शासकीय क्वार्टर खाली क्यों नहीं हुआ? बलौदा बाजार पदस्थ कर्मचारी पर उठे सवाल
महासमुंद/ बलौदा बाजार – शासन के आदेशों के बावजूद महासमुंद स्थित शासकीय आवास (क्वार्टर नंबर H-18) अब तक खाली नहीं कराया जा सका है। जानकारी के अनुसार यह आवास उद्यान विभाग की कर्मचारी कु. मोनिका बेसरा (सहायक ग्रेड-2) को पूर्व में आबंटित किया गया था। उनका स्थानांतरण 30 सितंबर 2022 को महासमुंद से बलौदा बाजार कर दिया गया था तथा 23 दिसंबर 2022 को उन्हें महासमुंद कार्यालय से भारमुक्त कर दिया गया था। इसके बाद 26 दिसंबर 2022 को उन्होंने बलौदा बाजार में कार्यभार भी ग्रहण कर लिया था।
आदेशों के बावजूद आवास खाली नहीं
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कलेक्टर कार्यालय महासमुंद एवं उद्यान विभाग द्वारा कई बार पत्र जारी कर शासकीय क्वार्टर को रिक्त करने हेतु निर्देश दिए गए।
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13 दिसंबर 2024 को जारी आदेश में भी स्पष्ट रूप से कहा गया कि उक्त आवास अनधिकृत रूप से उपयोग किया जा रहा है, तथा इसे तुरंत खाली किया जाए।
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छत्तीसगढ़ लोक परिसर (बेदखली) अधिनियम 1974 के अनुसार, अनधिकृत आधिपत्य की स्थिति में दोगुनी दर से लाइसेंस शुल्क वसूली और बेदखली की कार्यवाही का प्रावधान है।
संभावित कानूनी और प्रशासनिक कार्यवाही
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भारतीय दंड संहिता की धारा 166A: सरकारी आदेशों की अवहेलना करने पर 6 माह से 2 वर्ष तक कारावास और जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।
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अनुशासनात्मक कार्यवाही: सेवा नियमों के तहत निलंबन, पदोन्नति रोकना या सेवा समाप्ति जैसे दंड भी संभव हैं।
उठते सवाल
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आखिर आदेशों के बावजूद क्वार्टर H-18 क्यों खाली नहीं हुआ?
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क्या कर्मचारी को किसी उच्च अधिकारी या राजनैतिक व्यक्ति का संरक्षण प्राप्त है?
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यदि आवास खाली नहीं किया गया है तो अब तक दोगुनी दर से लाइसेंस शुल्क क्यों नहीं वसूला गया?
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क्या बलौदा बाजार में पदस्थापित रहते हुए उन्हें हाउस रेंट अलाउंस (HRA) का लाभ मिल रहा है?
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क्या बलौदा बाजार में नया आवास आबंटित किया गया है, और यदि हाँ, तो उसका उपयोग किया जा रहा है या नहीं?
जनहित का मुद्दा
लगातार आदेशों के बावजूद शासकीय आवास रिक्त न होना प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है। यह मामला न केवल शासनादेशों की अवहेलना से जुड़ा है, बल्कि सरकारी संपत्ति के अनुचित उपयोग और जवाबदेही पर भी सवाल खड़े करता है।



