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"जाने क्या होगा रामा रे" हर्बल लाईफ "रमा न्यूट्रिशन क्लब" का गोरख धंधा नेशनल हाईवे बिरकोनी में संचालित

ग्रामीण क्षेत्र के लोगों पर इस क्लब का सीधा प्रहार स्वास्थ के ठेकेदारों का व्यापार चकाचौंध से भ्रमित हो लोग अपनी ही स्वास्थ्य को बिगाड़ रहे है।

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुंद / आज की तेज रफ्तार जिंदगी में हमारा खान पान मानो पूरी तरह से बिगड़ गया हो और जैसे- जैसे हम जिंदगी की रफ्तार दे रहे है , वैसे वैसे हमारा शरीर भी रफ्तार से बेडौल अनफिट होते जा रहा है। आज हम लोग जो भी आहार का सेवन कर रहे है। वे संपूर्ण आहार टोटल “प्रेस्टीसाइट” केमिकल युक्त है। बता दे कि, आज की जो भी जमीन से जुड़े उत्पादन हो रहे है चाहे अनाज हो, सब्जी भाजी हो, फल फ्रूट हो, उसमें इतना ज्यादा केमिकल का प्रयोग किया जा रहा है। जो हमारे शरीर में स्लोपॉइजन की तरह धीमी धीमी हमारे शरीर को खोखला करते जा रहा है। धीरे धीरे ही सही पर केमिकल अपना कार्य पूर्ण ईमानदारी से कर रही है।

पूर्ववर्ती जिंदगी में जो स्वाद हमे खाने में मिलता था आज बेस्वाद हो गई।
समय से पहले किसी चीजों को पका कर खाना हमारे शरीर के लिए हानिकारक है।

आज से 40 साल पहले की जिंदगी में जो स्वाद हमको खाना खाने में मिला करता था आज नहीं मिल रहा है। आज स्वाद पाने के चक्कर में कई प्रकार के हाइजीनिक मसाले का उपयोग कर सेवन कर रहे जिससे की हमारी भूख तो मिट रही है किंतु मन को तृप्ति नहीं मिल पा रही है। समय से पहले हमारी बॉडी में कई प्रकार की बीमारियों का वास हो रहा है।
जिससे कि,हमारी बॉडी पहले की अपेक्षा बेडौल हो रहे है। समय से पहले हमारा पेट निकलना , चेहरे की चमक खत्म होना,पाचन क्रिया का बिगड़ना, कम उम्र में उम्रदराज दिखना ऐसी अनगिनत समस्याओं की पोटरी हमारे जीवन का हिस्सा बन चुकी है। आप मानो या न मानो इसी प्रकार की समस्याओं को मद्देनजर रखते हुए देश विदेश की निजी कंपनियां इसको अपॉर्चुनिटी यानी अवसर के रूप स्वीकार कर आम जनता को थाली परोसने का कार्य का विस्तार से कर रही है। जिसका ताजा तरीन उदाहरण बहुत सारे देशों में जिस कंपनी में बैन लगी है वहीं कंपनी आज हमारे छत्तीसगढ़ के भोले भाले लोगों को अच्छी सेहत के नाम से लुट मचा कर रखी हुई । ये केवल एक उदाहरण है जिला महासमुंद के नेशनल हाईवे ग्राम बिरकोनी में संचालित मेन रोड पर स्थित तथाकथित “रमा न्यूट्रिशन क्लब” आजकल चर्चा का बड़ा विषय बन गया है। जहां तक दावा किया जाता है, यह क्लब लोगों को स्वस्थ जीवनशैली, पोषण और फिटनेस की राह दिखाता है। मगर सच्चाई बिल्कुल इसके उलट है। यह कथित क्लब स्वास्थ्य सुधार के नाम पर न केवल झूठे सपने दिखा रहा है, बल्कि बिना किसी लाइसेंस और चिकित्सकीय मान्यता के लोगों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ कर रहा है।

सपनों का झांसा, सेहत पर हमला!

“Recharge Yourself”, “Feel the Power of Good Nutrition” और “पाचन क्रिया सुधारें”

जैसे आकर्षक स्लोगन लगाकर मासूम ग्राहकों को लुभाया जाता है। महिलाएँ, बच्चे और बुजुर्ग – हर किसी के लिए किसी न किसी तरह का पैकेज क्लब द्वारा तैयार किया गया है। लेकिन परदे के पीछे छिपा है खतरनाक सच – न तो कोई योग्य चिकित्सक मौजूद है, न ही उत्पादों पर कोई सरकारी प्रमाणक । ड्रग लाइसेंस तक हासिल किए बिना पाउडर, शेक, टैबलेट और सप्लिमेंट की धड़ल्ले से बिक्री की जा रही है।

इंडस्ट्रियल एरिया बिरकोनी में बीमारियों की फैक्ट्री बना हेल्थ क्लब!

इस क्लब से जुड़े कई लोगों ने शिकायत की है कि, सप्लिमेंट के नाम पर बेचे गए पाउडर और ड्रिंक लेने के बाद उनकी पाचन शक्ति बिगड़ गई, त्वचा पर दाने निकल आए, सिरदर्द और चक्कर आने जैसी समस्याएँ होने लगीं। किसी को गैस्ट्रिक समस्या बढ़ी तो किसी की जोड़ों की तकलीफ दोगुनी हो गई। जो लोग रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने की उम्मीद में यहाँ आए थे, वे एलर्जी और आंतरिक कमजोरी के शिकार हो गए।

नाटकीय दावे, खोखले वादे!

महासमुंद के बिरकोनी ग्राम में रमा न्यूट्रिशन क्लब बड़े-बड़े पोस्टर लगाकर और “शिरीष & नेहा अग्रवाल” नामक कोच के जरिए जागरूकता फैलाने का खेल खेला जा रहा है। यह खेल यही नहीं यह बहुत बड़ा स्कैम है ग्रामीण क्षेत्र के भोले भाले लोगों को भ्रमित करने का काम कर रहा है।

“पाचन क्रिया सुधारें” कहकर हाजमे की दवाइयाँ बेची गईं।

•क्या“महिलाओं का पोषण” कहकर कैल्शियम और हार्मोन संबंधी पाउडर ठोंसे गए..?

•क्या “बच्चों का पोषण” के नाम पर नकली प्रोटीन शेक दिया गया..?

•क्या“जोड़ों का स्वास्थ्य” कहकर दर्द निवारक जड़ी-बूटियाँ ठूस दी गईं..?

•क्या इन सभी दावों का कोई वैज्ञानिक आधार है अगर है तो जिम्मेदारी कौन लेगा..?

डॉक्टर की राय: “यह क्लब स्वास्थ्य के लिए बन रहा खतरा”!

स्थानीय डॉक्टरों का कहना है कि, ऐसे क्लब केवल मनोवैज्ञानिक तरीके से ग्राहकों को फँसाते हैं। सस्ते पाउडर और सप्लिमेंट महंगे दामों पर बेच दिए जाते हैं और अगर नुकसान हो भी जाए तो इसकी जिम्मेदारी लेने वाला कोई नहीं होता।
विशेषज्ञों का साफ कहना है – बिना लाइसेंस न्यूट्रिशन प्रोडक्ट बेचना कानूनन अपराध है।

छिप-छिप कर खुलेआम जनता को भावनाओं के साथ खिलवाड़

जाँच में सामने आया कि, यह क्लब विद्या वस्त्रालय के पास, चक्रधारी बाईंडिंग दुकान के ऊपर किराए की जगह लेकर चलता है। यहाँ आने वाले लोगों को आकर्षक बातें बताकर क्लब से जोड़ लिया जाता है। फिर हर सदस्य को और नए लोग लाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। यह एक तरह की नेटवर्क मार्केटिंग की जालसाजी भी हो सकती है।

नाटकीय घटनाक्रम!

एक सूत्र ने हमसे साझा किया है कि, उस महिला ने शिकायत की कि बच्चों की पोषण-दवा लेने के बाद उसके बेटे को उल्टियाँ शुरू हो गईं। मैने फिर उस प्रोडक्ट को डाक्टर को बताया क्या करोगी किसको शिकायत करोगी किसी का कुछ नहीं बिगाड़ सकती हो।

वही एक बुजुर्ग ने दावा किया कि, जोड़ सप्लीमेंट खाने के बाद उनके घुटने का दर्द कम होने के बजाय इतना बढ़ गया कि, उन्हें अस्पताल में भर्ती होना पड़ा।

युवाओं ने बताया कि, जल्दी फिटनेस पाने की चाह में उन्होंने जो प्रोटीन शेक खरीदा, उसने उनका लिवर कमजोर कर दिया।

प्रशासन से अपील!

यह पूरा मामला सीधे-सीधे जन-स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ है। इस तरह के नकली पोषण क्लब अगर रोके नहीं गए तो यह कई लोगों की जिंदगी को खतरे में डाल सकते हैं।
सामाजिक संगठनों और जागरूक नागरिकों ने पहले ही प्रशासन से माँग की है कि –

•क्लब की तुरंत जाँच हो।

•बिना लाइसेंस उत्पाद बेचने वालों पर कड़ी कार्रवाई हो।

•पीड़ित लोगों को न्याय दिलाया जाए।

पोषण की आड़ में जहर!

“रमा न्यूट्रिशन क्लब” की परतें जब उठीं तो सामने आया कि जहाँ लोगों को सेहत और सशक्तिकरण का सपना दिखाया जा रहा है, वहाँ असलियत में बीमारी और धोखा परोसा जा रहा है।
अगर समय रहते इन पर लगाम नहीं लगी, तो यह छोटा सा क्लब एक बड़े पैमाने की ठगी और स्वास्थ्य संकट का कारण बन सकता है।

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