​महासमुंद बिजली विभाग का ‘पंचूराम कनेक्शन’: 12 साल, एक कुर्सी और वसूली के गंभीर आरोप… आखिर कौन दे रहा संरक्षण..?

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​महासमुंद बिजली विभाग का ‘पंचूराम कनेक्शन’: 12 साल, एक कुर्सी और वसूली के गंभीर आरोप… आखिर कौन दे रहा संरक्षण..?

मुख्यमंत्री तक पहुंची शिकायत, बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल; किसानों को ट्रांसफार्मर और कनेक्शन के लिए भटकाने का आरोप, वर्षों के कार्यकाल की उच्चस्तरीय जांच की मांग

प्रधान संपादक मयंक गुप्ता दिन शुक्रवार धनतेरस /
दिनांक 06 नवम्बर 2026 महासमुंद, छत्तीसगढ़।
छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में विद्युत विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। किसानों को समय पर बिजली कनेक्शन नहीं मिलना, खराब ट्रांसफार्मर बदलने में देरी, अधिकारियों की कथित उदासीनता और विभागीय व्यवस्था में वर्षों से एक ही स्थान पर जमे रहने के आरोपों ने पूरे मामले को गंभीर बना दिया है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब शासन की स्थानांतरण नीति में प्रशासनिक पारदर्शिता और कार्यकाल संबंधी दिशा-निर्देश मौजूद हैं, तो आखिर कुछ अधिकारी वर्षों से एक ही क्षेत्र में किस आधार पर पदस्थ बने हुए हैं?

मामले को लेकर अखिल भारतीय प्रशासनिक सुधार परामर्शी संगठन, कोरबा क्षेत्रीय कार्यालय ने मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ शासन को शिकायत भेजकर बिजली विभाग की कार्यप्रणाली की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। संगठन ने आरोप लगाया है कि महासमुंद सहित रायगढ़ रीजन में कुछ अधिकारियों का लंबे समय से प्रभाव बना हुआ है। शिकायत में कथित ठेकेदारी गतिविधियों, पद के दुरुपयोग, किसानों से अवैध वसूली और प्रशासनिक व्यवस्था में अनियमितताओं की जांच की मांग उठाई गई है।

किसानों की मजबूरी या बिजली विभाग की लापरवाही? ट्रांसफार्मर बदलने के लिए भी लगाने पड़ रहे चक्कर!

ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली केवल घरेलू सुविधा नहीं, बल्कि खेती-किसानी की जीवनरेखा है। कृषि पंपों के माध्यम से सिंचाई करने वाले किसानों के लिए समय पर विद्युत कनेक्शन और खराब ट्रांसफार्मर को बदलना बेहद जरूरी है। लेकिन संगठन की शिकायत में आरोप लगाया गया है कि महासमुंद जिले में किसानों को इन बुनियादी कार्यों के लिए भी लंबे समय तक कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।

शिकायत के मुताबिक, कई मामलों में किसानों को
ट्रांसफार्मर उपलब्ध नहीं होने और डिपॉजिट कनेक्शन की प्रक्रिया में देरी का हवाला देकर टालने की बात कही गई है। कुछ किसानों की ओर से कथित तौर पर यह शिकायत भी सामने आई है कि बिना अतिरिक्त पैसे दिए काम आगे नहीं बढ़ता।

यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह केवल विभागीय लापरवाही का मामला नहीं होगा, बल्कि किसानों के अधिकारों और सरकारी व्यवस्था की जवाबदेही से जुड़ा गंभीर विषय होगा।

आखिर किसानों को अपनी ही जरूरत के लिए बार-बार अधिकारियों के सामने गुहार क्यों लगानी पड़ रही है? क्या विभाग के पास खराब ट्रांसफार्मर बदलने और नए कनेक्शन जारी करने की कोई समयबद्ध व्यवस्था नहीं है? इन सवालों का जवाब विभागीय अधिकारियों को देना चाहिए।

वेतन सरकारी, लेकिन कामकाज पर ठेकेदारी का आरोप! आखिर किसके संरक्षण में चल रहा कथित खेल?

शिकायत में एक और गंभीर आरोप लगाया गया है कि विभाग के कुछ अधिकारी अपने नियमित शासकीय दायित्वों के बजाय ठेकेदारी जैसी गतिविधियों में कथित रूप से रुचि ले रहे हैं। संगठन ने मांग की है कि संबंधित अधिकारियों की संपत्ति, कार्यकाल, विभागीय निर्णयों और ठेकेदारों के साथ उनके संभावित संबंधों की निष्पक्ष जांच कराई जाए।

सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या सरकारी सेवा में पदस्थ अधिकारी किसी भी प्रकार की निजी ठेकेदारी या व्यावसायिक गतिविधि में संलिप्त हैं? यदि ऐसा है, तो संबंधित सेवा नियमों के तहत इसकी जांच और जवाबदेही तय होनी चाहिए।

हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और किसी भी अधिकारी की दोषसिद्धि अभी जांच का विषय है। इसलिए विभागीय दस्तावेजों, वित्तीय अभिलेखों, कार्यादेशों और भुगतान प्रक्रिया की जांच इस पूरे मामले में महत्वपूर्ण होगी।

दस से बारह वर्षों तक एक ही जिले में पदस्थापना! स्थानांतरण नीति आखिर किसके लिए?

शिकायत का एक प्रमुख मुद्दा अधिकारियों का लंबे समय तक एक ही स्थान पर बने रहना है। संगठन का दावा है कि महासमुंद जिले में कुछ अधिकारी लगभग 10 से 12 वर्षों से एक ही क्षेत्र में पदस्थ हैं।

संगठन ने ऊर्जा विभाग की स्थानांतरण नीति और तीन वर्ष के कार्यकाल से संबंधित दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए सवाल उठाया है कि जब प्रशासनिक व्यवस्था में स्थानांतरण और पदस्थापना के स्पष्ट प्रावधान हैं, तो उनका पालन क्यों नहीं हो रहा?

क्या संबंधित अधिकारियों के लंबे कार्यकाल को लेकर विभाग ने कोई विशेष प्रशासनिक आदेश जारी किया है? क्या इनके स्थानांतरण पर कभी विचार किया गया? यदि किया गया, तो उस पर अमल क्यों नहीं हुआ.?

इन सवालों का जवाब विभागीय रिकॉर्ड और शासन के आदेशों से ही सामने आ सकता है। संगठन ने संबंधित अधिकारियों के पूरे सेवाकाल और पदस्थापना का रिकॉर्ड सार्वजनिक जांच के दायरे में लाने की मांग की है।

मनीष तनेजा के अतिरिक्त प्रभार पर सवाल, रायगढ़ रीजन में प्रशासनिक व्यवस्था की जांच की मांग

शिकायत में अतिरिक्त मुख्य अभियंता मनीष तनेजा का नाम भी प्रमुखता से उठाया गया है। संगठन के आरोप के अनुसार, वे लगभग 20 महीनों से रायगढ़ रीजन में मुख्य अभियंता का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे हैं।

संगठन ने सवाल उठाया है कि इतने लंबे समय से किसी महत्वपूर्ण पद पर नियमित पदस्थापना के स्थान पर अतिरिक्त प्रभार की व्यवस्था क्यों जारी है?

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि उनके प्रभाव के कारण रीजन में अधिकारियों की पदोन्नति और पदस्थापना से संबंधित निर्णय प्रभावित हो रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि के लिए विभागीय पदस्थापना आदेश, अतिरिक्त प्रभार की स्वीकृति, पदोन्नति संबंधी रिकॉर्ड और प्रशासनिक निर्णयों की जांच आवश्यक है।

यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि अतिरिक्त प्रभार किस आदेश के तहत दिया गया और उसकी निरंतरता के पीछे प्रशासनिक कारण क्या हैं।

महासमुंद के कार्यपालन यंत्री पंचूराम वर्मा पर भी उठे सवाल, दस साल के कार्यकाल की जांच की मांग

महासमुंद में पदस्थ कार्यपालन यंत्री पंचूराम वर्मा की कार्यप्रणाली को लेकर भी संगठन ने गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई हैं।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि वे लंबे समय से महासमुंद में पदस्थ हैं और विभागीय कार्यों के संचालन में अपेक्षित सक्रियता नहीं दिखाई जा रही है। संगठन ने उनके मुख्यालय में नियमित उपस्थिति, किसानों की शिकायतों के निराकरण, ट्रांसफार्मर बदलने की प्रक्रिया तथा नए विद्युत कनेक्शन जारी करने में हुई देरी की जांच कराने की मांग की है।

इसके अलावा शिकायत में यह आरोप भी लगाया गया है कि वे अधिकांश समय मुख्यालय से बाहर रहते हैं और आम नागरिकों की समस्याओं पर समयबद्ध प्रतिक्रिया नहीं देते।

यदि संबंधित अधिकारी के विरुद्ध अवैध वसूली अथवा ठेकेदारी में संलिप्तता के आरोप लगाए गए हैं, तो उनकी जांच स्वतंत्र एजेंसी अथवा सक्षम विभागीय जांच दल से कराई जानी चाहिए। आरोपों की सत्यता दस्तावेजी साक्ष्यों और निष्पक्ष जांच के बाद ही तय हो सकती है।

विभागीय मेंटेनेंस पर सवाल, बार-बार बिजली गुल होने से आम जनता परेशान

बिजली व्यवस्था में लगातार होने वाले व्यवधान और रखरखाव संबंधी शिकायतें भी ग्रामीण क्षेत्रों में चिंता का विषय हैं। किसानों को सिंचाई के लिए निर्बाध विद्युत आपूर्ति चाहिए, वहीं आम उपभोक्ताओं को भी समय पर शिकायत निराकरण और बेहतर सेवाओं की अपेक्षा रहती है।

ऐसे में यदि बिजली आपूर्ति, लाइन मेंटेनेंस, ट्रांसफार्मर बदलने और शिकायतों के निराकरण में लगातार देरी हो रही है, तो इसकी जवाबदेही तय करना जरूरी है।

विभाग को यह बताना चाहिए कि महासमुंद जिले में पिछले वर्षों के दौरान कितने ट्रांसफार्मर खराब हुए, कितने निर्धारित समय में बदले गए, कितने कृषि पंप कनेक्शन लंबित हैं और उपभोक्ताओं की कितनी शिकायतों का निराकरण किया गया।

केवल आश्वासन से व्यवस्था नहीं सुधरेगी। जरूरत है कि विभागीय आंकड़ों को सार्वजनिक कर जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।

मुख्यमंत्री से संगठन की प्रमुख मांगें

अखिल भारतीय प्रशासनिक सुधार परामर्शी संगठन ने मुख्यमंत्री से शिकायत के माध्यम से निम्नलिखित मांगें उठाई हैं—

1 महासमुंद एवं रायगढ़ रीजन में संबंधित अधिकारियों के संपूर्ण पदस्थापना कार्यकाल की जांच कराई जाए।

2 कथित ठेकेदारी गतिविधियों और पद के दुरुपयोग के आरोपों की स्वतंत्र जांच हो।

3 किसानों से ट्रांसफार्मर बदलने, नए कनेक्शन और अन्य विद्युत कार्यों के नाम पर कथित अवैध वसूली की शिकायतों की जांच कराई जाए।

4 संबंधित अधिकारियों की संपत्ति, विभागीय कार्यादेशों, ठेकेदारों से संभावित संबंधों और भुगतान संबंधी अभिलेखों की जांच की जाए।

5 मनीष तनेजा के अतिरिक्त प्रभार की वैधता और उसके प्रशासनिक औचित्य की समीक्षा की जाए।

6 कार्यपालन यंत्री पंचूराम वर्मा के लंबे कार्यकाल, मुख्यालय में उपस्थिति और विभागीय कार्यों की समीक्षा की जाए।

7 स्थानांतरण नीति एवं शासन के दिशा-निर्देशों के अनुरूप आवश्यक प्रशासनिक निर्णय लिए जाएं।

8 जांच में आरोप प्रमाणित होने पर संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।

अब देखना होगा, शिकायत पर शासन की कार्रवाई कब..?

महासमुंद बिजली विभाग से जुड़ा यह मामला अब केवल अधिकारियों की पदस्थापना तक सीमित नहीं रह गया है। इसमें किसानों की परेशानी, आम उपभोक्ताओं की शिकायतें, विभागीय पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही जैसे कई महत्वपूर्ण पहलू सामने आए हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या शासन इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष जांच कराएगा? क्या वर्षों से एक ही स्थान पर पदस्थ अधिकारियों के कार्यकाल की समीक्षा होगी? क्या कथित अवैध वसूली और ठेकेदारी के आरोपों की सच्चाई सामने आएगी..?

फिलहाल संगठन की शिकायत के बाद निगाहें शासन और ऊर्जा विभाग के अगले कदम पर टिकी हैं। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि किसानों और आम नागरिकों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तथा शिकायत पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो जनहित में आंदोलन किया जाएगा।

अब सवाल मुख्यमंत्री और ऊर्जा विभाग से है—बिजली विभाग में जवाबदेही तय होगी या वर्षों से चली आ रही व्यवस्था यूं ही चलती रहेगी..?

प्रधान संपादक मयंक गुप्ता बेबाक बयान न्यूज हर बात खुलकर, हर राज खुलकर।

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