महासमुंद में ‘अधिकारियों का फुटबॉल खेल’: CEO और DDP की सुस्ती के बाद अब कलेक्टर विनय कुमार लंगेह के पाले में गेंद..!
क्या जिले के ‘प्रशासनिक मुखिया’ करेंगे न्याय? जांच में पक्के सबूतों के बावजूद सचिव मोतीलाल मेहरा पर मेहरबानी क्यों? कलेक्टर के कड़े रुख का इंतजार!
प्रधान संपादक मयंक गुप्ता / 13 अक्टूबर 2026 / दिन मंगलवार
महासमुंद (छत्तीसगढ़)
छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में पंचायती राज व्यवस्था और प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्राम पंचायत खैरा में पदस्थ विवादित सचिव मोतीलाल (मोती) मेहरा के खिलाफ गंभीर आरोपों की जांच पूरी होने और पुख्ता सबूत मिलने के बावजूद दंडात्मक कार्रवाई का लटकना अब जिला प्रशासन की नीयत पर सवाल खड़े कर रहा है।
हैरानी की बात यह है कि जब भी शिकायतकर्ता इस मामले पर अपडेट मांगता है, तो जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी (IAS) सुश्री अनुपमा आनंद और उप संचालक पंचायत (DDP) नितिन कौड़ो एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर ‘फाइलों का फुटबॉल’ खेलने में मशगूल नजर आते हैं।
ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है—जब निचले स्तर के अधिकारी जिम्मेदारी से भाग रहे हों, तो जिले के ‘प्रशासनिक पितामह’ यानी कलेक्टर विनय कुमार लंगेह खुद आगे आकर इस मामले में संज्ञान क्यों नहीं लेते?
24 जून की ‘ग्राम सभा’ और ‘पति-सरपंच’ संस्कृति का खुला खेल
पूरे विवाद की शुरुआत 24 जून 2026 को हुई, जब प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) जैसी जनहितकारी योजना की समीक्षा के लिए ग्राम पंचायत खैरा में महत्वपूर्ण ग्राम सभा बुलाई गई थी। नियमानुसार खैरा के सचिव मोतीलाल मेहरा को वहाँ उपस्थित रहना था।
लेकिन आरोप हैं कि सचिव महोदय खैरा की ग्राम सभा को ठेंगा दिखाकर ग्राम पंचायत खट्टी पहुँच गए। खट्टी पंचायत में जाने की वजह कोई शासकीय कार्य नहीं, बल्कि यह थी कि वहाँ की सरपंच उनकी पत्नी श्रीमती अनिता मेहरा हैं।
अनाधिकृत दखल: खट्टी पहुँचकर सचिव महोदय पर शासकीय कार्यवाही में अनुचित हस्तक्षेप करने और ग्रामीणों से अभद्र व्यवहार करने के आरोप लगे।
नियमों की अवहेलना: शासन के स्पष्ट आदेश हैं कि महिला जनप्रतिनिधियों के काम में उनके पति या रिश्तेदार हस्तक्षेप नहीं करेंगे। इसके बावजूद शासकीय पद पर तैनात पति का दूसरी पंचायत में ‘सुपर-सरपंच’ की भूमिका में दिखना प्रशासनिक ढिलाई को दर्शाता है।
06 अगस्त को जांच संपन्न, फिर भी कार्रवाई पर ‘ब्रेक’
मामले की गंभीरता को देखते हुए 15 जुलाई 2026 को शिकायत दर्ज कराई गई, जिसके बाद जनपद पंचायत महासमुंद द्वारा जांच टीम गठित की गई (जांच आदेश क्रमांक: पंचा./शिक्षा/2026/1594)।
06 अगस्त 2026 को ग्राम पंचायत खट्टी के भवन में खुली जांच हुई। दर्जनों ग्रामीणों ने उपस्थित होकर अपने बयान दर्ज कराए। जांच टीम के समक्ष
उपस्थिति रजिस्टर की फोटोकॉपी,
बैठक की तस्वीरें,
खैरा ग्राम सभा से अनुपस्थिति के पुख्ता प्रमाण,
और गवाहों के दर्ज बयान सौंपे गए।
सबूत चीख-चीखकर सचिव की लापरवाही और अनाधिकृत हस्तक्षेप की तस्दीक कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद फाइलों को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है।
’फाइलों के फुटबॉल’ के बीच Collector साहब से 5 बेबाक सवाल
जब जिला पंचायत के अधिकारी कार्रवाई करने से कतरा रहे हैं और मामला एक टेबल से दूसरे टेबल पर टहलाया जा रहा है, तो अब जिले के सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारी कलेक्टर विनय कुमार लंगेह के नेतृत्व पर ही सबकी निगाहें टिक गई हैं। क्षेत्रवासी और शिकायतकर्ता उनसे सीधे सवाल पूछ रहे हैं:
1 क्या कलेक्टर साहब संज्ञान लेंगे..?
जिला पंचायत सीईओ और डीडीपी के बीच झूल रही फाइल पर जिले के मुखिया होने के नाते कलेक्टर विनय कुमार लंगेह खुद अंतिम निर्णय कब करवाएंगे?
2 जांच रिपोर्ट पर चुप्पी क्यों..?
यदि 06 अगस्त की जांच में आरोप प्रमाणित हो चुके हैं, तो दोषी सचिव पर कार्रवाई रोकने वाला ‘अदृश्य हाथ’ किसका है?
3 निर्दोष हैं तो रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं..?
यदि सचिव पर लगे आरोप सही नहीं पाए गए, तो प्रशासन क्लीन चिट देकर मामले का पटाक्षेप सार्वजनिक रूप से क्यों नहीं करता?
4 ’सुशासन’ के दावों का क्या..?
क्या महासमुंद जिले में सुशासन का मतलब सिर्फ फाइलों की अदला-बदली है, या फिर दोषियों पर कड़ा प्रहार भी होगा..?
5 पारदर्शिता पर भरोसा कब लौटेगा..?
ग्रामीणों के बयानों और दस्तावेजों को नजरअंदाज कर भ्रष्टाचारियों को संरक्षण देने वाली इस परिपाटी पर कलेक्टर साहब कब नकेल कसेंगे?
निष्कर्ष: अब कलेक्टर विनय कुमार लंगेह के ‘कड़े फैसले’ का इंतजार
पंचायती राज व्यवस्था का आधार ही जनता का भरोसा और प्रशासनिक जवाबदेही है। जब निचले स्तर के अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हैं, तो जनता अपने जिले के कलेक्टर की ओर उम्मीद से देखती है।
महासमुंद की जनता अब कलेक्टर विनय कुमार लंगेह से यह उम्मीद लगाए बैठी है कि वे इस ‘प्रशासनिक सुस्ती’ और ‘फाइलों के खेल’ का संज्ञान लेंगे, जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक करवाएंगे और दोषी सचिव के खिलाफ कड़ा दंडात्मक कदम उठाकर जिले में प्रशासनिक अनुशासन की मिसाल पेश करेंगे।
सीधा सवाल: “क्या कलेक्टर विनय कुमार लंगेह इस मामले में निष्पक्ष हस्तक्षेप कर भ्रष्टाचारियों को कड़ा संदेश देंगे, या फाइलों का यह फुटबॉल मैच ऐसे ही चलता रहेगा?”
