रायपुर के उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में दो धुरंधर कर्मचारी 14-15 सालों से एक ही वित्तीय शाखा में जमे है,आय से अधिक संपत्ति की जांच की मांग IHRF ने की।

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रायपुर के उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में दो धुरंधर कर्मचारी 14-15 सालों से एक ही वित्तीय शाखा में जमे है,आय से अधिक संपत्ति की जांच की मांग IHRF ने की।

—नवीन रोशन बेक और जेम्स सैलवा राज अन्नास्वामी; फाउंडेशन ने दूरस्थ ट्रांसफर और पूरे कार्यकाल के ऑडिट की मांग की

प्रधान संपादक मयंक गुप्ता/30 सितम्बर 2026/ दिन बुधवार
रायपुर। छत्तीसगढ़ के महत्वपूर्ण संरक्षित क्षेत्र उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में व्यवस्था एवं व्यय शाखा से जुड़े दो कर्मचारियों की लंबे समय तक एक ही कार्यालय में निरंतर पदस्थापना को लेकर गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं। शिकायतों और उपलब्ध दस्तावेजों में जिन दो नामों को बार-बार दोहराया जा रहा है, वे हैं—सहायक ग्रेड-2 नवीन रोशन बेक और सहायक ग्रेड-2 जेम्स सैलवा राज अन्नास्वामी। दोनों पर करीब 14-15 साल से उसी संवेदनशील वित्तीय शाखा में जमे रहने का आरोप है। आरटीआई और पूर्व शिकायतों के बावजूद कोई ठोस प्रशासनिक कार्रवाई न होने का आरोप लग रहा है। अंतर्राष्ट्रीय मानव अधिकार फाउंडेशन ने अब इन दोनों के दूरस्थ स्थानांतरण, सेवा रिकॉर्ड जांच और पूरे कार्यकाल के वित्तीय ऑडिट की मांग रख दी है।
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व राज्य के वन एवं वन्यजीव संरक्षण का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसका प्रशासनिक ढांचा वन विभाग के अधीन संचालित होता है। शिकायतकर्ता पक्ष के अनुसार, व्यवस्था एवं व्यय शाखा—जहां भुगतान, बिल-वाउचर, वित्तीय स्वीकृतियां और अभिलेख रखरखाव जैसे संवेदनशील काम होते हैं—में ये दोनों कर्मचारी लंबे समय से एक ही जगह बैठे हैं।

नवीन रोशन बेक: 2011-12 से लगातार एक ही जगह

शिकायत में दर्ज जानकारी के मुताबिक, नवीन रोशन बेक वर्ष 2011-12 से सहायक ग्रेड-3 के रूप में संबंधित कार्यालय में पदस्थ रहे। 6 दिसंबर 2016 को उन्हें सहायक ग्रेड-2 में पदोन्नति मिली, लेकिन पदोन्नति के बाद भी वे उसी कार्यालय और उसी शाखा में बने रहे। अगर शिकायत की अवधि सही साबित होती है तो उनकी एक ही जगह निरंतर उपस्थिति लगभग 14-15 वर्ष तक पहुंच जाती है।

जेम्स सैलवा राज अन्नास्वामी: 2012-13 से जमे

दूसरे कर्मचारी जेम्स सैलवा राज अन्नास्वामी वर्ष 2012-13 से सहायक ग्रेड-3 के रूप में कार्यरत बताए जाते हैं। 21 नवंबर 2019 को उन्हें सहायक ग्रेड-2 में पदोन्नति मिली, लेकिन वे भी उसी कार्यालय में पदस्थ रहे। उनकी भी एक ही शाखा में निरंतर पदस्थापना की अवधि करीब 13-14 वर्ष बताई जा रही है।

दोनों के मामले में शिकायतकर्ता पक्ष का कहना है कि लंबे समय तक एक ही संवेदनशील वित्तीय पद पर बैठे रहने से भुगतान प्रक्रियाओं, बिल-वाउचर, स्वीकृतियों और अभिलेखों की निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। फिलहाल किसी वित्तीय अनियमितता या घोटाले को स्थापित तथ्य नहीं कहा जा सकता। इसके लिए विभागीय जांच और मूल दस्तावेजों का परीक्षण जरूरी है।

आरटीआई और शिकायतों के बाद भी कार्रवाई नहीं

शिकायतकर्ता पक्ष का आरोप है कि इन दोनों कर्मचारियों की लंबी पदस्थापना को लेकर पहले भी शिकायतें की गईं और आरटीआई के जरिए जानकारी मांगी गई। छत्तीसगढ़ शासन का आधिकारिक आरटीआई पोर्टल नागरिकों को आवेदन और अपील की सुविधा देता है, लेकिन विभाग की ओर से अपेक्षित प्रशासनिक समीक्षा या कार्रवाई अभी तक सामने नहीं आई है। अब मुख्य सवाल यही है कि अगर दस्तावेजों में लंबी पदस्थापना की पुष्टि होती है तो विभाग ने अब तक क्या परीक्षण किया? पदस्थापना अवधि, कार्य-विभाजन और वित्तीय दायित्वों की समीक्षा हुई या नहीं..?

फाउंडेशन की साफ मांग: दोनों का दूरस्थ ट्रांसफर और पूरे कार्यकाल का ऑडिट

अंतर्राष्ट्रीय मानव अधिकार फाउंडेशन ने उच्च अधिकारियों के समक्ष शिकायत रखते हुए कहा है कि संवेदनशील वित्तीय शाखा में लंबे समय तक एक ही कर्मचारी के रहने पर शिकायत आने के बाद निष्पक्षता बनाए रखने के लिए पहले प्रशासनिक स्तर पर स्थानांतरण किया जा सकता है। इसके बाद संबंधित अवधि के अभिलेखों की स्वतंत्र जांच कराई जा सकती है।

फाउंडेशन द्वारा प्रस्तावित स्थानांतरण में—

जेम्स सैलवा राज अन्नास्वामी (सहायक ग्रेड-2) को वन परिसर वाई-नगर, बलरामपुर वन मंडल, सरगुजा संभाग में, तथा

नवीन रोशन बेक (सहायक ग्रेड-2) को दोरीपाल वन परिसर, जिला सुकमा, बस्तर संभाग में
पदस्थ करने का सुझाव दिया गया है। अंतिम निर्णय सक्षम विभागीय प्राधिकारी नियमों, संवर्ग और प्रशासनिक आवश्यकता के अनुसार ही लेंगे।

फाउंडेशन ने दोनों कर्मचारियों के संबंधित शाखा में कार्यरत रहने की पूरी अवधि के दौरान किए गए शासकीय भुगतानों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच की मांग की है। जांच के दायरे में विशेष रूप से बिल-वाउचर, भुगतान आदेश, वित्तीय स्वीकृतियां, कार्यादेश, सेवा संबंधी रिकॉर्ड और अन्य वित्तीय दस्तावेजों का परीक्षण शामिल करने को कहा गया है। यदि जांच में कोई अनियमितता सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार विभागीय और कानूनी कार्रवाई की मांग भी की गई है।

प्रशासन के सामने ये बड़े सवाल

क्या नवीन रोशन बेक और जैस सैलवा राज अन्नास्वामी की इतने लंबे समय की पदस्थापना नियमानुसार और सक्षम अधिकारी की स्वीकृति से हुई..?

क्या उनकी पदस्थापना और कार्य-विभाजन की समय-समय पर समीक्षा की गई..?

क्या एक ही वित्तीय शाखा में 14-15 साल तक कार्य करने से उत्पन्न संभावित हित-संघर्ष या प्रशासनिक जोखिम का आकलन किया गया..?

आरटीआई और शिकायतों में आए दस्तावेजों पर विभाग ने क्या परीक्षण किया..?

क्या दोनों के पूरे कार्यकाल के वित्तीय रिकॉर्ड का स्वतंत्र ऑडिट कराया जाएगा..?

फाउंडेशन ने शीघ्र प्रशासनिक निर्णय लेने की मांग के साथ अल्टीमेटम भी दिया है। यदि शिकायत में प्रस्तुत दस्तावेजों का निष्पक्ष परीक्षण नहीं हुआ और लंबे समय से चली आ रही पदस्थापना पर विभाग ने स्पष्ट निर्णय नहीं लिया, तो संगठन आंदोलन और कानूनी प्रक्रिया का रास्ता अपनाने की चेतावनी दे रहा है।

अब निगाहें वन विभाग के उच्च अधिकारियों पर टिकी हैं। क्या विभाग नवीन रोशन बेक और जैस सैलवा राज अन्नास्वामी के खिलाफ लगाए गए आरोपों और आरटीआई दस्तावेजों की स्वतंत्र जांच कराएगा? क्या इन दोनों की पदस्थापना की समीक्षा होगी? और क्या वर्षों से जुड़े वित्तीय रिकॉर्ड का निष्पक्ष ऑडिट कराया जाएगा? इन सवालों का जवाब अब विभागीय कार्रवाई और आधिकारिक जांच से ही सामने आएगा।

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