संकुल केंद्र सिरपुर के सुकुलबाय मिडिल स्कूल में मनमानी.! निर्धारित समय से सवा दो घंटे पहले बच्चों की छुट्टी, शिक्षिका ने जड़ा स्कूल में ताला…!!

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संकुल केंद्र सिरपुर के सुकुलबाय मिडिल स्कूल में मनमानी.! निर्धारित समय से सवा दो घंटे पहले बच्चों की छुट्टी, शिक्षिका ने जड़ा स्कूल में ताला…!!

प्रधान पाठक की अनुपस्थिति में स्कूल संचालन पर उठे सवाल, त्रैमासिक परीक्षा के बीच सामने आई गंभीर लापरवाही; DEO ने कहा—जांच के बाद होगी नियमानुसार कार्रवाई

प्रधान संपादक मयंक गुप्ता | 23 सितम्बर 2026 | दिन बुधवार

महासमुंद (छत्तीसगढ़)।
महासमुंद विकासखंड के संकुल केंद्र सिरपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत सुकुलबाय स्थित शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला में विद्यालय संचालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि निर्धारित समय पूरा होने से करीब सवा दो घंटे पहले ही विद्यार्थियों की छुट्टी कर स्कूल के मुख्य द्वार पर ताला लगा दिया गया और संबंधित शिक्षिका विद्यालय से चली गईं।

मामला उस समय सामने आया, जब 22 सितम्बर 2026 को दोपहर लगभग 3 बजे मीडिया टीम विद्यालय पहुंची। इस दौरान स्कूल का मुख्य द्वार बंद और तालाबंद पाया गया। स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के अनुसार, विद्यालय में विद्यार्थियों की छुट्टी लगभग 1:45 बजे ही कर दी गई थी।

स्कूल में कक्षा छठवीं से आठवीं तक के विद्यार्थियों की पढ़ाई संचालित होती है। ऐसे में निर्धारित शैक्षणिक समय से काफी पहले विद्यालय बंद किए जाने की घटना ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

प्रधान पाठक अवकाश पर, संचालन की जिम्मेदारी किसकी..?

जानकारी के अनुसार विद्यालय के प्रधान पाठक हर्ष प्रताप मन्नाडे व्यक्तिगत/पारिवारिक कारणों से अवकाश पर थे। उनकी अनुपस्थिति में विद्यालय की व्यवस्था वहां पदस्थ शिक्षिका श्रीमती चित्रलेखा साहू (एल.बी.) द्वारा संभाले जाने की बात सामने आई है।

आरोप है कि इसी दौरान विद्यार्थियों को निर्धारित समय से पहले छुट्टी दे दी गई और विद्यालय के मुख्य द्वार पर ताला लगा दिया गया।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या विद्यालय को निर्धारित समय से पहले बंद करने की कोई सक्षम अनुमति ली गई थी? यदि अनुमति नहीं थी, तो विद्यालय संचालन का समय कम करने का निर्णय किस आधार पर लिया गया?

इन सवालों का स्पष्ट जवाब विभागीय जांच और संबंधित अभिलेखों के परीक्षण के बाद ही सामने आ सकेगा।

त्रैमासिक परीक्षा के बीच समय से पहले स्कूल बंद

मामले को गंभीर बनाने वाला एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि इन दिनों विद्यालय में त्रैमासिक परीक्षाएं आयोजित होने की जानकारी सामने आई है।

बताया गया है कि परीक्षा का समय सुबह 10 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक निर्धारित है। परीक्षा समाप्त होने के बाद भी विद्यालय की निर्धारित शैक्षणिक गतिविधियां और विद्यार्थियों से संबंधित अन्य कार्य संचालित किए जाने होते हैं।

ऐसे में यदि विद्यार्थियों को लगभग 1:45 बजे ही छुट्टी दे दी गई, तो यह जांच का विषय है कि परीक्षा के बाद निर्धारित विद्यालयीन गतिविधियां क्यों नहीं कराई गईं और स्कूल को समय से पहले बंद करने का निर्णय किस आधार पर लिया गया।

प्राथमिक स्कूल के शिक्षकों ने भी बताई स्थिति

मामले में शासकीय प्राथमिक शाला में पदस्थ प्रधान पाठक लक्ष्मण सिंह ध्रुव और सहायक शिक्षक रामनाथ यादव के हवाले से बताया गया है कि मिडिल स्कूल की शिक्षिका श्रीमती चित्रलेखा साहू ने लगभग 1:45 बजे विद्यार्थियों की छुट्टी की और स्कूल में ताला लगाकर वहां से चली गईं।

यदि यह तथ्य जांच में सही पाया जाता है तो विभाग के सामने विद्यालय संचालन, विद्यार्थियों की उपस्थिति और निर्धारित समय-सारिणी के पालन से जुड़े कई सवालों का जवाब तलाशना होगा।

संकुल समन्वयक बोले—जानकारी नहीं थी

संकुल समन्वयक सिरपुर धरम पटेल से दूरभाष पर संपर्क किए जाने पर उन्होंने मामले के पूर्व से संज्ञान में नहीं होने की बात कही।

उन्होंने कहा कि यदि विद्यालय निर्धारित समय से पहले बंद किया गया है तो इसकी जांच की जानी चाहिए और तथ्य सही पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।

संकुल स्तर पर निगरानी की जिम्मेदारी को देखते हुए यह सवाल भी उठ रहा है कि ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यालयों में समयपालन और नियमित संचालन की वास्तविक स्थिति की निगरानी किस प्रकार की जा रही है।

DEO बोले—मामला गंभीर, जांच के बाद होगी कार्रवाई

मामले की जानकारी महासमुंद के जिला शिक्षा अधिकारी बी.एल. देवांगन तक पहुंचाई गई। DEO ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा कि घटना की जांच कराई जाएगी और तथ्य सही पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

महत्वपूर्ण बात यह है कि फिलहाल संबंधित शिक्षिका को कोई कारण बताओ नोटिस जारी नहीं किया गया है। इसलिए इस स्तर पर विभागीय कार्रवाई को लेकर किसी अंतिम निर्णय की बात कहना उचित नहीं होगा।

अब विभागीय जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि स्कूल वास्तव में किस समय बंद हुआ, उस समय विद्यालय में कौन-कौन उपस्थित थे, विद्यार्थियों की छुट्टी किस आधार पर की गई और क्या इसके लिए किसी अधिकारी से अनुमति ली गई थी।

क्या पहले भी समय से पहले बंद होता रहा स्कूल..?

स्थानीय लोगों की ओर से यह भी आरोप लगाया गया है कि विद्यालय को पहले भी समय से पहले बंद किए जाने की घटनाएं सामने आती रही हैं।

यदि यह शिकायत लगातार होती रही है तो विभाग के लिए यह जांच का विषय होगा कि पूर्व में भी ऐसी कोई शिकायत प्राप्त हुई थी या नहीं और यदि हुई थी तो उस पर क्या कार्रवाई की गई।

साथ ही विद्यालय के उपस्थिति रजिस्टर, विद्यार्थियों की उपस्थिति, शिक्षक उपस्थिति, परीक्षा संबंधी अभिलेख और विद्यालय संचालन की समय-सारिणी की जांच से वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।

बच्चों की पढ़ाई से जुड़ा सवाल, अब जवाबदेही तय होने का इंतजार

सरकारी विद्यालयों में निर्धारित समय तक शैक्षणिक गतिविधियों का संचालन केवल औपचारिकता नहीं बल्कि विद्यार्थियों के शिक्षा-अधिकार और विद्यालय की जिम्मेदारी से जुड़ा विषय है।

यदि किसी कारणवश विद्यालय को निर्धारित समय से पहले बंद करना आवश्यक हो, तो उसकी प्रक्रिया और सक्षम अनुमति का पालन किया जाना जरूरी है। वहीं, यदि बिना अनुमति के विद्यालय समय से पहले बंद किया गया है, तो जिम्मेदारी तय करना विभाग का विषय होगा।

सुकुलबाय स्कूल की यह घटना अब जांच के केंद्र में है। ग्रामीणों और अभिभावकों की नजर इस बात पर है कि शिक्षा विभाग मामले की जांच किस स्तर तक करता है और जांच में यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित जिम्मेदारी कैसे तय की जाती है।

फिलहाल नोटिस जारी होने की बात सामने नहीं आई है और विभाग की ओर से जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई किए जाने की बात कही गई है।

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