महासमुंद में प्रशासनिक लाचारी..! जांच रिपोर्ट और दर्जनों ग्रामीणों की गवाही के बाद भी जिला CEO की ‘रहस्यमयी चुप्पी’ — क्या भ्रष्टाचारियों को मिल रहा है संरक्षण..?

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महासमुंद में प्रशासनिक लाचारी..! जांच रिपोर्ट और दर्जनों ग्रामीणों की गवाही के बाद भी जिला CEO की ‘रहस्यमयी चुप्पी’ — क्या भ्रष्टाचारियों को मिल रहा है संरक्षण..?

रिपोर्टर मयंक गुप्ता/दिन गुरुवार/27 अगस्त 2026
​महासमुंद। छत्तीसगढ़ की पंचायती राज व्यवस्था में अनुशासन और पारदर्शिता बनाए रखने के दावे कागजों तक ही सीमित नजर आ रहे हैं। महासमुंद जिले के ग्राम पंचायत खैरा में पदस्थ पंचायत सचिव श्री मोती मेहरा (मोतीलाल मेहरा) पर शासकीय कर्तव्यों की घोर उपेक्षा, पद के दुरुपयोग, अधिकारों के अतिक्रमण और शासन के स्पष्ट निर्देशों की धज्जियां उड़ाने के गंभीर आरोप लगे हैं। मामले में जांच टीम गठित हुई, दर्जनों ग्रामीणों ने गवाही दी और साक्ष्य भी प्रस्तुत किए गए, लेकिन आज पर्यन्त जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) द्वारा कार्रवाई के नाम पर केवल ‘शून्य’ हासिल हुआ है। प्रशासन की इस रहस्यमयी चुप्पी ने पूरी व्यवस्था पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।

क्या है पूरा मामला..?
(24 जून 2026 की घटना)

​दस्तावेजों और शिकायत के अनुसार, 24 जून 2026 को महासमुंद जिले की सभी पंचायतों में ‘प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण विकास भवन’ (संचालक के पत्र क्रमांक GENCOR/13259/2026-SECTION/(PMAY-G)) के तहत अति-महत्वपूर्ण ग्राम सभा की बैठकें आहूत की गई थीं। नियमतः सचिव मोती मेहरा को अपनी मूल पदस्थापना ग्राम पंचायत खैरा में उपस्थित रहकर ग्राम सभा संपन्न करानी थी।
​किंतु आरोप है कि सचिव मोती मेहरा ने शासन के आदेशों को ठेंगा दिखाते हुए अपनी मूल पंचायत खैरा की बैठक का बहिष्कार किया और अपने कार्यक्षेत्र से बाहर ग्राम पंचायत खट्टी पहुंच गए।

पति-पत्नी के पद का ‘गलत फायदा’ और नियमों का खुला उल्लंघन

​ग्राम पंचायत खट्टी में मोती मेहरा की धर्मपत्नी श्रीमती अनिता मेहरा सरपंच पद पर पदस्थ हैं। आरोप है कि सचिव मोती मेहरा ने वहां अपनी पत्नी के साथ मिलकर पंचायत की आधिकारिक कार्यवाही में सीधा हस्तक्षेप किया, ग्रामीणों से विवाद किया और अभद्र व्यवहार तक किया।
​यह कृत्य छत्तीसगढ़ शासन, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के स्पष्ट आदेश (पत्र क्रमांक पंचा./विविध/2010/1009 दिनांक 26.05.2010) का सीधा और प्रत्यक्ष उल्लंघन है। इस आदेश के तहत महिला जनप्रतिनिधियों (सरपंच/पंच) के शासकीय कार्यों में उनके पति या रिश्तेदारों के किसी भी प्रकार के हस्तक्षेप पर पूर्णतः प्रतिबंध लगाया गया है। इसके बावजूद एक जिम्मेदार लोक सेवक द्वारा दूसरी पंचायत में जाकर मनमानी करना अनुशासनहीनता की पराकाष्ठा को दर्शाता है।

6 अगस्त को हुई जांच, दर्जनों ग्रामीणों ने दी गवाही

​मामले की गंभीरता को देखते हुए पत्रकार एवं शिकायतकर्ता मयंक गुप्ता (प्रधान संपादक, बेबाक बयान) ने 15 जुलाई 2026 को जिला पंचायत CEO के समक्ष विस्तृत शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद जनपद पंचायत महासमुंद द्वारा जांच टीम गठित की गई (आदेश क्रमांक पंचा./शिक्षा/2026/1594)।

​06 अगस्त 2026 को ग्राम पंचायत खट्टी के पंचायत भवन में जांच प्रक्रिया संपन्न हुई। जांच अधिकारी (सहायक आंतरिक लेखा परीक्षण एवं कराधान अधिकारी) के समक्ष:

​शिकायतकर्ता ने अपने बयान और तथ्य पेश किए।

​दर्जनों ग्रामीणों ने मौके पर उपस्थित होकर सचिव के अनुचित हस्तक्षेप, अभद्र व्यवहार और कार्यस्थल से गायब रहने की पुष्टि की।

​बैठक संबंधी फोटोग्राफ, उपस्थिति रजिस्टर की प्रविष्टियां और शासकीय आदेशों की प्रतियां साक्ष्य के रूप में सौंपी गईं।

​जांच पूरी… साक्ष्य मजबूत… फिर भी CEO की कार्रवाई ‘शून्य’!

​जांच प्रक्रिया पूर्ण होने और शिकायत सही पाए जाने के पर्याप्त साक्ष्य मौजूद होने के बावजूद, हफ्तों बीत जाने के बाद भी महासमुंद जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) के स्तर से कोई

दंडात्मक या निलंबन की कार्रवाई नहीं की गई है।

​स्थानीय निवासियों और जागरूक नागरिकों का कहना है कि:
​”आवेदक के बयान और दर्जनों ग्रामीणों के साक्ष्य के बाद भी यदि जिला पंचायत CEO खामोश बैठे हैं, तो यह प्रशासन की लाचार व्यवस्था को दर्शाता है। ऐसी ढिलाई से भ्रष्ट और स्वेच्छाचारी कर्मचारियों का मनोबल बढ़ता है और वे बेखौफ होकर घूमते हैं।”

​शासन-प्रशासन से तीखे सवाल:

1 ​क्या नियम केवल आम जनता के लिए हैं..?

जब शासन का स्पष्ट आदेश है कि सरपंच पति पंचायत में हस्तक्षेप नहीं करेंगे, तो सचिव पर तत्काल कार्रवाई क्यों नहीं हुई..?

2 ​जांच रिपोर्ट पर धूल क्यों जम रही है..?

क्या जिला पंचायत कार्यालय में बैठे जिम्मेदार अधिकारी किसी दबाव में काम कर रहे हैं या दोषी सचिव को बचाने की कोशिश हो रही है..?

3 ​ग्राम सभा जैसी संवैधानिक संस्था का अपमान कब तक बर्दाश्त होगा..?

अपनी पदस्थापना छोड़कर दूसरी पंचायत में उपद्रव करने वाले सचिव पर निलंबन की गाज कब गिरेगी..?

​मांग:

​शिकायतकर्ता एवं क्षेत्रवासियों ने मांग की है कि छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम एवं लोक सेवक आचरण नियमों के तहत आरोपी सचिव मोती मेहरा को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाए और मामले की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच कराकर वैधानिक दंडात्मक कार्रवाई की जाए, ताकि पंचायती राज व्यवस्था की गरिमा बहाल हो सके।

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