​​”महासमुंद कृषि विभाग के उप संचालक फागुराम कश्यप का जलवा बरकरार, ‘कलेक्टर जैसा रौब’ और रसूख के साथ डटे हुये है …!!

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​​”महासमुंद कृषि विभाग के उप संचालक फागुराम कश्यप का जलवा बरकरार, ‘कलेक्टर जैसा रौब’ और रसूख के साथ डटे हुये है …!!

नोटिस और स्पष्टीकरण की लंबी सूची फिर भी कोई कार्यवाही नहीं, सिस्टम पर बड़ा सवाल..?

प्रधान संपादक मयंक गुप्ता/ 12 अक्टूबर 2026/ दिन सोमवार
​महासमुंद / ​छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में कृषि विभाग और जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन (WDC-PMKSY 2.0) भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अराजकता का अड्डा बनता नजर आ रहा है। पूरे मामले की सुई अब जिले के उप संचालक कृषि (DDA) फागुराम कश्यप की कार्यप्रणाली और उनकी संदिग्ध भूमिका की ओर घूम गई है।

​सरायपाली विधानसभा की महिला विधायक श्रीमती चातुरी नंद द्वारा विधानसभा में मुद्दा उठाए जाने, राज्य स्तर से कारण-बताओ नोटिस जारी होने और विभाग में वित्तीय घोटालों की भरमार के बावजूद फागुराम कश्यप पर कार्रवाई न होना, इस आशंका को मजबूत करता है कि कश्यप के नेतृत्व में जिले में भ्रष्टाचार को खुला बढ़ावा दिया जा रहा है।

​1. फागुराम कश्यप को किसका संरक्षण? विधायक श्रीमती चातुरी नंद के बयानों से हड़कंप

​सरायपाली विधायक श्रीमती चातुरी नंद ने विभागीय गलियारों में मचे घमासान के बीच बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। विधायक का स्पष्ट कहना है कि उप संचालक कृषि फागुराम कश्यप को शासकीय नोटिस जारी होने और उनके कार्यकाल के दौरान लगातार गंभीर धांधली उजागर होने के बाद भी विभागीय स्तर पर कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई।

​प्रशासनिक संरक्षण का आरोप: विधायक के अनुसार, फागुराम कश्यप को उच्च स्तर पर “प्रशासनिक संरक्षण” प्राप्त है, जिसके दम पर वे विभागीय नियमों और वित्तीय पारदर्शिता को दरकिनार कर खुलेआम काम कर रहे हैं।

​सदन से सड़क तक गूंज: विधानसभा में मामला उठने के बावजूद कश्यप की कुर्सी का सुरक्षित रहना यह दर्शाता है कि कृषि विभाग में उच्चाधिकारियों की मिलीभगत किस कदर गहरी है।

​2. WDC-PMKSY 2.0 में करोड़ों/लाखों का गबन: उप संचालक की निगरानी पर सवाल

​छ.ग. राज्य जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन एजेंसी (SLNA) द्वारा महासमुंद के उप संचालक कृषि सह परियोजना प्रबंधक (WCDC) को जारी ‘कारण-बताओ नोटिस’ से यह साफ हो गया है कि फागुराम कश्यप के प्रशासनिक नियंत्रण में योजनाओं में भारी वित्तीय अनियमितता हुई है।

​निजी खातों में सरकारी पैसा: कश्यप के अधीन कार्यरत WDT कर्मचारियों द्वारा मजदूरी भुगतान की राशि को सीधे अपने निजी बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया।

​₹18.95 लाख का अवैध आहरण: शासकीय वित्त निर्देशों का उल्लंघन करते हुए ₹18,95,849/- जैसी बड़ी राशि का ई-पेमेंट के बिना गबन किया गया।

​वेंडरों पर मेहरबानी व फर्जीवाड़ा: नियमों के खिलाफ जाकर ₹10 लाख का एडवांस भुगतान किया गया, बिना जियो-टैगिंग के काम दिखाए गए, और बिना सत्यापन के एक ही वेंडर को बार-बार भुगतान कर सरकारी खजाने को चूना लगाया गया।

​इन तमाम वित्तीय अनियमितताओं के दौरान परियोजना प्रमुख के रूप में फागुराम कश्यप की मौन स्वीकृति और जांच न कराना उनके सीधे संरक्षण की ओर इशारा करता है।

​3. जैविक खेती और DMF में ‘कश्यप का दोहरा खेल’: पात्र किसान ठगे गए

​बागबाहरा विकासखंड सहित पूरे जिले में कृषि योजनाओं के वितरण में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा सामने आया है।

​एक ही किसान को दोहरा लाभ: वर्ष 2024-25 में ‘जैविक खेती मिशन’ के तहत दिए गए बैटरी स्प्रेयर की सूची में शामिल किसानों को ही वर्ष 2025-26 में ‘DMF मद’ से दोबारा मशीनें बांट दी गईं।

​दस्तावेजी साक्ष्य: जैविक खेती योजना की सूची के स्पष्ट कॉलम से यह प्रमाणित होता है कि उप संचालक कार्यालय की नाक के नीचे किस प्रकार अपात्रों पर सरकारी खजाना लुटाया गया और वास्तविक जरूरतमंद किसानों को वंचित रखा गया।

​PMKKKY नियमों का उल्लंघन: खनन प्रभावित क्षेत्रों के लिए सुरक्षित DMF बजट का कश्यप के कार्यकाल में अनधिकृत रूप से गैर-प्रभावित क्षेत्रों में बंदरबांट किया गया।

​4. कमार जनजातीय किसान की मौत: क्या कश्यप की शह पर हुई लीपापोती..?

​बागबाहरा के ग्राम बैहाडीह के विशेष संरक्षित कमार जनजाति के किसान की कृषि विभाग के ओडिशा (कालाहांडी) अध्ययन भ्रमण के दौरान हुई संदिग्ध मौत ने इस मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।

​अधिकारियों को बचाने का खेल: आरोप है कि उप संचालक फागुराम कश्यप के संरक्षण में कार्यरत बागबाहरा के प्रभारी senior अधिकारी श्री गंगा प्रसाद शरणागत ने इस पूरी घटना को दबाने और वरिष्ठ अधिकारियों व मीडिया से छिपाने का प्रयास किया।

​बिना पारदर्शी जांच के शव रवाना: जनजातीय किसान की मृत्यु किन परिस्थितियों में हुई, इसका खुलासा किए बिना मामले में लीपापोती की गई और अब तक किसी अधिकारी पर FIR दर्ज नहीं कराई गई है।

​जनहित में उठीं मुख्य मांगें

1 ​उप संचालक फागुराम कश्यप का तत्काल निलंबन: प्रशासनिक संरक्षण के आरोपों और वित्तीय घोटालों की निष्पक्ष जांच हेतु फागुराम कश्यप को तुरंत पद से हटाया जाए।

2 ​घोटाले की उच्चस्तरीय / EOW जांच: WDC-PMKSY 2.0 और DMF मद में हुए लाखों रुपये के गबन की निष्पक्ष एजेंसी से जांच कराकर कश्यप व संबंधित कर्मियों से राशि की वसूली की जाए।

3 ​कमार किसान की मौत पर FIR: अध्ययन भ्रमण के दौरान हुई मौत के जिम्मेदार विभागीय अधिकारियों पर गैर-इरादतन हत्या व लापरवाही की FIR दर्ज कराई जाए।

4 ​दोहरे वितरण की जांच: जैविक खेती और DMF योजना की सूचियों के मिलान के आधार पर फर्जीवाड़ा करने वाले अधिकारियों की सेवा समाप्त की जाए।

​संपादकीय दृष्टिकोण: महासमुंद कृषि विभाग में सामने आ रहे एक के बाद एक घोटालों से यह साफ है कि उप संचालक फागुराम कश्यप के कार्यकाल में भ्रष्टाचार ने संस्थागत रूप ले लिया है। अब देखना यह होगावी कि राज्य शासन और जिला प्रशासन महिला विधायक के आरोपों व आधिकारिक नोटिसों पर संज्ञान लेकर क्या कड़ा एक्शन उठाता है।

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