महासमुंद पुलिस तबादला आदेश पर सवाल
एसपी के तबादला आदेश पर बड़ा सवाल..!
आदेश में बसना ट्रांसफर, फिर भी महासमुंद सिटी कोतवाली में जमे प्रधान आरक्षक हरिश कुमार कंवर
महीनों बाद भी नहीं हुई रवानगी..? दूसरे जवानों ने माना आदेश, एक कर्मचारी को क्यों मिली अलग छूट—पुलिस प्रशासन से जवाब की मांग
प्रधान संपादक मयंक गुप्ता/ 09 अक्टूबर 2026 / दिन शुक्रवार
महासमुंद (छत्तीसगढ़)।
महासमुंद जिला पुलिस प्रशासन में जारी स्थानांतरण आदेश के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। पुलिस अधीक्षक कार्यालय से जारी स्थानांतरण आदेश क्रमांक पुअ/महा/स्था/एम-2315/26, दिनांक 20 मार्च 2026 में थाना महासमुंद में पदस्थ प्रधान आरक्षक हरिश कुमार कंवर, बैज नंबर 871 का स्थानांतरण थाना बसना किया गया था। दस्तावेज में स्थानांतरित कर्मचारियों को नवीन पदस्थापना स्थल के लिए रवानगी देने तथा आमद की सूचना कार्यालय को भेजने संबंधी निर्देश भी दर्ज बताए जा रहे हैं।
लेकिन उपलब्ध जानकारी और लगाए गए आरोपों के मुताबिक, आदेश जारी होने के कई माह बाद भी हरिश कुमार कंवर महासमुंद सिटी कोतवाली में ही कार्यरत बताए जा रहे हैं। यदि यह स्थिति सही है, तो मामला केवल एक कर्मचारी के स्थानांतरण का नहीं, बल्कि वरिष्ठ अधिकारी के लिखित आदेश के अनुपालन और पुलिस विभाग की प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ जाता है।
स्थानांतरण सूची में क्रमांक 07 पर दर्ज है नाम
पुलिस अधीक्षक कार्यालय की बताई जा रही स्थानांतरण सूची में सरल क्रमांक 07 पर प्रधान आरक्षक हरिश कुमार कंवर का नाम दर्ज है। आदेश के अनुसार उनकी नवीन पदस्थापना थाना बसना की गई थी।
स्थानांतरण आदेशों का उद्देश्य पुलिस बल में प्रशासनिक आवश्यकता, कार्य-वितरण और विभागीय अनुशासन बनाए रखना होता है। ऐसे में यदि किसी कर्मचारी की रवानगी किसी कारण से रोक दी गई हो, तो उसके पीछे सक्षम अधिकारी का स्पष्ट आदेश या विधिवत संशोधन होना अपेक्षित है।
यहीं से सबसे बड़ा सवाल सामने आता है—यदि स्थानांतरण आदेश प्रभावी था, तो उसकी अनुपालना क्यों नहीं हुई..?
क्या रवानगी रोकी गई या आदेश में हुआ कोई संशोधन..?
इस पूरे मामले में पुलिस प्रशासन के सामने कुछ सीधे और महत्वपूर्ण प्रश्न हैं।
क्या प्रधान आरक्षक हरिश कुमार कंवर को स्थानांतरण आदेश के बावजूद महासमुंद में कार्य करने की अनुमति किसी सक्षम अधिकारी ने दी..?
क्या उनकी रवानगी स्थगित करने या स्थानांतरण संशोधित करने का कोई लिखित आदेश जारी हुआ
.?
यदि ऐसा कोई आदेश जारी हुआ है तो उसकी प्रति सार्वजनिक अथवा विभागीय रिकॉर्ड में उपलब्ध क्यों नहीं है..?
और यदि ऐसा कोई आदेश नहीं हुआ, तो फिर स्थानांतरण के महीनों बाद भी संबंधित कर्मचारी पुरानी पदस्थापना पर किस आधार पर कार्य कर रहे हैं..?
इन सवालों का स्पष्ट उत्तर ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति सामने ला सकता है।
बाकी कर्मचारियों ने माना आदेश, फिर इस मामले में स्थिति अलग क्यों..?
स्थानांतरण सूची में शामिल अन्य पुलिसकर्मियों के संबंध में विभागीय स्तर पर नवीन पदस्थापना पर आमद की प्रक्रिया पूरी होने की बात सामने आती रही है। ऐसे में एक ही आदेश में शामिल किसी कर्मचारी के मामले में अलग स्थिति होने पर स्वाभाविक रूप से प्रशासनिक समानता और आदेश पालन को लेकर सवाल उठते हैं।
पुलिस विभाग अनुशासन आधारित व्यवस्था है। निचले स्तर के कर्मचारी यदि स्थानांतरण आदेश का पालन करते हैं, तो वरिष्ठ अधिकारियों के लिखित आदेशों के पालन की अपेक्षा प्रत्येक कर्मचारी से समान रूप से की जाती है।
इसी कारण यह मामला अब विभागीय निगरानी के दायरे में आने की मांग कर रहा है।
ASP से पक्ष जानने का प्रयास, स्पष्ट जवाब का इंतजार
मामले में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक से संबंधित कर्मचारी की वर्तमान पदस्थापना, स्थानांतरण आदेश के पालन तथा रवानगी की स्थिति को लेकर पक्ष जानने का प्रयास किए जाने की बात सामने आई है।
यदि विभाग के पास रवानगी रोकने, स्थानांतरण संशोधित करने अथवा किसी विशेष प्रशासनिक कारण से कर्मचारी को वर्तमान स्थान पर बनाए रखने का वैध आदेश है, तो उसे स्पष्ट किया जाना चाहिए।
वहीं यदि ऐसा कोई आदेश नहीं है, तो पुलिस अधीक्षक कार्यालय द्वारा जारी मूल स्थानांतरण आदेश के अनुपालन की स्थिति की विभागीय जांच होना स्वाभाविक प्रशासनिक प्रक्रिया होगी।
मामले में इन बिंदुओं की जांच जरूरी
इस पूरे प्रकरण में निष्पक्ष जांच के लिए पुलिस प्रशासन निम्न रिकॉर्ड की जांच कर सकता है—
20 मार्च 2026 के स्थानांतरण आदेश की मूल प्रति।
प्रधान आरक्षक हरिश कुमार कंवर की रवानगी संबंधी प्रविष्टि।
थाना बसना में उनकी आमद संबंधी रिकॉर्ड।
सिटी कोतवाली महासमुंद की उपस्थिति एवं ड्यूटी रजिस्टर।
स्थानांतरण रोकने अथवा संशोधित करने संबंधी कोई लिखित आदेश।
रक्षित केंद्र/आरआई स्तर से जारी रवानगी संबंधी दस्तावेज।
संबंधित अधिकारी द्वारा आदेश अनुपालन की रिपोर्ट।
इन दस्तावेजों की जांच से यह स्पष्ट हो सकता है कि मामला प्रशासनिक प्रक्रिया में हुई चूक का है अथवा किसी सक्षम आदेश के कारण संबंधित कर्मचारी की पदस्थापना यथावत रखी गई।
अब एसपी कार्यालय की कार्रवाई पर नजर
इस प्रकरण ने जिला पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। यदि स्थानांतरण आदेश प्रभावी होने के बावजूद उसकी अनुपालना नहीं हुई है, तो विभागीय स्तर पर इसकी वजह स्पष्ट होना आवश्यक है।
वहीं यदि हरिश कुमार कंवर को महासमुंद में ही बनाए रखने के लिए कोई सक्षम आदेश जारी हुआ है, तो उस आदेश की स्थिति भी स्पष्ट की जानी चाहिए, ताकि अनावश्यक भ्रम की स्थिति समाप्त हो।
मुद्दा किसी एक कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग भर का नहीं, बल्कि पुलिस विभाग के लिखित प्रशासनिक आदेशों की पारदर्शी अनुपालना का है।
अब देखना होगा कि पुलिस अधीक्षक कार्यालय इस मामले में उपलब्ध रिकॉर्ड की जांच कर स्थिति स्पष्ट करता है या नहीं।
बेबाक बयान का सवाल सीधा है—यदि स्थानांतरण आदेश लागू था, तो रवानगी क्यों नहीं हुई? और यदि रवानगी रोकने का आदेश था, तो वह आदेश किस सक्षम अधिकारी ने जारी किया..?
इन दोनों सवालों का आधिकारिक जवाब ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने ला सकता है।
