महासमुंद – रिटायरमेंट के 180 दिन बाकी, फिर भी DEO बीएल देवांगन का ‘संरक्षण’ — भुरका के प्रधान पाठक धनुर्जय पटेल पर गंभीर आरोपों के बावजूद क्यों नहीं गिर रही कार्रवाई की गाज..?

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महासमुंद – रिटायरमेंट के 180 दिन बाकी, फिर भी DEO बीएल देवांगन का ‘संरक्षण’ — भुरका के प्रधान पाठक धनुर्जय पटेल पर गंभीर आरोपों के बावजूद क्यों नहीं गिर रही कार्रवाई की गाज..?

जांच में 264 में से सिर्फ 91 दिन आए हेडमास्टर, फिर भी मेहरबान बने DEO; क्या रिटायरमेंट का मिल रहा ‘सुरक्षा कवच’..?

रिपोर्टर मयंक गुप्ता/ मंगलवार / 08 सितम्बर 2026
​महासमुंद (छत्तीसगढ़)। शासकीय प्राथमिक शाला भुरका में पदस्थ प्रधान पाठक धनुर्जय पटेल का मामला इन दिनों जिला शिक्षा महकमे में चर्चा और जन-आक्रोश का केंद्र बना हुआ है। गंभीर विभागीय गड़बड़ियों, लंबे समय से गैर-हाजिरी और अनुशासनहीनता के पुख्ता सबूत मिलने के बाद भी जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) बी.एल. देवांगन की चुप्पी पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। मामले में सबसे बड़ा पेंच यह है कि आरोपी प्रधान पाठक की सेवानिवृत्ति में अब सिर्फ 180 दिन (छह महीने) का समय बचा है, जिसे लेकर कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या विभाग कार्रवाई टालकर उन्हें सुरक्षित सम्मानजनक विदाई देने की फिराक में है..?

​क्लासरूम में सोए मिले प्रधान पाठक, बच्चों का भविष्य दांव पर

​पूरा मामला 13 अगस्त 2026 को सामने आया, जब निरीक्षण और मीडिया कवरेज के दौरान प्राथमिक शाला भुरका में अजीबो-गरीब स्थिति देखने को मिली। पहली और दूसरी कक्षा के छोटे बच्चे जहां जमीन पर बिलखते-खेलते नजर आए, वहीं प्रधान पाठक धनुर्जय पटेल स्कूल परिसर में कथित तौर पर बेखबर सोए हुए पाए गए। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि शिक्षक का अक्सर शराब के नशे में आना, लेट पहुंचना और कक्षा में सो जाना रोज की बात बन चुकी थी।
​मामला बिगड़ने पर उसी दिन शाम 6 बजे के बाद प्रधान पाठक ने आनन-फानन में ऑनलाइन छुट्टी का आवेदन ठोका और एक निजी क्लीनिक से मेडिकल सर्टिफिकेट बनवाकर पेश कर दिया। जबकि नियमतः शासकीय कर्मचारियों के स्वास्थ्य अवकाश के लिए सरकारी अस्पताल के विशेषज्ञ (MBBS) डॉक्टर की रिपोर्ट अनिवार्य होती है।

​जांच रिपोर्ट में खुली पोल:
सालभर में 173 दिन गायब!

​विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) द्वारा गठित जांच टीम (प्राचार्य भरत सिंह साहू एवं संकुल समन्वयक लक्ष्मीनाथ सहसरिया) की पड़ताल में जो आंकड़े सामने आए, वे हैरान करने वाले हैं:

​उपस्थिति का रिकॉर्ड: जुलाई 2025 से जुलाई 2026 के बीच कुल 264 कार्य दिवसों में से प्रधान पाठक महज 91 दिन ही स्कूल पहुंचे। यानी साल के ज्यादातर हिस्से में वे स्वेच्छा से अनुपस्थित रहे।

​जांच के दिन भी फरार: 13 अगस्त के हंगामे के ठीक अगले दिन 14 अगस्त को जब जांच टीम स्कूल पहुंची, तो प्रधान पाठक फिर से गायब मिले। फोन करने पर उन्होंने अधिकारियों का कॉल तक उठाना मुनासिब नहीं समझा।

​अचानक गायब होने की आदत: जांच में पुष्टि हुई कि घटना के दिन वे सुबह 10:15 बजे आए, हाजिरी रजिस्टर में दस्तखत किए और दोपहर 12:30 बजे बिना बताए रफूचक्कर हो गए।
​इसके बावजूद, रिपोर्ट के अंतिम निष्कर्ष में ‘शराब के नशे का प्रत्यक्ष मेडिकल साक्ष्य न मिलने’ की बात कहकर ढील देने की कोशिश की गई, जिसे स्थानीय लोग और अभिभावक मामले को ठंडे बस्ते में डालने का प्रयास बता रहे हैं।

​नियम-कानून ताक पर: आखिर क्यों नहीं हो रहा निलंबन?

​जांच अधिकारियों और संकुल समन्वयक ने स्पष्ट लिखा है कि स्कूल के अनुशासन और बच्चों की पढ़ाई के हित में शिक्षक पर immediate disciplinary action (तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई) बेहद जरूरी है। इसके बावजूद 18 साल से एक ही स्कूल में डटे शिक्षक पर डीईओ स्तर से अब तक कोई एक्शन नहीं लिया गया है।

​कानूनी प्रावधानों के तहत आरोपी शिक्षक पर ये नियम सीधे तौर पर लागू होते हैं:

​छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 (नियम 3): शासकीय सेवक के लिए कर्तव्यपरायणता और गरिमामय आचरण अनिवार्य है। बिना सूचना गायब रहना और बच्चों की पढ़ाई से खिलवाड़ ‘कदाचरण’ (Misconduct) की श्रेणी में आता है।

​छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 (नियम 9 एवं 10/11): गंभीर चूक और गैर-जिम्मेदाराना रवैये पर नियम 9 के तहत तत्काल निलंबन (Suspension) और नियम 10/11 के तहत वेतन वृद्धि रोकने या बर्खास्तगी जैसी सख्त शास्तियां लगाने का स्पष्ट अधिकार सक्षम प्राधिकारी के पास है।

​कलेक्टर से हस्तक्षेप की मांग

​बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ और विभागीय उदासीनता को देखते हुए स्थानीय अभिभावकों और सजग नागरिकों ने कलेक्टर महासमुंद से गुहार लगाई है। मांग की जा रही है कि घोर लापरवाही के आरोपी धनुर्जय पटेल को अविलंब निलंबित किया जाए और मामले को दबाने में शामिल जिम्मेदार अफसरों की भूमिका की भी जांच हो। अब देखना यह होगा कि प्रशासन कड़ा रुख अपनाता है या रिटायरमेंट की आड़ में मामला यूं ही फाइलों में दबा रह जाएगा।

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