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‘नाम गायब, परंपरा टूटी, लोकतंत्र शर्मसार’ – राशि महिलांग

छत्तीसगढ़ नए विधानसभा भवन की पट्टिका पर विपक्ष नेता को ‘अनदेखा’ करने पर कांग्रेस का तीखा प्रहार

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुंद। छत्तीसगढ़ के रजत जयंती वर्ष में नए विधानसभा भवन का लोकार्पण एक ऐतिहासिक अवसर था, लेकिन यह समारोह अब राजनीतिक विवाद की आग में झुलस रहा है। भाजपा सरकार पर आरोप है कि उन्होंने जानबूझकर पट्टिका से नेता प्रतिपक्ष का नाम हटा दिया, जिसे कांग्रेस ने ‘कुंठित मानसिकता’, ‘संकीर्ण सोच’ और ‘लोकतंत्र की हत्या’ करार दिया है।
इस मुद्दे पर सबसे तीखी आवाज उठाई है कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और पूर्व पालिकाध्यक्ष श्रीमती राशि त्रिभुवन महिलांग ने। अपनी प्रेस विज्ञप्ति में उन्होंने सरकार के इस कदम को ‘राजनीतिक बदले की भावना’ और ‘विपक्ष के प्रति घोर उपेक्षा’ का जीवंत प्रमाण बताया।

परंपरा का अपमान, इतिहास का मजाक

श्रीमती महिलांग ने कहा –
“यह कोई छोटी-मोटी चूक नहीं है। यह राज्य की राजनीतिक संस्कृति पर काला धब्बा है। बड़े शासकीय भवनों के भूमिपूजन या लोकार्पण में विपक्षी नेता का नाम पट्टिका पर अंकित करना छत्तीसगढ़ की स्थापित परंपरा रही है – चाहे समारोह में राष्ट्रपति हों, प्रधानमंत्री हों या मुख्यमंत्री।”
उन्होंने कांग्रेस शासनकाल का उदाहरण देते हुए याद दिलाया:
“जब कांग्रेस की सरकार ने नए विधानसभा भवन का भूमिपूजन किया था, तब तत्कालीन विपक्षी नेता श्री धरमलाल कौशिक का नाम पट्टिका पर सम्मानपूर्वक अंकित किया गया था। यह हमारी ‘विकास में सबकी भागीदारी’ वाली सोच का प्रतीक था।”
लेकिन अब, भाजपा सरकार ने उसी भवन के लोकार्पण में नेता प्रतिपक्ष का नाम हटाकर न सिर्फ परंपरा तोड़ी, बल्कि शालीनता, मर्यादा और राजनीतिक सौहार्द को भी ठेंगा दिखाया।

राग-द्वेष की राजनीति’ vs ‘समावेशी विकास’

श्रीमती महिलांग ने दोनों दलों की विचारधारा में अंतर स्पष्ट किया

कांग्रेस भाजपा

विकास में सबकी हिस्सेदारी
राग-द्वेष की राजनीति
विपक्ष को सम्मान
विपक्ष को अपमान
लोकतंत्र की मर्यादा
सत्ता का अहंकार
“कांग्रेस ने हमेशा समावेशी विकास को प्राथमिकता दी। लेकिन भाजपा ने सत्ता के नशे में परंपराओं को कुचल दिया। यह कदम लोकतांत्रिक व्यवस्था को दूषित करने की साजिश है,” उन्होंने चेतावनी दी।

राजनीतिक गलियारों में हलचल

कांग्रेस ने इस मुद्दे को विधानसभा के आगामी सत्र में जोर-शोर से उठाने का ऐलान किया है।
पार्टी नेताओं का कहना है – “पट्टिका पर नाम न होना सिर्फ एक व्यक्ति का अपमान नहीं, बल्कि पूरे विपक्ष और लोकतंत्र का अपमान है।”
भाजपा खेमे में खामोशी: अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं, लेकिन सूत्र बता रहे हैं कि इसे ‘प्रशासनिक त्रुटि’ बताने की तैयारी है।

राज्य के 25 साल, परंपरा के 25 घाव..?

नए विधानसभा भवन का निर्माण और लोकार्पण छत्तीसगढ़ के गौरव का प्रतीक था। लेकिन एक नाम की अनुपस्थिति ने पूरे उत्सव को राजनीतिक युद्ध का मैदान बना दिया।

सवाल यह है –

क्या सत्ता के अहंकार में डूबी सरकार राजनीतिक शिष्टाचार की अंतिम कड़ी भी तोड़ देगी?
क्या ‘विकास’ अब सिर्फ सत्ताधारी दल का पर्याय बनकर रह जाएगा..?

आगे क्या..?

कांग्रेस ने मांग की है कि पट्टिका में तुरंत सुधार किया जाए और नेता प्रतिपक्ष का नाम जोड़ा जाए।
पार्टी ने जनजागरण अभियान शुरू करने का ऐलान किया है – “नाम नहीं, सम्मान चाहिए!”
राजनीतिक पंडितों का मानना है – यह विवाद आगामी स्थानीय निकाय चुनावों में बड़ा मुद्दा बन सकता है।

श्रीमती राशि त्रिभुवन महिलांग का अंतिम संदेश

“लोकतंत्र तब तक जीवित है, जब तक उसमें सम्मान है।
नाम हटाना आसान है, लेकिन परंपरा का अपमान माफ़ नहीं किया जाएगा।”

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