मुख्यमंत्री ने की घोषणा छत्तीसगढ़ में धान खरीदी 15 नवंबर से,किसानों के लिए समर्थन मूल्य और सुगम व्यवस्था का वादा

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
रायपुर / 9 अक्टूबर 2025 छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि खरीफ विपणन सत्र 2024-25 के तहत धान खरीदी 15 नवंबर 2025 से शुरू होगी। इस पहल का उद्देश्य राज्य के लाखों किसानों को उनकी उपज का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) सुनिश्चित करना और उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करना है। सरकार ने खरीदी प्रक्रिया को पारदर्शी, सुगम और समयबद्ध बनाने के लिए व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं।
समर्थन मूल्य और किसानों को लाभ
मुख्यमंत्री साय ने जोर देकर कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार किसानों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। इस साल धान की खरीदी न्यूनतम समर्थन मूल्य पर होगी, और सरकार ने संकेत दिए हैं कि कुछ श्रेणियों के धान के लिए बोनस राशि भी दी जा सकती है। केंद्र सरकार द्वारा घोषित MSP के अनुसार, सामान्य धान के लिए प्रति क्विंटल ₹2,300 और ग्रेड-A धान के लिए ₹2,320 का समर्थन मूल्य निर्धारित किया गया है। हालांकि, छत्तीसगढ़ सरकार ने पिछले वर्षों में किसानों को अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि दी है, और इस बार भी ऐसी संभावना जताई जा रही है।
तैयारियों में तेजी
राज्य सरकार ने धान खरीदी के लिए व्यापक स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी हैं।
खरीदी केंद्रों की व्यवस्था
पूरे राज्य में लगभग 2,500 से अधिक खरीदी केंद्र स्थापित किए जाएंगे। इन केंद्रों पर बारदाने, तौल मशीन, नमी मापक यंत्र और अन्य आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है।
डिजिटल पंजीयन और टोकन सिस्टम
किसानों को सुविधा देने के लिए ऑनलाइन पंजीयन प्रक्रिया को और सरल किया गया है। टोकन सिस्टम के जरिए खरीदी केंद्रों पर भीड़ को नियंत्रित किया जाएगा।
भुगतान में पारदर्शिता
किसानों को भुगतान समय पर और डिजिटल माध्यम से करने के लिए बैंकों के साथ समन्वय स्थापित किया गया है। सरकार का दावा है कि भुगतान में देरी की शिकायतों को न्यूनतम करने के लिए विशेष निगरानी तंत्र बनाया गया है।
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा
बस्तर और अन्य नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में खरीदी केंद्रों की सुरक्षा के लिए पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की जाएगी।
किसानों की बढ़ती उम्मीदें
छत्तीसगढ़ में धान उत्पादन राज्य की अर्थव्यवस्था का एक प्रमुख हिस्सा है। हर साल लाखों किसान अपनी उपज को समर्थन मूल्य पर बेचते हैं, जिससे उनकी आजीविका चलती है। इस साल सरकार ने धान की खरीदी के लिए 21 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य रखा है। बिलासपुर के किसान श्याम लाल साहू ने कहा, “पिछले साल भुगतान में कुछ देरी हुई थी, लेकिन इस बार सरकार ने समय पर खरीदी और भुगतान का वादा किया है। अगर यह पूरा होता है, तो हमारी मुश्किलें काफी कम हो जाएंगी।”
कई किसान संगठनों ने समर्थन मूल्य में और वृद्धि की मांग की है। उनका कहना है कि खेती की बढ़ती लागत को देखते हुए MSP को और बढ़ाया जाना चाहिए। इसके जवाब में सरकार ने संकेत दिए हैं कि किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए बोनस राशि पर विचार किया जा सकता है।
चुनौतियों से निपटने की रणनीति
पिछले कुछ वर्षों में धान खरीदी के दौरान बारदाने की कमी, भंडारण की समस्या और भुगतान में देरी जैसी चुनौतियां सामने आई थीं। इस बार सरकार ने इन समस्याओं से निपटने के लिए कई कदम उठाए हैं।
बारदाने की व्यवस्था
सरकार ने पहले ही लाखों बारदानों का स्टॉक तैयार कर लिया है। साथ ही, स्थानीय स्तर पर बारदाने की आपूर्ति के लिए सहकारी समितियों को जिम्मेदारी दी गई है।
भंडारण की सुविधा
धान के भंडारण के लिए नए गोदामों का निर्माण और पुराने गोदामों की मरम्मत का काम तेजी से चल रहा है।
कर्मचारियों की तैनाती
खरीदी केंद्रों पर पर्याप्त कर्मचारियों की नियुक्ति की जा रही है ताकि प्रक्रिया में कोई रुकावट न आए।
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विशेष ध्यान
नक्सल प्रभावित बस्तर, दंतेवाड़ा, सुकमा और नारायणपुर जैसे जिलों में धान खरीदी को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है। हाल ही में नारायणपुर में हुए नक्सली हमले के बाद सरकार ने इन क्षेत्रों में खरीदी केंद्रों की सुरक्षा बढ़ाने का फैसला किया है। साथ ही, इन इलाकों के किसानों को खरीदी केंद्र तक पहुंचने में सुविधा के लिए परिवहन व्यवस्था भी उपलब्ध कराई जाएगी।
किसानों का उत्साह
राज्य के विभिन्न हिस्सों से किसानों ने इस घोषणा का स्वागत किया है। रायगढ़ के एक किसान नेता गोपाल सिन्हा ने कहा, “15 नवंबर से खरीदी शुरू होने की खबर से किसानों में उत्साह है। हम उम्मीद करते हैं कि सरकार इस बार प्रक्रिया को और सुचारू बनाएगी और भुगतान में कोई देरी नहीं होगी।”
आगे की राह
छत्तीसगढ़ सरकार का यह कदम न केवल किसानों की आय बढ़ाने में मदद करेगा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देगा। धान खरीदी की प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए सरकार ने तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर कई सुधार किए हैं। यदि ये प्रयास सफल रहे, तो यह छत्तीसगढ़ के कृषि क्षेत्र के लिए एक मील का पत्थर साबित हो सकता है।



