महासमुंद में स्वास्थ्य माफिया का काला साम्राज्य ध्वस्त श्री राम केयर क्लिनिक सील, 24 घंटे में खुला – लाखों की रिश्वत, मरीजों की लाशें और फर्जीवाड़े का खौफनाक सच..!

क्लिनिक सील फिर ओपन और हुई विज्ञापनों की बौछार
रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुंद / छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के जिला कलेक्टर विनय कुमार लंगेह के निर्देश में राजस्व विभाग की टीम तहसीलदार एवं स्वास्थ्य विभाग की टीम में जिला नोडल अधिकारी छत्रपाल चंद्राकर (नर्सिंग होम एक्ट), महासमुंद विकास खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ विकास चंद्राकर , डॉ घनश्याम चंद्राकर की टीम कुम्हार पारा स्थित श्री राम केयर क्लिनिक पहुंची जिसमें मौके पर संचालक शेषनारायण गुप्ता द्वारा किसी प्रकार से कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया। जो कि,महासमुंद जिले में अब तक की सबसे बड़ी रेड ने पूरे सिस्टम को हिला दिया है। घनी बस्ती के बीच 15 साल से अवैध रूप से चल रहा श्री राम केयर क्लिनिक आखिरकार प्रशासन के हत्थे चढ़ा। संचालक शेष नारायण गुप्ता पर जानलेवा लापरवाही, ठगी, अश्लील हरकतें और रिश्वत का खेल खेलने के संगीन इल्ज़ाम लगे हैं। 29 अक्टूबर 2025 को क्लिनिक सील हुआ, लेकिन 30 अक्टूबर को ही दोबारा खुल गया। सवाल एक ही – रातों-रात लाइसेंस कैसे..? क्या ये करोड़ों की डील है..?
15 साल का अवैध साम्राज्य: बिना लाइसेंस के हजारों मरीजों की लूट..!
शेष नारायण गुप्ता उर्फ ‘नाड़ी मसीहा’ पिछले डेढ़ दशक से नर्सिंग होम एक्ट को ठेंगा दिखाकर क्लिनिक चला रहे थे। कोई रजिस्ट्रेशन नहीं, कोई क्वालिफाइड डॉक्टर नहीं, कोई वैध दस्तावेज नहीं। फिर भी गरीब बस्तियों के लोग यहां झांसे में आते रहे। मोटी फीस वसूलकर महंगी दवाएं थोपी जातीं, इलाज के नाम पर जेब काटी जाती। स्थानीय लोग बताते हैं – “ये क्लिनिक प्रशासन की नाक के नीचे फलता-फूलता रहा, क्योंकि ऊपर तक सांठ-गांठ थी।”
29 को ताला, 30 को खुला एक दिन में लाइसेंस का ‘चमत्कार’ या रिश्वत का खेल..?
29 अक्टूबर को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने छापा मारा, कोई कागज नहीं मिला, क्लिनिक सील कर ताला लगा दिया। लेकिन अगले ही दिन संचालक CMHO ऑफिस पहुंचे और उसी दिन अप्रूवल मिल गया। सूत्रों के मुताबिक जिला स्वास्थ्य अधिकारी और गुप्ता के बीच लाखों की डील हुई ऐसा संदेहास्पद प्रतीत होता है। जब क्लिनिक सीलिंग के वक्त एक भी दस्तावेज नहीं था, तो 24 घंटे में सारे कागजात कैसे जुट गए..? ये सवाल अब पूरे जिले में गूंज रहा है और तो और मजेदार बात यह भी है कि,इस मामले में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ आई नागेश्वर राव से उनका वर्षण लेने दूरभाष के माध्यम से संपर्क किया गया यहां तक उनके कार्यालय में भी पहुंच जानकारी हेतु मिलने की बात की तो उनके द्वारा किसी प्रकार से कोई रिस्पांस नहीं मिला इससे स्पष्ट होता है कि, जिला चिकित्सा अधिकारी और श्री राम केयर संचालक के बीच आपसी गठबंधन से क्लिनिक फिर से खुल गई।
मीडिया में झूठ की आंधी: विज्ञापनों से मुंह बंद करवाने की साजिश..!

सीलिंग के बाद कुछ अखबारों में खबर छपी कि गुप्ता ने चार महीने पहले आवेदन किया था और दीपावली की छुट्टी से देरी हुई। हकीकत? आवेदन सीलिंग के मात्र चार दिन पहले किया गया। जिला नोडल अधिकारी छत्रपाल चंद्राकर ने साफ कहा – “ये सरासर झूठ है।” दिवाली में एक भी विज्ञापन नहीं, लेकिन क्लिनिक खुलते ही पेज भरकर एड्स! क्या मीडिया हाउस भी इस कवर-अप के पार्टनर हैं..?
मरीजों की मौतों का खूनी खेल: ओवरडोज से गई जानें, सिर्फ लूट का धंधा..!
क्लिनिक की लापरवाही ने कई घर उजाड़ दिए। एक युवती की ओवरडोज से मौत हो गई। एक मासूम बच्चा मौत के मुंह से बाल-बाल बचा। दर्जनों मरीजों का कहना है – महीनों इलाज के बाद भी कुछ नहीं हुआ, लेकिन बाहर की 5 रुपये की दवा ने ठीक कर दिया। गुप्ता मरीजों को डराते, महंगी इंजेक्शन थोपते और पैसे ऐंठते। शिकायतकर्ता बोले – “ये इलाज नहीं, कत्ल का लाइसेंस था!”
7.5 लाख की ठगी का काला राज: खुद लुटा, लेकिन नकदी कहां से..?
शेष नारायण गुप्ता से खुद 7.5 लाख रुपये ठग लिए गए। ड्रग इंस्पेक्टर बनकर डर दिखाया गया, सिटी कोतवाली में FIR हुई, आरोपी गिरफ्तार हुआ। लेकिन गुप्ता को एक पैसा वापस नहीं मिला। सवाल ये कि एकमुश्त इतनी नकदी कहां से आई? सूत्र बताते हैं – ठग पहले भी कई बार पैसे ले चुका है। क्या उसके पास गुप्ता का कोई बड़ा राज है? या अवैध कमाई का कोई और धंधा..?
अश्लीलता का शर्मनाक इतिहास: बैडटच से CCTV तक, कुछ नहीं बदला..!
डॉ साहब के क्लिनिक में एक घटना ऐसी भी घटी जिसमें पीड़ित पक्ष युवती अपने भाई के साथ चिकित्सकीय परीक्षण हेतु आई थी जिससे कि उस युवती के साथ बेड टच जैसा घिनौना कृत्य भी डॉ साहब के द्वारा किया गया था बाद उस युवती के भाई और डॉ साहब के बीच जमकर हंगामा भी हुआ था । जिसके पश्चात डॉ साहब अपनी क्लिनिक में सीसीटीवी कैमरा लगवाए ताकी मेरी बदनामी न हो ये कोई कहा सुनी नहीं ये सच्ची घटना है जो कि,उसी वार्ड के एक विश्वसनीय सूत्र के माध्यम से जानकारी मिली। लेकिन घटनाएं नहीं रुकीं। अब फिर वही सवाल – मरीजों की सुरक्षा सिर्फ कागजी शेर थी?
धमकियों का खौफ वकील सौरभ साहू की मानहानि की धमकी..!
शिकायतकर्ता एवं सच्चाई उजागर करने वालों को मिली धमकियां। नामचीन वकील सौरभ साहू मोबाईल 9009132885 ने खुलेआम कहा – “मानहानि का केस ठोकूंगा!” लेकिन शिकायतकर्ता डटे हुए हैं – “सत्य को कोई नहीं दबा सकता।”
प्रशासन की आंखें खुलीं: पूरे जिले में अवैध क्लिनिकों पर ताबड़तोड़ एक्शन..!
15 साल तक प्रशासन सोता रहा? अब CMHO ने सभी अवैध क्लिनिकों की लिस्ट बनाने के आदेश दिए। पुलिस धोखाधड़ी, अवैध संचालन और धमकी के तहत FIR दर्ज करने की तैयारी कर रही है।
जनता जागो: फर्जी डॉक्टरों से बचो – ये सिस्टम की सबसे बड़ी नाकामी है..!
ये सिर्फ एक क्लिनिक की कहानी नहीं, पूरे स्वास्थ्य तंत्र की सड़ांध है। गरीब जनता फर्जी डॉक्टरों के जाल में फंसकर लुट रही है। अब वक्त है सतर्क होने का, सच्चाई उजागर करने का और सख्त कार्रवाई की मांग करने का।
महासमुंद की जनता अब इंतज़ार कर रही है – क्या गुप्ता जेल जाएंगे या रिश्वत का जादू फिर चलेगा..? ये केस पूरे छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य व्यवस्था को हमेशा के लिए बदल देगा..!



