लोहारडीह का महा-कवरेज: जर्जर तंत्र, लाचार सुरक्षा और बदहाल व्यवस्था… क्या यही है महासमुंद का ‘मॉडल विकास’..?
रिपोर्टर मयंक गुप्ता/दिन शनिवार/12 सितंबर 2026
महासमुंद (छत्तीसगढ़)
एक ओर शासन-प्रशासन ग्रामीण क्षेत्रों के सर्वांगीण विकास, शिक्षा के आधुनिकीकरण और सुरक्षा का डंका पीट रहा है, वहीं दूसरी ओर महासमुंद जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाला ग्राम पंचायत लोहारडीह प्रशासनिक उपेक्षा और बदहाली का जीवंत उदाहरण बन चुका है। प्राथमिक सुविधाओं से लेकर सुरक्षा व्यवस्था तक, यहाँ की पूरी व्यवस्था पटरी से उतर चुकी है। विद्यालय प्रशासन और स्थानीय ग्रामीणों द्वारा शासन-प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने के लिए निरंतर मांग पत्र और ज्ञापन सौंपे जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत जस की तस बनी हुई है।
1. एक ही प्रांगण में 5 प्रमुख संस्थान, सुरक्षा ‘शून्य’: असामाजिक तत्वों और चोरों का अड्डा बना परिसर
लोहारडीह ग्राम पंचायत का सबसे संवेदनशील पहलू यह है कि एक ही प्रांगण के भीतर ग्राम पंचायत भवन, आंगनबाड़ी केंद्र, उप स्वास्थ्य केंद्र, शासकीय प्राथमिक शाला भवन तथा शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला भवन संचालित होते हैं।
इतनी बड़ी गतिविधियों वाले इस साझा प्रांगण में बाउंड्रीवाल (अहाता) का न होना एक गंभीर सुरक्षा संकट पैदा कर रहा है।
असामाजिक तत्वों का जमावड़ा: शाम ढलते ही और सभी शासकीय भवनों के बंद होते ही इस लावारिस परिसर में असमाजिक तत्वों की महफिलें सजने लगती हैं।
चोरी और तोड़-फोड़: घेराबंदी न होने का फायदा उठाकर आए दिन यहाँ चोरी-चाकरी और सरकारी संपत्तियों की तोड़-फोड़ की घटनाएं घट रही हैं।
मवेशियों का जमावड़ा: खुले परिसर में पशुओं का निर्बाध प्रवेश रहता है, जिससे स्वच्छता और शांति दोनों भंग होती हैं।
शासकीय शाला विकास एवं प्रबंधन समिति (SMDC) और ग्रामीणों ने कई बार इस गंभीर समस्या को लेकर ज्ञापन सौंपे हैं, किंतु प्रशासन की नींद नहीं टूट रही है।
2. जर्जर दीवारें, उखड़ता प्लास्टर: बदहाली बयां करता ग्राम पंचायत भवन
सुरक्षा के अभाव के साथ-साथ पंचायत व्यवस्था का ढांचा भी पूरी तरह चरमरा गया है। ग्राम पंचायत लोहारडीह का कार्यालय भवन वर्षों से मरम्मत की राह तक रहा है:
संरचनात्मक क्षति: भवन की बाहरी दीवारों से प्लास्टर गिर चुका है और अंदर की ईंटें व छड़ें बाहर झांक रही हैं।
धुंधली पड़ी योजनाएं: दीवारों पर उकेरी गई ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ के लाभार्थियों की सूचियां और अन्य जनकल्याणकारी शासकीय सूचनाएं देख-रेख के अभाव में मिट चुकी हैं।
पारदर्शिता पर सवाल: ग्रामीणों का आरोप है कि रखरखाव और पेंट-पुट्टी के नाम पर कोई कार्य नहीं कराया गया है, जिससे सरकारी योजनाओं की स्पष्ट जानकारी तक लोगों को नहीं मिल पा रही है।
3. शासकीय हाई स्कूल लोहारडीह: बुनियादी सुविधाओं के लिए विधायक से लगाई गुहार
एक ओर प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक शाला परिसर असुरक्षा से जूझ रहा है, वहीं दूसरी ओर शासकीय हाई स्कूल लोहारडीह के विद्यार्थी धूप, बारिश और असुरक्षा के बीच पढ़ाई करने को मजबूर हैं। शाला प्रशासन, प्राचार्य (प्रधान पाठक) और संकुल समन्वयक (संकुल स्रोत केन्द्र समग्र शिक्षा लोहारडीह) ने महासमुंद विधानसभा क्षेत्र के विधायक श्री योगेश्वर राजू सिन्हा को तीन अलग-अलग औपचारिक मांग पत्र सौंपकर बजट स्वीकृत करने की अपील की है।
मजबूत बाउंड्रीवाल निर्माण की मांग: शाला परिसर को सुरक्षित और भयमुक्त शैक्षणिक माहौल देने के लिए चारों ओर अहाता निर्माण हेतु राशि स्वीकृत करने का आग्रह किया गया है।
छायादार सायकल स्टैंड का अभाव: दूर-दराज के गांवों से आने वाले छात्र-छात्राओं की साइकिलें खुले आसमान के नीचे खड़ी रहती हैं। तेज धूप और बारिश के कारण साइकिलें लगातार क्षतिग्रस्त हो रही हैं। विद्यार्थियों की सुविधा हेतु तत्काल सायकल स्टैंड निर्माण की मांग रखी गई है।
प्रार्थना शेड का निर्माण: रोजाना होने वाली सुबह की प्रार्थना सभा और सांस्कृतिक आयोजनों के लिए उपयुक्त शेड न होने से बच्चों को भीषण गर्मी व बारिश में खड़ा होना पड़ता है। मौसम की इस मार से बचाने के लिए प्रार्थना शेड निर्माण की गुहार लगाई गई है।
4. विद्यालयों में दर्ज संख्या, पदस्थ शिक्षक और शिक्षकों की कमी का पूरा विवरण
लोहारडीह के शैक्षणिक संस्थानों की स्थिति और यहाँ पदस्थ शिक्षकों तथा दर्ज छात्र-छात्राओं का आंकड़ा इस प्रकार है:
शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला (मिडिल स्कूल):
प्रधान पाठक तरुण कहार ने बताया कि कक्षा 6वीं से 8वीं तक कुल 178 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। यहाँ सहयोगी शिक्षक नीलिमा गुप्ता, कुलदीप सिंह, डोमन लाल साहू, गणेश टंडन एवं सोमेश्वर प्रसाद पटेल द्वारा अध्यापन कराया जा रहा है।
शासकीय प्राथमिक शाला:
प्रधान पाठक रोमन लाल चंद्राकर के अनुसार कक्षा 1लीं से 5वीं तक 102 बालक-बालिकाएं अध्ययनरत हैं। इन्हें पढ़ाने की जिम्मेदारी सहायक शिक्षिका श्रीमती दुर्गा साहू, श्रीमती मंदाकिनी साहू और श्रीमती प्रभा सूर्यवंशी संभाल रही हैं।
शासकीय हाई स्कूल:
प्राचार्य शिव प्रसाद मरकाम ने बताया कि कक्षा 9वीं एवं 10वीं में कुल 66 विद्यार्थी दर्ज हैं। यहाँ श्रीमती नेहा सिंह (व्याख्याता अंग्रेजी), देवराज सेन (व्याख्याता गणित), श्रीमती हर्षिता चंद्राकर (व्याख्याता विज्ञान), श्रीमती दुर्गा कमार (सहायक शिक्षिका विज्ञान सहायक), नंद किशोर वर्मा (सहायक ग्रेड 2) एवं आकाश यादव (सहायक ग्रेड 3) कार्यरत हैं।
शिक्षकों की कमी से पढ़ाई प्रभावित
प्राचार्य श्री मरकाम ने आगे बताया कि हाई स्कूल में दो शिक्षकों की कमी है, जिसके कारण सामाजिक विज्ञान और संस्कृत जैसे महत्वपूर्ण विषयों के अध्ययन-अध्यापन में भारी बाधा उत्पन्न हो रही है।
कब जागेगा जिम्मेदार प्रशासन..?
लोहारडीह का संपूर्ण परिसर—चाहे वह शिक्षा व्यवस्था हो, स्वास्थ्य केंद्र हो या फिर पंचायत का प्रशासनिक ढांचा—इस समय भारी उपेक्षा का शिकार है। शाला परिवार, SMDC और स्थानीय निवासियों ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि जल्द ही विधायक निधि या शासकीय बजट से अहाता निर्माण, मरम्मत व अन्य विकास कार्यों को स्वीकृति नहीं मिली, तो क्षेत्र का शैक्षणिक और सामाजिक वातावरण पूरी तरह प्रभावित हो जाएगा।
अब देखना यह होगा कि जनहित से जुड़ी इन जायज मांगों और शिक्षकों की कमी दूर करने पर विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा और जनपद प्रशासन क्या त्वरित कदम उठाते हैं, या लोहारडीह के ग्रामीण और नौनिहाल यूँ ही बदहाली के साए में दिन गुजारने को मजबूर रहेंगे।

