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छत्तीसगढ़ धान खरीदी महासंकट: हड़ताल की ज्वाला भड़की, 1500+ कर्मचारी सड़कों पर..?

12 नवंबर से पूर्ण तालाबंदी, 25 लाख किसान तबाह, साय सरकार को 72 घंटे का अंतिम अल्टीमेटम..!!

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
रायपुर / महासमुंद (8 नवंबर 2025): छत्तीसगढ़ में 15 नवंबर से शुरू होने वाले धान खरीदी मेगा सीजन की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है, लेकिन राज्य सरकार के सामने अब तक का सबसे भयंकर संकट खड़ा हो गया है! सहकारी समिति कर्मचारी महासंघ की रायपुर संभागीय हड़ताल पांचवें दिन भी आग की तरह धधक रही है। रायपुर, गरियाबंद, धमतरी, बलौदाबाजार और महासमुंद – इन पांच जिलों की 500+ समितियां पूरी तरह ठप, ताले लटके, सन्नाटा पसरा! 1500 से ज्यादा कर्मचारी सड़कों पर डटे, नारे गूंज रहे, धान रजिस्ट्रेशन-टोकन वितरण सब बंद! अगर सरकार नहीं झुकी तो 15 नवंबर का ‘धान खरीदी महोत्सव’ कब्रिस्तान बन जाएगा – पूरा सीजन बर्बाद, किसान सड़कों पर!

सुखत का कहर: समितियां कंगाल, कर्मचारी विद्रोह पर उतरे!

हड़ताल की जड़ में ‘सुखत’ का वह पुराना भूत, जो हर साल समितियों को निगल जाता है! नियम कहता है – 17% नमी वाला धान खरीदो, लेकिन गोदाम पहुंचते-पहुंचते परिवहन की लेटलतीफी और प्राकृतिक सुखाव से नमी 10-12% तक गिर जाती है। यह पूरा घाटा – करोड़ों रुपये – समितियों और कर्मचारियों के सिर! पिछले साल सैकड़ों समितियां डूब गईं, विश्वसनीयता चौपट, कर्मचारी वेतन से हाथ धो बैठे!

प्रदेश अध्यक्ष नरेंद्र कुमार साहू ने गरजते हुए कहा:

“2008 से हम चीख रहे हैं, हर बार झूठे आश्वासन! इस बार सुखत भत्ते का स्थायी कानून, शून्य सुखत वाली समितियों को लाखों का इनाम और 72 घंटे में धान उठाव अनिवार्य – नहीं तो 15 नवंबर का मेगा इवेंट फ्लॉप शो, सरकार की थू-थू!”

पूर्व भूपेश सरकार ने दी थी 250 करोड़ की ऑक्सीजन, साय सरकार बेहोश!

कोरोना काल में भूपेश बघेल सरकार ने समितियों को बचाने के लिए 250 करोड़ रुपये की सुखत राहत दी – वह जीवनरेखा बनी! अब विष्णुदेव साय सरकार से यही मांग, लेकिन मुख्यमंत्री से कृषि मंत्री, सहकारिता विभाग तक – सब मौन, कोई जवाब नहीं!

संघ के योद्धा नेता एक स्वर में धमकाया

“मध्य प्रदेश की तर्ज पर हर समिति को सालाना 3 लाख रुपये प्रबंधकीय अनुदान दो, वरना 2058 समितियां बंद, 25 लाख किसान सड़कों पर – आग लग जाएगी!”
– जयप्रकाश साहू, कौशल साहू, भेखराम यादव, गुमान साहू, मनीष चंद्राकर, मनोज भारद्वाज, गोपाल साहू, माखन सिन्हा

चार सूत्रीय मांगें न्याय की पुकार या विद्रोह की हुंकार..?

1. सुखत भत्ते का स्थायी कानूनी प्रावधान + शून्य सुखत पर लाखों का प्रोत्साहन

2. 72 घंटे में अनिवार्य धान उठाव – एक मिनट देरी पर जुर्माना!

3. कंप्यूटर ऑपरेटरों का तत्काल नियमितीकरण – कोई बहाना नहीं!

4. आउटसोर्सिंग पर पूर्ण प्रतिबंध – सरकारी नौकरी सरकारी कर्मचारियों को!

कंप्यूटर ऑपरेटरों का साथ खरीदी पूरी तरह लकवाग्रस्त..!

धान खरीदी कंप्यूटर ऑपरेटर संघ ने भी हड़ताल में कंधे से कंधा जोड़ा! उनके बिना एक रजिस्ट्रेशन, एक टोकन, एक बारदाना आवंटन नामुमकिन! दोनों संघों की steel-like एकजुटता से किसान त्राहिमाम – लंबी कतारें, लेकिन दरवाजे पर ताले!

किसान चीख रहे: “धान सड़ रहा, हम बर्बाद..!”

आंदोलन का वॉर रोडमैप अब पूरे प्रदेश में जंग…!

11 नवंबर तक: रायपुर संभाग में संपूर्ण तालाबंदी – एक दाना नहीं छुएंगे!
12 नवंबर से: पूरे छत्तीसगढ़ में अनिश्चितकालीन हड़ताल – कैबिनेट फैसला तक पूर्ण बंद, धान खरीदी शून्य!

प्रदेश अध्यक्ष नरेंद्र साहू का अंतिम वॉर क्राई

“यह कर्मचारियों की नहीं, 25 लाख किसानों की जंग है! सरकार वार्ता करे, समाधान निकाले – वरना धान खरीदी का पूरा सीजन जलकर राख! जिम्मेदार सिर्फ विष्णुदेव साय सरकार – इतिहास गवाह रहेगा!”
छत्तीसगढ़ की सड़कें लाल हैं, समितियां सूनी, किसान बेबस और गुस्से में..!

क्या साय सरकार झुकेगी या 15 नवंबर का मेगा इवेंट धरने की भेंट चढ़ेगा..?
अगले 72 घंटे – समाधान या संपूर्ण विनाश!
टिक-टिक… समय खत्म हो रहा है.!

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