ब्रेकिंग: पुलिस ने 3 आरोपियों को किया गिरफ्तार…

Top Hindi Newsबेबाक बयानसोशल मीडिया

महासमुंद पुलिस विभाग की कार्यवाही शून्य शिक्षक दिनेश साहू की रहस्यमयी मौत, हर्बल लाइफ और न्यूट्रिशन क्लब पर गंभीर आरोप

क्या पुलिस प्रशासन शिक्षक दिनेश साहू के दोषियों में शिरीष अग्रवाल, शिक्षक गिरीश कुमार साहू और पत्नी चंदेश्वरी साहू को कटघरे तक पहुंचा पाएगी या फिर मामले को कफ़न दफन कर फाइल बंद कर दी जाएगी।

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुंद / 24 सितंबर 2025 छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में एक शिक्षक की आत्महत्या ने न केवल एक परिवार को तोड़ दिया, बल्कि पूरे इलाके को सवालों के भंवर में उलझा दिया है। इमलीभाठा निवासी सरकारी स्कूल शिक्षक दिनेश साहू की फांसी से हुई मौत को अब महज एक व्यक्तिगत त्रासदी नहीं माना जा रहा। बल्कि, यह हर्बल लाइफ जैसे बहुराष्ट्रीय न्यूट्रिशन ब्रांड और स्थानीय रमा न्यूट्रिशन क्लब से जुड़े कथित धोखाधड़ी, मानसिक प्रताड़ना और षड्यंत्र की परतों से भरी एक जटिल कहानी बन चुकी है। घटना को हुए करीब दो महीने बीत चुके हैं, लेकिन पुलिस की ओर से कोई ठोस कार्रवाई न होने से पीड़ित परिवार और स्थानीय जनता में आक्रोश फैल रहा है। क्या यह मामला प्रभावशाली लोगों के दबाव में दबा दिया जाएगा, या न्याय की किरण दिखेगी? आइए, इस मामले की गहराई में उतरते हैं।

घटना का काला अध्याय: एक सामान्य जीवन का दर्दनाक अंत

दिनेश साहू, उम्र करीब 35 वर्ष, इमलीभाठा के एक सामान्य सरकारी स्कूल में पढ़ाते थे। स्थानीय लोगों के अनुसार, वे मेहनती, परिवार के प्रति समर्पित और समाज में सम्मानित व्यक्ति थे। लेकिन जुलाई 2025 के मध्य में एक रात, उन्होंने अपने घर में फांसी लगा ली। यह खबर जिले में बिजली की चमक की तरह फैली। प्रारंभिक जांच में इसे आत्महत्या ही बताया गया, लेकिन दिनेश के परिवार ने इसे साजिश का नतीजा करार दिया।
परिवार के मुताबिक, दिनेश की जिंदगी में तनाव का स्रोत उनकी पत्नी चंदेश्वरी साहू, हर्बल लाईफ कोच एवं अपलाइन लीडर शिक्षक गिरीश कुमार साहू ,बिरकोनी की रमा न्यूट्रिशन क्लब संचालिका घोड़ारी निवासी फर्शी फैक्ट्री मालिक शिरीष अग्रवाल थे। ये तीनों कथित रूप से हर्बल लाइफ के न्यूट्रिशन उत्पादों के वितरण और बिक्री से जुड़े हुए थे। दिनेश की बुजुर्ग मां ने 20 जुलाई 2025 को सिटी कोतवाली और पुलिस अधीक्षक को एक विस्तृत लिखित शिकायत सौंपी, जिसमें नामजद आरोप लगाए गए। शिकायत में दावा किया गया कि इन लोगों ने दिनेश को व्यापारिक झगड़ों, आर्थिक दबाव और व्यक्तिगत अपमान के जरिए इतना तोड़ दिया कि वे अवसाद के गहरे गर्त में डूब गए।

मुख्य बाते मां की आप बीती

मृतक दिनेश साहू की मां ने मीडिया के समक्ष रो-रो कर बयां करती हुई बताई की मेरे पुत्र दिनेश साहू जैसे ही स्कूल की ओर जाते थे उनके दोनों टीम पार्टनर गिरीश साहू और सुरेश अग्रवाल घर पर आ जाते थे और घंटों तक ऊपर रूम में रहकर न जाने क्या बाते करते थे। यहां तक हम दोनों बुजुर्गों को नाश्ता एवं खाना के लिए तरसाते थे। कुछ बोलने पर चंदेश्वरी साहू कहती थी मै तुम्हारी नौकरानी नहीं हूं जो तुम लोगो के इशारे पर नाचूंगी।

खास बात यह है कि दिनेश की मौत वाले दिन—18 जुलाई 2025—ये तीनों आरोपी दिल्ली में एक होटल में साथ स्पॉट किए गए थे। परिवार का कहना है कि यह कोई संयोग नहीं, बल्कि एक सुनियोजित योजना का हिस्सा था। “मेरा बेटा अकेला घर पर था, जबकि ये लोग दिल्ली में मौज-मस्ती कर रहे थे। क्या यह महज इत्तेफाक था?” मां के आंसुओं भरे सवाल ने मामले को और सनसनीखेज बना दिया।
मां की शिकायत: आरोपों की परतें खोलती एक चिट्ठी
दिनेश की मां की शिकायत न केवल भावुक है, बल्कि इसमें ठोस बिंदु भी हैं। उन्होंने बताया कि दिनेश हर्बल लाइफ के उत्पादों के वितरण में शामिल थे, लेकिन क्लब की अनियमितताओं—जैसे जबरन सदस्यता, ऊंची कीमतों पर बिक्री और कमीशन के नाम पर धोखा—के कारण वे तनाव में थे। रमा साहू, जो क्लब की प्रमुख हैं, और शिरीष अग्रवाल पर आरोप है कि उन्होंने दिनेश को व्यापार से बाहर करने की कोशिश की, जिससे पारिवारिक कलह बढ़ा। चंदेश्वरी साहू पर भी वैवाहिक विश्वासघात और मानसिक उत्पीड़न के आरोप लगे हैं।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, हर्बल लाइफ का यह नेटवर्क महासमुंद में तेजी से फैल रहा था। क्लबों में ‘स्वास्थ्य सेमिनार’ के नाम पर लोग लुभाए जाते थे, लेकिन पीछे छिपी सच्चाई थी मल्टी-लेवल मार्केटिंग (एमएलएम) का जाल। दिनेश जैसे कई लोग इसमें फंसकर आर्थिक नुकसान झेल चुके थे। एक पूर्व सदस्य ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “ये क्लब सेहत के नाम पर कमाई का धंधा चला रहे हैं। प्रोडक्ट महंगे हैं, और रिटर्न कम। दिनेश ने विरोध किया, तो उन्हें तोड़ने की साजिश रची गई।”
पुलिस की चुप्पी: दो महीने बाद भी एफआईआर का इंतजार
शिकायत दर्ज होने के बावजूद, सिटी कोतवाली ने अब तक किसी आरोपी के खिलाफ एफआईआर नहीं दर्ज की। न ही कोई आरोपी पूछताछ के लिए बुलाया गया। पुलिस के आधिकारिक बयान में कहा गया कि “मामला जांच के दायरे में है,” लेकिन कोई प्रगति रिपोर्ट नहीं सौंपी गई। परिवार ने आरोप लगाया कि आरोपी प्रभावशाली हैं—शिरीष अग्रवाल एक स्थापित व्यापारी हैं, जबकि रमा साहू का क्लब जिले में जाना-माना है। क्या दबाव के कारण जांच ठप है?
सवाल उठ रहे हैं:

क्या मृतक की मोबाइल कॉल डिटेल्स, व्हाट्सएप चैट्स और बैंक ट्रांजेक्शन की जांच हुई?

दिल्ली होटल के सीसीटीवी फुटेज और आरोपीयों की लोकेशन वेरिफिकेशन क्यों नहीं?
क्या हर्बल लाइफ के स्थानीय ऑपरेशंस पर कोई ऑडिट कराया जाएगा?
स्थानीय पत्रकारों के अनुसार, दिनेश की मौत की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने पोस्टमॉर्टम कर शव सौंप दिया, लेकिन गहन जांच शुरू नहीं की। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “आत्महत्या के मामलों में परिवार की शिकायत पर एक्शन लिया जाता है, लेकिन सबूतों की कमी से देरी हो रही है।” लेकिन परिवार इसे बहाना मानता है।

हर्बल लाइफ और रमा क्लब: स्वास्थ्य या धोखे का कारोबार?

हर्बल लाइफ, एक वैश्विक कंपनी, भारत में न्यूट्रिशन प्रोडक्ट्स के जरिए लाखों लोगों तक पहुंच चुकी है। महासमुंद जैसे छोटे शहरों में इसके क्लब—जैसे बिरकोनी का रमा न्यूट्रिशन क्लब—समाज सेवा का चेहरा अपनाते हैं। लेकिन इस मामले ने इनकी साख पर सवाल खड़े कर दिए। पूर्व सदस्यों के दावों के मुताबिक:
क्लब में जॉइनिंग फीस और प्रोडक्ट खरीद अनिवार्य है, जो कईयों के लिए बोझ बन जाती है।
कमीशन स्ट्रक्चर पिरामिड जैसा है, जहां ऊपरवाले ही फायदा कमाते हैं।
कुछ उत्पादों की कीमत बाजार से दोगुनी बताई जाती है, जिससे उपभोक्ता ठगे महसूस करते हैं।
रमा न्यूट्रिशन क्लब पर विशेष आरोप है कि उन्होंने क्लब को व्यक्तिगत लाभ के लिए इस्तेमाल किया। हर्बल लाइफ इंडिया ने इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की, लेकिन कंपनी की नीतियां स्पष्ट करती हैं कि वे अनैतिक प्रैक्टिसेज के खिलाफ हैं। फिर भी, स्थानीय स्तर पर नियमन की कमी ने समस्या बढ़ाई है। क्या यह क्लब वाकई स्वास्थ्य सुधारते हैं, या आर्थिक जाल बुनते हैं? दिनेश की मौत ने इस बहस को नई जान दी है।

दिनेश के छोटे भाई ने कहा, “भैया एक साधारण शिक्षक थे। इनके व्यापारिक झगड़ों ने उन्हें मार डाला। पुलिस चुप है, आरोपी खुले घूम रहे हैं।” परिवार ने कलेक्टर और एसपी से मिलने की कोशिश की, लेकिन कोई राहत नहीं। मां का दर्द छलका: “मेरा लाल चला गया, लेकिन दोषी सजा क्यों नहीं पा रहे? अगर न्याय न मिला, तो हम रायपुर तक धरना देंगे।”
शहर में चर्चा है कि क्या कानून अमीरों के लिए अलग है? स्थानीय एनजीओ और महिला संगठन मामले को उठा रहे हैं। एक सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा, “यह सिर्फ एक मौत नहीं, बल्कि एमएलएम स्कीम्स के खतरे की चेतावनी है। जागरूकता जरूरी है।” जनता की मांग है: तत्काल एफआईआर, आरोपीयों की गिरफ्तारी और स्वतंत्र जांच।
प्रशासन के सामने चुनौती: न्याय या लापरवाही?
महासमुंद एसपी ने कहा, “मामला संवेदनशील है। जल्द कार्रवाई होगी।” लेकिन वादों से आगे बढ़ना होगा। अगर जांच हुई, तो कॉल रिकॉर्ड्स, मेडिकल रिपोर्ट्स (अवसाद के लक्षण) और क्लब के फाइनेंशियल रिकॉर्ड्स खंगाले जाने चाहिए। केंद्र सरकार की एमएलएम गाइडलाइंस के तहत भी हस्तक्षेप संभव है।
यह मामला केवल दिनेश का नहीं, बल्कि हर उस परिवार का है जो धोखे के जाल में फंस सकता है। अगर दोषी बच गए, तो कानून पर भरोसा डगमगाएगा। महासमुंद प्रशासन अब फैसला ले—क्या यह फाइलों में दफन हो जाएगा, या न्याय की मिसाल बनेगा..? दिनेश की आत्मा शांति पाए, यही सबकी कामना है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button