बेलटुकरी में ‘कलेक्टर का आदेश’ भी धूल में दफन! खदानों के ‘कातिल पहिए’ दौड़े तो सड़क बनी मौत का ट्रैक

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बेलटुकरी में ‘कलेक्टर का आदेश’ भी धूल में दफन! खदानों के ‘कातिल पहिए’ दौड़े तो सड़क बनी मौत का ट्रैक

तीन महीने पहले फरमान, आज भी गड्ढे और धूल का साम्राज्य..! बारिश ने गड्ढों को पानी में छिपाया, ग्रामीण बोले—अब हादसा हुआ तो जिम्मेदार कौन..?

रिपोर्टर मयंक गुप्ता |
महासमुंद।नेशनल हाईवे से सटे ग्राम पंचायत बेलटुकरी में विकास की तस्वीर इन दिनों गड्ढों, धूल और बदहाल सड़क के रूप में नजर आ रही है। बेलटुकरी से आगे ग्राम पंचायत अछोली और अच्छोला को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मार्ग लंबे समय से खराब हालत में है। सड़क पर जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे बन चुके हैं और इसी रास्ते से प्रतिदिन स्कूली बच्चे, महिलाएं, बुजुर्ग, किसान और आम ग्रामीण आवाजाही करने को मजबूर हैं।
स्थिति तब और गंभीर हो जाती है, जब इसी मार्ग से पत्थर खदानों से निकलने वाले भारी वाहन लगातार गुजरते हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि गिट्टी और पत्थरों से लदे ट्रक-टिपरों की लगातार आवाजाही तथा ओवरलोडिंग के कारण सड़क की हालत लगातार बिगड़ती जा रही है।
अब सड़क सिर्फ जर्जर नहीं है, बल्कि ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बनती जा रही है।

खदानों के ‘भारी पहिए’ और सड़क की हालत बेहाल

बेलटुकरी और आसपास के क्षेत्र में पत्थर खदानें संचालित होने के कारण भारी वाहनों की आवाजाही लगातार बनी रहती है। ग्रामीणों का कहना है कि दिन-रात दौड़ने वाले ट्रक और टिपर सड़क पर लगातार दबाव डाल रहे हैं।
भारी वाहनों के गुजरने के दौरान सड़क से धूल का गुबार उठता है। राहगीरों को सामने का रास्ता तक साफ दिखाई नहीं देता। वहीं सड़क पर बने गहरे गड्ढे दोपहिया वाहन चालकों के लिए दुर्घटना का कारण बन सकते हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि खदानों से मुनाफे का पहिया तो लगातार घूम रहा है, लेकिन सड़क की बदहाली का खामियाजा आम जनता भुगत रही है।

बारिश ने छिपा दिए सड़क के ‘मौत वाले गड्ढे’!

सड़क की बदहाली के बीच अब बारिश ने ग्रामीणों की परेशानी को और बढ़ा दिया है। लगातार बारिश के कारण सड़क पर बने बड़े-बड़े गड्ढों में पानी भर गया है।
सबसे बड़ी समस्या यह है कि पानी भरने के बाद गड्ढों की गहराई का पता ही नहीं चलता।
ऊपर से सड़क सामान्य दिखाई देती है, लेकिन पानी के नीचे गड्ढा कितना गहरा है, इसका अंदाजा वाहन चालक को नहीं हो पाता। अचानक वाहन गड्ढे में उतरने से दोपहिया वाहन चालक असंतुलित हो सकते हैं और गंभीर दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।
खासकर स्कूली बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक है। भारी वाहन सामने से गुजरते हैं तो पानी और कीचड़ राहगीरों पर उछलता है, जबकि गड्ढों से बचने के लिए वाहन चालक सड़क के दूसरे हिस्से में जाने को मजबूर होते हैं।
गड्ढे पहले दिखाई दे रहे थे, बारिश के बाद पानी में छिप गए—अब खतरा दिखता नहीं, सिर्फ महसूस होता है।

तीन महीने पहले कलेक्टर ने दिए थे निर्देश, फिर सड़क क्यों नहीं सुधरी..?

मामला इसलिए और गंभीर हो जाता है क्योंकि ग्रामीणों के अनुसार करीब तीन महीने पहले जिला कलेक्टर विनय कुमार लंगेह स्वयं इस मार्ग से होकर बेलटुकरी पहुंचे थे।
इस दौरान ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों ने सड़क की बदहाली, भारी वाहनों की आवाजाही और खदानों से जुड़ी समस्याओं को लेकर अपनी शिकायत प्रशासन के सामने रखी थी।
ग्रामीणों के अनुसार इसके बाद माइनिंग विभाग के अधिकारियों, खदान संचालकों और स्थानीय प्रतिनिधियों की बैठक बुलाई गई थी। बैठक में सड़क की मरम्मत एवं आवश्यक निर्माण कार्य कराने के निर्देश दिए गए थे।
उस समय ग्रामीणों को उम्मीद थी कि अब सड़क की तस्वीर बदलेगी।
लेकिन ग्रामीणों का दावा है कि तीन महीने गुजर जाने के बाद भी सड़क की हालत में कोई बड़ा बदलाव दिखाई नहीं दे रहा है।
न सड़क का स्थायी समाधान हुआ और न ही ऐसी प्रभावी कार्रवाई नजर आई, जिससे ग्रामीणों को राहत मिल सके।
फरमान हुआ था… लेकिन काम जमीन पर क्यों नहीं उतरा?
अब ग्रामीणों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि कलेक्टर ने सड़क की समस्या को लेकर निर्देश दिए थे तो उन निर्देशों के पालन की निगरानी आखिर किस अधिकारी की जिम्मेदारी थी?
ग्रामीण पूछ रहे हैं—
क्या प्रशासनिक आदेशों का पालन नहीं होने पर जिम्मेदारी तय होगी?

क्या भारी वाहनों और ओवरलोडिंग की जांच की गई?

क्या खदान संचालकों को सड़क के रखरखाव की जिम्मेदारी दी गई..?

यदि निर्देश के बावजूद काम नहीं हुआ तो संबंधित जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब होगी..?

और सबसे बड़ा सवाल—
क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे के बाद ही इस सड़क की सुध लेगा?
‘सड़क है या गड्ढों के बीच बचा रास्ता?’
बेलटुकरी की सड़क की हालत देखकर ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। जगह-जगह उखड़ी सड़क, गहरे गड्ढे, बारिश का पानी और भारी वाहनों की आवाजाही ने इस रास्ते को बेहद जोखिमपूर्ण बना दिया है।
बारिश के दिनों में स्थिति और खतरनाक हो जाती है। पानी से भरे गड्ढों में वाहन का पहिया उतरते ही चालक का संतुलन बिगड़ सकता है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते सड़क की मरम्मत नहीं कराई गई तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।

स्कूल जाने वाले बच्चों पर मंडरा रहा खतरा

इस मार्ग से प्रतिदिन स्कूली बच्चे भी गुजरते हैं। भारी वाहनों की लगातार आवाजाही और सड़क की खराब हालत के बीच बच्चों का सुरक्षित आवागमन अभिभावकों के लिए चिंता का विषय बन गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों को स्कूल जाने के लिए इसी रास्ते का इस्तेमाल करना पड़ता है। ऐसे में प्रशासन को सड़क की मरम्मत के साथ-साथ भारी वाहनों की गति और ओवरलोडिंग पर भी प्रभावी नियंत्रण करना चाहिए।

ग्रामीणों का सवाल साफ है—बच्चों की सुरक्षा पहले या खदानों का कारोबार..?

ग्रामीणों का सब्र टूटा, आंदोलन की चेतावनी
लगातार समस्या बने रहने और अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने से ग्रामीणों का आक्रोश बढ़ रहा है।
स्थानीय लोगों और पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि उन्होंने पहले शांतिपूर्ण तरीके से प्रशासन के सामने अपनी समस्या रखी। उन्हें उम्मीद थी कि कलेक्टर के निर्देश के बाद सड़क की स्थिति सुधरेगी।
लेकिन यदि जल्द ही सड़क की मरम्मत और स्थायी निर्माण की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाया गया तो ग्रामीण चक्काजाम और आंदोलन करने को मजबूर हो सकते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि आंदोलन की स्थिति पैदा होती है तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित विभाग और प्रशासन की होगी।

ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि—

सड़क की तत्काल मरम्मत कराई जाए।

बारिश के कारण पानी से भरे गड्ढों को तत्काल भरा जाए।

भारी और ओवरलोड वाहनों की जांच कर कार्रवाई की जाए।

खदान संचालकों की जिम्मेदारी तय की जाए।

सड़क के नियमित रखरखाव की व्यवस्था की जाए।

स्कूली बच्चों और आम राहगीरों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

तीन महीने पहले दिए गए प्रशासनिक निर्देशों के पालन की समीक्षा की जाए।

अब सवाल सीधा है—‘कलेक्टर का आदेश भारी या खदानों के पहिए..?’

बेलटुकरी की बदहाल सड़क अब केवल ग्रामीणों की परेशानी नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही का सवाल बन चुकी है।
एक तरफ कलेक्टर के निर्देशों की बात सामने आती है, दूसरी तरफ तीन महीने बाद भी ग्रामीण उसी धूल, गड्ढों और भारी वाहनों के बीच सफर करने को मजबूर होने का दावा कर रहे हैं।

बारिश ने हालात और बिगाड़ दिए हैं। गड्ढों में पानी भर गया है, उनकी गहराई दिखाई नहीं देती और हर गुजरता वाहन संभावित खतरे का संकेत दे रहा है।

अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस सड़क को लेकर कब ठोस कदम उठाता है।
क्योंकि बेलटुकरी के ग्रामीण अब सिर्फ आश्वासन नहीं, सड़क पर काम चाहते हैं—वह भी किसी बड़े हादसे से पहले।

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