मौत के साए में ‘भविष्य’! महासमुंद के आदिवासी बालक छात्रावास की छत से गिर रहे पत्थर, विभाग को बड़े हादसे का इंतजार

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मौत के साए में ‘भविष्य’! महासमुंद के आदिवासी बालक छात्रावास की छत से गिर रहे पत्थर, विभाग को बड़े हादसे का इंतजार

रिपोर्टर मयंक गुप्ता/दिन रविवार/ दिनांक 13 सितंबर 2026
​महासमुंद। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिला मुख्यालय स्थित ‘शासकीय पोस्ट मैट्रिक आदिवासी बालक छात्रावास (खैरा)’ की हालत इतनी बदतर और जर्जर हो चुकी है कि यहाँ रह रहे दर्जनों मासूम छात्रों की जान हर पल खतरे में है। इमारत की स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि केवल एक डंडे से हल्का सा छूने पर भी छत का प्लास्टर उखड़कर नीचे गिरने लगता है।
​हाल ही में जब छात्र सुबह की प्रार्थना के लिए एकत्रित हुए थे, उसी दौरान छत का एक बड़ा हिस्सा टूटकर नीचे आ गिरा। किस्मत से उस समय कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ, लेकिन जर्जर छत, फटी दीवारें, टूटे फर्श और क्षतिग्रस्त खिड़की-दरवाजे किसी बड़े हादसे को न्योता दे रहे हैं।

​33kV हाईटेंशन लाइन और झुका पेड़: मंडरा रहा दोहरा खतरा

​छात्रावास परिसर के बिल्कुल किनारे एक काफी पुराना और विशाल पेड़ स्थित है, जिसकी डालियां 33kV हाईटेंशन विद्युत लाइन की ओर झुकी हुई हैं। मामूली हवा या आंधी चलने पर भी पेड़ की टहनियां तारों से टकराती हैं, जिससे आए दिन भीषण स्पार्किंग होती है। बरसात के मौसम में पेड़ के गिरने या करंट फैलने का गंभीर खतरा बना हुआ है, जिसे लेकर छात्रावास प्रशासन ने बिजली विभाग (CPDCL) के कनिष्ठ यंत्री को पत्र लिखकर पेड़ कटवाने की मांग की है।

​आंकड़ों का खेल और बदहाली का शिकार छात्र

​छात्रावास में सीटों के आवंटन और जमीनी हकीकत में भी भारी लापरवाही सामने आई है।

​अनुसूचित जनजाति (ST) छात्रावास: 50 सीटों की स्वीकृत क्षमता में से 40 सीटें भरी गई हैं।

​अनुसूचित जाति (SC) छात्रावास: 50 सीटों में से केवल 12 छात्र ही पंजीकृत हैं।

​चौंकाने वाली बात यह है कि अनुसूचित जाति (SC) के छात्रों को भी इसी जर्जर और बदहाल आदिवासी छात्रावास भवन में रहने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। छात्रावास अधीक्षक छन्नू लाल साहू के अनुसार, इस छात्रावास के लिए महासमुंद के ग्राम परसकोल मार्ग पर नया भवन स्वीकृत (सैंक्शन) हुआ है, लेकिन आज तक वहां निर्माण कार्य की एक ईंट भी नहीं रखी गई है।

​जिले का सेंट्रल स्टोर बना जर्जर भवन, लाखों के सामान की बलि चढ़ने का अंदेशा

​महासमुंद विकासखंड के समस्त आदिवासी छात्रावासों के लिए विभागीय उपकरण और सामग्रियों का संग्रहण (स्टोर) इसी बदहाल इमारत में किया जाता है। यहाँ से जिले भर में वितरण होता है। इमारत की हालत इतनी नाजुक है कि यदि कोई दुर्घटना होती है, तो छात्रों की जान के साथ-साथ शासन का लाखों रुपये का सामान भी एक झटके में मलबे में तब्दील हो जाएगा।

​5 सालों से पत्राचार, पर सो रहा आदिवासी विकास विभाग

​छात्रावास अधीक्षक मोहनीश दीवान और छन्नू लाल साहू के कथनानुसार पिछले 5-6 वर्षों से लगातार विभाग के चक्कर काट रहे हैं। लेकिन कोई सुनता ही नहीं है। हम भी मजबूर है।

​पत्रों की लंबी फेहरिस्त: 19 दिसंबर 2025 को सहायक आयुक्त (आदिवासी विकास विभाग) को पत्र लिखकर नए भवन निर्माण और तात्कालिक मरम्मत की गुहार लगाई गई थी।

​अनुरक्षण मद से गुहार: पत्र क्रमांक 26/2021 के जरिए 10 कमरों की दीवारें, 15 नए दरवाजे, 15 नई खिड़कियां, 35 वेंटिलेशन ग्रिल, 8 शौचालय (सीट व टाइल्स) और 6 स्नानागारों के मरम्मत की मांग की जा चुकी है।

​इसके बावजूद आदिवासी विकास विभाग की सहायक आयुक्त श्रीमती शिल्पा साय (जो बीते लगभग 4 वर्षों से पदस्थ हैं) और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के कानों में जूं तक नहीं रेंग रही है। सवाल यह उठता है कि क्या विभाग किसी बड़े हादसे और निर्दोष छात्रों की बलि का इंतजार कर रहा है? यदि जिला मुख्यालय के छात्रावास का यह हाल है, तो अंदरूनी इलाकों की स्थिति का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।

​छात्रावास की व्यवस्था संभाल रहा स्टाफ

​इस विषम स्थिति के बावजूद छात्रावास की व्यवस्था को संभालने में निम्नलिखित कर्मचारी तैनात हैं

​व्यवस्थापक एवं संरक्षक

​मोहनीश दीवान – छात्रावास अधीक्षक (व्यवस्था/संरक्षक)
​छन्नूलाल साहू – छात्रावास अधीक्षक

​सहयोगी स्टाफ

​भोजन व्यवस्था: अनुप कुमार यादव, मनीराम चक्रधारी, लच्छन राम ध्रुव, शिवचरण बंजारे, शुभम सिंह, दुर्गेश यादव
​सुरक्षा व्यवस्था: कृष्ण कुमार बघेल
​स्वच्छता व्यवस्था: पुरानिक ध्रुव, सिद्धेश नागेश

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