महासमुंद में खाकी और हरे तंत्र पर हमला: तमोरा में अतिक्रमणकारियों ने वन अमले को घेरा, रेंजर-डिप्टी रेंजर को 5 घंटे तक बंधक बनाकर पीटा

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महासमुंद में खाकी और हरे तंत्र पर हमला: तमोरा में अतिक्रमणकारियों ने वन अमले को घेरा, रेंजर-डिप्टी रेंजर को 5 घंटे तक बंधक बनाकर पीटा

प्रधान संपादक मयंक गुप्ता/07 अक्टूबर 2026/दिन बुधवार
​महासमुंद। छत्तीसगढ़ के महासमुंद वनमण्डल अंतर्गत बागबाहरा परिक्षेत्र में कानून व्यवस्था और वन सुरक्षा को चुनौती देने वाली एक बेहद सनसनीखेज घटना सामने आई है। आरक्षित वन क्षेत्र के ढोड परिसर (कक्ष क्रमांक 95-96) में अवैध शिकार की सूचना पर गश्त करने पहुंचे वन अमले पर अतिक्रमणकारियों ने जानलेवा हमला कर दिया। इस दौरान भीड़ ने वनपरिक्षेत्राधिकारी (रेंजर) और उपवनक्षेत्रपाल (डिप्टी रेंजर) को बंधक बना लिया और उनके साथ जम कर मारपीट की।

​करीब पांच घंटे तक चले इस हाई-वोल्टेज ड्रामे के बाद पुलिस और वन विभाग की संयुक्त टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद दोनों अधिकारियों को सुरक्षित बाहर निकाला। घटना के बाद से पूरे वन महकमे में दहशत का माहौल है।

​गश्त के दौरान लाठी-डंडों से किया हमला

​मिली जानकारी के अनुसार, 6 अक्टूबर 2026 की रात बागबाहरा वनपरिक्षेत्राधिकारी नवीन वर्मा अपने स्टाफ—उपवनक्षेत्रपाल नवीन शर्मा, वनरक्षक टोमन दीवान, वॉचर महेश चंद्राकर व पूनम साहू तथा चालक हरदेव वर्मा के साथ ढोड परिसर में जंगली सुअर के अवैध शिकार और मांस बिक्री की गुप्त सूचना पर गश्त पर थे।

​इसी दौरान तमोरा क्षेत्र के अतिक्रमणकारियों ने लाठी-डंडों से लैस होकर वन अमले को चारों तरफ से घेर लिया। शराब के नशे में धुत आरोपियों ने अधिकारियों के साथ गाली-गलौज और मारपीट शुरू कर दी। अचानक हुए इस हमले और हमलावरों की भारी संख्या को देखते हुए कुछ कर्मचारियों ने भागकर अपनी जान बचाई, जबकि रेंजर नवीन वर्मा और डिप्टी रेंजर नवीन शर्मा मौके पर ही फंस गए।

​मोबाइल-पर्स छीना, खेत के मकान में 5 घंटे रखा बंधक

​आरोप है कि उपद्रवियों ने दोनों अधिकारियों की बेरहमी से पिटाई की, जिससे वे लहूलुहान हो गए। हमलावरों ने रेंजर का पर्स और डिप्टी रेंजर का मोबाइल फोन भी छीन लिया। इसके बाद दोनों अधिकारियों को जबरन तमोरा वनखंड से लगे एक खेत में स्थित छोटे से मकान में ले जाकर बंद कर दिया गया।

​अधिकारियों को शाम करीब 7:30 बजे से रात 12:30 बजे तक (लगभग 5 घंटे) बंधक बनाकर रखा गया। संकट की इस घड़ी में रेंजर ने किसी तरह व्हाट्सऐप के जरिए उच्च अधिकारियों और बागबाहरा व खल्लारी थाना प्रभारियों को घटना का संदेश भेजा।

​पुलिस सुरक्षा घेरा बनाकर अधिकारियों को कराया मुक्त

​सूचना मिलते ही महासमुंद और बागबाहरा से भारी पुलिस बल तथा वन अमला मौके पर पहुंचा। शुरुआत में परिजनों और ग्रामीणों ने पुलिस की समझाइश को दरकिनार करते हुए अधिकारियों को छोड़ने से साफ इनकार कर दिया और पुलिस टीम के साथ भी बहस की। स्थिति बिगड़ती देख पुलिस और वन अमले ने एक मजबूत सुरक्षा घेरा (कॉर्डन) तैयार किया और दोनों बंधक अधिकारियों को सुरक्षित बाहर निकाला।

​तत्काल दोनों घायलों को डॉक्टरी परीक्षण और इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया। अधिकारियों का कहना है कि यदि समय पर अतिरिक्त बल नहीं पहुंचता तो एक बड़ा हादसा हो सकता था।

​पुरानी रंजिश और अतिक्रमण का विवाद

​इस क्षेत्र में वनभूमि पर अवैध कब्जे को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है:

​मार्च 2026: अतिक्रमण के प्रयासों पर वन विभाग ने अपराध प्रकरण (क्र. 19940/12 से 16) दर्ज किए थे।

​मई 2026: प्लांटेशन की तैयारी के दौरान अमले से मारपीट और शासकीय कार्य में बाधा डालने पर खल्लारी थाने में FIR (क्र. 0055/2026) दर्ज कराई गई थी।

​जुलाई 2026: वनभूमि पर दोबारा जुताई करने तथा सागौन व बाँस के पौधों को नुकसान पहुंचाने पर पुनः 5 मामले (क्र. 19940/17 से 21) दर्ज हुए थे।

​दिसंबर 2025: जिला प्रशासन और पुलिस की मौजूदगी में अतिक्रमणकारियों को सख्त हिदायत भी दी गई थी।

​वैधानिक कार्रवाई जारी, महकमे में आक्रोश

​इस पूरी घटना में शासकीय कार्य में बाधा, जानलेवा हमला, डकैती/छीनझपट, अभद्र व्यवहार और अवैध रूप से बंधक बनाने जैसे गंभीर अपराधों के तहत मामला दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है। पुलिस प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर संलिप्त आरोपियों की पहचान कर रही है।

​वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि इस प्रकार के जानलेवा हमलों के बावजूद वन संपदा और वन्यजीवों की रक्षा के लिए उनका अभियान रुकने वाला नहीं है। विभाग ने आम जनता से भी अपील की है कि वे वन क्षेत्रों में कानून व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें और किसी भी अवैध गतिविधि की सूचना तुरंत प्रशासन को दें।

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