महासमुंद जनपद पंचायत में DSC का बड़ा ‘खेल’: समृद्धी शर्मा और महेंद्र वर्मा के इर्द-गिर्द घूमती वित्तीय अनियमितताओं की कहानी..!
विशेष खोजी रिपोर्ट | प्रधान संपादक मयंक गुप्ता / 07 अक्टूबर 2026 /दिन बुधवार
महासमुंद (छत्तीसगढ़)
महासमुंद जिले की पंचायत व्यवस्था में वित्तीय पारदर्शिता, फर्जी बिल-वाउचर और डिजिटल अधिकारों के दुरुपयोग का मामला अब एक विकराल रूप ले चुका है। ग्राम पंचायत बेलसोंडा में 17.60 लाख रुपये के गबन के आरोपों के साथ-साथ जनपद की पुरानी 39 लाख रुपये की जांच फाइलों के बीच एक चौंकाने वाला सच उजागर हो रहा है—पंचायतों के करोड़ों रुपये के बजट और भुगतान प्रणाली की चाबी कथित तौर पर जनपद पंचायत महासमुंद की संकाय शाखा में पदस्थ कर्मचारी श्रीमती समृद्धि शर्मा और उनके सहयोगी महेंद्र कुमार वर्मा के पास केंद्रित है।
यह रिपोर्ट दर्शाती है कि कैसे डिजिटल सिग्नेचर (DSC) और फाइलों के रखरखाव का इस्तेमाल कर पंचायतों के विकास कोष का दुरुपयोग किया जा रहा है।
1. DSC खेल के ‘मास्टरमाइंड’: समृद्धि शर्मा और महेंद्र कुमार वर्मा पर गंभीर आरोप
जनपद पंचायत महासमुंद की संकाय शाखा में कार्यरत श्रीमती समृद्धि शर्मा और महेंद्र कुमार वर्मा की कार्यप्रणाली लंबे समय से विवादों के घेरे में रही है। प्रशासनिक सूत्रों और शिकायतों के आधार पर इस पूरे ‘पेमेंट सिंडिकेट’ के मुख्य सूत्रधार यही दोनों कर्मचारी बताए जा रहे हैं।
डिजिटल सिग्नेचर (DSC) पर अनाधिकृत कब्जा
नियमानुसार सरपंच और सचिव का डिजिटल सिग्नेचर (DSC) संबंधित पंचायत प्रतिनिधियों के अपने पास होना चाहिए। परंतु 04 अगस्त 2026 को प्रस्तुत शिकायत में आरोप लगाया गया है कि श्रीमती समृद्धि शर्मा और महेंद्र कुमार वर्मा कई ग्राम पंचायतों के DSC अपने पास दबाकर रखते हैं।
कोरे व अपूर्ण बिलों पर दबाव बनाकर भुगतान: आरोप है कि DSC अपने कब्जे में रखकर पंचायतों के कोरे व फर्जी बिल-वाउचर तैयार कराए जाते हैं और मनमाने तरीके से राशि आहरित की जाती है।
ब्लैकमेलिंग और धमकियां: यदि कोई सरपंच या सचिव अपना DSC वापस मांगता है, तो उसे पंचायत के अन्य वैध भुगतानों को रोकने या अटकाने की धमकियां दी जाती हैं। यह ‘खेल’ बीते कई सालों से बेधड़क चलाया जा रहा है।
2. बेलसोंडा पंचायत: 313 पन्नों के साक्ष्य और 17.60 लाख की संदिग्ध निकासी
जनपद के इसी ढर्रे का प्रत्यक्ष उदाहरण ग्राम पंचायत बेलसोंडा में देखने को मिला है, जहाँ पूर्व सरपंच श्रीमती भामिनी पोखन चंद्राकर ने 313 पन्नों के प्रामाणिक साक्ष्यों के साथ वर्तमान सरपंच प्रीति ढीमर और सचिव नेहा उपाध्याय के विरुद्ध अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) महासमुंद को शिकायत सौंपी है।
45 लाख में से 17.60 लाख का फर्जीवाड़ा: 15वें वित्त आयोग, मूलभूत मद एवं करों से प्राप्त कुल 45 लाख रुपये में से 17.60 लाख रुपये बिना किसी वैध विकास कार्य या भौतिक सत्यापन के निकाले गए।
पारिवारिक खातों में राशि ट्रांसफर: कथित फर्जी भुगतान सरपंच के पति (त्रिभुवन ढीमर), पुत्र (मोहित ढीमर) की फर्मों, वार्ड पंचों व अन्य रिश्तेदारों के खातों में पहुंचा।
साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका: रिकॉर्ड्स को सुरक्षित रखने हेतु बेलसोंडा पंचायत भवन को तत्काल सील करने की मांग की गई है।
3. 39 लाख का पुराना कोरोना घोटाला: दबाई गईं जांच फाइलें
वर्ष 2019-20 में कोरोना काल के दौरान मास्क, सैनिटाइजर व सामग्री खरीदी के नाम पर हुए 39 लाख रुपये के कथित घोटाले की फाइलें आज भी जिला पंचायत कार्यालय में लंबित हैं।
जनपद CEO मिषा कोसले द्वारा जांच पूरी कर रिपोर्ट जिला पंचायत कार्यालय को सौंप दी गई है।
इसके बावजूद जिला पंचायत CEO एस. आलोक और वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा अंतिम आदेश जारी न होना इस बात का संकेत है कि संकाय शाखा के कर्मचारियों और उनके सहयोगियों को प्रशासनिक संरक्षण मिल रहा है।
4. खैरा-खट्टी विवाद: प्रशासनिक हस्तक्षेप का उदाहरण
24 जून 2026 को आयोजित ग्राम सभाओं के दौरान खैरा-खट्टी पंचायत प्रकरण में सचिव मोती मेहरा पर अपनी मूल पंचायत छोड़कर अपनी पत्नी (सरपंच, खट्टी पंचायत) की बैठक में जाकर हस्तक्षेप करने के आरोप लगे। 06 अगस्त 2026 की प्रशासनिक जांच के बावजूद इसकी रिपोर्ट भी ठंडे बस्ते में डाल दी गई है।
5. महासमुंद प्रशासन से 7 सीधे और तीखे सवाल
श्रीमती समृद्धि शर्मा और महेंद्र कुमार वर्मा के पास विभिन्न पंचायतों के डिजिटल सिग्नेचर (DSC) रखने की अनुमति किस नियम के तहत दी गई..?
2 DSC के जरिए कोरे व अपूर्ण बिलों से फर्जी भुगतान कराने के आरोपों पर संकाय शाखा के इन कर्मचारियों के विरुद्ध अब तक एफआईआर (FIR) या विभागीय जांच क्यों शुरू नहीं हुई..?
3 – 39 लाख रुपये की जांच रिपोर्ट पर अंतिम फैसला लेने में जिला पंचायत प्रशासन को किस बात की अड़चन है..?
4 क्या बेलसोंडा पंचायत के 313 पन्नों के दस्तावेजों के साथ-साथ संकाय शाखा के बैंक खातों और DSC लॉगिन हिस्ट्री की जांच की जाएगी..?
5 क्या जांच प्रभावित होने से बचाने के लिए संदिग्ध कर्मचारियों का तबादला या निलंबन किया जाएगा..?
6 खैरा-खट्टी प्रकरण में 06 अगस्त 2026 को दर्ज बयानों के आधार पर क्या कार्रवाई प्रस्तावित है..?
7 जनपद पंचायत क्षेत्र में वर्षों से चल रहे इस ‘पेमेंट खेल’ में और कौन-कौन से उच्च अधिकारी शामिल हैं..?
निष्कर्ष एवं कानूनी कार्रवाई की चेतावनी
महासमुंद जनपद पंचायत क्षेत्र में शासकीय राशि का बंदरबांट अब बर्दाश्त से बाहर होता जा रहा है। समृद्धि शर्मा और महेंद्र वर्मा जैसे कर्मचारियों द्वारा DSC के नाम पर चलाई जा रही व्यवस्था पर यदि कलेक्टर महासमुंद, आयुक्त (रायपुर संभाग), पंचायत संचालनालय और एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) सख्त रुख नहीं अपनाते हैं, तो शिकायतकर्ता मामले को बिलासपुर उच्च न्यायालय (High Court) ले जाने की तैयारी में हैं।
