कक्षा में बच्चे पढ़ते रहे, स्कूल में नशे की हालत में सोते मिले प्रधान पाठक..!

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कक्षा में बच्चे पढ़ते रहे, स्कूल में नशे की हालत में सोते मिले प्रधान पाठक..!

भुरका प्राथमिक शाला का मामला: मीडिया के पहुंचते ही मचा हड़कंप, लंबे समय से अनुपस्थिति के भी लगाए गए आरोप

महासमुंद। सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था और शिक्षकों की जवाबदेही को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं, लेकिन महासमुंद विकासखंड के ग्राम भुरका स्थित प्राथमिक शाला से सामने आया मामला व्यवस्था की गंभीर तस्वीर पेश करता है। यहां पदस्थ प्रधान पाठक धनुर्जय पटेल के स्कूल परिसर में कथित रूप से नशे की हालत में सोते हुए पाए जाने का मामला सामने आया है। जिस समय यह स्थिति सामने आई, उस दौरान स्कूल में कक्षाएं संचालित हो रही थीं और छोटे बच्चे पढ़ाई कर रहे थे।

बच्चे कक्षा में, प्रधान पाठक आराम की मुद्रा में

जानकारी के अनुसार 13 अगस्त को मीडिया टीम द्वारा स्कूल का औचक निरीक्षण किया गया। स्कूल में पहली और दूसरी कक्षा के बच्चे अध्ययन करते मिले, जबकि प्रधान पाठक धनुर्जय पटेल स्कूल परिसर में सोते हुए पाए गए। उनकी स्थिति को देखकर उनके नशे में होने की बात सामने आई।
मीडिया द्वारा जब उनसे इस संबंध में सवाल किया गया तो उन्होंने कथित तौर पर सोने की बात से इनकार करते हुए कहा कि वे बच्चों को पढ़ा रहे थे। वहीं, मौजूद विद्यार्थियों ने बताया कि प्रधान पाठक कुछ समय पहले ही स्कूल पहुंचे थे और इसके बाद सो गए थे।

सहायक शिक्षक ने भी उठाए उपस्थिति पर सवाल

मामले को और गंभीर बनाने वाली बात यह है कि स्कूल में पदस्थ सहायक शिक्षक उत्तम कुमार यादव ने प्रधान पाठक की उपस्थिति को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए। उनके अनुसार प्रधान पाठक पिछले कुछ दिनों से ही स्कूल में दिखाई दे रहे हैं तथा लंबे समय से नियमित रूप से स्कूल नहीं आने की स्थिति बनी हुई है।
सहायक शिक्षक ने यहां तक दावा किया कि प्रधान पाठक के लगभग एक वर्ष से स्कूल से अनुपस्थित रहने की शिकायतें सामने आती रही हैं। हालांकि इन आरोपों की विभागीय स्तर पर आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।

2008 से इसी स्कूल में पदस्थ होने की जानकारी

बताया जा रहा है कि धनुर्जय पटेल वर्ष 2008 से इसी प्राथमिक शाला में प्रधान पाठक के पद पर पदस्थ हैं। लंबे समय से एक ही विद्यालय में पदस्थ रहने के बावजूद यदि नियमित उपस्थिति और विद्यालयीन अनुशासन को लेकर शिकायतें सामने आ रही हैं, तो यह शिक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है।
भुरका प्राथमिक शाला में वर्तमान में लगभग 17 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत बताए जा रहे हैं। ऐसे में प्रधान पाठक की नियमित उपस्थिति और बच्चों की पढ़ाई पर उनकी जिम्मेदारी महत्वपूर्ण हो जाती है।

डीईओ ने कहा—मामले की कराई जाएगी जांच

मामले की जानकारी जब जिला शिक्षा अधिकारी बीएल देवांगन को दी गई तो उन्होंने मीडिया के स्कूल पहुंचने को लेकर सवाल उठाया और पूछा कि मीडिया को विद्यालय में प्रवेश की अनुमति किस स्तर से मिली। इसके बाद उन्होंने पूरे मामले की जांच कराने का आश्वासन दिया।
अब देखने वाली बात यह होगी कि शिक्षा विभाग इस मामले में केवल जांच तक सीमित रहता है या प्रधान पाठक की उपस्थिति, कथित नशे की स्थिति और लंबे समय से अनुपस्थित रहने के आरोपों की अलग-अलग स्तर पर जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाता है।

सवालों के घेरे में विभागीय निगरानी

भुरका प्राथमिक शाला की घटना ने सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति और विभागीय मॉनिटरिंग की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि प्रधान पाठक के लंबे समय से अनुपस्थित रहने की शिकायत सही है तो आखिर उनकी नियमित उपस्थिति की निगरानी किस स्तर पर की जा रही थी? वहीं यदि स्कूल परिसर में नशे की हालत में पाए जाने की बात जांच में सही साबित होती है तो यह विद्यालयी अनुशासन और बच्चों के शैक्षणिक वातावरण से जुड़ा बेहद गंभीर विषय होगा।

फिलहाल मामले की वास्तविकता विभागीय जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। ग्रामीणों और अभिभावकों ने शिक्षा विभाग से निष्पक्ष जांच कर दोष सिद्ध होने पर नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

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