जनपद हो या नगर पालिका लोग अपनी अर्धांगनियों के भरोसे बना रहे पूंजी

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महिला जनप्रतिनिधियों के पतियों का चल रहा है राज, करोड़ों के है अवैध घोटाले

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुंद / महासमुंद जनपद पंचायत के जनप्रतिनिधियों द्वारा विकास के नाम पर आम जनता की गाढ़ी कमाई का कर रहे हैं बंदरबाट। सस्ते समान ग्राम पंचायत, स्कूल और समितियों में दे कर समितियों और ग्राम पंचायत के सरपंच सचिव से सांठगांठ कर करा रहे हैं लाखों का भुगतान। जनपद पंचायत क्षेत्र में हो रहे भ्रष्टाचार की जानकर अधिकारियों को होने के बाद भी अमानक सामानों का किया जा रहा है भुगतान।
गौरतलब है कि महासमुंद के जनपद पंचायत क्षेत्र के सभी ग्राम पंचायत और स्कूलों में जनपद पंचायत के जन प्रतिनिधि और जन प्रतिनिधियो के रिश्तेदार यह खेल खेल रहे हैं। ऐसा ही ताजा मामला महासमुंद जनपद पंचायत क्षेत्र में सामने आ रहा है। जहां कई पंचायतों में सस्ते वॉटर कुलर बेचा गया है और एक एक वॉटर कुलर के एवज में 50 हजार से एक लाख रुपए तक का भुगतान कर दिया गया है। वाटर कुकर के अलावा हाई लाइट मास्क, ट्रैक्टर ट्रॉली, इ रिक्शा, पचरी निर्माण, के अलावा सीसी रोड बनवाने के नाम पर भारी गफलत कर करोड़ों की काली कमाई की गई हैं।
ग्राम पंचायत के सचिव और सरपंच मामले में मुखर होकर कह रहे हैं कि राज नेताओं और अधिकारियों के दबाव के चलते यह भुगतान किया गया है। सभी जन प्रतिनिधियो को इस बात की पुख्ता जानकारी है कि जिन समानों का भुगतान लाखों में किया गया है उन समानों की मार्केट वैल्यू उतनी नहीं है।
कुल मिलाकर महासमुंद जनपद पंचायत क्षेत्र में यह कहा और देखा जा सकता है कि कमीशन खोरी के चलते आम जनता के टैक्स का पैसा राज नेताओं उनके रिश्तेदारों और अधिकारों के घर भरने का काम किया जा रहा हैं।
महासमुंद जनपद पंचायत का बहु विख्यात मामला 39 लाख का घोटाला सर्व व्याप्त है जिसमें आज तक जांच के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है। लगातार जनता की गाढ़ी कमाई की राशि का उपयोग जन प्रतिनिधियो द्वारा किया जा रहा है और इन जन प्रतिनिधियो को श्रेय देने का काम जिले के आला अधिकारी कर रहे हैं। वैसे केंद्र और राज्य सरकार ने सी एस आई डी सी से मानक समान के लिए नियम बना रखे हैं लेकिन इसका खुला उल्लंघन महासमुंद के जनपद पंचायत में देखना आम बात हो गया है। नियमों कायदे कानूनों को ताक में रख कर काम करने जैसे महासमुंद में रिवायत बन गई हैं।

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