जनपद से निजी संस्थान तक DSC का खेल..! संकाय शाखा की समृद्धि शर्मा के अधीन काम सीखने वाले महेंद्र वर्मा अब निजी सेंटर में पंचायतों की DSC से करते दिखे काम

0
3

जनपद से निजी संस्थान तक DSC का खेल..! संकाय शाखा की समृद्धि शर्मा के अधीन काम सीखने वाले महेंद्र वर्मा अब निजी सेंटर में पंचायतों की DSC से करते दिखे काम

खैरा-सिरपुर समेत कई पंचायतों के डिजिटल सिग्नेचर टोकन निजी परिसर में मिलने से उठे गंभीर सवाल; 39 लाख के पुराने मामले से भी जुड़ रही जांच की कड़ियां

विशेष रिपोर्ट: मयंक गुप्ता, प्रधान संपादक | 29 सितम्बर 2026 | दिन मंगलवार
महासमुंद। जनपद पंचायत महासमुंद की संकाय शाखा में पदस्थ श्रीमती समृद्धि शर्मा और उनके अधीन कार्य सीखने वाले सहायक महेंद्र कुमार वर्मा की भूमिका को लेकर पंचायतों के डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट (DSC) के उपयोग का मामला अब सवालों के घेरे में है।

मीडिया पड़ताल के दौरान महेंद्र कुमार वर्मा जनपद पंचायत परिसर से बाहर एक निजी संस्थान के कार्यालय में पंचायतों की DSC से ऑनलाइन कार्य करते दिखाई दिए। मौके पर अलग-अलग ग्राम पंचायतों के नाम से चिन्हित डिजिटल सिग्नेचर टोकन भी रखे दिखाई देने का दावा किया गया है।

जनपद से बाहर, निजी संस्थान में पंचायतों का काम..?

पड़ताल के दौरान खैरा और सिरपुर पंचायतों के DSC से ऑनलाइन कार्य किए जाने की स्थिति सामने आने की बात कही गई। इसके अलावा बिरझर और तोरला पंचायतों के नाम से चिन्हित DSC टोकन भी मौके पर दिखाई दिए।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि पंचायतों के आधिकारिक DSC जनपद पंचायत की निर्धारित व्यवस्था से बाहर निजी संस्थान तक कैसे पहुंचे?

यदि महेंद्र वर्मा वर्तमान में संबंधित पंचायतों के अधिकृत DSC ऑपरेटर नहीं हैं, तो उनके द्वारा इन डिजिटल सिग्नेचर का इस्तेमाल किस अनुमति और अधिकार के तहत किया जा रहा था—यह जांच का विषय है।

समृद्धि शर्मा के अधीन सीखा काम, अब निजी संस्थान में DSC संचालन..?

मामले में श्रीमती समृद्धि शर्मा की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। बताया जाता है कि महेंद्र कुमार वर्मा ने उनके अधीन रहते हुए पंचायत संबंधी ऑनलाइन एवं DSC से जुड़े कार्य सीखे थे।

अब जनपद पंचायत से बाहर निजी संस्थान में उनके द्वारा पंचायतों के DSC से काम करते दिखाई देने की स्थिति सामने आने के बाद यह जांच जरूरी हो गई है कि DSC की अभिरक्षा और उसके उपयोग की जिम्मेदारी आखिर किसके पास थी।

39 लाख की पुरानी फाइल भी फिर चर्चा में

महासमुंद जनपद पंचायत में करीब 39 लाख रुपये के कथित वित्तीय अनियमितता मामले को लेकर पहले से शिकायत और जांच की चर्चा रही है। अब DSC के कथित निजी उपयोग का मामला सामने आने के बाद पुराने वित्तीय प्रकरण की भी डिजिटल रिकॉर्ड के साथ जांच किए जाने की मांग उठ सकती है।

जांच में यह देखा जाना जरूरी है कि संबंधित DSC से किन तारीखों में, किस स्थान से और कितने वित्तीय लेनदेन किए गए।

अब इन सवालों के जवाब जरूरी

महेंद्र वर्मा को पंचायतों की DSC इस्तेमाल करने की अनुमति किसने दी?

क्या निजी संस्थान से पंचायतों का ऑनलाइन वित्तीय कार्य अधिकृत था?

समृद्धि शर्मा की निगरानी में DSC की व्यवस्था किस प्रकार संचालित होती थी?
खैरा, सिरपुर, बिरझर और तोरला के DSC निजी परिसर में कैसे पहुंचे?

39 लाख रुपये के पुराने मामले से जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड की भी जांच होगी या नहीं?

पंचायतों की DSC से जुड़े मामले में अब केवल मौखिक स्पष्टीकरण पर्याप्त नहीं होगा। DSC लॉग, ऑनलाइन ट्रांजेक्शन, भुगतान रिकॉर्ड और अधिकृत उपयोगकर्ताओं की जानकारी सामने आने पर ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

अब निगाह इस बात पर है कि जनपद पंचायत और जिला प्रशासन इस कथित DSC नेटवर्क की जांच कर महेंद्र वर्मा, समृद्धि शर्मा तथा अन्य संबंधित जिम्मेदारों की भूमिका को रिकॉर्ड के आधार पर स्पष्ट करता है या नहीं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here