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सिरपुर जंगल में चोर गिरोह फिर हुये सक्रिय

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पूजा अर्चना कर गड़े धन निकालने के फिराक में

क्या वर्तमान सरकार इस बार ठोस कदम उठाएगी या फिर टाय टाय फीस

पूर्व विधायक विनोद चंद्राकर ने किया था वर्तमान निकम्मी सरकार का विरोध कार्यवाही शून्य

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुंद / सिरपुर में खजाना चोर गिरोह फिर से सक्रिय हो गए है बता दे कि, बीते वर्ष 26 जून 2024 की दरम्यानी रात सिरपुर नगरी की जिस जंगल की जेसीबी से खुदाई की गई थी।
खुदाई के दौरान जमीन के अंदर से बेशकीमती मूर्ति निकली। साथ ही साथ गड़ा धन भी निकला था ऐसा सूत्रों का मानना है । जमीन के अंदर से निकले बेशकीमती धरोहर को चोर अपने साथ ले गए थे जबकि जिस जेसीबी ने खुदाई की गई थी,उसे वनविभाग ने जब्त कर लिया था किंतु जेसीबी कौन लाया,खुदाई किसने करवाई और राष्ट्रीय धरोहर को किसने लूटा इसे लेकर पुलिस के हाथ अब तक कुछ नहीं मिला।

नाकाम मंसूबे ने चोरों के हौसले फिर बुलंद किए

एक साल बीतने पश्चात जिस जगह में जेसीबी से खुदाई की गई थी और चोर गिरोह भाग खड़े थे फिर से उसी जगह गड़े धन की चाह ने चोरों के हौसले बुलंद कर दिए है। जिसका ताजा प्रमाण हमको देखने को मिला है ठीक उसी जगह में जहां खुदाई की गई थी वहां पर तंत्र मंत्र की पूजा संपन्न की गई है। अब इन चोरों के गिरोह को सही समय मिलने की प्रतीक्षा में टकटकी लगाए बैठे हुए है।

सूत्रों की माने तो राजनीतिक संरक्षण पाकर ही चोर गिरोह ने इस हरकत को अंजाम दिया था।

जिनका पुरजोर विरोध महासमुंद विधानसभा के पूर्व विधायक विनोद चंद्राकर

पूर्व विधायक ने भाजपा सरकार पर सवाल खड़े किए थे। पूर्व विधायक श्री चंद्राकर की माने तो विश्व धरोहर के प्रतिबंधित क्षेत्र पर जेसीबी से खुदाई होना सरकार की विफलता का प्रमाण है। खुदाई के बाद पुरातन काल की मूर्तियां और अवशेषों को चोरी करके ले जाना महासमुंद जिले के लिये शर्म की बात है।

”जेसीबी जब्ती के बाद भी अवैध उत्खनन करने वालों पर कार्रवाई नहीं होना कहीं ना कहीं इस बात के संकेत दे रहा है कि, इस काम में संलिप्त लोगों को सत्ता पक्ष के प्रभावशाली लोगों का संरक्षण मिला हुआ है।

वनविभाग का दावा नहीं मिला खजाना

आपको बता दें कि, सिरपुर क्षेत्र में गड़ा धन खोजने के लिए खुदाई की ये पहली घटना नहीं है.पहले भी महासमुंद में कई लोगों को खजाना खोजते दबोचा गया है। वनविभाग और पुरात्तव विभाग दोनों अपनी गलतियां एक दूसरे पर थोपने का काम कर रही है। किसी को भी इस बात की चिंता नहीं है कि जिस जगह का नाम विश्व धरोहर की नगरी में शामिल है.वो आज चोरों और लुटेरों से त्रस्त है। दुख की बात तो ये है कि, जिनके जिम्मे सरकार ने सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी है,वो खुद ही लापरवाह बने हैं। वहीं इस पूरे मामले में वन विभाग कार्रवाई का राग अलाप कर अपना काम पूरा करने का दावा कर रहा है। ऐसा वनविभाग का दावा है कि खुदाई के दौरान कुछ भी नहीं मिला था।

सिरपुर के जंगल में जेसीबी मशीन से खुदाई की जानकारी मिली तो वन विभाग की टीम त्वरित मौके पर पहुंची तो चोर जेसीबी छोड़ भाग निकले थे। अभी आगे की जांच जारी है.वन परिक्षेत्र के अंदर अवैध खुदाई पाए जाने पर वन विभाग अधिनियम के तहत कार्रवाई की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

सिरपुर के घने जंगलों में, घनचक्करों का डेरा – क्या है मंजर..! और क्या होगा माजरा …!!

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संकट में है सिरपुर धरोहर की नगरी आखिर किसकी नजर गड़ी हुई है..?

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुंद / सिरपुर छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक और धार्मिक पर्यटन नगरी सिरपुर इन दिनों एक बेहद रहस्यमयी और डरावने घटनाक्रम से गुजर रही है। प्राचीन अवशेषों, बुद्ध विहारों और धार्मिक विरासत के लिए प्रसिद्ध सिरपुर के घने जंगलों में अब तंत्र-मंत्र की भयावह छाया मंडरा रही है। जंगलों के अंदर, जहां सिर्फ पक्षियों की चहचहाहट और पत्तों की सरसराहट सुनाई देती थी, अब वहां तांत्रिकों के तंत्र तांडव की कहानियां गूंज रही हैं।

जंगल में मिले तांत्रिक पूजा के अवशेष!
आज सिरपुर के कुछ जागरूक युवाओं ने सिरपुर चौकी में एक चौंकाने वाली शिकायत दर्ज कराई। उनके अनुसार, जंगलों में रात के अंधेरे में अज्ञात लोग किसी प्रकार की रहस्यमयी गतिविधियों को अंजाम दे रहे थे। जब स्थानीय युवाओं ने साहस कर उस स्थान का निरीक्षण किया, तो वहां तांत्रिक पूजा संबंधित काले कपड़े, रक्त से सनी मिट्टी, लोटा, नींबू, हड्डियों,माला,मिठाई,चारों कोनो में हल्दी,आटा,आईना,बिंदी जैसे तांत्रिक उपकरण,और जानवरों की बलि के प्रमाण मिले।

यह पहली बार नहीं है जब सिरपुर के जंगलों में तांत्रिक गतिविधियों की खबरें सामने आई हैं। इससे पहले भी यहां अज्ञात तंत्र क्रियाओं के प्रमाण मिल चुके हैं।

खुदाई में निकले प्राचीन अवशेष, फिर भी लापरवाही!

स्थानीय नागरिकों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार पूर्व में जेसीबी मशीन द्वारा की जा रही खुदाई के दौरान कुछ पुरातात्विक अवशेषों के दर्शन हुए, जिनमें ईंटों की बनी संरचनाएं, मूर्तियों के टुकड़े और जलहरी जैसी संरचना, मिट्टी के पात्र जैसे प्राचीन अवशेष शामिल थे।

स्थानीय युवाओं ने तुरंत वन विभाग को सूचना दी, जिसके बाद जेसीबी मशीन को जब्त कर लिया गया था। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह उठता है — क्या उस खुदाई स्थल को संरक्षित किया गया? जवाब है — नहीं!

आज भी वह खुदाई स्थल बिना किसी सुरक्षा के खुला पड़ा है, जहां किसी भी बाहरी तत्व द्वारा छेड़छाड़ की जा सकती है। यह स्थिति छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर के लिए एक बड़ा खतरा बन चुकी है।

पर्यटन विभाग की चुप्पी पर उठे सवाल
सिरपुर को छत्तीसगढ़ सरकार ने ‘बौद्ध पर्यटन सर्किट’ का हिस्सा घोषित कर रखा है। यहां हर साल देश-विदेश से हजारों पर्यटक आते हैं, लेकिन जब सिरपुर के ठीक पास के जंगलों में तांत्रिक गतिविधियां हो रही हों, खुदाई के बाद पुरातत्विक धरोहरें खुली पड़ी हों और प्रशासन चुप बैठा हो, तो सवाल उठते हैं।

क्या पर्यटन विभाग इतना असंवेदनशील हो गया है?
क्या सिरपुर की ऐतिहासिक पहचान को किसी रहस्यमयी ताकत के हाथों सौंप दिया गया है?
क्या तंत्र-मंत्र की ये गतिविधियां पुरातत्विक खजाने की खोज से जुड़ी हैं या इसके पीछे कोई और गहरी साजिश है?

ग्रामीणों में भय का माहौल
स्थानीय निवासियों के बीच अब गहरा भय और असुरक्षा का माहौल है। कई लोगों ने बताया कि शाम ढलने के बाद जंगल की ओर जाना अब उन्हें असंभव सा लगता है।

सिरपुर के उपसरपंच राजेश ठाकुर ने बताया, “हमने वहां जो देखा, वो किसी हॉरर फिल्म से कम नहीं था। जंगल के बीचोबीच गड्ढा खोदा गया था, चारों तरफ तांत्रिक पूजा की सामग्री फैली हुई थी। साफ है कि कोई बड़ी ताकत उस जगह का दुरुपयोग कर रही है।”

चौकी में शिकायत, कार्रवाई शून्य!

सिरपुर के युवाओं ने तांत्रिक गतिविधियों के खिलाफ स्थानीय सिरपुर चौकी में आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि अब तक कोई ठोस कार्रवाई या जांच की दिशा में पहल नहीं हुई है। न ही उस स्थल को सील किया गया, न ही पुरातत्व विभाग को सूचित किया गया, और न ही किसी संदिग्ध की पहचान हो सकी है।

विशेषज्ञों की चेतावनी
पुरातत्व विशेषज्ञों का मानना है कि सिरपुर की भूमि के नीचे ऐतिहासिक सभ्यताओं के अनगिनत रहस्य छिपे हो सकते हैं। यह इलाका कभी प्राचीन काल में शैव, बौद्ध और वैष्णव परंपराओं का मिलन स्थल था। यदि वहां अनियंत्रित खुदाई या तांत्रिक प्रयोग होते रहे, तो इससे न केवल धरोहर को नुकसान पहुंचेगा, बल्कि भविष्य की पीढ़ियां इतिहास के इस अमूल्य अध्याय से वंचित रह जाएंगी।

क्या कहता है प्रशासन?
अब तक जिला प्रशासन या पर्यटन विभाग की ओर से कोई भी औपचारिक बयान सामने नहीं आया है। यही चुप्पी पूरे प्रकरण को और भी संदिग्ध बना रही है।

लोगों की मांग है कि

उस क्षेत्र को तत्काल सुरक्षित क्षेत्र घोषित किया जाए।

तांत्रिक गतिविधियों की जांच के लिए विशेष टीम गठित की जाए।

खुदाई स्थल को पुरातत्व विभाग के हवाले किया जाए।

जंगल में नियमित गश्त और निगरानी की व्यवस्था हो।

अंत में एक सवाल…
सिरपुर, जो कभी ज्ञान और संस्कृति का केन्द्र था, क्या आज अंधविश्वास और तंत्र-मंत्र की गिरफ्त में जा रहा है?

छत्तीसगढ़ सरकार, पर्यटन विभाग, पुरातत्व विभाग और जिला प्रशासन — सबकी चुप्पी आज सवालों के घेरे में है। अगर अब भी नींद नहीं टूटी, तो शायद सिरपुर के जंगलों से सिर्फ पुरातत्विक धरोहर नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक आत्मा भी खो जाएगी।

“क्या तंत्र की छाया में दफन हो जाएगी सिरपुर की इतिहास गाथा?”
— यह सवाल अब हर जागरूक नागरिक को खुद से पूछना होगा।

झूठे आरोप और भ्रष्ट साज़िश: मधु तिवारी को फंसाने की गहरी चाल उजागर, हाईकोर्ट जाएंगी पीड़िता

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*रविवार को खोला गया कार्यालय! मधु तिवारी की सेवा समाप्ति में बैकडेट की बू…*

*राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन का राज्य कार्यालय अवकाश के दिन ‘खुला’, आदेश की वैधता पर सवाल*

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
धमतरी / छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में स्वास्थ्य विभाग से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें विभाग की भर्ती प्रक्रिया में अनियमितता के झूठे आरोप, और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के उल्लंघन का आरोप लगा है। इस पूरे मामले में एक अकेली महिला कर्मचारी मधु तिवारी को बलि का बकरा बनाया गया, जबकि पूरी चयन समिति और शीर्ष अधिकारियों की भूमिका पर कोई सवाल नहीं उठाया गया।

स्वास्थ्य विभाग में एक महिला कर्मचारी को सुनियोजित तरीके से झूठे आरोपों में फंसाने और मानसिक प्रताड़ना देने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोप है कि पहले एक अपराधिक मामले में जेल जा चुके टोमन कौशिक ने रिहाई के बाद मधु तिवारी के खिलाफ आरटीआई डालनी शुरू की और झूठे आरोप लगाकर उसका करियर खराब करने की कोशिश की। मामले में चौंकाने वाली बात यह है कि इस साज़िश में धमतरी के सीएमएचओ डॉ. यू.एल कौशिक और डीपीएम डॉ. प्रिया कँवर की भूमिका भी सामने आई है। बताया जा रहा है कि टोमन कौशिक को विभाग से निकाले जाने के बावजूद दोबारा नौकरी पर रखा गया और उसकी नियुक्ति में प्रक्रियाओं को नजरअंदाज़ किया गया।

*चयन समिति ही जांचकर्ता बन गई*

शिकायतकर्ता ने जिस भर्ती में कथित अनियमितता का आरोप लगाया है उसके चयन समिति ने भर्ती प्रक्रिया को अंजाम दिया, उसी से जांच भी करवा ली गई, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है। यही नहीं, जांच रिपोर्ट राज्य कार्यालय भेजते समय तत्कालीन सीएमएचओ डॉ.डीके तुर्रे का बयान तक नहीं लिया गया और अधूरी जानकारी भेजी गई। यह मामला न सिर्फ विभागीय भ्रष्टाचार को उजागर करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि किस तरह से व्यक्तिगत दुश्मनी और पद के दुरुपयोग के ज़रिए एक महिला कर्मचारी को मानसिक और पेशेवर रूप से निशाना बनाया गया।

*बर्खास्त टोमन कौशिक की वापसी और झूठे आरोपों की शुरुआत*

सूत्रों के अनुसार, विभाग से निकाले गए कर्मचारी टोमन कौशिक, जो एक आपराधिक मामले में जेल जा चुका है, ने रिहाई के बाद मधु तिवारी के खिलाफ आरटीआई डालना और झूठे आरोप लगाना शुरू किया। इस साजिश में सीएमएचओ डॉ. यूएल कौशिक और डीपीएम डॉ. प्रिया कँवर की भूमिका भी संदेह के घेरे में है, क्योंकि इन्हीं अफसरों ने टोमन को फिर से विभाग में नौकरी दिलाई, और तत्कालीन कलेक्टर नम्रता गांधी तक को गुमराह किया। नम्रता गांधी से टोमन कौशिक को मिले कार्य सुधार नोटिस को छिपाया गया और उसका काम अच्छा है यह झूठी जानकारी दी गई।

*चयन समिति बनी जांचकर्ता – न्याय की हत्या?*

जिस भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितता के आरोप लगे हैं, उसका संचालन चयन समिति ने किया था, जिसमें: तत्कालीन सीएमएचओ डॉ डी.के तुर्रे, डीपीएम राजीव बघेल और समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। चौंकाने वाली बात यह है कि उसी चयन समिति के डॉ.विजय फुलमाली, डॉ.टीआर ध्रुव, डीपीएम प्रिया कंवर को ही जांच सौंप दी गई, जो स्पष्ट रूप से प्राकृतिक न्याय (Natural Justice) के खिलाफ है। बाद में डीपीएम प्रिया कंवर ने खुद को जांच से अलग करने पत्र दिया था। उसके बाद डॉ.विजय फुलमाली और डॉ.टीआर ध्रुव की बनाई कथित जांच रिपोर्ट को ही राज्य कार्यालय भेज दिया गया।

*”एक व्यक्ति अपने ही निर्णय का न्याय नहीं कर सकता।”*

एक ही कर्मचारी पर दोष क्यों? यदि चयन प्रक्रिया में गड़बड़ी थी, तो सवाल यह उठता है कि — क्या सिर्फ मधु तिवारी उस पूरी प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती थीं? फिर चयन समिति, तत्कालीन सीएमएचओ, और डीपीएम को जिम्मेदार क्यों नहीं ठहराया गया? क्यों इनके खिलाफ कोई जांच या कार्रवाई नहीं हुई?

*कार्रवाई पर संदेह क्यों?*

रविवार को सेवा समाप्ति आदेश जारी:
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन का राज्य कार्यालय सामान्यत: अवकाश के दिन बंद रहता है, लेकिन मधु तिवारी की सेवा समाप्ति का आदेश रविवार को जारी किया गया — स्पष्ट संकेत कि आदेश बैकडेट में तैयार किया गया।

*विधानसभा प्रश्न से ठीक पहले कार्रवाई:*

धमतरी के विधायक ओमकार साहू ने विधानसभा में भर्ती घोटाला और 15वें वित्त आयोग की खरीदी में भ्रष्टाचार को लेकर तारांकित प्रश्न लगाया था। इससे एक दिन पहले ही मधु तिवारी पर कार्रवाई कर दी गई

— *क्या यह राजनीतिक जवाबदेही से बचाव की कोशिश थी?*

*जांच नहीं, सीधे दंड:*

मधु तिवारी पर कार्रवाई बिना किसी स्वतंत्र जांच या सुनवाई प्रक्रिया के की गई — जबकि वही चयन समिति जांच कर रही थी जिसने भर्ती की थी।
यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का सीधा उल्लंघन है।

*बर्खास्त कर्मचारी की शिकायत पर कार्रवाई:*

शिकायतकर्ता टोमन कौशिक पहले ही जेल जा चुका है, और उसकी बर्खास्तगी हुई थी। फिर भी उसी की शिकायत पर कार्रवाई की गई।

क्या पूरा भर्ती घोटाला एक अकेले कर्मचारी ने किया, या फिर उसे बलि का बकरा बनाकर उच्च अधिकारियों को बचाया जा रहा है?

*अब हाईकोर्ट की शरण में मधु तिवारी*

अपने सम्मान, नौकरी और सच्चाई के लिए लड़ रही मधु तिवारी ने अब छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाने का फैसला किया है।
उनका कहना है कि ”अगर मुझे ही दोषी ठहराया जा रहा है, तो क्या चयन समिति, सीएमएचओ और डीपीएम जैसे उच्च पदों पर बैठे लोग इस पूरी प्रक्रिया से अछूते हैं?”

*यह सिर्फ एक कर्मचारी का मुद्दा नहीं, यह सिस्टम की साजिश है।*

यह मामला न केवल एक व्यक्तिगत प्रताड़ना का है, बल्कि सिस्टम में बैठे भ्रष्ट अधिकारियों की सांठगांठ और न्याय व्यवस्था की अनदेखी का बड़ा उदाहरण है।

अब देखने वाली बात यह होगी कि हाईकोर्ट में सच कितना उजागर होता है, और क्या इस मामले में वास्तविक दोषियों को सज़ा मिलेगी, या फिर एक बार फिर किसी को बलि का बकरा बना दिया जाएगा..?

1.एक कर्मचारी पर सारा दोष क्यों? भर्ती साज़िश में बड़े अफसर भी शक के घेरे में
2. भर्ती घोटाले की जांच अधूरी, सीएमएचओ और डीपीएम की भूमिका पर उठे सवाल
3. बर्खास्त कर्मचारी की शिकायत पर कार्रवाई, वरिष्ठ अधिकारियों को क्यों बचाया गया..?
4. टोमन कौशिक के आरोपों पर कार्रवाई, लेकिन चयन समिति कैसे निर्दोष..?
5. धमतरी भर्ती विवाद: चयन करने वाले अफसर ही जांचकर्ता, क्या यही न्याय है..?
6. सीएमएचओ-डीपीएम की संदिग्ध भूमिका, मधु तिवारी को बनाया गया बलि का बकरा
7. एकतरफा जांच या सोची-समझी साज़िश? भर्ती विवाद में अफसर क्यों हैं बाहर..?

“मुन्ना भाई MBBS”की तर्ज पर “मुन्नी बहने ” दे रही थी सब इंजीनियर की परीक्षा में हाईटेक नकल का हुआ पर्दाफाश

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NSUI के दो कार्यकर्ता विकास सिंह और मयंक सिंह गौतम ने किया मामला उजागर

अंतर्वस्त्रों में छुपा था कैमरा और माइक, बाहर से गूगल कर बताए जा रहे थे जवाब

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
बिलासपुर / हाईटैक टेक्नोलोजी तरीके से नकल मारना अंबिकापुर की युवतियों को पड़ा महंगा।
बता दे कि, आज से 40 दशक पूर्व नकल मारने की प्रक्रिया कुछ इस प्रकार से थी कि,यदि हमसे कोई ज्यादा होशियार है तो हम ताका झांकी कर अपना परीक्षा देते थे फिर थोड़ा युग आगे बढ़ा तो चिट मारने में थोड़ा बदलाव आया जैसे कि, पेन के अंदर ,मोजे के अंदर कई और भी तरीके से लोग चिट मारा करते थे। अब तो आज हम 21वी सदी में अपना जीवन चला रहे जहां पर हमारे पास किसी भी प्रकार से संसाधनों की कमी नहीं है। लोग फिल्म देखकर उसके जैसा हरकत करने में पीछे नहीं रहते है। आज के युग में डुप्लीकेट करना आम बात हो गया है। इसी का परिणाम आपके सामने उभर कर आया है जिसमें आपको बता दे कि,परीक्षा व्यवस्था पर तकनीक की मार एक बार फिर सवालों के घेरे में है। सब इंजीनियर भर्ती परीक्षा में ‘मुन्ना भाई’ की जगह इस बार ‘मुन्नी बहनों’ ने मोर्चा संभाल लिया। हाईटेक गैजेट्स और योजनाबद्ध चाल से नकल का ऐसा तरीका अपनाया गया, जिसने पूरे परीक्षा तंत्र की निगरानी व्यवस्था को ठेंगा दिखा दिया।

पूर्व उप मुख्यमंत्री टी एस सिंहदेव ने किया ट्वीट

प्रदेश के वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस.सिंहदेव ने सोशल मीडिया पर ट्वीट करते हुए बताया कि, सब-इंजीनियर भर्ती परीक्षा के दौरान हुए हाईटेक नकल कांड को न केवल शिक्षा व्यवस्था बल्कि राज्य की न्यायिक और प्रशासनिक प्रणाली पर भी गहरा सवाल खड़ा कर दिया है।

सिंहदेव ने बताया कि, परीक्षा में नकल किसी सामान्य तरीके से नहीं, बल्कि बेहद संगठित और हाईटेक अंदाज़ में की गई थी। परीक्षार्थियों के पास से लैपटॉप, माइक्रो डिवाइस, ब्लूटूथ उपकरण और अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक गैजेट बरामद हुए, जो दर्शाता है कि ये पूरी तरह सुनियोजित और व्यवस्थागत साजिश थी। सवाल यह है कि इतने हाईटेक गैजेट्स परीक्षा केंद्रों के भीतर कैसे पहुंचे..? क्या प्रशासन की मिलीभगत के बिना यह संभव था..?

लोक निर्माण विभाग (PWD) के उप अभियंता (Sub Engineer) पद के लिए आयोजित भर्ती परीक्षा में हाईटेक नकल का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। नकल का तरीका इतना तकनीकी और संगठित था कि अधिकारियों की नजरों से बच जाना तय था, यदि कुछ सजग युवाओं ने इसका भंडाफोड़ न किया होता।

इस बार ‘मुन्ना भाई’ नहीं बल्कि ‘मुन्नी बहनें’ मैदान में उतरी थीं। एक युवती ने अपने अंतर्वस्त्रों में कैमरा और माइक छुपाकर परीक्षा हाल में प्रवेश किया, जबकि उसकी साथी टेम्पो में बैठकर वॉकी-टॉकी के जरिए बाहर से उसे गूगल सर्च कर उत्तर बता रही थी।

https://youtu.be/j7mVl_VZnNs?si=XR8FS2c76VXob

कैसे हुआ पूरा खेल?

यह घटना बिलासपुर के सरकंडा स्थित शासकीय रामदुलारे बालक उच्चतर माध्यमिक शाला परीक्षा केंद्र की है। परीक्षा सुबह 10:00 बजे से दोपहर 12:15 बजे तक आयोजित थी।

परीक्षा केंद्र के भीतर बैठी युवती ने विशेष तकनीक से कैमरे को अपनी ड्रेस में फिट किया था। यह कैमरा प्रश्न पत्र की फोटो लेता और बाहर बैठी दूसरी युवती के मोबाइल पर लाइव भेजता। बाहर से जवाब गूगल किए जाते और फिर वॉकी-टॉकी से उसे बताए जाते।

 

NSUI कार्यकर्ताओं ने किया खुलासा

इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा कांग्रेस के छात्र संगठन NSUI के दो कार्यकर्ताओं – विकास सिंह और मयंक सिंह गौतम ने किया। उन्हें पहले से इनपुट मिला था कि परीक्षा में तकनीकी साधनों से नकल करवाई जा रही है। उन्होंने अपने संगठन की छात्राओं को निगरानी में लगाया और जैसे ही पुख्ता प्रमाण मिले, वे मौके पर पहुंचे।

बाहर बैठी युवती से जब उन्होंने पूछताछ शुरू की, तो वह पहले मुकर गई, फिर बहाने बनाने लगी। लेकिन जैसे ही उन्होंने पुलिस बुलाने और परीक्षा केंद्र में सामूहिक तलाशी की चेतावनी दी, पूरे खेल की परतें खुलने लगीं।

 

परीक्षा खत्म, भागने लगी आरोपी छात्रा

जैसे ही परीक्षा 12:15 पर समाप्त हुई, अंदर बैठी आरोपी छात्रा बाहर निकली और अपनी साथी को घिरे देख घबरा गई। उसने मौके से भागने की कोशिश की, लेकिन सतर्क छात्राओं और मौजूद लोगों ने उसे पकड़ लिया।

जब महिला पर्यवेक्षकों द्वारा तलाशी ली गई, तो छात्रा के अंतर्वस्त्रों में कैमरा, माइक और ब्लूटूथ डिवाइस टेप से चिपके हुए मिले। उत्तर पुस्तिका को अलग से सुरक्षित किया गया है।

अंबिकापुर से आई थीं ‘मुन्नी बहनें’

बताया जा रहा है कि दोनों युवतियां अंबिकापुर से बिलासपुर परीक्षा देने आई थीं। संभव है कि इस प्रकार की नकल कई और केंद्रों पर भी हुई हो। अब मामला शिक्षा माफिया और संगठित नकल गिरोह की ओर इशारा कर रहा है।

 

NSUI का दावा – बड़ी नकल रैकेट का सिरा

NSUI नेता ने बताया, “हमें सूचना मिली थी कि वॉकी-टॉकी और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से नकल हो रही है। हमने पहले जानकारी ली, फिर टीम के साथ मौके पर पहुंचकर परीक्षा में चल रहे इस हाईटेक घोटाले का पर्दाफाश किया।”

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“महासमुंद का महाविनाश तय” – आज की युवा पीढ़ी बात-बात में निकालते है चाकू – जिम्मेदार कौन…?

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नशेडियों को पानी पिलाना युवक को पड़ा महंगा, पैसा नहीं देने पर चाकू से गोद डाला

युवक अपने परिवार की जीविकोपार्जन के लिए जड़ी बूटी का काम करता है

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुंद / महासमुंद का महाविनाश अब दिखने लगा है। आज की युवा पीढ़ी पूर्ण रूप से नशे के शिकंजे में गिरफ्त हो रहे है और इनको समझाना अपनी जान को आमंत्रित करना हो गया है। जैसे जैसे शहर में लोग बढ़ रहे वैसे वैसे क्राइम का ग्राफ दिन ब दिन बढ़ते जा रहा है। आज के युग में डिजिटल का फायदा तो उठा रहे है जिससे हमारा काम आसान हो गया है। वहीं आज ऑनलाइन के माध्यम से किसी वारदात को अंजाम देने के लिए कई विभिन्न प्रकार के हथियार भी ऑनलाइन डिलीवर हों रहे है।

शहर के विभिन्न वार्डों में फल फूल रहा नशे का कारोबार

महासमुंद नगर पालिका के संपूर्ण वार्डो में धड़ल्ले से चल रहा शराब,गांजा एवं मेडिकल नशे का कारोबार जिसका कोई विकल्प नहीं।
बता दे कि,ऐसे लोगों के ऊपर कार्यवाही क्यों नहीं की जा रही। सुविज्ञ सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार जितने लोग ये कारोबार में लिप्त है वो लोगों का कहना है कि,हमारा कोई क्या बिगाड़ लेगा। हम तो फलाना जगह कमीशन दे रहे तो हमारे ऊपर कार्यवाही कैसा..?

पालते है नशे में धुत्त गुंडे

नशे का कारोबार करने वाला जिस तरह से हिम्मत करके शहर के बीचों बीच अपना धंधा चला रहा है। उस तरह से कोई उनसे उलझे तो अगल बगल में उनके गुर्गे बिना चाकू छुरी के बात नहीं करते है। जिस तरह से आज बात बात पर चालू निकलते है जैसे कि,इनको सरकार ने अनुमति दे रखी हो।

स्कूल सत्र प्रारंभ हो चुका है।

अब स्कूल सत्र प्रारंभ हो चुका है। प्रत्येक छात्र-छात्राओं के परिजन स्कूल छोड़ने और ले जाने प्रति दिन अपनी जिम्मेदारियों को निभा रहे है और जिले की स्थिति निर्मित हो रही है कि,अब बच्चों को स्कूल अकेले कैसे भेजे क्यों कि,चौक चौराहे में तो ये नशेडियों का अड्डा बना हुआ है। बच्चों सहित परिजनों के ऊपर भी इनसे खतरा मंडराने लगा है।

नशेडियों का चिन्हांकित अड्डा

महासमुंद नगर पालिका के अंतर्गत आने वाले मोहल्ले में नयापारा,सुभाष नगर,इमली भाटा , मौहारी भाटा,दलदली रोड और भी विभिन्न जगहों में नशेडियों का जमावड़ा रहता है। बता दे कि,आज इन जगहों में सबसे ज्यादा नशे का कारोबार फल फूल रहा है और गुर्गे भी यही से उत्पन्न हो रहे है। जिन किसी प्रकार से कोई लगाम नहीं है।

दुपहिया वाहनों की तेज गति में कोई लगाम नहीं

आज शहर की भीड़ बच्चों के स्कूल खुलने से और भी बढ़ गई है और ऐसे में नसे में धुत्त बाइक राइडरों की संख्या भी बढ़ गई है। जिस तेज गति से ये लोग वाहन दौड़ाते है जिस पर कोई लगाम नहीं और न ही इनका चालान कटता है। ऐसे स्टंट मास्टरों के चलते भी सड़क दुर्घटनाएं घट रही है।

घायल युवक के परिजन पहुंचे सिटी कोतवाली महासमुंद एफ आई आर दर्ज कर कार्यवाही करने।

इसी तारतम्य में विगत दिनों नशे धुत्त युवकों ने जड़ी बूटी बेचने वाले युवक पर किया जानलेवा हमला घायल युवक अस्पताल में भर्ती 36 घंटे बाद सिटी कोतवाली में कराया अपराध दर्ज।
बता दे कि, महासमुंद सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र के पिटीयाझर रोड पर स्थित रिवर डेल स्कूल के पास सरायपाली क्षेत्र से आए युवक अपने परिवार सहित जड़ी बूटी बेचने का काम करता था। जिसे सोमवार की रात्रि 30 जून को लगभग साढ़े 12 बजे तीन युवक जड़ी बूटी बेचने वाले के तंबू पर पहुंचे और प्रकाश जड़ी बूटी वाले को आवाज देकर पानी मांगे तंबू में पहुंचे तीन शातिर बदमाश युवकों को प्यासा समझ कर प्रकाश पानी लेकर पहुंचा। जिसे बदमाश युवकों ने तंबू से दूर ले जाकर पैसे की मांग करने लगे युवक ने पैसा देने से मना किया तो तीनों आरोपियों ने चाकू मारकर युवक को लहूलुहान कर दिया। आरोपियों के चाकू से घायल युवक ने जान बचाने के लिए आवाज लगाई तब तंबू के भीतर से युवक का बड़ा भाई आया जिसके बाद आरोपियों ने घायल युवक प्रकाश को वही छोड़ कर भाग निकले।
ज्ञात हो कि, महासमुंद जिले में चाकू बाजी के वारदात एक के बाद एक लगातार हो रहे हैं अभी चार-पांच रोज पहले सिटी कोतवाली परिसर में ही कुछ लोगों का वार्ड नंबर 28 के पार्षद विजय साव के साथ किसी बात को लेकर थाना परिसर में ही विवाद हो गया। इसके बाद कुछ युवकों ने पार्षद को चाकू मारकर गंभीर रूप से घायल कर दिया था, एक सप्ताह के भीतर ही सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र में चाकूबाजी की ये दूसरी वारदात है। लगातार शहर के भीतर हो रहे चाकू बाजी से आम जनता में खौफ और आक्रोश दोनों दिखने लगा है। महासमुंद शहर अपने शांत स्वभाव को लेकर जाना जाने वाला शहर है लेकिन कुछ वर्षों में इस शहर की शांति कहीं ना कहीं भंग हो रही है। महासमुंद शहर में और पूरे जिले में जिस तरह से नशे की दवाइयां इंजेक्शन, गांजा और शराब की बिक्री खुलेआम अवैध रूप से हो रही है जिसके गिरफ्त में शहर के युवा वर्ग के लोग फसते चले जा रहे हैं। नशे में धूत युवकों द्वारा छोटी-छोटी बातों पर मारपीट चाकू बाजी इस शहर के लिए आम होता चला जा रहा है। इन सारे वारदातों के पीछे नशे के साथ-साथ पुलिस प्रशासन की नाकामी भी खुलकर सामने आ रही है।
बहरहाल सिटी कोतवाली पुलिस ने चाकू से घायल हुए युवक के परिजनों की रिपोर्ट पर मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश में पुलिस की टीम जुटी हुई है। बहरहाल समाचार लिखे जाने तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई है।

महासमुंद जिले के स्वास्थ्य विभाग की कमान अब डॉ. आई. नागेश्वर राव के हाथों में

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रिपोर्टर – मयंक गुप्ता, महासमुंद

महासमुंद जिले के स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी अब नए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आई. नागेश्वर राव संभालेंगे। उल्लेखनीय है कि डॉ. राव इससे पहले भी जिले में नोडल अधिकारी के रूप में कार्य कर चुके हैं और कोरोना महामारी जैसे कठिन दौर में अपनी सेवाएं देकर सराहना प्राप्त कर चुके हैं।

पूर्व कार्यकाल में मिला सम्मान

कोविड-19 महामारी के दौरान डॉ. राव ने जिले में बेहतर समन्वय और नेतृत्व क्षमता का परिचय दिया था। उनकी कार्यशैली की प्रशंसा न केवल कलेक्टर स्तर पर हुई थी, बल्कि स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों ने भी उन्हें एक जिम्मेदार और ईमानदार अधिकारी के रूप में स्वीकारा।

कर्मचारियों में उत्साह

नए सीएमएचओ के रूप में डॉ. राव की नियुक्ति से स्वास्थ्य विभाग के समस्त कर्मचारियों में खुशी का माहौल है। कर्मचारियों का मानना है कि उनके नेतृत्व में विभाग को नई दिशा और कार्यसंस्कृति मिलेगी।

स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने दी शुभकामनाएँ

बीते मंगलवार को छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ महासमुंद की ओर से डॉ. राव को पुष्पगुच्छ भेंट कर सौजन्य मुलाकात की गई। इस अवसर पर संघ के प्रांतीय पदाधिकारी श्रीमती सविता बर्मन, जिलाध्यक्ष भानुकुमार डड़सेना, भूपेंद्र सोनकर, मिलन भदौरिया, रमाकांत भोई, दुर्जय प्रधान, सुनील श्रीवास, निकोलास सिंह, सुमित साहू, चंदन डड़सेना, भागवत चंद्राकर, विजयलक्ष्मी साहू, जसवंत साहू, नवनीत सिंह, चांद साहू सहित कई सदस्य उपस्थित रहे।

किसानों के भावनाओं के साथ खेल – खेल रही है भाजपा सरकार – प्रदेश उपाध्यक्ष राजेश जैन

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भाजपा सरकार अपने चहेते व्यापारियों को लाभ पहुंचा रही है।

सोसाइटियों में खाद बीज की कमी वही व्यापारियों के गोदाम भरे पड़े है।

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुंद / आखिर कौन समझेगा किसान की दर्द को हमेशा किसानों के साथ ही सौतेला व्यवहार क्यों..?
बता दे कि, बीते जून माह से धान बोवाई एवं टिकरा फसल लगाने का कार्य जोरो से चल रहा है। ऐसे में किसानों को फसल को नुकसान होने से बचाने के लिये डी ए पी खाद की अत्यंत आवश्यकता होती है। किंतु जिले के किसी भी सोसाइटी गोदाम में डी ए पी खाद नहीं होने के कारण किसानों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
जबकि देखा जाए तो आज सहकारी खाद गोदामों खाद की कमी हो रही वही भाजपा के चहेते व्यापारियों के गोदामों में भरपूर मात्रा में खाद का मिलना कही न कही वर्तमान सरकार की मिली भगत प्रतीत होते बाजार आ रहा है। इसका सीधा कनेक्शन अपने व्यापारी भाइयों को भाजपा सरकार सीधा लाभ देने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे है। इसी तारतम्य में आज महासमुंद जिले के सहकारी समिति भुकेल में ब्लाक कांग्रेस बसना द्वारा किसानों के समर्थन में प्रदेश में खाद एवं बीज की किल्लत को लेकर छत्तीसगढ़ प्रदेश किसान कांग्रेस द्वारा राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपते हुये प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए लेख किया गया है कि, वर्तमान सरकार किसानों को शीघ्र ही खाद व बीज उपलब्ध करे। कांग्रेस जन आज बसना क्षेत्र के भूकेल सोसायटी पहुंच कर सोसाइटी का घेराव कर धरना प्रदर्शन किया गया। जिसमें मुख्य रूप से जिला प्रभारी कांग्रेस किसान प्रदेश उपाध्यक्ष राजेश जैन ,दाऊलाल चन्द्राकर, मनजीत सिंह सलूजा, तौकीर दानी, इश्तियाक खेरानी, मोक्ष प्रधान जिला पंचायत सदस्य शिव बघेल श्रीमती मंदाकिनी साहु यासीब धनानी, रज्जू छाबड़ा, प्रकाश जैन, तनुजा साहु अध्यक्ष महिला कांग्रेस ग्रामीण नसरीन बानो अध्यक्ष महिला कांग्रेस शहर मनोज गहरवाल शिव नायक, रमेश दास, कैलाश प्रधान महेंद्र नायक, राजकुमार कालु प्यारेलाल साहु, केशव पटेल, राधेराम नंद, सेतकुमार डड़सेना, राधेश्याम नायक मोहित कश्यप, सी डी बघेल उत्तर कुमार पारेशवर, मनोज प्रधान, प्रकाश दास, करुण दाऊ,
रियाज भाई, गोकुल पारेशर, ननकी सहित सैकड़ों कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे।
तत्पश्चात महामहिम राज्यपाल के नाम तहसीलदार बसना के के साहु को ज्ञापन सौंपा गया।

कोमाखान तहसील में संलग्नीकरण के रूप में पदस्थ सहायक ग्रेड 3 चंदू साहू के अजीबोगरीब कारनामे..?

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शासकीय आदेशों की उड़ रही धज्जियाँ..!  जिले में और भी कुछ संलग्नीकरण चिन्हांकित है उनके ऊपर भी विभाग मेहरबान है क्यों..?

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुंद / शिक्षा विभाग का काला बाजार गर्म छत्तीसगढ़ में शासन के स्पष्ट निर्देश और शिकायतों की बौछार के बावजूद महासमुंद जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा शासकीय आदेशो की अनदेखी का एक बड़ा मामला सामने आया है। बता दे कि,जिले के कोमाखान तहसील में पदस्थ सहायक ग्रेड-3 चंद्रहास साहू, जिनका मूल पदस्थापना शासकीय हाई स्कूल घुंचापाली में है, लंबे समय से जारी संलग्नीकरण अब शिक्षा विभाग की साख पर सवाल खड़े कर रहा है।

सूत्रों के अनुसार, चंद्रहास साहू के खिलाफ कई बार शिकायतें की गईं, जिनमें संलग्नीकरण की अवधि समाप्त होने और कार्यशैली को लेकर गंभीर आरोप शामिल हैं। बावजूद इसके, जिला शिक्षा अधिकारी महासमुंद इन शिकायतों को या तो नजरअंदाज कर रहे हैं या किसी दबाव में संरक्षण प्रदान कर रहे हैं।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि, इस संबंध में लिखित शिकायत स्वयं जिला कलेक्टर महासमुंद के पास पहुंचाई जा चुकी है, लेकिन इसके बावजूद जिला शिक्षा अधिकारी की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है। क्या यह विभागीय आदेशों की अवहेलना है या फिर किसी ‘ऊंचे संरक्षण’ की परछाईं में यह सबकुछ हो रहा है..?

संलग्नीकरण या मनमानी नियुक्ति क्या कैबिनेट के फैसले को चुनौती देते जिला शिक्षा अधिकारी… ?

छत्तीसगढ़ राज्य सरकार द्वारा कैबिनेट बैठक 2025 कंडिका 1.5 में स्पष्ट उल्लेख है कि, समस्त प्रकार के संलग्नि कारण समाप्त माना जाएगा कोई भी कर्मचारी एक निर्धारित समय से अधिक अवधि तक संलग्न नहीं रह सकता, विशेषतः जब उसका मूल पदस्थापन स्थान अलग हो। लेकिन चंद्रहास साहू का मामला ऐसा प्रतीत हो रहा है जैसे कोमाखान में उनकी स्थायी नियुक्ति हो गई हो। इससे यह स्पष्ट होता कि जिला शिक्षा अधिकारी महासमुन्द द्वारा राज्य सरकार के फैसले को अंगूठा दिखाने का कार्य किया जा रहा है।

स्थानीय सूत्रों की मानें तो चंद्रहास साहू के खिलाफ कार्य में लापरवाही, दस्तावेजों में गड़बड़ी, कार्यालय के गोपनीय दस्तावेजों बाहर फैलाना,किसानों की कामों को रोकर रखना और अनुशासनहीनता के आरोप पहले भी लगाए गए हैं, चंद्रहास साहू द्वारा किसानों के कामों को रोकर पटवारियों की मिलीभगत से दलालों के कामों को पहले किए जाते है फिर भी उसके खिलाफ कभी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। कोमाखान तहसील के अंतर्गत बड़े दलालो और पटवारियों के मिलीभगत से बड़े पैमाने में सरकारी जमीनों की खरीद फारूख का काम किया जा रहा है राजस्व विभाग को बदनाम करने में कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही है।

शिकायतकर्ता बोले – “ये खुला प्रशासनिक मज़ाक है”इस पूरे मामले पर घोंचापाली स्कूल के एक  शिक्षक ने नाम न छापने की शर्त पर कहा—

“हमने बार-बार जिला शिक्षा अधिकारी और जिस विभाग में गया है उसके उच्चाधिकारियों को पत्र लिखकर गुहार लगाई है कि मूल पदस्थापना पर वापसी कराई जाए, लेकिन लगता है आदेश सिर्फ कागजों में चलते हैं।”

“शासन प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि नियम किसके लिए हैं? आम कर्मचारी के लिए या चहेते अधिकारियों के लिए!”

शासन के आदेश पर भी क्यों चुप है जिला शिक्षा अधिकारी?
महासमुन्द जिला यह सवाल अब जिले भर में चर्चा का विषय बन चुका है। जब जिले का सबसे बड़ा शिक्षा अधिकारी ही शासन के आदेशों की अनदेखी कर रहा हो, तो फिर अन्य अधीनस्थों से क्या उम्मीद की जा सकती है?

सूत्रों के अनुसार, शिकायतकर्ता द्वारा जिला कलेक्टर को लिखित आवेदन देने के बाद उम्मीद जगी थी कि जल्द संलग्नीकरण समाप्त कर दिया जाएगा, लेकिन समय बीतता गया और चंद्रहास साहू को जैसे ‘अदृश्य कवच’ मिला हुआ हो।

लोकतांत्रिक व्यवस्था में जवाबदेही जरूरी:-
महासमुन्द जिला के कोमाखान तहसील का यह मामला सिर्फ एक कर्मचारी के संलग्नीकरण का नहीं है, बल्कि यह दर्शाता है कि कैसे विभागीय आदेशों की अवहेलना कर नियमों की धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं। यह लोकतंत्र में जवाबदेही की रीढ़ को तोड़ने जैसा है।

यदि जिला प्रशासन ने जल्द हस्तक्षेप नहीं किया, तो यह मामला अन्य कर्मचारियों के लिए भी एक गलत उदाहरण पेश करेगा और विभागीय अनुशासन पर प्रश्नचिह्न लग जाएगा।

जिला शिक्षा अधिकारी की तानाशाही:- जब पत्रकार उनसे जवाब मांगने गए तो उनके द्वारा बताया गया मुझे समय नहीं है में बाद में मिलूंगा और कहकर टाल दिया गया। इससे स्पष्ट होता है कि, जिला शिक्षा अधिकारी संरक्षण प्रदान कर रहे है।

अब क्या करें अधिकारी?

• जांच समिति गठित कर संलग्नीकरण की वैधता की समीक्षा की जानी चाहिए।

• यदि शिकायतें सही पाई जाएं, तो चंद्रहास साहू को तत्काल मूल पद पर वापस भेजा जाए।

• जिला शिक्षा अधिकारी से स्पष्टीकरण लिया जाए कि क्यों उन्होंने उच्चाधिकारियों के आदेशों का पालन नहीं किया।

• यदि जानबूझकर लापरवाही सिद्ध होती है, तो उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाए।

जनता देख रही है:- महासमुंद के शिक्षा विभाग में हो रही यह अनियमितता अब सिर्फ एक विभागीय मामला नहीं रहा। यह जनता के विश्वास से जुड़ा प्रश्न बन चुका है।
• क्या अब भी कार्रवाई नहीं होगी?
• क्या अब भी नियमों की धज्जियाँ उड़ाई जाती  रहेंगी?                      •या फिर अब जिला प्रशासन और शासन इस आदेशहीनता के किले को तोड़ने का साहस दिखाएगा?

क्रिकेट खिलाड़ी यशस्व देवांगन के जन्मदिन पर खिलाड़ियों ने मिलकर केक काटे और बधाई दिए

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रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुंद / आज स्थानीय मिनी स्टेडियम में टर्मिनेटर क्रिकेट एकेडमी टीम के खिलाड़ी यशस्व देवांगन के जन्मदिन के शुभ अवसर पर महासमुंद टर्मिनेटर क्रिकेट एकेडमी की टीम ने मिलकर केक काटकर यशस्व देवांगन को उनके जन्मदिन के शुभ मौके पर सभी खिलाड़ियों ने उनके उज्जवल भविष्य की कामना करते हुए स्वस्थ्य एवं दीर्घायु जीवन की शुभकामनाएं दिए। इस अवसर पर महासमुंद टर्मिनेटर क्रिकेट एकेडमी के कोच जमशेद रज़ा सहित यशस्व के पिता डॉ. प्रदीप देवांगन एवं खिलाड़ियों में प्रज्जवल,लक्ष्य,देवांश,अमित,वेंकटेश,सूर्यांश,प्रांजल,मयंक,विहान,युवम,मितेश, प्रियांश, प्रभनूर सभी खिलाड़ी आदि मौजूद रहे।