ब्रेकिंग: पुलिस ने 3 आरोपियों को किया गिरफ्तार…

Latest NewsTop Hindi Newsबेबाक बयानराज्य समाचारशिक्षा

दंतेवाड़ा DAV स्कूल में सनसनीखेज खुलासा किशोर छात्राओं की तस्वीरें बिना अनुमति सोशल मीडिया पर वायरल

शिक्षकों पर लापरवाही के गंभीर आरोप – कलेक्टर ने दी त्वरित कार्रवाई की चेतावनी..!

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
दंतेवाड़ा, 25 दिसंबर 2025 छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा जिले के प्रतिष्ठित DAV कुंहाररास पब्लिक स्कूल में बच्चों की निजता और सुरक्षा से जुड़ा एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। स्कूल के शिक्षकों पर आरोप है कि उन्होंने कक्षा 9वीं और 10वीं की छात्राओं की तस्वीरें बिना किसी अनुमति के खींचीं और उन्हें व्हाट्सएप स्टेटस तथा अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अपलोड कर दिया। ये तस्वीरें ज्यादातर क्लासरूम गतिविधियों या स्कूल कार्यक्रमों के दौरान ली गईं प्रतीत होती हैं, जिससे इन किशोरावस्था की लड़कियों की सुरक्षा पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है। अभिभावकों में इस घटना से जबरदस्त आक्रोश व्याप्त है और वे इसे स्कूल प्रशासन की घोर लापरवाही करार दे रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, मुख्य आरोप एक शिक्षक अपूर्व पर लगा है, जिन्होंने विशेष रूप से इन छात्राओं की फोटोज फोकस करके लीं और उन्हें सार्वजनिक कर दिया। अभिभावकों का कहना है कि इस उम्र (14-16 वर्ष) की लड़कियां बेहद संवेदनशील होती हैं। ऐसी तस्वीरों का गलत इस्तेमाल – जैसे ऑनलाइन हैरेसमेंट, फोटो मॉर्फिंग, साइबर बुलिंग या ब्लैकमेलिंग – बहुत आसानी से हो सकता है। एक गुस्साए अभिभावक ने कहा, “स्कूल में पढ़ाई के लिए बच्चे जाते हैं, न कि अपनी तस्वीरें वायरल करवाने। क्लास में शिक्षकों को मोबाइल फोन इस्तेमाल करने की इजाजत कैसे मिल गई? क्या प्राचार्य मृत्युंजय पाणिग्राही ने नियमों को ताक पर रख दिया है? अभिभावकों का कहना है कि,प्रिंसिपल और अन्य शिक्षकों द्वारा भी अभद्र व्यवहार करते हैं।”
यह मामला तब प्रकाश में आया जब अभिभावकों ने सोशल मीडिया पर अपने बच्चों की ये तस्वीरें देखीं। स्कूल में मोबाइल फोन के उपयोग पर सख्त नियम होने के बावजूद यहां नियमों की खुलेआम अवहेलना हो रही है। शिक्षा विशेषज्ञों की राय है कि नाबालिग छात्राओं की तस्वीरें इस तरह सार्वजनिक करना न केवल प्राइवेसी का गंभीर उल्लंघन है, बल्कि POCSO एक्ट (प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्शुअल ऑफेंसेज) और जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के प्रावधानों के तहत आपराधिक कृत्य की श्रेणी में आता है।
मीडिया ने जब स्कूल प्राचार्य मृत्युंजय पाणिग्राही से संपर्क करने की कोशिश की तो उनका फोन नहीं उठा। स्कूल प्रबंधन की ओर से अभी तक कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया या आधिकारिक बयान नहीं आया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जब जिला कलेक्टर देवेश कुमार ध्रुव से दूरभाष पर संपर्क किया गया, तो उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि ऐसी अनियमितताएं किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएंगी। कलेक्टर ने आश्वासन दिया कि सोशल मीडिया पर छात्राओं की तस्वीरें वायरल करने वाले शिक्षकों और स्कूल प्रबंधन के खिलाफ त्वरित कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को जांच के निर्देश देने की बात कही।
अभिभावक दोषी शिक्षक अपूर्व सहित अन्य संलिप्त शिक्षकों और प्रिंसिपल को तुरंत निलंबित या हटाने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि अगर सख्त कदम नहीं उठाए गए तो ऐसे मामले बार-बार सामने आते रहेंगे। कई अभिभावकों ने विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी है और जिला शिक्षा अधिकारी, पुलिस तथा स्थानीय प्रशासन से स्वतंत्र जांच की अपील की है।
यह घटना एक बार फिर स्कूलों में बच्चों की डिजिटल सुरक्षा और प्राइवेसी के बड़े मुद्दे को उजागर करती है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि सभी स्कूलों में स्पष्ट गाइडलाइंस लागू की जाएं: क्लासरूम में शिक्षकों का मोबाइल उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित हो, बच्चों की तस्वीरें केवल आधिकारिक चैनलों से और अभिभावकों की लिखित अनुमति के बाद ही शेयर की जाएं। DAV जैसे राष्ट्रीय स्तर के शिक्षा संस्थान से ऐसी लापरवाही की कल्पना भी नहीं की जा सकती, खासकर आदिवासी बहुल और संवेदनशील क्षेत्र जैसे दंतेवाड़ा में।
फिलहाल, अभिभावक और स्थानीय समुदाय न्याय का इंतजार कर रहे हैं। कलेक्टर के हस्तक्षेप से उम्मीद है कि जल्द ही दोषियों पर कार्रवाई होगी। बच्चों की सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। मामले की आगे की जांच पर सभी की निगाहें टिकी हैं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button