तप और साधना की देवी माँ ब्रह्मचारिणी के स्वरूप ने भक्तों में भरा आध्यात्मिक उत्साह

नवरात्रि उत्सव के दूसरे दिन शुक्रवार को मां दुर्गा के दूसरे और अत्यंत तेजस्वी स्वरूप माँ ब्रह्मचारिणी की आराधना का विधि-विधान संपन्न हुआ। यह दिन तपस्या, संयम और मर्यादा का प्रतीक माना जाता है। देश के कोने-कोने में स्थित मंदिरों के साथ-साथ घर-घर में स्थापित कलशों के सामने भक्तिभाव से की गई पूजा ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक और दिव्य ऊर्जा से भर दिया। भक्तों ने मां के दरबार में माथा टेककर अपनी मनोकामनाएं मांगीं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने की प्रार्थना की।
माँ ब्रह्मचारिणी: तपस्या की प्रतिमूर्ति और उनके पूजन का महत्व
माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों में दूसरे दिन पूजी जाने वाली माँ ब्रह्मचारिणी का स्वरूप अत्यंत ही मनोहर और प्रभावशाली है। इनका नाम ‘ब्रह्म’ शब्द से बना है, जिसका अर्थ है तपस्या। अर्थात, ब्रह्मचारिणी यानी तप का आचरण करने वाली। यह स्वरूप ज्ञान, वैराग्य और मर्यादा का द्योतक है। माँ के एक हाथ में कमंडल (जलपात्र) और दूसरे हाथ में जप की माला शोभायमान है। इन्होंने साधारण सफेद वस्त्र धारण कर रखे हैं और यह सादगी और पवित्रता का संदेश देती हैं।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, माँ ब्रह्मचारिणी ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए हज़ारों वर्षों तक कठोर तपस्या की थी। इसी तपस्या के कारण उन्हें यह नाम मिला। उनकी आराधना करने से भक्तों को जीवन की कठिनाइयों का सामना करने की शक्ति, मन की एकाग्रता और आत्म-अनुशासन की प्राप्ति होती है। इस दिन भक्त मां को शक्कर या मिश्री का भोग लगाते हैं। ऐसी मान्यता है कि ऐसा करने से माँ प्रसन्न होती हैं और भक्त के जीवन से सारी मिठास (सुख-समृद्धि) कभी दूर नहीं होती। इसके अलावा, इस दिन पीले रंग का विशेष महत्व है और कई भक्त पीले वस्त्र पहनकर ही पूजा-अर्चना करते हैं।
देश के प्रमुख मंदिरों में भक्तों की उमड़ती भीड़
नवरात्रि के दूसरे दिन देश के प्रमुख शक्तिपीठों और दुर्गा मंदिरों में भक्तों का तांता लगा रहा। सुबह की आरती के साथ ही मंदिरों में भीड़ जुटने लगी और देर शाम तक यह सिलसिला जारी रहा।
- वैष्णो देवी, जम्मू-कश्मीर: माँ वैष्णो देवी के मंदिर में इस दिन विशेष पूजा-पाठ का आयोजन किया गया। यहाँ पहुँचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में काफी इजाफा देखा गया। मंदिर प्रबंधन द्वारा भक्तों के लिए विशेष प्रबंध किए गए थे।
- कालकाजी मंदिर, दिल्ली: दिल्ली के प्रसिद्ध कालकाजी मंदिर को फूलों और रंगीन लाइटों से सजाया गया था। यहाँ सुबह से ही महिलाओं, पुरुषों और बच्चों की लंबी कतारें नजर आईं। मंदिर परिसर में कीर्तन और भजनों की मधुर धुनों ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
- महालक्ष्मी मंदिर, मुंबई: मुंबई के महालक्ष्मी मंदिर में भी दूसरे दिन की पूजा बड़े ही धूमधाम से संपन्न हुई। समुद्र के किनारे बने इस मंदिर में भक्तों ने माँ के दर्शन कर अपने आप को धन्य महसूस किया।
- अयोध्या और वाराणसी: धार्मिक नगरी अयोध्या और वाराणसी के मंदिरों में भी नवरात्रि की विशेष छठा देखने को मिली। यहाँ के घाटों पर विशेष हवन और यज्ञ का आयोजन किया गया।
घर-घर में संपन्न हुई माँ ब्रह्मचारिणी की विधि-विधान से पूजा
नवरात्रि सिर्फ मंदिरों तक ही सीमित नहीं है। देश के लाखों घरों में कलश स्थापना के बाद दूसरे दिन माँ ब्रह्मचारिणी की विधिवत पूजा की गई। व्रत रखने वाले भक्तों ने सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर पूजा की तैयारी की। लाल कपड़े पर कलश के पास माँ ब्रह्मचारिणी की फोटो या प्रतिमा स्थापित की गई। उन्हें फूल, अक्षत, रोली अर्पित करके धूप-दीप जलाया गया। माँ को मिश्री का भोग लगाने के बाद आरती की गई और माँ दुर्गा की चालीसा या सप्तशती के पाठ किए गए। कई परिवारों में नौ दिनों तक कन्या पूजन की भी परंपरा है, जिसकी शुरुआत कई स्थानों पर आज से ही हो गई।
गरबा और डांडिया के रंग में रंगे महानगर
नवरात्रि का पर्व साधना और भक्ति के साथ-साथ उल्लास और उमंग का भी पर्व है। इसकी झलक देश के विभिन्न शहरों में आयोजित होने वाले गरबा और डांडिया रास के कार्यक्रमों में साफ देखी गई। गुजरात और महाराष्ट्र तो इसके गढ़ माने जाते हैं, लेकिन अब दिल्ली, बैंगलोर, हैदराबाद, कोलकाता जैसे महानगरों में भी यह कार्यक्रम बड़े पैमाने पर आयोजित किए जाते हैं।
दूसरे दिन भी इन कार्यक्रमों की धूम देखने को मिली। लोगों ने रंग-बिरंगी चनिया-चोली और केडियु पहनकर रातभर थककर नाचते हुए माँ का गुणगान किया। आधुनिक और पारंपरिक दोनों तरह के गानों पर लोगों ने डांस किया। इन कार्यक्रमों ने सामाजिक सद्भाव और सांस्कृतिक एकता का भी अद्भुत दृश्य प्रस्तुत किया।
भक्तों और आयोजकों से रूबरू:
दिल्ली के प्रसिद्ध कालकाजी मंदिर से पूजा करके निकली 65 वर्षीया श्रीमती उषा मल्होत्रा ने कहा, “बचपन से ही नवरात्रि के इन नौ दिनों को बहुत श्रद्धा से मनाती आ रही हूँ। आज माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा करके मन को अद्भुत शांति मिली। माँ से प्रार्थना है कि वे सभी के जीवन में सुख-शांति बनाए रखें।”
वहीं, एक गरबा आयोजक, राहुल शाह ने बताया, “इस साल का उत्साह देखने लायक है। पिछले कुछ वर्षों के बाद लोग फिर से पूरे जोश के साथ इकट्ठा हो रहे हैं। यह सिर्फ नाचना-गाना नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति को जीवित रखने का एक तरीका है।”
आगे क्या है: शुक्रवार को मनाई जाएगी माँ चंद्रघंटा की पूजा
नवरात्रि का तीसरा दिन माँ दुर्गा के तीसरे और शक्तिशाली स्वरूप माँ चंद्रघंटा को समर्पित है। इनके माथे पर अर्धचंद्र की आकृति विद्यमान है, इसीलिए उन्हें यह नाम मिला। माँ चंद्रघंटा शांति और सौम्यता की प्रतीक हैं, लेकिन युद्ध के समय इनका स्वरूप भयानक हो जाता है। ऐसी मान्यता है कि इनकी पूजा करने से मनुष्य के सभी प्रकार के कष्ट और बाधाएं दूर होती हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। तीसरे दिन माँ को दूध से बने व्यजंन (जैसे खीर) का भोग लगाया जाता है।



