महासमुंद के नए कलेक्टर के रूप में उभर रहे – उप संचालक कृषि अधिकारी फागुराम कश्यप..!
कृषि विभाग में नियमों की धज्जियां: 1 साल पहले रिलीव हुए जितेंद्र पटेल अब भी कुर्सी पर कायम क्यों..?
प्रधान संपादक मयंक गुप्ता /10 अक्टूबर 2026 / दिन शनिवार
महासमुंद। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले का कृषि विभाग इन दिनों भ्रष्टाचार, प्रशासनिक अव्यवस्था और अफसरों की बेलगाम तानाशाही का गढ़ बन चुका है। विभाग में शासकीय आदेशों और नियमों को ताक पर रखकर चहेते कर्मचारियों को खुलेआम संरक्षण दिया जा रहा है। स्थानीय चर्चाओं और विभागीय गलियारों में यह बात जोर पकड़ रही है कि उप संचालक (DD) फागुराम कश्यप खुद को महासमुंद के ‘कलेक्टर’ की उपाधि से ऊपर मानकर सारे नियम-कानूनों की धज्जियां उड़ाते हुए मनमाने निर्णय ले रहे हैं।
एक तरफ जहाँ रिलीविंग आदेश के एक वर्ष बीत जाने के बावजूद ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी (RAEO) जितेंद्र पटेल जिला मुख्यालय में ही जमे हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ उप संचालक फागुराम कश्यप पर तानाशाही रवैये और किसानों को अपमानित करने के गंभीर आरोप लगे हैं। इस दोहरे संकट के कारण जहाँ एक ओर अधिकारी-कर्मचारी संघ काम बंद हड़ताल पर चले गए थे, वहीं दूसरी ओर भारतीय किसान संघ ने भी प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
1. कागजों में रिलीव, धरातल पर ‘कुर्सी मोह’: जानिए क्या है पूरा मामला
विभागीय दस्तावेजों के अनुसार, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी जितेंद्र पटेल की मूल पदस्थापना पिथौरा के वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी कार्यालय में है। जिला कार्यालय से उन्हें पिथौरा भेजने के लिए उप संचालक कार्यालय द्वारा आदेश क्रमांक/स्था./भारमुक्त/2025-26/5771 (दिनांक 13/10/2025) जारी किया गया था।
इस आदेश में जितेंद्र पटेल को तत्काल प्रभाव से अपना समस्त प्रभार अन्य अधिकारी (भूषण साहू) को सौंपकर पिथौरा में उपस्थिति दर्ज कराने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि, आदेश जारी होने के पूरे 1 साल बाद भी पटेल को केवल कागजों में ही कार्यमुक्त (रिलीव) दिखाया गया है। वे आज भी महासमुंद के उप संचालक कार्यालय में अटैचमेंट का अनुचित लाभ उठाते हुए अपनी कुर्सी पर डटे हुए हैं।
2. ‘कलेक्टर’ की भांति मनमानी कर रहे उप संचालक फागुराम कश्यप!
इस पूरे प्रशासनिक घालमेल में कृषि विभाग के उप संचालक फागुराम कश्यप की कार्यप्रणाली सबसे ज्यादा सवालों के घेरे में है। कर्मचारियों का आरोप है कि कश्यप जिला प्रशासन और शासन के नियमों को ठेंगा दिखाते हुए खुद को जिले का सर्वेसर्वा मान चुके हैं:
विवादों से पुराना नाता: फागुराम कश्यप पूर्व में गरियाबंद जिले में पदस्थापना के दौरान निलंबन (सस्पेंशन) की कार्रवाई का सामना कर चुके हैं।
नियमों की अनदेखी: महासमुंद जिले में उनका कार्यकाल 3 वर्ष से अधिक समय का हो चुका है। सामान्य स्थानांतरण नियमों के बावजूद उन्हें इतने लंबे समय तक एक ही स्थान पर बनाए रखना प्रशासनिक संरक्षण और रणनीतियों पर कई सवाल खड़े करता है।
ताकत का दुरुपयोग: कर्मचारियों का आरोप है कि उप संचालक की शह पर ही जितेंद्र पटेल जैसे अधिकारी मनमानी कर रहे हैं और वरिष्ठ अधिकारियों का भय दिखाकर कर्मचारियों पर अनुचित दबाव बना रहे हैं।
3. कर्मचारियों में भारी आक्रोश: काम बंद हड़ताल और उग्र आंदोलन की चेतावनी
छत्तीसगढ़ कृषि स्नातक शासकीय कृषि अधिकारी संघ और ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों ने इस तानाशाही के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है।
कर्मचारियों के मुख्य आरोप एवं मांगें:
अमर्यादित व्यवहार: मैदानी कर्मचारियों का आरोप है कि जितेंद्र पटेल लंबे समय से कर्मचारियों के साथ अभद्र व्यवहार कर रहे हैं।
एक वर्ष पूर्व एकसूत्रीय मांग: कर्मचारियों ने स्पष्ट कर दिया था कि जब तक जितेंद्र पटेल को पिथौरा स्थित मूल पदस्थापना स्थल पर नहीं भेजा जाता, वे काम पर वापस नहीं लौटेंगे और ऐसा हुआ भी फिर राजनीतिक पकड़ इतनी मजबूत की संघ की मांगों को दरकिनार करते हुए की जा रही है मनमानी
राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी: संघ के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि महासमुंद जिला प्रशासन और रायपुर मुख्यालय ने तुरंत ठोस कदम नहीं उठाए, तो इस आंदोलन को पूरे छत्तीसगढ़ में उग्र रूप दिया जाएगा।
4. अन्नदाताओं का अपमान: भारतीय किसान संघ ने खोला कलेक्टर के सामने मोर्चा
प्रशासनिक घपले के बीच किसानों के साथ दुर्व्यवहार की घटना ने आग में घी का काम किया है। भारतीय किसान संघ (BKS) की महासमुंद जिला इकाई ने डिप्टी डायरेक्टर एग्रीकल्चर (DDA) एफ.आर. कश्यप पर किसानों को अपमानित करने का आरोप लगाया है।
अपनी कृषि संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए गए किसानों के साथ अधिकारी द्वारा असम्मानजनक और दुर्व्यवहारपूर्ण व्यवहार किया गया। इस घटना से आक्रोशित सैकड़ों किसानों ने एकजुट होकर जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा और कश्यप को तत्काल पद से हटाने या निलंबित करने की मांग की।
ज्ञापन सौंपने वाले प्रमुख किसान नेताओं में कौशल्या तिवारी, शोभ कुमार साहू, रूपेश कुमार, भेख लाल साहू, नेम लाल चंद्राकर, अश्वनी साहू, सोहन, चगन साहू, हेमंत साहू और कुंदन सहित कई अन्य किसान शामिल थे।
5. धान खरीदी से ठीक पहले बढ़ा संकट, किसान परेशान
धान कटाई का सीजन सिर पर है और 15 नवंबर से राज्य में सरकारी धान खरीदी शुरू होने वाली है। ऐसे संवेदनशील समय में कृषि विभाग के कर्मचारियों की हड़ताल और किसानों के आक्रोश से स्थिति बेहद चिंताजनक हो गई है।
तकनीकी सलाह, खाद-बीज का वितरण और शासकीय कृषि योजनाओं का क्रियान्वयन पूरी तरह ठप होने की कगार पर है। इस पूरे प्रशासनिक विवाद, कथित फिजूलखर्ची और नियम विरुद्ध पदस्थापना पर अब तक जिला प्रशासन या कृषि विभाग के आला अधिकारियों की तरफ से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। अब देखना होगा कि शासन-प्रशासन इस मामले पर क्या कड़ा रुख अपनाता है।
