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कोमाखान तहसील में संलग्नीकरण के रूप में पदस्थ सहायक ग्रेड 3 चंदू साहू के अजीबोगरीब कारनामे..?

शासकीय आदेशों की उड़ रही धज्जियाँ..!  जिले में और भी कुछ संलग्नीकरण चिन्हांकित है उनके ऊपर भी विभाग मेहरबान है क्यों..?

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुंद / शिक्षा विभाग का काला बाजार गर्म छत्तीसगढ़ में शासन के स्पष्ट निर्देश और शिकायतों की बौछार के बावजूद महासमुंद जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा शासकीय आदेशो की अनदेखी का एक बड़ा मामला सामने आया है। बता दे कि,जिले के कोमाखान तहसील में पदस्थ सहायक ग्रेड-3 चंद्रहास साहू, जिनका मूल पदस्थापना शासकीय हाई स्कूल घुंचापाली में है, लंबे समय से जारी संलग्नीकरण अब शिक्षा विभाग की साख पर सवाल खड़े कर रहा है।

सूत्रों के अनुसार, चंद्रहास साहू के खिलाफ कई बार शिकायतें की गईं, जिनमें संलग्नीकरण की अवधि समाप्त होने और कार्यशैली को लेकर गंभीर आरोप शामिल हैं। बावजूद इसके, जिला शिक्षा अधिकारी महासमुंद इन शिकायतों को या तो नजरअंदाज कर रहे हैं या किसी दबाव में संरक्षण प्रदान कर रहे हैं।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि, इस संबंध में लिखित शिकायत स्वयं जिला कलेक्टर महासमुंद के पास पहुंचाई जा चुकी है, लेकिन इसके बावजूद जिला शिक्षा अधिकारी की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है। क्या यह विभागीय आदेशों की अवहेलना है या फिर किसी ‘ऊंचे संरक्षण’ की परछाईं में यह सबकुछ हो रहा है..?

संलग्नीकरण या मनमानी नियुक्ति क्या कैबिनेट के फैसले को चुनौती देते जिला शिक्षा अधिकारी… ?

छत्तीसगढ़ राज्य सरकार द्वारा कैबिनेट बैठक 2025 कंडिका 1.5 में स्पष्ट उल्लेख है कि, समस्त प्रकार के संलग्नि कारण समाप्त माना जाएगा कोई भी कर्मचारी एक निर्धारित समय से अधिक अवधि तक संलग्न नहीं रह सकता, विशेषतः जब उसका मूल पदस्थापन स्थान अलग हो। लेकिन चंद्रहास साहू का मामला ऐसा प्रतीत हो रहा है जैसे कोमाखान में उनकी स्थायी नियुक्ति हो गई हो। इससे यह स्पष्ट होता कि जिला शिक्षा अधिकारी महासमुन्द द्वारा राज्य सरकार के फैसले को अंगूठा दिखाने का कार्य किया जा रहा है।

स्थानीय सूत्रों की मानें तो चंद्रहास साहू के खिलाफ कार्य में लापरवाही, दस्तावेजों में गड़बड़ी, कार्यालय के गोपनीय दस्तावेजों बाहर फैलाना,किसानों की कामों को रोकर रखना और अनुशासनहीनता के आरोप पहले भी लगाए गए हैं, चंद्रहास साहू द्वारा किसानों के कामों को रोकर पटवारियों की मिलीभगत से दलालों के कामों को पहले किए जाते है फिर भी उसके खिलाफ कभी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। कोमाखान तहसील के अंतर्गत बड़े दलालो और पटवारियों के मिलीभगत से बड़े पैमाने में सरकारी जमीनों की खरीद फारूख का काम किया जा रहा है राजस्व विभाग को बदनाम करने में कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही है।

शिकायतकर्ता बोले – “ये खुला प्रशासनिक मज़ाक है”इस पूरे मामले पर घोंचापाली स्कूल के एक  शिक्षक ने नाम न छापने की शर्त पर कहा—

“हमने बार-बार जिला शिक्षा अधिकारी और जिस विभाग में गया है उसके उच्चाधिकारियों को पत्र लिखकर गुहार लगाई है कि मूल पदस्थापना पर वापसी कराई जाए, लेकिन लगता है आदेश सिर्फ कागजों में चलते हैं।”

“शासन प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि नियम किसके लिए हैं? आम कर्मचारी के लिए या चहेते अधिकारियों के लिए!”

शासन के आदेश पर भी क्यों चुप है जिला शिक्षा अधिकारी?
महासमुन्द जिला यह सवाल अब जिले भर में चर्चा का विषय बन चुका है। जब जिले का सबसे बड़ा शिक्षा अधिकारी ही शासन के आदेशों की अनदेखी कर रहा हो, तो फिर अन्य अधीनस्थों से क्या उम्मीद की जा सकती है?

सूत्रों के अनुसार, शिकायतकर्ता द्वारा जिला कलेक्टर को लिखित आवेदन देने के बाद उम्मीद जगी थी कि जल्द संलग्नीकरण समाप्त कर दिया जाएगा, लेकिन समय बीतता गया और चंद्रहास साहू को जैसे ‘अदृश्य कवच’ मिला हुआ हो।

लोकतांत्रिक व्यवस्था में जवाबदेही जरूरी:-
महासमुन्द जिला के कोमाखान तहसील का यह मामला सिर्फ एक कर्मचारी के संलग्नीकरण का नहीं है, बल्कि यह दर्शाता है कि कैसे विभागीय आदेशों की अवहेलना कर नियमों की धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं। यह लोकतंत्र में जवाबदेही की रीढ़ को तोड़ने जैसा है।

यदि जिला प्रशासन ने जल्द हस्तक्षेप नहीं किया, तो यह मामला अन्य कर्मचारियों के लिए भी एक गलत उदाहरण पेश करेगा और विभागीय अनुशासन पर प्रश्नचिह्न लग जाएगा।

जिला शिक्षा अधिकारी की तानाशाही:- जब पत्रकार उनसे जवाब मांगने गए तो उनके द्वारा बताया गया मुझे समय नहीं है में बाद में मिलूंगा और कहकर टाल दिया गया। इससे स्पष्ट होता है कि, जिला शिक्षा अधिकारी संरक्षण प्रदान कर रहे है।

अब क्या करें अधिकारी?

• जांच समिति गठित कर संलग्नीकरण की वैधता की समीक्षा की जानी चाहिए।

• यदि शिकायतें सही पाई जाएं, तो चंद्रहास साहू को तत्काल मूल पद पर वापस भेजा जाए।

• जिला शिक्षा अधिकारी से स्पष्टीकरण लिया जाए कि क्यों उन्होंने उच्चाधिकारियों के आदेशों का पालन नहीं किया।

• यदि जानबूझकर लापरवाही सिद्ध होती है, तो उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाए।

जनता देख रही है:- महासमुंद के शिक्षा विभाग में हो रही यह अनियमितता अब सिर्फ एक विभागीय मामला नहीं रहा। यह जनता के विश्वास से जुड़ा प्रश्न बन चुका है।
• क्या अब भी कार्रवाई नहीं होगी?
• क्या अब भी नियमों की धज्जियाँ उड़ाई जाती  रहेंगी?                      •या फिर अब जिला प्रशासन और शासन इस आदेशहीनता के किले को तोड़ने का साहस दिखाएगा?

क्रिकेट खिलाड़ी यशस्व देवांगन के जन्मदिन पर खिलाड़ियों ने मिलकर केक काटे और बधाई दिए

 

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुंद / आज स्थानीय मिनी स्टेडियम में टर्मिनेटर क्रिकेट एकेडमी टीम के खिलाड़ी यशस्व देवांगन के जन्मदिन के शुभ अवसर पर महासमुंद टर्मिनेटर क्रिकेट एकेडमी की टीम ने मिलकर केक काटकर यशस्व देवांगन को उनके जन्मदिन के शुभ मौके पर सभी खिलाड़ियों ने उनके उज्जवल भविष्य की कामना करते हुए स्वस्थ्य एवं दीर्घायु जीवन की शुभकामनाएं दिए। इस अवसर पर महासमुंद टर्मिनेटर क्रिकेट एकेडमी के कोच जमशेद रज़ा सहित यशस्व के पिता डॉ. प्रदीप देवांगन एवं खिलाड़ियों में प्रज्जवल,लक्ष्य,देवांश,अमित,वेंकटेश,सूर्यांश,प्रांजल,मयंक,विहान,युवम,मितेश, प्रियांश, प्रभनूर सभी खिलाड़ी आदि मौजूद रहे।

महासमुन्द के नवागंतुक डीईओ विजय लहरें की ताबड़तोड़ कार्यवाही आते ही उतरी प्रधान पाठक की कुर्सी

सालों से शिक्षा विभाग को गुमराह कर रखा था प्रधान पाठक दिनेश प्रधान

“झूठ की तर्ज”पर बना प्रधान पाठक..!
“सच की तर्ज” पर खिसकी कुर्सी प्रधान पाठक की…!!

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुन्द / जिला शिक्षा विभाग के गलियारों में सनसनी मच गई है। जिस कुर्सी की चमक से दिनेश कुमार प्रधान की किस्मत चमकी थी, वही अब उनके पतन का कारण बन गई है। एक फर्जी आदेश, एक झूठा दावा और एक शिक्षक का छल — अब उसी के गले की फांस बन चुका है।

14 जून 2025 की तारीख, जिला शिक्षा कार्यालय महासमुन्द के इतिहास में उस काले दिन की तरह दर्ज हो चुकी है, जब ‘शिक्षा’ जैसे पवित्र क्षेत्र को छल और धोखे से लज्जित किया गया। उस दिन एक ऐसा आदेश जारी हुआ जिसने यह सिद्ध कर दिया कि अगर पद पाने की सीढ़ियाँ फर्जीवाड़े की नींव पर रखी जाएं, तो वे बहुत देर तक टिक नहीं सकतीं।

पर्दाफाश की कहानी: एक पदोन्नति, दो आदेश और एक बड़ा झूठ!

शिक्षक दिनेश कुमार प्रधान, जो मूलतः विकासखण्ड बसना के सहायक शिक्षक (पंचायत) के पद पर दिनांक 18 जुलाई 2007 को नियुक्त हुए थे, ने अपने व्यक्तिगत चिकित्सा कारणों के आधार पर 02 सितंबर 2010 को विकासखण्ड पिथौरा में स्थानांतरण लिया।

यहाँ तक तो सब ठीक था। लेकिन तूफान तो तब उठा, जब उन्होंने पिथौरा विकासखण्ड में कार्यभार ग्रहण करने के बावजूद अपनी वरिष्ठता 2007 की बताई, यानी पहले विकासखण्ड की वरिष्ठता को ही अपने साथ खींच लाए।

अब यहीं से शुरू होती है खेल की असली पटकथा।

‘डबल रोल’ जैसा आदेश! — प्रशासनिक आधार या चिकित्सा कारण?
जब श्री प्रधान ने प्राथमिक शाला खैरखुटा में प्रधान पाठक की कुर्सी पर आसीन होने के लिये आवेदन किया, तो उन्होंने यह दावा किया कि उनका स्थानांतरण “प्रशासनिक आधार” पर हुआ है, न कि स्वयं के व्यय पर। लेकिन उसी आदेश का दूसरा रूप सामने आया जिसमें स्पष्ट उल्लेख था कि स्थानांतरण चिकित्सा कारण से स्वयं के खर्च पर हुआ है।

यानी एक ही क्रमांक वाला आदेश दो अलग-अलग मकसद के साथ प्रस्तुत किया गया। एक असली, एक नकली।

जैसे ही इस गड़बड़ी की भनक जिला शिक्षा कार्यालय को लगी, तत्काल संभागीय संयुक्त संचालक रायपुर के माध्यम से जांच समिति गठित की गई। जांच में जो सामने आया, वह चौंकाने वाला था — प्रशासनिक आधार पर प्रस्तुत आदेश पूर्णतः फर्जी था।

जांच में निकला चौंकाने वाला सच

फर्जी आदेश की सत्यता जांचने के लिए उस समय के स्थानांतरण आदेश जारीकर्ता, तत्कालीन जनपद पंचायत बसना के CEO (अब सेवानिवृत्त) से प्रमाण मांगा गया। जवाब आया —

“प्रशासनिक आधार पर जारी आदेश में मेरे हस्ताक्षर नहीं हैं, यह फर्जी है। वैध आदेश वही है जो चिकित्सा कारण से स्वयं के व्यय पर जारी किया गया था।”

यानी दिनेश कुमार प्रधान ने जानबूझकर फर्जी दस्तावेज पेश कर पदोन्नति हासिल की।

शिक्षक दिनेश प्रधान का ‘गिरा सिंहासन’, टूटी पदोन्नति की डोर!

जैसे ही यह धांधली सामने आई, दिनेश कुमार को अपना पक्ष रखने का मौका दिया गया। लेकिन उनके लिखित जवाब को “पूर्णतः असंतोषजनक” मानते हुए जिला शिक्षा अधिकारी महासमुन्द ने 14 अक्टूबर 2022 को दी गई पदोन्नति तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी।

अब दिनेश कुमार प्रधान, जो कभी प्रधान पाठक की कुर्सी पर बैठकर स्कूल की कमान संभाल रहे थे, फिर से अपने मूल पद सहायक शिक्षक (एल.बी.) पर वापस भेज दिये गये हैं।

कुर्सी की हवस और शिक्षा व्यवस्था पर कलंक

यह प्रकरण केवल दिनेश कुमार प्रधान की कहानी नहीं है। यह पूरे शिक्षा तंत्र में जड़े भ्रष्टाचार, लालच और फर्जीवाड़े की दीमक को उजागर करता है।

एक शिक्षक, जो बच्चों को सच्चाई और नैतिकता का पाठ पढ़ाता है, जब स्वयं फर्जी दस्तावेजों का सहारा लेकर पदोन्नति हासिल करता है, तो यह पूरे तंत्र को अपवित्र करता है।

विकासखण्ड पिथौरा के अन्य शिक्षकों में गहरा आक्रोश व्याप्त है। उनका कहना है कि —

“यदि फर्जी आदेश से कोई आगे बढ़ेगा, तो मेहनत करने वाले शिक्षक कहां जाएंगे?”

शिक्षक दिनेश प्रधान का अब क्या होगा आगे?

सूत्रों के अनुसार, यह केवल शुरुआत है। जांच में जो अन्य नाम सामने आए हैं, उनके खिलाफ भी कार्रवाई तय मानी जा रही है।
शिक्षा विभाग ने संकेत दिए हैं कि ऐसे मामलों में शून्य सहिष्णुता की नीति अपनाई जाएगी।

समाज का सवाल: क्या अब शिक्षा व्यवस्था सुधरेगी?

दिनेश कुमार प्रधान जैसे मामलों से यह स्पष्ट होता है कि शिक्षक केवल किताबों से नहीं, अपने आचरण से भी विद्यार्थियों को शिक्षा देते हैं। जब शिक्षक ही पथभ्रष्ट हो जाएं, तो समाज की दिशा भी डगमगाती है।

अब देखना यह है कि क्या इस नाटक का अंत यहीं होता है या और भी अध्याय सामने आएंगे?

“सत्य की नींव पर बनी पदोन्नति ही स्थायी होती है,
झूठ की ईंटें देर-सवेर ढह ही जाती हैं!”

श्रीयांश हॉस्पिटल के ठेकेदारों ने कर दी गर्भवती महिला की हत्या…?

आरंग के प्रतिष्ठित श्रीयांश हॉस्पिटल में गर्भवती महिला तुलेश्वरी कन्नौजे की मौत में कई सवाल खड़े हो रहे है

गर्भवती महिला की मौत गब्बर इस बैक फिल्म की तर्ज पर पल्ला झाड़ने लगे थे अस्पताल प्रबंधन

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
रायपुर आरंग (छत्तीसगढ़): कहते हैं अस्पताल जीवन देने का केंद्र होता है, लेकिन आरंग का श्रीयांश हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर क्या मौतों का अड्डा बन गया है? इस सवाल का जवाब तलाश रही है वो मासूम नवजात बच्ची, जिसकी आंखें मां की ममता देखने से पहले ही सूनी हो गईं। और वह मां – तुलेश्वरी कन्नौजे, जिसने पहली बार मातृत्व का अनुभव किया और वहीं उसे मौत की नींद सुला दिया गया।

हॉस्पिटल संचालक पी एल देवांगन सफाई देते हुए

https://youtu.be/L7GG_9HMkTk?si=HpNqTERwaMZQ_Vjp

घटना दिनांक 14 रात्रि को आरंग ब्लॉक के बोरिद गांव की है। 22 वर्षीय तुलेश्वरी कन्नौजे को प्रसव पीड़ा होने पर परिजनों ने श्रीयांश हॉस्पिटल में भर्ती कराया। यह उसका पहला प्रसव था। बच्ची को जन्म तो मिल गया, लेकिन मां की जान चली गई। परिजनों के अनुसार, तुलेश्वरी डिलीवरी के बाद भी असहनीय पीड़ा में तड़पती रही, मगर डॉक्टरों और हॉस्पिटल स्टाफ ने कोई गंभीरता नहीं दिखाई।

लापरवाही या सुनियोजित मौत?
परिजनों का आरोप है कि तुलेश्वरी की हालत बिगड़ने के बाद हॉस्पिटल प्रशासन ने उन्हें कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी। अचानक महिला की मृत्यु की सूचना मिली, वो भी तब, जब उसे चोरी-छिपे एक प्राइवेट एम्बुलेंस में रायपुर ले जाने की बात कही गई।

मृतक की मां ने बताये आप बीती 

https://youtu.be/bszNRho64_A?si=Pbh4BrUXZ_jM-JL5

 

सबसे चौंकाने वाली बात ये रही कि मृत महिला को परिजनों को बताए बिना ही स्ट्रेचर पर लिटाकर बाहर ले जाया जा रहा था। जब मृतका की मां ने सवाल किया तो हॉस्पिटल स्टाफ ने बदसलूकी की, धक्का देकर बाहर निकाल दिया।

परिजन स्तब्ध थे – उन्हें उनकी बेटी की मौत के पीछे की सच्चाई नहीं बताई गई। एमएलसी या पुलिस रिपोर्ट का कोई जिक्र नहीं, कोई चिकित्सकीय विवरण नहीं, कोई संवेदना नहीं।

दलालों की भूमिका पर गहराया संदेह
स्थानीय लोगों और परिजनों ने शंका जताई है कि इस अस्पताल में डिलीवरी केसों के जरिए मौत का सौदा किया जा रहा है, जिसमें कुछ मेडिकल दलालों की मिलीभगत भी है। “यह पहला मामला नहीं है, पहले भी यहां इस तरह की घटनाएं हो चुकी हैं,” गांव के कुछ लोगों ने बताया।

जन्म के साथ मौत का दस्तावेज
तुलेश्वरी की नवजात बेटी को जन्म के साथ ही एक ऐसा कलंक मिला, जिसे शायद ज़िंदगी भर वह ना भूल सके। उसने मां को देखा ही नहीं, उसकी मां की मौत पर उठ रहे सवालों का जवाब शायद उसे भी कभी ना मिले।

परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ पूरी तरह लापरवाह थे। तुलेश्वरी की हालत लगातार बिगड़ती रही, मगर कोई सीनियर डॉक्टर देखने नहीं आया। जब मौत हो गई, तो अस्पताल ने बिना जिम्मेदारी लिए, लाश को चुपचाप एम्बुलेंस में रखवाकर रायपुर रेफर करने का नाटक किया।

मृतक तुलेश्वरी कन्नौजे के पति ने बताए 

https://youtu.be/isjf2zo6D1U?si=km6oDu3Q-sWOhpm4

प्रशासन की चुप्पी – साजिश या सहमति?
अब सवाल उठता है कि प्रशासन इस पर चुप क्यों है? आरंग स्वास्थ्य विभाग और जिला कलेक्टर ने इस गंभीर लापरवाही पर अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की? क्या यह अस्पताल जन-स्वास्थ्य के नाम पर मौत का व्यापार चला रहा है?

परिजनों ने मांग की है कि इस पूरे मामले की न्यायिक जांच हो, एफआईआर दर्ज की जाए और हॉस्पिटल का लाइसेंस रद्द किया जाए।

कई ऐसे ही मामले दबा दिए गए?
स्थानीय लोगों का कहना है कि श्रीयांश हॉस्पिटल में पहले भी कई बार इस तरह की घटनाएं हुई हैं। कुछ महिलाओं की प्रसव के बाद हालत गंभीर हो गई, तो किसी की मौत हुई। लेकिन हर बार मामले को रफा-दफा कर दिया गया।

मौत के बाद न कोई पोस्टमार्टम, न FIR, न मेडिकल रिपोर्ट, न ही मरीज के इलाज की जानकारी परिजनों को दी जाती है। सवाल ये उठता है कि क्या यह अस्पताल मानवता की हत्या कर रहा है?

मासूम का भविष्य अंधकारमय
अब सवाल उस बच्ची का है, जिसकी आंखें खुलीं तो मां की लाश देखी। पिता पहले ही बेरोजगार हैं, और अब इस मासूम का जीवन प्रशासन और समाज की दया पर निर्भर है।

क्या सरकार, महिला बाल विकास विभाग या कोई समाजसेवी संगठन इस बच्ची के लिए आगे आएगा?

क्या कहते हैं कानून और स्वास्थ्य नीति?
मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया और राज्य स्वास्थ्य विभाग की नीतियों के अनुसार, प्रसव के दौरान किसी महिला की मौत की स्थिति में एमएलसी, पोस्टमार्टम, रिपोर्टिंग अनिवार्य है। साथ ही, मरीज को उचित रेफरल प्रक्रिया से ही अन्यत्र भेजा जा सकता है। मगर श्रीयांश हॉस्पिटल ने इन सभी मानकों की खुलेआम अवहेलना की।

जनता में आक्रोश – आंदोलन की चेतावनी
आरंग क्षेत्र में इस घटना के बाद ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों में भारी आक्रोश है। स्थानीय पंचायत प्रतिनिधियों में भी आक्रोश है!

एक महिला की जान गई है – पर सवाल सिर्फ तुलेश्वरी की मौत का नहीं, बल्कि उन सभी महिलाओं की सुरक्षा का है, जो इलाज के नाम पर मौत को गले लगाने मजबूर हैं।

क्या मातृत्व अब सुरक्षित नहीं रहा? क्या हम ऐसे सिस्टम के सामने मौन रहेंगे, जो जीवन देने की जगह लाशें सौंपता है?

युक्तियुक्तकरण से खुला – महासमुंद शिक्षा विभाग का रहस्य

अंगद की पांव की तरह जमे बैठे थे, हुई काउंसिलिंग , चिराग घिसने पर निकले 700 अतिशेष शिक्षकों की सूची 

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुंद / छत्तीसगढ़ राज्य सरकार द्वारा युक्ति युक्तिकरण के फैसले ने महासमुंद जिले में एक बड़ा खुलासा शिक्षा विभाग में हुआ है।
बीते दिनों अतिशेष शिक्षकों द्वारा सम्पूर्ण राज्य में सरकार के फैसले के खिलाफ आंदोलन जुलूस निकाल कर विरोध भी किया गया।
तत्पश्चात युक्ति युक्तिकरण सरकार के फैसले के बाद महासमुंद जिले में शिक्षकों की काउंसलिंग कराई गई। जिससे यह जानकारी सामने आई कि, जिले में सात सौ शिक्षक अतिशेष थे। शायद ये वही शिक्षक हैं जो अपने पहचान और पहुंच के चलते अपनी सुविधा के अनुसार अपनी ड्यूटी अपने मन पसंद स्कूल में कर रहे थे।

महासमुंद जिले का एक ग्राम सिनोधा जहां की शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला की शिक्षक स्वाति चंद्राकर पिछले 7 साल से पदस्थ है लेकिन अपनी मूल पद स्थान को छोड़कर शिक्षिका अपने मन पसंद स्कूल बृजराज पाठ शाला में संलग्न है। पिछले वर्ष ग्रामीणों ने स्वाति चंद्राकर को अपने मूल पद स्थान पर वापस भेजने और शिक्षकों की कमी को लेकर स्कूल में ताला बंदी जैसी कार्यवाही की जा चुकी थी। बावजूद इसके शिक्षक अपने पहचान और पहुंच के चलते अपने मन पसंद स्कूल पर ही ड्यूटी करती रही है। इस वर्ष भी स्कूल खुलने से पहले ग्रामीणों से जिला शिक्षा अधिकारी से शिकायत कर स्वाति चंद्राकर को मूल पद स्थान पर भेजने को लिखित शिकायत किया है।
बता दें कि, पिछले कई सालों से महासमुंद जिले में कई स्कूल एकल शिक्षक स्कूल के रूप में अपनी पहचान बना चुके हुए थे। जहां ग्रामीणों को हर साल अपने बच्चों के भविष्य को देखते हुए शिक्षक की मांग को लेकर कानून अपने हाथ में लेकर स्कूलों में ताला बंदी करनी पड़ती रही है। इसी ताला बंदी के चलते कई पालकों पर जिला शिक्षा विभाग ने पुलिस में मामला तक दर्ज कराया गया है।

छत्तीसगढ़ राज्य सरकार के युक्तियुक्तकरण फरमान के बाद जिला प्रशासन और स्कूल शिक्षा विभाग हरकत में आई और कार्रवाई शुरू कर काउंसलिंग कराई गई। जिसके बाद यह मामला उजागर हुआ है कि, अकेले महासमुंद जिले में 7 सौ अतिशेष शिक्षक पाए गए हैं, जिन्हें महासमुंद के नए जिला शिक्षा अधिकारी ने अपने मूल पदस्थान में भेजने और उन स्थानों पर भेजने का आदेश जारी किया है जिन स्थानों पर एकल शिक्षक है।

महासमुंद जिले के महान शिक्षक

बसना 126
सरायपाली 152
पिथौरा 139
बागबाहरा 75 और सबसे अधिक महासमुंद ब्लॉक में 208 शिक्षक अतिशेष हैं।

महासमुंद जिला शिक्षा अधिकारी विजय लहरे ने जानकारी देते हुए बताया है कि, पिछले सालों की तरह जिले में अब किसी भी स्कूल में ताला बंदी की स्थिति नहीं होगा, 7 सौ अतिशेष शिक्षकों को उन स्थानों पर भेजा गया है जहां एकल शिक्षक थे, पूरे जिले में अब ऐसे कोई स्कूल नहीं होगा जो एकल शिक्षक स्कूल होगा। साथ ही यह भी कहा है कि, जो शिक्षक अपने कर्तव्यों के प्रति लापरवाही बरतेंगे उन शिक्षकों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

पेड़ लगाओ-पीढ़ी बचाओ का संदेश, देते हुए सायकल में भ्रमण करने निकले महासमुंद कलेक्टर एवं डीएफओ

 

विश्व पर्यावरण दिवस सायकल रैली का सम्पूर्ण आयोजन वन विभाग द्वारा आयोजित की गई।

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुंद / आज विश्व पर्यावरण दिवस के शुभ मौके पर जिला मुख्यालय में प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी 5 जून को वन विभाग द्वारा साइकिल रैली का आयोजन किया गया। यह रैली प्रातः 8 बजे वन विद्यालय महासमुंद से स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी विद्यालय तुमाडबरी तक निकाली गई । साइकिल रैली को कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। रैली में वनमंडलाधिकारी मयंक पांडेय , एसडीओ वन वेंकटेश ,जिला रेड क्रॉस के अध्यक्ष संदीप दीवान, दाऊ लाल चंद्राकर,पार्षद राहुल आवड़े ,जिला शिक्षा अधिकारी विजय लहरे,डीएम सी रेखराज शर्मा, प्राचार्य श्रीमती अमी रफ़स एवं शाला के स्टाफ और बच्चे मौजूद थे। रैली का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनजागरूकता फैलाना और लोगों को प्रदूषणमुक्त परिवेश की ओर प्रेरित करना था।

इसी तारतम्य में कलेक्टर श्री लगेंह ने शाला में आयोजित पौधरोपण कार्यक्रम में कहा कि,
आज जिस गति से पर्यावरण का क्षरण हो रहा है, उसे रोकने के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं। साइकिल चलाना केवल एक साधन नहीं, बल्कि एक संदेश है—हम प्रकृति से जुड़ना चाहते हैं और उसे बचाना हमारी ज़िम्मेदारी है। दैनिक जीवन में पानी बचाने को लेकर हमें सजग रहना होगा।
वनमंडलाधिकारी मयंक पांडेय ने संबोधित करते हुए कहा कि, पर्यावरण की रक्षा करना हम सबकी साझी जिम्मेदारी है। पौधारोपण, प्लास्टिक का परहेज, और साइकिल जैसे स्वच्छ यातायात के साधनों को अपनाकर हम सभी एक बड़ा बदलाव ला सकते हैं। वन और जल हमारे पर्यावरण के महत्वपूर्ण अंग है। इसके बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। आओ सब मिलकर इन्हें बचाए।

साइकिल रैली में बच्चों, युवाओं, नागरिकों, स्कूली छात्रों, सामाजिक संगठनों, एवं प्रशासनिक अधिकारियों सहित समाज के सभी वर्गों की भागीदारी रही। शहर में यह रैली पर्यावरण जागरूकता का संदेश लेकर गुज़री।

रैली के समापन पर स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी विद्यालय तुमाडबरी में एक विशेष पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें कलेक्टर एवं अतिथियों ने फलदार पौधे जैसे आम, अमरूद, नींबू आदि के पौधे लगाए गए। उपस्थित लोगों ने पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया।

आरंग के श्रियांश हॉस्पिटल में चल रहा है – मौत का सर्विस सेंटर..?

निजी अस्पताल की लापरवाही से हुई,गर्भवती महिला तुलेश्वरी कन्नौजे की मौत…!

गब्बर इस बैक फिल्म की तर्ज पर पल्ला झाड़ने लगे थे अस्पताल प्रबंधन

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
रायपुर / जीवन में स्वास्थ्य संबंधी प्रत्येक व्यक्ति सजग रहता है। वे अपने और परिवार से अत्यधिक प्रेम करते है। इसीलिए जब भी परिवार की स्वास्थ्य की बात आती है तो परिवार के लोग इलाज के लिए किसी अच्छे अस्पताल के बारे में बात करते है। मौत के ठेकेदार आज निजी अस्पताल का संचालन करते हुए लोगों की मौत के साथ खिलवाड़ कर रहे है। इसी तारतम्य में जिला रायपुर के आरंग में स्थित एक निजी अस्पताल की घोर लापरवाही से गर्भवती महिला की प्रसव के बाद एक 22 वर्षीय महिला की मौत हो गई । डॉक्टरों ने मौत की घटना को किया छुपाने का प्रयास। मौत होने के घंटों बाद रेफर करने का किया नाटक। परिजनों ने बॉडी में कोई हलचल नहीं होते देख जाना डॉक्टरों की मंशा। बिना पोस्ट मार्टम किए लाश को कर दिया परिजनों के हवाले। पैसे की लालच में डॉक्टर बन गया हैवान। आयुष्मान कार्ड में इलाज के बाद मरीज के परिजनों से 13600 की राशि कराया खर्च।
गौरतलब है कि, रायपुर जिले के आरंग विधानसभा में स्थित श्रीयांश हॉस्पिटल में 13 और 14 जून की दरम्यानी रात आरंग जनपद क्षेत्र के ग्राम बोरिद निवासी तुलेश्वरी कन्नौजे उम्र 22 साल को प्रसव के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने पैसे के लालच में बिना किसी सुविधा के महिला का सीजर ऑपरेशन कर दिया। ऑपरेशन उपरांत महिला ने एक स्वस्थ नवजात बच्ची को जन्म दिया। 15 तारीख को पूरा दिन तुलेश्वरी कन्नौजे असहनीय दर्द से जूझती रही। दर्ज से जूझ रही महिला के शरीर में कई तरह से इन्फेक्शन दिखने लगे थे। जिसकी शिकायत श्रीयांश हॉस्पिटल के डॉक्टरों और नर्सों से महिला के पति और परिजन करते रहे। डॉक्टरों ने बिना किसी तरह के इलाज किए परिजनों से कहते रहे कि प्रसव के बाद यह सब नार्मल है। जल्दी ठीक हो जाएगी।

डॉक्टरों की लापरवाही का इंतहा तब हो गया जब पूरा दिन दर्द से तड़पते महिला ने 14 और 15 जून की दरम्यानी रात्रि में लगभग 1.30 बजे दम तोड़ दिया था। महिला का पूरा शरीर ठंडा हो चुका था। तब श्रीयांश हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने अपनी करनी पर पर्दा डालते हुए लगभग सुबह तीन बजे 15 जून को दूसरे हॉस्पिटल रायपुर भेजने के लिए रेफर कर दिया और खुद एक एंबुलेंस की व्यवस्था भी कर दी। तुलेश्वरी कन्नौजे के परिजनों में एक बूढ़ी दादी ने तुलेश्वरी के शरीर को छुआ और जान गई कि, तुलेश्वरी कन्नौजे अब इस दुनियां में नहीं है, और तत्काल अपने बेटों से बूढ़ी महिला ने कहा कि, तुलेश्वरी कन्नौजे की मौत हो चुकी है डॉक्टर क्यों झूठ बोल रहे हैं। इसके बाद परिजनों ने डॉक्टर से सवाल जवाब करना शुरू कर दिया तो डॉक्टरों ने भोले भाले ग्रामीणों को बताया कि, हां तुलेश्वरी कन्नौजे की मौत हो चुकी है। इस दौरान मृत महिला के परिजनों में उसका पति बूढ़ी दादी और उसकी मां हॉस्पिटल में मौजूद थी। तुलेश्वरी कन्नौजे के पति ने अपने बड़े भाई को मामले की जानकारी दी। इसी बीच श्रीयांश हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने तत्काल मामले को रफा दफा करने के लिए मृत महिला के पति से कोरे कागज पर दस्खत करवाए और अस्पताल के अन्य कुछ कागजों में जो अंग्रेजी में लिखे हुए थे उन फार्म में हस्ताक्षर करवा लिए। हॉस्पिटल प्रबंधन अपनी करनी को छूपाने के लिए पूरी तरह से पूरी कागजी कार्रवाई कर ली। तब तक मृतिका के जेठ और अन्य परिजन हॉस्पिटल पहुंच गए। जवान बहु की मौत की खबर से बदहवास पूरे परिवार को गहरी शोक में डूबो दिया था। पति का रो रो कर बुरा हाल था। परिजन कुछ समझते इससे पहले सुबह के लगभग 3.30 बजे 15 जून को श्रीयांश हॉस्पिटल ने बॉडी को बोरिद ग्राम पहुंचवाने की व्यवस्था कर परिजनों को चलता कर दिया था।
मौत के बाद जब तुलेश्वरी कन्नौजे के पति ने मौत होने की वजह पूछी तो श्रीयांश हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने कहा कि, महिला को सिकलिन ज्यादा होने की वजह से मौत हो गई है। श्रीयांश हॉस्पिटल के डॉक्टरों की बात झूठी थी। इस बात का खुलासा परिजनों को तब हुआ जब आरंग ब्लॉक के कुछ सरकारी डॉक्टर बोरिद ग्राम पहुंचे थे उन्होंने श्रीयांश हॉस्पिटल द्वारा ऑपरेशन से पहले किए गए टेस्ट रिपोर्ट देख कर कहा कि, सिकलिन इतने मात्रा में तुलेश्वरी कन्नौजे के शरीर में नहीं थी, ना ही इससे किसी की मौत हो सकती है। श्रीयांश हॉस्पिटल के डॉक्टर अपनी गलती छूपाने के लिए बहाना बना रहे हैं।

श्रीयांश हॉस्पिटल की लापरवाही
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श्रीयांश हॉस्पिटल ने पैसे की लालच में बिना सारे टेस्ट किए 22 वर्षीय गर्भवती महिला का ऑपरेशन कर दिया।

12 से 14 घंटे तक दर्द और शरीर में इन्फेक्शन देखने के बाद भी डॉक्टरों ने सुरक्षित हॉस्पिटल में केश को रेफर नहीं किया।

परिजनों के मुताबिक तुलेश्वरी कन्नौजे की मौत 14, 15 जून की दरम्यानी रात्रि में लगभग डेढ़ बजे मौत हो गई थी, जिसे छिपाने के लिए सुबह 3 बजे के लगभग अन्यत्र केश को रेफर किया जा रहा था।

महिला की मौत के बाद लाश को जीवित बताकर रेफर करना श्रीयांश हॉस्पिटल की क्रूरता और लालच को दर्शाता है।

सिकलिन की जितनी तादात को मौत की वजह श्रीयांश हॉस्पिटल के डॉक्टर बता रहे, उसी मात्रा को सरकारी अस्पताल के डॉक्टर नॉर्मल बता रहे हैं।

तुलेश्वरी कन्नौजे की मौत के बाद श्रीयांश हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने पोस्ट मार्टम ना कर लाश को तत्काल हॉस्पिटल से हटवा दिया।

ये तो अभी शुरुआत है..!
मिलते है अगली कड़ी में …!!

मिलेट्स की खेती से किसानों को मिलेगा अत्यधिक लाभ – योगेश्वर राजू सिन्हा

विकसित कृषि संकल्प यात्रा“ 29 मई से 12 जून तक

आज झालखम्हरिया, खट्टी, किशनपुर, टेंका, गेर्रा एवं छिबर्रा क्लस्टर में पहुंचेगी यात्रा

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुंद / मिलेट या मोटे अनाज की खेती एक महत्वपूर्ण कृषि अभ्यास है जो भारत में व्यापक रूप से किया जाता है. मिलेट, जैसे ज्वार, बाजरा, और रागी, गेहूं और चावल की तुलना में कम संसाधनों में उगने वाले अनाज हैं. वे विभिन्न प्रकार की मिट्टी और जलवायु में उगाई जा सकती हैं ।मिलेट की खेती कम वर्षा वाले क्षेत्रों के लिए एक अच्छी फसल है।

मिलेट की खेती के लाभ
कम लागत

मिलेट की खेती कम लागत वाली होती है और इसे कम पानी की आवश्यकता होती है।

उपजाऊ मिट्टी की आवश्यकता नहीं।

मिलेट विभिन्न प्रकार की मिट्टी में उगाई जा सकती है और उपजाऊ मिट्टी की आवश्यकता नहीं होती है।

मिलेट की बुवाई खरीफ सीजन (जून-जुलाई) या रबी सीजन (अक्टूबर-नवंबर) में की जा सकती है।

इसी तारतम्य में महासमुंद विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा द्वारा आज स्थानीय कलेक्टर परिसर में “विकसित कृषि संकल्प यात्रा“ का शुभारम्भ किया। इस दौरान उन्होंने सुबह 10ः30 बजे दो किसान रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस मौके पर जिला कलेक्टर विनय कुमार लंगेह, जिला पंचायत सीईओ एस आलोक, एसडीएम हरिशंकर पैकरा, प्रकाश शर्मा,कृषि उपसंचालक एफ आर कश्यप, कृषि विज्ञान केंद्र, पशुपालन। विभाग के अधिकारी मौजूद थे।
यह रथ निर्धारित शिविरों में जाकर प्रचार प्रसार करेगी। जिले में प्रतिदिन 3 रथ भ्रमण करेगी। इस रथ में कृषि,पशुपालन,उद्यानिकी विभाग द्वारा दृश्य एवं श्रव्य सामग्री का उपयोग किया जाएगा।
विकसित कृषि संकल्प यात्रा में मिलेट्स की खेती को बढ़ावा देने और फसल चक्र परिवर्तन, प्राकृतिक जैविक खेती, उन्नत बीज, उन्नत कृषि यंत्र संतुलित उर्वरक, जल संरक्षण, मूल्य संवर्धन, पशु पालन, मत्स्य पालन, उद्यानिकी फसलों को प्रोत्साहित करने पर बल दिया जाएगा।
कलेक्टर विनय लंगेह के निर्देशानुसार जिले में विकसित कृषि संकल्प अभियान के लिए 29 मई से 12 जून तक प्रत्येक दिन 3 टीमों द्वारा अलग-अलग विकासखण्डों में दो-दो पालियों में कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। टीम में कृषि वैज्ञानिक सहित कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य विभाग, कृषि सखी, कृषक मित्र, पशु सखी, प्रगतिशील कृषक, एफपीओ के सदस्य एवं लखपति दीदी सम्मिलित होंगे। प्रथम पाली में प्रातः 10ः00 बजे से दोपहर 01ः00 बजे तक एवं द्वितीय पाली में दोपहर 02ः00 बजे से शाम 05ः00 बजे तक कार्यक्रम आयोजित होगा।
उप संचालक कृषि एफ.आर. कश्यप ने बताया कि, इसकी शुरुआत गुरुवार 29 मई को महासमुंद विकासखण्ड अंतर्गत सहकारी समिति झालखम्हरिया एवं खट्टी से होगा। जिसके सफल संचालन के लिए श्री मनीराम उईके वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। दोनों पालियों में 7-7 ग्राम पंचायत के कृषक सम्मिलित होंगे। इसी तरह पिथौरा विकासखण्ड अंतर्गत प्रथम पाली में सहकारी समिति किशनपुर एवं द्वितीय पाली में टेंका में कार्यक्रम का आयोजन होगा। जिसमें क्रमशः 9 एवं 7 ग्राम पंचायत शामिल होंगे। अभियान के संचालन हेतु रोहित कुमार बरिहा वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी नोडल अधिकारी होंगे। इसी तरह सरायपाली विकासखण्ड अंतर्गत प्रथम पाली में क्लस्टर ग्राम पंचायत गेर्रा मिडिल स्कूल एवं द्वितीय पाली में छिबर्रा पंचायत भवन में कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। जिसमें क्रमशः 2 एवं 4 ग्राम पंचायत शामिल होंगे। इसके लिए बी.एल. मिर्धा वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी को नोडल अधिकारी बनाया गया है।

मोबाईल देख रहे युवक पर हथौड़ी से ताबड़तोड़ जानलेवा हमला

जिंदगी और मौत से जूझ रहा शिव कुमार

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुंद / जिले की तुमगांव थाना क्षेत्र में हथौड़ी से एक युवक पर जानलेवा हमला कर आरोपी फरार हो गया है फरार आरोपी की तुमगांव पुलिस तलाश कर रही है। घटना के 48 घंटे बाद भी आरोपी को तुमगांव पुलिस अब तक गिरफ्तार नहीं कर पाई है।

घटना पास के सीसी टीवी में कैद हो गई है।

प्राप्त जानकारी अनुसार 25 मई की सुबह 10:45 को शिव कुमार सोनवानी गौतम ट्रेडर्स के पास एक कुर्सी पर बैठा था। जहां पर पहले से आरोपी रूपेश कुमार बंजारे और वीरू खड़े थे और आपस में बात चित कर रहे थे। इधर कुर्सी पर बैठे शिव कुमार सोनवानी मोबाइल में कुछ देख रहा था तभी अचानक रूपेश कुमार बंजारे ने अपने कमर में छुपा कर रखा हथौड़ी से शिव कुमार सोनवानी पर ताबड़तोड़ जानलेवा हमला कर गंभीर रूप से घायल कर दिया आसपास के लोगों ने बीच बचाव कर रुपेश को दबोच लिया और तत्काल मामले की सूचना तुमगांव पुलिस को देकर गंभीर रूप से घायल शिव कुमार सोनवानी को नजदीक के साई नमन हॉस्पिटल में भर्ती कराया है जहां गौतम जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा है।
शिव कुमार सोनवानी के परिजनों का कहना है कि, आरोपी रूपेश बंजारे को पुलिस थाने से छोड़ दिया गया है वहीं पुलिस का कहना है कि, आरोपी घटना के बाद से फरार है जिसे जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा l

सुरक्षित मातृत्व विशेष अभियान से गर्भवती महिलाओं को मिलेगी बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं

गरियाबंद जिला अस्पताल में 24 मई को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व विशेष अभियान का आयोजन

डॉ. गार्गी यदु ने हितग्राहियों से ज्यादा से ज्यादा लाभ उठाने की अपील की

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
गरियाबंद / प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व विशेष अभियान (पीएमएसएमए) के तहत 24 मई को जिला अस्पताल में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. गार्गी यदु के नेतृत्व में आयोजित इस अभियान का मुख्य उद्देश्य गर्भवती महिलाओं में उच्च जोखिम वाले लक्षणों की समय पर पहचान कर उनकी गुणवत्तापूर्ण और विशेषज्ञ चिकित्सा सुनिश्चित करना है।

मालूम हो कि पीएमएसएमए भारत सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है, जिसका लक्ष्य मातृ मृत्यु दर को कम करना और सुरक्षित मातृत्व सुनिश्चित करना है। गर्भवती महिलाओं की देखरेख के लिए हर माह की 9 और 24 तारीख को जिले के सभी जिला अस्पताल, सिविल अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में विशेष पीएमएसएमए दिवस मनाए जाते हैं। इन दिनों, गर्भवती महिलाओं की जांच, परामर्श, और आवश्यकतानुसार उच्च स्तरीय चिकित्सकीय उपचार उपलब्ध कराया जाता है।

डॉ. गार्गी यदु ने बताया कि इस अभियान के तहत विशेष ध्यान उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं पर दिया जाता है, जो गर्भावस्था के दौरान जटिलताओं के शिकार हो सकती हैं। समय पर पहचान और उचित प्रबंधन से न केवल मातृ मृत्यु दर घटाई जा सकती है, बल्कि बच्चों और माताओं दोनों का स्वास्थ्य सुरक्षित किया जा सकता है।

जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के निर्देशानुसार इस योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार गांव-गांव तक ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजकों, आरएचओ और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों के माध्यम से किया जा रहा है, ताकि अधिक से अधिक गर्भवती महिलाएं इस योजना का लाभ उठा सकें।

सीएमएचओ डॉ. गार्गी यदु ने सभी गर्भवती महिलाओं और उनके परिवारों से अपील की है कि वे शासन की इस महत्वपूर्ण योजना का पूरा लाभ उठाएं और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराते रहें। उन्होंने कहा सुरक्षित मातृत्व हर महिला का अधिकार है। हमारा प्रयास है कि किसी भी गर्भवती महिला को स्वास्थ्य सेवाओं की कमी न हो और वे स्वस्थ बच्चे को जन्म दे सकें।