छत्तीसगढ़ के पत्रकारिता जगत में गहरा शोक: वरिष्ठ पत्रकार राजेश शर्मा ने तोड़ा दम, निर्भीक लेखनी की मिसाल हमेशा के लिए खामोश

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुंद / रायपुर छत्तीसगढ़ की पत्रकारिता को एक बड़ा आघात लगा है। ‘राष्ट्रीय अभियोजक महासमुंद’ साप्ताहिक के प्रधान संपादक और वरिष्ठ पत्रकार राजेश शर्मा का निधन हो गया है। उन्होंने रायपुर के प्रतिष्ठित AIIMS अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर फैलते ही

पूरे राज्य के पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आमजन में शोक की लहर दौड़ गई है।
राजेश शर्मा जी की निर्भीक और निष्पक्ष पत्रकारिता ने उन्हें क्षेत्र में एक मजबूत पहचान दिलाई थी, जो अब हमेशा के लिए चुप हो गई है।
पिछले करीब 10 दिनों से राजेश शर्मा गंभीर रूप से बीमार चल रहे थे।
उनकी हालत बिगड़ने पर उन्हें AIIMS रायपुर के आईसीयू (वार्ड 2D2) में भर्ती कराया गया था। चिकित्सकों और विशेषज्ञों की पूरी टीम ने उनकी जान बचाने की भरपूर कोशिश की, लेकिन दुर्भाग्यवश उनकी स्थिति में कोई सुधार नहीं हो सका। अंततः उन्होंने जीवन की अंतिम जंग हार ली।
राजेश शर्मा जी अपनी बेबाक लेखनी, स्पष्ट विचारधारा और सच्चाई के प्रति अटूट प्रतिबद्धता के लिए जाने जाते थे। वे कभी भी किसी दबाव,

राजनीतिक प्रभाव या व्यक्तिगत लाभ के आगे नहीं झुके।
सामाजिक अन्याय, प्रशासनिक भ्रष्टाचार, जनहित के मुद्दों और पारदर्शिता जैसे विषयों पर उनकी कलम हमेशा तीखी और प्रभावी रही। उनके संपादकीय और लेख न केवल आम पाठकों के बीच लोकप्रिय थे, बल्कि प्रशासनिक अधिकारियों और नीति-निर्माताओं के बीच भी गंभीरता से पढ़े और चर्चा में रहते थे। उनकी पत्रकारिता का मूल मंत्र था – सच का साथ, झूठ का विरोध।
उनका पत्रकारिता सफर काफी लंबा और समृद्ध रहा।
उन्होंने नई दुनिया, अमर उजाला जैसे बड़े राष्ट्रीय समाचार पत्रों में अपनी सेवाएं दीं। मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र के कई स्थानीय और क्षेत्रीय अखबारों से भी जुड़े रहे। बाद के वर्षों में महासमुंद में ‘राष्ट्रीय अभियोजक’ साप्ताहिक के माध्यम से उन्होंने स्थानीय मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर की सोच से जोड़ने का सराहनीय प्रयास किया। उनका फोकस हमेशा ग्रामीण छत्तीसगढ़ की आवाज को मजबूत करने पर रहा।
पारिवारिक जीवन में राजेश शर्मा जी अपने पीछे दो बेटियां और एक बेटा छोड़ गए हैं। उनकी बड़ी बेटी नीलम शर्मा रायपुर जिले के आरंग विकासखंड में गुल्लू स्थित शिक्षा विभाग में शिक्षिका के पद पर कार्यरत हैं। बेटा ब्रजेश शर्मा एक सरकारी विभाग में कर्मचारी हैं, जबकि छोटी बेटी प्रतिभा अभी पढ़ाई कर रही हैं। उनके छोटे भाई नरेंद्र शर्मा भी परिवार का अभिन्न हिस्सा हैं।
साहित्य से भी गहरा लगाव था राजेश शर्मा जी का।
वे उपन्यासों के शौकीन पाठक थे और साहित्यिक चर्चाओं में सक्रिय भागीदारी करते थे।
यह संयोग भी खास है कि उनके बेटे ब्रजेश शर्मा खुद उपन्यास लेखन से जुड़े हैं, जो पिता के साहित्यिक संस्कारों को आगे बढ़ा रहे हैं।
राजेश शर्मा जी भले ही अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी ईमानदार, निडर और जन-केंद्रित पत्रकारिता की विरासत हमेशा जीवित रहेगी।



