महासमुंद में 19 करोड़ का धान ‘हवा’ में गायब! अधिकारियों ने बताया—’वजन में कमी’, विपक्ष ने पूछा—क्या धान उड़कर अमेरिका चला गया?

महासमुंद/रायपुर (ब्यूरो): छत्तीसगढ़ की राजनीति में ‘धान’ सिर्फ फसल नहीं, सत्ता की चाबी है। लेकिन महासमुंद जिले के धान संग्रहण केंद्रों (Storage Centers) से आई एक खबर ने शासन से लेकर प्रशासन तक हड़कंप मचा दिया है। रिकॉर्ड के अनुसार, संग्रहण केंद्रों से लगभग 19 करोड़ रुपये मूल्य का धान गायब पाया गया है। अब सवाल यह है कि क्या यह महज एक ‘तकनीकी कमी’ है या धान के नाम पर करोड़ों का ‘वारा-न्याय’ कर दिया गया है।
‘शॉर्टेज’ या ‘सिस्टमैटिक चोरी’? (Original Angle) महासमुंद के राइस मिलर्स और संग्रहण केंद्रों के बीच का तालमेल हमेशा चर्चा में रहता है। इस बार का ‘ओरिजनल एंगल’ यह है कि गायब हुए धान की मात्रा इतनी अधिक है कि इसे केवल ‘सूखत’ (Drying loss) नहीं माना जा सकता। जानकारों का कहना है कि धान को कागजों में मिलर्स को जारी (Issue) दिखा दिया गया, जबकि हकीकत में वह धान केंद्रों से कभी निकला ही नहीं, या फिर उसे खुले बाजार में औने-पौने दाम पर बेच दिया गया।
अधिकारियों का ‘हैरान’ करने वाला तर्क (Reporting Feel): जब इस भारी कमी पर कलेक्टर और खाद्य विभाग के अधिकारियों से सवाल किया गया, तो उनका जवाब था— “लंबे समय तक भंडारण और नमी के कारण वजन में कमी (Weight Loss) आई है।” लेकिन 19 करोड़ रुपये की ‘कमी’ का मतलब है हजारों क्विंटल धान का गायब होना। क्या महासमुंद की गर्मी इतनी ज्यादा है कि करोड़ों का धान ‘वाष्प’ (Vapor) बनकर उड़ गया? यह तर्क अब सोशल मीडिया पर मजाक का विषय बन रहा है।
सियासी उबाल और ग्राउंड रिपोर्ट (Human Touch): विपक्ष ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए महासमुंद में ‘चक्काजाम’ की चेतावनी दी है। पूर्व खाद्य मंत्री ने बयान दिया है कि “यह गरीब किसानों के पसीने की कमाई पर डाका है, इसकी जांच CBI या हाईकोर्ट के जज से होनी चाहिए।” महासमुंद के एक स्थानीय किसान रामलाल साहू ने ‘बेबाक बयान’ से अपना दर्द साझा करते हुए कहा— “साहब, हम एक-एक दाना तौलकर देते हैं, वहां रिजेक्शन (Rejection) के नाम पर हमारा धान काट लिया जाता है, और अब कह रहे हैं कि सरकार का 19 करोड़ का धान गायब हो गया? यह सब अधिकारियों की मिलीभगत है।”



