहीं मिलेगा। प्रशासन ने इस कार्रवाई को एक उदाहरण के रूप में पेश किया है, ताकि अन्य पंचायत सचिवों को यह संदेश जाए कि शासन की योजनाओं में किसी भी तरह की ढिलाई पर कड़ी नजर रखी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम ग्रामीण प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

तत्काल राहत छपोराडीह के सचिव किशोर कुमार ध्रुव को सौंपी गई।

अतिरिक्त जिम्मेदारी!
प्रशासन ने पंचायत की व्यवस्था को पटरी से उतरने से बचाने के लिए फुर्ती दिखाते हुए ग्राम पंचायत छपोराडीह के सचिव किशोर कुमार ध्रुव को बांसकुड़ा का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया है। किशोर कुमार, जो अपनी कुशलता और समयबद्धता के लिए जाने जाते हैं, को निर्देश दिए गए हैं कि वे लंबित कार्यों को प्राथमिकता दें। इनमें शौचालय निर्माण, सड़क मरम्मत, जल जीवन मिशन के तहत पाइपलाइन विस्तार और महिला सशक्तिकरण योजनाओं का क्रियान्वयन शामिल है। प्रशासन की उम्मीद है कि उनके नेतृत्व में पंचायत के कामकाज में तेजी आएगी और ग्रामीणों की शिकायतें दूर होंगी।

गांव में उत्साह की लहर ग्रामीणों ने कहा- ‘अब विकास की रफ्तार पकड़ेगी’..!

इस निलंबन आदेश के बाद बांसकुड़ा गांव में ग्रामीणों के बीच उत्साह का माहौल है। कई स्थानीय निवासियों ने बताया कि सचिव की अनुपस्थिति से महीनों से कार्य लंबित थे, जिससे दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा था। एक ग्रामीण रामलाल ने कहा, “पहले फाइलें धूल खा रही थीं, अब नए सचिव से उम्मीद है कि मनरेगा के काम शुरू होंगे और आवास योजना के लाभ मिलेंगे।” वहीं, महिलाओं ने भी इस फैसले का स्वागत किया, क्योंकि स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़ी योजनाएं प्रभावित हो रही थीं। कुछ लोगों का मानना है कि यह कार्रवाई अन्य पंचायतों के लिए सबक बनेगी, जहां भी लापरवाही हो रही है।

प्रशासन की बड़ी रणनीति: अन्य पंचायतों पर भी कड़ी नजर, समीक्षा की तैयारी..!

मुख्य कार्यपालन अधिकारी हेमंत नंदनवार ने अपने बयान में दोहराया कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाएं जमीनी स्तर पर पहुंचनी चाहिए, और पंचायतें इसका पहला माध्यम हैं। उन्होंने कहा, “कर्मचारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करना हमारा प्राथमिक लक्ष्य है। लापरवाही करने वालों पर सख्ती बरती जाएगी।” सूत्रों से पता चला है कि जिला प्रशासन अब पूरे महासमुंद जिले की अन्य पंचायतों की समीक्षा करने की योजना बना रहा है। अनुपस्थिति, देरी से रिपोर्टिंग या योजनाओं में अनियमितता पाए जाने पर और कार्रवाई हो सकती है। यह कदम राज्य स्तर पर ग्रामीण विकास को मजबूत करने की दिशा में देखा जा रहा है।

नजीर बनकर उभरा यह मामला
पूरे जिले में सतर्कता का माहौल..!

बांसकुड़ा पंचायत का यह निलंबन अब जिले भर के पंचायत सचिवों और कर्मचारियों के लिए एक बड़ी चेतावनी बन गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे फैसले से प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार या लापरवाही पर अंकुश लगेगा। ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों का मानना है कि इससे योजनाओं का क्रियान्वयन तेज होगा, और अंततः लाभ आम जनता को मिलेगा। अब सभी की नजरें किशोर कुमार ध्रुव के कार्यकाल पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि पंचायत कितनी जल्दी पटरी पर लौटती है।
यह घटना न केवल एक व्यक्तिगत कार्रवाई है, बल्कि शासन की प्रतिबद्धता का प्रतीक है कि जनहित से ऊपर कुछ नहीं। महासमुंद जिले में ऐसे और कदम उठाए जाने की संभावना से प्रशासनिक सुधार की नई लहर आने की उम्मीद की जा रही है।

डीएवी स्कूल बचेली में हंगामा: प्रिंसिपल के खिलाफ शिक्षकों का उग्र प्रदर्शन, तानाशाही के गंभीर आरोप

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रिपोर्टर मयंक गुप्ता
बचेली / 9 अक्टूबर 2025 (विशेष संवाददाता) छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले के बचेली में स्थित डीएवी पब्लिक स्कूल में प्रिंसिपल चेतना शर्मा के कथित तानाशाही रवैये के खिलाफ शिक्षकों और अभिभावकों का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा। सोमवार को सैकड़ों शिक्षकों, अभिभावकों और स्थानीय लोगों ने स्कूल प्रबंधन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया, जिसमें प्रिंसिपल को तत्काल हटाने की मांग की गई। प्रदर्शन के दौरान स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि एक महिला शिक्षिका मानसिक दबाव के चलते बेहोश होकर गिर पड़ीं, जिन्हें तुरंत स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया। शिक्षकों और जनप्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रिंसिपल को नहीं हटाया गया, तो पूरे बचेली में उग्र आंदोलन शुरू किया जाएगा। एनएमडीसी प्रबंधन ने मामले की जांच का आश्वासन दिया है, लेकिन प्रदर्शनकारी इस वादे पर भरोसा करने को तैयार नहीं हैं।

पांच साल की तानाशाही शिक्षकों के गंभीर आरोप

शिक्षकों ने प्रिंसिपल चेतना शर्मा पर पिछले पांच वर्षों से स्कूल में तानाशाही का माहौल कायम करने का आरोप लगाया है। प्रदर्शनकारी शिक्षकों का कहना है कि प्रिंसिपल न केवल शिक्षकों को मानसिक रूप से प्रताड़ित करती हैं, बल्कि गरीब और वंचित परिवारों के बच्चों को भी अपमानित करती हैं। एक शिक्षक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “चेतना शर्मा बच्चों की सामाजिक और आर्थिक पृष्ठभूमि के आधार पर उन्हें ताने मारती हैं। कई बार उन्होंने बच्चों को कहा, ‘तुम्हारी औकात नहीं इस स्कूल में पढ़ने की।’ शिक्षकों को भी छोटे-मोटे काम जैसे घर का राशन लाना, गाड़ी साफ करना या टॉयलेट की सफाई करने के लिए मजबूर किया जाता है।”
शिक्षकों ने यह भी आरोप लगाया कि प्रिंसिपल ने स्कूल को अपनी निजी सत्ता के रूप में चला रखा है। एक अन्य शिक्षिका ने बताया, “वह हमें धमकाती थीं कि अगर हमने उनके खिलाफ आवाज उठाई, तो हमें नौकरी से निकाल दिया जाएगा या झूठे आपराधिक मामलों में फंसाया जाएगा। हम हर दिन डर के साए में काम करते थे।” इन आरोपों ने स्कूल के माहौल को पूरी तरह बिगाड़ दिया है, जिसका सीधा असर बच्चों की शिक्षा पर पड़ रहा है।

मासूम बच्चों का दर्द: ‘मेरी मां को डायन कहा’

प्रदर्शन के दौरान एक मासूम छात्र की मार्मिक बात ने सभी का ध्यान खींचा। रोते हुए छात्र ने मीडिया को बताया, “मैम ने मेरी मां को ‘डायन’ कहकर अपमानित किया और मुझे स्कूल से निकाल दिया। मैं पढ़ना चाहता हूं, लेकिन मुझे डर लगता है।” इस बयान ने वहां मौजूद लोगों में आक्रोश की लहर दौड़ा दी। कई अन्य अभिभावकों ने भी पुष्टि की कि उनके बच्चों को भी प्रिंसिपल द्वारा अपमान और मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा। एक अभिभावक ने कहा, “हमारे बच्चों का भविष्य दांव पर है। स्कूल में शिक्षा का माहौल खत्म हो चुका है।”

प्रबंधन की चुप्पी और शिकायतों की अनदेखी

शिक्षकों ने बताया कि 27 शिक्षकों ने मिलकर 11 नवंबर 2024 को एनएमडीसी प्रबंधन को एक विस्तृत शिकायत पत्र सौंपा था, जिसमें प्रिंसिपल के सभी कृत्यों का जिक्र था। लेकिन प्रबंधन ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। एक शिक्षक ने गुस्से में कहा, “हमने बार-बार प्रबंधन को अपनी परेशानियां बताईं, लेकिन हर बार हमें आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला। अब हमारे पास सड़क पर उतरने के सिवा कोई रास्ता नहीं बचा।” प्रबंधन की इस निष्क्रियता ने शिक्षकों और अभिभावकों का आक्रोश और बढ़ा दिया।

जनप्रतिनिधियों का हस्तक्षेप जांच का आश्वासन

विवाद बढ़ता देख स्थानीय पालिका अध्यक्ष राजू जायसवाल और उपाध्यक्ष सतीश प्रेमचंदानी मौके पर पहुंचे। उन्होंने शिक्षकों और अभिभावकों की शिकायतें सुनीं और एनएमडीसी अधिकारियों से तत्काल बात की। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि प्रिंसिपल के खिलाफ जांच शुरू की जाएगी और जांच पूरी होने तक उन्हें स्कूल आने से रोका जाएगा। लेकिन जब जनप्रतिनिधि प्रिंसिपल से बात करने पहुंचे, तो चेतना शर्मा ने बात करने से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, “मैं डिप्रेशन की दवाइयां ले रही हूं, कोई बात नहीं करूंगी।” इस बयान पर जनप्रतिनिधियों ने कड़ा ऐतराज जताया और कहा कि ऐसी मानसिकता वाला व्यक्ति स्कूल का नेतृत्व करने के लायक नहीं है।

प्रशांत सिंह का विवादास्पद बयान

मीडिया को धमकी
मामले ने तब और तूल पकड़ा जब छत्तीसगढ़ उच्च शिक्षा विभाग (HED) के अधिकारी प्रशांत सिंह ने स्थानीय पत्रकारों को धमकाया। जब पत्रकारों ने उनसे स्कूल विवाद पर सवाल पूछे, तो सिंह भड़क गए और बोले, “मीडिया को हम कुछ नहीं समझते। जांच चल रही है, तुम कौन होते हो सवाल पूछने वाले? अपनी औकात में रहो, नहीं तो देख लेंगे।” इस बयान ने पूरे क्षेत्र में आक्रोश फैला दिया। पालिका अध्यक्ष राजू जायसवाल ने तत्काल प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “प्रशांत सिंह का यह रवैया लोकतंत्र पर हमला है। मीडिया को धमकाना अस्वीकार्य है। हम उनके खिलाफ उच्च स्तर पर शिकायत करेंगे।”
उपाध्यक्ष सतीश प्रेमचंदानी ने भी सिंह के बयान की कड़ी निंदा की और कहा, “ऐसे अधिकारी सच को दबाना चाहते हैं। हम मांग करते हैं कि शिक्षा विभाग इस बयान पर माफी मांगे, वरना हम पूरे छत्तीसगढ़ में इसके खिलाफ आवाज उठाएंगे।” स्थानीय पत्रकार संगठनों ने भी इस घटना को प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला करार दिया और प्रशांत सिंह के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

उग्र आंदोलन की चेतावनी

पालिका अध्यक्ष राजू जायसवाल और उपाध्यक्ष सतीश प्रेमचंदानी ने सख्त लहजे में कहा, “हम डीएवी स्कूल में बच्चों और शिक्षकों का भविष्य दांव पर नहीं लगने देंगे। चेतना शर्मा को तत्काल हटाया जाए, वरना पूरे बचेली में उग्र आंदोलन शुरू होगा। हम रैलियां निकालेंगे, धरना देंगे और जरूरत पड़ी तो रायपुर तक जाएंगे।” शिक्षक संघों ने भी इस मांग का समर्थन किया और कहा कि यह केवल एक स्कूल का मामला नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार और तानाशाही का प्रतीक है।

आगे की राह जांच पर टिकी नजरें

एनएमडीसी प्रबंधन ने मामले की जांच के लिए एक समिति गठित करने का वादा किया है, लेकिन शिक्षक, अभिभावक और स्थानीय लोग सतर्क हैं। उनका कहना है कि अगर जांच में देरी हुई या प्रिंसिपल को बचाने की कोशिश की गई, तो आंदोलन और तेज होगा। स्थानीय निवासियों ने भी शिक्षकों के साथ एकजुटता दिखाई है और मांग की है कि स्कूल में शिक्षा का माहौल बहाल किया जाए।

शिक्षा तंत्र में सुधार की जरूरत

यह घटना छत्तीसगढ़ के शिक्षा तंत्र में गहरी खामियों को उजागर करती है। स्कूलों में तानाशाही, शिक्षकों और बच्चों की प्रताड़ना, और प्रबंधन की उदासीनता जैसे मुद्दों ने शिक्षा के माहौल को दूषित कर दिया है। यह मामला केवल डीएवी स्कूल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे राज्य में शिक्षा व्यवस्था में सुधार की तत्काल जरूरत को रेखांकित करता है।

निष्कर्ष

डीएवी स्कूल बचेली का यह विवाद न केवल एक स्कूल की कहानी है, बल्कि यह शिक्षा, जवाबदेही और मानवीय गरिमा का सवाल है। शिक्षकों, अभिभावकों और जनप्रतिनिधियों की एकजुटता और उनकी मांगें इस बात का संकेत हैं कि अब लोग अन्याय के खिलाफ चुप नहीं रहेंगे। अब यह देखना बाकी है कि एनएमडीसी प्रबंधन और शिक्षा विभाग इस मामले में कितनी गंभीरता से कदम उठाते हैं।

महासमुंद में दुखद हादसा: कोडार डैम में डूबने से व्यापारी विजय चंद्राकर की मौत, स्कूटी ने खोला राज

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रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुंद / जिले के कोडार डैम से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जिसने पूरे शहर को शोक में डुबो दिया। शहर के मशहूर छत्तीसगढ़ बीज भंडार के मालिक, 65 वर्षीय विजय चंद्राकर की डैम में डूबने से दुखद मृत्यु हो गई। उनकी स्कूटी, जो डैम के किनारे खड़ी थी, इस त्रासदी की पहली गवाह बनी। इस घटना ने न केवल उनके परिवार, बल्कि स्थानीय व्यापारी समुदाय और किसानों के बीच भी शोक की लहर दौड़ा दी है।

स्कूटी ने खोली दर्दनाक सच्चाई

गुरुवार की दोपहर कोडार गांव के पास डैम के किनारे कुछ स्थानीय लोगों की नजर एक स्कूटी पर पड़ी, जो काफी देर से वीरान पड़ी थी। आसपास कोई व्यक्ति नजर नहीं आया, जिससे ग्रामीणों को संदेह हुआ। नजदीक जाकर देखने पर पता चला कि यह स्कूटी विजय चंद्राकर की थी, जो महासमुंद की पुरानी सिविल लाइन में रहते थे और अपने बीज व्यापार के लिए जाने जाते थे। ग्रामीणों ने तुरंत तुमगांव थाना पुलिस को सूचना दी।
पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और ग्रामीणों की सहायता से डैम में तलाशी अभियान शुरू किया। कुछ ही देर में वह दृश्य सामने आया, जिसने सभी को झकझोर दिया—विजय चंद्राकर का शव डैम के पानी में तैरता हुआ मिला। इस खबर ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी और उनके घर पर कोहराम मच गया।

एक सम्मानित व्यापारी का असामयिक अंत

विजय चंद्राकर न केवल एक सफल व्यवसायी थे, बल्कि एक दयालु और समाजसेवी व्यक्ति के रूप में भी उनकी ख्याति थी। उनका छत्तीसगढ़ बीज भंडार क्षेत्र के किसानों के बीच बेहद लोकप्रिय था। उनकी अचानक मृत्यु ने स्थानीय व्यापारी समुदाय और किसानों को गहरे सदमे में डाल दिया। परिवार के सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है, और लोग इस बात पर विश्वास नहीं कर पा रहे कि सुबह तक सामान्य रूप से घर से निकला व्यक्ति अब कभी वापस नहीं आएगा।

पुलिस जांच और सवालों का सिलसिला

तुमगांव पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया है। प्रारंभिक जांच में डूबने से मृत्यु की पुष्टि हुई है, लेकिन पुलिस हर संभावित पहलू की जांच कर रही है। क्या यह एक दुर्घटना थी, या इसके पीछे कोई और कारण था? इस सवाल का जवाब पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।
लोगों के बीच कई सवाल उठ रहे हैं—विजय चंद्राकर उस दिन अकेले डैम क्यों गए? उनकी स्कूटी किनारे क्यों खड़ी थी? क्या यह एक सामान्य हादसा था, या इसके पीछे कोई मानसिक तनाव या अन्य परिस्थितियां थीं? ये सवाल पूरे समुदाय को परेशान कर रहे हैं।

ग्रामीणों की सजगता बनी मिसाल

इस घटना में कोडार गांव के ग्रामीणों की तत्परता और संवेदनशीलता की प्रशंसा हो रही है। अगर उन्होंने स्कूटी को नजरअंदाज कर दिया होता, तो शायद यह मामला देर से सामने आता। उनकी सजगता ने पुलिस को तुरंत कार्रवाई करने में मदद की। तुमगांव पुलिस ने भी ग्रामीणों के सहयोग की सराहना की है।

कोडार डैम: हादसों का गवाह

कोडार डैम में इस तरह की यह पहली घटना नहीं है। पहले भी यहां कई लोग डूबने से अपनी जान गंवा चुके हैं। डैम की गहराई और किनारों पर सुरक्षा व्यवस्था की कमी बार-बार हादसों का कारण बन रही है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि डैम के आसपास सुरक्षा उपायों को बढ़ाया जाए और नियमित गश्त की व्यवस्था की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोका जा सके।

शोक में डूबा समुदाय

विजय चंद्राकर की मृत्यु की खबर फैलते ही स्थानीय व्यापारी समुदाय और उनके परिचित कोडार गांव पहुंचने लगे। उनके घर पर शोक जताने वालों का तांता लगा हुआ है। किसानों और व्यापारियों के बीच उनकी सादगी और मददगार स्वभाव की चर्चा हो रही है। यह हादसा न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे महासमुंद जिले के लिए एक अपूरणीय क्षति है।

अंतिम विदाई

कोडार डैम की शांत लहरों ने एक जीवंत व्यक्तित्व को हमेशा के लिए अपनी आगोश में ले लिया। विजय चंद्राकर का यूं चले जाना उनके परिवार, दोस्तों और समुदाय के लिए एक गहरा आघात है। अब सभी की नजरें पुलिस जांच और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो इस दुखद घटना के पीछे की सच्चाई को उजागर कर सकती हैं।
“कोडार डैम की खामोशी में एक जिंदगी खो गई, और एक स्कूटी ने उस दर्दनाक सत्य को सामने ला दिया, जिसने पूरे शहर को शोक में डुबो दिया।”

साइबर ठगी का कहर: 2025 में 5 महीनों में 7,000 करोड़ की चपत, लाखों भारतीय फंसे जाल में..!

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रिपोर्टर मयंक गुप्ता
नई दिल्ली / डिजिटल युग में जहां एक क्लिक से दुनिया जुड़ रही है, वहीं साइबर अपराधी भी अपनी चालें तेज कर रहे हैं। गृह मंत्रालय (एमएचए) की एक रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि जनवरी से मई 2025 तक देशवासियों को ऑनलाइन ठगी से लगभग 7,000 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा। यह रकम इतनी बड़ी है कि औसतन हर महीने 1,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की लूट हो रही है। इनमें से ज्यादातर मामले दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों जैसे कंबोडिया से संचालित हो रहे हैं, जहां भारतीयों को नौकरी के बहाने फंसाकर ठगी के गिरोह में शामिल किया जा रहा है। इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (आई4सी) के आंकड़ों के मुताबिक, इन स्कैमर्स ने आधे से ज्यादा नुकसान पहुंचाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में लोगों से अपील की है कि अनजान कॉल्स पर विश्वास न करें और सतर्क रहें। विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगर यही रफ्तार जारी रही, तो पूरे साल में नुकसान 1.2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।

पिछले साल की बात

करें तो 2024 में साइबर फ्रॉड से रिकॉर्ड 22,845 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ, जो 2023 की तुलना में 206 प्रतिशत ज्यादा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, फाइनेंशियल फ्रॉड के मामले तेजी से बढ़े, जिनमें सरकारी योजनाओं के नाम पर निवेश के झांसे और स्टॉक ट्रेडिंग स्कैम प्रमुख रहे। पूरे साल में 36 लाख से ज्यादा शिकायतें दर्ज हुईं, और 10,000 से अधिक गिरफ्तारियां हुईं। आई4सी ने इस साल अब तक 4,000 से ज्यादा संदिग्ध स्काइप आईडीज को ब्लॉक किया है, लेकिन अपराधियों की नई-नई तकनीकें चुनौती बनी हुई हैं। 2022 में जहां 10 लाख से ज्यादा मामले थे, वहीं 2024 में यह संख्या तीन गुना से ज्यादा हो गई। सरकार ने साइबर सिक्योरिटी को मजबूत करने के लिए बजट में 782 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं, साथ ही पब्लिक अवेयरनेस कैंपेन चलाए जा रहे हैं।

डिजिटल अरेस्ट नया हथियार, लाखों का नुकसान

साइबर ठगों का सबसे खौफनाक तरीका ‘डिजिटल अरेस्ट’ बन गया है, जहां वे खुद को सीबीआई, ईडी या पुलिस अधिकारी बताकर वीडियो कॉल पर लोगों को ‘गिरफ्तार’ होने का डर दिखाते हैं। सितंबर 2025 में गुरुग्राम की एक महिला इसी जाल में फंस गई और तीन दिनों में 5.85 करोड़ रुपये गंवा बैठी। ठगों ने उसे मनी लॉन्ड्रिंग के झूठे केस में फंसाने की धमकी दी और बैंक ट्रांसफर करवा लिए। महिला ने बैंक पर लापरवाही का आरोप लगाया, क्योंकि इतनी बड़ी रकम के ट्रांसफर पर कोई अलर्ट नहीं आया। इसी तरह, दिल्ली के एक रिटायर्ड बैंकर ने 23 करोड़ रुपये खोए, और उज्जैन की एक महिला ने 5 लाख रुपये। 2022 से 2024 तक ऐसे मामले तीन गुना बढ़कर 1.23 लाख हो गए हैं। सरकार ने ‘ऑपरेशन चक्र’ जैसे अभियान चलाकर कई गिरोहों को पकड़ा है, लेकिन क्रॉस-बॉर्डर होने से मुश्किलें हैं।

बचाव के उपाय जागरूकता है कुंजी

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि अनजान कॉल पर कभी बैंक डिटेल्स न शेयर करें। ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी कोई चीज कानूनी रूप से नहीं होती, इसलिए डरें नहीं। राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (cybercrime.gov.in) पर तुरंत रिपोर्ट करें। दो-स्तरीय सुरक्षा (2FA) लगाएं और मजबूत पासवर्ड यूज करें। सरकार के टीवी और अखबारी कैंपेन से सीखें – असली अधिकारी कभी फोन पर पैसे नहीं मांगते। यह बढ़ता खतरा सिर्फ पैसों का नहीं, बल्कि विश्वास का भी नुकसान कर रहा है। समय रहते सतर्क रहें, ताकि डिजिटल इंडिया सुरक्षित बने।

मुख्यमंत्री ने की घोषणा छत्तीसगढ़ में धान खरीदी 15 नवंबर से,किसानों के लिए समर्थन मूल्य और सुगम व्यवस्था का वादा

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रिपोर्टर मयंक गुप्ता
रायपुर / 9 अक्टूबर 2025 छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि खरीफ विपणन सत्र 2024-25 के तहत धान खरीदी 15 नवंबर 2025 से शुरू होगी। इस पहल का उद्देश्य राज्य के लाखों किसानों को उनकी उपज का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) सुनिश्चित करना और उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करना है। सरकार ने खरीदी प्रक्रिया को पारदर्शी, सुगम और समयबद्ध बनाने के लिए व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं।

समर्थन मूल्य और किसानों को लाभ

मुख्यमंत्री साय ने जोर देकर कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार किसानों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। इस साल धान की खरीदी न्यूनतम समर्थन मूल्य पर होगी, और सरकार ने संकेत दिए हैं कि कुछ श्रेणियों के धान के लिए बोनस राशि भी दी जा सकती है। केंद्र सरकार द्वारा घोषित MSP के अनुसार, सामान्य धान के लिए प्रति क्विंटल ₹2,300 और ग्रेड-A धान के लिए ₹2,320 का समर्थन मूल्य निर्धारित किया गया है। हालांकि, छत्तीसगढ़ सरकार ने पिछले वर्षों में किसानों को अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि दी है, और इस बार भी ऐसी संभावना जताई जा रही है।

तैयारियों में तेजी

राज्य सरकार ने धान खरीदी के लिए व्यापक स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी हैं।

खरीदी केंद्रों की व्यवस्था

पूरे राज्य में लगभग 2,500 से अधिक खरीदी केंद्र स्थापित किए जाएंगे। इन केंद्रों पर बारदाने, तौल मशीन, नमी मापक यंत्र और अन्य आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है।

डिजिटल पंजीयन और टोकन सिस्टम

किसानों को सुविधा देने के लिए ऑनलाइन पंजीयन प्रक्रिया को और सरल किया गया है। टोकन सिस्टम के जरिए खरीदी केंद्रों पर भीड़ को नियंत्रित किया जाएगा।

भुगतान में पारदर्शिता

किसानों को भुगतान समय पर और डिजिटल माध्यम से करने के लिए बैंकों के साथ समन्वय स्थापित किया गया है। सरकार का दावा है कि भुगतान में देरी की शिकायतों को न्यूनतम करने के लिए विशेष निगरानी तंत्र बनाया गया है।

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा

बस्तर और अन्य नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में खरीदी केंद्रों की सुरक्षा के लिए पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की जाएगी।

किसानों की बढ़ती उम्मीदें

छत्तीसगढ़ में धान उत्पादन राज्य की अर्थव्यवस्था का एक प्रमुख हिस्सा है। हर साल लाखों किसान अपनी उपज को समर्थन मूल्य पर बेचते हैं, जिससे उनकी आजीविका चलती है। इस साल सरकार ने धान की खरीदी के लिए 21 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य रखा है। बिलासपुर के किसान श्याम लाल साहू ने कहा, “पिछले साल भुगतान में कुछ देरी हुई थी, लेकिन इस बार सरकार ने समय पर खरीदी और भुगतान का वादा किया है। अगर यह पूरा होता है, तो हमारी मुश्किलें काफी कम हो जाएंगी।”
कई किसान संगठनों ने समर्थन मूल्य में और वृद्धि की मांग की है। उनका कहना है कि खेती की बढ़ती लागत को देखते हुए MSP को और बढ़ाया जाना चाहिए। इसके जवाब में सरकार ने संकेत दिए हैं कि किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए बोनस राशि पर विचार किया जा सकता है।

चुनौतियों से निपटने की रणनीति

पिछले कुछ वर्षों में धान खरीदी के दौरान बारदाने की कमी, भंडारण की समस्या और भुगतान में देरी जैसी चुनौतियां सामने आई थीं। इस बार सरकार ने इन समस्याओं से निपटने के लिए कई कदम उठाए हैं।

बारदाने की व्यवस्था

सरकार ने पहले ही लाखों बारदानों का स्टॉक तैयार कर लिया है। साथ ही, स्थानीय स्तर पर बारदाने की आपूर्ति के लिए सहकारी समितियों को जिम्मेदारी दी गई है।

भंडारण की सुविधा

धान के भंडारण के लिए नए गोदामों का निर्माण और पुराने गोदामों की मरम्मत का काम तेजी से चल रहा है।

कर्मचारियों की तैनाती

खरीदी केंद्रों पर पर्याप्त कर्मचारियों की नियुक्ति की जा रही है ताकि प्रक्रिया में कोई रुकावट न आए।

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विशेष ध्यान

नक्सल प्रभावित बस्तर, दंतेवाड़ा, सुकमा और नारायणपुर जैसे जिलों में धान खरीदी को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है। हाल ही में नारायणपुर में हुए नक्सली हमले के बाद सरकार ने इन क्षेत्रों में खरीदी केंद्रों की सुरक्षा बढ़ाने का फैसला किया है। साथ ही, इन इलाकों के किसानों को खरीदी केंद्र तक पहुंचने में सुविधा के लिए परिवहन व्यवस्था भी उपलब्ध कराई जाएगी।

किसानों का उत्साह

राज्य के विभिन्न हिस्सों से किसानों ने इस घोषणा का स्वागत किया है। रायगढ़ के एक किसान नेता गोपाल सिन्हा ने कहा, “15 नवंबर से खरीदी शुरू होने की खबर से किसानों में उत्साह है। हम उम्मीद करते हैं कि सरकार इस बार प्रक्रिया को और सुचारू बनाएगी और भुगतान में कोई देरी नहीं होगी।”

आगे की राह

छत्तीसगढ़ सरकार का यह कदम न केवल किसानों की आय बढ़ाने में मदद करेगा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देगा। धान खरीदी की प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए सरकार ने तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर कई सुधार किए हैं। यदि ये प्रयास सफल रहे, तो यह छत्तीसगढ़ के कृषि क्षेत्र के लिए एक मील का पत्थर साबित हो सकता है।

शिक्षा विभाग में फर्जी भर्ती का महाघोटाला: रायपुर में खुलासा, पुलिस जांच तेज

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ऑनलाइन सट्टेबाजी में छत्तीसगढ़ टॉप पर, सख्ती की मांग

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
रायपुर / 8 अक्टूबर 2025 (विशेष संवाददाता) छत्तीसगढ़ के शिक्षा विभाग में फैले भ्रष्टाचार ने अब नया रूप ले लिया है। राजधानी रायपुर सहित कई जिलों में फर्जी दस्तावेजों के सहारे सरकारी नौकरियों का बड़ा खेल सामने आया है, जिससे विभाग की विश्वसनीयता पर गहरा सवाल खड़ा हो गया है। पुलिस ने इस मामले में तत्काल जांच शुरू कर दी है, जिसमें कई वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है। दूसरी ओर, राज्य में ऑनलाइन सट्टेबाजी के अवैध कारोबार ने चरम पर पहुंचकर चिंता बढ़ा दी है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड्स ब्यूरो (एनसीआरबी) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, छत्तीसगढ़ इस मामले में देश में नंबर वन पर है, जिसके खिलाफ विपक्ष और सामाजिक संगठनों ने सख्त कार्रवाई की मांग तेज कर दी है।

फर्जी नियुक्तियों का जाल: आयोग के नाम पर चला सवा चार साल का खेल

शिक्षा विभाग में यह घोटाला 2021 से ही पनप रहा था, लेकिन अब जाकर इसका पर्दाफाश हुआ है। छत्तीसगढ़ राज्य शिक्षा आयोग के नाम पर जारी किए गए कूटरचित पत्रों के जरिए कई कर्मचारियों की नियुक्तियां की गईं, जबकि आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि उसने कभी ऐसी कोई भर्ती प्रक्रिया शुरू ही नहीं की। जांच में सामने आया कि 9 सितंबर 2021 का एक फर्जी नियुक्ति आदेश आयोग के तत्कालीन सचिव ओ.पी. मिश्रा के नाम से जारी किया गया था। इसमें 2016 का राजपत्र दिखाया गया, जबकि आयोग की स्थापना तो 2017 में ही हुई थी। व्यापम जैसी परीक्षा और भर्ती अनुमति के नाम पर सब कुछ झूठा साबित हुआ।
इस घोटाले की जड़ें समग्र शिक्षा विभाग तक फैली हुई हैं, जहां 70 से 100 करोड़ रुपये का कथित घपला हुआ। निजी कंपनियों को ठेके देकर फर्जी दस्तावेजों पर 2-3 लाख रुपये लेकर नियुक्तियां बांटी गईं। एनएसयूआई जैसे संगठनों ने आरोप लगाया है कि भर्ती नियमों का खुला उल्लंघन किया गया, और विभागीय अधिकारियों ने आंखें मूंद लीं। व्यावसायिक शिक्षक भर्ती में भी इसी तरह की अनियमितताएं पाई गईं, जहां शिकायतों के बाद भर्ती पर रोक लगानी पड़ी।
स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा, “विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं होगा। दोषी अधिकारी हों या कर्मचारी, सभी पर कड़ी कार्रवाई होगी।” विभाग ने राज्य परियोजना कार्यालय समग्र शिक्षा को निर्देशित किया है कि सभी दस्तावेजों की जांच हो और दोषियों के खिलाफ तुरंत कानूनी कदम उठाए जाएं। एक तीन सदस्यीय जांच समिति पहले ही गठित हो चुकी है, जिसकी रिपोर्ट में कई कंपनियों और अधिकारियों के नाम उभर आए हैं। पुलिस की साइबर सेल भी फर्जी दस्तावेजों की डिजिटल जांच में जुटी है, और संभावना है कि जल्द ही कई गिरफ्तारियां हों।
यह घोटाला न केवल सरकारी खजाने को खोखला कर रहा है, बल्कि हजारों योग्य अभ्यर्थियों के सपनों पर भी भारी पड़ रहा है। अभ्यर्थी संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर दोषियों पर त्वरित कार्रवाई नहीं हुई, तो वे रायपुर में बड़े आंदोलन पर उतर आएंगे।

ऑनलाइन सट्टेबाजी का काला कारोबार: छत्तीसगढ़ शीर्ष पर, युवाओं का भविष्य खतरे में

शिक्षा घोटाले के साथ ही राज्य में एक और गंभीर समस्या ने जोर पकड़ लिया है – ऑनलाइन सट्टेबाजी। एनसीआरबी की 2023 की रिपोर्ट (जो हाल ही में पेश की गई) के अनुसार, छत्तीसगढ़ देश में ऑनलाइन जुआ-सट्टे के मामलों में प्रथम स्थान पर काबिज है। आईपीएल जैसे क्रिकेट मैचों के दौरान यह कारोबार चरम पर पहुंच जाता है, जहां लाखों रुपये का मशरूका जब्त किया जाता है। भाजपा नेता केदार गुप्ता ने पूर्व कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, “भूपेश राज में इसकी जड़ें मजबूत हुईं। 600-700 लोगों पर कार्रवाई हुई, लेकिन सेंट्रल गवर्नमेंट के एप्स को बंद करने की जरूरत है।”
पुलिस ने इस साल कई बड़ी कार्रवाइयां की हैं। अप्रैल में दिल्ली के द्वारका में छत्तीसगढ़ के 5 युवाओं समेत 6 सटोरियों को गिरफ्तार किया गया, जहां ‘कबूक’ पैनल के जरिए ऑनलाइन सट्टा चलाया जा रहा था। इसी तरह, महादेव ऐप जैसे प्लेटफॉर्म्स पर झारखंड और छत्तीसगढ़ के युवा फंसते नजर आ रहे हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गूगल और मेटा को नोटिस जारी कर ऐप्स के प्रमोशन पर सवाल उठाए हैं, क्योंकि इनके जरिए करोड़ों की काली कमाई हो रही है।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने भी इस मुद्दे पर सख्त रुख अपनाया है। मार्च में एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने गृह विभाग के सचिव से व्यक्तिगत हलफनामा मांगा और प्रतिबंधित कंपनियों को नोटिस जारी किया। जुलाई में सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ सहित गुजरात व महाराष्ट्र के मामलों को अपने पास बुला लिया, जिससे उम्मीद है कि राष्ट्रीय स्तर पर सख्त कानून बनेगा। राज्य में 2023 से ही जुआ प्रतिषेध विधेयक लागू है, जिसमें 7 साल की सजा और 10 लाख जुर्माने का प्रावधान है, लेकिन उल्लंघन थमने का नाम नहीं ले रहा।
सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह समस्या युवाओं को आर्थिक रूप से बर्बाद कर रही है। एक सर्वे के मुताबिक, राज्य के 40% से अधिक युवा ऐसे ऐप्स के चपेट में हैं, जो परिवारों को तबाह कर रहे हैं। विपक्ष ने विधानसभा में विशेष सत्र बुलाने की मांग की है, ताकि साइबर क्राइम यूनिट को मजबूत किया जाए।

आगे की राह पारदर्शिता और सख्ती जरूरी

ये दोनों मामले छत्तीसगढ़ की प्रशासनिक व्यवस्था पर सवालिया निशान लगा रहे हैं। शिक्षा विभाग में पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया और डिजिटल वेरिफिकेशन सिस्टम लागू करने की जरूरत है, जबकि सट्टेबाजी के खिलाफ केंद्र-राज्य समन्वय से साइबर निगरानी बढ़ानी होगी। सरकार ने आश्वासन दिया है कि जांच पूरी होते ही दोषियों को सलाखों के पीछे पहुंचाया जाएगा। लेकिन जनता का विश्वास तभी बहाल होगा, जब कार्रवाई दिखेगी। फिलहाल, रायपुर की सड़कों पर विरोध के स्वर तेज हो रहे हैं – क्या सरकार सुन पाएगी..?

नशे का नंगा नाच..! महासमुंद की युवा पीढ़ी पर मंडराता खतरा..!!

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रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुंद / 8 अक्टूबर 2025: जिला नशे की चपेट में डूबता जा रहा है, जहां युवा पीढ़ी की जिंदगी दांव पर लगी है। पहले के दौर में शराब, गांजा या बीड़ी-सिगरेट तक नशा सीमित था, लेकिन अब नए-नए घातक मादक पदार्थों ने समाज को जकड़ लिया है। नशे में डूबे युवा सड़कों पर मौत की रफ्तार से वाहन दौड़ा रहे हैं, जिससे हर दिन हादसे हो रहे हैं और बेकसूर जिंदगियां खत्म हो रही हैं। प्रशासन की चुप्पी और अवैध नशे के कारोबार का खुला खेल इस आग में घी डाल रहा है। आखिर कब तक यह सिलसिला चलेगा? क्या कोई कदम उठेगा या समाज यूं ही बर्बादी की ओर बढ़ता रहेगा..?

नशे की नई लहर युवाओं का भविष्य अंधेरे में

आज का समय नशे के नए और खतरनाक रूपों का गवाह बन रहा है। पहले जहां नशा कुछ परंपरागत मादक पदार्थों तक सीमित था, वहीं अब सिंथेटिक ड्रग्स, इंजेक्शन और मेडिकल नशे ने युवाओं को अपनी गिरफ्त में ले लिया है। ये पदार्थ न सिर्फ शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को तबाह कर रहे हैं, बल्कि युवाओं को अपराध और हिंसा की राह पर भी धकेल रहे हैं। महासमुंद में नशे की लत का शिकार युवा हर गली-मोहल्ले में दिख जाते हैं, जो नशे की हालत में खतरनाक हरकतें करते हैं। सवाल यह है कि क्या समाज इस नई महामारी को रोकने के लिए तैयार है..?

महंगी गाड़ियों का मायाजाल रईसजादों की बर्बादी की दौड़

आज के धनाढ्य माता-पिता अपने बच्चों को महंगी बाइक और कार तोहफे में दे रहे हैं, लेकिन यही वाहन नशे में चूर युवाओं के लिए मौत का साधन बन रहे हैं। तेज रफ्तार और नशे का कॉकटेल सड़क हादसों को जन्म दे रहा है, जिसमें न सिर्फ ड्राइवर बल्कि राहगीर भी जान गंवा रहे हैं। पुलिस के आंकड़े बताते हैं कि महासमुंद में होने वाले अधिकांश सड़क हादसों में नशा एक प्रमुख कारण है। इन युवाओं को जिम्मेदारी का पाठ पढ़ाने की जरूरत है, ताकि ये महंगी गाड़ियां शान की सवारी की जगह मौत की सैर न बनें।

अवैध नशे का साम्राज्य
गली-गली में खुला बाजार

महासमुंद की सड़कों और गलियों में अवैध शराब, गांजा और मेडिकल ड्रग्स का कारोबार बेलगाम हो चुका है। ये नशे के सौदागर इतने ताकतवर हो गए हैं कि वे स्थानीय प्रशासन और प्रभावशाली लोगों को भी अपने जाल में फंसा लेते हैं। नतीजा, इनके खिलाफ कार्रवाई नाममात्र की होती है। खुले बाजार में नशे की बिक्री ने समाज को डर और अराजकता के साये में ला दिया है। जो लोग इनके खिलाफ आवाज उठाते हैं, उन्हें धमकियां मिलती हैं या उनकी आवाज दबा दी जाती है। यह स्थिति न सिर्फ कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाती है, बल्कि समाज की नैतिकता को भी चुनौती दे रही है।

हथियारबंद बच्चे: अपराध की नई नस्ल

सबसे डरावना पहलू यह है कि आज छोटे-छोटे बच्चे भी नशे की लत और अपराध की राह पर चल पड़े हैं। महासमुंद में किशोरों के पास हथियार होना अब आम बात हो गई है। नशे में धुत ये बच्चे बिना सोचे-समझे हिंसा और अपराध में लिप्त हो रहे हैं। यह समाज के लिए खतरे की घंटी है, क्योंकि अगर आज की पीढ़ी इस रास्ते पर चली, तो भविष्य में अराजकता का मंजर तय है। नशे और हथियारों का यह गठजोड़ समाज को कहां ले जाएगा..?

प्रशासन की खामोशी: कब टूटेगा सन्नाटा..?

इस गंभीर स्थिति में सबसे बड़ा सवाल प्रशासन की भूमिका पर है। क्या जिला प्रशासन और पुलिस इस नशे के जाल को तोड़ने के लिए कोई ठोस रणनीति बनाएगी? स्थानीय लोग मांग कर रहे हैं कि अवैध नशे के कारोबार पर सख्ती से रोक लगे, छापेमारी हो और जागरूकता अभियान चलाए जाएं। साथ ही, नशे के सौदागरों को कड़ी सजा देने की जरूरत है। अगर प्रशासन अब भी चुप रहा, तो यह नशे का नंगा नाच और तेजी से फैलेगा, और युवा पीढ़ी की बर्बादी को कोई नहीं रोक पाएगा।

रास्ता क्या है..?

यह समस्या सिर्फ महासमुंद की नहीं, बल्कि पूरे देश के सामने एक चुनौती है। समाज, परिवार, और प्रशासन को एकजुट होकर इस महामारी से लड़ना होगा। स्कूलों और कॉलेजों में जागरूकता कार्यक्रम, काउंसलिंग सेंटर, और सख्त कानूनी कार्रवाई इस दिशा में पहला कदम हो सकता है। युवाओं को नशे की जगह खेल, शिक्षा और रचनात्मक गतिविधियों की ओर प्रेरित करने की जरूरत है। अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो नशे का यह जहर पूरे समाज को निगल जाएगा।

निष्कर्ष

महासमुंद में नशे का बढ़ता कहर एक चेतावनी है। यह वक्त जागने का है, ताकि हमारी युवा पीढ़ी को बर्बादी से बचाया जा सके। प्रशासन, समाज और परिवारों को मिलकर इस जंग को लड़ना होगा, वरना कलयुग का अंत भले न हो, लेकिन इंसानियत का अंत जरूर हो जाएगा।

भालू का कहर, वन विभाग की लापरवाही: बिडोरा गांव में दो ग्रामीण घायल, प्रशासन की चुप्पी से आक्रोश

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रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुंद / छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के बिडोरा गांव में जंगल से भटके भालुओं का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा। मंगलवार सुबह हुए ताजा हमले में दो ग्रामीण गंभीर रूप से घायल हो गए, और वन विभाग की लचर कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि विभागीय कर्मचारी अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ रहे हैं, जिसके चलते घूमंतू जंगली जानवरों के हमले बढ़ते जा रहे हैं।
सुबह करीब 7 बजे, 60 वर्षीय दान बाई ठाकुर तालाब किनारे कचरा फेंकने गई थीं, तभी एक भालू ने उन पर हमला कर दिया। उनके सिर और कमर में गहरी चोटें आईं। उसी दौरान, 55 वर्षीय छबिलाल साहू अपनी बाइक से खेत जा रहे थे, जब भालू ने उन पर झपट्टा मारा, जिससे उनके कूल्हे में गंभीर चोट लगी। दोनों को ग्रामीणों ने किसी तरह बागबाहरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, जहां उनकी हालत नाजुक बनी हुई है।
गांव वालों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से पांच भालुओं का झुंड, जिसमें छोटे भालू भी शामिल हैं, गांव के आसपास मंडरा रहा है। एक दिन पहले इन भालुओं ने बच्चों को दौड़ाया था, जिससे पूरे गांव में दहशत है। ग्रामीणों ने बताया कि वन विभाग को बार-बार सूचना देने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। विभाग ने सिर्फ खानापूर्ति के लिए घायलों को 500-500 रुपये की मामूली मदद दी, जिसे ग्रामीणों ने “मजाक” करार दिया।
ग्रामीणों का गुस्सा वन विभाग की लापरवाही पर फूट रहा है। उनका कहना है कि अगर समय रहते भालुओं को जंगल में वापस भेजा गया होता, तो यह हादसा टाला जा सकता था। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि भालुओं को तत्काल पकड़कर जंगल में छोड़ा जाए और वन विभाग के कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जाए।
यह घटना मानव-वन्यजीव संघर्ष की गंभीर समस्या को उजागर करती है, और वन विभाग की निष्क्रियता ने ग्रामीणों के बीच आक्रोश को और बढ़ा दिया है। प्रशासन की चुप्पी और लापरवाही से अब सवाल उठ रहा है कि आखिर कब तक ग्रामीण जंगली जानवरों के खौफ में जीने को मजबूर रहेंगे..?

शिक्षक दिनेश साहू की आत्महत्या का रहस्य: बहू की बेवफाई, लूट और हर्बल लाइफ ठगी के बाद भी पुलिस की चुप्पी

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रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुंद / 7 अक्टूबर 2025 (विशेष संवाददाता) छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में एक शिक्षक की दुखद आत्महत्या ने पूरे समुदाय को झकझोर दिया है। दिनेश साहू, एक मेहनती शिक्षक, ने 13 अगस्त 2025 को अपनी पत्नी के कथित अवैध संबंधों और मानसिक उत्पीड़न से तंग आकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। ढाई महीने बाद भी पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की, जिससे मृतक की बुजुर्ग मां खेमिन साहू की न्याय की गुहार अधूरी पड़ी है। इस मामले में चोरी, धोखाधड़ी और हर्बल लाइफ के नाम पर कथित ठगी के गंभीर आरोपों ने इसे और सनसनीखेज बना दिया है।
घटना का दर्दनाक विवरण: खेमिन साहू, जो ईमलीभांठा, शिव वाटिका, वार्ड नंबर 3 की निवासी हैं, ने 23 अगस्त 2025 को पुलिस अधीक्षक को एक मार्मिक शिकायत पत्र सौंपा। इसमें उन्होंने बताया कि उनके बेटे दिनेश की पत्नी चंदेश्वरी साहू के दो पुरुष मित्रों—सिरीश अग्रवाल और गिरीश साहू—के साथ संदिग्ध रिश्ते थे। “दिनेश जब स्कूल में बच्चों को पढ़ाने जाता, तब चंदेश्वरी घर पर इन लोगों को बुलाती। उनके बीच अश्लील संदेशों का आदान-प्रदान होता था। सामाजिक बदनामी और मानसिक तनाव ने मेरे बेटे को आत्महत्या के लिए मजबूर कर दिया,” खेमिन ने शिकायत में लिखा।
दिनेश की मौत के तुरंत बाद, चंदेश्वरी ने घर से लाखों रुपये के सोने-चांदी के जेवर, नकदी और जमीन के महत्वपूर्ण दस्तावेज चुराकर फरार हो गई। “हम बूढ़े माता-पिता अब बिल्कुल असहाय हैं। बेटे को खोया, और अब हमारी जिंदगी भर की कमाई भी लुट गई,” खेमिन ने आंसुओं के बीच कहा। उन्होंने सिरीश और गिरीश पर भी दिनेश को आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया, जो परिवार में लगातार तनाव पैदा करते थे।

न्याय की मांग और कानूनी अपील

खेमिन ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 108 (आत्महत्या के लिए उकसाना) सहित अन्य धाराओं के तहत चंदेश्वरी, सिरीश और गिरीश के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। इसके अलावा, चुराई गई संपत्ति की बरामदगी और गहन जांच की गुहार लगाई है। उन्होंने शिकायत की प्रतियां राज्यपाल, मुख्यमंत्री, गृह मंत्री, पुलिस महानिदेशक और नई दिल्ली के कार्मिक विभाग को भेजी हैं, जो मामले की गंभीरता को दर्शाता है। खेमिन ने संपर्क के लिए अपना नंबर (7909317417) भी साझा किया है, ताकि कोई सहायता मिल सके।

हर्बल लाइफ ठगी का सनसनीखेज खुलासा

इस मामले ने तब और तूल पकड़ा, जब खेमिन ने चंदेश्वरी और उसके साथियों पर हर्बल लाइफ के नाम पर धोखाधड़ी का आरोप लगाया। “ये लोग मल्टी-लेवल मार्केटिंग (एमएलएम) के बहाने लोगों को निवेश का लालच देकर ठगते थे। इस स्कैम की गहराई से जांच होनी चाहिए, ताकि और लोग इसके शिकार न बनें,” उन्होंने मांग की। भारत में हर्बल लाइफ जैसे उत्पादों के नाम पर ठगी के कई मामले पहले भी सामने आ चुके हैं, जहां लोग लाखों रुपये गंवा बैठते हैं।

पुलिस की निष्क्रियता पर सवाल

ढाई महीने बीत जाने के बावजूद, जिला पुलिस ने इस मामले में कोई ठोस कदम नहीं उठाया। न तो कोई गिरफ्तारी हुई, न ही चुराई गई संपत्ति की बरामदगी के प्रयास दिखे। स्थानीय लोगों में इसे लेकर गुस्सा बढ़ रहा है, और इसे पुलिस की लापरवाही माना जा रहा है। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह मामला वैवाहिक विश्वासघात, मानसिक स्वास्थ्य और आर्थिक ठगी की बढ़ती समस्या को उजागर करता है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के अनुसार, छत्तीसगढ़ में पारिवारिक विवादों के कारण आत्महत्या के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन का अनुमान है कि भारत में हर साल 1.7 लाख से अधिक लोग आत्महत्या करते हैं, जिनमें पारिवारिक तनाव एक बड़ा कारण है।

समाज के लिए सबक

दिनेश साहू की यह त्रासदी केवल एक परिवार की कहानी नहीं, बल्कि समाज के लिए एक चेतावनी है। क्या पुलिस अब जागेगी और इस टूटे हुए परिवार को इंसाफ दिलाएगी? या यह शिकायत कागजों में दफन हो जाएगी? यदि आपके पास इस मामले से जुड़ी कोई जानकारी है, तो कृपया महासमुंद पुलिस या खेमिन साहू से संपर्क करें। इस परिवार की पुकार को अनसुना न करें—न्याय के लिए आपकी आवाज उनकी ताकत बन सकती है।