छत्तीसगढ़ में महासमुंद का जलवा: धान खरीदी में तोड़े सारे रिकॉर्ड, राजधानी भी रह गई पीछे!

महासमुंद | विशेष रिपोर्ट छत्तीसगढ़ के कृषि प्रधान ढांचे में महासमुंद जिले ने एक बार फिर अपनी धाक जमाई है। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के अंतर्गत समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के महाअभियान में महासमुंद ने पूरे प्रदेश में सर्वाधिक धान की खरीदी कर प्रथम स्थान हासिल किया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जिले में कुल 10,00,187.16 मीट्रिक टन धान की खरीदी सफलतापूर्वक संपन्न हुई। यह उपलब्धि न केवल जिले के किसानों की मेहनत का परिणाम है, बल्कि जिला प्रशासन के उस सुव्यवस्थित प्रबंधन की भी जीत है, जिसने 182 धान उपार्जन केंद्रों पर खरीदी की प्रक्रिया को पारदर्शी और सुगम बनाए रखा। कलेक्टर विनय लंगेह के कुशल मार्गदर्शन में इस वर्ष शासन द्वारा निर्धारित 11,93,570 मीट्रिक टन के लक्ष्य को हासिल करने के लिए हर संभव प्रयास किए गए, जिसके फलस्वरूप जिला इस आंकड़े के बेहद करीब पहुंचने में सफल रहा।
धान खरीदी की इस प्रक्रिया में किसानों की भागीदारी ने नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। जिले में कुल 1,60,118 किसान पंजीकृत थे, जिनमें से 1,48,418 किसानों ने अपना धान विक्रय किया। यह कुल पंजीयन का 92.69 प्रतिशत है, जो कि राज्य के औसत भागीदारी प्रतिशत (91.22%) से कहीं अधिक है। यह आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि महासमुंद के किसानों का भरोसा सरकारी व्यवस्था और प्रशासन पर अटूट रहा है। खरीदी के पश्चात 1,09,676 किसानों द्वारा 9,883.24 हेक्टेयर रकबा समर्पित करना भी इस भरोसे की पुष्टि करता है। हालांकि, यदि पिछले वित्तीय वर्ष (2024-25) से तुलना की जाए, तो इस बार खरीदी में 9.43 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है—पिछले वर्ष यह आंकड़ा 11,04,273.24 मीट्रिक टन था—परंतु इसके बावजूद महासमुंद ने अपनी शीर्ष स्थिति को बरकरार रखा है।
प्रशासन की सबसे बड़ी परीक्षा अवैध धान के परिवहन और भंडारण को रोकने में थी, जिसमें महासमुंद पुलिस और राजस्व विभाग ने अभूतपूर्व कड़ाई दिखाई। कलेक्टर के स्पष्ट निर्देशों के बाद, अंतरराज्यीय सीमाओं पर 16 विशेष जांच चौकियां स्थापित की गई थीं, जहां से बाहरी धान के प्रवेश को पूरी तरह प्रतिबंधित किया गया। एसडीएम और तहसीलदारों के नेतृत्व में गठित उड़नदस्तों ने लगातार छापेमारी की, जिसके परिणामस्वरूप अवैध परिवहन और अवैध स्टॉकिंग के कुल 399 प्रकरण दर्ज किए गए। इस सख्त निगरानी के दौरान 1,69,862 क्विंटल धान जब्त किया गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में कई गुना अधिक है (पिछले वर्ष केवल 184 प्रकरणों में 12,828 क्विंटल जब्ती हुई थी)। अवैध धान पर की गई इस कठोर कार्यवाही के मामले में भी महासमुंद जिला पूरे छत्तीसगढ़ में नंबर वन पर रहा।
कुल मिलाकर, महासमुंद जिले में धान खरीदी का यह सत्र अनुशासन, पारदर्शिता और त्वरित क्रियान्वयन की एक मिसाल बनकर उभरा है। धान उपार्जन केंद्रों पर किसानों को टोकन तुंहर हाथ ऐप और भौतिक सुविधाओं के जरिए जो राहत प्रदान की गई, उसने पूरी प्रक्रिया को सुगम बनाया। समय पर भुगतान और बेहतर मिलिंग प्रबंधन ने इस सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह समग्र परिणाम जिले के प्रशासनिक अधिकारियों, खाद्य विभाग, मंडी बोर्ड और किसानों के बीच के मजबूत तालमेल का प्रतीक है, जो भविष्य में छत्तीसगढ़ के अन्य जिलों के लिए एक ‘बेंचमार्क’ (आदर्श मानक) के रूप में कार्य करेगा।



